Class 11 Physics Notes Chapter 8 (गुरुत्वाकर्षण) – Bhautiki-I Book

चलिए, आज हम भौतिकी के एक बहुत ही महत्वपूर्ण अध्याय 'गुरुत्वाकर्षण' का अध्ययन करेंगे। यह अध्याय न केवल आपकी कक्षा 11 की परीक्षा के लिए, बल्कि विभिन्न सरकारी प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे NEET, JEE, NDA आदि के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
अध्याय 8: गुरुत्वाकर्षण (Gravitation) - विस्तृत नोट्स
1. केप्लर के ग्रहीय गति के नियम (Kepler's Laws of Planetary Motion)
ग्रहों की गति को समझने के लिए केप्लर ने तीन नियम दिए:
- प्रथम नियम (कक्षाओं का नियम): प्रत्येक ग्रह सूर्य के चारों ओर एक दीर्घवृत्ताकार (elliptical) कक्षा में परिक्रमा करता है तथा सूर्य इस दीर्घवृत्त के किसी एक फोकस पर स्थित होता है।
- द्वितीय नियम (क्षेत्रफल का नियम): किसी भी ग्रह को सूर्य से मिलाने वाली रेखा समान समय अंतरालों में समान क्षेत्रफल तय करती है। इसका अर्थ है कि ग्रह की क्षेत्रीय चाल (areal velocity) नियत रहती है। यह नियम कोणीय संवेग संरक्षण (Conservation of Angular Momentum) के सिद्धांत पर आधारित है। जब ग्रह सूर्य के निकट होता है, तो उसकी चाल बढ़ जाती है और जब दूर होता है, तो चाल घट जाती है।
- तृतीय नियम (आवर्तकालों का नियम): किसी भी ग्रह के परिक्रमण काल (T) का वर्ग, उसकी दीर्घवृत्ताकार कक्षा की अर्ध-दीर्घ अक्ष (a) के घन के अनुक्रमानुपाती होता है।
- T² ∝ a³
2. न्यूटन का सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण का नियम (Newton's Universal Law of Gravitation)
इस नियम के अनुसार, ब्रह्मांड में प्रत्येक पिंड हर दूसरे पिंड को एक बल से आकर्षित करता है, जो उन दोनों पिंडों के द्रव्यमानों के गुणनफल के अनुक्रमानुपाती तथा उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
- सूत्र: F = G (m₁m₂ / r²)
- जहाँ, F = गुरुत्वाकर्षण बल
- m₁ और m₂ = दो पिंडों के द्रव्यमान
- r = उनके केंद्रों के बीच की दूरी
- G = सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक (Universal Gravitational Constant)
- G का मान = 6.67 × 10⁻¹¹ Nm²/kg²
- G की विमा = [M⁻¹L³T⁻²]
3. गुरुत्वीय त्वरण 'g' (Acceleration due to Gravity)
जब कोई वस्तु पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल के कारण स्वतंत्र रूप से गिरती है, तो उसके वेग में उत्पन्न त्वरण को गुरुत्वीय त्वरण कहते हैं।
- 'g' तथा 'G' में संबंध:
- g = GM / R²
- जहाँ, M = पृथ्वी का द्रव्यमान, R = पृथ्वी की त्रिज्या
- पृथ्वी की सतह पर g का औसत मान ≈ 9.8 m/s² होता है।
4. गुरुत्वीय त्वरण 'g' के मान में परिवर्तन
'g' का मान स्थिर नहीं रहता, यह विभिन्न कारकों पर निर्भर करता है:
-
पृथ्वी की सतह से ऊँचाई (h) पर:
- g' = g / (1 + h/R)²
- यदि h << R हो, तो: g' ≈ g (1 - 2h/R)
