Class 10 Social Science Notes Chapter 4 (कृषि) – Samkalin Bharat Book

Samkalin Bharat
चलिए, आज हम समकालीन भारत-II के अध्याय 4, 'कृषि' का विस्तृत अध्ययन करेंगे। यह अध्याय भारत की अर्थव्यवस्था, समाज और भूगोल को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, और प्रतियोगी परीक्षाओं में इससे अक्सर प्रश्न पूछे जाते हैं।

अध्याय 4: कृषि (Agriculture) - विस्तृत नोट्स

1. परिचय:

  • भारत एक कृषि प्रधान देश है। इसकी लगभग दो-तिहाई जनसंख्या कृषि कार्यों में संलग्न है।
  • कृषि एक प्राथमिक क्रिया है, जो अधिकांश खाद्यान्न उत्पन्न करती है। खाद्यान्नों के अतिरिक्त, यह विभिन्न उद्योगों के लिए कच्चा माल भी पैदा करती है (जैसे - कपास उद्योग, चीनी उद्योग)।
  • कुछ उत्पाद जैसे चाय, कॉफ़ी, मसाले इत्यादि का निर्यात भी किया जाता है।

2. कृषि के प्रकार:

भारत में भौतिक पर्यावरण, प्रौद्योगिकीय ज्ञान और सामाजिक-सांस्कृतिक रीति-रिवाजों के अनुसार खेती के विभिन्न तरीके अपनाए जाते हैं। मुख्य प्रकार हैं:

  • (क) प्रारंभिक जीविका निर्वाह कृषि (Primitive Subsistence Farming):

    • यह कृषि भूमि के छोटे टुकड़ों पर आदिम कृषि औजारों (जैसे लकड़ी के हल, डाओ, खुदाई करने वाली छड़ी) तथा परिवार/समुदाय श्रम की मदद से की जाती है।
    • यह प्रायः मानसून, मृदा की प्राकृतिक उर्वरता तथा अन्य पर्यावरणीय परिस्थितियों की उपयुक्तता पर निर्भर करती है।
    • इसे 'कर्तन दहन प्रणाली' (Slash and Burn) कृषि भी कहते हैं। किसान जमीन के टुकड़े साफ़ करके उन पर अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए अनाज व अन्य खाद्य फसलें उगाते हैं।
    • जब मृदा की उर्वरता कम हो जाती है, तो किसान उस भूमि के टुकड़े से स्थानांतरित हो जाते हैं और कृषि के लिए भूमि का दूसरा टुकड़ा साफ़ करते हैं।
    • स्थानीय नाम: उत्तर-पूर्वी राज्यों (असम, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड) में 'झूम', मणिपुर में 'पामलू', छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले और अंडमान निकोबार द्वीप समूह में 'दीपा', मध्य प्रदेश में 'बेवर' या 'दहिया', आंध्र प्रदेश में 'पोडु' अथवा 'पेंडा', ओडिशा में 'पामाडाबी' या 'कोमान' या 'बरीगा', पश्चिमी घाट में 'कुमारी', दक्षिण-पूर्वी राजस्थान में 'वालरे' या 'वाल्टरे', हिमालयी क्षेत्र में 'खिल', झारखंड में 'कुरुवा'।
  • (ख) गहन जीविका कृषि (Intensive Subsistence Farming):

    • यह कृषि उन क्षेत्रों में की जाती है जहाँ भूमि पर जनसंख्या का दबाव अधिक होता है।
    • यह श्रम-गहन खेती है, जहाँ अधिक उत्पादन के लिए अधिक मात्रा में जैव-रासायनिक निवेशों और सिंचाई का प्रयोग किया जाता है।
    • भू-स्वामित्व में विरासत के अधिकार के कारण पीढ़ी-दर-पीढ़ी जोतों का आकार छोटा और अलाभप्रद होता जा रहा है।
  • (ग) वाणिज्यिक कृषि (Commercial Farming):

