Class 11 Geography Notes Chapter 2 (संरचना तथा भूआकृति विज्ञान) – Bharat Bhautik Paryavaran Book

चलिए, आज हम भूगोल की किताब 'भारत भौतिक पर्यावरण' के दूसरे अध्याय 'संरचना तथा भूआकृति विज्ञान' का गहन अध्ययन करते हैं। यह अध्याय प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे भारत के भौतिक स्वरूप की समझ विकसित होती है।
अध्याय 2: संरचना तथा भूआकृति विज्ञान - विस्तृत नोट्स
इस अध्याय में हम भारत की भूवैज्ञानिक संरचना और उसके मुख्य भू-आकृतिक खंडों के बारे में जानेंगे।
1. भारत की भूवैज्ञानिक संरचना (Geological Structure of India)
भारत की भूवैज्ञानिक संरचना में बहुत विविधता है। इसे मुख्य रूप से तीन खंडों में बांटा जा सकता है:
-
प्रायद्वीपीय खंड (The Peninsular Block):
- यह भारत का सबसे प्राचीन और स्थिर भूखंड है, जो गोंडवानालैंड का हिस्सा था।
- यह मुख्य रूप से प्राचीन नाइस (Gneiss) और ग्रेनाइट चट्टानों से बना है।
- कैम्ब्रियन कल्प से यह एक कठोर खंड के रूप में खड़ा है।
- नर्मदा, तापी और महानदी की रिफ्ट घाटियाँ और सतपुड़ा के ब्लॉक पर्वत इसके अपवाद हैं, जो इसकी स्थिरता को थोड़ा भंग करते हैं।
- इसमें अरावली, नल्लामल्ला, जावादी, वेलीकोंडा जैसी अवशिष्ट पहाड़ियाँ शामिल हैं।
-
हिमालय और अन्य अतिरिक्त-प्रायद्वीपीय पर्वतमालाएँ (The Himalayas and other Extra-Peninsular Mountains):
- यह भूवैज्ञानिक रूप से युवा, कमजोर और लचीली पर्वत श्रृंखला है।
- इसका निर्माण टेथिस सागर में जमा हुए अवसादों के वलन (folding) से हुआ है।
- ये पर्वत अभी भी निर्माण की अवस्था में हैं, जिसके प्रमाण यहाँ आने वाले भूकंप, गहरी घाटियाँ (Gorges) और V-आकार की घाटियाँ हैं।
-
सिंधु-गंगा-ब्रह्मपुत्र का मैदान (Indo-Ganga-Brahmaputra Plain):
- यह एक भू-अभिनति (Geosyncline) या गर्त है जिसका निर्माण हिमालय पर्वत श्रेणी के निर्माण के बाद हुआ।
- इसे हिमालय और प्रायद्वीप से निकलने वाली नदियों द्वारा लाए गए जलोढ़ निक्षेपों ने पाटकर एक समतल मैदान बना दिया।
- इस मैदान में जलोढ़ की औसत गहराई 1000 से 2000 मीटर तक है।
2. भारत के भू-आकृतिक खंड (Physiographic Divisions of India)
भारत को निम्नलिखित 6 भू-आकृतिक खंडों में बांटा जा सकता है:
I. उत्तर तथा उत्तर-पूर्वी पर्वतमाला
- इसमें हिमालय पर्वत और उत्तर-पूर्वी पहाड़ियाँ शामिल हैं।
- यह पश्चिम में जम्मू-कश्मीर से लेकर पूर्व में अरुणाचल प्रदेश तक फैली है।
- उप-खंड:
- कश्मीर या उत्तर-पश्चिमी हिमालय:
- श्रेणियाँ: कराकोरम, लद्दाख, जास्कर और पीर पंजाल।
- लद्दाख एक ठंडा मरुस्थल है।
- करेवा (Karewas): यहाँ हिमनदी चिकनी मिट्टी और दूसरे पदार्थों का जमाव मिलता है, जिसमें केसर की खेती होती है।
- प्रमुख दर्रे: ज़ोजिला, बनिहाल, खारदुंग ला आदि।
- प्रमुख झीलें: डल और वुलर (मीठे पानी की), पांगोंग त्सो और त्सो मोरीरी (खारे पानी की)।
- हिमाचल और उत्तराखण्ड हिमालय:
- यह रावी और काली नदी (घाघरा की सहायक) के बीच स्थित है।
- मुख्य श्रेणियाँ: वृहत हिमालय (Great Himalaya), लघु हिमालय (धौलाधार और नागटिब्बा) और शिवालिक श्रेणी।
- दून (Duns): लघु हिमालय और शिवालिक के बीच स्थित अनुदैर्ध्य घाटियाँ, जैसे- देहरादून, कोटलीदून, पाटलीदून।
- 'फूलों की घाटी' इसी क्षेत्र में है।
- प्रसिद्ध तीर्थस्थल: गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ।
- दार्जिलिंग और सिक्किम हिमालय:
- नेपाल हिमालय और भूटान हिमालय के बीच स्थित है।
- तीस्ता नदी यहाँ की मुख्य नदी है। कंचनजंगा चोटी यहीं स्थित है।
