Class 11 History Notes Chapter 7 (Chapter 7) – Vishwa Itihas ke Kush Visay Book

प्रिय विद्यार्थियों,
आज हम कक्षा 11 इतिहास के अध्याय 7, 'बदलती हुई सांस्कृतिक परंपराएँ' का विस्तृत अध्ययन करेंगे। यह अध्याय 14वीं शताब्दी से 17वीं शताब्दी के मध्य पश्चिमी यूरोप में हुए महत्वपूर्ण सांस्कृतिक परिवर्तनों, जिन्हें 'पुनर्जागरण' के नाम से जाना जाता है, पर केंद्रित है। यह काल न केवल कला, साहित्य और विज्ञान के क्षेत्र में अभूतपूर्व विकास का साक्षी रहा, बल्कि इसने यूरोपीय समाज की सोच और विश्वदृष्टि को भी मौलिक रूप से बदल दिया। सरकारी परीक्षाओं की तैयारी के लिए यह अध्याय अत्यंत महत्वपूर्ण है, अतः प्रत्येक बिंदु पर विशेष ध्यान दें।
अध्याय 7: बदलती हुई सांस्कृतिक परंपराएँ (Changing Cultural Traditions)
1. परिचय: पुनर्जागरण (Renaissance) का अर्थ एवं काल
- अर्थ: 'पुनर्जागरण' शब्द का शाब्दिक अर्थ 'पुनर्जन्म' या 'फिर से जागना' है। यह 14वीं शताब्दी से 17वीं शताब्दी तक यूरोप में हुए सांस्कृतिक और बौद्धिक परिवर्तनों को संदर्भित करता है।
- मुख्य विचार: इस काल में प्राचीन यूनान और रोम की कला, साहित्य और दर्शन की परंपराओं को पुनर्जीवित किया गया। मध्यकालीन धार्मिक अंधविश्वासों और रूढ़िवादिता से हटकर मानव-केंद्रित दृष्टिकोण (मानववाद) पर जोर दिया गया।
- शुरुआत: पुनर्जागरण की शुरुआत इटली के नगरों से हुई, क्योंकि वहाँ रोमन साम्राज्य की सांस्कृतिक विरासत मौजूद थी और व्यापारिक समृद्धि के कारण नए विचारों को पनपने का अवसर मिला।
2. इतालवी नगरों का पुनरुत्थान
- पृष्ठभूमि: रोमन साम्राज्य के पतन के बाद, इटली में राजनीतिक और सांस्कृतिक केंद्र कमजोर पड़ गए थे। लेकिन 12वीं शताब्दी के बाद, पूर्वी रोमन साम्राज्य (बीजान्टिन साम्राज्य) और इस्लामी देशों के साथ व्यापार के विकास के साथ, इटली के नगरों (जैसे फ्लोरेंस, वेनिस, रोम, मिलान, जेनोआ) का फिर से उदय हुआ।
- नगरों की विशेषताएँ:
- ये नगर व्यापारिक केंद्र थे, जिससे धन और विचारों का आदान-प्रदान बढ़ा।
- ये स्वतंत्र नगर-राज्य थे, जहाँ नागरिक स्वतंत्रता अधिक थी और शासक वर्ग (जैसे धनी व्यापारी और बैंकर) कला और साहित्य के संरक्षक बने (जैसे फ्लोरेंस में मेडिची परिवार)।
- विश्वविद्यालयों की स्थापना हुई, जहाँ कानून, चिकित्सा और मानविकी (humanities) का अध्ययन किया जाता था।
3. मानववाद (Humanism)
- अर्थ: मानववाद एक ऐसा बौद्धिक आंदोलन था जिसने धार्मिक विषयों के बजाय मानव जीवन, उसकी उपलब्धियों, क्षमताओं और समस्याओं पर ध्यान केंद्रित किया। इसने व्यक्ति की गरिमा और क्षमता को महत्व दिया।
- विकास:
- 14वीं शताब्दी के आरंभ में, इतालवी कवि फ्रांसेस्को पेट्रार्क (1304-1374) को 'मानववाद का जनक' माना जाता है। उन्होंने प्राचीन यूनानी और रोमन ग्रंथों के अध्ययन पर जोर दिया।
- मानववादी विद्वानों ने लातिनी और यूनानी भाषा में लिखे गए प्राचीन ग्रंथों का अध्ययन किया और उनका प्रसार किया।
- मानववादी पाठ्यक्रम: इसमें व्याकरण, अलंकारशास्त्र, कविता, इतिहास और नीतिशास्त्र (moral philosophy) जैसे विषय शामिल थे, जो मध्यकालीन धार्मिक शिक्षा से भिन्न थे।
- प्रमुख मानववादी:
- पेट्रार्क: प्राचीन ग्रंथों के अध्ययन पर जोर, मध्यकालीन अंधकार युग की आलोचना।
- लॉरेंजो वल्ला: लातिनी भाषा के विशेषज्ञ, उन्होंने 'कॉन्सटेंटाइन का दान' (Donation of Constantine) नामक दस्तावेज को भाषाई विश्लेषण के आधार पर नकली साबित किया, जिससे चर्च की लौ