Class 11 Geography Notes Chapter 7 (प्राकृतिक संकट तथा आपदाएँ) – Bharat Bhautik Paryavaran Book

Bharat Bhautik Paryavaran
नमस्ते विद्यार्थियों।

चलिए, आज हम भूगोल की 'भारत भौतिक पर्यावरण' पुस्तक के अध्याय 7, 'प्राकृतिक संकट तथा आपदाएँ' का गहन अध्ययन करेंगे। यह अध्याय प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे सीधे प्रश्न पूछे जाते हैं। हम इस अध्याय के हर महत्वपूर्ण पहलू को विस्तार से समझेंगे।

अध्याय 7: प्राकृतिक संकट तथा आपदाएँ - विस्तृत नोट्स

1. संकट तथा आपदा में अंतर

यह समझना सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम है।

  • प्राकृतिक संकट (Natural Hazard): प्रकृति के वे तत्व या घटनाएँ, जिनसे धन-जन को हानि पहुँचने की संभावना होती है। यह एक संभावित खतरा है। उदाहरण: भूकंपीय क्षेत्र में रहना एक संकट है।
  • प्राकृतिक आपदा (Natural Disaster): जब कोई प्राकृतिक संकट वास्तव में घटित हो जाता है और बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान करता है, तो वह आपदा कहलाता है। यह संकट का परिणाम है। उदाहरण: भूकंपीय क्षेत्र में भूकंप का आना और इमारतों का गिरना एक आपदा है।

मुख्य बिंदु: सभी आपदाएँ पहले संकट होती हैं, लेकिन हर संकट आपदा में नहीं बदलता।

2. प्राकृतिक आपदाओं का वर्गीकरण

भारत में आपदाओं को उनकी उत्पत्ति के आधार पर मुख्य रूप से चार वर्गों में बाँटा जा सकता है:

(क) वायुमंडलीय (Atmospheric):

  • चक्रवात (Cyclone)
  • सूखा (Drought)
  • तूफान (Storms)
  • लू चलना (Heatwave)
  • शीत लहर (Cold Wave)

(ख) भौमिक (Terrestrial/Geological):

  • भूकंप (Earthquake)
  • ज्वालामुखी (Volcano)
  • भूस्खलन (Landslide)
  • मृदा अपरदन (Soil Erosion)

(ग) जलीय (Aquatic/Hydrological):

  • बाढ़ (Flood)
  • सुनामी (Tsunami)
  • महासागरीय धाराएँ (Ocean Currents)

(घ) जैविक (Biological):

  • महामारी (Epidemics) - जैसे डेंगू, मलेरिया, कोविड-19
  • टिड्डी दल का हमला (Locust Attack)
  • पशुओं की महामारियाँ

भारत के प्रमुख प्राकृतिक संकट और आपदाएँ

1. भूकंप (Earthquake)

  • परिभाषा: पृथ्वी की सतह का अचानक काँपना या हिलना भूकंप कहलाता है। यह ऊर्जा के निकलने के कारण होता है जो भूकंपीय तरंगें उत्पन्न करती है।
  • मापन:
    • रिक्टर स्केल (Richter Scale): भूकंप की तीव्रता (Magnitude) मापता है। यह एक लॉगरिदमिक पैमाना है (हर अगला अंक 10 गुना अधिक शक्तिशाली होता है)।
    • मरकेली स्केल (Mercalli Scale): भूकंप से हुई क्षति (Intensity) का आकलन करता है।
  • भारत के भूकंपीय ज़ोन (Seismic Zones of India): भारत को भूकंपीयता के आधार पर चार ज़ोनों में बाँटा गया है (पहले 5 थे, अब ज़ोन-I को ज़ोन-II में मिला दिया गया है)।
    • ज़ोन-V (अति अत्यधिक क्षति जोखिम): सबसे खतरनाक क्षेत्र। इसमें पूरा पूर्वोत्तर भारत, जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्से, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात का कच्छ का रण और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह शामिल हैं।
    • ज़ोन-IV (अधिक क्षति जोखिम): जम्मू-कश्मीर और हिमाचल के शेष भाग, दिल्ली, सिक्किम, उत्तर प्रदेश के उत्तरी भाग, बिहार और पश्चिम बंगाल का उत्तरी हिस्सा, गुजरात के कुछ भाग और पश्चिमी तट के पास महाराष्ट्र का कुछ हिस्सा।
    • ज़ोन-III (मध्यम क्षति जोखिम): केरल, गोवा, लक्षद्वीप, उत्तर प्रदेश और गुजरात के बचे हुए हिस्से, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और कर्नाटक के कुछ हिस्से।
    • ज़ोन-II (न्यूनतम क्षति जोखिम): देश का शेष भाग, जो प्रायद्वीपीय पठार का एक बड़ा हिस्सा है।

