Class 11 Business Studies Notes Chapter 10 (आंतरिक व्यापार) – Vyavsay Adhyayan Book

Vyavsay Adhyayan
प्रिय विद्यार्थियों,

आज हम कक्षा 11 'व्यवसाय अध्ययन' के अध्याय 10, 'आंतरिक व्यापार' का विस्तार से अध्ययन करेंगे। यह अध्याय सरकारी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें व्यापार के मौलिक सिद्धांतों और भारत में इसके संचालन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी शामिल है। हम प्रत्येक बिंदु को गहराई से समझेंगे ताकि आपकी तैयारी पुख्ता हो सके।


अध्याय 10: आंतरिक व्यापार (Internal Trade)

1. प्रस्तावना (Introduction)

आंतरिक व्यापार से आशय देश की भौगोलिक सीमाओं के भीतर वस्तुओं और सेवाओं के क्रय-विक्रय से है। इसे 'घरेलू व्यापार' भी कहा जाता है। इसमें वस्तुओं का उत्पादन देश के भीतर होता है और उनका उपभोग भी देश के भीतर ही किया जाता है। यह व्यापार आमतौर पर राष्ट्रीय मुद्रा में होता है और इसमें कोई सीमा शुल्क या आयात-निर्यात शुल्क नहीं लगता।

2. आंतरिक व्यापार के प्रकार (Types of Internal Trade)

आंतरिक व्यापार को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बांटा जा सकता है:

A. थोक व्यापार (Wholesale Trade):
थोक व्यापार से आशय उस व्यापार से है जिसमें वस्तुओं को बड़ी मात्रा में उत्पादकों या निर्माताओं से खरीदा जाता है और फिर उन्हें छोटी-छोटी मात्रा में फुटकर व्यापारियों को बेचा जाता है, न कि सीधे अंतिम उपभोक्ताओं को।

  • थोक व्यापारी (Wholesaler): वह व्यक्ति या फर्म जो थोक व्यापार करता है। यह उत्पादक और फुटकर व्यापारी के बीच की कड़ी होता है।

  • थोक व्यापार की विशेषताएँ:

    • बड़ी मात्रा में क्रय-विक्रय: थोक व्यापारी बड़ी मात्रा में वस्तुएँ खरीदते और बेचते हैं।
    • सीमित वस्तुएँ: वे आमतौर पर कुछ विशेष प्रकार की वस्तुओं में ही डील करते हैं।
    • पूंजी की अधिक आवश्यकता: इस व्यापार में बड़ी मात्रा में स्टॉक रखने और उधार देने के लिए अधिक पूंजी की आवश्यकता होती है।
    • विज्ञापन कम: वे आमतौर पर अंतिम उपभोक्ताओं के लिए विज्ञापन नहीं करते।
    • मूल्य कम: थोक में खरीदने के कारण उन्हें वस्तुएँ कम कीमत पर मिलती हैं।
  • थोक व्यापारी द्वारा उत्पादकों/निर्माताओं को प्रदान की जाने वाली सेवाएँ:

    1. बड़े पैमाने पर उत्पादन में मदद: थोक व्यापारी बड़ी मात्रा में ऑर्डर देकर उत्पादकों को बड़े पैमाने पर उत्पादन करने में सक्षम बनाते हैं।
    2. जोखिम वहन: वे उत्पादकों से स्टॉक खरीदकर मूल्य में गिरावट, चोरी, आग आदि के जोखिम को वहन करते हैं।
    3. वित्तीय सहायता: वे अक्सर उत्पादकों को अग्रिम भुगतान करके या नकद खरीद करके वित्तीय सहायता प्रदान करते हैं।
    4. भंडारण सुविधा: वे उत्पादकों से बड़ी मात्रा में माल खरीदकर अपने गोदामों में रखते हैं, जिससे उत्पादकों को भंडारण की समस्या से मुक्ति मिलती है।
    5. बाजार सूचना: वे फुटकर व्यापारियों से प्राप्त बाजार की जानकारी उत्पादकों तक पहुँचाते हैं, जिससे उत्पादकों को अपनी नीतियों में सुधार करने में मदद मिलती है।
    6. उत्पादन में निरंतरता: वे लगातार ऑर्डर देकर उत्पादन प्रक्रिया को बनाए रखने में मदद करते हैं।
  • थोक व्यापारी द्वारा फुटकर व्यापारियों को प्रदान की जाने वाली सेवाएँ:

    1. वस्तुओं की उपलब्धता: वे फुटकर व्यापारियों को आवश्यकतानुसार विभिन्न प्रकार की वस्तुएँ उपलब्ध कराते हैं।
    2. विशेषज्ञता: वे फुटकर व्यापारियों को नई वस्तुओं, उनके उपयोग और बिक्री के तरीकों के बारे में जानकारी देते हैं।
    3. वित्तीय सहायता: वे अक्सर फुटकर व्यापारियों को उधार पर माल बेचकर वित्तीय सहायता प्रदान करते हैं।
    4. जोखिम वहन: वे फुटकर व्यापारियों को छोटी मात्रा में माल बेचकर उन्हें बड़ी मात्रा में स्टॉक रखने और उससे जुड़े जोखिमों से बचाते हैं।
    5. विपणन सहायता: वे कभी-कभी फुटकर व्यापारियों को वस्तुओं के प्रदर्शन और बिक्री में मदद करते हैं।
    6. बाजार की जानकारी: वे फुटकर व्यापारियों को बाजार की नई प्रवृत्तियों और उत्पादों के बारे में सूचित करते हैं।

B. फुटकर व्यापार (Retail Trade):
फुटकर व्यापार से आशय उस व्यापार से है जिसमें वस्तुओं को थोक व्यापारियों या उत्पादकों से खरीदा जाता है और फिर उन्हें अंतिम उपभोक्ताओं को उनकी व्यक्तिगत या घरेलू आवश्यकताओं के लिए बेचा जाता है।

  • फुटकर व्यापारी (Retailer): वह व्यक्ति या फर्म जो फुटकर व्यापार करता है। यह थोक व्यापारी और उपभोक्ता के बीच की अंतिम कड़ी होता है।

  • फुटकर व्यापार की विशेषताएँ:

    • छोटी मात्रा में क्रय-विक्रय: फुटकर व्यापारी छोटी मात्रा में वस्तुएँ खरीदते और बेचते हैं।
    • विभिन्न प्रकार की वस्तुएँ: वे आमतौर पर उपभोक्ताओं की दैनिक आवश्यकताओं की विभिन्न प्रकार की वस्तुएँ रखते हैं।
    • व्यक्तिगत संपर्क: उनका उपभोक्ताओं से सीधा और व्यक्तिगत संपर्क होता है।
    • सुविधा: वे उपभोक्ताओं को उनके घर के पास या सुविधाजनक स्थानों पर वस्तुएँ उपलब्ध कराते हैं।
    • बिक्री उपरांत सेवाएँ: कई फुटकर व्यापारी बिक्री उपरांत सेवाएँ (जैसे होम डिलीवरी, इंस्टॉलेशन) भी प्रदान करते हैं।
  • फुटकर व्यापारी द्वारा थोक व्यापारियों/उत्पादकों को प्रदान की जाने वाली सेवाएँ:

    1. वितरण में मदद: वे उत्पादकों और थोक व्यापारियों को दूर-दराज के उपभोक्ताओं तक पहुँचने में मदद करते हैं।
    2. व्यक्तिगत बिक्री: वे उपभोक्ताओं से सीधा संपर्क स्थापित करके वस्तुओं की व्यक्तिगत बिक्री करते हैं।
    3. बाजार सूचना: वे उपभोक्ताओं की पसंद, नापसंद और बाजार की प्रवृत्तियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी थोक व्यापारियों/उत्पादकों तक पहुँचाते हैं।
    4. मांग में वृद्धि: वे वस्तुओं का आकर्षक प्रदर्शन और व्यक्तिगत बिक्री करके मांग बढ़ाने में मदद करते हैं।
    5. भंडारण में मदद: वे थोक व्यापारियों से छोटी मात्रा में माल खरीदकर उनके भंडारण भार को कम करते हैं।
  • फुटकर व्यापारी द्वारा उपभोक्ताओं को प्रदान की जाने वाली सेवाएँ:

    1. वस्तुओं की उपलब्धता: वे उपभोक्ताओं को उनकी आवश्यकतानुसार वस्तुएँ आसानी से उपलब्ध कराते हैं।
    2. चयन की सुविधा: वे विभिन्न ब्रांडों और किस्मों की वस्तुएँ रखकर उपभोक्ताओं को चयन की सुविधा प्रदान करते हैं।
    3. बिक्री उपरांत सेवाएँ: वे होम डिलीवरी, मरम्मत, इंस्टॉलेशन जैसी सेवाएँ प्रदान करते हैं।
    4. ऋण सुविधा: कई फुटकर व्यापारी अपने नियमित ग्राहकों को उधार पर वस्तुएँ भी देते हैं।
    5. जानकारी: वे नई वस्तुओं, उनके उपयोग और लाभों के बारे में जानकारी प्रदान करते हैं।
    6. सुविधाजनक स्थान और समय: वे आमतौर पर उपभोक्ताओं के लिए सुविधाजनक स्थानों और समय पर उपलब्ध होते हैं।

3. फुटकर व्यापारियों के प्रकार (Types of Retailers)

फुटकर व्यापारियों को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बांटा जा सकता है:

A. भ्रमणशील फुटकर व्यापारी (Itinerant Retailers):
ये वे व्यापारी होते हैं जिनकी कोई निश्चित दुकान या स्थान नहीं होता। वे एक स्थान से दूसरे स्थान पर घूमकर या अस्थायी रूप से अपनी वस्तुएँ बेचते हैं।

  • विशेषताएँ:

    • निश्चित दुकान नहीं।
    • कम पूंजी की आवश्यकता।
    • सीमित स्टॉक और कम कीमत वाली वस्तुएँ बेचते हैं।
    • कम आय वाले ग्राहकों को सेवाएँ प्रदान करते हैं।
  • प्रकार:

    1. फेरीवाले (Hawkers): ये घर-घर जाकर या गलियों में घूमकर वस्तुएँ बेचते हैं (जैसे सब्जी, फल, बर्तन)।
    2. पटरी व्यापारी (Peddlers): ये सड़क किनारे, फुटपाथ पर या सार्वजनिक स्थानों पर अपनी वस्तुएँ (जैसे खिलौने, छोटे-मोटे सामान) बेचते हैं।
    3. साप्ताहिक हाट व्यापारी (Market Traders): ये साप्ताहिक या मासिक बाजारों में अस्थायी दुकानें लगाते हैं और वस्तुओं का विक्रय करते हैं।
    4. कम कीमत की दुकान वाले (Cheap Jacks): ये अस्थायी दुकानें लगाते हैं और एक स्थान पर कुछ समय रहने के बाद दूसरे स्थान पर चले जाते हैं। ये आमतौर पर सस्ते और गैर-ब्रांडेड उत्पाद बेचते हैं।

B. स्थायी दुकान वाले फुटकर व्यापारी (Fixed Shop Retailers):
ये वे व्यापारी होते हैं जिनकी एक निश्चित दुकान या स्थान होता है जहाँ से वे अपना व्यापार करते हैं। इन्हें आगे दो उप-श्रेणियों में बांटा जा सकता है:

  • छोटे स्थायी दुकान वाले (Small Fixed Shops):

    1. सामान्य भंडार (General Stores): ये छोटी दुकानें होती हैं जो दैनिक आवश्यकता की सभी प्रकार की वस्तुएँ (किराने का सामान, स्टेशनरी, सौंदर्य उत्पाद) बेचती हैं। ये आमतौर पर आवासीय क्षेत्रों में होते हैं।
    2. विशिष्ट दुकान (Speciality Shops): ये दुकानें किसी एक विशेष उत्पाद वर्ग में विशेषज्ञता रखती हैं (जैसे केवल जूते, केवल कपड़े, केवल इलेक्ट्रॉनिक्स)।
    3. सड़क के किनारे की दुकान (Street Stall Holders): ये छोटी दुकानें या स्टॉल होते हैं जो सड़क किनारे या भीड़भाड़ वाले स्थानों पर चाय, पान, सिगरेट, समाचार पत्र आदि बेचते हैं।
    4. पुरानी वस्तुओं की दुकान (Second-Hand Goods Shops): ये दुकानें पुरानी या इस्तेमाल की हुई वस्तुएँ (जैसे फर्नीचर, किताबें, कपड़े) बेचती हैं।
  • बड़े स्थायी दुकान वाले (Large Fixed Shops):

