Class 11 Physics Notes Chapter 1 (Chapter 1) – Bhautiki-II Book

Bhautiki-II
चलिए, आज हम कक्षा 11 की भौतिकी-II के पहले अध्याय, जो कि पाठ्यक्रम का अध्याय 9: "ठोसों के यांत्रिक गुण" (Mechanical Properties of Solids) है, का विस्तृत अध्ययन करेंगे। यह अध्याय प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

अध्याय 9: ठोसों के यांत्रिक गुण - विस्तृत नोट्स

1. परिचय (Introduction)
जब किसी ठोस वस्तु पर कोई बाह्य बल (विपरूपक बल) लगाया जाता है, तो उसके आकार या आकृति में परिवर्तन होता है। बल हटाने पर यदि वस्तु अपनी मूल अवस्था में लौट आती है, तो इस गुण को प्रत्यास्थता (Elasticity) कहते हैं। यदि वस्तु अपनी मूल अवस्था में नहीं लौटती है, तो इस गुण को सुघट्यता (Plasticity) कहते हैं।

2. प्रतिबल (Stress)
जब किसी वस्तु पर विरूपक बल लगाया जाता है, तो वस्तु के अंदर उसके एकांक क्षेत्रफल पर उत्पन्न होने वाले आंतरिक प्रतिक्रिया बल को प्रतिबल कहते हैं।

  • सूत्र: प्रतिबल (σ) = आंतरिक प्रतिक्रिया बल (F) / क्षेत्रफल (A)
  • SI मात्रक: न्यूटन/मीटर² (N/m²) या पास्कल (Pa)
  • विमीय सूत्र: [ML⁻¹T⁻²]

प्रतिबल के प्रकार:

  • (i) अनुदैर्घ्य प्रतिबल (Longitudinal Stress): जब बल वस्तु की लंबाई के अनुदिश लगाया जाता है।
    • तनन प्रतिबल (Tensile Stress): जब लंबाई में वृद्धि होती है।
    • संपीडन प्रतिबल (Compressive Stress): जब लंबाई में कमी होती है।
  • (ii) अपरूपण प्रतिबल या स्पर्शीय प्रतिबल (Shearing or Tangential Stress): जब बल वस्तु के पृष्ठ के समांतर (स्पर्शीय) लगाया जाता है, जिससे उसकी आकृति बदलती है, आयतन नहीं।
  • (iii) आयतन प्रतिबल या अभिलंब प्रतिबल (Volume or Normal Stress): जब बल वस्तु के पृष्ठ के प्रत्येक बिंदु पर लंबवत लगाया जाता है, जिससे केवल आयतन में परिवर्तन होता है। यह द्रव में डूबी वस्तु पर लगता है।

3. विकृति (Strain)
विरूपक बल के कारण वस्तु के आकार या आकृति में होने वाले भिन्नात्मक परिवर्तन को विकृति कहते हैं।

  • यह एक अनुपात है, इसलिए यह मात्रकहीन और विमाहीन राशि है।

विकृति के प्रकार:

  • (i) अनुदैर्घ्य विकृति (Longitudinal Strain): लंबाई में परिवर्तन (ΔL) और प्रारंभिक लंबाई (L) का अनुपात।
    • सूत्र: ΔL / L
  • (ii) अपरूपण विकृति (Shearing Strain): वस्तु की दो समांतर सतहों के बीच उत्पन्न कोणीय विस्थापन (θ)।
    • सूत्र: tan θ ≈ θ (छोटे कोण के लिए)
  • (iii) आयतन विकृति (Volume Strain): आयतन में परिवर्तन (ΔV) और प्रारंभिक आयतन (V) का अनुपात।
    • सूत्र: ΔV / V

4. हुक का नियम (Hooke's Law)
प्रत्यास्थता की सीमा के अंदर, किसी वस्तु में उत्पन्न प्रतिबल, उसमें उत्पन्न विकृति के अनुक्रमानुपाती होता है।

  • प्रतिबल ∝ विकृति
  • प्रतिबल = E × विकृति
    जहाँ E एक नियतांक है जिसे प्रत्यास्थता गुणांक (Modulus of Elasticity) कहते हैं। इसका मान पदार्थ की प्रकृति पर निर्भर करता है।

