Class 11 Geography Notes Chapter 4 (जलवायु) – Bharat Bhautik Paryavaran Book

Bharat Bhautik Paryavaran
चलिए, आज हम कक्षा 11 के भूगोल की पुस्तक 'भारत भौतिक पर्यावरण' के अध्याय 4, 'जलवायु' का गहन अध्ययन करेंगे। यह अध्याय प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए हम इसके हर पहलू को विस्तार से समझेंगे।

अध्याय 4: जलवायु - विस्तृत नोट्स

1. परिचय: मौसम और जलवायु में अंतर

  • मौसम (Weather): किसी स्थान पर, किसी विशेष समय पर वायुमंडल की तात्कालिक दशा को मौसम कहते हैं। यह अल्पकालिक होता है और इसमें दिन-प्रतिदिन परिवर्तन हो सकता है (जैसे - तापमान, वर्षा, आर्द्रता)।
  • जलवायु (Climate): किसी विस्तृत क्षेत्र में लंबी समयावधि (लगभग 30 वर्ष से अधिक) के मौसम की अवस्थाओं के कुल योग या औसत को जलवायु कहते हैं। यह अपेक्षाकृत स्थायी होती है।

2. भारत की जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक

भारत की जलवायु को 'उष्ण मानसूनी जलवायु' कहा जाता है। इसे प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक निम्नलिखित हैं:

(क) स्थिति तथा उच्चावच संबंधी कारक:

  • अक्षांशीय स्थिति: कर्क रेखा (23.5° N) भारत के मध्य से गुजरती है, जो देश को दो भागों में बांटती है - दक्षिणी भाग उष्ण कटिबंध में और उत्तरी भाग उपोष्ण कटिबंध में।
  • हिमालय पर्वत: यह उत्तर से आने वाली ठंडी ध्रुवीय हवाओं को भारत में प्रवेश करने से रोकता है, जिससे भारत में कड़ाके की ठंड नहीं पड़ती। साथ ही, यह मानसूनी हवाओं को रोककर भारतीय उपमहाद्वीप में वर्षा कराता है।
  • जल और स्थल का वितरण: भारत के दक्षिण में तीन ओर हिंद महासागर है और उत्तर में विशाल भू-भाग। स्थल जल्दी गर्म और जल्दी ठंडा होता है, जबकि जल देर से गर्म और देर से ठंडा होता है। इसी तापांतर के कारण मानसून पवनों की उत्पत्ति होती है।
  • समुद्र तट से दूरी: तटीय क्षेत्रों में समुद्र का समकारी प्रभाव पड़ता है, जिससे वहां वार्षिक और दैनिक तापांतर कम होता है (जैसे - मुंबई, चेन्नई)। वहीं, आंतरिक भागों में महाद्वीपीय जलवायु पाई जाती है, जहाँ तापांतर अधिक होता है (जैसे - दिल्ली, नागपुर)।
  • समुद्र तल से ऊँचाई (तुंगता): ऊँचाई बढ़ने के साथ तापमान घटता है। यही कारण है कि पर्वतीय क्षेत्र (जैसे - शिमला, दार्जिलिंग) मैदानी क्षेत्रों की तुलना में ठंडे होते हैं।
  • उच्चावच: पर्वत पवन के मार्ग में अवरोधक का कार्य करते हैं। पवनों के सम्मुख ढाल (पवनाभिमुखी ढाल) पर अधिक वर्षा होती है, जबकि विपरीत ढाल (पवनविमुखी ढाल या वृष्टि छाया क्षेत्र) सूखा रह जाता है। उदाहरण - पश्चिमी घाट।

(ख) वायुदाब एवं पवन संबंधी कारक:

  • जेट स्ट्रीम (Jet Stream): क्षोभमंडल की ऊपरी परतों में तेज गति से चलने वाली वायु धाराओं को जेट स्ट्रीम कहते हैं। शीत ऋतु में पश्चिमी जेट स्ट्रीम भारत में पश्चिमी विक्षोभ लाती है, जिससे उत्तर-पश्चिम भारत में वर्षा होती है। ग्रीष्म ऋतु में पूर्वी जेट स्ट्रीम उष्णकटिबंधीय चक्रवातों को भारत की ओर लाने में सहायक होती है।
  • अंतः उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र (ITCZ): यह विषुवत् वृत्त के निकट निम्न वायुदाब वाला क्षेत्र है। सूर्य की स्थिति के साथ यह उत्तर और दक्षिण की ओर खिसकता है। गर्मियों में इसके गंगा के मैदान पर खिसकने से मानसून गर्त का निर्माण होता है, जो मानसून को आकर्षित करता है।
  • एल-नीनो (El-Niño) और दक्षिणी दोलन (Southern Oscillation): एल-नीनो एक गर्म समुद्री जलधारा है जो पेरू के तट पर उत्पन्न होती है। इसके आने से भारतीय मानसून कमजोर हो जाता है। दक्षिणी दोलन का संबंध प्रशांत महासागर के वायुदाब में परिवर्तन से है। एल-नीनो और दक्षिणी दोलन की संयुक्त घटना को ENSO कहते हैं।

