Class 11 Geography Notes Chapter 4 (महासागरों की और महाद्वीपों का वितरण) – Bhautik Bhugol ke Mool Sidhant Book

Bhautik Bhugol ke Mool Sidhant
प्रिय विद्यार्थियों,

आज हम भौतिक भूगोल के मूल सिद्धांत पुस्तक के अध्याय 4 'महासागरों और महाद्वीपों का वितरण' का विस्तृत अध्ययन करेंगे। यह अध्याय पृथ्वी के भूवैज्ञानिक इतिहास और वर्तमान भू-आकृतियों के निर्माण को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। सरकारी परीक्षाओं की तैयारी के लिए इसके हर पहलू को ध्यान से समझना आवश्यक है।


अध्याय 4: महासागरों और महाद्वीपों का वितरण

यह अध्याय पृथ्वी पर महाद्वीपों और महासागरों के वर्तमान वितरण को समझने के लिए विभिन्न सिद्धांतों और प्रमाणों पर केंद्रित है।

1. महाद्वीपीय प्रवाह सिद्धांत (Continental Drift Theory)

  • प्रवर्तक: जर्मन मौसमविद् अल्फ्रेड वेगनर (Alfred Wegener) ने 1912 में यह सिद्धांत प्रतिपादित किया।
  • मूल विचार: वेगनर के अनुसार, कार्बोनिफेरस युग में सभी महाद्वीप एक विशाल भूखंड के रूप में जुड़े हुए थे, जिसे उन्होंने पैंजिया (Pangaea) नाम दिया। यह पैंजिया एक विशाल महासागर पैंथालसा (Panthalassa) से घिरा हुआ था।
  • विखंडन और प्रवाह: लगभग 200 मिलियन वर्ष पहले (मेसोजोइक युग में), पैंजिया का विखंडन शुरू हुआ और इसके टुकड़े एक-दूसरे से दूर प्रवाहित होने लगे, जिससे वर्तमान महाद्वीपों का निर्माण हुआ।
  • दो मुख्य भाग: पैंजिया के दो मुख्य भाग थे:
    • लॉरेसिया (Laurasia): उत्तरी भाग (उत्तरी अमेरिका, यूरोप, एशिया)।
    • गोंडवानालैंड (Gondwanaland): दक्षिणी भाग (दक्षिणी अमेरिका, अफ्रीका, भारत, ऑस्ट्रेलिया, अंटार्कटिका)।
  • प्रवाह की दिशा: वेगनर के अनुसार, महाद्वीप दो दिशाओं में प्रवाहित हुए:
    • भूमध्य रेखा की ओर (ध्रुवीय फ्लीइंग बल के कारण)।
    • पश्चिम की ओर (सूर्य व चंद्रमा के ज्वारीय बल के कारण)।

महाद्वीपीय प्रवाह के पक्ष में प्रमाण:

  • महाद्वीपों का साम्य (The Jigsaw Fit): दक्षिणी अमेरिका और अफ्रीका के तटों का पूर्ण साम्य (फिट होना)।
  • महासागरों के पार चट्टानों की आयु में समानता (Similarity of Age of Rocks Across Oceans):
    • ब्राजील के पूर्वी तट और पश्चिमी अफ्रीका के तट पर पाई जाने वाली प्राचीन चट्टानों (2000 मिलियन वर्ष पुरानी) की पट्टी में समानता।
    • समुद्री निक्षेपों की आयु का अध्ययन भी इस बात की पुष्टि करता है।
  • टिलाइट (Tillite): यह हिमानी निक्षेप से बनी अवसादी चट्टान है। गोंडवानालैंड के विभिन्न महाद्वीपों (भारत, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, अंटार्कटिका और दक्षिणी अमेरिका) में पाए जाने वाले टिलाइट निक्षेप यह दर्शाते हैं कि वे कभी एक ही भूभाग का हिस्सा थे और एक ही प्रकार के हिमानीकरण से प्रभावित थे।
  • प्लेसर निक्षेप (Placer Deposits): घाना तट पर सोने के विशाल निक्षेप पाए जाते हैं, लेकिन सोने की स्रोत शिराएँ ब्राजील में हैं। यह इंगित करता है कि ये भूभाग कभी जुड़े हुए थे।
  • जीवाश्मों का वितरण (Distribution of Fossils):
    • लेमूर: भारत, मेडागास्कर और अफ्रीका में लेमूर के जीवाश्मों की उपस्थिति एक ही भूभाग के अस्तित्व का संकेत देती है।
    • मेसोसॉरस: दक्षिणी अफ्रीका और ब्राजील के शैलों में मेसोसॉरस (एक छोटे रेंगने वाले जीव) के जीवाश्मों की उपस्थिति।
    • ग्लोसोप्टेरिस वनस्पति: गोंडवानालैंड के सभी महाद्वीपों में इस वनस्पति के जीवाश्म पाए जाते हैं।