    • इस प्रकार की कृषि का मुख्य लक्षण आधुनिक निवेशों जैसे अधिक पैदावार देने वाले बीजों (HYV), रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के प्रयोग से उच्च पैदावार प्राप्त करना है।
    • कृषि के वाणिज्यीकरण का स्तर विभिन्न प्रदेशों में अलग-अलग है। उदाहरण: हरियाणा और पंजाब में चावल वाणिज्यिक फसल है, परन्तु ओडिशा में यह एक जीविका फसल है।
    • रोपण कृषि (Plantation Agriculture): यह भी एक प्रकार की वाणिज्यिक खेती है। इसमें लंबे-चौड़े क्षेत्र में एकल फसल बोई जाती है। यह कृषि उद्योग और कृषि के बीच एक अंतरापृष्ठ (interface) है। इसमें अत्यधिक पूँजी और श्रमिकों की आवश्यकता होती है। प्राप्त सारा उत्पादन उद्योग में कच्चे माल के रूप में प्रयोग होता है।
    • मुख्य रोपण फसलें: चाय, कॉफ़ी, रबड़, गन्ना, केला इत्यादि। (असम और उत्तरी बंगाल में चाय; कर्नाटक में कॉफ़ी)

3. शस्य प्रारूप (Cropping Pattern):

भारत में तीन मुख्य शस्य ऋतुएँ हैं:

  • (क) रबी (Rabi):

    • बुआई: शीत ऋतु में (अक्टूबर से दिसंबर)।
    • कटाई: ग्रीष्म ऋतु में (अप्रैल से जून)।
    • मुख्य फसलें: गेहूँ, जौ, मटर, चना, सरसों।
    • मुख्य क्षेत्र: उत्तर और उत्तर-पश्चिमी राज्य जैसे पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश।
    • शीतकालीन पश्चिमी विक्षोभों से होने वाली वर्षा इन फसलों के अधिक उत्पादन में सहायक होती है।
  • (ख) खरीफ (Kharif):

    • बुआई: मानसून के आगमन के साथ (जून-जुलाई)।
    • कटाई: सितंबर-अक्टूबर में।
    • मुख्य फसलें: चावल, मक्का, ज्वार, बाजरा, अरहर (तुर), मूँग, उड़द, कपास, जूट, मूँगफली, सोयाबीन।
    • मुख्य क्षेत्र: चावल उत्पादक क्षेत्र जैसे असम, पश्चिम बंगाल, तटीय ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, केरल और महाराष्ट्र (कोंकण तट), उत्तर प्रदेश और बिहार।
  • (ग) जायद (Zaid):

    • रबी और खरीफ फसल ऋतुओं के बीच ग्रीष्म ऋतु में बोई जाने वाली फसल।
    • मुख्य फसलें: तरबूज, खरबूजे, खीरे, सब्जियाँ और चारे की फसलें।
    • इसमें मुख्यतः सिंचाई की आवश्यकता होती है।

4. मुख्य फसलें:

  • (क) खाद्य फसलें (अनाज):

    • चावल (Rice): भारत की मुख्य खाद्य फसल। चीन के बाद भारत दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक। खरीफ फसल। उच्च तापमान (25°C से ऊपर) और अधिक आर्द्रता (100 सेमी से अधिक वर्षा) की आवश्यकता। कम वर्षा वाले क्षेत्रों में सिंचाई से उगाया जाता है। मुख्य क्षेत्र: उत्तर और उत्तर-पूर्वी मैदान, तटीय क्षेत्र और डेल्टाई प्रदेश।
    • गेहूँ (Wheat): दूसरी सबसे महत्वपूर्ण खाद्यान्न फसल। देश के उत्तर और उत्तर-पश्चिमी भागों में मुख्य भोजन। रबी फसल। पकते समय खिली धूप और बुआई के समय ठंडी ऋतु की आवश्यकता। वर्षा: 50-75 सेमी वार्षिक। मुख्य क्षेत्र: गंगा-सतलुज का मैदान (पंजाब, हरियाणा, उ.प्र., बिहार, राजस्थान) और दक्कन का काली मिट्टी वाला प्रदेश।
    • मोटे अनाज (Millets): ज्वार, बाजरा और रागी। इन्हें मोटा अनाज कहा जाता है, परन्तु इनमें पोषक तत्वों की मात्रा अधिक होती है (जैसे रागी में प्रचुर मात्रा में लोहा, कैल्शियम)।
      • ज्वार: क्षेत्रफल और उत्पादन की दृष्टि से देश की तीसरी महत्वपूर्ण खाद्यान्न फसल। वर्षा पर निर्भर। आर्द्र क्षेत्रों में उगायी जाती है। प्रमुख उत्पादक: महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश।
      • बाजरा: बलुआ और उथली काली मिट्टी पर उगाया जाता है। प्रमुख उत्पादक: राजस्थान, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, हरियाणा।
      • रागी: शुष्क प्रदेशों की फसल। लाल, काली, बलुआ, दोमट और उथली काली मिट्टी पर अच्छी तरह उगती है। प्रमुख उत्पादक: कर्नाटक, तमिलनाडु, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम, झारखंड, अरुणाचल प्रदेश।
    • मक्का (Maize): खाद्य व चारा दोनों रूप में प्रयोग। खरीफ फसल (कुछ राज्यों जैसे बिहार में रबी में भी)। तापमान: 21°C से 27°C। पुरानी जलोढ़ मिट्टी पर अच्छी उगती है। आधुनिक प्रौद्योगिकी निवेशों (HYV बीज, उर्वरक, सिंचाई) से उत्पादन बढ़ा है। प्रमुख उत्पादक: कर्नाटक, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना।
    • दालें (Pulses): भारत विश्व में दालों का सबसे बड़ा उत्पादक तथा उपभोक्ता है। शाकाहारी खाने में प्रोटीन का मुख्य स्रोत। मुख्य दालें: अरहर (तुर), उड़द, मूँग, मसूर, मटर, चना। फलीदार फसलें होने के नाते (अरहर को छोड़कर) ये नाइट्रोजन स्थिरीकरण कर मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती हैं। इन्हें आमतौर पर अन्य फसलों के आवर्तन (rotation) में बोया जाता है। प्रमुख उत्पादक: मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक।
  • (ख) खाद्य फसलें (अनाज के अलावा):

