Class 11 History Notes Chapter 6 (Chapter 6) – Vishwa Itihas ke Kush Visay Book

Vishwa Itihas ke Kush Visay
प्रिय विद्यार्थियों,

आज हम आपकी कक्षा 11 की इतिहास की पाठ्यपुस्तक 'विश्व इतिहास के कुछ विषय' के अध्याय 6 'तीन वर्ग' का विस्तृत अध्ययन करेंगे। यह अध्याय 9वीं से 16वीं शताब्दी के दौरान पश्चिमी यूरोप के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिवर्तनों को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। सरकारी परीक्षाओं की तैयारी के लिए हमें इस अध्याय के प्रत्येक पहलू को गहराई से समझना होगा।


अध्याय 6: तीन वर्ग

परिचय:
9वीं से 16वीं शताब्दी के मध्य पश्चिमी यूरोप में तीन सामाजिक वर्गों का उदय हुआ: ईसाई पादरी (प्रथम वर्ग), भूमिधारक अभिजात वर्ग (द्वितीय वर्ग), और कृषक (तृतीय वर्ग)। इस काल को अक्सर 'सामंतवाद' (Feudalism) के युग के रूप में भी जाना जाता है, जो एक विशिष्ट सामाजिक-आर्थिक व्यवस्था थी।

1. प्रथम वर्ग: पादरी (The Clergy)

  • चर्च की भूमिका: पश्चिमी यूरोप में कैथोलिक चर्च एक अत्यंत शक्तिशाली संस्था थी। यह न केवल धार्मिक मामलों का संचालन करती थी, बल्कि शिक्षा, संस्कृति और राजनीति में भी इसका गहरा प्रभाव था।
  • ईसाई धर्म का प्रसार: चौथी शताब्दी में रोमन साम्राज्य का राजकीय धर्म बनने के बाद ईसाई धर्म का तीव्र गति से प्रसार हुआ।
  • बिशप और पादरी: बिशप चर्च के उच्च पदाधिकारी थे, जिनके पास विशाल जागीरें होती थीं और वे सामंतों के समान जीवन जीते थे। पादरी ग्रामीण क्षेत्रों में धार्मिक अनुष्ठान और शिक्षा का कार्य करते थे।
  • चर्च के नियम: चर्च ने अपने स्वयं के नियम बनाए थे, जो राजा के नियमों से स्वतंत्र थे।
  • मठ और भिक्षु:
    • कुछ अत्यधिक धार्मिक ईसाई पादरियों से अलग होकर मठों (Monasteries) में रहने लगे। इन्हें भिक्षु (Monks) कहा जाता था।
    • सबसे प्रसिद्ध मठों में से एक 529 ईस्वी में इटली में स्थापित सेंट बेनेडिक्ट का मठ था।
    • भिक्षु अपना जीवन प्रार्थना, अध्ययन और शारीरिक श्रम (जैसे कृषि) में समर्पित करते थे।
    • मठों ने शिक्षा और ज्ञान के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
    • महिलाओं के लिए भी मठ थे, जिन्हें नन कहा जाता था।
  • चर्च द्वारा कर: चर्च किसानों से 'टिथ' (Tithe) नामक कर वसूलता था, जो उनकी उपज का दसवां हिस्सा होता था।
  • चर्च की संपत्ति: चर्च के पास विशाल भूमि, भवन और अन्य संपत्ति थी, जिससे वह बहुत धनी और प्रभावशाली बन गया था।

2. द्वितीय वर्ग: अभिजात वर्ग (The Nobility)

