Class 11 Physics Notes Chapter 8 (Chapter 8) – Examplar Problems (Hindi) Book

Examplar Problems (Hindi)
नमस्ते! चलिए, आज हम भौतिकी के एक बहुत ही महत्वपूर्ण अध्याय, 'गुरुत्वाकर्षण' (Gravitation) पर विस्तार से चर्चा करेंगे। यह अध्याय सरकारी परीक्षाओं की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे सीधे-सीधे सैद्धांतिक और सूत्र-आधारित प्रश्न पूछे जाते हैं।

अध्याय 8: गुरुत्वाकर्षण (Gravitation) - विस्तृत नोट्स

इस अध्याय में हम गुरुत्वाकर्षण बल, गुरुत्वीय त्वरण, केप्लर के नियमों और उपग्रहों की गति का अध्ययन करेंगे।

1. न्यूटन का सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण का नियम (Newton's Universal Law of Gravitation)

  • कथन: ब्रह्मांड में किन्हीं भी दो पिंडों के बीच कार्य करने वाला आकर्षण बल उनके द्रव्यमानों के गुणनफल के समानुपाती तथा उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।

  • सूत्र:
    F = G * (m₁ * m₂) / r²
    जहाँ,

    • F = गुरुत्वाकर्षण बल
    • G = सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक (Universal Gravitational Constant)
      • मान: 6.67 × 10⁻¹¹ Nm²/kg²
      • यह मान माध्यम या पिंडों की प्रकृति पर निर्भर नहीं करता है, इसीलिए इसे 'सार्वत्रिक' कहते हैं।
    • m₁ और m₂ = दो पिंडों के द्रव्यमान
    • r = पिंडों के केंद्रों के बीच की दूरी
  • महत्वपूर्ण बिंदु:

    • यह एक केंद्रीय बल (Central Force) है, अर्थात यह दोनों पिंडों के केंद्रों को मिलाने वाली रेखा के अनुदिश कार्य करता है।
    • यह एक संरक्षी बल (Conservative Force) है।
    • यह व्युत्क्रम वर्ग नियम (Inverse Square Law) का पालन करता है (F ∝ 1/r²)।

2. गुरुत्वीय त्वरण (g) (Acceleration due to Gravity)

  • परिभाषा: पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल के कारण किसी मुक्त रूप से गिरती हुई वस्तु में उत्पन्न त्वरण को गुरुत्वीय त्वरण कहते हैं।
  • सूत्र:
    g = GM / R²
    जहाँ,
    • M = पृथ्वी का द्रव्यमान
    • R = पृथ्वी की त्रिज्या
  • पृथ्वी की सतह पर g का औसत मान लगभग 9.8 m/s² होता है।
  • यह वस्तु के द्रव्यमान (m) पर निर्भर नहीं करता है। यही कारण है कि निर्वात में एक पंख और एक पत्थर एक साथ नीचे गिरते हैं।

3. गुरुत्वीय त्वरण (g) के मान में परिवर्तन

यह भाग परीक्षाओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

  • पृथ्वी की सतह से ऊँचाई (h) पर:
    g' = g / (1 + h/R)²
    यदि h << R (ऊँचाई बहुत कम हो), तो g' ≈ g(1 - 2h/R)

    • निष्कर्ष: ऊँचाई बढ़ने पर g का मान घटता है।
  • पृथ्वी की सतह से गहराई (d) पर:
    g' = g(1 - d/R)

    • निष्कर्ष: गहराई बढ़ने पर g का मान घटता है।
    • पृथ्वी के केंद्र पर (d=R): g' का मान शून्य हो जाता है।
  • पृथ्वी के घूर्णन के कारण:
    g' = g - Rω²cos²λ
    जहाँ λ अक्षांश (latitude) है।

    • ध्रुवों पर (Poles): λ = 90°, cos90°=0, इसलिए g' = g (अधिकतम)।
    • भूमध्य रेखा पर (Equator): λ = 0°, cos0°=1, इसलिए g' = g - Rω² (न्यूनतम)।
    • निष्कर्ष: g का मान ध्रुवों पर अधिकतम और भूमध्य रेखा पर न्यूनतम होता है।

4. गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा (Gravitational Potential Energy)

  • परिभाषा: किसी पिंड को अनंत से गुरुत्वीय क्षेत्र के किसी बिंदु तक लाने में किया गया कार्य उस बिंदु पर पिंड की गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा कहलाता है।
  • सूत्र: U = -GMm / r
  • यह हमेशा ऋणात्मक होती है, जो आकर्षण बल को दर्शाती है।

