Class 11 Hindi Notes Chapter 3 (आलो-आँधारी) – Vitan Book

नमस्ते! चलिए, आज हम वितान भाग-1 के तीसरे और अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय 'आलो-आँधारी' का प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से गहन अध्ययन करेंगे। यह पाठ न केवल मार्मिक है, बल्कि इससे कई महत्वपूर्ण प्रश्न भी बनते हैं।
अध्याय 3: आलो-आँधारी (लेखिका: बेबी हालदार)
पाठ का विस्तृत परिचय एवं नोट्स
यह पाठ लेखिका बेबी हालदार की आत्मकथा का एक अंश है। 'आलो-आँधारी' मूल रूप से बांग्ला भाषा में लिखी गई थी, जिसका हिंदी अनुवाद प्रबोध कुमार ने किया है। इस पाठ का शीर्षक 'आलो-आँधारी' का अर्थ है - 'अंधेरे से उजाले की ओर'। यह शीर्षक लेखिका के जीवन की यात्रा को सटीक रूप से दर्शाता है, कि कैसे वह घोर निराशा, गरीबी और शोषण के अंधकार से निकलकर लेखन और सम्मान के उजाले तक पहुँचीं।
लेखिका परिचय: बेबी हालदार
- जन्म: जम्मू-कश्मीर में सेना में कार्यरत एक पिता के घर हुआ।
- प्रारंभिक जीवन: तेरह वर्ष की आयु में उनका विवाह दोगुनी उम्र के व्यक्ति से कर दिया गया, जिसके कारण उन्हें सातवीं कक्षा में ही पढ़ाई छोड़नी पड़ी।
- संघर्ष: पति की प्रताड़ना से तंग आकर उन्होंने अपने तीन बच्चों के साथ पति का घर छोड़ दिया और दुर्गापुर से फरीदाबाद आकर रहने लगीं। वे घरेलू सहायिका (नौकरानी) के रूप में काम करके अपना और अपने बच्चों का पेट पालती थीं।
- लेखन की शुरुआत: सुनील गांगुली नामक व्यक्ति से मिलने के बाद उन्हें एक अच्छे मालिक, तातुश (प्रबोध कुमार) के घर काम मिला। तातुश ने उनकी पढ़ने की रुचि को पहचाना और उन्हें लिखने के लिए प्रेरित किया। यहीं से उनके लेखिका बनने का सफर शुरू हुआ।
पाठ का सार और महत्वपूर्ण बिंदु
-
संघर्षपूर्ण जीवन: लेखिका अपने बच्चों के साथ किराए के घर में रहती थीं। घर का किराया चुकाना, बच्चों का पेट पालना और सामाजिक असुरक्षा, ये उनकी प्रमुख समस्याएँ थीं। उन्हें काम की तलाश में भटकना पड़ता था और लोग उन पर बुरी नज़र रखते थे।
-
तातुश से मुलाकात: सुनील गांगुली के माध्यम से बेबी की मुलाकात तातुश से हुई, जो एक सेवानिवृत्त प्रोफेसर थे और अकेले रहते थे। तातुश ने उन्हें अपने घर में काम पर रख लिया। यह बेबी के जीवन का एक निर्णायक मोड़ था।
-
तातुश का प्रेरक व्यक्तित्व: तातुश अत्यंत दयालु और उदार व्यक्ति थे। उन्होंने बेबी को केवल एक नौकरानी नहीं, बल्कि अपनी बेटी की तरह समझा। उन्होंने बेबी की पढ़ाई में रुचि देखकर उन्हें किताबें पढ़ने और लिखने के लिए प्रोत्साहित किया।
-
लेखन की शुरुआत: तातुश ने बेबी को एक कॉपी और पेन देकर अपने जीवन की कहानी लिखने को कहा। शुरुआत में बेबी को संकोच हुआ, लेकिन तातुश के निरंतर प्रोत्साहन से उन्होंने अपनी जीवन-गाथा लिखनी शुरू कर दी। वह दिन भर काम करने के बाद रात में थककर भी लिखती थीं।
-
लेखन में आने वाली बाधाएँ:
- काम की थकान के कारण लिखने में मुश्किल होती थी।
- बच्चों की देखभाल और शोरगुल के कारण एकाग्रता भंग होती थी।
