Class 10 Hindi Notes Chapter 10 (प्रेमचंद: बड़े भाई साहब) – Sparsh Book

नमस्ते विद्यार्थियों।
चलिए, आज हम दसवीं कक्षा की 'स्पर्श' पाठ्यपुस्तक के दसवें पाठ, प्रेमचंद जी द्वारा रचित 'बड़े भाई साहब' का गहन अध्ययन करेंगे। यह पाठ सरकारी परीक्षाओं की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें चरित्र-चित्रण, तत्कालीन शिक्षा व्यवस्था पर व्यंग्य और मानवीय संबंधों का सुंदर चित्रण है। परीक्षा के लिए इसके मुख्य बिंदुओं को समझना आवश्यक है।
पाठ: बड़े भाई साहब (लेखक: प्रेमचंद)
लेखक परिचय:
- नाम: मुंशी प्रेमचंद (वास्तविक नाम: धनपत राय श्रीवास्तव)
- जन्म: 31 जुलाई 1880, लमही गाँव, वाराणसी (उत्तर प्रदेश)
- मृत्यु: 8 अक्टूबर 1936
- प्रमुख रचनाएँ: गोदान, गबन, कर्मभूमि, रंगभूमि, निर्मला, सेवासदन (उपन्यास); मानसरोवर (आठ भागों में कहानी संग्रह), नमक का दारोगा, पूस की रात, कफ़न (कहानियाँ) आदि।
- साहित्यिक विशेषताएँ: यथार्थवादी चित्रण, सामाजिक समस्याओं का अंकन, किसानों और शोषितों की आवाज, सरल और मुहावरेदार भाषा। 'उपन्यास सम्राट' और 'कहानी सम्राट' के नाम से प्रसिद्ध।
पाठ का सार:
यह कहानी दो भाइयों - बड़े भाई साहब और छोटे भाई (स्वयं लेखक) - के बीच के संबंधों पर आधारित है। बड़े भाई साहब उम्र में छोटे भाई से पाँच साल बड़े हैं, लेकिन पढ़ाई में केवल तीन कक्षा आगे हैं। वे अत्यंत परिश्रमी हैं, दिन-रात किताबों में खोए रहते हैं, लेकिन फिर भी परीक्षा में सफल नहीं हो पाते या कठिनाई से पास होते हैं। इसके विपरीत, छोटा भाई स्वभाव से चंचल है, उसका मन पढ़ाई में कम और खेल-कूद, कनकौए उड़ाने में ज़्यादा लगता है। वह बड़े भाई के डर से थोड़ा-बहुत पढ़ लेता है और हर बार कक्षा में प्रथम आता है।
कहानी में तीन बार दोनों भाइयों के परीक्षा परिणाम का ज़िक्र आता है। हर बार छोटा भाई अच्छे अंकों से पास होता है और बड़ा भाई या तो फेल हो जाता है या जैसे-तैसे पास होता है। हर परिणाम के बाद बड़े भाई साहब छोटे भाई को डांटते हैं, उसे पढ़ाई के महत्व, अपने परिश्रम और छोटे भाई की लापरवाही पर लंबा-चौड़ा भाषण देते हैं। वे उसे उदाहरणों और तर्कों से समझाने की कोशिश करते हैं कि केवल किताबी ज्ञान ही सब कुछ नहीं होता, अनुभव और बड़ों का मार्गदर्शन भी ज़रूरी है। वे अपनी असफलता को छिपाने और अपने बड़प्पन को बनाए रखने के लिए अनुभव और उम्र के महत्व पर ज़ोर देते हैं।
छोटा भाई डांट सुनकर कुछ समय के लिए सुधरने का संकल्प लेता है, टाइम-टेबल बनाता है, लेकिन जल्द ही खेल-कूद उसे फिर खींच लेता है। धीरे-धीरे उसके मन से बड़े भाई का डर कम होने लगता है, क्योंकि वह देखता है कि कम पढ़कर भी वह पास हो रहा है और भाई साहब इतना पढ़कर भी पीछे रह जाते हैं।
कहानी के अंत में, जब छोटा भाई एक कनकौआ लूटने के लिए दौड़ रहा होता है, तो बड़े भाई साहब उसे पकड़ लेते हैं। वे उसे फिर डांटते हैं, लेकिन इस बार उनकी डांट में अनुभव का सार होता है। वे समझाते हैं कि भले ही छोटा भाई पढ़ाई में उनसे आगे निकल गया है, लेकिन जीवन के अनुभव और समझ में वे (बड़े भाई) उससे कहीं ज़्यादा बड़े हैं। वे उसे सही-गलत की पहचान कराने और उसकी देखभाल करने का अपना अधिकार और कर्तव्य बताते हैं। इस अंतिम भाषण का छोटे भाई पर गहरा असर होता है। उसे बड़े भाई साहब की महानता और उनके अनुभवजन्य ज्ञान का अहसास होता है और वह उनके प्रति श्रद्धा से नतमस्तक हो जाता है।
