Class 11 Business Studies Notes Chapter 1 (व्यवसाय की प्रकृति एव उद्देश्य) – Vyavsay Adhyayan Book

प्रिय विद्यार्थियों,
आज हम कक्षा 11 व्यावसायिक अध्ययन के प्रथम अध्याय 'व्यवसाय की प्रकृति एवं उद्देश्य' का विस्तृत अध्ययन करेंगे। यह अध्याय व्यावसायिक गतिविधियों की मूलभूत अवधारणाओं को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और विभिन्न सरकारी परीक्षाओं में भी इससे संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। आइए, एक-एक करके सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं को विस्तार से समझते हैं।
अध्याय 1: व्यवसाय की प्रकृति एवं उद्देश्य (Nature and Purpose of Business)
यह अध्याय हमें मानवीय क्रियाओं, विशेषकर आर्थिक क्रियाओं के विभिन्न रूपों - व्यवसाय, पेशा और रोज़गार से परिचित कराता है। यह हमें व्यवसाय की विशेषताओं, उसके उद्देश्यों, जोखिमों और उद्योगों एवं वाणिज्य के वर्गीकरण को समझने में मदद करता है।
I. मानवीय क्रियाएँ (Human Activities)
मनुष्य अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए जो भी कार्य करता है, वे मानवीय क्रियाएँ कहलाती हैं। इन्हें मुख्य रूप से दो भागों में बांटा जा सकता है:
A. आर्थिक क्रियाएँ (Economic Activities):
ये वे क्रियाएँ हैं जिनका उद्देश्य धन कमाना और अपनी आजीविका चलाना होता है। इनमें मुख्य रूप से तीन प्रकार की क्रियाएँ शामिल हैं:
-
व्यवसाय (Business): वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन, खरीद और बिक्री से संबंधित आर्थिक क्रियाएँ, जिनका मुख्य उद्देश्य लाभ कमाना होता है।
- उदाहरण: एक दुकान चलाना, फैक्ट्री में सामान बनाना, परिवहन सेवाएँ देना।
-
पेशा (Profession): वे क्रियाएँ जिनमें व्यक्ति विशेष ज्ञान और कौशल का उपयोग करके दूसरों को सेवाएँ प्रदान करता है और बदले में शुल्क (फीस) प्राप्त करता है। इसके लिए विशेष योग्यता और पेशेवर संस्था की सदस्यता आवश्यक होती है।
- उदाहरण: डॉक्टर द्वारा मरीज का इलाज करना, वकील द्वारा कानूनी सलाह देना, चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा वित्तीय सेवाएँ देना।
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रोज़गार (Employment): वह आर्थिक क्रिया जिसमें व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति या संस्था के लिए कार्य करता है और बदले में वेतन या मजदूरी प्राप्त करता है।
- उदाहरण: फैक्ट्री में श्रमिक, बैंक में कर्मचारी, स्कूल में शिक्षक।
B. अन-आर्थिक क्रियाएँ (Non-Economic Activities):
ये वे क्रियाएँ हैं जिनका उद्देश्य धन कमाना नहीं होता, बल्कि मानसिक संतुष्टि, सामाजिक सेवा या भावनात्मक आवश्यकताओं की पूर्ति करना होता है।
- उदाहरण: घर के काम करना (माँ द्वारा), समाज सेवा, धार्मिक कार्य, शौक पूरे करना।
II. व्यवसाय की अवधारणा (Concept of Business)
A. अर्थ (Meaning):
व्यवसाय एक ऐसी आर्थिक क्रिया है जिसमें वस्तुओं और सेवाओं का नियमित रूप से उत्पादन, खरीद और बिक्री की जाती है, जिसका मुख्य उद्देश्य लाभ कमाना होता है।
B. व्यवसाय की विशेषताएँ (Characteristics of Business):