5. प्रतिबल-विकृति वक्र (Stress-Strain Curve)
यह वक्र किसी पदार्थ के प्रत्यास्थ व्यवहार को दर्शाता है। एक तन्य पदार्थ (Ductile material) के लिए वक्र के मुख्य बिंदु:

  • O से A (आनुपातिक सीमा - Proportional Limit): इस क्षेत्र में हुक का नियम लागू होता है (प्रतिबल ∝ विकृति)।
  • A से B (प्रत्यास्थता सीमा - Elastic Limit): इस सीमा तक बल हटाने पर वस्तु अपनी प्रारंभिक अवस्था में वापस आ जाती है।
  • B से D (सुघट्य व्यवहार - Plastic Behaviour): बिंदु B के बाद, वस्तु स्थायी रूप से विरूपित हो जाती है। बिंदु C को पराभव बिंदु (Yield Point) कहते हैं।
  • D (चरम तनन सामर्थ्य - Ultimate Tensile Strength): यह वह अधिकतम प्रतिबल है जिसे वस्तु टूटने से पहले सहन कर सकती है।
  • E (विभंजन बिंदु - Fracture Point): इस बिंदु पर वस्तु टूट जाती है।

6. प्रत्यास्थता गुणांक के प्रकार (Types of Modulus of Elasticity)

  • (i) यंग प्रत्यास्थता गुणांक (Young's Modulus, Y):

    • यह अनुदैर्घ्य प्रतिबल और अनुदैर्घ्य विकृति का अनुपात है।
    • सूत्र: Y = (F/A) / (ΔL/L) = FL / AΔL
    • यह केवल ठोसों के लिए परिभाषित है और पदार्थ की दृढ़ता को मापता है। Y का मान जितना अधिक होगा, पदार्थ उतना ही अधिक प्रत्यास्थ (कठोर) होगा।
  • (ii) अपरूपण गुणांक या दृढ़ता गुणांक (Shear Modulus or Modulus of Rigidity, G):

    • यह अपरूपण प्रतिबल और अपरूपण विकृति का अनुपात है।
    • सूत्र: G = (F/A) / θ
  • (iii) आयतन प्रत्यास्थता गुणांक (Bulk Modulus, B):

    • यह आयतन प्रतिबल और आयतन विकृति का अनुपात है।
    • सूत्र: B = -P / (ΔV/V)
      (यहाँ ऋणात्मक चिन्ह यह दर्शाता है कि दाब (P) बढ़ाने पर आयतन (V) घटता है।)
    • संपीड्यता (Compressibility, k): यह आयतन प्रत्यास्थता गुणांक का व्युत्क्रम होती है। k = 1/B

7. प्वॉइसाँ अनुपात (Poisson's Ratio, σ)
प्रत्यास्थता सीमा के अंदर, पाश्विक विकृति (Lateral Strain) और अनुदैर्घ्य विकृति (Longitudinal Strain) के अनुपात को प्वॉइसाँ अनुपात कहते हैं।

  • जब किसी तार को खींचा जाता है तो उसकी लंबाई बढ़ती है (अनुदैर्घ्य विकृति) लेकिन उसका व्यास घटता है (पाश्विक विकृति)।
  • सूत्र: σ = - (पाश्विक विकृति) / (अनुदैर्घ्य विकृति) = - (ΔD/D) / (ΔL/L)
  • इसका सैद्धांतिक मान -1 से +0.5 के बीच होता है, लेकिन व्यावहारिक रूप से यह 0 से 0.5 के बीच होता है।

8. प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा (Elastic Potential Energy)
किसी तार को खींचने में किया गया कार्य उसमें स्थितिज ऊर्जा के रूप में संचित हो जाता है।

  • तार में संचित ऊर्जा (U): U = (1/2) × बल × लंबाई में वृद्धि = (1/2) × F × ΔL
  • प्रति एकांक आयतन में संचित ऊर्जा (ऊर्जा घनत्व): u = (1/2) × प्रतिबल × विकृति