मुख्य पात्र:
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बड़े भाई साहब:
- स्वभाव: परिश्रमी, अध्ययनशील, सिद्धांतवादी, गंभीर, कर्तव्यपरायण, वाकपटु (भाषण देने में माहिर)।
- समस्या: रटंत विद्या पर ज़ोर, परीक्षा प्रणाली के शिकार, आत्मविश्वास की कमी, उम्र और अनुभव को ज़्यादा महत्व देना, छोटे भाई की देखभाल का बोझ।
- विशेषता: छोटे भाई के प्रति गहरा स्नेह और ज़िम्मेदारी का भाव, भले ही डांट-फटकार का तरीका अपनाते हों।
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छोटा भाई (लेखक):
- स्वभाव: चंचल, खिलाड़ी प्रवृत्ति, बुद्धिमान (कम मेहनत में सफल), कल्पनाशील, आज्ञाकारी (भाई के डर से), स्वतंत्रचेता।
- विशेषता: बड़े भाई का आदर करता है, उनकी डांट का उस पर असर होता है, अंत में उनके अनुभव और बड़प्पन को स्वीकार करता है।
पाठ का मूल भाव/संदेश:
- तत्कालीन शिक्षा प्रणाली पर व्यंग्य: कहानी रटंत विद्या और परीक्षा केंद्रित शिक्षा व्यवस्था की निरर्थकता पर कटाक्ष करती है। बड़े भाई साहब का परिश्रम व्यर्थ जाता है क्योंकि वे समझने के बजाय रटने पर ज़ोर देते हैं।
- किताबी ज्ञान बनाम अनुभवजन्य ज्ञान: प्रेमचंद ने बड़े भाई साहब के माध्यम से यह दर्शाया है कि जीवन की समझ और सही-गलत का विवेक केवल किताबी ज्ञान से नहीं आता, बल्कि अनुभव से आता है। उम्र और अनुभव का अपना महत्व है।
- बाल मनोविज्ञान का चित्रण: छोटे भाई की खेल-कूद में रुचि, डांट का असर और फिर भूल जाना, स्वतंत्रता की चाह - यह सब बाल मन का स्वाभाविक चित्रण है।
- कर्तव्य बोध और पारिवारिक संबंध: बड़े भाई का अपने छोटे भाई के प्रति ज़िम्मेदारी का भाव और दोनों के बीच का खट्टा-मीठा रिश्ता कहानी का एक महत्वपूर्ण पहलू है।
- आयु और पद का महत्व: बड़े भाई साहब बार-बार अपनी उम्र और दर्जे का हवाला देकर छोटे भाई पर अपना अधिकार जताते हैं और उसे अनुशासन में रखने का प्रयास करते हैं।
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बिंदु:
- दोनों भाइयों का चरित्र-चित्रण (विशेषताएँ, कमजोरियाँ)।
- बड़े भाई साहब के भाषणों के मुख्य अंश और उनका उद्देश्य।
- कहानी द्वारा शिक्षा प्रणाली पर किया गया व्यंग्य।
- अनुभव और किताबी ज्ञान के बीच का अंतर।
- कहानी का अंत और छोटे भाई के विचारों में परिवर्तन।
- प्रेमचंद की भाषा-शैली (सरल, सहज, मुहावरेदार, व्यंग्यात्मक)।
कुछ महत्वपूर्ण मुहावरे/वाक्यांश:
- सिर पर नंगी तलवार लटकना (हमेशा खतरा महसूस होना)
- आड़े हाथों लेना (कठोरता से व्यवहार करना, डांटना)
- घाव पर नमक छिड़कना (दुखी को और दुखी करना)
- ज़मीन पर पाँव न रखना (बहुत खुश या अभिमानी होना)
- दाँतों पसीना आना (बहुत मेहनत लगना)
- अंधे के हाथ बटेर लगना (अयोग्य को कोई महत्वपूर्ण वस्तु मिलना)
यह नोट्स आपको पाठ को गहराई से समझने और परीक्षा के प्रश्नों का प्रभावी ढंग से उत्तर देने में मदद करेंगे। पात्रों के संवादों और उनके पीछे छिपे अर्थ पर विशेष ध्यान दें।
अभ्यास हेतु बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs):
-
'बड़े भाई साहब' कहानी के लेखक कौन हैं?
