Class 11 Graphics Design Notes Chapter 6 (Chapter 6) – Graphic Desing ek Kahani Book

Graphic Desing ek Kahani
प्रिय विद्यार्थियों,

आज हम ग्राफिक डिज़ाइन के सबसे मूलभूत और महत्वपूर्ण अध्याय, 'डिज़ाइन के सिद्धांत और तत्व' पर विस्तार से चर्चा करेंगे। यह अध्याय न केवल आपकी सैद्धांतिक समझ को मजबूत करेगा, बल्कि आपको व्यावहारिक डिज़ाइन कार्यों में भी मार्गदर्शन प्रदान करेगा। सरकारी परीक्षाओं की तैयारी के लिए यह खंड अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे सीधे प्रश्न पूछे जाते हैं।


अध्याय 6: डिज़ाइन के सिद्धांत और तत्व

ग्राफिक डिज़ाइन एक कला और विज्ञान है जो दृश्य संचार के माध्यम से विचारों और संदेशों को व्यक्त करता है। प्रभावी डिज़ाइन बनाने के लिए, डिज़ाइनर को कुछ मूलभूत तत्वों और सिद्धांतों को समझना और उनका उपयोग करना होता है। ये तत्व और सिद्धांत एक डिज़ाइन की नींव होते हैं, जो यह निर्धारित करते हैं कि एक डिज़ाइन कितना आकर्षक, स्पष्ट और प्रभावी होगा।

I. डिज़ाइन के तत्व (Elements of Design)
डिज़ाइन के तत्व वे मूलभूत घटक होते हैं जिनसे कोई भी डिज़ाइन बनता है। ये एक डिज़ाइनर के टूलकिट के उपकरण हैं, जिनका उपयोग करके वह अपनी रचना को आकार देता है।

  1. रेखा (Line):

    • परिभाषा: दो बिंदुओं को जोड़ने वाला मार्ग या एक बिंदु की निरंतर गति। यह सबसे बुनियादी डिज़ाइन तत्वों में से एक है।
    • प्रकार:
      • सीधी रेखाएँ: क्षैतिज (शांति, स्थिरता), ऊर्ध्वाधर (शक्ति, वृद्धि), विकर्ण (गति, ऊर्जा)।
      • घुमावदार रेखाएँ: कोमलता, प्रवाह, गतिशीलता।
      • अन्य प्रकार: मोटी, पतली, ठोस, बिंदीदार, डैश वाली।
    • उपयोग:
      • आकार बनाना (रूपरेखा)।
      • दिशा का संकेत देना (जैसे तीर)।
      • आँखों को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक निर्देशित करना।
      • बनावट या पैटर्न बनाना।
      • विभाजन या संगठन करना।
  2. आकार (Shape):

    • परिभाषा: एक बंद रेखा द्वारा परिभाषित एक द्वि-आयामी (2D) क्षेत्र। इनकी केवल लंबाई और चौड़ाई होती है।
    • प्रकार:
      • ज्यामितीय आकार (Geometric Shapes): वृत्त, वर्ग, त्रिभुज, आयत। ये सटीक, संरचित और मानव निर्मित होते हैं।
      • कार्बनिक आकार (Organic Shapes): प्रकृति से प्रेरित, जैसे पत्तियाँ, बादल, चट्टानें। ये मुक्त-प्रवाह वाले, अनियमित और अधिक प्राकृतिक होते हैं।
      • अमूर्त आकार (Abstract Shapes): पहचानने योग्य नहीं, लेकिन प्रतीकात्मक हो सकते हैं।
    • उपयोग: वस्तुओं को दर्शाना, पैटर्न बनाना, ध्यान आकर्षित करना, संदेश देना।
  3. प्रारूप/रूप (Form):

    • परिभाषा: एक त्रि-आयामी (3D) वस्तु जिसमें लंबाई, चौड़ाई और गहराई (या आयतन) होती है।
    • उदाहरण: एक घन, एक गोला, एक पिरामिड।
    • ग्राफिक डिज़ाइन में: 2D सतह पर 3D का भ्रम पैदा करने के लिए छायांकन, परिप्रेक्ष्य, रंग और बनावट का उपयोग किया जाता है।
  4. रंग (Color):