    1. विभागीय भंडार (Departmental Stores):

      • परिभाषा: एक ही छत के नीचे विभिन्न प्रकार की वस्तुएँ बेचने वाले बड़े फुटकर प्रतिष्ठान, जहाँ प्रत्येक वस्तु वर्ग के लिए अलग-अलग विभाग होते हैं।
      • विशेषताएँ: बड़े पैमाने पर संचालन, केंद्रीयकृत क्रय और विकेन्द्रीकृत विक्रय, उच्च आय वर्ग के ग्राहकों को आकर्षित करते हैं, विभिन्न सेवाएँ (रेस्तरां, डाकघर, टेलीफोन बूथ) प्रदान करते हैं।
      • लाभ: ग्राहकों के लिए सुविधा, व्यापक चयन, विभिन्न सेवाएँ, प्रतिष्ठा।
      • हानि: उच्च परिचालन लागत, व्यक्तिगत ध्यान की कमी, स्थान की समस्या, प्रबंधन में जटिलता।
    2. श्रृंखला भंडार/बहुसंख्यक दुकानें (Chain Stores/Multiple Shops):

      • परिभाषा: एक ही प्रबंधन और स्वामित्व के तहत संचालित कई दुकानें, जो समान प्रकार की वस्तुएँ समान मूल्य पर बेचती हैं। (जैसे बाटा, रिलायंस फ्रेश)
      • विशेषताएँ: केंद्रीयकृत क्रय, विकेन्द्रीकृत विक्रय, सभी शाखाओं में समान सजावट और प्रदर्शन, नकद बिक्री पर जोर, सीमित वस्तुएँ।
      • लाभ: पैमाने की मितव्ययिता, जोखिम का फैलाव, ब्रांड पहचान, कम परिचालन लागत (उधार नहीं), प्रभावी विज्ञापन।
      • हानि: व्यक्तिगत पहल की कमी, स्थानीय आवश्यकताओं की उपेक्षा, स्टॉक प्रबंधन की समस्या, ग्राहकों को उधार सुविधा नहीं।
    3. मेल ऑर्डर हाउस (Mail Order Houses):

      • परिभाषा: ऐसे फुटकर प्रतिष्ठान जो डाक द्वारा वस्तुओं का विक्रय करते हैं। वे कैटलॉग, विज्ञापन या मूल्य सूची भेजकर ऑर्डर प्राप्त करते हैं और डाक द्वारा वस्तुएँ भेजते हैं।
      • विशेषताएँ: कोई व्यक्तिगत संपर्क नहीं, दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुँच, नकद भुगतान (V.P.P. - Value Payable Post) या ऑनलाइन भुगतान।
      • लाभ: व्यापक भौगोलिक पहुँच, कम परिचालन लागत (कोई दुकान नहीं), सुविधाजनक।
      • हानि: व्यक्तिगत संपर्क का अभाव, वस्तु को छूकर या देखकर न खरीद पाना, वापसी की समस्या, क्रेडिट सुविधा नहीं।
    4. उपभोक्ता सहकारी भंडार (Consumer Cooperative Stores):

      • परिभाषा: उपभोक्ताओं द्वारा स्वयं के लाभ के लिए स्थापित और संचालित भंडार, जहाँ सदस्य ही मालिक होते हैं।
      • विशेषताएँ: सदस्य ही मालिक और ग्राहक, कम लाभ पर वस्तुएँ बेचना, गुणवत्ता पर जोर, मध्यस्थों का अंत।
      • लाभ: कम कीमत, गुणवत्तापूर्ण वस्तुएँ, मध्यस्थों का अंत, सदस्यों को लाभांश।
      • हानि: सीमित पूंजी, प्रबंधन की समस्या, सदस्यों की उदासीनता, राजनीतिक हस्तक्षेप।
    5. सुपर बाजार (Super Markets):