2. सुनामी (Tsunami)

  • परिभाषा: समुद्र के नीचे भूकंप, ज्वालामुखी विस्फोट या भूस्खलन के कारण उत्पन्न होने वाली विशाल समुद्री लहरों को सुनामी कहते हैं।
  • भारत में प्रभाव: भारत की पूर्वी और पश्चिमी तटरेखा, तथा द्वीप समूह (अंडमान-निकोबार, लक्षद्वीप) सुनामी से प्रभावित हो सकते हैं।
  • प्रमुख उदाहरण: 26 दिसंबर 2004 को हिंद महासागर में आई सुनामी ने भारत के पूर्वी तट पर भारी तबाही मचाई थी।
  • बचाव: भारत ने हैदराबाद में 'भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र' (INCOIS) में एक उन्नत सुनामी चेतावनी प्रणाली स्थापित की है।

3. उष्णकटिबंधीय चक्रवात (Tropical Cyclone)

  • परिभाषा: निम्न वायुदाब के केंद्र होते हैं जिनके चारों ओर गर्म और आर्द्र हवाएँ तेज़ गति से घूमती हैं।
  • प्रभावित क्षेत्र:
    • बंगाल की खाड़ी: यहाँ अरब सागर की तुलना में अधिक और तीव्र चक्रवात आते हैं। यह भारत के पूर्वी तट (तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, पश्चिम बंगाल) को प्रभावित करते हैं।
    • अरब सागर: यहाँ उठने वाले चक्रवात गुजरात और महाराष्ट्र के तटों को प्रभावित करते हैं।
  • विशेषताएँ: तेज़ हवाएँ, मूसलाधार वर्षा और ऊँची समुद्री लहरें (Storm Surge)।

4. बाढ़ (Flood)

  • परिभाषा: जब नदी का पानी किनारों को तोड़कर आस-पास के मैदानी इलाकों में फैल जाता है, तो उसे बाढ़ कहते हैं।
  • भारत में बाढ़ प्रभावित क्षेत्र:
    • गंगा-ब्रह्मपुत्र का मैदान: असम, पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश सबसे अधिक प्रभावित राज्य हैं। ब्रह्मपुत्र नदी अपने मार्ग परिवर्तन और भारी तलछट जमाव के लिए कुख्यात है।
    • तटीय क्षेत्र: चक्रवात और सुनामी के कारण तटीय राज्यों (ओडिशा, आंध्र प्रदेश, गुजरात) में बाढ़ आती है।
    • राजस्थान और गुजरात: यहाँ कभी-कभी आकस्मिक बाढ़ (Flash Flood) आती है।

5. सूखा (Drought)

  • परिभाषा: किसी भी क्षेत्र में होने वाली सामान्य वर्षा से कम वर्षा की एक लंबी अवधि को सूखा कहते हैं।
  • सूखे के प्रकार:
    • मौसमी सूखा: जब वर्षा अपर्याप्त और समय पर नहीं होती।
    • कृषि सूखा: जब मिट्टी में नमी की कमी के कारण फसलें मुरझा जाती हैं।
    • जलीय सूखा: जब नदियाँ, झीलें और भौम जल स्तर नीचे चला जाता है।
    • पारिस्थितिक सूखा: जब प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्र में जल की कमी से उत्पादकता घट जाती है और तंत्र नष्ट होने लगता है।
  • भारत में सूखा प्रभावित क्षेत्र: राजस्थान (विशेषकर पश्चिमी भाग), गुजरात का कच्छ और सौराष्ट्र क्षेत्र, महाराष्ट्र का विदर्भ क्षेत्र, और कर्नाटक तथा तमिलनाडु के आंतरिक भाग (वृष्टि छाया प्रदेश)।