  • सामंतवाद (Feudalism):
    • यह एक ऐसी व्यवस्था थी जिसमें लॉर्ड (स्वामी) और वैसल (जागीरदार) के बीच संबंध होते थे।
    • लॉर्ड अपने वैसल को भूमि (जागीर) देते थे, जिसके बदले में वैसल लॉर्ड को सैन्य सेवा, वित्तीय सहायता और निष्ठा की शपथ देते थे।
    • यह शब्द 'फ्यूड' (Feud) से आया है, जिसका अर्थ है भूमि का एक टुकड़ा।
    • सामंतवाद की उत्पत्ति सैन्य आवश्यकताओं से हुई थी, क्योंकि रोमन साम्राज्य के पतन के बाद केंद्रीय सत्ता कमजोर हो गई थी।
  • लॉर्ड और वैसल:
    • लॉर्ड अपने वैसल को भूमि का एक टुकड़ा (फीफ) देते थे।
    • वैसल लॉर्ड के प्रति निष्ठा की शपथ (होमेज) लेते थे और उसके लिए युद्ध में लड़ते थे।
    • वैसल भी आगे छोटे वैसल रख सकते थे, जिससे एक पदानुक्रमित संरचना बनती थी।
  • मैनर (Manor):
    • लॉर्ड का घर और उसके आसपास की भूमि को मैनर कहा जाता था।
    • यह लॉर्ड का निजी निवास, उसकी भूमि, और उस पर काम करने वाले किसानों के घर और खेत शामिल होते थे।
    • मैनर एक आत्मनिर्भर आर्थिक इकाई होती थी, जहाँ अनाज, कपड़े, औजार आदि का उत्पादन होता था।
    • मैनर में एक चर्च, एक मिल (आटा पीसने के लिए), एक लोहार की दुकान और एक शराब प्रेस भी होता था।
  • नाइट्स (Knights):
    • 9वीं शताब्दी से यूरोप में लगातार युद्ध होते रहे, जिससे कुशल घुड़सवार सैनिकों की आवश्यकता महसूस हुई।
    • नाइट्स ऐसे प्रशिक्षित योद्धा थे जो लॉर्ड के लिए युद्ध लड़ते थे।
    • उन्हें लॉर्ड द्वारा एक 'फीफ' (भूमि का टुकड़ा) दिया जाता था, जिससे वे अपने घोड़े और उपकरण खरीद सकें।
    • नाइट्स की एक विशिष्ट आचार संहिता (शिष्टाचार) होती थी, जिसमें साहस, ईमानदारी और कमजोरों की रक्षा शामिल थी।
    • नाइट्स की कहानियाँ और गीत (जैसे 'चैनसन डी रोलैंड') उनकी वीरता का गुणगान करते थे।

3. तृतीय वर्ग: कृषक (The Peasantry)

  • यह वर्ग सबसे बड़ा था और इसमें दो प्रकार के लोग शामिल थे:
    • मुक्त कृषक (Free Peasants):
      • ये लॉर्ड की भूमि को किराए पर लेते थे और बदले में उसे लगान (कर) देते थे।
      • उन्हें सैन्य सेवा भी देनी पड़ती थी।
      • वे अपनी पसंद की फसलों की खेती कर सकते थे और अपनी संपत्ति के मालिक थे।
    • सर्फ़ या भू-दास (Serfs):
      • ये लॉर्ड की भूमि से बंधे होते थे और उसकी अनुमति के बिना कहीं जा नहीं सकते थे।
      • वे लॉर्ड के खेतों पर श्रम सेवा (लेबर सर्विस) करते थे, जो अक्सर सप्ताह में तीन दिन तक होती थी।
      • वे लॉर्ड की अनुमति के बिना विवाह नहीं कर सकते थे।
      • उनकी कोई निजी संपत्ति नहीं होती थी, और लॉर्ड उनकी फसल का एक हिस्सा लेता था।
      • वे लॉर्ड की मिल, बेकरी और शराब प्रेस का उपयोग करने के लिए भी शुल्क देते थे।

4. कृषि में परिवर्तन (Agricultural Innovations)

