Class 10 Social Science Notes Chapter 4 (भूमंडलीकृत विश्व का बनना) – Bharat aur Samkalin Vishwa-II Book

Bharat aur Samkalin Vishwa-II
चलिए, आज हम कक्षा 10 के इतिहास की किताब 'भारत और समकालीन विश्व-II' के अध्याय 4, 'भूमंडलीकृत विश्व का बनना' के महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा करते हैं, जो आपकी सरकारी परीक्षाओं की तैयारी में सहायक होंगे। यह अध्याय समझाता है कि कैसे व्यापार, लोगों के प्रवास, पूंजी और विचारों के वैश्विक प्रवाह ने हमारे आज के विश्व को आकार दिया है।

अध्याय 4: भूमंडलीकृत विश्व का बनना - विस्तृत नोट्स

1. आधुनिक युग से पहले (वैश्वीकरण के आरंभिक चरण):

  • प्राचीन काल से जुड़ाव: वैश्वीकरण कोई नई परिघटना नहीं है। प्राचीन काल से ही यात्री, व्यापारी, पुजारी और तीर्थयात्री ज्ञान, अवसरों, आध्यात्मिक शांति या उत्पीड़न से बचने के लिए विशाल दूरियाँ तय करते थे। वे अपने साथ वस्तुएँ, पैसा, मूल्य, हुनर, विचार, आविष्कार और यहाँ तक कि कीटाणु और बीमारियाँ भी ले जाते थे।
  • सिंधु घाटी सभ्यता का जुड़ाव: लगभग 3000 ईसा पूर्व में समुद्री तटों पर होने वाला व्यापार सिंधु घाटी सभ्यता को पश्चिमी एशिया से जोड़ता था।
  • रेशम मार्ग (Silk Routes): ये मार्ग ज़मीन और समुद्र, दोनों रास्तों से एशिया के विशाल भागों को यूरोप और उत्तरी अफ्रीका से जोड़ते थे।
    • इन मार्गों से चीनी रेशम, पॉटरी पश्चिम की ओर जाती थी।
    • भारत व दक्षिण-पूर्व एशिया के कपड़े व मसाले दुनिया के दूसरे भागों में पहुँचते थे।
    • वापसी में सोना-चाँदी जैसी कीमती धातुएँ यूरोप से एशिया पहुँचती थीं।
    • व्यापार के साथ-साथ सांस्कृतिक आदान-प्रदान भी हुआ। ईसाई मिशनरी, मुस्लिम धर्मोपदेशक और बौद्ध धर्म प्रचारक इन्हीं मार्गों से दुनिया के विभिन्न हिस्सों में पहुँचे।
  • भोजन की यात्रा: खाद्य पदार्थ भी लंबी दूरियों तक यात्रा करते थे। माना जाता है कि 'नूडल्स' चीन से पश्चिम पहुँचे और वहाँ 'स्पेगेटी' का रूप लिया। आलू, सोया, मूँगफली, मक्का, टमाटर, मिर्च, शकरकंद जैसे खाद्य पदार्थ अमेरिका से यूरोप और एशिया पहुँचे, जब क्रिस्टोफर कोलंबस ने गलती से अमेरिकी महाद्वीप की खोज की। आलू के आने से यूरोप के गरीबों के भोजन में बड़ा बदलाव आया और जीवन स्तर सुधरा। (आयरलैंड में 1840 के दशक में आलू की फसल खराब होने से भयानक अकाल पड़ा था)।
  • विजय, बीमारी और व्यापार: सोलहवीं सदी में यूरोपीय नाविकों ने एशिया और अमेरिका तक समुद्री मार्ग खोज लिए।
    • अमेरिका की खोज के बाद वहाँ की विशाल भूमि और खनिज भंडार ने व्यापार और जीवन को बदला।
    • यूरोपीय सेनाएँ केवल अपनी सैनिक ताकत के दम पर नहीं जीतीं, बल्कि 'चेचक' जैसे कीटाणुओं के कारण भी जीतीं, जो स्पेनिश सैनिकों द्वारा अमेरिका ले जाए गए। अमेरिकी लोगों के शरीर में इससे लड़ने की रोग प्रतिरोधक क्षमता नहीं थी, जिससे उनकी आबादी का बड़ा हिस्सा खत्म हो गया और यूरोपीय विजय आसान हो गई।
    • उन्नीसवीं सदी तक यूरोप में गरीबी और भूख का साम्राज्य था, शहरों में भीड़ और बीमारियाँ थीं। धार्मिक टकराव भी आम थे। कई लोग यूरोप छोड़कर अमेरिका भाग गए।