प्रवाह के बल (Forces for Drifting):

  • वेगनर ने ध्रुवीय फ्लीइंग बल (पृथ्वी के घूर्णन से संबंधित) और ज्वारीय बल (सूर्य व चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण से संबंधित) को महाद्वीपीय प्रवाह के लिए जिम्मेदार ठहराया।
  • आलोचना: इन बलों को महाद्वीपों को प्रवाहित करने के लिए अपर्याप्त माना गया, जिससे वेगनर के सिद्धांत की स्वीकार्यता कम हुई।

2. संवहन धारा सिद्धांत (Convectional Current Theory)

  • प्रवर्तक: आर्थर होम्स (Arthur Holmes) ने 1930 के दशक में यह सिद्धांत प्रस्तुत किया।
  • विचार: होम्स ने बताया कि मेंटल भाग में रेडियोधर्मी तत्वों से उत्पन्न ताप के कारण संवहन धाराएँ (Convection Currents) उत्पन्न होती हैं। ये धाराएँ पृथ्वी के आंतरिक भाग से ऊष्मा को बाहर लाती हैं और क्रस्ट को तोड़कर प्लेटों को गति प्रदान करती हैं।
  • यह सिद्धांत बाद में प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत का आधार बना।

3. महासागरीय अधस्तल का मानचित्रण (Mapping of the Ocean Floor)

  • द्वितीय विश्व युद्ध के बाद महासागरीय अधस्तल के विस्तृत अध्ययन से कई नई भू-आकृतियों का पता चला।
  • प्रमुख विशेषताएँ:
    • मध्य-महासागरीय कटक (Mid-Oceanic Ridges): ये महासागरों के मध्य में स्थित पर्वतीय श्रृंखलाएँ हैं, जहाँ ज्वालामुखी उद्गार और भूकंप सामान्य हैं।
    • गहरे महासागरीय गर्त (Deep Oceanic Trenches): ये महासागरों के किनारों पर पाए जाने वाले गहरे, संकरे और लंबे अवसाद हैं, जो भूकंप और ज्वालामुखी गतिविधियों के क्षेत्र हैं।
    • महाद्वीपीय सीमाएँ (Continental Margins): इसमें महाद्वीपीय शेल्फ, ढाल और उभार शामिल हैं।
    • अधस्तल मैदान (Abyssal Plains): ये महासागरीय नितल के विस्तृत समतल क्षेत्र हैं।

महासागरीय अधस्तल की संकल्पना (Concept of Ocean Floor Configuration):

  • कटक के साथ ज्वालामुखी क्रिया: मध्य-महासागरीय कटकों के साथ ज्वालामुखी उद्गार सामान्य हैं, जो नए समुद्री क्रस्ट के निर्माण का संकेत देते हैं।
  • गर्तों में भूकंपीय क्रिया: महासागरीय गर्तों में भूकंपीय गतिविधियाँ अधिक होती हैं, जहाँ समुद्री क्रस्ट का विनाश होता है।
  • चट्टानों की आयु: मध्य-महासागरीय कटकों के पास की चट्टानें सबसे नई होती हैं और कटकों से दूर जाने पर उनकी आयु बढ़ती जाती है।
  • तलछट की मोटाई: कटकों के पास तलछट की परत पतली होती है, जो कटकों से दूर जाने पर मोटी होती जाती है।

4. सागर नितल प्रसरण (Seafloor Spreading)

  • प्रवर्तक: हैरी हेस (Harry Hess) ने 1961 में यह अवधारणा प्रस्तुत की।
  • विचार: हेस के अनुसार, मध्य-महासागरीय कटकों पर लगातार ज्वालामुखी उद्गार से नया लावा बाहर आता है, जो समुद्री क्रस्ट को दोनों ओर धकेलता है। इससे पुराना समुद्री क्रस्ट महासागरीय गर्तों में क्षेपित होकर नष्ट होता रहता है। इस प्रक्रिया को सागर नितल प्रसरण कहते हैं।
  • यह सिद्धांत महाद्वीपीय प्रवाह की समस्या का समाधान प्रस्तुत करता है कि नया क्रस्ट कहाँ से आता है और पुराना क्रस्ट कहाँ जाता है।

5. प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत (Plate Tectonics Theory)

