Class 11 Business Studies Notes Chapter 12 (अंतर्राष्ट्रीय व्यापार 2) – Vyavsay Adhyayan Book

प्रिय विद्यार्थियों,
आज हम आपकी 'व्यवसाय अध्ययन' पुस्तक के अध्याय 12, 'अंतर्राष्ट्रीय व्यापार 2' का विस्तृत अध्ययन करेंगे। यह अध्याय अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की प्रक्रियाओं, संबंधित दस्तावेज़ों और विश्व व्यापार संगठन (WTO) जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को गहराई से समझाता है, जो प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
अध्याय 12: अंतर्राष्ट्रीय व्यापार 2
यह अध्याय मुख्य रूप से निर्यात और आयात प्रक्रियाओं, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में प्रयुक्त होने वाले विभिन्न दस्तावेज़ों और विश्व व्यापार संगठन (WTO) की भूमिका पर केंद्रित है।
1. निर्यात व्यापार प्रक्रिया (Export Trade Procedure)
निर्यात व्यापार प्रक्रिया में कई चरण शामिल होते हैं, जो एक देश से दूसरे देश में माल भेजने के लिए आवश्यक होते हैं।
- 1. व्यापार पूछताछ और आदेश प्राप्त करना (Trade Enquiry and Receiving Order):
- निर्यातकर्ता को संभावित आयातक से पूछताछ प्राप्त होती है।
- निर्यातकर्ता आयातक को प्रोफार्मा चालान (Proforma Invoice) भेजता है, जिसमें माल की कीमत, गुणवत्ता, शर्तें आदि का विवरण होता है।
- आयातक द्वारा आदेश (Indent/Purchase Order) भेजने पर निर्यात प्रक्रिया शुरू होती है।
- 2. साख पत्र प्राप्त करना (Obtaining Letter of Credit - L/C):
- आयातक अपने बैंक से साख पत्र (L/C) प्राप्त करता है, जो निर्यातकर्ता के बैंक को भेजा जाता है।
- साख पत्र एक गारंटी है कि आयातक का बैंक निर्यातकर्ता को भुगतान करेगा, बशर्ते निर्यातकर्ता L/C की शर्तों के अनुसार दस्तावेज़ प्रस्तुत करे। यह निर्यातकर्ता के लिए भुगतान सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
- 3. निर्यात लाइसेंस प्राप्त करना (Obtaining Export License):
- कुछ विशेष वस्तुओं के निर्यात के लिए सरकार से निर्यात लाइसेंस प्राप्त करना अनिवार्य होता है।
- 4. पूर्व-प्रेषण वित्त प्राप्त करना (Obtaining Pre-shipment Finance):
- माल के उत्पादन, पैकेजिंग, परिवहन आदि के लिए निर्यातकर्ता बैंक से ऋण (Pre-shipment Finance) प्राप्त करता है। यह अक्सर साख पत्र के आधार पर दिया जाता है।
- 5. माल का उत्पादन या खरीद (Production or Procurement of Goods):
- निर्यातकर्ता आदेश के अनुसार माल का उत्पादन करता है या बाजार से खरीदता है।
- 6. पूर्व-प्रेषण निरीक्षण (Pre-shipment Inspection):
- कुछ देशों या वस्तुओं के लिए, माल की गुणवत्ता और मात्रा का निरीक्षण एक अधिकृत एजेंसी द्वारा किया जाना अनिवार्य होता है। यह सुनिश्चित करता है कि माल अनुबंध की शर्तों के अनुरूप है।
- 7. उत्पाद शुल्क निकासी (Excise Duty Clearance):
- यदि निर्यातित माल पर उत्पाद शुल्क लगता है, तो निर्यातकर्ता को इसका भुगतान करना होता है या छूट (rebate) के लिए आवेदन करना होता है।
- 8. पैकिंग, लेबलिंग और चिन्हांकन (Packing, Labeling and Marking):
- माल को अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुसार पैक किया जाता है ताकि पारगमन के दौरान क्षति से बचा जा सके। उचित लेबलिंग और चिन्हांकन (जैसे गंतव्य बंदरगाह, आयातक का नाम, हैंडलिंग निर्देश) आवश्यक है।
- 9. बीमा (Insurance):
- माल को समुद्री/वायुमार्ग बीमा द्वारा कवर किया जाता है ताकि पारगमन के दौरान किसी भी नुकसान या क्षति से सुरक्षा मिल सके।
- 10. फ्रेट फारवर्डर की नियुक्ति (Appointment of Freight Forwarder):
- निर्यातकर्ता फ्रेट फारवर्डर की सेवाएं ले सकता है, जो शिपिंग, दस्तावेज़ तैयार करने और सीमा शुल्क निकासी में विशेषज्ञ होता है।