- दुआरे (Duars) स्थलाकृति: यहाँ शिवालिक नहीं है, उसके स्थान पर 'दुआरे' स्थलाकृति पाई जाती है, जिसका उपयोग चाय के बागान लगाने के लिए होता है।
- अरुणाचल हिमालय:
- भूटान हिमालय से लेकर पूर्व में डिफू दर्रे तक फैला है।
- प्रमुख चोटियाँ: कांगतू और नामचा बरवा।
- प्रमुख नदियाँ: कामेंग, सुबनसिरी, दिहांग, दिबांग और लोहित। ये नदियाँ बहुत गहरी घाटियाँ (Gorges) बनाती हैं।
- यहाँ की जनजातियाँ झूम खेती (स्थानांतरी कृषि) करती हैं।
- पूर्वी पहाड़ियाँ और पर्वत (पूर्वांचल):
- ये दिहांग गॉर्ज के दक्षिण से शुरू होती हैं।
- उत्तर से दक्षिण तक: पटकाई बूम, नागा पहाड़ियाँ, मणिपुर पहाड़ियाँ और मिज़ो (या लुशाई) पहाड़ियाँ।
- बराक, मणिपुर की एक महत्वपूर्ण नदी है। लोकटक झील यहीं है।
- कश्मीर या उत्तर-पश्चिमी हिमालय:
II. उत्तरी भारत का मैदान
- यह सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र नदियों द्वारा लाए गए जलोढ़ निक्षेप से बना है।
- उत्तर से दक्षिण विभाजन:
- भाबर (Bhabar): शिवालिक की तलहटी में 8-10 किमी की चौड़ाई में फैली कंकड़-पत्थरों की पट्टी। नदियाँ यहाँ विलुप्त हो जाती हैं।
- तराई (Terai): भाबर के दक्षिण में 10-20 किमी चौड़ी दलदली पट्टी, जहाँ विलुप्त नदियाँ फिर से प्रकट होती हैं।
- बांगर (Bangar): पुराने जलोढ़ से बना मैदान, जो बाढ़ के मैदान से ऊँचा होता है। इसमें चूनेदार कंकड़ पाए जाते हैं।
- खादर (Khadar): नवीन जलोढ़ से बना बाढ़ का मैदान। यह बहुत उपजाऊ होता है।
III. प्रायद्वीपीय पठार
- यह भारत का सबसे पुराना भूभाग है। इसकी आकृति त्रिभुजाकार है।
- उप-खंड:
- मध्य उच्च भूमि (The Central Highlands):
- नर्मदा नदी के उत्तर में स्थित है।
- पश्चिम में अरावली, दक्षिण में सतपुड़ा और पूर्व में छोटानागपुर पठार इसकी सीमा बनाते हैं।
- यहाँ बहने वाली नदियाँ (चंबल, सिंध, बेतवा, केन) दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व की ओर बहती हैं, जो इस क्षेत्र के ढाल को दर्शाती हैं।
- छोटानागपुर पठार खनिज संपदा के लिए प्रसिद्ध है।
- दक्कन का पठार (The Deccan Plateau):
- यह नर्मदा नदी के दक्षिण में स्थित एक त्रिभुजाकार भूभाग है।
- इसके उत्तर में सतपुड़ा, महादेव और कैमूर पहाड़ियाँ हैं।
- पश्चिमी घाट (Western Ghats): यह सह्याद्रि के नाम से भी जाना जाता है। यह सतत् है और इसे केवल दर्रों (थालघाट, भोरघाट, पालघाट) से ही पार किया जा सकता है। यह पूर्वी घाट से ऊँचा है। प्रायद्वीपीय भारत की सबसे ऊँची चोटी अनाईमुडी (2,695 मी.) यहीं स्थित है।
- पूर्वी घाट (Eastern Ghats): यह असतत् है और महानदी, गोदावरी, कृष्णा जैसी नदियों ने इसे काट दिया है। इसकी सबसे ऊँची चोटी जिंदगड़ा (1,690 मी.) है। (NCERT में महेंद्रगिरि (1,501 मी.) का उल्लेख है, लेकिन नवीनतम स्रोतों के अनुसार जिंदगड़ा सर्वोच्च शिखर है)।
- मध्य उच्च भूमि (The Central Highlands):
IV. भारतीय मरुस्थल (The Indian Desert)
- यह अरावली पहाड़ियों के उत्तर-पश्चिम में स्थित है।
- इसे थार मरुस्थल भी कहते हैं।
- यहाँ वार्षिक वर्षा 150 मिमी से भी कम होती है, जिस कारण यह एक शुष्क प्रदेश है।
- बरखान (Barchans): यहाँ अर्धचंद्राकार बालू के टीले पाए जाते हैं।
- लूनी इस क्षेत्र की सबसे महत्वपूर्ण नदी है।
V. तटीय मैदान
- पश्चिमी तटीय मैदान:
- यह एक संकरा मैदान है और जलमग्न तट का उदाहरण है।
- उप-भाग: गुजरात का कच्छ और काठियावाड़ तट, महाराष्ट्र का कोंकण तट, कर्नाटक का कन्नड़ मैदान और केरल का मालाबार तट।
