Class 11 Physics Notes Chapter 7 (Chapter 7) – Examplar Problems (Hindi) Book

Examplar Problems (Hindi)
चलिए, आज हम भौतिकी के एक बहुत ही महत्वपूर्ण अध्याय, 'कणों के निकाय तथा घूर्णी गति' (Systems of Particles and Rotational Motion) का विस्तृत अध्ययन करेंगे। यह अध्याय प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे अवधारणात्मक (conceptual) और संख्यात्मक (numerical) दोनों प्रकार के प्रश्न पूछे जाते हैं।

अध्याय 7: कणों के निकाय तथा घूर्णी गति - विस्तृत नोट्स

इस अध्याय में हम किसी एक कण की गति से आगे बढ़कर अनेक कणों से बने निकाय (system) और विशेषकर दृढ़ पिंडों (rigid bodies) की गति का अध्ययन करते हैं। इसमें दो प्रकार की गतियाँ मुख्य हैं: स्थानांतरीय गति (translational motion) और घूर्णी गति (rotational motion)।

1. द्रव्यमान केंद्र (Center of Mass - CM)

  • परिभाषा: किसी निकाय का द्रव्यमान केंद्र वह बिंदु है जहाँ निकाय का संपूर्ण द्रव्यमान केंद्रित माना जा सकता है। बाह्य बल लगाने पर निकाय का द्रव्यमान केंद्र ठीक उसी प्रकार गति करता है जैसे कि सारा द्रव्यमान उसी बिंदु पर हो और बल वहीं लगाया गया हो।
  • सूत्र:
    • दो कणों के निकाय के लिए: R_CM = (m₁r₁ + m₂r₂)/(m₁ + m₂)
    • n-कणों के निकाय के लिए: R_CM = (Σ mᵢrᵢ) / (Σ mᵢ)
  • द्रव्यमान केंद्र की गति: निकाय पर लगने वाला कुल बाह्य बल (F_ext) निकाय के कुल द्रव्यमान (M) और उसके द्रव्यमान केंद्र के त्वरण (a_CM) के गुणनफल के बराबर होता है।
    F_ext = M * a_CM
  • महत्वपूर्ण बिंदु:
    • यदि किसी निकाय पर कोई बाह्य बल न लग रहा हो (F_ext = 0), तो उसका द्रव्यमान केंद्र स्थिर वेग से गति करता है या स्थिर रहता है।
    • सममित (symmetrical) वस्तुओं का द्रव्यमान केंद्र उनके ज्यामितीय केंद्र पर होता है (जैसे- वलय, डिस्क, गोले का केंद्र)।

2. बल आघूर्ण (Torque)

  • परिभाषा: बल का वह प्रभाव जो किसी पिंड को किसी अक्ष के परितः घुमाने की प्रवृत्ति रखता है, बल आघूर्ण कहलाता है। यह बल का घूर्णी अनुरूप (rotational analogue) है।
  • सूत्र: यह एक सदिश राशि है। τ = r × F
    • परिमाण में, τ = rF sin(θ)
    • यहाँ r घूर्णन अक्ष से बल के क्रिया बिंदु की दूरी है, F बल है, और θ, r और F के बीच का कोण है।
  • मात्रक: न्यूटन-मीटर (N-m)
  • विमीय सूत्र: [ML²T⁻²]

3. कोणीय संवेग (Angular Momentum)

  • परिभाषा: किसी कण के रेखीय संवेग (p) का किसी अक्ष के परितः आघूर्ण, उस कण का कोणीय संवेग (L) कहलाता है। यह रेखीय संवेग का घूर्णी अनुरूप है।
  • सूत्र:
    • एक कण के लिए: L = r × p
    • परिमाण में, L = rp sin(θ)
    • दृढ़ पिंड के लिए (जो एक निश्चित अक्ष के परितः घूम रहा है): L = Iω
    • यहाँ I जड़त्व आघूर्ण और ω कोणीय वेग है।
  • मात्रक: किग्रा-मी²/से (kg-m²/s)
  • विमीय सूत्र: [ML²T⁻¹]

4. कोणीय संवेग संरक्षण का नियम (Law of Conservation of Angular Momentum)

  • नियम: यदि किसी निकाय पर लगने वाला कुल बाह्य बल आघूर्ण (τ_ext) शून्य हो, तो उस निकाय का कुल कोणीय संवेग (L) संरक्षित रहता है।
    • यदि τ_ext = 0, तो L = नियतांक
    • अर्थात् I₁ω₁ = I₂ω₂
  • उदाहरण: घूमते हुए मंच पर कोई व्यक्ति अपनी भुजाएं सिकोड़ लेता है तो उसका जड़त्व आघूर्ण (I) कम हो जाता है, जिससे उसका कोणीय वेग (ω) बढ़ जाता है।