- एक आर्थिक क्रिया (An Economic Activity): व्यवसाय का मुख्य उद्देश्य धन कमाना है, इसलिए यह एक आर्थिक क्रिया है।
- वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन या प्राप्ति (Production or Procurement of Goods and Services): व्यवसाय या तो वस्तुओं का उत्पादन करता है (जैसे फैक्ट्री) या उन्हें अन्य उत्पादकों से प्राप्त करता है (जैसे थोक विक्रेता)। इसमें भौतिक वस्तुएँ (जैसे कपड़ा, मशीन) और सेवाएँ (जैसे परिवहन, बैंकिंग) दोनों शामिल हैं।
- वस्तुओं और सेवाओं का विक्रय या विनिमय (Sale or Exchange of Goods and Services): व्यवसाय में वस्तुओं और सेवाओं को उपभोक्ताओं को बेचकर या उनका विनिमय करके धन कमाया जाता है।
- नियमितता में व्यवहार (Dealings in Goods and Services on a Regular Basis): व्यवसाय में वस्तुओं और सेवाओं का एक बार का लेन-देन शामिल नहीं होता, बल्कि यह नियमित आधार पर किया जाता है। एक पुरानी कार बेचना व्यवसाय नहीं है, लेकिन कार डीलर का नियमित रूप से कार बेचना व्यवसाय है।
- लाभार्जन (Profit Earning): व्यवसाय का प्राथमिक उद्देश्य लाभ कमाना है। लाभ व्यवसाय के अस्तित्व और विकास के लिए आवश्यक है।
- जोखिम की उपस्थिति (Presence of Risk): व्यवसाय में हमेशा अनिश्चितता और जोखिम शामिल होता है। भविष्य की घटनाओं का अनुमान नहीं लगाया जा सकता, जिससे हानि की संभावना बनी रहती है।
- उपभोक्ता संतुष्टि का उद्देश्य (Objective of Consumer Satisfaction): यद्यपि लाभ प्राथमिक उद्देश्य है, आधुनिक व्यवसाय उपभोक्ता संतुष्टि को भी महत्वपूर्ण मानता है, क्योंकि यह दीर्घकालिक लाभ और सफलता के लिए आवश्यक है।
III. पेशा (Profession)
A. अर्थ (Meaning):
पेशा वह आर्थिक क्रिया है जिसमें एक व्यक्ति अपने विशिष्ट ज्ञान, कौशल और प्रशिक्षण का उपयोग करके दूसरों को व्यक्तिगत सेवाएँ प्रदान करता है और बदले में शुल्क (फीस) प्राप्त करता है।
B. पेशे की विशेषताएँ (Characteristics of Profession):
- विशिष्ट ज्ञान एवं कौशल (Specialised Knowledge and Skill): पेशे के लिए किसी विशेष क्षेत्र में गहन ज्ञान और कौशल की आवश्यकता होती है।
- औपचारिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण (Formal Education and Training): यह ज्ञान और कौशल औपचारिक शिक्षा (जैसे डिग्री) और प्रशिक्षण (जैसे इंटर्नशिप) के माध्यम से प्राप्त किया जाता है।
- आचार संहिता (Code of Conduct): प्रत्येक पेशे की अपनी आचार संहिता होती है, जिसका पालन सभी सदस्यों को करना अनिवार्य होता है। यह पेशेवर संस्था द्वारा निर्धारित की जाती है।
- सेवा उद्देश्य (Service Motive): यद्यपि शुल्क लिया जाता है, पेशे का प्राथमिक उद्देश्य अपने ग्राहकों को सेवा प्रदान करना होता है।
- पेशेवर संस्था की सदस्यता (Membership of a Professional Body): पेशेवर व्यक्ति को आमतौर पर एक पेशेवर संस्था (जैसे भारतीय चिकित्सा परिषद, भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट संस्थान) का सदस्य होना पड़ता है।
IV. रोज़गार (Employment)
A. अर्थ (Meaning):