2. उन्नीसवीं सदी (1815-1914):

  • इस सदी में दुनिया तेजी से बदली। अर्थशास्त्रियों ने अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक विनिमय में तीन तरह के प्रवाहों या 'गतियों' की पहचान की:
    1. व्यापार का प्रवाह: मुख्य रूप से वस्तुओं (कपड़ा, गेहूँ आदि) का व्यापार।
    2. श्रम का प्रवाह: लोग रोजगार की तलाश में एक जगह से दूसरी जगह जाते थे (प्रवास)।
    3. पूँजी का प्रवाह: अल्प या दीर्घ अवधि के लिए दूर-दराज के इलाकों में निवेश।
  • विश्व अर्थव्यवस्था का उदय:
    • खाद्य आत्मनिर्भरता का अंत: ब्रिटेन ने 'कॉर्न लॉ' (Corn Laws) के तहत मक्का के आयात पर पाबंदी लगा रखी थी। उद्योगपतियों और शहरी लोगों के दबाव में सरकार ने इसे समाप्त कर दिया।
    • वैश्विक कृषि अर्थव्यवस्था: कॉर्न लॉ हटने से ब्रिटेन में खाद्य पदार्थ सस्ते हो गए। विदेशों (पूर्वी यूरोप, रूस, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया) से सस्ता अनाज आने लगा। ब्रिटिश किसानों पर बुरा असर पड़ा, कई बेरोजगार हो गए और शहरों या विदेशों में चले गए। भोजन की मांग बढ़ने से इन बाहरी देशों में कृषि का विस्तार हुआ, ज़मीनें साफ की गईं, बंदरगाहों को रेल लाइनों से जोड़ा गया।
    • तकनीक की भूमिका: रेलवे, भाप के जहाज, टेलीग्राफ जैसी तकनीकों ने इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। रेफ्रिजरेशन तकनीक वाले जहाजों ने मांस जैसे जल्दी खराब होने वाले खाद्य पदार्थों को लंबी दूरी तक ले जाना संभव बनाया, जिससे यूरोप में मांस सस्ता हुआ और गरीबों के भोजन में विविधता आई।
  • उन्नीसवीं सदी के आखिर में उपनिवेशवाद:
    • व्यापार बढ़ा और बाजार फैले, लेकिन इसके साथ ही दुनिया के कई हिस्सों में स्वतंत्रता और आजीविका छिनने लगी। यूरोपीय शक्तियों ने एशिया और अफ्रीका के बड़े हिस्सों को उपनिवेश बना लिया।
    • अफ्रीका का बँटवारा: 1885 में बर्लिन में यूरोपीय शक्तियों की बैठक हुई जिसमें अफ्रीका के नक्शे पर लकीरें खींचकर उसे आपस में बाँट लिया गया।
  • रिंडरपेस्ट या मवेशी प्लेग: 1890 के दशक में अफ्रीका में 'रिंडरपेस्ट' नामक बीमारी फैली। यह बीमारी ब्रिटिश आधिपत्य वाले एशियाई देशों से लाए गए संक्रमित जानवरों के जरिए पहुँची थी। इसने अफ्रीका के लगभग 90% मवेशियों को खत्म कर दिया, जिससे स्थानीय लोगों की आजीविका नष्ट हो गई और उन्हें यूरोपीय उपनिवेशवादियों के लिए खानों और बागानों में काम करने पर मजबूर होना पड़ा।
  • भारत से अनुबंधित श्रमिक (गिरमिटिया मजदूर):
    • उन्नीसवीं सदी में भारत और चीन से लाखों मजदूरों को बागानों, खदानों और सड़क/रेल निर्माण परियोजनाओं में काम करने के लिए कैरिबियाई द्वीप समूह (त्रिनिदाद, गुयाना, सूरीनाम), मॉरीशस, फिजी, सीलोन (श्रीलंका) और मलाया ले जाया गया।
    • ये 'अनुबंधित' या 'गिरमिटिया' मजदूर थे, जिन्हें एक खास अवधि (आमतौर पर 5 साल) के लिए एक अनुबंध के तहत ले जाया जाता था।
    • उनकी भर्ती की प्रक्रिया भ्रामक होती थी, और कार्यस्थल पर उनकी स्थितियाँ अत्यंत दयनीय थीं। उनके पास कानूनी अधिकार लगभग नहीं थे।
    • कई मजदूर भाग जाते थे, तो कई ने नई जगहों पर ही जीवन के नए रास्ते और सांस्कृतिक रूप अपना लिए (जैसे त्रिनिदाद में 'होसे' (इमाम हुसैन के नाम पर) मुहर्रम जुलूस या 'चटनी म्यूजिक')।
    • 1921 में इस प्रथा को समाप्त कर दिया गया।