    • गन्ना (Sugarcane): उष्ण और उपोष्ण कटिबंधीय फसल। तापमान: 21°C से 27°C। वर्षा: 75-100 सेमी। अनेक प्रकार की मिट्टियों में उगाया जा सकता है। बुआई से कटाई तक काफी शारीरिक श्रम की आवश्यकता। चीनी, गुड़, खांडसारी और शीरा बनाने के काम आता है। ब्राजील के बाद भारत दूसरा बड़ा उत्पादक। प्रमुख उत्पादक: उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, बिहार, पंजाब, हरियाणा।
    • तिलहन (Oil Seeds): भारत विश्व में तिलहन का सबसे बड़ा उत्पादक (2018)। मुख्य तिलहन: मूँगफली, सरसों, नारियल, तिल, सोयाबीन, अरंडी, बिनौला, अलसी और सूरजमुखी। अधिकांश खाद्य तेल के रूप में प्रयोग होते हैं, कुछ साबुन, प्रसाधन (cosmetics) और उबटन उद्योग में कच्चे माल के रूप में भी।
      • मूँगफली: खरीफ फसल। देश के मुख्य तिलहनों के कुल उत्पादन का आधा भाग इसी से प्राप्त होता है। प्रमुख उत्पादक: गुजरात, राजस्थान, तमिलनाडु।
      • सरसों: रबी फसल।
      • तिल: उत्तर भारत में खरीफ, दक्षिण भारत में रबी।
      • अरंडी: रबी और खरीफ दोनों।
    • चाय (Tea): रोपण कृषि का उदाहरण। महत्वपूर्ण पेय पदार्थ फसल। शुरुआत में अंग्रेज लाए थे। उष्ण और उपोष्ण कटिबंधीय जलवायु, ह्यूमस और जीवांश युक्त गहरी मिट्टी तथा सुगम जल निकास वाले ढलवा क्षेत्रों की आवश्यकता। वर्ष भर नम और पाला रहित जलवायु। वर्ष भर समान रूप से होने वाली वर्षा की बौछारें इसकी कोमल पत्तियों के विकास में सहायक। श्रम-सघन उद्योग। मुख्य उत्पादक: असम, पश्चिम बंगाल (दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी), तमिलनाडु, केरल। भारत विश्व का अग्रणी चाय उत्पादक और निर्यातक है।
    • कॉफ़ी (Coffee): भारतीय कॉफ़ी अपनी गुणवत्ता के लिए विश्वविख्यात है। 'अरेबिका' किस्म यमन से लाई गई थी, जिसकी भारत में बहुत मांग है। इसकी कृषि बाबा बूदन पहाड़ियों (कर्नाटक) से शुरू हुई। आज नीलगिरि की पहाड़ियों के आसपास कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु में उगाई जाती है।
  • (ग) बागवानी फसलें (Horticulture Crops):

