Class 11 History Notes Chapter 11 (Chapter 11) – Vishwa Itihas ke Kush Visay Book

प्रिय विद्यार्थियों,
आज हम आपकी कक्षा 11 की इतिहास की पाठ्यपुस्तक "विश्व इतिहास के कुछ विषय" के अध्याय 11, 'आधुनिकीकरण के मार्ग' का विस्तृत अध्ययन करेंगे। यह अध्याय जापान और चीन द्वारा आधुनिक विश्व में अपनी जगह बनाने के प्रयासों और उनके अनुभवों पर केंद्रित है। सरकारी परीक्षाओं की तैयारी के लिए यह अध्याय अत्यंत महत्वपूर्ण है, अतः कृपया ध्यानपूर्वक अध्ययन करें।
अध्याय 11: आधुनिकीकरण के मार्ग (Paths to Modernisation)
यह अध्याय मुख्य रूप से जापान और चीन के 19वीं और 20वीं शताब्दी के दौरान आधुनिकीकरण के अनुभवों की पड़ताल करता है। दोनों देशों ने पश्चिमी साम्राज्यवाद और आंतरिक चुनौतियों का सामना किया, लेकिन उनके आधुनिकीकरण के मार्ग और परिणाम भिन्न रहे।
भाग 1: जापान का आधुनिकीकरण
जापान ने एशिया में एक अनूठा मार्ग अपनाया और पश्चिमी शक्तियों के उपनिवेश बनने से बचते हुए एक शक्तिशाली आधुनिक राष्ट्र के रूप में उभरा।
1. तोकुगावा काल (1603-1868):
- शासन: तोकुगावा शोगुन (सैन्य शासक) का शासन था, जबकि सम्राट नाममात्र का शासक था।
- अलगाववाद: जापान ने बाहरी दुनिया से लगभग पूर्ण अलगाव की नीति अपनाई (साकोकू नीति), केवल डचों के साथ सीमित व्यापार की अनुमति थी।
- सामाजिक संरचना: समाज सामुराई (योद्धा), किसानों, कारीगरों और व्यापारियों में बंटा हुआ था। सामुराई वर्ग सबसे ऊपर था।
- आर्थिक विकास: आंतरिक व्यापार बढ़ा, शहरों का विकास हुआ (जैसे ईदो-टोक्यो, ओसाका, क्योटो)। चावल मुख्य फसल थी।
- शिक्षा: शिक्षा का प्रसार हुआ, विशेषकर सामुराई वर्ग में।
- पश्चिमी दबाव: 1853 में अमेरिकी कमोडोर मैथ्यू पेरी के आगमन ने जापान पर अपने द्वार खोलने का दबाव डाला। 1854 में अमेरिका के साथ 'कनगावा संधि' हुई, जिसने जापान के अलगाववाद को समाप्त कर दिया।
2. मेइजी पुनर्स्थापना (1868):
- पृष्ठभूमि: पश्चिमी दबाव और शोगुन की कमजोर होती शक्ति ने राष्ट्रवादियों और कुछ सामुराई को सम्राट के पक्ष में एकजुट किया।
- घटना: 1868 में शोगुन को सत्ता से हटा दिया गया और सम्राट मेइजी (मुत्सुहितो) को वास्तविक सत्ता सौंपी गई। इसे 'मेइजी पुनर्स्थापना' कहा जाता है।
- उद्देश्य: "फुकुओकु क्योहेई" (समृद्ध देश, मजबूत सेना) और "बुन्मेई कैका" (सभ्यता और प्रबुद्धता) के नारे के साथ पश्चिमी मॉडल पर आधारित आधुनिकीकरण।
- सुधार:
- प्रशासनिक: सामंती व्यवस्था (हान) को समाप्त कर प्रीफेक्चर प्रणाली (केन) लागू की गई। सामुराई वर्ग के विशेषाधिकार समाप्त किए गए।
- सैन्य: अनिवार्य सैन्य सेवा शुरू की गई, आधुनिक पश्चिमी शैली की सेना और नौसेना का गठन किया गया।
- आर्थिक: कृषि पर कर लगाया गया, जिससे सरकार को राजस्व मिला। आधुनिक बैंकिंग प्रणाली, रेलवे, टेलीग्राफ और उद्योगों का विकास हुआ। 'ज़ाइबत्सु' (बड़े औद्योगिक घराने जैसे मित्सुबिशी, मित्सुई) का उदय हुआ।
- सामाजिक: शिक्षा को सार्वभौमिक बनाया गया, पश्चिमी विचारों और विज्ञान को बढ़ावा दिया गया। महिलाओं की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हुआ।
- राजनीतिक: 1889 में एक नया संविधान लागू किया गया, जिसमें सम्राट को सर्वोच्च शक्ति दी गई और एक द्विसदनीय संसद (डाइट) की स्थापना की गई।
3. साम्राज्यवाद और सैन्यीकरण:
- मेइजी सुधारों ने जापान को एक मजबूत सैन्य शक्ति बना दिया।
- चीन-जापान युद्ध (1894-95): जापान ने चीन को हराया और कोरिया पर प्रभाव बढ़ाया, ताइवान को अपने कब्जे में लिया।
