Class 11 Political Science Notes Chapter 2 (भारतीय संविधान में अधिकार) – Bharat ka Samvidhant Sidhant aur Vyavhar Book

Bharat ka Samvidhant Sidhant aur Vyavhar
प्रिय विद्यार्थियों,

आज हम आपकी राजनीति विज्ञान की पाठ्यपुस्तक 'भारत का संविधान: सिद्धांत और व्यवहार' के अध्याय 2, 'भारतीय संविधान में अधिकार' का विस्तृत अध्ययन करेंगे। यह अध्याय प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें भारतीय संविधान के मूल आधारों में से एक, मौलिक अधिकारों की चर्चा की गई है। हम न केवल अधिकारों की अवधारणा को समझेंगे, बल्कि प्रत्येक मौलिक अधिकार के प्रावधानों और उनसे जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों पर भी विस्तार से चर्चा करेंगे।


अध्याय 2: भारतीय संविधान में अधिकार

विस्तृत नोट्स (Detailed Notes)

1. अधिकारों का महत्व (Importance of Rights)

  • लोकतंत्र का आधार: अधिकार लोकतंत्र के सुचारु संचालन के लिए आवश्यक हैं। वे व्यक्तियों को राज्य की मनमानी शक्तियों से बचाते हैं और उन्हें गरिमापूर्ण जीवन जीने का अवसर प्रदान करते हैं।
  • व्यक्तिगत गरिमा और विकास: अधिकार व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक और नैतिक विकास के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ प्रदान करते हैं।
  • सामाजिक न्याय: अधिकार समाज के कमजोर वर्गों को शोषण से बचाने और उन्हें समानता दिलाने में सहायक होते हैं।
  • संविधान की आत्मा: भारत में मौलिक अधिकार संविधान का एक अभिन्न अंग हैं और इन्हें संविधान की आत्मा माना जाता है।

2. मौलिक अधिकार (Fundamental Rights)

भारतीय संविधान के भाग III में अनुच्छेद 12 से 35 तक मौलिक अधिकारों का वर्णन किया गया है। ये अधिकार व्यक्ति को राज्य के विरुद्ध प्राप्त होते हैं और न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय (न्यायसंगत) होते हैं।

विशेषताएँ:

  • न्यायसंगत (Justiciable): इनका उल्लंघन होने पर व्यक्ति सीधे सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालय जा सकता है (अनुच्छेद 32 और 226)।
  • असीमित नहीं: ये अधिकार असीमित नहीं हैं; राज्य इन पर उचित प्रतिबंध लगा सकता है।
  • संशोधनीय: मौलिक अधिकारों में संसद द्वारा संविधान संशोधन के माध्यम से परिवर्तन किया जा सकता है, बशर्ते यह संविधान के मूल ढांचे का उल्लंघन न करे (केशवानंद भारती वाद, 1973)।
  • निलंबन: आपातकाल के दौरान अनुच्छेद 20 और 21 को छोड़कर अन्य मौलिक अधिकारों को निलंबित किया जा सकता है।
  • राज्य के विरुद्ध उपलब्ध: ये अधिकार मुख्य रूप से राज्य की मनमानी कार्रवाई के विरुद्ध एक गारंटी के रूप में कार्य करते हैं।

मूल संविधान में 7 मौलिक अधिकार थे, लेकिन 44वें संविधान संशोधन, 1978 द्वारा संपत्ति के अधिकार को मौलिक अधिकारों की सूची से हटा दिया गया। वर्तमान में 6 मौलिक अधिकार हैं:

A. समता का अधिकार (Right to Equality) - अनुच्छेद 14-18

  • अनुच्छेद 14: विधि के समक्ष समता और विधियों का समान संरक्षण
    • विधि के समक्ष समता (Equality before Law): कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है। सभी व्यक्ति कानून की दृष्टि में समान हैं। (ब्रिटिश अवधारणा)
    • विधियों का समान संरक्षण (Equal Protection of Laws): समान परिस्थितियों में सभी व्यक्तियों के साथ समान व्यवहार किया जाएगा। (अमेरिकी अवधारणा)
  • अनुच्छेद 15: धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर विभेद का प्रतिषेध
    • राज्य किसी भी नागरिक के साथ केवल इन आधारों पर कोई भेदभाव नहीं करेगा।
    • अपवाद: राज्य महिलाओं, बच्चों और सामाजिक व शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों (SC/ST/OBC) के लिए विशेष प्रावधान कर सकता है।
  • अनुच्छेद 16: लोक नियोजन के विषय में अवसर की समता
    • सभी नागरिकों को सरकारी नौकरियों में समान अवसर प्राप्त होंगे।
    • अपवाद: राज्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण का प्रावधान कर सकता है।
  • अनुच्छेद 17: अस्पृश्यता का अंत
    • अस्पृश्यता का किसी भी रूप में आचरण निषिद्ध है। यह एक दंडनीय अपराध है।
  • अनुच्छेद 18: उपाधियों का अंत
    • राज्य सेना या विद्या संबंधी सम्मान के सिवाय कोई उपाधि प्रदान नहीं करेगा।
    • भारत का कोई नागरिक किसी विदेशी राज्य से कोई उपाधि स्वीकार नहीं करेगा।