5. जड़त्व आघूर्ण (Moment of Inertia - I)

  • परिभाषा: किसी पिंड का वह गुण जो उसकी घूर्णन अवस्था में परिवर्तन का विरोध करता है। यह घूर्णी गति में द्रव्यमान के समतुल्य है।
  • सूत्र:
    • कणों के निकाय के लिए: I = Σ mᵢrᵢ²
    • यह पिंड के द्रव्यमान, उसके वितरण और घूर्णन अक्ष की स्थिति पर निर्भर करता है।
  • कुछ महत्वपूर्ण पिंडों का जड़त्व आघूर्ण:
    • वलय (Ring): केंद्र से गुजरने वाले और तल के लंबवत अक्ष के परितः MR²
    • डिस्क (Disc): केंद्र से गुजरने वाले और तल के लंबवत अक्ष के परितः ½ MR²
    • ठोस गोला (Solid Sphere): व्यास के परितः ²/₅ MR²
    • पतली छड़ (Thin Rod): केंद्र से गुजरने वाले और लंबाई के लंबवत अक्ष के परितः ¹/₁₂ ML²

6. जड़त्व आघूर्ण की प्रमेय (Theorems of Moment of Inertia)

  • समांतर अक्षों की प्रमेय (Parallel Axis Theorem): किसी भी अक्ष के परितः जड़त्व आघूर्ण I, द्रव्यमान केंद्र से गुजरने वाली समांतर अक्ष के परितः जड़त्व आघूर्ण I_CM और पिंड के द्रव्यमान M व दोनों अक्षों के बीच की लंबवत दूरी d के वर्ग के गुणनफल के योग के बराबर होता है।
    I = I_CM + Md²
  • लंबवत अक्षों की प्रमेय (Perpendicular Axis Theorem): यह केवल समतलीय पिंडों (planar bodies) के लिए लागू होती है। किसी समतलीय पिंड के तल के लंबवत अक्ष के परितः जड़त्व आघूर्ण I_z, उसी तल में स्थित दो परस्पर लंबवत अक्षों (x और y) के परितः जड़त्व आघूर्णों के योग के बराबर होता है।
    I_z = I_x + I_y

7. लोटनिक गति (Rolling Motion)

  • परिभाषा: यह स्थानांतरीय और घूर्णी गति का संयोजन है।
  • बिना फिसले लोटन की शर्त: द्रव्यमान केंद्र का रेखीय वेग v_CM और कोणीय वेग ω में संबंध v_CM = Rω होता है।
  • कुल गतिज ऊर्जा: लोटनिक गति करते पिंड की कुल गतिज ऊर्जा, स्थानांतरीय गतिज ऊर्जा और घूर्णी गतिज ऊर्जा का योग होती है।
    K_total = K_translational + K_rotational
    K_total = ½ Mv_CM² + ½ Iω²
  • इसे सरल करने पर: K_total = ½ Mv_CM² (1 + K²/R²)
    • यहाँ K घूर्णन त्रिज्या (Radius of Gyration) है, जहाँ I = MK²

अभ्यास के लिए 10 महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

प्रश्न 1: किसी पिंड का जड़त्व आघूर्ण किस पर निर्भर नहीं करता है?
(a) पिंड के द्रव्यमान पर
(b) घूर्णन अक्ष की स्थिति पर
(c) पिंड के कोणीय वेग पर
(d) द्रव्यमान के वितरण पर

उत्तर: (c) पिंड के कोणीय वेग पर
स्पष्टीकरण: जड़त्व आघूर्ण पिंड का आंतरिक गुण है जो द्रव्यमान, उसके वितरण और अक्ष की स्थिति पर निर्भर करता है, न कि उसके वेग पर।

प्रश्न 2: यदि किसी घूमते हुए पिंड का कोणीय संवेग L और जड़त्व आघूर्ण I हो, तो उसकी घूर्णी गतिज ऊर्जा होगी:
(a) L²/2I
(b) I²/2L
(c) L/2I
(d) I/2L

उत्तर: (a) L²/2I
स्पष्टीकरण: हम जानते हैं K_rot = ½ Iω² और L = Iωω = L/I रखने पर, K_rot = ½ I (L/I)² = L²/2I

प्रश्न 3: एक नर्तकी घूमते हुए अपने हाथ बाहर फैला लेती है। निम्नलिखित में से क्या संरक्षित रहेगा?
(a) कोणीय वेग
(b) गतिज ऊर्जा
(c) जड़त्व आघूर्ण
(d) कोणीय संवेग