- रूस-जापान युद्ध (1904-05): जापान ने एक यूरोपीय शक्ति रूस को हराया, जिससे उसकी अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा बढ़ी और कोरिया पर उसका नियंत्रण मजबूत हुआ।
- प्रथम विश्व युद्ध: जापान मित्र राष्ट्रों के साथ शामिल हुआ और जर्मनी के प्रशांत क्षेत्र के उपनिवेशों पर कब्जा कर लिया।
- मंचूरिया पर आक्रमण (1931): जापान ने चीन के मंचूरिया प्रांत पर आक्रमण कर 'मंचुको' नामक कठपुतली राज्य स्थापित किया।
- द्वितीय विश्व युद्ध: जापान ने धुरी राष्ट्रों का साथ दिया और प्रशांत क्षेत्र में विस्तार किया (जैसे पर्ल हार्बर पर हमला 1941)। 1945 में हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराए जाने के बाद जापान ने आत्मसमर्पण कर दिया।
4. युद्धोत्तर जापान:
- अमेरिकी कब्ज़ा (1945-1952): जनरल डगलस मैकआर्थर के नेतृत्व में अमेरिका ने जापान पर कब्ज़ा किया और कई सुधार लागू किए।
- सैन्यीकरण समाप्त किया गया।
- 1947 में नया शांतिवादी संविधान लागू किया गया, जिसमें अनुच्छेद 9 के तहत युद्ध को त्याग दिया गया।
- ज़ाइबत्सु को भंग किया गया (हालांकि बाद में नए केरेत्सु उभरे)।
- भूमि सुधार लागू किए गए।
- लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत किया गया।
- आर्थिक चमत्कार: 1950 और 1960 के दशक में जापान ने तीव्र आर्थिक विकास किया।
- कम मजदूरी, उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद, सरकारी नीतियां और अमेरिकी सहायता ने इसमें योगदान दिया।
- ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और इस्पात उद्योगों में विश्व नेता बना।
- आधुनिक चुनौतियाँ: 1990 के दशक में आर्थिक मंदी, बढ़ती उम्र की आबादी, लिंग असमानता और चीन से बढ़ती प्रतिस्पर्धा।
भाग 2: चीन का आधुनिकीकरण
चीन का आधुनिकीकरण का मार्ग जापान से काफी भिन्न रहा, जिसमें आंतरिक संघर्ष, पश्चिमी साम्राज्यवाद और अंततः साम्यवादी क्रांति का महत्वपूर्ण स्थान रहा।
1. किंग राजवंश का पतन और पश्चिमी दबाव:
- अफीम युद्ध (1839-42 और 1856-60): ब्रिटेन ने चीन में अफीम का व्यापार किया, जिसके विरोध में युद्ध हुए। चीन की हार हुई और उसे 'असमान संधियाँ' (जैसे नानकिंग संधि) स्वीकार करनी पड़ीं, जिसके तहत हांगकांग ब्रिटेन को दिया गया और व्यापारिक बंदरगाह खोले गए।
- ताइपिंग विद्रोह (1850-64): आंतरिक कमजोरियों और पश्चिमी प्रभाव के विरोध में हुआ एक बड़ा किसान विद्रोह, जिसने किंग राजवंश को और कमजोर किया।
- स्व-शक्ति आंदोलन (1860-90): कुछ अधिकारियों द्वारा पश्चिमी तकनीकों को अपनाकर चीन को मजबूत करने का प्रयास, लेकिन यह सीमित रहा और पारंपरिक विचारों से बाधित हुआ।
- बॉक्सर विद्रोह (1899-1901): पश्चिमी और ईसाई प्रभाव के खिलाफ हुआ एक राष्ट्रव्यापी विद्रोह, जिसे अंतर्राष्ट्रीय सेनाओं ने कुचल दिया।
2. गणतंत्र की स्थापना (1911 की क्रांति):
- सन यात-सेन (1866-1925): आधुनिक चीन के संस्थापक माने जाते हैं। उन्होंने 'तीन सिद्धांत' (सन मिन चुई) दिए:
- राष्ट्रवाद (मिनत्सू): मंचू शासन और विदेशी साम्राज्यवाद से मुक्ति।
- लोकतंत्र (मिनच्यूआन): गणतंत्र की स्थापना।
- समाजवाद/लोगों की आजीविका (मिनशेंग): भूमि सुधार और आर्थिक समानता।
- सिनहाई क्रांति (1911): किंग राजवंश के खिलाफ विद्रोह हुआ और 1912 में गणतंत्र की स्थापना हुई। सन यात-सेन को पहला राष्ट्रपति बनाया गया, लेकिन उन्होंने जल्द ही युआन शिकई के लिए पद छोड़ दिया।
- मई चौथा आंदोलन (1919): प्रथम विश्व युद्ध के बाद वर्साय संधि में चीन के साथ हुए अन्याय (जर्मनी के शैंडोंग प्रांत के अधिकार जापान को देना) के विरोध में छात्रों और बुद्धिजीवियों का राष्ट्रव्यापी आंदोलन। इसने राष्ट्रवाद और आधुनिक विचारों को बढ़ावा दिया।