    • भारत विश्व में फलों और सब्जियों का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक (चीन के बाद)।
    • भारत उष्ण और शीतोष्ण कटिबंधीय दोनों प्रकार के फलों का उत्पादक है।
    • प्रमुख फल उत्पादक राज्य: महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल (आम); नागपुर, चेरापूंजी (संतरे); केरल, मिजोरम, महाराष्ट्र, तमिलनाडु (केले); उत्तर प्रदेश, बिहार (लीची); मेघालय (अनानास); आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र (अंगूर); जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश (सेब, नाशपाती, खुबानी, अखरोट)।
    • भारत का मटर, फूलगोभी, प्याज, बंदगोभी, टमाटर, बैंगन और आलू उत्पादन में प्रमुख स्थान है।
  • (घ) अखाद्य फसलें (Non-Food Crops):

    • रबड़ (Rubber): भूमध्यरेखीय क्षेत्र की फसल, परन्तु विशेष परिस्थितियों में उष्ण और उपोष्ण क्षेत्रों में भी। वर्षा: 200 सेमी से अधिक। तापमान: 25°C से अधिक। नम और आर्द्र जलवायु। महत्वपूर्ण औद्योगिक कच्चा माल। मुख्य उत्पादक: केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, अंडमान निकोबार द्वीप समूह, मेघालय (गारो पहाड़ियाँ)।
    • रेशेदार फसलें (Fibre Crops): कपास, जूट, सन और प्राकृतिक रेशम भारत में उगाई जाने वाली चार मुख्य रेशेदार फसलें हैं। पहली तीन मृदा में फसल उगाने से प्राप्त होती हैं, चौथा रेशम के कीड़े के कोकून से प्राप्त होता है (शहतूत की पत्तियों पर पाला जाता है - रेशम उत्पादन या Sericulture)।
      • कपास (Cotton): भारत को कपास के पौधे का मूल स्थान माना जाता है। सूती कपड़ा उद्योग का मुख्य कच्चा माल। चीन के बाद भारत दूसरा बड़ा उत्पादक। दक्कन पठार के शुष्کتر भागों की काली मिट्टी में अच्छी उगती है। उच्च तापमान, हल्की वर्षा या सिंचाई, 210 पाला रहित दिन और खिली धूप की आवश्यकता। खरीफ फसल, 6-8 महीने लगते हैं पकने में। प्रमुख उत्पादक: महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश।
      • जूट (Jute): 'सुनहरा रेशा' (Golden Fibre) कहा जाता है। बाढ़ के मैदानों में जल निकास वाली उर्वरक मिट्टी में उगाया जाता है, जहाँ हर वर्ष बाढ़ से आई नई मिट्टी जमा होती हो। उच्च तापमान की आवश्यकता। प्रमुख उत्पादक: पश्चिम बंगाल, बिहार, असम, ओडिशा, मेघालय। इसका प्रयोग बोरियाँ, चटाई, रस्सी, तंतु, गलीचे और अन्य दस्तकारी वस्तुएँ बनाने में होता है। उच्च लागत और कृत्रिम रेशों (नायलॉन) से प्रतिस्पर्धा के कारण बाजार खो रहा है।

5. प्रौद्योगिकीय और संस्थागत सुधार (Technological and Institutional Reforms):

  • स्वतंत्रता के पश्चात देश में संस्थागत सुधार करने के लिए जोतों की चकबंदी, सहकारिता तथा जमींदारी आदि समाप्त करने को प्राथमिकता दी गई। 'प्रथम पंचवर्षीय योजना' में भूमि सुधार मुख्य लक्ष्य था।

  • 1960 और 1970 के दशकों में भारत सरकार ने कृषि सुधारों की शुरुआत की:

    • हरित क्रांति (Green Revolution): पैकेज टेक्नोलॉजी पर आधारित थी (HYV बीज, रासायनिक उर्वरक, सिंचाई)। इससे गेहूँ और चावल के उत्पादन में भारी वृद्धि हुई, खासकर पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में।
    • श्वेत क्रांति (White Revolution / Operation Flood): दुग्ध उत्पादन बढ़ाने से संबंधित थी।
  • 1980 और 1990 के दशकों में व्यापक भूमि विकास कार्यक्रम शुरू किए गए, जिसमें संस्थागत और तकनीकी सुधार दोनों शामिल थे।