- आस-पड़ोस के लोग ताना मारते थे कि नौकरानी होकर लिखने-पढ़ने का शौक चढ़ा है।
- उन्हें अपनी टूटी-फूटी भाषा और व्याकरण की अशुद्धियों का डर था।
-
तातुश का निरंतर सहयोग: तातुश न केवल उन्हें लिखने के लिए प्रेरित करते थे, बल्कि उनके लिखे हुए को पढ़ते, उसकी प्रशंसा करते और उसे कलकत्ता में अपने दोस्तों को भी दिखाते थे। उन्होंने बेबी के बच्चों की पढ़ाई-लिखाई का भी ध्यान रखा।
-
पहचान और प्रकाशन: तातुश के एक मित्र ने बेबी के लेखन को एक पत्रिका में छपवाने का सुझाव दिया। धीरे-धीरे उनका लेखन लोगों तक पहुँचा और सराहा गया। अंततः उनकी आत्मकथा 'आलो-आँधारी' के नाम से प्रकाशित हुई, जिसने उन्हें एक लेखिका के रूप में पहचान दिलाई।
-
पाठ का संदेश:
- यह पाठ दर्शाता है कि शिक्षा और लेखन किसी व्यक्ति के जीवन को कैसे बदल सकते हैं।
- मनुष्य में यदि प्रतिभा और लगन हो, तो विषम परिस्थितियाँ भी उसे आगे बढ़ने से नहीं रोक सकतीं।
- एक अच्छा गुरु या प्रेरक (जैसे तातुश) व्यक्ति की छिपी हुई प्रतिभा को निखार सकता है।
- यह पाठ समाज में घरेलू सहायिकाओं के जीवन के संघर्ष, शोषण और उनकी मानवीय संवेदनाओं को उजागर करता है।
अभ्यास हेतु 10 महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
आइए अब इस अध्याय से जुड़े कुछ बहुविकल्पीय प्रश्नों का अभ्यास करें।
प्रश्न 1: 'आलो-आँधारी' मूल रूप से किस भाषा में लिखी गई थी?
(क) हिंदी
(ख) मराठी
(ग) बांग्ला
(घ) असमिया
प्रश्न 2: लेखिका बेबी हालदार अपने मालिक को क्या कहकर पुकारती थीं?
(क) साहब
(ख) तातुश
(ग) बाबूजी
(घ) दादा
प्रश्न 3: बेबी हालदार को लिखने के लिए किसने प्रेरित किया?
(क) उनके पति ने
(ख) सुनील गांगुली ने
(ग) उनके पिता ने
(घ) तातुश ने
प्रश्न 4: 'आलो-आँधारी' का हिंदी में अनुवाद किसने किया?
(क) बेबी हालदार ने स्वयं
(ख) प्रबोध कुमार ने
(ग) रमेश चंद्र शाह ने
(घ) आशापूर्णा देवी ने
प्रश्न 5: लेखिका ने किस कक्षा के बाद अपनी पढ़ाई छोड़ दी थी?
(क) पाँचवीं
(ख) आठवीं
(ग) सातवीं
(घ) दसवीं
प्रश्न 6: तातुश के घर काम करने से पहले बेबी हालदार कहाँ रहती थीं?
(क) दिल्ली
(ख) कोलकाता
(ग) फरीदाबाद
(घ) दुर्गापुर
प्रश्न 7: 'आलो-आँधारी' का शाब्दिक अर्थ क्या है?
(क) दिन और रात
(ख) उजाला और परछाई
(ग) अंधकार से प्रकाश की ओर
(घ) आशा और निराशा
प्रश्न 8: बेबी हालदार के लेखन की तुलना किस प्रसिद्ध लेखिका से की गई थी?
(क) महादेवी वर्मा
(ख) सुभद्रा कुमारी चौहान
(ग) आशापूर्णा देवी
(घ) अमृता प्रीतम
प्रश्न 9: तातुश सेवानिवृत्ति से पहले क्या काम करते थे?
(क) डॉक्टर
(ख) इंजीनियर
(ग) प्रोफेसर
(घ) सैनिक
प्रश्न 10: यह पाठ साहित्य की किस विधा के अंतर्गत आता है?
(क) कहानी
(ख) जीवनी
(ग) आत्मकथा
(घ) संस्मरण
उत्तरमाला:
- (ग) बांग्ला
- (ख) तातुश
- (घ) तातुश ने
- (ख) प्रबोध कुमार ने
- (ग) सातवीं
- (ग) फरीदाबाद
- (ग) अंधकार से प्रकाश की ओर
- (ग) आशापूर्णा देवी
- (ग) प्रोफेसर
- (ग) आत्मकथा
इन नोट्स और प्रश्नों का अच्छे से अध्ययन करें। यह अध्याय आपको परीक्षा में अच्छे अंक दिलाने में बहुत सहायक होगा। शुभकामनाएँ