  • 11वीं शताब्दी के बाद: यूरोप में कृषि प्रौद्योगिकी में महत्वपूर्ण सुधार हुए, जिससे उत्पादन बढ़ा।
    • लकड़ी के हल की जगह लोहे के भारी हल: इससे कठोर मिट्टी को भी आसानी से जोता जा सकता था।
    • घोड़ों का उपयोग: बैलों की जगह घोड़ों का उपयोग जुताई के लिए किया जाने लगा, जो अधिक शक्तिशाली और तेज थे। इसके लिए घोड़ों के कंधों पर जुआ (हॉर्स कॉलर) का आविष्कार किया गया।
    • तीन-क्षेत्रीय फसल चक्र (Three-field system):
      • पहले दो-क्षेत्रीय प्रणाली थी, जिसमें आधी भूमि पर खेती होती थी और आधी परती रहती थी।
      • तीन-क्षेत्रीय प्रणाली में भूमि को तीन भागों में बांटा गया: एक पर शरद ऋतु में गेहूँ/राई, दूसरे पर वसंत में मटर/दाल, और तीसरा परती रहता था।
      • इससे भूमि की उर्वरता बनी रही और उत्पादन में वृद्धि हुई।
    • जल शक्ति और पवन शक्ति का उपयोग: मिलों को चलाने के लिए जल शक्ति और पवन शक्ति का उपयोग किया जाने लगा।
  • परिणाम: कृषि उत्पादन में वृद्धि हुई, जिससे भोजन की उपलब्धता बढ़ी और जनसंख्या में वृद्धि हुई।

5. नगरों का उदय और शहरीकरण (Growth of Towns and Urbanization)

  • 11वीं शताब्दी से: कृषि विस्तार और जनसंख्या वृद्धि के कारण व्यापार और वाणिज्य में वृद्धि हुई।
  • नगरों का विकास: लॉर्ड के बड़े-बड़े मैनर और चर्चों के आसपास छोटे-छोटे बाजार विकसित हुए, जो धीरे-धीरे नगरों में बदल गए।
  • शहरी जीवन: नगरों में रहने वाले लोग लॉर्ड के नियंत्रण से मुक्त थे और उन्हें स्वतंत्रता मिलती थी।
  • गिल्ड (Guilds):
    • नगरों में शिल्पकार और व्यापारी अपने-अपने संगठन बनाते थे, जिन्हें गिल्ड कहा जाता था।
    • गिल्ड उत्पादन की गुणवत्ता, मूल्य और बिक्री को नियंत्रित करते थे।
    • प्रत्येक शिल्प (जैसे लोहार, बुनकर, मोची) का अपना गिल्ड होता था।
    • गिल्ड ने कारीगरों को प्रशिक्षण दिया और उनके हितों की रक्षा की।
  • चौथा वर्ग: नगरों के विकास के साथ व्यापारी और कारीगरों का एक नया वर्ग उभरा, जिसे कभी-कभी 'चौथा वर्ग' भी कहा जाता है, हालांकि यह औपचारिक रूप से तीन वर्गों की प्रणाली में शामिल नहीं था।

6. राज्य का पुनर्गठन (Reorganization of the State)

  • 12वीं शताब्दी से: यूरोप में सामंती व्यवस्था धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगी और शक्तिशाली राजशाहियों का उदय हुआ।
  • फ्रांस:
    • लुई VI और लुई VII जैसे राजाओं ने अपनी शक्ति बढ़ाई और सामंतों पर नियंत्रण स्थापित किया।
    • 13वीं शताब्दी में फिलिप चतुर्थ (सुंदर) ने केंद्रीय प्रशासन को मजबूत किया।
  • इंग्लैंड:
    • 1066 में, नॉर्मंडी के ड्यूक विलियम प्रथम ने इंग्लैंड पर विजय प्राप्त की और सामंती व्यवस्था को मजबूत किया, लेकिन राजा की शक्ति को भी बनाए रखा।
    • हेनरी द्वितीय (1154-1189) ने न्याय प्रणाली को मजबूत किया और शाही अदालतों का प्रभाव बढ़ाया।
  • राष्ट्रीय राज्यों का निर्माण: इस काल में धीरे-धीरे आधुनिक राष्ट्रीय राज्यों की नींव रखी गई, जहाँ राजा की केंद्रीय सत्ता मजबूत हुई।