3. भारतीय मानसून की प्रकृति और ऋतुएँ

भारत में चार प्रमुख ऋतुएँ पाई जाती हैं:

(i) शीत ऋतु (दिसंबर से फरवरी):

  • सूर्य दक्षिणायन होता है, जिससे भारत में तापमान कम और वायुदाब उच्च होता है।
  • पवनें स्थल से समुद्र की ओर चलती हैं (उत्तर-पूर्वी मानसून)।
  • पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances): भूमध्य सागर से उत्पन्न शीतोष्ण चक्रवात पश्चिमी जेट स्ट्रीम के सहारे भारत पहुँचते हैं और उत्तर-पश्चिम भारत (पंजाब, हरियाणा, दिल्ली) में वर्षा तथा हिमालयी क्षेत्रों में हिमपात करते हैं। यह वर्षा 'रबी' की फसल के लिए बहुत लाभदायक होती है।
  • तमिलनाडु के कोरोमंडल तट पर उत्तर-पूर्वी मानसून से वर्षा होती है।

(ii) ग्रीष्म ऋतु (मार्च से मई):

  • सूर्य उत्तरायण होता है, जिससे तापमान तेजी से बढ़ता है और उत्तर-पश्चिम भारत में एक निम्न दाब का क्षेत्र बन जाता है।
  • लू (Loo): उत्तरी मैदानों में चलने वाली गर्म, शुष्क और पीड़ादायक हवाएँ।
  • मानसून-पूर्व वर्षा:
    • आम्र वर्षा (Mango Shower): केरल और कर्नाटक में होने वाली वर्षा, जो आम की फसल के लिए लाभदायक है।
    • फूलों वाली बौछार (Blossom Shower): केरल में कहवा के फूलों के खिलने में सहायक।
    • काल बैसाखी (Kal Baisakhi): असम और पश्चिम बंगाल में शाम को चलने वाली भयंकर विनाशकारी हवाएँ, जो चाय, पटसन और चावल के लिए अच्छी होती हैं।

(iii) दक्षिण-पश्चिम मानसून ऋतु / वर्षा ऋतु (जून से सितंबर):

  • भारत में होने वाली कुल वर्षा का लगभग 75% इसी ऋतु में होता है।
  • मानसून का प्रस्फोट (Burst of Monsoon): आर्द्र हवाओं के तेज गर्जन और बिजली चमकने के साथ अचानक आने वाली वर्षा।
  • दो शाखाएँ:
    1. अरब सागर की शाखा: यह पश्चिमी घाट से टकराकर पश्चिमी तटीय मैदानों में भारी वर्षा करती है। फिर यह नर्मदा-तापी की घाटियों से होते हुए मध्य भारत पहुँचती है।
    2. बंगाल की खाड़ी की शाखा: यह सबसे पहले म्यांमार के अराकान योमा पर्वत से टकराकर उत्तर-पूर्व भारत की ओर मुड़ जाती है और मेघालय की गारो, खासी, जयंतिया पहाड़ियों से टकराकर मॉसिनराम में विश्व की सर्वाधिक वर्षा करती है। फिर यह हिमालय के समानांतर पश्चिम की ओर बढ़ती है।

(iv) मानसून के निवर्तन की ऋतु (अक्टूबर-नवंबर):

  • सूर्य के दक्षिणायन होने के कारण मानसून गर्त कमजोर पड़कर दक्षिण की ओर खिसकने लगता है, जिससे मानसून वापस लौटने लगता है।
  • लौटते हुए मानसून के कारण बंगाल की खाड़ी में उष्णकटिबंधीय चक्रवात बनते हैं जो पूर्वी तट (तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, ओडिशा) पर भारी वर्षा और तबाही लाते हैं।
  • इस समय आसमान साफ हो जाता है और तापमान पुनः बढ़ने लगता है, जिसे 'अक्टूबर की गर्मी' (October Heat) कहते हैं।

4. कोपेन (Koeppen) के अनुसार भारत का जलवायु वर्गीकरण

कोपेन ने तापमान और वर्षा के मासिक मानों के आधार पर जलवायु का वर्गीकरण किया है। भारत के संदर्भ में प्रमुख प्रकार निम्नलिखित हैं:

कोड प्रकार विशेषताएँ क्षेत्र
Amw लघु शुष्क ऋतु वाला मानसून दक्षिण-पश्चिम मानसून से भारी वर्षा, छोटी शुष्क शीत ऋतु। गोवा के दक्षिण में भारत का पश्चिमी तट
As शुष्क ग्रीष्म ऋतु वाला मानसून शीत ऋतु में वर्षा (लौटते मानसून से), ग्रीष्म ऋतु शुष्क। तमिलनाडु का कोरोमंडल तट
Aw उष्णकटिबंधीय सवाना ग्रीष्म ऋतु में वर्षा, शीत ऋतु शुष्क। कर्क रेखा के दक्षिण का प्रायद्वीपीय पठार
BShw अर्ध-शुष्क स्टेपी जलवायु बहुत कम वर्षा, कांटेदार झाड़ियाँ। प्रायद्वीप का वृष्टि छाया क्षेत्र, गुजरात, राजस्थान
BWhw गर्म मरुस्थल अत्यंत कम वर्षा, नगण्य वनस्पति। पश्चिमी राजस्थान (थार मरुस्थल)
Cwg शुष्क शीत ऋतु वाला मानसून ग्रीष्म ऋतु में वर्षा, शुष्क शीत ऋतु। गंगा का मैदान, पूर्वी राजस्थान, असम
Dfc लघु ग्रीष्म तथा ठंडी आर्द्र शीत ऋतु शीत ऋतु ठंडी, आर्द्र और लंबी। अरुणाचल प्रदेश
E ध्रुवीय प्रकार तापमान बहुत कम, हमेशा बर्फ से ढका। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, उत्तराखंड के उच्च पर्वतीय क्षेत्र

अभ्यास हेतु बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

प्रश्न 1. भारत के उत्तर-पश्चिमी भागों में शीतकाल में होने वाली वर्षा के लिए कौन उत्तरदायी है?
(क) लौटता हुआ मानसून
(ख) पश्चिमी विक्षोभ
(ग) उष्णकटिबंधीय चक्रवात
(घ) काल बैसाखी

प्रश्न 2. 'आम्र वर्षा' (Mango Shower) निम्नलिखित में से किस राज्य से संबंधित है?
(क) पश्चिम बंगाल
(ख) पंजाब
(ग) केरल
(घ) राजस्थान

प्रश्न 3. कोपेन की योजना के अनुसार, भारत के कोरोमंडल तट पर किस प्रकार की जलवायु पाई जाती है?
(क) Amw
(ख) Aw
(ग) Cwg
(घ) As

प्रश्न 4. भारत में मानसून के प्रस्फोट (Burst) के लिए निम्नलिखित में से किसे जिम्मेदार माना जाता है?
(क) पश्चिमी जेट स्ट्रीम
(ख) पूर्वी जेट स्ट्रीम
(ग) एल-नीनो
(घ) व्यापारिक पवनें

प्रश्न 5. 'लू' नामक गर्म और शुष्क हवाएँ किस ऋतु में चलती हैं?
(क) शीत ऋतु
(ख) वर्षा ऋतु
(ग) ग्रीष्म ऋतु
(घ) शरद ऋतु

प्रश्न 6. विश्व में सर्वाधिक वर्षा वाला स्थान 'मॉसिनराम' किस राज्य में स्थित है?
(क) असम
(ख) अरुणाचल प्रदेश
(ग) मेघालय
(घ) मिजोरम

प्रश्न 7. भारत की जलवायु पर हिमालय का प्रभाव निम्नलिखित में से कौन-सा नहीं है?
(क) यह साइबेरिया से आने वाली ठंडी हवाओं को रोकता है।
(ख) यह मानसूनी पवनों को रोककर वर्षा कराता है।
(ग) यह मानसून के निवर्तन का कारण बनता है।
(घ) इसके कारण भारत में उपोष्ण कटिबंधीय जलवायु भी पाई जाती है।

प्रश्न 8. 'अक्टूबर की गर्मी' (October Heat) का प्रमुख कारण क्या है?
(क) उच्च तापमान और निम्न आर्द्रता
(ख) निम्न तापमान और उच्च आर्द्रता
(ग) साफ आसमान, उच्च तापमान और उच्च आर्द्रता
(घ) बादलों से ढका आकाश और निम्न तापमान

प्रश्न 9. कोपेन के वर्गीकरण में 'BWhw' संकेत किस प्रकार की जलवायु को दर्शाता है?
(क) गर्म मरुस्थल
(ख) अर्ध-शुष्क स्टेपी
(ग) ध्रुवीय जलवायु
(घ) उष्णकटिबंधीय सवाना

प्रश्न 10. एल-नीनो (El-Niño) के भारतीय मानसून पर क्या प्रभाव पड़ता है?
(क) मानसून अधिक शक्तिशाली हो जाता है।
(ख) मानसून कमजोर हो जाता है और वर्षा कम होती है।
(ग) मानसून पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
(घ) मानसून समय से पहले आ जाता है।


उत्तरमाला:

  1. (ख) पश्चिमी विक्षोभ
  2. (ग) केरल
  3. (घ) As
  4. (ख) पूर्वी जेट स्ट्रीम
  5. (ग) ग्रीष्म ऋतु
  6. (ग) मेघालय
  7. (ग) यह मानसून के निवर्तन का कारण बनता है।
  8. (ग) साफ आसमान, उच्च तापमान और उच्च आर्द्रता
  9. (क) गर्म मरुस्थल
  10. (ख) मानसून कमजोर हो जाता है और वर्षा कम होती है।

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