    • परिभाषा: प्रकाश का एक गुण जो हमारी आँखों द्वारा देखा जाता है। यह डिज़ाइन में सबसे शक्तिशाली तत्वों में से एक है जो भावनाओं और मूड को प्रभावित करता है।
    • रंग चक्र (Color Wheel): रंगों को उनके संबंधों के अनुसार व्यवस्थित करने का एक उपकरण।
    • रंगों के प्रकार:
      • प्राथमिक रंग (Primary Colors):
        • पारंपरिक (RYB): लाल, पीला, नीला (पेंटिंग और पिगमेंट के लिए)।
        • डिजिटल स्क्रीन (RGB): लाल, हरा, नीला (मॉनिटर, टीवी के लिए)।
        • प्रिंटिंग (CMYK): सियान, मैजेंटा, पीला, काला (प्रिंटर के लिए)। इन्हें अन्य रंगों से नहीं बनाया जा सकता।
      • द्वितीयक रंग (Secondary Colors): दो प्राथमिक रंगों को मिलाकर बनते हैं (जैसे लाल + पीला = नारंगी, नीला + पीला = हरा)।
      • तृतीयक रंग (Tertiary Colors): एक प्राथमिक और एक द्वितीयक रंग को मिलाकर बनते हैं (जैसे लाल-नारंगी, नीला-हरा)।
    • रंग योजनाएँ (Color Schemes):
      • मोनोक्रोमैटिक (Monochromatic): एक ही रंग के विभिन्न शेड्स (गहराई), टिंट्स (सफेद मिलाकर हल्का करना) और टोन (ग्रे मिलाकर)।
      • एनालॉगस (Analogous): रंग चक्र पर एक-दूसरे के बगल में स्थित रंग (जैसे नीला, नीला-हरा, हरा)। ये सामंजस्यपूर्ण होते हैं।
      • पूरक (Complementary): रंग चक्र पर एक-दूसरे के ठीक विपरीत स्थित रंग (जैसे लाल और हरा, नीला और नारंगी)। ये उच्च कंट्रास्ट और ऊर्जा प्रदान करते हैं।
      • ट्रायडिक (Triadic): रंग चक्र पर समान दूरी पर स्थित तीन रंग।
    • रंग मनोविज्ञान (Color Psychology): रंग भावनाओं और मूड को प्रभावित करते हैं (जैसे लाल - ऊर्जा, जुनून, खतरा; नीला - शांति, विश्वास, स्थिरता; पीला - खुशी, आशावाद, चेतावनी; हरा - प्रकृति, विकास, स्वास्थ्य)।
  5. बनावट (Texture):

    • परिभाषा: किसी सतह की गुणवत्ता, वह कैसी दिखती है या महसूस होती है।
    • प्रकार:
      • दृश्य बनावट (Visual Texture): जिसे केवल देखा जा सकता है (जैसे पत्थर का पैटर्न, कपड़े का प्रिंट)।
      • स्पर्शनीय बनावट (Tactile Texture): जिसे छुआ और महसूस किया जा सकता है (जैसे खुरदुरी लकड़ी, चिकना रेशम)।
    • उपयोग: गहराई, रुचि और यथार्थवाद जोड़ना।
  6. स्थान (Space):

    • परिभाषा: डिज़ाइन में तत्वों के बीच या उनके आसपास का क्षेत्र।
    • सकारात्मक स्थान (Positive Space): वह क्षेत्र जो मुख्य विषय या डिज़ाइन तत्वों द्वारा कब्जा कर लिया गया है।
    • नकारात्मक स्थान (Negative Space) / सफेद स्थान (White Space): तत्वों के आसपास या उनके बीच का खाली क्षेत्र। यह डिज़ाइन को सांस लेने की जगह देता है, तत्वों को अलग करता है और पठनीयता बढ़ाता है।
    • उपयोग: तत्वों को व्यवस्थित करना, संतुलन बनाना, पदानुक्रम बनाना, अव्यवस्था कम करना।
  7. टाइपोग्राफी (Typography):

    • परिभाषा: अक्षरों, संख्याओं और प्रतीकों की व्यवस्था और शैली। यह दृश्य संचार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
    • फॉन्ट (Font): एक विशेष शैली और आकार का टाइपफेस (जैसे Arial 12pt बोल्ड)।
    • टाइपफेस (Typeface): अक्षरों का एक सेट जो एक विशिष्ट डिज़ाइन साझा करता है (जैसे Arial, Times New Roman, Calibri)।
    • लेजिबिलिटी (Legibility): अक्षरों को अलग-अलग पहचानने में कितनी आसानी होती है (जैसे 'i' और 'l' में अंतर)।
    • रीडेबिलिटी (Readability): पाठ को कितनी आसानी से पढ़ा और समझा जा सकता है (पंक्ति की लंबाई, रिक्ति, फॉन्ट आकार)।
    • उपयोग: संदेश को स्पष्ट और प्रभावी ढंग से संप्रेषित करना, मूड सेट करना, पदानुक्रम बनाना, ब्रांड पहचान स्थापित करना।

II. डिज़ाइन के सिद्धांत (Principles of Design)
डिज़ाइन के सिद्धांत वे नियम या दिशानिर्देश हैं जो यह बताते हैं कि डिज़ाइन के तत्वों को एक प्रभावी और सौंदर्यपूर्ण रूप से मनभावन रचना बनाने के लिए कैसे व्यवस्थित किया जाना चाहिए। ये सिद्धांत एक डिज़ाइन को सफल बनाने में मदद करते हैं।