उत्तर: (d) कोणीय संवेग
स्पष्टीकरण: चूँकि कोई बाह्य बल आघूर्ण नहीं लग रहा है, इसलिए कोणीय संवेग संरक्षित रहेगा। हाथ फैलाने पर जड़त्व आघूर्ण बढ़ेगा और कोणीय वेग घट जाएगा।

प्रश्न 4: एक वलय (Ring) और एक ठोस डिस्क (Solid Disc) का द्रव्यमान और त्रिज्या समान है। यदि वे एक नत समतल पर बिना फिसले लुढ़क रहे हैं, तो कौन पहले नीचे पहुँचेगा?
(a) वलय
(b) ठोस डिस्क
(c) दोनों एक साथ
(d) जानकारी अपर्याप्त है

उत्तर: (b) ठोस डिस्क
स्पष्टीकरण: जिसका जड़त्व आघूर्ण कम होता है, उसका त्वरण अधिक होता है। डिस्क का I = ½ MR² होता है जो वलय (I = MR²) से कम है, इसलिए डिस्क पहले पहुँचेगी।

प्रश्न 5: बल आघूर्ण का विमीय सूत्र क्या है?
(a) [MLT⁻²]
(b) [ML²T⁻²]
(c) [ML²T⁻¹]
(d) [MLT⁻¹]

उत्तर: (b) [ML²T⁻²]
स्पष्टीकरण: बल आघूर्ण = बल × दूरी। [MLT⁻²] × [L] = [ML²T⁻²]। यह कार्य और ऊर्जा के समान है।

प्रश्न 6: दो कणों, जिनके द्रव्यमान m और 2m हैं, के बीच की दूरी d है। निकाय का द्रव्यमान केंद्र m द्रव्यमान वाले कण से कितनी दूरी पर होगा?
(a) d/3
(b) 2d/3
(c) d/2
(d) d

उत्तर: (b) 2d/3
स्पष्टीकरण: मान लीजिए m मूल बिंदु (x=0) पर है, तो 2m x=d पर होगा। x_CM = (m*0 + 2m*d) / (m + 2m) = 2md / 3m = 2d/3

प्रश्न 7: घूर्णी गति में, बल का समतुल्य है:
(a) जड़त्व आघूर्ण
(b) कोणीय संवेग
(c) बल आघूर्ण
(d) कोणीय वेग

उत्तर: (c) बल आघूर्ण
स्पष्टीकरण: जो भूमिका रेखीय गति में बल (F = ma) की है, वही भूमिका घूर्णी गति में बल आघूर्ण (τ = Iα) की है।

प्रश्न 8: कोणीय संवेग संरक्षण का नियम किसका परिणाम है?
(a) न्यूटन का पहला नियम
(b) न्यूटन का दूसरा नियम
(c) न्यूटन का तीसरा नियम
(d) ऊर्जा संरक्षण का नियम

उत्तर: (b) न्यूटन का दूसरा नियम
स्पष्टीकरण: रेखीय गति में F = dp/dt होता है। घूर्णी गति में τ = dL/dt होता है। यदि τ=0 तो dL/dt=0 यानी L नियत रहता है। यह न्यूटन के दूसरे नियम का घूर्णी रूप है।

प्रश्न 9: जड़त्व आघूर्ण की लंबवत अक्षों की प्रमेय किसके लिए लागू होती है?
(a) किसी भी पिंड के लिए
(b) केवल गोलाकार पिंडों के लिए
(c) केवल समतलीय (planar) पिंडों के लिए
(d) केवल त्रिविमीय (3D) पिंडों के लिए

उत्तर: (c) केवल समतलीय (planar) पिंडों के लिए
स्पष्टीकरण: यह प्रमेय केवल 2D या समतलीय पिंडों (जैसे डिस्क, वलय, पतली चादर) के लिए ही मान्य है।

प्रश्न 10: यदि किसी पिंड का कोणीय वेग दोगुना कर दिया जाए, तो उसकी घूर्णी गतिज ऊर्जा कितनी हो जाएगी?
(a) आधी
(b) दोगुनी
(c) चार गुनी
(d) अपरिवर्तित

उत्तर: (c) चार गुनी
स्पष्टीकरण: घूर्णी गतिज ऊर्जा K = ½ Iω² होती है। चूँकि K ∝ ω², यदि ω को दोगुना किया जाता है, तो K, (2)² यानी 4 गुना हो जाएगी।

इन नोट्स और प्रश्नों का अच्छे से अध्ययन करें। सफलता निश्चित मिलेगी

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