6. भूस्खलन (Landslide)

  • परिभाषा: गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में चट्टान, मलबा या मिट्टी का ढलान से नीचे की ओर खिसकना।
  • कारण: भारी वर्षा, भूकंप, वनों की कटाई, सड़कों और बाँधों का अवैज्ञानिक निर्माण।
  • प्रभावित क्षेत्र:
    • हिमालय क्षेत्र: यह युवा और अस्थिर पर्वत श्रृंखला है, इसलिए यहाँ भूस्खलन की घटनाएँ बहुत आम हैं।
    • पश्चिमी घाट: तीव्र ढलान और भारी वर्षा के कारण यहाँ भी भूस्खलन होते हैं।

आपदा प्रबंधन (Disaster Management)

आपदाओं को रोका नहीं जा सकता, लेकिन उनके प्रभाव को कम किया जा सकता है। इसके लिए एक चक्रीय प्रक्रिया अपनाई जाती है:

  1. आपदा पूर्व (Pre-disaster):

    • निवारण (Mitigation): आपदा के प्रभाव को कम करने के उपाय, जैसे- बाढ़ नियंत्रण के लिए तटबंध बनाना, भूकंपरोधी घर बनाना।
    • तैयारी (Preparedness): आपदा आने पर क्या करना है, इसकी योजना बनाना। जैसे- चेतावनी प्रणाली, लोगों को प्रशिक्षण देना।
  2. आपदा के दौरान (During Disaster):

    • अनुक्रिया (Response): तत्काल बचाव और राहत कार्य। जैसे- खोज एवं बचाव अभियान, अस्थायी आश्रय और भोजन की व्यवस्था।
  3. आपदा के बाद (Post-disaster):

    • पुनर्प्राप्ति/पुनर्निर्माण (Recovery/Reconstruction): जीवन को सामान्य बनाना और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढाँचे का पुनर्निर्माण करना।

भारत में आपदा प्रबंधन कानून: भारत सरकार ने आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 पारित किया है। इसके तहत राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA), राज्य स्तर पर SDMA और जिला स्तर पर DDMA का गठन किया गया है। बचाव कार्य के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की स्थापना की गई है।


अभ्यास के लिए 10 महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

प्रश्न 1: भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी, बैरन द्वीप, कहाँ स्थित है?
(a) लक्षद्वीप द्वीप समूह में
(b) अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में
(c) पश्चिमी घाट में
(d) हिमालय में

उत्तर: (b) अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में
व्याख्या: बैरन द्वीप अंडमान सागर में स्थित भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी है।

प्रश्न 2: भारत को कितने भूकंपीय ज़ोनों में विभाजित किया गया है?
(a) तीन
(b) चार
(c) पाँच
(d) छह

उत्तर: (b) चार
व्याख्या: भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने देश को चार भूकंपीय ज़ोनों (Zone-II, Zone-III, Zone-IV, Zone-V) में बाँटा है।

प्रश्न 3: जब मिट्टी में नमी की कमी के कारण फसलें मुरझा जाती हैं, तो इसे किस प्रकार का सूखा कहा जाता है?
(a) मौसमी सूखा
(b) जलीय सूखा
(c) कृषि सूखा
(d) पारिस्थितिक सूखा

उत्तर: (c) कृषि सूखा
व्याख्या: कृषि सूखा सीधे तौर पर फसलों के लिए आवश्यक मिट्टी की नमी की कमी से संबंधित है।