      • परिभाषा: बड़े पैमाने पर फुटकर बिक्री करने वाले प्रतिष्ठान जो 'स्वयं सेवा' (self-service) अवधारणा पर आधारित होते हैं और दैनिक आवश्यकता की विभिन्न प्रकार की वस्तुएँ बेचते हैं।
      • विशेषताएँ: बड़े पैमाने पर संचालन, स्वयं सेवा, कम कीमत, नकद बिक्री, व्यापक चयन, आकर्षक प्रदर्शन।
      • लाभ: कम कीमत, व्यापक चयन, सुविधाजनक खरीदारी, कोई उधार नहीं, कम परिचालन लागत।
      • हानि: व्यक्तिगत ध्यान का अभाव, बिक्री उपरांत सेवाओं की कमी, दूरदराज के क्षेत्रों के लिए नहीं, उच्च प्रारंभिक लागत।
    6. स्वचालित विक्रय मशीन (Vending Machines):

      • परिभाषा: ऐसी मशीनें जिनमें सिक्का डालने पर वस्तुएँ (जैसे कोल्ड ड्रिंक, चॉकलेट, कॉफी, टिकट) स्वचालित रूप से बाहर आ जाती हैं।
      • विशेषताएँ: 24 घंटे उपलब्धता, मानकीकृत वस्तुएँ, छोटे मूल्य की वस्तुएँ, कम श्रम लागत।
      • लाभ: सुविधा, 24 घंटे उपलब्धता, श्रम लागत कम, मानकीकृत उत्पाद।
      • हानि: उच्च प्रारंभिक लागत, सीमित वस्तुएँ, तकनीकी खराबी की संभावना, रखरखाव की आवश्यकता।
    7. ऑनलाइन शॉपिंग (Online Shopping/E-tailing):

      • परिभाषा: इंटरनेट के माध्यम से वस्तुओं और सेवाओं का क्रय-विक्रय।
      • विशेषताएँ: व्यापक पहुँच, 24/7 उपलब्धता, विभिन्न भुगतान विकल्प, घर पर डिलीवरी।
      • लाभ: सुविधा, व्यापक चयन, घर बैठे खरीदारी, समय की बचत।
      • हानि: वस्तु को छूकर या देखकर न खरीद पाना, वापसी की समस्या, साइबर सुरक्षा जोखिम, डिलीवरी में देरी।

4. वस्तु एवं सेवा कर (GST - Goods and Services Tax)

GST भारत में 1 जुलाई 2017 को लागू किया गया एक व्यापक, बहु-स्तरीय, गंतव्य-आधारित कर है। इसने भारत में कई अप्रत्यक्ष करों (जैसे उत्पाद शुल्क, सेवा कर, वैट) को प्रतिस्थापित किया है, जिससे 'एक राष्ट्र, एक कर' की अवधारणा को बल मिला है।

  • उद्देश्य:

    • करों के जटिल जाल को सरल बनाना।
    • कैस्केडिंग प्रभाव (कर पर कर) को समाप्त करना।
    • व्यापार में आसानी (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देना।
    • कर आधार का विस्तार करना।
    • राजस्व में वृद्धि करना।
  • GST के प्रकार (भारत में):

    1. CGST (Central Goods and Services Tax): केंद्र सरकार द्वारा राज्य के भीतर (intra-state) वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति पर लगाया और एकत्र किया जाता है।
    2. SGST (State Goods and Services Tax): राज्य सरकार द्वारा राज्य के भीतर (intra-state) वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति पर लगाया और एकत्र किया जाता है।
    3. IGST (Integrated Goods and Services Tax): केंद्र सरकार द्वारा अंतर-राज्यीय (inter-state) वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति पर लगाया और एकत्र किया जाता है। बाद में इसे संबंधित राज्यों के साथ साझा किया जाता है।
    4. UTGST (Union Territory Goods and Services Tax): केंद्र शासित प्रदेशों (जिनमें विधानमंडल नहीं है) में SGST के स्थान पर लगाया जाता है।
  • GST के लाभ:

    • सरलीकरण: विभिन्न अप्रत्यक्ष करों को एक कर में समाहित किया।
    • कैस्केडिंग प्रभाव का अंत: वस्तुओं की लागत कम हुई।
    • पारदर्शिता: कर प्रणाली में अधिक पारदर्शिता आई।
    • व्यापार में आसानी: पूरे देश में एक समान कर दरें होने से व्यापार करना आसान हुआ।
    • मेक इन इंडिया को बढ़ावा: घरेलू उद्योगों को बढ़ावा मिला।
    • कर आधार का विस्तार: अधिक व्यवसायों को कर के दायरे में लाया गया।

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) - 10 प्रश्न

  1. निम्न में से कौन थोक व्यापार की मुख्य विशेषता है?
    A) अंतिम उपभोक्ता को सीधे वस्तुएँ बेचना
    B) बड़ी मात्रा में वस्तुओं का क्रय-विक्रय
    C) बिक्री उपरांत सेवाएँ प्रदान करना
    D) व्यक्तिगत संपर्क पर अधिक जोर

  2. भ्रमणशील फुटकर व्यापारी का उदाहरण नहीं है:
    A) फेरीवाला
    B) पटरी व्यापारी
    C) साप्ताहिक हाट व्यापारी
    D) विभागीय भंडार

  3. एक ही छत के नीचे विभिन्न प्रकार की वस्तुएँ बेचने वाला बड़ा फुटकर प्रतिष्ठान, जहाँ प्रत्येक वस्तु वर्ग के लिए अलग-अलग विभाग होते हैं, कहलाता है:
    A) श्रृंखला भंडार
    B) सुपर बाजार
    C) विभागीय भंडार
    D) उपभोक्ता सहकारी भंडार

  4. श्रृंखला भंडार की मुख्य विशेषता क्या है?
    A) स्थानीय आवश्यकताओं पर अधिक ध्यान देना
    B) केंद्रीयकृत क्रय और विकेन्द्रीकृत विक्रय
    C) क्रेडिट पर बिक्री को बढ़ावा देना
    D) उच्च परिचालन लागत

  5. डाक द्वारा वस्तुओं का विक्रय करने वाला फुटकर व्यापारी कौन सा है?
    A) सुपर बाजार
    B) मेल ऑर्डर हाउस
    C) विभागीय भंडार
    D) उपभोक्ता सहकारी भंडार

  6. उपभोक्ताओं द्वारा स्वयं के लाभ के लिए स्थापित और संचालित भंडार को क्या कहते हैं?
    A) विभागीय भंडार
    B) श्रृंखला भंडार
    C) उपभोक्ता सहकारी भंडार
    D) सुपर बाजार

  7. भारत में वस्तु एवं सेवा कर (GST) कब लागू हुआ?
    A) 1 अप्रैल 2017
    B) 1 जुलाई 2017
    C) 1 जनवरी 2018
    D) 1 अगस्त 2017

  8. अंतर-राज्यीय (Inter-state) वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति पर केंद्र सरकार द्वारा कौन सा GST लगाया और एकत्र किया जाता है?
    A) CGST
    B) SGST
    C) IGST
    D) UTGST

  9. निम्न में से कौन सी सेवा थोक व्यापारी द्वारा उत्पादकों को प्रदान नहीं की जाती है?
    A) बड़े पैमाने पर उत्पादन में मदद
    B) भंडारण सुविधा
    C) व्यक्तिगत बिक्री और घर-घर डिलीवरी
    D) वित्तीय सहायता

  10. 'स्वयं सेवा' (self-service) अवधारणा पर आधारित बड़े पैमाने पर फुटकर बिक्री करने वाला प्रतिष्ठान कौन सा है?
    A) विभागीय भंडार
    B) श्रृंखला भंडार
    C) सुपर बाजार
    D) स्वचालित विक्रय मशीन

उत्तरमाला:

  1. B
  2. D
  3. C
  4. B
  5. B
  6. C
  7. B
  8. C
  9. C
  10. C

मुझे आशा है कि ये विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपकी सरकारी परीक्षा की तैयारी में अत्यंत सहायक सिद्ध होंगे। किसी भी संदेह या अतिरिक्त जानकारी के लिए आप पूछ सकते हैं। शुभकामनाएँ!

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