    • सूखा, बाढ़, चक्रवात, आग तथा बीमारी के लिए फसल बीमा का प्रावधान।
    • किसानों को कम दर पर ऋण सुविधाएं प्रदान करने के लिए ग्रामीण बैंकों, सहकारी समितियों और बैंकों की स्थापना।
    • किसानों के लाभ के लिए 'किसान क्रेडिट कार्ड (KCC)' और 'व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजना (PAIS)' शुरू की गईं।
    • आकाशवाणी और दूरदर्शन पर किसानों के लिए मौसम की जानकारी और कृषि कार्यक्रम प्रसारित किए जाते हैं।
    • किसानों को बिचौलियों और दलालों के शोषण से बचाने के लिए 'न्यूनतम सहायता मूल्य (MSP)', लाभदायक और खरीद मूल्यों की सरकार घोषणा करती है।
  • भूदान - ग्रामदान (Bhoodan - Gramdan): विनोबा भावे द्वारा शुरू किया गया आंदोलन। उन्होंने भूमिहीनों को भूमि दान करने की अपील की। इसे 'रक्तहीन क्रांति' भी कहा गया।

6. कृषि का राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था, रोजगार और उत्पादन में योगदान:

  • कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी रही है।
  • सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में कृषि का योगदान 1951 से लगातार घटने के उपरांत भी, यह 2010-11 में देश की लगभग 52% जनसंख्या के लिए रोजगार और आजीविका का साधन थी।
  • कृषि के महत्व को समझते हुए, भारत सरकार ने इसके आधुनिकीकरण के लिए भरसक प्रयास किए हैं। भारतीय कृषि में सुधार के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् (ICAR), कृषि विश्वविद्यालयों की स्थापना, पशु चिकित्सा सेवाएँ और पशु प्रजनन केंद्र की स्थापना, बागवानी विकास, मौसम विज्ञान और मौसम के पूर्वानुमान के क्षेत्र में अनुसंधान और विकास को वरीयता दी गई है।

7. खाद्य सुरक्षा (Food Security):

  • देश के प्रत्येक नागरिक को भोजन उपलब्ध होना चाहिए जिसमें न्यूनतम पोषण स्तर हो।
  • यदि अनाज तक सभी लोगों की पहुँच नहीं है तो देश खाद्य असुरक्षित है।
  • सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा प्रणाली बनाई है:
    • (क) बफर स्टॉक (Buffer Stock): यह भारतीय खाद्य निगम (FCI) द्वारा अधिप्राप्त अनाज (गेहूँ और चावल) का भंडार है। सरकार किसानों से न्यूनतम समर्थित मूल्य (MSP) पर अनाज खरीदती है।
    • (ख) सार्वजनिक वितरण प्रणाली (Public Distribution System - PDS): यह एक कार्यक्रम है जो ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों में खाद्य पदार्थों और अन्य आवश्यक वस्तुओं को रियायती मूल्यों पर उपलब्ध कराता है। FCI अधिप्राप्त अनाज को PDS के माध्यम से समाज के गरीब वर्गों में वितरित करती है।
  • चुनौतियाँ: MSP बढ़ने से खाद्यान्नों की अत्यधिक खरीद और भंडारण, उच्च रखरखाव लागत, अनाज की बर्बादी, पंजाब-हरियाणा जैसे राज्यों में अत्यधिक जल दोहन से पर्यावरणीय समस्याएं।

8. वैश्वीकरण का कृषि पर प्रभाव (Impact of Globalization on Agriculture):