3. साम्यवादी दल का उदय:
- चीनी साम्यवादी दल (CCP) की स्थापना (1921): सोवियत संघ के प्रभाव में स्थापित हुआ। माओ ज़ेडोंग इसके प्रमुख नेता बने।
- कुओमिन्तांग (KMT) और CCP का संघर्ष: सन यात-सेन की मृत्यु के बाद च्यांग काई-शेक ने KMT का नेतृत्व संभाला। उन्होंने CCP को कुचलने का प्रयास किया।
- लॉन्ग मार्च (1934-35): KMT सेनाओं से बचने के लिए CCP की सेना (रेड आर्मी) ने 6,000 मील से अधिक की दूरी तय की। यह माओ ज़ेडोंग के नेतृत्व को मजबूत करने में महत्वपूर्ण रहा।
- जापानी आक्रमण: 1937 में जापान ने चीन पर पूर्ण पैमाने पर आक्रमण किया, जिससे KMT और CCP को अस्थायी रूप से एकजुट होना पड़ा।
- गृह युद्ध और जनवादी गणराज्य चीन (PRC) की स्थापना: द्वितीय विश्व युद्ध के बाद KMT और CCP के बीच गृह युद्ध फिर से शुरू हुआ। 1949 में CCP ने जीत हासिल की और माओ ज़ेडोंग ने बीजिंग में 'जनवादी गणराज्य चीन' (People's Republic of China) की स्थापना की, जबकि च्यांग काई-शेक ताइवान भाग गए।
4. माओ काल (1949-1976):
- भूमि सुधार: जमींदारी व्यवस्था समाप्त की गई, भूमि किसानों में वितरित की गई।
- औद्योगिकीकरण: सोवियत मॉडल पर आधारित भारी उद्योगों का विकास।
- ग्रेट लीप फॉरवर्ड (1958-62): कृषि और उद्योग को एक साथ बढ़ाने का एक महत्वाकांक्षी लेकिन असफल प्रयास, जिसके परिणामस्वरूप व्यापक अकाल पड़ा।
- सांस्कृतिक क्रांति (1966-76): माओ द्वारा अपने विरोधियों को सत्ता से हटाने और साम्यवादी विचारधारा को शुद्ध करने के लिए शुरू किया गया एक आंदोलन। इसने सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया, शिक्षा और अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुँचाया।
5. माओ के बाद का चीन (देंग शियाओपिंग का युग):
- देंग शियाओपिंग (1978-1997): माओ की मृत्यु के बाद सत्ता में आए और चीन में महत्वपूर्ण आर्थिक सुधार किए।
- चार आधुनिकीकरण (कृषि, उद्योग, विज्ञान व प्रौद्योगिकी, रक्षा): इन क्षेत्रों में सुधार पर जोर दिया गया।
- खुले द्वार की नीति: विदेशी निवेश को आकर्षित किया गया, विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZs) स्थापित किए गए।
- बाजार अर्थव्यवस्था की ओर: साम्यवादी नियंत्रण के तहत बाजार अर्थव्यवस्था के सिद्धांतों को अपनाया गया।
- परिणाम: चीन ने तीव्र आर्थिक विकास किया और एक वैश्विक आर्थिक शक्ति के रूप में उभरा।
- तियानमेन चौक नरसंहार (1989): लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनकारियों को सरकार ने बलपूर्वक दबा दिया।
- आधुनिक चुनौतियाँ: पर्यावरण प्रदूषण, आय असमानता, भ्रष्टाचार, मानवाधिकारों के मुद्दे और ताइवान का प्रश्न।
तुलनात्मक विश्लेषण (जापान बनाम चीन):
- जापान: बाहरी दबाव के बावजूद, आंतरिक सामंजस्य के साथ तेजी से आधुनिकीकरण किया, पश्चिमी उपनिवेश बनने से बचा और एक साम्राज्यवादी शक्ति बन गया। मेइजी पुनर्स्थापना ने केंद्रीकृत राज्य और औद्योगिक विकास को बढ़ावा दिया।
- चीन: पश्चिमी साम्राज्यवाद का शिकार हुआ, आंतरिक संघर्षों (विद्रोह, गृह युद्ध) से जूझता रहा। आधुनिकीकरण की प्रक्रिया धीमी और बाधित रही, अंततः साम्यवादी क्रांति के माध्यम से एक नया मार्ग अपनाया।
यह विस्तृत नोट्स आपको अध्याय 11 के महत्वपूर्ण पहलुओं को समझने और सरकारी परीक्षाओं के लिए तैयारी करने में सहायक होंगे।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
यहाँ अध्याय 11 पर आधारित 10 बहुविकल्पीय प्रश्न दिए गए हैं:
1. मेइजी पुनर्स्थापना जापान में किस वर्ष हुई थी?
