Class 11 Hindi Notes Chapter 7 (सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’: बादल राग) – Aroh Book

चलिए, आज हम सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ जी की प्रसिद्ध और ओजस्वी कविता ‘बादल राग’ का गहन अध्ययन करेंगे। यह कविता न केवल आपकी कक्षा के लिए, बल्कि विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसमें कवि ने बादल को क्रांति के दूत के रूप में प्रस्तुत किया है।
विस्तृत नोट्स: बादल राग (सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’)
1. कवि परिचय (सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’)
- जन्म: 1899 ई., महिषादल (बंगाल)।
- मूल निवास: गढ़ाकोला, जिला- उन्नाव (उत्तर प्रदेश)।
- निधन: 1961 ई., इलाहाबाद।
- साहित्यिक युग: छायावाद के चार प्रमुख स्तंभों (प्रसाद, पंत, निराला, महादेवी) में से एक। इन्हें 'महाप्राण' भी कहा जाता है।
- काव्य-शैली की विशेषताएँ:
- मुक्त छंद के प्रवर्तक।
- क्रांतिकारी और विद्रोही स्वर।
- ओज और पौरुष के कवि।
- शोषितों और पीड़ितों के प्रति गहरी सहानुभूति।
- भाषा में संस्कृतनिष्ठ तत्सम शब्दावली के साथ-साथ आम बोलचाल के शब्दों का प्रयोग।
- प्रमुख रचनाएँ: अनामिका, परिमल, गीतिका, कुकुरमुत्ता, नए पत्ते, राम की शक्तिपूजा, सरोज-स्मृति।
2. कविता का मूल भाव एवं सार
'बादल राग' निराला जी के काव्य संग्रह 'अनामिका' से ली गई है। यह एक आह्वान गीत है, जिसमें कवि बादलों का आह्वान क्रांति के प्रतीक के रूप में करते हैं।
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बादल - क्रांति का प्रतीक: इस कविता में बादल केवल वर्षा करने वाले जल-पुंज नहीं हैं, बल्कि वे समाज में व्यापक परिवर्तन लाने वाली क्रांति के अग्रदूत हैं। उनकी गर्जना शोषितों के मन में आशा और शोषकों के मन में भय उत्पन्न करती है।
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दो वर्गों पर प्रभाव: कवि ने समाज को दो वर्गों में बाँटकर बादल (क्रांति) का उन पर पड़ने वाला प्रभाव दिखाया है:
- शोषक वर्ग (पूँजीपति वर्ग): ऊँची-ऊँची अट्टालिकाओं (महलों) में रहने वाला यह धनी वर्ग बादलों की गर्जना सुनकर भयभीत हो जाता है। उन्हें अपनी संपत्ति और सुख-सुविधाओं के छिन जाने का डर सताता है। कवि ने उनकी अट्टालिकाओं को 'आतंक-भवन' कहा है, क्योंकि वे गरीबों का शोषण करके बनाई गई हैं।
- शोषित वर्ग (सर्वहारा वर्ग): किसान, मजदूर और गरीब वर्ग, जो गर्मी और अभाव से त्रस्त हैं, वे बादलों को उम्मीद भरी नज़रों से देखते हैं। उनके लिए बादल वर्षा के रूप में नया जीवन लेकर आते हैं। वे अपनी 'जीर्ण-बाहु' और 'शीर्ण-शरीर' के साथ अधीर होकर क्रांति रूपी बादल को पुकारते हैं।
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क्रांति का स्वरूप: कवि का मानना है कि क्रांति हमेशा शोषित वर्ग से ही आरंभ होती है, ठीक वैसे ही जैसे कीचड़ ('पंक') में ही कमल ('जलज') खिलता है। क्रांति का वज्रपात हमेशा पूँजीपतियों के महलों पर होता है, गरीबों की झोपड़ियों पर नहीं।
3. काव्य-सौंदर्य (परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण)
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भाव पक्ष:
- प्रगतिवादी चेतना: कविता में शोषक के प्रति आक्रोश और शोषित के प्रति गहरी सहानुभूति का भाव है, जो प्रगतिवादी विचारधारा का मुख्य स्वर है।
- क्रांतिकारी स्वर: पूरी कविता ओज और पौरुष से भरी है और सामाजिक विषमता को मिटाने के लिए क्रांति का आह्वान करती है।
- प्रतीकात्मकता: बादल, अट्टालिका, पंक, जलज आदि प्रतीकों का सुंदर प्रयोग हुआ है।
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कला पक्ष:
- भाषा: संस्कृतनिष्ठ, तत्सम प्रधान खड़ी बोली का प्रयोग है। भाषा में ओज गुण विद्यमान है।
- छंद: यह कविता 'मुक्त छंद' में लिखी गई है, जो निराला की पहचान है।
- अलंकार:
- मानवीकरण: "ऐ विप्लव के वीर!" - बादल का वीर के रूप में मानवीकरण।
- रूपक: "समीर-सागर", "आतंक-भवन"।
- अनुप्रास: "घेर घोर गगन", "रुद्ध कोष है, क्षुब्ध तोष"।
- विरोधाभास: "हँसते हैं छोटे पौधे लघु भार"।
- बिंब-योजना: कविता में दृश्य और श्रव्य बिंबों का सजीव चित्रण है। बादलों की गर्जना, बिजली की चमक, भयभीत धनी और आशान्वित किसान का चित्र आँखों के सामने साकार हो उठता है।
- नाद-सौंदर्य: कविता की ध्वन्यात्मकता अद्भुत है, जो बादलों की गर्जना और क्रांति के आगमन का एहसास कराती है।
4. प्रमुख पंक्तियों की व्याख्या
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"तिरती है समीर-सागर पर अस्थिर सुख पर दुःख की छाया-"
- अर्थ: कवि कहते हैं कि वायु रूपी सागर पर तैरते हुए ये बादल ऐसे लगते हैं, मानो पूँजीपतियों के क्षणिक सुख पर दुःख की छाया मंडरा रही हो। अर्थात, क्रांति आने पर उनका सुख समाप्त हो जाएगा।
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"अट्टालिका नहीं है रे, यह आतंक-भवन"
- अर्थ: कवि धनी लोगों के ऊँचे-ऊँचे महलों को महल न कहकर 'आतंक का घर' कहते हैं, क्योंकि ये गरीबों के शोषण की नींव पर बने हैं और क्रांति की गर्जना सुनकर इनमें रहने वाले लोग भयभीत हो जाते हैं।
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"जीर्ण बाहु, है शीर्ण शरीर, तुझे बुलाता कृषक अधीर, ऐ विप्लव के वीर!"
- अर्थ: शोषण से जिसकी भुजाएँ कमजोर और शरीर जर्जर हो गया है, वह किसान अधीर होकर हे क्रांति के वीर बादल, तुम्हें पुकार रहा है, क्योंकि उसे तुमसे ही अपने उद्धार की आशा है।
अभ्यास हेतु बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
1. 'बादल राग' कविता में बादल किसका प्रतीक है?
(क) वर्षा का
(ख) शांति का
(ग) क्रांति का
(घ) निराशा का
2. 'बादल राग' कविता निराला के किस काव्य-संग्रह से ली गई है?
(क) परिमल
(ख) अनामिका
(ग) गीतिका
(घ) कुकुरमुत्ता
3. कविता के अनुसार, बादलों की गर्जना सुनकर कौन भयभीत हो जाता है?
(क) शोषित वर्ग
(ख) किसान और मजदूर
(ग) शोषक पूँजीपति वर्ग
(घ) छोटे पौधे
4. कवि ने 'अट्टालिका' को क्या कहकर संबोधित किया है?
(क) सुख-भवन
(ख) आनंद-भवन
(ग) आतंक-भवन
(घ) शांति-भवन
5. "ऐ विप्लव के वीर!" - इस पंक्ति में बादल को 'वीर' कहना किस अलंकार का उदाहरण है?
(क) रूपक
(ख) उपमा
(ग) यमक
(घ) मानवीकरण
6. कविता के अनुसार, 'जलज' (कमल) कहाँ उत्पन्न होता है?
(क) स्वच्छ जल में
(ख) सागर में
(ग) पंक (कीचड़) में
(घ) धनी लोगों के बगीचे में
7. 'रुद्ध कोष, क्षुब्ध तोष' पंक्ति में किनकी மனःस्थिति का वर्णन है?
(क) किसानों की
(ख) मजदूरों की
(ग) कवियों की
(घ) धनी वर्ग की
8. 'बादल राग' कविता किस प्रकार के छंद में रची गई है?
(क) दोहा
(ख) चौपाई
(ग) मुक्त छंद
(घ) सवैया
9. "तुझे बुलाता कृषक अधीर" - यहाँ कृषक बादल को क्यों बुला रहा है?
(क) अपनी फसल सुखाने के लिए
(ख) सामाजिक विषमता को समाप्त करने वाली क्रांति के लिए
(ग) धूप से बचने के लिए
(घ) अपनी गरीबी का मजाक उड़ाने के लिए
10. सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' किस काव्य-धारा के प्रमुख कवि माने जाते हैं?
(क) प्रगतिवाद
(ख) प्रयोगवाद
(ग) छायावाद
(घ) द्विवेदी युग
उत्तरमाला:
- (ग) क्रांति का
- (ख) अनामिका
- (ग) शोषक पूँजीपति वर्ग
- (ग) आतंक-भवन
- (घ) मानवीकरण
- (ग) पंक (कीचड़) में
- (घ) धनी वर्ग की
- (ग) मुक्त छंद
- (ख) सामाजिक विषमता को समाप्त करने वाली क्रांति के लिए
- (ग) छायावाद