रोज़गार वह आर्थिक क्रिया है जिसमें एक व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति या संस्था (नियोक्ता) के लिए कार्य करता है और बदले में वेतन या मजदूरी प्राप्त करता है।
B. रोज़गार की विशेषताएँ (Characteristics of Employment):
- दूसरों के लिए कार्य (Work for Others): कर्मचारी किसी नियोक्ता के अधीन कार्य करता है।
- वेतन या मजदूरी (Salary or Wages): कार्य के बदले में कर्मचारी को निश्चित वेतन या मजदूरी मिलती है।
- सेवा की शर्तें (Terms and Conditions of Service): नियोक्ता और कर्मचारी के बीच एक समझौता होता है जिसमें कार्य की शर्तें, कार्य के घंटे, अवकाश आदि निर्धारित होते हैं।
- कोई पूंजी निवेश नहीं (No Capital Investment): कर्मचारी को अपना व्यवसाय शुरू करने की तरह पूंजी निवेश करने की आवश्यकता नहीं होती।
- निश्चित कार्य (Fixed Work): कर्मचारी को नियोक्ता द्वारा सौंपे गए कार्य को करना होता है।
V. व्यवसाय के उद्देश्य (Objectives of Business)
व्यवसाय केवल लाभ कमाने के लिए नहीं होता, बल्कि उसके कई अन्य उद्देश्य भी होते हैं जो उसके अस्तित्व और विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं। इन्हें मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में बांटा जा सकता है:
A. आर्थिक उद्देश्य (Economic Objectives):
- लाभार्जन (Profit Earning): यह व्यवसाय का सबसे महत्वपूर्ण और प्राथमिक उद्देश्य है। लाभ व्यवसाय के अस्तित्व, विकास और विस्तार के लिए आवश्यक है। यह जोखिम उठाने का प्रतिफल भी है।
- बाजार में बने रहना (Survival): प्रत्येक व्यवसाय को बाजार में बने रहने के लिए पर्याप्त राजस्व अर्जित करना चाहिए ताकि वह अपनी लागतों को पूरा कर सके।
- विकास (Growth): व्यवसाय को समय के साथ विकसित होना चाहिए। विकास को बिक्री की मात्रा, कर्मचारियों की संख्या, पूंजी निवेश या उत्पादों की संख्या में वृद्धि के रूप में मापा जा सकता है।
B. सामाजिक उद्देश्य (Social Objectives):
व्यवसाय समाज का एक अभिन्न अंग है, इसलिए उसके कुछ सामाजिक उत्तरदायित्व भी होते हैं:
- उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद उचित मूल्य पर (Supply of Quality Goods at Fair Prices): उपभोक्ताओं को अच्छी गुणवत्ता वाले उत्पाद और सेवाएँ उचित मूल्य पर उपलब्ध कराना।
- अनुचित व्यापार प्रथाओं से बचना (Avoidance of Unfair Trade Practices): कालाबाजारी, जमाखोरी, मिलावट और भ्रामक विज्ञापन जैसी प्रथाओं से दूर रहना।
- रोज़गार के अवसर प्रदान करना (Generation of Employment Opportunities): समाज में रोज़गार के अवसर पैदा करना, विशेषकर पिछड़े वर्गों के लिए।
- पर्यावरण संरक्षण (Environmental Protection): प्रदूषण को कम करने और पर्यावरण को बचाने के लिए उपाय करना।
- सामुदायिक सेवाएँ (Community Services): स्कूलों, अस्पतालों और अन्य कल्याणकारी कार्यक्रमों में योगदान देना।
C. मानवीय उद्देश्य (Human Objectives):
ये उद्देश्य कर्मचारियों के कल्याण और विकास से संबंधित हैं:
- कर्मचारियों का कल्याण (Welfare of Employees): कर्मचारियों को उचित वेतन, अच्छी कार्य परिस्थितियाँ और अन्य सुविधाएँ (जैसे स्वास्थ्य सेवा, आवास) प्रदान करना।