- मालाबार तट पर 'कयाल' (Kayals) यानी पश्च जल (Backwaters) पाए जाते हैं, जैसे वेम्बनाद झील।
- पूर्वी तटीय मैदान:
- यह चौड़ा है और एक उभरे हुए (emergent) तट का उदाहरण है।
- यहाँ महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी नदियों के बड़े-बड़े डेल्टा हैं।
- चिल्का और पुलिकट जैसी महत्वपूर्ण झीलें यहीं हैं।
- उप-भाग: उत्तर में उत्कल तट, मध्य में आंध्र तट और दक्षिण में कोरोमंडल तट।
VI. द्वीप समूह
- बंगाल की खाड़ी के द्वीप (अंडमान और निकोबार):
- यह लगभग 572 द्वीपों का समूह है।
- ये द्वीप समुद्र में डूबी हुई पर्वत श्रृंखलाओं के शिखर हैं।
- बैरन द्वीप भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी यहीं स्थित है।
- 10° चैनल अंडमान को निकोबार से अलग करता है।
- अरब सागर के द्वीप (लक्षद्वीप):
- यह लगभग 36 द्वीपों का समूह है, जिनमें से कई प्रवाल निक्षेपों (Coral deposits) से बने हैं।
- कवरत्ती इसकी प्रशासनिक राजधानी है।
अभ्यास हेतु 10 महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
1. केसर की खेती के लिए प्रसिद्ध 'करेवा' स्थलाकृति भारत के किस हिमालयी क्षेत्र में पाई जाती है?
(क) अरुणाचल हिमालय
(ख) दार्जिलिंग और सिक्किम हिमालय
(ग) हिमाचल और उत्तराखण्ड हिमालय
(घ) कश्मीर हिमालय
2. शिवालिक की तलहटी में स्थित कंकड़-पत्थरों से युक्त वह क्षेत्र जहाँ नदियाँ विलुप्त हो जाती हैं, क्या कहलाता है?
(क) तराई
(ख) भाबर
(ग) बांगर
(घ) खादर
3. प्रायद्वीपीय भारत की सबसे ऊँची चोटी 'अनाईमुडी' निम्नलिखित में से किस पहाड़ी पर स्थित है?
(क) नीलगिरि पहाड़ियाँ
(ख) अन्नामलाई पहाड़ियाँ
(ग) कार्डमम (इलायची) पहाड़ियाँ
(घ) पूर्वी घाट
4. पटकाई बूम, नागा पहाड़ियाँ और मिज़ो पहाड़ियाँ भारत के किस भू-आकृतिक खंड का हिस्सा हैं?
(क) मध्य उच्च भूमि
(ख) दक्कन का पठार
(ग) पूर्वी पहाड़ियाँ (पूर्वांचल)
(घ) हिमाचल हिमालय
5. भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी, बैरन द्वीप, कहाँ स्थित है?
(क) लक्षद्वीप समूह में
(ख) मालदीव में
(ग) अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में
(घ) पुडुचेरी के पास
6. मध्य उच्च भूमि में बहने वाली अधिकांश नदियों (जैसे चंबल, बेतवा) की प्रवाह दिशा क्या है?
(क) उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम
(ख) दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व
(ग) पूर्व से पश्चिम
(घ) उत्तर से दक्षिण
7. निम्नलिखित में से कौन-सा दर्रा सिक्किम राज्य में स्थित है?
(क) ज़ोजिला
(ख) शिपकी ला
(ग) बोमडिला
(घ) नाथू ला
8. भूवैज्ञानिक दृष्टि से भारत का सबसे प्राचीन भूभाग कौन-सा है?
(क) हिमालय पर्वत श्रृंखला
(ख) सिंधु-गंगा का मैदान
(ग) प्रायद्वीपीय पठार
(घ) तटीय मैदान
9. केरल के मालाबार तट पर पाए जाने वाले पश्च जल (Backwaters) को स्थानीय रूप से क्या कहा जाता है?
(क) दून
(ख) दुआरे
(ग) कयाल
(घ) डेल्टा
10. पश्चिमी घाट और पूर्वी घाट के संबंध में कौन-सा कथन सही नहीं है?
(क) पश्चिमी घाट, पूर्वी घाट की तुलना में अधिक ऊँचा और सतत् है।
(ख) पूर्वी घाट का विस्तार महानदी घाटी से दक्षिण में नीलगिरि तक है।
(ग) पश्चिमी घाट में नदियाँ डेल्टा बनाती हैं जबकि पूर्वी घाट में नदियाँ ज्वारनदमुख (Estuary) बनाती हैं।
(घ) दोनों घाट नीलगिरि पहाड़ियों पर आकर मिलते हैं।
उत्तरमाला:
- (घ)
- (ख)
- (ख)
- (ग)
- (ग)
- (ख)
- (घ)
- (ग)
- (ग)
- (ग) (यह कथन उल्टा है, पश्चिमी घाट की नदियाँ ज्वारनदमुख और पूर्वी घाट की नदियाँ डेल्टा बनाती हैं)