5. पलायन वेग (Escape Velocity - vₑ)

  • परिभाषा: वह न्यूनतम वेग जिससे किसी पिंड को पृथ्वी की सतह से फेंकने पर वह पृथ्वी के गुरुत्वीय क्षेत्र को पार कर जाए और कभी वापस न लौटे।
  • सूत्र:
    vₑ = √(2GM/R) या vₑ = √(2gR)
  • पृथ्वी के लिए इसका मान लगभग 11.2 km/s है।
  • यह पिंड के द्रव्यमान या प्रक्षेपण के कोण पर निर्भर नहीं करता है।

6. कक्षीय वेग (Orbital Velocity - vₒ)

  • परिभाषा: किसी उपग्रह को पृथ्वी के चारों ओर एक निश्चित कक्षा में चक्कर लगाने के लिए आवश्यक वेग।
  • सूत्र (पृथ्वी के निकट की कक्षा के लिए):
    vₒ = √(GM/R) या vₒ = √(gR)
  • पृथ्वी के लिए इसका मान लगभग 7.9 km/s है।
  • पलायन वेग और कक्षीय वेग में संबंध: vₑ = √2 * vₒ

7. केप्लर के ग्रहीय गति के नियम (Kepler's Laws of Planetary Motion)

  • प्रथम नियम (कक्षाओं का नियम): प्रत्येक ग्रह सूर्य के चारों ओर एक दीर्घवृत्ताकार (elliptical) कक्षा में परिक्रमा करता है तथा सूर्य इस दीर्घवृत्त के किसी एक फोकस पर स्थित होता है।
  • द्वितीय नियम (क्षेत्रफल का नियम): ग्रह को सूर्य से मिलाने वाली रेखा समान समय अंतराल में समान क्षेत्रफल तय करती है।
    • इसका अर्थ है कि जब ग्रह सूर्य के निकट होता है तो उसकी चाल अधिक होती है और जब दूर होता है तो चाल कम हो जाती है।
    • यह कोणीय संवेग संरक्षण (Conservation of Angular Momentum) के सिद्धांत पर आधारित है।
  • तृतीय नियम (आवर्तकालों का नियम): किसी भी ग्रह का परिक्रमण काल (T) का वर्ग उसकी दीर्घवृत्ताकार कक्षा की अर्ध-दीर्घ अक्ष (r) की तीसरी घात के समानुपाती होता है।
    • T² ∝ r³

अभ्यास के लिए 10 महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

प्रश्न 1: यदि दो वस्तुओं के बीच की दूरी को दोगुना कर दिया जाए, तो उनके बीच गुरुत्वाकर्षण बल कितना हो जाएगा?
(a) दोगुना
(b) आधा
(c) एक-चौथाई
(d) चार गुना

प्रश्न 2: पृथ्वी की सतह पर गुरुत्वीय त्वरण (g) का मान कहाँ अधिकतम होता है?
(a) भूमध्य रेखा पर
(b) ध्रुवों पर
(c) 45° अक्षांश पर
(d) सभी जगह समान होता है

प्रश्न 3: किसी वस्तु का पलायन वेग निर्भर करता है:
(a) वस्तु के द्रव्यमान पर
(b) प्रक्षेपण के कोण पर
(c) ग्रह के द्रव्यमान और त्रिज्या पर
(d) इन सभी पर

प्रश्न 4: केप्लर का द्वितीय नियम (क्षेत्रफल का नियम) किस भौतिक राशि के संरक्षण पर आधारित है?
(a) ऊर्जा
(b) रैखिक संवेग
(c) कोणीय संवेग
(d) द्रव्यमान

प्रश्न 5: पृथ्वी की सतह के निकट परिक्रमा कर रहे उपग्रह के कक्षीय वेग (vₒ) और पलायन वेग (vₑ) में सही संबंध क्या है?
(a) vₑ = vₒ
(b) vₑ = 2vₒ
(c) vₑ = √2 * vₒ
(d) vₒ = √2 * vₑ

प्रश्न 6: यदि कोई व्यक्ति पृथ्वी के केंद्र पर चला जाए, तो उसका भार कितना होगा?
(a) अनंत
(b) पृथ्वी की सतह के बराबर
(c) शून्य
(d) सतह से आधा