7. जलवायु परिवर्तन और संकट (Climate Change and Crisis)

  • 13वीं शताब्दी के अंत से: यूरोप में 'छोटा हिमयुग' (Little Ice Age) शुरू हुआ, जिससे तापमान में गिरावट आई और कृषि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा।
  • कृषि संकट और अकाल: फसलें खराब होने लगीं, जिससे अकाल पड़े और भोजन की कमी हुई।
  • जनसंख्या में गिरावट: अकाल और बीमारियों के कारण जनसंख्या में भारी गिरावट आई।
  • ब्लैक डेथ (Black Death):
    • 1347-1350 के बीच, यूरोप में 'ब्लैक डेथ' नामक एक भयंकर महामारी (प्लेग) फैली।
    • यह बीमारी मध्य एशिया से जहाजों द्वारा आई और पूरे यूरोप में फैल गई।
    • अनुमान है कि यूरोप की लगभग एक तिहाई जनसंख्या (लगभग 2.5 करोड़ लोग) इस महामारी में मारी गई।
    • इसने सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था को पूरी तरह से बाधित कर दिया।
  • परिणाम: श्रमिकों की कमी हो गई, जिससे मजदूरी बढ़ी और सामंती व्यवस्था कमजोर हुई।

8. सामाजिक अशांति और विद्रोह (Social Unrest and Revolts)

  • ब्लैक डेथ के बाद: श्रमिकों की कमी के कारण किसानों की मोलभाव करने की शक्ति बढ़ी।
  • कृषक विद्रोह: लॉर्ड्स द्वारा मजदूरी बढ़ाने से इनकार करने और पुराने सामंती अधिकारों को लागू करने की कोशिशों के कारण कई कृषक विद्रोह हुए।
    • इंग्लैंड में 1381 का कृषक विद्रोह: यह सबसे प्रसिद्ध विद्रोहों में से एक था, जिसका नेतृत्व वॉट टाइलर और जॉन बॉल ने किया था। किसानों ने सामंती करों और श्रम सेवाओं को खत्म करने की मांग की।
  • नए सामाजिक समूहों का उदय: इन विद्रोहों ने सामंती व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर किया और नए सामाजिक संबंधों की नींव रखी।

निष्कर्ष:
14वीं शताब्दी के संकटों (जलवायु परिवर्तन, ब्लैक डेथ, कृषक विद्रोह) ने सामंती व्यवस्था की नींव को हिला दिया। कृषि में सुधार, नगरों का विकास और व्यापार के विस्तार ने एक नए आर्थिक और सामाजिक परिदृश्य को जन्म दिया। धीरे-धीरे, शक्तिशाली राजशाहियों का उदय हुआ, जिन्होंने केंद्रीय सत्ता को मजबूत किया और आधुनिक राज्यों की दिशा में कदम बढ़ाए, जिससे 'तीन वर्ग' की पुरानी व्यवस्था का अंत हुआ।


महत्वपूर्ण शब्दावली (Important Terminology):

  • सामंतवाद (Feudalism): 9वीं से 16वीं शताब्दी तक पश्चिमी यूरोप में प्रचलित एक सामाजिक-आर्थिक-राजनीतिक व्यवस्था।
  • लॉर्ड (Lord): भूमि का स्वामी, जो अपने वैसल को भूमि देता था।
  • वैसल (Vassal): लॉर्ड से भूमि प्राप्त करने वाला जागीरदार, जो लॉर्ड के प्रति निष्ठा रखता था और सैन्य सेवा देता था।
  • फीफ (Fief): वैसल को दी गई भूमि का टुकड़ा।
  • मैनर (Manor): लॉर्ड का निवास और उसके आसपास की भूमि, जो एक आत्मनिर्भर इकाई थी।
  • नाइट्स (Knights): प्रशिक्षित घुड़सवार योद्धा, जिन्हें लॉर्ड द्वारा भूमि दी जाती थी।
  • सर्फ़ (Serf): भू-दास, जो लॉर्ड की भूमि से बंधे होते थे और उसकी अनुमति के बिना कहीं जा नहीं सकते थे।
  • टिथ (Tithe): चर्च द्वारा किसानों से लिया जाने वाला उपज का दसवां हिस्सा।
  • गिल्ड (Guild): नगरों में शिल्पकारों और व्यापारियों के संगठन।
  • होमेज (Homage): वैसल द्वारा लॉर्ड के प्रति निष्ठा की शपथ।
  • ब्लैक डेथ (Black Death): 14वीं शताब्दी में यूरोप में फैली प्लेग की महामारी।
  • छोटा हिमयुग (Little Ice Age): 13वीं शताब्दी के अंत से शुरू हुआ ठंडा जलवायु काल।

बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions - MCQs):

1. पश्चिमी यूरोप में 'तीन वर्ग' की अवधारणा किस काल से संबंधित है?
a) चौथी से छठी शताब्दी
b) नौवीं से सोलहवीं शताब्दी
c) सत्रहवीं से उन्नीसवीं शताब्दी
d) बीसवीं शताब्दी

2. सामंतवाद में 'फीफ' (Fief) शब्द का क्या अर्थ था?
a) चर्च द्वारा लिया गया कर
b) एक प्रकार का कृषि उपकरण
c) वैसल को दी गई भूमि का टुकड़ा
d) लॉर्ड का निजी निवास

3. 'टिथ' (Tithe) नामक कर कौन वसूलता था?
a) राजा
b) लॉर्ड
c) चर्च
d) गिल्ड

4. 13वीं शताब्दी के अंत में यूरोप में किस जलवायु परिवर्तन की शुरुआत हुई?
a) वैश्विक तापन
b) छोटा हिमयुग
c) मानसून का आगमन
d) मरुस्थलीकरण

5. 1347-1350 के दौरान यूरोप में फैली भयंकर महामारी का नाम क्या था?
a) चेचक
b) हैजा
c) ब्लैक डेथ (प्लेग)
d) इन्फ्लुएंजा

6. 'मैनर' (Manor) क्या था?
a) एक प्रकार का मठ
b) एक शहरी बाजार
c) लॉर्ड का निवास और उसके आसपास की आत्मनिर्भर भूमि
d) नाइट्स का प्रशिक्षण केंद्र

7. तीन-क्षेत्रीय फसल चक्र प्रणाली का मुख्य लाभ क्या था?
a) केवल एक प्रकार की फसल उगाना
b) भूमि की उर्वरता बनाए रखना और उत्पादन बढ़ाना
c) कम मजदूरों की आवश्यकता
d) केवल पशुओं के लिए चारा उगाना

8. इंग्लैंड में 1381 के कृषक विद्रोह का नेतृत्व किसने किया था?
a) विलियम प्रथम
b) हेनरी द्वितीय
c) वॉट टाइलर और जॉन बॉल
d) फिलिप चतुर्थ

9. 'सर्फ़' (Serf) कौन थे?
a) मुक्त कृषक जो अपनी भूमि के मालिक थे
b) लॉर्ड की भूमि से बंधे हुए भू-दास
c) शहरी व्यापारी
d) चर्च के पादरी

10. नगरों में शिल्पकारों और व्यापारियों के संगठनों को क्या कहा जाता था?
a) संसद
b) सभा
c) गिल्ड
d) मैनर


उत्तरमाला:

  1. b
  2. c
  3. c
  4. b
  5. c
  6. c
  7. b
  8. c
  9. b
  10. c

प्रिय विद्यार्थियों, मुझे आशा है कि ये विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपको अध्याय 6 को गहराई से समझने और आपकी सरकारी परीक्षा की तैयारी में सहायक होंगे। इस अध्याय के प्रत्येक बिंदु को ध्यान से पढ़ें और आत्मसात करें। शुभकामनाएँ!

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