- अर्थात, ऊँचाई बढ़ने पर 'g' का मान घटता है।
-
पृथ्वी की सतह से गहराई (d) पर:
- g' = g (1 - d/R)
- गहराई बढ़ने पर भी 'g' का मान घटता है।
- पृथ्वी के केंद्र पर (d=R), g' = 0 हो जाता है।
-
पृथ्वी के घूर्णन के कारण:
- पृथ्वी के घूर्णन के कारण 'g' का मान ध्रुवों (Poles) पर अधिकतम और भूमध्य रेखा (Equator) पर न्यूनतम होता है।
5. गुरुत्वीय क्षेत्र तथा विभव (Gravitational Field and Potential)
-
गुरुत्वीय क्षेत्र की तीव्रता (E): किसी बिंदु पर गुरुत्वीय क्षेत्र की तीव्रता उस बिंदु पर रखे एकांक द्रव्यमान के पिंड पर लगने वाले गुरुत्वाकर्षण बल के बराबर होती है।
- E = F/m = GM/r² (यह एक सदिश राशि है)
-
गुरुत्वीय विभव (V): एकांक द्रव्यमान के पिंड को अनंत से गुरुत्वीय क्षेत्र के किसी बिंदु तक लाने में किया गया कार्य उस बिंदु पर गुरुत्वीय विभव कहलाता है।
- V = -GM/r (यह एक अदिश राशि है)
-
गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा (U): m द्रव्यमान के पिंड को अनंत से गुरुत्वीय क्षेत्र के किसी बिंदु तक लाने में किया गया कार्य।
- U = -GMm/r
6. पलायन वेग (Escape Velocity)
यह वह न्यूनतम वेग है जिससे किसी पिंड को पृथ्वी की सतह से ऊपर की ओर फेंकने पर वह पृथ्वी के गुरुत्वीय क्षेत्र को पार कर जाता है और कभी वापस नहीं लौटता।
- सूत्र: vₑ = √(2GM/R) = √(2gR)
- पृथ्वी के लिए पलायन वेग का मान लगभग 11.2 km/s है।
- यह पिंड के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता है।
7. कक्षीय वेग (Orbital Velocity)
किसी ग्रह के चारों ओर वृत्तीय कक्षा में परिक्रमा करते हुए उपग्रह के वेग को उसका कक्षीय वेग कहते हैं।
-
सूत्र: vₒ = √(GM/r) = √(GM/(R+h))
- जहाँ r = R+h (कक्षा की त्रिज्या)
-
यदि उपग्रह पृथ्वी के बहुत निकट परिक्रमा कर रहा हो (h<<R), तो: vₒ = √(gR)
-
पृथ्वी के निकट परिक्रमा करते उपग्रह के लिए कक्षीय वेग का मान लगभग 7.92 km/s है।
-
पलायन वेग और कक्षीय वेग में संबंध: vₑ = √2 vₒ
8. उपग्रह (Satellites)
-
भू-स्थिर उपग्रह (Geostationary Satellite):
- यह पृथ्वी की भूमध्यरेखीय तल में परिक्रमा करता है।
- इसका परिक्रमण काल पृथ्वी के घूर्णन काल (24 घंटे) के बराबर होता है।
- यह पृथ्वी से देखने पर स्थिर प्रतीत होता है।
- इसकी पृथ्वी की सतह से ऊँचाई लगभग 36,000 km होती है।
- उपयोग: संचार, मौसम की भविष्यवाणी।
-
भारहीनता (Weightlessness):
- जब कोई पिंड मुक्त रूप से गिर रहा हो (जैसे किसी कृत्रिम उपग्रह के अंदर), तो उस पर कोई अभिलंब प्रतिक्रिया बल नहीं लगता। इसी अवस्था को भारहीनता कहते हैं। यह गुरुत्वाकर्षण की अनुपस्थिति नहीं है।
अभ्यास हेतु बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
प्रश्न 1: सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक (G) का SI मात्रक क्या है?