- 11. सीमा शुल्क निकासी (Customs Clearance):
- निर्यातकर्ता को सीमा शुल्क विभाग से माल की निकासी करानी होती है। इसके लिए शिपिंग बिल (Shipping Bill) और अन्य आवश्यक दस्तावेज़ प्रस्तुत करने होते हैं।
- 12. जहाज पर लदान (Loading on Ship/Aircraft):
- सीमा शुल्क निकासी के बाद, माल को जहाज या विमान पर लादा जाता है। पोर्ट अथॉरिटी से डॉक रसीद (Dock Receipt) प्राप्त होती है।
- 13. पोत-पत्र/वायुमार्ग बिल प्राप्त करना (Obtaining Bill of Lading/Airway Bill):
- शिपिंग कंपनी माल प्राप्त करने के बाद पोत-पत्र (Bill of Lading) या एयरलाइन कंपनी वायुमार्ग बिल (Airway Bill) जारी करती है। यह माल की प्राप्ति का प्रमाण और एक स्वामित्व दस्तावेज़ है।
- 14. दस्तावेज़ों का बैंक को प्रस्तुतीकरण (Presentation of Documents to Bank):
- निर्यातकर्ता सभी आवश्यक दस्तावेज़ (जैसे वाणिज्यिक चालान, पैकिंग सूची, उत्पत्ति का प्रमाण पत्र, बीमा पॉलिसी, पोत-पत्र, विनिमय बिल) अपने बैंक को प्रस्तुत करता है।
- 15. भुगतान प्राप्त करना (Receiving Payment):
- निर्यातकर्ता का बैंक दस्तावेज़ों को आयातक के बैंक को भेजता है। आयातक के बैंक द्वारा भुगतान प्राप्त होने पर, निर्यातकर्ता को उसका भुगतान प्राप्त होता है।
2. आयात व्यापार प्रक्रिया (Import Trade Procedure)
आयात व्यापार प्रक्रिया में एक देश में माल लाने के लिए कई चरण शामिल होते हैं।
- 1. व्यापार पूछताछ (Trade Enquiry):
- आयातक विभिन्न निर्यातकों से माल की कीमत, गुणवत्ता, वितरण की शर्तों आदि के बारे में जानकारी प्राप्त करता है।
- 2. आयात लाइसेंस प्राप्त करना (Obtaining Import License):
- कुछ वस्तुओं के आयात के लिए सरकार से आयात लाइसेंस प्राप्त करना अनिवार्य होता है।
- 3. विदेशी मुद्रा प्राप्त करना (Obtaining Foreign Exchange):
- आयातक को निर्यातकर्ता को भुगतान करने के लिए विदेशी मुद्रा की आवश्यकता होती है, जिसे वह अपने बैंक से प्राप्त करता है। इसके लिए भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के नियमों का पालन करना होता है।
- 4. आदेश देना (Placing Order/Indent):
- आयातक निर्यातकर्ता को खरीद आदेश (Indent) भेजता है, जिसमें माल का विवरण, कीमत, वितरण की शर्तें आदि शामिल होती हैं।
- 5. साख पत्र प्राप्त करना (Obtaining Letter of Credit - L/C):
- आयातक अपने बैंक से साख पत्र (L/C) प्राप्त करता है और उसे निर्यातकर्ता के बैंक को भेजता है, ताकि निर्यातकर्ता को भुगतान की सुरक्षा मिल सके।
- 6. शिपिंग दस्तावेज़ प्राप्त करना (Receiving Shipping Documents):
- निर्यातकर्ता द्वारा माल भेजने के बाद, आयातक को निर्यातकर्ता के बैंक के माध्यम से शिपिंग दस्तावेज़ (जैसे पोत-पत्र, वाणिज्यिक चालान, पैकिंग सूची, उत्पत्ति का प्रमाण पत्र) प्राप्त होते हैं।
- 7. माल का आगमन (Arrival of Goods):
- आयातित माल गंतव्य बंदरगाह या हवाई अड्डे पर पहुंचता है।
- 8. सुपुर्दगी आदेश प्राप्त करना (Obtaining Delivery Order):
- आयातक अपने बैंक से पोत-पत्र पर बेचान (endorsement) करवाता है और शिपिंग कंपनी को प्रस्तुत करके सुपुर्दगी आदेश (Delivery Order) प्राप्त करता है।
- 9. सीमा शुल्क निकासी (Customs Clearance):
- आयातक को सीमा शुल्क विभाग से माल की निकासी करानी होती है। इसके लिए आयात बिल (Bill of Entry) और अन्य आवश्यक दस्तावेज़ प्रस्तुत करने होते हैं। आयात शुल्क का भुगतान करना होता है।
- 10. माल की सुपुर्दगी (Delivery of Goods):
- सीमा शुल्क निकासी के बाद, आयातक माल को बंदरगाह/हवाई अड्डे से प्राप्त करता है और अपने गोदाम तक पहुंचाता है।
3. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के महत्वपूर्ण दस्तावेज़ (Important Documents in International Trade)