3. महायुद्धों के बीच अर्थव्यवस्था (1914-1945):

  • पहला विश्व युद्ध (1914-1918): यह पहला आधुनिक औद्योगिक युद्ध था। इसमें मशीनगनों, टैंकों, हवाई जहाजों, रासायनिक हथियारों का भयानक पैमाने पर इस्तेमाल हुआ।
    • आर्थिक परिणाम: युद्ध ने दुनिया को आर्थिक रूप से झकझोर दिया। यूरोप आर्थिक संकट में फँस गया। युद्ध संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए उत्पादन बढ़ा, लेकिन युद्ध के बाद माँग घटने से बेरोजगारी फैली। अमेरिका युद्ध के बाद एक अंतर्राष्ट्रीय कर्जदाता के रूप में उभरा।
  • युद्धोत्तर सुधार:
    • बड़े पैमाने पर उत्पादन और उपभोग: अमेरिका में युद्ध के बाद सुधार तेज रहा। हेनरी फोर्ड ने 'असेंबली लाइन' पद्धति से बड़े पैमाने पर कारों (टी-मॉडल फोर्ड) का उत्पादन शुरू किया, जिससे उत्पादन बढ़ा और कीमतें गिरीं। इससे बड़े पैमाने पर उपभोग की संस्कृति को बढ़ावा मिला।
  • महामंदी (The Great Depression) (1929-1930s):
    • कारण: कृषि में अति-उत्पादन और गिरती कीमतें, अमेरिकी शेयर बाजार का धराशायी होना (1929), अमेरिका द्वारा कर्ज देना बंद करना।
    • प्रभाव: दुनिया भर में उत्पादन, रोजगार, आय और व्यापार में भारी गिरावट आई। अमेरिका का बैंकिंग सिस्टम ध्वस्त हो गया। यूरोप पर गहरा असर पड़ा।
    • भारत पर प्रभाव: महामंदी ने भारतीय व्यापार को प्रभावित किया। कृषि उत्पादों की कीमतें गिरीं, लेकिन औपनिवेशिक सरकार ने लगान कम नहीं किया। किसानों, खासकर काश्तकारों की हालत खराब हुई। भारत सोने का निर्यात करने लगा। शहरी भारत पर असर कम था, लेकिन राष्ट्रवादी आंदोलन को बल मिला।

4. विश्व अर्थव्यवस्था का पुनर्निर्माण: युद्धोत्तर काल (1945 के बाद):