  1. संतुलन (Balance):

    • परिभाषा: डिज़ाइन में दृश्य भार का समान वितरण। यह स्थिरता और संरचना की भावना पैदा करता है।
    • प्रकार:
      • सममित संतुलन (Symmetrical Balance): डिज़ाइन के दोनों ओर समान तत्व होते हैं, जैसे दर्पण प्रतिबिंब। यह औपचारिक, स्थिर और पारंपरिक होता है।
      • असममित संतुलन (Asymmetrical Balance): डिज़ाइन के दोनों ओर अलग-अलग तत्व होते हैं, लेकिन उनका दृश्य भार समान होता है। यह अधिक गतिशील, आधुनिक और अनौपचारिक होता है।
      • रेडियल संतुलन (Radial Balance): तत्व एक केंद्रीय बिंदु से बाहर की ओर निकलते हैं (जैसे एक फूल की पंखुड़ियाँ)।
    • उपयोग: स्थिरता और दृश्य आराम प्रदान करना।
  2. विपरीतता (Contrast):

    • परिभाषा: डिज़ाइन में तत्वों के बीच अंतर। यह रुचि पैदा करता है और ध्यान आकर्षित करता है।
    • उदाहरण: हल्के और गहरे रंग, बड़े और छोटे आकार, मोटी और पतली रेखाएँ, चिकनी और खुरदुरी बनावट, विभिन्न फॉन्ट (जैसे सेरिफ़ और सैन-सेरिफ़)।
    • उपयोग: पदानुक्रम बनाना, ध्यान आकर्षित करना, पठनीयता बढ़ाना, बोरियत दूर करना।
  3. जोर/महत्व (Emphasis/Dominance):

    • परिभाषा: डिज़ाइन के एक विशेष तत्व या क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करना, जिससे वह सबसे प्रमुख लगे। इसे फोकल पॉइंट (Focal Point) भी कहा जाता है।
    • कैसे प्राप्त करें: रंग, आकार, स्थान, बनावट, विपरीतता या अद्वितीयता का उपयोग करके।
    • उपयोग: दर्शक की आँख को सबसे महत्वपूर्ण जानकारी की ओर निर्देशित करना।
  4. पुनरावृत्ति/पैटर्न (Repetition/Pattern):

    • परिभाषा: डिज़ाइन में एक या अधिक तत्वों का बार-बार उपयोग।
    • पैटर्न (Pattern): पुनरावृत्ति का एक विशेष प्रकार जहाँ तत्व एक व्यवस्थित या अनुमानित तरीके से दोहराए जाते हैं।
    • उपयोग: एकता, निरंतरता, लय और दृश्य रुचि पैदा करना। ब्रांड पहचान और ब्रांडिंग में भी महत्वपूर्ण।
  5. अनुपात (Proportion):

    • परिभाषा: डिज़ाइन के विभिन्न तत्वों के आकार का एक-दूसरे के संबंध में और पूरे डिज़ाइन के संबंध में।
    • उदाहरण: किसी व्यक्ति के सिर और शरीर का अनुपात, या एक लोगो में आइकन और टेक्स्ट का अनुपात।
    • उपयोग: तत्वों के बीच सामंजस्यपूर्ण संबंध बनाना, यथार्थवाद या अतिशयोक्ति का सुझाव देना।
  6. आंदोलन (Movement):

    • परिभाषा: वह तरीका जिससे दर्शक की आँख डिज़ाइन के माध्यम से निर्देशित होती है, आमतौर पर फोकल पॉइंट से शुरू होकर अन्य तत्वों तक।
    • कैसे प्राप्त करें: रेखाओं, आकृतियों, रंगों, पुनरावृत्ति और पदानुक्रम का उपयोग करके।
    • उपयोग: कहानी सुनाना, जानकारी के प्रवाह को नियंत्रित करना, दृश्य यात्रा बनाना।
  7. एकरूपता/एकता (Unity/Harmony):

    • परिभाषा: सभी डिज़ाइन तत्वों का एक साथ मिलकर एक सुसंगत और पूर्ण इकाई के रूप में काम करना।
    • जब एक डिज़ाइन में एकता होती है, तो उसके सभी भाग एक साथ फिट होते हैं और एक पूर्ण चित्र बनाते हैं, जिससे वह अव्यवस्थित या खंडित नहीं लगता।
    • उपयोग: डिज़ाइन को सुसंगत, समझने योग्य और सौंदर्यपूर्ण रूप से मनभावन बनाना।
  8. पदानुक्रम (Hierarchy):