- कर्मचारियों का विकास (Development of Employees): प्रशिक्षण और विकास के अवसर प्रदान करके कर्मचारियों के कौशल और क्षमताओं को बढ़ाना।
- कर्मचारियों की संतुष्टि (Employee Satisfaction): कर्मचारियों को काम में संतुष्टि और पहचान प्रदान करना।
VI. व्यवसायिक जोखिम (Business Risks)
A. अर्थ (Meaning):
व्यवसायिक जोखिम का अर्थ है भविष्य की अनिश्चितताओं के कारण अपर्याप्त लाभ या हानि की संभावना। यह अप्रत्याशित घटनाओं के कारण होता है।
B. व्यवसायिक जोखिम की प्रकृति (Nature of Business Risks):
- अनिश्चितता के कारण (Arises due to Uncertainties): जोखिम भविष्य की अनिश्चित घटनाओं (जैसे प्राकृतिक आपदा, बाजार में बदलाव) के कारण उत्पन्न होता है।
- अपरिहार्य (Unavoidable): जोखिम व्यवसाय का एक अनिवार्य हिस्सा है, इसे पूरी तरह से समाप्त नहीं किया जा सकता।
- लाभ का प्रतिफल (Reward for Risk Taking): अधिक जोखिम उठाने वाले व्यवसाय को अधिक लाभ की संभावना होती है। "नो रिस्क, नो गेन।"
- जोखिम की मात्रा व्यवसाय के आकार पर निर्भर (Degree of Risk Depends on the Size of Business): बड़े व्यवसाय में आमतौर पर छोटे व्यवसाय की तुलना में अधिक जोखिम होता है।
C. व्यवसायिक जोखिम के कारण (Causes of Business Risks):
- प्राकृतिक कारण (Natural Causes): बाढ़, भूकंप, तूफान, सूखा जैसी प्राकृतिक आपदाएँ जो मानव नियंत्रण से बाहर होती हैं।
- मानवीय कारण (Human Causes): कर्मचारियों की लापरवाही, बेईमानी, हड़ताल, तालाबंदी, प्रबंधन की अक्षमता आदि।
- आर्थिक कारण (Economic Causes): बाजार में मांग में उतार-चढ़ाव, प्रतियोगिता में वृद्धि, मूल्य में परिवर्तन, सरकारी नीतियों में बदलाव, तकनीकी परिवर्तन।
- अन्य कारण (Other Causes): राजनीतिक अस्थिरता, यांत्रिक विफलताएँ, मुद्रा विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव आदि।
D. व्यवसायिक जोखिम के प्रकार (Types of Business Risks):
- शुद्ध जोखिम (Pure Risks): ये वे जोखिम हैं जिनमें या तो हानि होती है या कोई हानि नहीं होती (लाभ की कोई संभावना नहीं होती)।
- उदाहरण: आग लगना, चोरी होना, हड़ताल।
- सट्टा जोखिम (Speculative Risks): ये वे जोखिम हैं जिनमें लाभ या हानि दोनों की संभावना होती है।
- उदाहरण: बाजार की कीमतों में उतार-चढ़ाव, फैशन में बदलाव।
VII. व्यवसाय की शुरुआत के कारक (Factors to be considered before starting a Business)
एक नया व्यवसाय शुरू करने से पहले कई महत्वपूर्ण कारकों पर विचार करना आवश्यक है:
- व्यवसाय का चुनाव (Selection of Business): किस प्रकार का व्यवसाय शुरू करना है (उत्पादन, व्यापार, सेवाएँ)?
- व्यवसाय का आकार (Size of Business): बड़े पैमाने पर या छोटे पैमाने पर व्यवसाय शुरू करना है?
- स्वामित्व का स्वरूप (Form of Ownership): एकल स्वामित्व, साझेदारी, कंपनी आदि में से कौन सा स्वरूप चुनना है?
- स्थान का चुनाव (Location of Business): व्यवसाय के लिए उपयुक्त स्थान का चयन, जो कच्चे माल, बाजार, श्रम आदि तक पहुँच प्रदान करे।
- वित्तीय व्यवस्था (Financing): व्यवसाय के लिए आवश्यक पूंजी की व्यवस्था कैसे की जाएगी (स्वयं की पूंजी, ऋण आदि)?