  • वैश्वीकरण कोई नई घटना नहीं है, औपनिवेशिक काल से ही भारतीय कृषि उत्पाद विश्व बाजार में भेजे जाते रहे हैं (जैसे मसाले, कपास)।
  • 1990 के बाद वैश्वीकरण के तहत भारतीय किसानों को नई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। चावल, कपास, रबड़, चाय, कॉफ़ी, जूट और मसालों का मुख्य उत्पादक होने के बावजूद, भारतीय कृषि विश्व के विकसित देशों से स्पर्धा करने में असमर्थ है, क्योंकि उन देशों में कृषि को अत्यधिक सहायिकी (subsidy) दी जाती है।
  • आवश्यकता: भारतीय कृषि को सक्षम और लाभदायक बनाने के लिए सीमांत और छोटे किसानों की स्थिति सुधारने पर जोर देना होगा।
  • समाधान:
    • हरित क्रांति के बाद अब 'जीन क्रांति' (Genetic Engineering) का सुझाव दिया जा रहा है।
    • कार्बनिक कृषि (Organic Farming) को बढ़ावा देना क्योंकि यह उर्वरकों और कीटनाशकों के बिना की जाती है और पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव नहीं डालती।
    • फसल प्रारूप में परिवर्तन: खाद्यान्नों के स्थान पर कीमती फसलें (फल, औषधीय पौधे, बायो-डीजल फसलें जैसे जट्रोफा और जोजोबा) उगाने की आवश्यकता है क्योंकि अनाज उत्पादन से आय कम हो रही है।

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs):

प्रश्न 1: निम्नलिखित में से कौन सी एक रोपण फसल है?
(क) गेहूँ
(ख) चावल
(ग) चाय
(घ) बाजरा

प्रश्न 2: भारत में 'कर्तन दहन प्रणाली' (झूम खेती) को मध्य प्रदेश में किस नाम से जाना जाता है?
(क) कुमारी
(ख) खिल
(ग) बेवर या दहिया
(घ) दीपा

प्रश्न 3: निम्नलिखित में से कौन सी एक रबी फसल है?
(क) चावल
(ख) कपास
(ग) चना
(घ) मक्का

प्रश्न 4: चावल के उत्पादन के लिए आवश्यक वार्षिक वर्षा कितनी है?
(क) 50 सेमी से कम
(ख) 50-75 सेमी
(ग) 75-100 सेमी
(घ) 100 सेमी से अधिक

प्रश्न 5: 'ऑपरेशन फ्लड' (श्वेत क्रांति) निम्नलिखित में से किससे संबंधित है?
(क) बाढ़ नियंत्रण
(ख) दुग्ध उत्पादन
(ग) मछली उत्पादन
(घ) फसल उत्पादन

प्रश्न 6: भारत विश्व में निम्नलिखित में से किस फसल का सबसे बड़ा उत्पादक है (2018 के आंकड़ों के अनुसार)?
(क) चावल
(ख) गेहूँ
(ग) दालें
(घ) कपास

प्रश्न 7: सरकार निम्नलिखित में से किसकी घोषणा फसलों को सहायता देने के लिए करती है?
(क) अधिकतम सहायता मूल्य
(ख) न्यूनतम सहायता मूल्य (MSP)
(ग) मध्यम सहायता मूल्य
(घ) प्रभावी सहायता मूल्य

प्रश्न 8: निम्नलिखित में से कौन सी एक रेशेदार फसल नहीं है?
(क) कपास
(ख) जूट
(ग) रबड़
(घ) सन

प्रश्न 9: किसानों को ऋण सुविधा प्रदान करने के लिए निम्नलिखित में से कौन सी योजना शुरू की गई है?
(क) प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना
(ख) किसान क्रेडिट कार्ड (KCC)
(ग) व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजना (PAIS)
(घ) उपरोक्त सभी

प्रश्न 10: 'भूदान आंदोलन' किसके द्वारा आरंभ किया गया था?
(क) महात्मा गांधी
(ख) जवाहरलाल नेहरू
(ग) विनोबा भावे
(घ) सरदार पटेल


उत्तरमाला (MCQs):

  1. (ग) चाय
  2. (ग) बेवर या दहिया
  3. (ग) चना
  4. (घ) 100 सेमी से अधिक
  5. (ख) दुग्ध उत्पादन
  6. (ग) दालें (उत्पादक और उपभोक्ता दोनों)
  7. (ख) न्यूनतम सहायता मूल्य (MSP)
  8. (ग) रबड़
  9. (ख) किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) (हालांकि अन्य योजनाएं भी किसानों से संबंधित हैं, KCC सीधे ऋण सुविधा से जुड़ा है)
  10. (ग) विनोबा भावे

मुझे उम्मीद है कि ये विस्तृत नोट्स और प्रश्न आपके लिए उपयोगी सिद्ध होंगे। कृषि एक बहुत महत्वपूर्ण विषय है, इसे ध्यान से पढ़ें और समझें। शुभकामनाएँ!

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