    • परिभाषा: डिज़ाइन में तत्वों को उनके महत्व के क्रम में व्यवस्थित करना।
    • सबसे महत्वपूर्ण तत्व सबसे प्रमुख होते हैं (जैसे बड़ा शीर्षक), और कम महत्वपूर्ण तत्व कम प्रमुख होते हैं (जैसे छोटा मुख्य पाठ)।
    • उपयोग: दर्शक को यह समझने में मदद करना कि कौन सी जानकारी सबसे महत्वपूर्ण है और उसे किस क्रम में पढ़ना है, जिससे सूचना का प्रवाह स्पष्ट हो।
  9. सफेद स्थान/नकारात्मक स्थान (White Space/Negative Space):

    • यद्यपि इसे डिज़ाइन के तत्व के रूप में भी देखा जाता है, इसका उपयोग एक सिद्धांत के रूप में भी किया जाता है ताकि तत्वों को सांस लेने की जगह मिल सके, अव्यवस्था कम हो और महत्वपूर्ण तत्वों पर ध्यान केंद्रित किया जा सके।
    • यह डिज़ाइन को साफ, व्यवस्थित और पेशेवर बनाता है, और कभी-कभी छिपे हुए आकार भी बना सकता है।

इन सिद्धांतों और तत्वों को समझकर और उनका प्रभावी ढंग से उपयोग करके, एक डिज़ाइनर शक्तिशाली, स्पष्ट और सौंदर्यपूर्ण रूप से मनभावन दृश्य संचार बना सकता है जो अपने इच्छित संदेश को सफलतापूर्वक संप्रेषित करता है।


बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions - MCQs)

  1. डिज़ाइन में दो बिंदुओं को जोड़ने वाला मार्ग या एक बिंदु की निरंतर गति क्या कहलाती है?
    क) आकार
    ख) बनावट
    ग) रेखा
    घ) रंग

  2. कौन सा रंग चक्र पर एक-दूसरे के विपरीत स्थित रंगों को संदर्भित करता है और उच्च कंट्रास्ट प्रदान करता है?
    क) मोनोक्रोमैटिक
    ख) एनालॉगस
    ग) पूरक
    घ) ट्रायडिक

  3. डिज़ाइन में मुख्य विषय या डिज़ाइन तत्वों द्वारा कब्जा किया गया क्षेत्र क्या कहलाता है?
    क) नकारात्मक स्थान
    ख) सफेद स्थान
    ग) सकारात्मक स्थान
    घ) पृष्ठभूमि

  4. डिज़ाइन के एक विशेष तत्व या क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करना, जिससे वह सबसे प्रमुख लगे, क्या कहलाता है?
    क) संतुलन
    ख) पुनरावृत्ति
    ग) जोर/महत्व
    घ) अनुपात

  5. अक्षरों, संख्याओं और प्रतीकों की व्यवस्था और शैली को क्या कहते हैं?
    क) लेजिबिलिटी
    ख) रीडेबिलिटी
    ग) टाइपफेस
    घ) टाइपोग्राफी

  6. जब डिज़ाइन के दोनों ओर समान तत्व होते हैं, जैसे दर्पण प्रतिबिंब, तो यह किस प्रकार का संतुलन होता है?
    क) असममित संतुलन
    ख) रेडियल संतुलन
    ग) सममित संतुलन
    घ) गतिशील संतुलन

  7. डिजिटल स्क्रीन पर रंगों को प्रदर्शित करने के लिए आमतौर पर किस प्राथमिक रंग मॉडल का उपयोग किया जाता है?
    क) RYB
    ख) CMYK
    ग) RGB
    घ) PMS

  8. डिज़ाइन में तत्वों के बीच या उनके आसपास का खाली क्षेत्र जो डिज़ाइन को सांस लेने की जगह देता है और पठनीयता बढ़ाता है, क्या कहलाता है?
    क) सकारात्मक स्थान
    ख) नकारात्मक स्थान
    ग) बनावट
    घ) आंदोलन

  9. वह तरीका जिससे दर्शक की आँख डिज़ाइन के माध्यम से निर्देशित होती है, आमतौर पर फोकल पॉइंट से शुरू होकर अन्य तत्वों तक, क्या कहलाता है?
    क) एकता
    ख) पदानुक्रम
    ग) आंदोलन
    घ) विपरीतता

  10. कौन सा डिज़ाइन तत्व किसी सतह की गुणवत्ता को संदर्भित करता है, वह कैसी दिखती है या महसूस होती है?
    क) आकार
    ख) बनावट
    ग) प्रारूप
    घ) रेखा


उत्तर कुंजी (Answer Key):

  1. ग) रेखा
  2. ग) पूरक
  3. ग) सकारात्मक स्थान
  4. ग) जोर/महत्व
  5. घ) टाइपोग्राफी
  6. ग) सममित संतुलन
  7. ग) RGB
  8. ख) नकारात्मक स्थान
  9. ग) आंदोलन
  10. ख) बनावट

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