- भौतिक सुविधाएँ (Physical Facilities): मशीनरी, उपकरण, भवन आदि की उपलब्धता और व्यवस्था।
- कार्यकुशल कर्मचारी (Competent and Committed Workforce): सही कौशल और अनुभव वाले कर्मचारियों की भर्ती।
- कर नियोजन (Tax Planning): करों के बोझ को कम करने के लिए उचित कर नियोजन।
- व्यवसाय शुरू करने की प्रक्रिया (Starting Procedure): कानूनी औपचारिकताएँ और पंजीकरण प्रक्रियाएँ।
VIII. उद्योग और वाणिज्य (Industry and Commerce)
व्यवसायिक क्रियाओं को मोटे तौर पर उद्योग और वाणिज्य में वर्गीकृत किया जा सकता है।
A. उद्योग (Industry):
उद्योग उन आर्थिक क्रियाओं से संबंधित है जो कच्चे माल को तैयार माल में परिवर्तित करती हैं या वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन करती हैं।
उद्योगों को उनकी प्रकृति के आधार पर तीन मुख्य श्रेणियों में बांटा गया है:
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प्राथमिक उद्योग (Primary Industry): ये उद्योग प्राकृतिक संसाधनों के निष्कर्षण और प्रजनन से संबंधित हैं।
- निष्कर्षण उद्योग (Extractive Industries): पृथ्वी, जल या वायु से कुछ निकालने से संबंधित।
- उदाहरण: खनन, मछली पकड़ना, कृषि।
- जननिक उद्योग (Genetic Industries): पौधों और जानवरों के प्रजनन और वृद्धि से संबंधित।
- उदाहरण: पशुपालन, मुर्गीपालन, पौधशालाएँ।
- निष्कर्षण उद्योग (Extractive Industries): पृथ्वी, जल या वायु से कुछ निकालने से संबंधित।
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द्वितीयक उद्योग (Secondary Industry): ये उद्योग प्राथमिक उद्योगों से प्राप्त सामग्री का उपयोग करके नए उत्पाद बनाते हैं।
- विनिर्माण उद्योग (Manufacturing Industries): कच्चे माल को तैयार माल में परिवर्तित करना।
- विश्लेषणात्मक उद्योग (Analytical Industry): एक ही मूल सामग्री से कई अलग-अलग उत्पाद बनाना। (जैसे: तेल रिफाइनरी - पेट्रोल, डीजल, केरोसिन)
- संश्लेषणात्मक उद्योग (Synthetical Industry): कई सामग्रियों को मिलाकर एक नया उत्पाद बनाना। (जैसे: सीमेंट उद्योग - चूना पत्थर, जिप्सम आदि से सीमेंट)
- प्रक्रियात्मक उद्योग (Processing Industry): उत्पादन कई चरणों से गुजरता है। (जैसे: चीनी उद्योग, कपड़ा उद्योग)
- संयोजन उद्योग (Assembling Industry): विभिन्न पूर्वनिर्मित पुर्जों को जोड़कर एक नया उत्पाद बनाना। (जैसे: कार, कंप्यूटर, टीवी)
- निर्माण उद्योग (Construction Industries): भवन, सड़क, पुल, बाँध आदि के निर्माण से संबंधित।
- विनिर्माण उद्योग (Manufacturing Industries): कच्चे माल को तैयार माल में परिवर्तित करना।
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तृतीयक उद्योग (Tertiary Industry) / सेवा उद्योग (Service Industry): ये उद्योग प्राथमिक और द्वितीयक उद्योगों को सहायता सेवाएँ प्रदान करते हैं।
- उदाहरण: परिवहन, बैंकिंग, बीमा, भंडारण, विज्ञापन, संचार।
B. वाणिज्य (Commerce):
वाणिज्य उन सभी गतिविधियों को शामिल करता है जो वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन के स्थान से उपभोग के स्थान तक निर्बाध प्रवाह को सुनिश्चित करती हैं। यह उत्पादन और उपभोग के बीच की बाधाओं को दूर करता है।
वाणिज्य के दो मुख्य घटक हैं:
-
व्यापार (Trade): वस्तुओं और सेवाओं की खरीद और बिक्री।
- आंतरिक व्यापार (Internal Trade): देश की सीमाओं के भीतर वस्तुओं की खरीद और बिक्री।
- थोक व्यापार (Wholesale Trade): बड़ी मात्रा में सामान खरीदना और छोटे व्यापारियों को बेचना।
- फुटकर व्यापार (Retail Trade): थोक व्यापारियों से सामान खरीदना और सीधे उपभोक्ताओं को बेचना।
- बाह्य व्यापार (External Trade): दो या दो से अधिक देशों के बीच वस्तुओं की खरीद और बिक्री।
- आयात (Import): दूसरे देश से सामान खरीदना।
- निर्यात (Export): दूसरे देश को सामान बेचना।
- पुनर्निर्यात (Entrepôt Trade): एक देश से सामान खरीदकर उसे थोड़ा संशोधित करके या बिना संशोधित किए किसी तीसरे देश को बेचना।
- आंतरिक व्यापार (Internal Trade): देश की सीमाओं के भीतर वस्तुओं की खरीद और बिक्री।
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व्यापार के सहायक (Auxiliaries to Trade): ये वे सेवाएँ हैं जो व्यापार को सुगम बनाती हैं और उत्पादन व उपभोग के बीच की बाधाओं को दूर करती हैं।
- परिवहन (Transport): स्थान की बाधा को दूर करता है।
- भंडारण (Warehousing): समय की बाधा को दूर करता है (जब उत्पादन होता है और जब उपभोग होता है)।
- बीमा (Insurance): जोखिम की बाधा को दूर करता है।
- बैंकिंग (Banking): वित्त की बाधा को दूर करता है।
- विज्ञापन (Advertising): सूचना की बाधा को दूर करता है।
- संचार (Communication): सूचना के आदान-प्रदान में मदद करता है।
IX. व्यवसाय, पेशा और रोज़गार में अंतर (Difference between Business, Profession and Employment)
| आधार | व्यवसाय (Business) | पेशा (Profession) | रोज़गार (Employment) |
|---|---|---|---|
| प्रारंभ | उद्यमी के निर्णय और कानूनी औपचारिकताओं से। | पेशेवर संस्था की सदस्यता और प्रमाण पत्र से। | नियुक्ति पत्र और सेवा समझौते से। |
| योग्यता | कोई न्यूनतम योग्यता आवश्यक नहीं (अनुभव महत्वपूर्ण)। | विशिष्ट ज्ञान, प्रशिक्षण और पेशेवर डिग्री आवश्यक। | नियोक्ता द्वारा निर्धारित योग्यता। |
| उद्देश्य | लाभ कमाना। | सेवा प्रदान करना। | वेतन/मजदूरी प्राप्त करना। |
| प्रतिफल | लाभ। | शुल्क (फीस)। | वेतन/मजदूरी। |
| पूंजी निवेश | पूंजी की आवश्यकता व्यवसाय के आकार पर निर्भर करती है। | सीमित पूंजी निवेश (कार्यालय स्थापित करने के लिए)। | कोई पूंजी निवेश नहीं। |
| जोखिम | उच्च जोखिम। | सीमित जोखिम (शुल्क न मिलने का जोखिम)। | कोई या बहुत कम जोखिम (वेतन न मिलने का जोखिम)। |
| स्थानांतरण | व्यवसाय का स्वामित्व हस्तांतरित किया जा सकता है। | पेशे को दूसरों को हस्तांतरित नहीं किया जा सकता। | रोज़गार को दूसरों को हस्तांतरित नहीं किया जा सकता। |
| आचार संहिता | कोई विशेष आचार संहिता नहीं। | पेशेवर संस्था द्वारा निर्धारित आचार संहिता का पालन। | नियोक्ता द्वारा निर्धारित नियम और शर्तें। |
यह विस्तृत नोट्स आपको अध्याय की गहरी समझ प्रदान करेंगे और सरकारी परीक्षाओं के लिए आपकी तैयारी में सहायक होंगे।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
आइए, अब इस अध्याय पर आधारित कुछ बहुविकल्पीय प्रश्न हल करें:
-
निम्नलिखित में से कौन-सी एक अन-आर्थिक क्रिया है?