A) 1853
B) 1868
C) 1889
D) 1905
2. जापान में 'ज़ाइबत्सु' शब्द का क्या अर्थ है?
A) सामुराई योद्धाओं का एक समूह
B) बड़े औद्योगिक और वित्तीय घराने
C) एक प्रकार की सामंती भूमि प्रणाली
D) मेइजी काल में स्थापित राजनीतिक दल
3. चीन में 'तीन सिद्धांत' (सन मिन चुई) किसने प्रतिपादित किए थे?
A) माओ ज़ेडोंग
B) च्यांग काई-शेक
C) सन यात-सेन
D) देंग शियाओपिंग
4. चीन में 'ग्रेट लीप फॉरवर्ड' अभियान किस उद्देश्य से शुरू किया गया था?
A) पश्चिमी संस्कृति को बढ़ावा देना
B) कृषि और उद्योग को एक साथ तीव्र गति से विकसित करना
C) साम्यवादी दल के विरोधियों को हटाना
D) विदेशी निवेश को आकर्षित करना
5. चीन और ब्रिटेन के बीच अफीम युद्धों का मुख्य परिणाम क्या था?
A) चीन ने ब्रिटेन पर विजय प्राप्त की
B) चीन ने अपनी सभी बंदरगाहें बंद कर दीं
C) चीन को 'असमान संधियाँ' स्वीकार करनी पड़ीं और हांगकांग ब्रिटेन को देना पड़ा
D) ब्रिटेन ने चीन से व्यापार करना बंद कर दिया
6. जापान के किस संविधान में 'युद्ध त्याग' (renunciation of war) का अनुच्छेद 9 शामिल है?
A) मेइजी संविधान (1889)
B) तोकुगावा संविधान
C) युद्धोत्तर संविधान (1947)
D) कनगावा संधि
7. चीन में 'सांस्कृतिक क्रांति' का नेतृत्व किसने किया था?
A) देंग शियाओपिंग
B) च्यांग काई-शेक
C) सन यात-सेन
D) माओ ज़ेडोंग
8. 'लॉन्ग मार्च' का संबंध किस देश और घटना से है?
A) जापान में मेइजी पुनर्स्थापना
B) चीन में साम्यवादी सेना का पलायन
C) जापान का द्वितीय विश्व युद्ध में प्रवेश
D) चीन में ताइपिंग विद्रोह
9. देंग शियाओपिंग द्वारा चीन में शुरू किए गए आर्थिक सुधारों को किस नाम से जाना जाता है?
A) ग्रेट लीप फॉरवर्ड
B) सांस्कृतिक क्रांति
C) चार आधुनिकीकरण
D) साम्यवादी क्रांति
10. अमेरिकी कमोडोर मैथ्यू पेरी किस वर्ष जापान पहुंचे थे, जिसने जापान के अलगाववाद को समाप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई?
A) 1842
B) 1853
C) 1868
D) 1905
उत्तरमाला:
- B
- B
- C
- B
- C
- C
- D
- B
- C
- B
मुझे आशा है कि यह विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपकी तैयारी में सहायक होंगे। अपनी पढ़ाई जारी रखें और किसी भी संदेह के लिए पूछने में संकोच न करें। शुभकामनाएँ!