(क) यशपाल
(ख) प्रेमचंद
(ग) हजारी प्रसाद द्विवेदी
(घ) महादेवी वर्मा -
बड़े भाई साहब छोटे भाई से उम्र में कितने साल बड़े थे?
(क) तीन साल
(ख) चार साल
(ग) पाँच साल
(घ) छः साल -
बड़े भाई साहब का स्वभाव कैसा था?
(क) चंचल और खिलाड़ी
(ख) लापरवाह और मस्तमौला
(ग) अध्ययनशील और गंभीर
(घ) डरपोक और संकोची -
छोटा भाई पढ़ाई में ज़्यादा ध्यान क्यों नहीं देता था?
(क) उसे पढ़ाई समझ नहीं आती थी
(ख) उसे खेल-कूद में अधिक रुचि थी
(ग) बड़े भाई उसे पढ़ने नहीं देते थे
(घ) उसके पास किताबें नहीं थीं -
बड़े भाई साहब बार-बार फेल क्यों हो जाते थे?
(क) वे पढ़ाई बिल्कुल नहीं करते थे
(ख) वे केवल खेल-कूद में लगे रहते थे
(ग) वे रटंत विद्या पर ज़ोर देते थे और विषय को समझ नहीं पाते थे
(घ) छोटा भाई उन्हें पढ़ने नहीं देता था -
हर बार परीक्षा परिणाम के बाद बड़े भाई साहब क्या करते थे?
(क) छोटे भाई की प्रशंसा करते थे
(ख) छोटे भाई को मिठाई खिलाते थे
(ग) छोटे भाई को डांटते और उपदेश देते थे
(घ) स्वयं पढ़ाई छोड़ देते थे -
कहानी के अनुसार, जीवन की समझ कैसे बेहतर होती है?
(क) केवल किताबी ज्ञान से
(ख) खेल-कूद से
(ग) उम्र और अनुभव से
(घ) पैसे कमाने से -
'अंधे के हाथ बटेर लगना' मुहावरे का कहानी में किसके लिए प्रयोग हुआ है?
(क) बड़े भाई साहब के लिए
(ख) छोटे भाई के लिए
(ग) हेडमास्टर साहब के लिए
(घ) किसी के लिए नहीं -
कहानी के अंत में छोटे भाई को बड़े भाई साहब के प्रति क्या अनुभूति हुई?
(क) क्रोध और घृणा
(ख) डर और भय
(ग) उपेक्षा का भाव
(घ) श्रद्धा और सम्मान -
इस कहानी का मुख्य उद्देश्य क्या है?
(क) खेल-कूद के महत्व को बताना
(ख) रटंत शिक्षा प्रणाली पर व्यंग्य करना और अनुभव के महत्व को दर्शाना
(ग) बड़े भाई के अत्याचारों का वर्णन करना
(घ) परीक्षा में नकल करने की सलाह देना
उत्तर कुंजी:
- (ख)
- (ग)
- (ग)
- (ख)
- (ग)
- (ग)
- (ग)
- (ख)
- (घ)
- (ख)
इन नोट्स और प्रश्नों का अच्छे से अभ्यास करें। शुभकामनाएँ!