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में कई दस्तावेज़ों का उपयोग होता है, जो कानूनी और वाणिज्यिक आवश्यकताओं को पूरा करते हैं।
- 1. वाणिज्यिक चालान (Commercial Invoice):
- निर्यातकर्ता द्वारा तैयार किया जाता है, जिसमें बेचे गए माल का विस्तृत विवरण, मात्रा, कीमत, भुगतान की शर्तें आदि होती हैं। यह माल की बिक्री का प्रमाण है।
- 2. पैकिंग सूची (Packing List):
- प्रत्येक पैकेज में रखे गए माल का विस्तृत विवरण, उसकी मात्रा और वजन दर्शाता है।
- 3. उत्पत्ति का प्रमाण पत्र (Certificate of Origin):
- यह प्रमाणित करता है कि माल किस देश में उत्पादित, संसाधित या निर्मित किया गया है। यह अक्सर टैरिफ वरीयताओं का लाभ उठाने के लिए आवश्यक होता है।
- 4. निरीक्षण का प्रमाण पत्र (Certificate of Inspection):
- एक अधिकृत एजेंसी द्वारा जारी किया जाता है, जो प्रमाणित करता है कि माल की गुणवत्ता, मात्रा और पैकेजिंग अनुबंध की शर्तों के अनुरूप है।
- 5. पोत-पत्र (Bill of Lading - B/L):
- शिपिंग कंपनी द्वारा जारी किया गया एक दस्तावेज़ जो माल की प्राप्ति, गंतव्य तक परिवहन के अनुबंध और माल के स्वामित्व का प्रमाण होता है। यह एक परक्राम्य दस्तावेज़ (negotiable document) है।
- 6. वायुमार्ग बिल (Airway Bill - AWB):
- एयरलाइन कंपनी द्वारा जारी किया जाता है, यह हवाई मार्ग से भेजे गए माल की प्राप्ति का प्रमाण और परिवहन का अनुबंध है। यह पोत-पत्र के विपरीत, स्वामित्व का प्रमाण नहीं होता है।
- 7. समुद्री बीमा पॉलिसी (Marine Insurance Policy):
- बीमा कंपनी द्वारा जारी की जाती है, जो पारगमन के दौरान माल को होने वाले नुकसान या क्षति से सुरक्षा प्रदान करती है।
- 8. साख पत्र (Letter of Credit - L/C):
- आयातक के बैंक द्वारा जारी एक दस्तावेज़, जो निर्यातकर्ता को एक निश्चित राशि का भुगतान करने की गारंटी देता है, बशर्ते निर्यातकर्ता L/C में उल्लिखित सभी शर्तों को पूरा करे और दस्तावेज़ प्रस्तुत करे।
- 9. विनिमय बिल (Bill of Exchange):
- निर्यातकर्ता द्वारा आयातक पर लिखा गया एक शर्त रहित लिखित आदेश, जिसमें आयातक को एक निश्चित तिथि पर या मांग पर एक निश्चित राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया जाता है।
- 10. शिपिंग बिल (Shipping Bill):
- निर्यातकर्ता द्वारा सीमा शुल्क विभाग को प्रस्तुत किया जाने वाला एक महत्वपूर्ण दस्तावेज़, जिसमें निर्यात किए जाने वाले माल का विवरण होता है। यह निर्यात निकासी के लिए आवश्यक है।
- 11. आयात बिल (Bill of Entry):
- आयातक द्वारा सीमा शुल्क विभाग को प्रस्तुत किया जाने वाला एक महत्वपूर्ण दस्तावेज़, जिसमें आयात किए जाने वाले माल का विवरण होता है। यह आयात निकासी के लिए आवश्यक है।
- 12. डॉक रसीद (Dock Receipt):
- पोर्ट अथॉरिटी द्वारा जारी किया जाता है, जो यह प्रमाणित करता है कि माल को जहाज पर लादने के लिए डॉक पर प्राप्त कर लिया गया है।
4. विश्व व्यापार संगठन (World Trade Organization - WTO)
- स्थापना (Establishment):
- WTO की स्थापना 1 जनवरी, 1995 को हुई थी।
- इसने टैरिफ और व्यापार पर सामान्य समझौता (General Agreement on Tariffs and Trade - GATT) का स्थान लिया, जो 1948 में स्थापित हुआ था।
- WTO का मुख्यालय जिनेवा, स्विट्जरलैंड में है।
- उद्देश्य (Objectives):
- अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को उदार बनाना और व्यापार बाधाओं को कम करना।
- जीवन स्तर में वृद्धि, पूर्ण रोजगार और आय व प्रभावी मांग के बड़े और बढ़ते स्तर को सुनिश्चित करना।
- वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन और व्यापार का विस्तार करना।
- संसाधनों का इष्टतम उपयोग सुनिश्चित करना और सतत विकास को बढ़ावा देना।