अभ्यास के लिए 10 महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

प्रश्न 1: प्रतिबल का SI मात्रक क्या है?
(क) जूल
(ख) न्यूटन
(ग) पास्कल
(घ) वॉट

प्रश्न 2: निम्नलिखित में से कौन सी राशि विमाहीन है?
(क) प्रतिबल
(ख) विकृति
(ग) यंग प्रत्यास्थता गुणांक
(घ) बल नियतांक

प्रश्न 3: हुक का नियम किस सीमा तक लागू होता है?
(क) सुघट्यता की सीमा
(ख) प्रत्यास्थता की सीमा
(ग) विभंजन बिंदु
(घ) इनमें से कोई नहीं

प्रश्न 4: आयतन प्रत्यास्थता गुणांक (Bulk Modulus) का व्युत्क्रम कहलाता है:
(क) दृढ़ता
(ख) प्वॉइसाँ अनुपात
(ग) संपीड्यता
(घ) यंग गुणांक

प्रश्न 5: यदि किसी तार की लंबाई और त्रिज्या दोनों को दोगुना कर दिया जाए, तो समान भार लटकाने पर उसकी लंबाई में वृद्धि:
(क) दोगुनी हो जाएगी
(ख) आधी रह जाएगी
(ग) चार गुनी हो जाएगी
(घ) अपरिवर्तित रहेगी

प्रश्न 6: द्रवों तथा गैसों के लिए निम्नलिखित में से कौन सा प्रत्यास्थता गुणांक शून्य होता है?
(क) आयतन प्रत्यास्थता गुणांक
(ख) यंग प्रत्यास्थता गुणांक
(ग) (क) और (ख) दोनों
(घ) इनमें से कोई नहीं

प्रश्न 7: प्रतिबल-विकृति वक्र के अंतर्गत आने वाला क्षेत्रफल क्या दर्शाता है?
(क) प्रति एकांक आयतन में किया गया कार्य
(ख) वस्तु का कुल बल
(ग) वस्तु का कुल संवेग
(घ) वस्तु का जड़त्व आघूर्ण

प्रश्न 8: एक पूर्ण दृढ़ वस्तु (Perfectly Rigid Body) के लिए यंग प्रत्यास्थता गुणांक का मान होता है:
(क) शून्य
(ख) एक
(ग) अनंत
(घ) सौ

प्रश्न 9: प्वॉइसाँ अनुपात (σ) का सूत्र है:
(क) अनुदैर्घ्य विकृति / पाश्विक विकृति
(ख) - (पाश्विक विकृति / अनुदैर्घ्य विकृति)
(ग) अनुदैर्घ्य प्रतिबल / पाश्विक प्रतिबल
(घ) पाश्विक प्रतिबल / अनुदैर्घ्य प्रतिबल

प्रश्न 10: स्टील, रबर की तुलना में अधिक प्रत्यास्थ होता है क्योंकि:
(क) स्टील का घनत्व अधिक होता है।
(ख) स्टील के लिए प्रतिबल/विकृति का अनुपात अधिक होता है।
(ग) रबर के लिए प्रतिबल/विकृति का अनुपात अधिक होता है।
(घ) स्टील आसानी से विरूपित हो जाता है।


उत्तरमाला:

  1. (ग) पास्कल
  2. (ख) विकृति
  3. (ख) प्रत्यास्थता की सीमा
  4. (ग) संपीड्यता
  5. (ख) आधी रह जाएगी [क्योंकि ΔL ∝ L/r², तो ΔL' ∝ (2L)/(2r)² = 2L/4r² = (1/2) L/r²]
  6. (ख) यंग प्रत्यास्थता गुणांक (और अपरूपण गुणांक भी, क्योंकि उनमें निश्चित आकार नहीं होता)
  7. (क) प्रति एकांक आयतन में किया गया कार्य
  8. (ग) अनंत (क्योंकि दृढ़ वस्तु में कोई विकृति नहीं होती)
  9. (ख) - (पाश्विक विकृति / अनुदैर्घ्य विकृति)
  10. (ख) स्टील के लिए प्रतिबल/विकृति का अनुपात (यानि यंग गुणांक) अधिक होता है।

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