  • दूसरा विश्व युद्ध (1939-1945): यह पहले से भी अधिक विनाशकारी था।
  • युद्धोत्तर बंदोबस्त और ब्रेटन वुड्स संस्थान:
    • युद्ध के बाद औद्योगिक देशों ने आर्थिक स्थिरता और पूर्ण रोजगार बनाए रखने के महत्व को समझा।
    • जुलाई 1944 में अमेरिका स्थित न्यू हैम्पशर के 'ब्रेटन वुड्स' नामक स्थान पर संयुक्त राष्ट्र मौद्रिक एवं वित्तीय सम्मेलन हुआ।
    • सदस्य देशों के विदेश व्यापार में लाभ और घाटे से निपटने के लिए अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF - International Monetary Fund) की स्थापना की गई।
    • युद्धोत्तर पुनर्निर्माण के लिए पैसे का इंतजाम करने हेतु अंतर्राष्ट्रीय पुनर्निर्माण एवं विकास बैंक (IBRD - International Bank for Reconstruction and Development), जिसे विश्व बैंक (World Bank) कहा जाता है, का गठन किया गया।
    • IMF और विश्व बैंक को 'ब्रेटन वुड्स ट्विन्स' या ब्रेटन वुड्स की जुड़वाँ संतान भी कहा जाता है।
    • इस प्रणाली ने पश्चिमी औद्योगिक देशों और जापान के लिए व्यापार और आय में अभूतपूर्व वृद्धि का एक युग शुरू किया (1950-1970)।
  • प्रारंभिक युद्धोत्तर वर्ष: ब्रेटन वुड्स प्रणाली निश्चित विनिमय दरों पर आधारित थी (डॉलर का मूल्य सोने से बँधा था, अन्य मुद्राएँ डॉलर से जुड़ी थीं)।
  • उपनिवेशवाद और स्वतंत्रता: दूसरे विश्व युद्ध के बाद अगले दो दशकों में एशिया और अफ्रीका के अधिकांश उपनिवेश स्वतंत्र राष्ट्र बन गए। वे गरीबी और संसाधनों की कमी से जूझ रहे थे।
  • विकासशील देशों की चुनौती: IMF और विश्व बैंक औद्योगिक देशों की जरूरतों को पूरा करने के लिए बने थे। नव स्वतंत्र देशों को अपनी अर्थव्यवस्थाओं को गरीबी से निकालने के लिए पश्चिमी शक्तियों के प्रभुत्व वाले इन संस्थानों से खास मदद नहीं मिली।
  • जी-77 (G-77): विकासशील देशों ने एक नई अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक प्रणाली (NIEO - New International Economic Order) की माँग की, जिससे उन्हें अपने संसाधनों पर सही नियंत्रण मिले, कच्चे माल के सही दाम मिलें और विकसित देशों के बाजारों में पहुँच मिले। उन्होंने समूह-77 (G-77) के रूप में संगठित होकर अपनी आवाज उठाई।
  • ब्रेटन वुड्स का अंत और वैश्वीकरण का नया दौर:
    • 1960 के दशक से विदेशों में अपनी गतिविधियों की लागत बढ़ने से अमेरिका की वित्तीय और प्रतिस्पर्धी क्षमता कम होने लगी। डॉलर का मूल्य सोने की तुलना में स्थिर नहीं रह पाया। स्थिर विनिमय दर की व्यवस्था खत्म हो गई और अस्थिर (प्रवाही) विनिमय दर व्यवस्था शुरू हुई।
    • 1970 के दशक के मध्य से अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली में भारी बदलाव आए। विकासशील देश कर्ज लेने पर मजबूर हुए।
    • बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ (MNCs): 1970 के दशक के अंत में बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने एशिया के कम वेतन वाले देशों (जैसे चीन) में उत्पादन स्थानांतरित करना शुरू कर दिया। इससे विश्व व्यापार और पूँजी प्रवाह का स्वरूप बदला। चीन जैसी अर्थव्यवस्थाओं के विश्व अर्थव्यवस्था में शामिल होने से वैश्विक आर्थिक भूगोल में नाटकीय परिवर्तन आए।