a) एक फैक्ट्री में उत्पादन
b) एक डॉक्टर द्वारा मरीज का इलाज
c) एक माँ द्वारा अपने बच्चे के लिए खाना बनाना
d) एक दुकानदार द्वारा सामान बेचना -
व्यवसाय की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता क्या है?
a) एक बार का लेन-देन
b) अन-आर्थिक क्रिया
c) लाभ कमाने का उद्देश्य
d) सामाजिक सेवा -
एक पेशे के लिए क्या आवश्यक है?
a) नियमित वस्तुओं का उत्पादन
b) विशिष्ट ज्ञान और कौशल
c) किसी के अधीन कार्य करना
d) उच्च पूंजी निवेश -
जब कोई व्यक्ति दूसरों के लिए कार्य करता है और बदले में वेतन या मजदूरी प्राप्त करता है, तो उसे क्या कहते हैं?
a) व्यवसाय
b) पेशा
c) रोज़गार
d) उद्यमिता -
व्यवसाय का कौन सा उद्देश्य बाजार में बने रहने और विकास से संबंधित है?
a) सामाजिक उद्देश्य
b) मानवीय उद्देश्य
c) आर्थिक उद्देश्य
d) नैतिक उद्देश्य -
तेल रिफाइनरी किस प्रकार के उद्योग का उदाहरण है?
a) निष्कर्षण उद्योग
b) संश्लेषणात्मक उद्योग
c) विश्लेषणात्मक उद्योग
d) निर्माण उद्योग -
निम्नलिखित में से कौन सा व्यापार का सहायक नहीं है?
a) परिवहन
b) भंडारण
c) खनन
d) बीमा -
बाजार की कीमतों में उतार-चढ़ाव किस प्रकार के व्यवसायिक जोखिम का उदाहरण है?
a) शुद्ध जोखिम
b) सट्टा जोखिम
c) प्राकृतिक जोखिम
d) मानवीय जोखिम -
"नो रिस्क, नो गेन" (कोई जोखिम नहीं, कोई लाभ नहीं) कथन व्यवसायिक जोखिम की किस प्रकृति को दर्शाता है?
a) जोखिम अपरिहार्य है
b) जोखिम अनिश्चितता के कारण उत्पन्न होता है
c) जोखिम लाभ का प्रतिफल है
d) जोखिम की मात्रा व्यवसाय के आकार पर निर्भर करती है -
जब एक देश से सामान खरीदकर उसे थोड़ा संशोधित करके या बिना संशोधित किए किसी तीसरे देश को बेचा जाता है, तो उसे क्या कहते हैं?
a) आयात
b) निर्यात
c) पुनर्निर्यात
d) थोक व्यापार
उत्तरमाला:
- c) एक माँ द्वारा अपने बच्चे के लिए खाना बनाना
- c) लाभ कमाने का उद्देश्य
- b) विशिष्ट ज्ञान और कौशल
- c) रोज़गार
- c) आर्थिक उद्देश्य
- c) विश्लेषणात्मक उद्योग
- c) खनन
- b) सट्टा जोखिम
- c) जोखिम लाभ का प्रतिफल है
- c) पुनर्निर्यात
मुझे आशा है कि यह विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपको इस अध्याय को गहराई से समझने में मदद करेंगे। अपनी पढ़ाई जारी रखें और किसी भी प्रश्न के लिए पूछने में संकोच न करें। शुभकामनाएँ!