(A) Nm²/kg
(B) Nm/kg²
(C) Nm²kg²
(D) Nm²/kg²
प्रश्न 2: पृथ्वी की सतह से 'h' ऊँचाई पर गुरुत्वीय त्वरण (g) का मान होता है (यदि h<<R):
(A) g(1 + 2h/R)
(B) g(1 - 2h/R)
(C) g(1 - h/R)
(D) g(1 + h/R)
प्रश्न 3: यदि पृथ्वी का द्रव्यमान वही रहे और त्रिज्या 1% कम हो जाए, तो पृथ्वी की सतह पर 'g' का मान लगभग:
(A) 1% घट जाएगा
(B) 2% बढ़ जाएगा
(C) 1% बढ़ जाएगा
(D) 2% घट जाएगा
प्रश्न 4: केप्लर का द्वितीय नियम (क्षेत्रफल का नियम) किस भौतिक राशि के संरक्षण पर आधारित है?
(A) रैखिक संवेग
(B) ऊर्जा
(C) कोणीय संवेग
(D) द्रव्यमान
प्रश्न 5: पृथ्वी के केंद्र पर किसी वस्तु का भार कितना होगा?
(A) सतह के बराबर
(B) अनंत
(C) शून्य
(D) सतह से आधा
प्रश्न 6: एक भू-स्थिर उपग्रह का आवर्तकाल कितना होता है?
(A) 12 घंटे
(B) 365 दिन
(C) 24 घंटे
(D) 28 दिन
प्रश्न 7: किसी ग्रह की सतह पर पलायन वेग (vₑ) और उसकी सतह के निकट कक्षीय वेग (vₒ) में क्या संबंध है?
(A) vₑ = vₒ
(B) vₑ = 2vₒ
(C) vₑ = vₒ/√2
(D) vₑ = √2 vₒ
प्रश्न 8: यदि दो पिंडों के बीच की दूरी दोगुनी कर दी जाए, तो उनके बीच गुरुत्वाकर्षण बल हो जाएगा:
(A) दोगुना
(B) आधा
(C) एक-चौथाई
(D) चार गुना
प्रश्न 9: पृथ्वी की सतह पर पलायन वेग का मान निर्भर करता है:
(A) पिंड के द्रव्यमान पर
(B) प्रक्षेपण की दिशा पर
(C) पृथ्वी के द्रव्यमान और त्रिज्या पर
(D) पिंड के आकार पर
प्रश्न 10: जब कोई अंतरिक्ष यात्री किसी उपग्रह में पृथ्वी की परिक्रमा कर रहा होता है, तो वह भारहीनता का अनुभव करता है क्योंकि:
(A) वहां गुरुत्वाकर्षण शून्य होता है।
(B) अंतरिक्ष यात्री और उपग्रह का त्वरण समान होता है।
(C) अंतरिक्ष यात्री पर कोई बल नहीं लगता।
(D) वायुमंडलीय दाब शून्य होता है।
उत्तरमाला:
- (D) Nm²/kg²
- (B) g(1 - 2h/R)
- (B) 2% बढ़ जाएगा (क्योंकि g ∝ 1/R², इसलिए g में प्रतिशत परिवर्तन ≈ -2(R में प्रतिशत परिवर्तन) = -2(-1%) = +2%)
- (C) कोणीय संवेग
- (C) शून्य (क्योंकि पृथ्वी के केंद्र पर g = 0 होता है)
- (C) 24 घंटे
- (D) vₑ = √2 vₒ
- (C) एक-चौथाई (क्योंकि F ∝ 1/r², दूरी दोगुनी होने पर बल (1/2)² = 1/4 हो जाएगा)
- (C) पृथ्वी के द्रव्यमान और त्रिज्या पर (सूत्र vₑ = √(2GM/R) से स्पष्ट है)
- (B) अंतरिक्ष यात्री और उपग्रह का त्वरण समान होता है। (दोनों मुक्त पतन की स्थिति में होते हैं)
इन नोट्स को अच्छी तरह से पढ़ें और सूत्रों को याद रखें। आपकी परीक्षाओं के लिए शुभकामनाएँ