  • पृष्ठभूमि: वेगनर के महाद्वीपीय प्रवाह सिद्धांत और हैस के सागर नितल प्रसरण सिद्धांत के एकीकरण से 1967 में यह सिद्धांत सामने आया।
  • प्लेटें क्या हैं? पृथ्वी का स्थलमंडल (क्रस्ट और ऊपरी मेंटल का कठोर भाग) कई बड़ी और छोटी कठोर अनियमित आकार की प्लेटों में विभाजित है, जिन्हें स्थलमंडलीय प्लेटें (Lithospheric Plates) कहते हैं।
  • ये प्लेटें दुर्बलतामंडल (Asthenosphere) पर तैरती हैं, जो अर्ध-तरल अवस्था में है।
  • प्रमुख प्लेटें:
    1. अंटार्कटिक प्लेट
    2. उत्तरी अमेरिकी प्लेट
    3. दक्षिणी अमेरिकी प्लेट
    4. प्रशांत प्लेट
    5. इंडो-ऑस्ट्रेलियाई-न्यूजीलैंड प्लेट
    6. अफ्रीकी प्लेट
    7. यूरेशियन प्लेट
  • कुछ महत्वपूर्ण छोटी प्लेटें:
    • कोकोस प्लेट (मध्य अमेरिका और प्रशांत प्लेट के बीच)
    • नाज़का प्लेट (दक्षिणी अमेरिका और प्रशांत प्लेट के बीच)
    • अरेबियन प्लेट
    • फिलीपीन प्लेट
    • कैरोलिन प्लेट
    • फ्यूजी प्लेट
    • जुआन डी फूका प्लेट (उत्तरी अमेरिकी और प्रशांत प्लेट के बीच)
  • प्लेटों की गति: प्लेटें लगातार गतिमान रहती हैं, जिससे विभिन्न भू-वैज्ञानिक घटनाएँ (भूकंप, ज्वालामुखी, पर्वत निर्माण) होती हैं।
  • प्लेट संचलन की दरें: प्लेटों के संचलन की दरें बहुत धीमी होती हैं, कुछ मिलीमीटर प्रति वर्ष से लेकर कुछ सेंटीमीटर प्रति वर्ष तक। आर्कटिक कटक की दर सबसे कम (2.5 सेमी/वर्ष से कम) और पूर्वी प्रशांत महासागरीय कटक की दर सबसे अधिक (15 सेमी/वर्ष से अधिक) है।

प्लेटों की सीमाएँ (Plate Boundaries):

प्लेटों की गति के आधार पर तीन प्रकार की सीमाएँ होती हैं:

  1. अपसारी सीमाएँ (Divergent Boundaries):
    • जब दो प्लेटें एक-दूसरे से दूर हटती हैं।
    • यहाँ नया क्रस्ट बनता है (इसलिए इन्हें रचनात्मक सीमाएँ भी कहते हैं)।
    • उदाहरण: मध्य-अटलांटिक कटक, जहाँ अमेरिकी प्लेटें यूरेशियन और अफ्रीकी प्लेटों से अलग हो रही हैं।
  2. अभिसारी सीमाएँ (Convergent Boundaries):
    • जब दो प्लेटें एक-दूसरे की ओर आती हैं और टकराती हैं।
    • यहाँ क्रस्ट का विनाश होता है (इसलिए इन्हें विनाशात्मक सीमाएँ भी कहते हैं)।
    • तीन प्रकार की अभिसारी सीमाएँ:
      • महासागरीय-महाद्वीपीय अभिसरण (जैसे एंडीज पर्वत, प्रशांत महासागर के गर्त)।
      • महासागरीय-महासागरीय अभिसरण (जैसे जापान, फिलीपींस द्वीप समूह)।
      • महाद्वीपीय-महाद्वीपीय अभिसरण (जैसे हिमालय पर्वत)।
  3. रूपांतरण सीमाएँ (Transform Boundaries):
    • जब दो प्लेटें एक-दूसरे के समानांतर क्षैतिज रूप से सरकती हैं, न तो नया क्रस्ट बनता है और न ही नष्ट होता है।
    • इन्हें संरक्षी सीमाएँ भी कहते हैं।
    • उदाहरण: सैन एंड्रियास भ्रंश (कैलिफोर्निया)।

प्लेट संचलन के बल (Forces for Plate Movement):