निष्कर्ष: भूमंडलीकृत विश्व का बनना एक लंबी और जटिल प्रक्रिया रही है, जिसमें व्यापार, प्रवास, तकनीकी विकास, युद्ध, महामारियाँ और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग (या उसके अभाव) ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह प्रक्रिया हमेशा एक समान या फायदेमंद नहीं रही है, और इसके प्रभाव दुनिया के विभिन्न हिस्सों और समाजों पर अलग-अलग पड़े हैं।


अभ्यास हेतु 10 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs):

1. प्राचीन काल में एशिया को यूरोप और उत्तरी अफ्रीका से जोड़ने वाले मार्ग को क्या कहा जाता था?
(क) मसाला मार्ग
(ख) रेशम मार्ग (सिल्क रूट)
(ग) समुद्री मार्ग
(घ) कपास मार्ग

2. आलू, मक्का, टमाटर जैसी खाद्य वस्तुएँ किस महाद्वीप से बाकी दुनिया में पहुँचीं?
(क) एशिया
(ख) अफ्रीका
(ग) यूरोप
(घ) अमेरिका

3. किस बीमारी ने 16वीं सदी में अमेरिकी महाद्वीपों में लाखों लोगों की मृत्यु का कारण बनकर यूरोपीय विजय को आसान बनाया?
(क) प्लेग
(ख) हैजा
(ग) चेचक
(घ) मलेरिया

4. ब्रिटेन में 'कॉर्न लॉ' किस उत्पाद के आयात को प्रतिबंधित करने के लिए लागू किया गया था?
(क) कपास
(ख) मक्का (अनाज)
(ग) चीनी
(घ) चाय

5. 1890 के दशक में अफ्रीका में फैले 'रिंडरपेस्ट' का संबंध किससे था?
(क) इंसानों की बीमारी
(ख) फसल का रोग
(ग) मवेशियों (पशुओं) की बीमारी
(घ) समुद्री तूफान

6. उन्नीसवीं सदी में भारत से ले जाए गए अनुबंधित मजदूरों को क्या कहा जाता था?
(क) दास
(ख) गिरमिटिया मजदूर
(ग) बंधुआ मजदूर
(घ) अप्रवासी श्रमिक

7. हेनरी फोर्ड ने बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए किस पद्धति का उपयोग किया?
(क) हस्तशिल्प
(ख) असेंबली लाइन
(ग) सहकारी उत्पादन
(घ) आउटसोर्सिंग

8. 1929 में शुरू हुई विश्वव्यापी आर्थिक महामंदी का सबसे बुरा असर किस देश पर पड़ा था?
(क) ब्रिटेन
(ख) फ्रांस
(ग) जर्मनी
(घ) अमेरिका

9. ब्रेटन वुड्स सम्मेलन (1944) में किन दो अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं की स्थापना का निर्णय लिया गया?
(क) संयुक्त राष्ट्र और विश्व व्यापार संगठन
(ख) अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक (World Bank)
(ग) विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूनेस्को
(घ) अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन और खाद्य एवं कृषि संगठन

10. विकासशील देशों ने नई अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक प्रणाली (NIEO) की माँग के लिए किस समूह का गठन किया?
(क) जी-8
(ख) जी-20
(ग) जी-77
(घ) नाटो (NATO)


उत्तर कुंजी:

  1. (ख)
  2. (घ)
  3. (ग)
  4. (ख)
  5. (ग)
  6. (ख)
  7. (ख)
  8. (घ)
  9. (ख)
  10. (ग)

मुझे उम्मीद है कि ये नोट्स और प्रश्न आपकी परीक्षा की तैयारी में उपयोगी साबित होंगे। इस अध्याय को अच्छी तरह समझने के लिए किताब को ध्यान से पढ़ें और इन बिंदुओं पर मनन करें। शुभकामनाएँ!

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