प्रश्न 4: भारत के किस तटीय भाग में अरब सागर की तुलना में अधिक चक्रवात आते हैं?
(a) कोंकण तट
(b) मालाबार तट
(c) कोरोमंडल तट (पूर्वी तट)
(d) काठियावाड़ तट

उत्तर: (c) कोरोमंडल तट (पूर्वी तट)
व्याख्या: बंगाल की खाड़ी में अरब सागर की अपेक्षा अधिक चक्रवात उत्पन्न होते हैं, जो भारत के पूर्वी तट को प्रभावित करते हैं।

प्रश्न 5: भारत में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) का अध्यक्ष कौन होता है?
(a) राष्ट्रपति
(b) गृह मंत्री
(c) प्रधानमंत्री
(d) पर्यावरण मंत्री

उत्तर: (c) प्रधानमंत्री
व्याख्या: आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अनुसार, भारत के प्रधानमंत्री NDMA के पदेन अध्यक्ष होते हैं।

प्रश्न 6: निम्नलिखित में से कौन सा क्षेत्र भारत के भूकंपीय ज़ोन-V के अंतर्गत आता है?
(a) दिल्ली
(b) मुंबई
(c) कच्छ का रण
(d) चेन्नई

उत्तर: (c) कच्छ का रण
व्याख्या: गुजरात का कच्छ का रण, पूर्वोत्तर भारत और हिमालय के कुछ हिस्से अति अत्यधिक क्षति जोखिम वाले ज़ोन-V में आते हैं।

प्रश्न 7: भारत में सुनामी चेतावनी केंद्र (Tsunami Warning Centre) कहाँ स्थित है?
(a) चेन्नई में
(b) पोर्ट ब्लेयर में
(c) विशाखापत्तनम में
(d) हैदराबाद में

उत्तर: (d) हैदराबाद में
व्याख्या: भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (INCOIS), हैदराबाद, भारत के लिए सुनामी चेतावनी जारी करने वाली नोडल एजेंसी है।

प्रश्न 8: 'आपदा' और 'संकट' के बीच मुख्य अंतर क्या है?
(a) आपदा मानव निर्मित होती है जबकि संकट प्राकृतिक।
(b) संकट एक संभावित खतरा है, जबकि आपदा उस खतरे का वास्तविक परिणाम है।
(c) संकट केवल विकसित देशों में होता है।
(d) आपदा में जान-माल का नुकसान नहीं होता।

उत्तर: (b) संकट एक संभावित खतरा है, जबकि आपदा उस खतरे का वास्तविक परिणाम है।
व्याख्या: संकट एक ऐसी स्थिति है जिसमें नुकसान की संभावना होती है, जबकि आपदा तब होती है जब वह नुकसान वास्तव में हो जाता है।

प्रश्न 9: ब्रह्मपुत्र नदी में बाढ़ आने का एक प्रमुख कारण क्या है?
(a) नदी में पानी की कमी
(b) नदी द्वारा भारी मात्रा में तलछट का निक्षेपण
(c) नदी के किनारे वनीकरण
(d) नदी पर कई बाँधों का निर्माण

उत्तर: (b) नदी द्वारा भारी मात्रा में तलछट का निक्षेपण
व्याख्या: ब्रह्मपुत्र नदी अपने साथ भारी मात्रा में अवसाद (तलछट) लाती है, जो नदी के तल में जमा हो जाता है, जिससे उसकी जल धारण क्षमता कम हो जाती है और बाढ़ आती है।

प्रश्न 10: भारत में आपदा प्रबंधन अधिनियम किस वर्ष पारित किया गया था?
(a) 2004
(b) 2005
(c) 2006
(d) 2001

उत्तर: (b) 2005
व्याख्या: दिसंबर 2004 की सुनामी के बाद, भारत सरकार ने आपदा प्रबंधन के लिए एक संस्थागत ढाँचा तैयार करने हेतु 2005 में यह अधिनियम पारित किया।

इन नोट्स और प्रश्नों का अच्छी तरह से अध्ययन करें। यह आपकी परीक्षा की तैयारी में बहुत सहायक सिद्ध होगा। शुभकामनाएँ

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