- विकासशील देशों को अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में अधिक भागीदारी के अवसर प्रदान करना।
- कार्य (Functions):
- बहुपक्षीय व्यापार समझौतों के कार्यान्वयन, प्रशासन और संचालन की सुविधा प्रदान करना।
- बहुपक्षीय व्यापार वार्ताओं के लिए एक मंच प्रदान करना।
- व्यापार संबंधी विवादों को हल करना (विवाद निपटान तंत्र)।
- राष्ट्रीय व्यापार नीतियों की समीक्षा करना।
- अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक (World Bank) जैसे अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के साथ सहयोग करना।
- भारत और WTO (India and WTO):
- भारत GATT का संस्थापक सदस्य था और WTO का भी संस्थापक सदस्य है।
- भारत WTO के विभिन्न समझौतों का पालन करता है और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए सक्रिय रूप से भाग लेता है।
- WTO के प्रावधानों ने भारत को अपनी अर्थव्यवस्था को उदार बनाने और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में अधिक एकीकृत होने में मदद की है।
बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions - MCQs)
-
निम्नलिखित में से कौन सा दस्तावेज़ निर्यातकर्ता द्वारा आयातक को भेजा जाता है जिसमें माल की कीमत और शर्तें शामिल होती हैं?
a) पोत-पत्र
b) साख पत्र
c) प्रोफार्मा चालान
d) आयात बिल -
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में भुगतान की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आयातक द्वारा अपने बैंक से प्राप्त किया जाने वाला दस्तावेज़ कौन सा है?
a) वाणिज्यिक चालान
b) साख पत्र
c) उत्पत्ति का प्रमाण पत्र
d) शिपिंग बिल -
निर्यात किए जाने वाले माल की सीमा शुल्क निकासी के लिए निर्यातकर्ता द्वारा प्रस्तुत किया जाने वाला मुख्य दस्तावेज़ कौन सा है?
a) आयात बिल
b) शिपिंग बिल
c) डॉक रसीद
d) विनिमय बिल -
वह दस्तावेज़ जो यह प्रमाणित करता है कि माल किस देश में उत्पादित हुआ है, कहलाता है:
a) निरीक्षण का प्रमाण पत्र
b) पैकिंग सूची
c) उत्पत्ति का प्रमाण पत्र
d) समुद्री बीमा पॉलिसी -
विश्व व्यापार संगठन (WTO) की स्थापना किस वर्ष हुई थी?
a) 1948
b) 1995
c) 1971
d) 2001 -
निम्नलिखित में से कौन सा WTO का एक मुख्य उद्देश्य नहीं है?
a) अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को उदार बनाना
b) व्यापार बाधाओं को कम करना
c) विशिष्ट देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देना
d) जीवन स्तर में वृद्धि सुनिश्चित करना -
आयातित माल की सीमा शुल्क निकासी के लिए आयातक द्वारा प्रस्तुत किया जाने वाला मुख्य दस्तावेज़ कौन सा है?
a) शिपिंग बिल
b) आयात बिल
c) पोत-पत्र
d) वायुमार्ग बिल -
वह दस्तावेज़ जो माल की प्राप्ति का प्रमाण, परिवहन का अनुबंध और माल के स्वामित्व का प्रमाण होता है, कहलाता है:
a) वायुमार्ग बिल
b) वाणिज्यिक चालान
c) पोत-पत्र
d) पैकिंग सूची -
प्री-शिपमेंट फाइनेंस का उद्देश्य क्या है?
a) निर्यात के बाद भुगतान प्राप्त करना
b) माल के उत्पादन और पैकेजिंग के लिए वित्त प्रदान करना
c) आयात शुल्क का भुगतान करना
d) अंतर्राष्ट्रीय यात्रा के लिए धन उपलब्ध कराना -
GATT (टैरिफ और व्यापार पर सामान्य समझौता) का उत्तराधिकारी संगठन कौन सा है?
a) IMF
b) World Bank
c) WTO
d) UNCTAD
उत्तर कुंजी:
- c) प्रोफार्मा चालान
- b) साख पत्र
- b) शिपिंग बिल
- c) उत्पत्ति का प्रमाण पत्र
- b) 1995
- c) विशिष्ट देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देना
- b) आयात बिल
- c) पोत-पत्र
- b) माल के उत्पादन और पैकेजिंग के लिए वित्त प्रदान करना
- c) WTO
मुझे आशा है कि ये विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपको इस अध्याय को समझने और सरकारी परीक्षाओं की तैयारी में सहायक होंगे। किसी भी अन्य प्रश्न के लिए आप पूछ सकते हैं।