प्रश्न 7: गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा का मान हमेशा ऋणात्मक क्यों होता है?
(a) क्योंकि यह एक सदिश राशि है
(b) क्योंकि यह आकर्षण बल को दर्शाता है
(c) गणना की सुविधा के लिए
(d) यह एक सार्वत्रिक नियम है

प्रश्न 8: सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक (G) का मान निर्भर करता है:
(a) पिंडों के द्रव्यमान पर
(b) पिंडों के बीच की दूरी पर
(c) माध्यम पर
(d) उपरोक्त में से कोई नहीं

प्रश्न 9: एक कृत्रिम उपग्रह में एक वस्तु का भारहीनता (weightlessness) का अनुभव होने का कारण है:
(a) शून्य गुरुत्वाकर्षण
(b) उपग्रह की सतह द्वारा शून्य प्रतिक्रिया बल
(c) वायु का अभाव
(d) पृथ्वी से अत्यधिक दूरी

प्रश्न 10: दो ग्रहों की त्रिज्याओं का अनुपात 1:2 है और उनके गुरुत्वीय त्वरण का अनुपात 2:1 है। उनके पलायन वेगों का अनुपात क्या होगा?
(a) 1:1
(b) 1:√2
(c) √2:1
(d) 1:2


उत्तरमाला और व्याख्या:

  1. (c) एक-चौथाई

    • व्याख्या: F ∝ 1/r²। यदि r को 2r कर दिया जाए, तो F'1/(2r)² = 1/4r²। अतः बल एक-चौथाई हो जाएगा।
  2. (b) ध्रुवों पर

    • व्याख्या: पृथ्वी के घूर्णन और चपटे आकार के कारण, g का मान ध्रुवों पर अधिकतम होता है।
  3. (c) ग्रह के द्रव्यमान और त्रिज्या पर

    • व्याख्या: vₑ = √(2GM/R)। यह सूत्र स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि पलायन वेग केवल ग्रह के द्रव्यमान (M) और त्रिज्या (R) पर निर्भर करता है, वस्तु के द्रव्यमान पर नहीं।
  4. (c) कोणीय संवेग

    • व्याख्या: केप्लर का द्वितीय नियम कोणीय संवेग संरक्षण के सिद्धांत का परिणाम है।
  5. (c) vₑ = √2 * vₒ

    • व्याख्या: vₑ = √(2gR) और vₒ = √(gR)। दोनों की तुलना करने पर vₑ = √2 * vₒ प्राप्त होता है।
  6. (c) शून्य

    • व्याख्या: पृथ्वी के केंद्र पर g का मान शून्य होता है। चूंकि भार W = mg होता है, इसलिए केंद्र पर भार भी शून्य होगा।
  7. (b) क्योंकि यह आकर्षण बल को दर्शाता है

    • व्याख्या: अनंत पर स्थितिज ऊर्जा को शून्य माना जाता है। चूंकि गुरुत्वाकर्षण बल आकर्षी होता है, इसलिए पिंड को पास लाने में क्षेत्र द्वारा कार्य किया जाता है, जिससे निकाय की ऊर्जा घटती है। अतः यह ऋणात्मक होती है।
  8. (d) उपरोक्त में से कोई नहीं

    • व्याख्या: G एक सार्वत्रिक नियतांक है। इसका मान किन्हीं भी पिंडों या माध्यम पर निर्भर नहीं करता है।
  9. (b) उपग्रह की सतह द्वारा शून्य प्रतिक्रिया बल

    • व्याख्या: उपग्रह और उसके अंदर की वस्तु दोनों एक ही त्वरण (g') से पृथ्वी की ओर गिर रहे होते हैं (मुक्त पतन की स्थिति)। इसलिए, वस्तु पर कोई प्रतिक्रिया बल नहीं लगता, जिससे भारहीनता का अनुभव होता है।
  10. (a) 1:1

    • व्याख्या: पलायन वेग vₑ = √(2gR)
      v₁ / v₂ = √(2g₁R₁) / √(2g₂R₂) = √(g₁/g₂) * √(R₁/R₂)
      दिया गया है: R₁/R₂ = 1/2 और g₁/g₂ = 2/1
      v₁ / v₂ = √(2/1) * √(1/2) = √2 * (1/√2) = 1। अतः अनुपात 1:1 होगा।

इन सभी बिंदुओं को अच्छी तरह से दोहराएं। यह अध्याय समझने में आसान है और आप इसमें आसानी से अंक प्राप्त कर सकते हैं। शुभकामनाएँ

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