  • प्लेटों की गति का मुख्य कारण मेंटल में उत्पन्न होने वाली संवहन धाराएँ हैं।
  • रिज-पुश (Ridge-Push): मध्य-महासागरीय कटकों पर लावा के ऊपर उठने से प्लेटों को धक्का मिलता है।
  • स्लैब-पुल (Slab-Pull): महासागरीय गर्तों में भारी और ठंडी प्लेट के क्षेपण (सबडक्शन) से प्लेट को नीचे की ओर खींचा जाता है। यह बल सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।

6. भारतीय प्लेट का संचलन (Movement of the Indian Plate)

  • भारतीय प्लेट में प्रायद्वीपीय भारत और ऑस्ट्रेलियाई महासागरीय भाग शामिल हैं।
  • गोंडवानालैंड से अलग होना: लगभग 200 मिलियन वर्ष पहले भारतीय प्लेट गोंडवानालैंड से अलग होकर उत्तर की ओर प्रवाहित होने लगी।
  • यूरेशियन प्लेट से टकराव: लगभग 40-50 मिलियन वर्ष पहले भारतीय प्लेट यूरेशियन प्लेट से टकराई।
  • हिमालय का निर्माण: इस टकराव के कारण टेथिस सागर के अवसादों में वलन पड़ गए और हिमालय पर्वत श्रृंखला का निर्माण हुआ।
  • भूकंपीय गतिविधियाँ: भारतीय प्लेट का उत्तरी किनारा आज भी यूरेशियन प्लेट के नीचे क्षेपित हो रहा है, जिसके कारण हिमालयी क्षेत्र में लगातार भूकंप आते रहते हैं।

बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions - MCQs)

1. महाद्वीपीय प्रवाह सिद्धांत किसने प्रतिपादित किया था?
a) आर्थर होम्स
b) हैरी हेस
c) अल्फ्रेड वेगनर
d) डब्ल्यू. जे. मॉर्गन

2. पैंजिया के दक्षिणी भाग को किस नाम से जाना जाता था?
a) लॉरेसिया
b) अंगारालैंड
c) गोंडवानालैंड
d) टेथिस सागर

3. निम्नलिखित में से कौन सा महाद्वीपीय प्रवाह के पक्ष में एक प्रमाण नहीं है?
a) महाद्वीपों का साम्य
b) टिलाइट निक्षेप
c) सागर नितल प्रसरण
d) जीवाश्मों का वितरण

4. मेंटल में संवहन धाराओं की अवधारणा किसने प्रस्तुत की थी, जो प्लेट विवर्तनिकी का आधार बनी?
a) अल्फ्रेड वेगनर
b) हैरी हेस
c) आर्थर होम्स
d) एफ.बी. टेलर

5. वह सीमा जहाँ दो प्लेटें एक-दूसरे से दूर हटती हैं और नए क्रस्ट का निर्माण होता है, क्या कहलाती है?
a) अभिसारी सीमा
b) अपसारी सीमा
c) रूपांतरण सीमा
d) संरक्षी सीमा

6. सैन एंड्रियास भ्रंश किस प्रकार की प्लेट सीमा का उदाहरण है?
a) अभिसारी सीमा
b) अपसारी सीमा
c) रूपांतरण सीमा
d) रचनात्मक सीमा

7. हिमालय पर्वत का निर्माण किन दो प्रमुख प्लेटों के टकराव के कारण हुआ है?
a) अफ्रीकी प्लेट और यूरेशियन प्लेट
b) उत्तरी अमेरिकी प्लेट और प्रशांत प्लेट
c) भारतीय प्लेट और यूरेशियन प्लेट
d) दक्षिणी अमेरिकी प्लेट और नाज़का प्लेट

8. सागर नितल प्रसरण सिद्धांत किसने दिया था?
a) अल्फ्रेड वेगनर
b) आर्थर होम्स
c) हैरी हेस
d) डब्ल्यू. जे. मॉर्गन

9. निम्नलिखित में से कौन सी एक छोटी प्लेट नहीं है?
a) कोकोस प्लेट
b) नाज़का प्लेट
c) प्रशांत प्लेट
d) अरेबियन प्लेट

10. प्लेट संचलन के लिए सबसे महत्वपूर्ण बल कौन सा माना जाता है?
a) ध्रुवीय फ्लीइंग बल
b) ज्वारीय बल
c) रिज-पुश
d) स्लैब-पुल


उत्तरमाला:

  1. c
  2. c
  3. c
  4. c
  5. b
  6. c
  7. c
  8. c
  9. c
  10. d

आशा है कि यह विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपको इस अध्याय को गहराई से समझने और आपकी सरकारी परीक्षा की तैयारी में सहायक होंगे। किसी भी प्रश्न या संदेह के लिए आप पूछ सकते हैं।

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