B. स्वतंत्रता का अधिकार (Right to Freedom) - अनुच्छेद 19-22

  • अनुच्छेद 19: वाक्-स्वतंत्रता आदि विषयक कुछ अधिकारों का संरक्षण (6 प्रकार की स्वतंत्रताएँ)
    1. वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Freedom of Speech and Expression): इसमें प्रेस की स्वतंत्रता, जानने का अधिकार, चुप रहने का अधिकार भी शामिल है।
    2. शांतिपूर्ण और निरायुध सम्मेलन की स्वतंत्रता (Freedom to Assemble Peaceably and Without Arms): बिना हथियारों के शांतिपूर्ण सभा करने का अधिकार।
    3. संघ या संगठन बनाने की स्वतंत्रता (Freedom to Form Associations or Unions): सहकारी समितियाँ बनाने का अधिकार भी शामिल है (97वां संशोधन, 2011)।
    4. भारत के राज्यक्षेत्र में सर्वत्र अबाध संचरण की स्वतंत्रता (Freedom to Move Freely Throughout the Territory of India):
    5. भारत के राज्यक्षेत्र के किसी भी भाग में निवास करने और बस जाने की स्वतंत्रता (Freedom to Reside and Settle in Any Part of the Territory of India):
    6. कोई वृत्ति, उपजीविका, व्यापार या कारोबार करने की स्वतंत्रता (Freedom to Practice Any Profession, or to Carry on Any Occupation, Trade or Business):
    • ये स्वतंत्रताएँ असीमित नहीं हैं; राज्य इन पर उचित प्रतिबंध लगा सकता है।
  • अनुच्छेद 20: अपराधों के लिए दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण
    • कार्योत्तर विधि से संरक्षण (No Ex-post Facto Law): किसी व्यक्ति को उस समय लागू कानून के उल्लंघन के लिए ही दोषी ठहराया जा सकता है।
    • दोहरे दंड से संरक्षण (No Double Jeopardy): एक ही अपराध के लिए एक व्यक्ति को एक से अधिक बार दंडित नहीं किया जाएगा।
    • आत्म-अभिशंसन से संरक्षण (No Self-incrimination): किसी व्यक्ति को स्वयं के विरुद्ध गवाह बनने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा।
  • अनुच्छेद 21: प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण
    • किसी व्यक्ति को उसके प्राण या दैहिक स्वतंत्रता से विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार ही वंचित किया जाएगा, अन्यथा नहीं।
    • यह अधिकार अत्यंत व्यापक है और इसमें गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार, निजता का अधिकार, स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार, आश्रय का अधिकार, स्वास्थ्य का अधिकार, विदेश यात्रा का अधिकार आदि शामिल हैं।
  • अनुच्छेद 21A: शिक्षा का अधिकार (Right to Education)
    • राज्य 6 से 14 वर्ष तक के सभी बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा प्रदान करेगा। (86वां संविधान संशोधन, 2002 द्वारा जोड़ा गया)।
  • अनुच्छेद 22: कुछ दशाओं में गिरफ्तारी और निरोध से संरक्षण
    • गिरफ्तार व्यक्ति को गिरफ्तारी का कारण जानने का अधिकार।
    • अपनी पसंद के वकील से परामर्श करने का अधिकार।
    • 24 घंटे के भीतर (यात्रा समय को छोड़कर) मजिस्ट्रेट के सामने पेश होने का अधिकार।
    • मजिस्ट्रेट के आदेश के बिना 24 घंटे से अधिक हिरासत में न रखने का अधिकार।
    • अपवाद: शत्रु विदेशी और निवारक निरोध कानून के तहत गिरफ्तार व्यक्ति को ये अधिकार प्राप्त नहीं होते।

C. शोषण के विरुद्ध अधिकार (Right against Exploitation) - अनुच्छेद 23-24

  • अनुच्छेद 23: मानव दुर्व्यापार और बलात्श्रम का प्रतिषेध
    • मानव का क्रय-विक्रय, बेगारी (बिना मजदूरी के काम) और इसी प्रकार के अन्य बलात्श्रम निषिद्ध हैं। यह उल्लंघन दंडनीय अपराध है।
    • अपवाद: राज्य सार्वजनिक प्रयोजनों के लिए अनिवार्य सेवा लागू कर सकता है (जैसे सैन्य सेवा), जिसमें धर्म, मूलवंश, जाति या वर्ग के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होगा।
  • अनुच्छेद 24: कारखानों आदि में बच्चों के नियोजन का प्रतिषेध
    • 14 वर्ष से कम आयु के किसी भी बच्चे को कारखाने, खान या किसी अन्य खतरनाक नियोजन में काम पर नहीं लगाया जाएगा।

D. धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार (Right to Freedom of Religion) - अनुच्छेद 25-28

  • अनुच्छेद 25: अंतःकरण की और धर्म के अबाध रूप से मानने, आचरण और प्रचार करने की स्वतंत्रता
    • सभी व्यक्तियों को अंतःकरण की स्वतंत्रता और किसी भी धर्म को मानने, आचरण करने और प्रचार करने का समान अधिकार है।
    • यह सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के अधीन है।
    • सिखों द्वारा कृपाण धारण करना इस अधिकार का अंग माना गया है।
  • अनुच्छेद 26: धार्मिक कार्यों के प्रबंध की स्वतंत्रता
    • प्रत्येक धार्मिक संप्रदाय को अपने धार्मिक मामलों का प्रबंधन करने, धार्मिक संस्थाओं की स्थापना और पोषण करने, जंगम और स्थावर संपत्ति अर्जित करने और ऐसी संपत्ति का विधि के अनुसार प्रशासन करने का अधिकार है।
  • अनुच्छेद 27: किसी विशिष्ट धर्म की अभिवृद्धि के लिए करों के संदाय से स्वतंत्रता
    • किसी भी व्यक्ति को ऐसे कर देने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा, जिनकी आय किसी विशिष्ट धर्म या धार्मिक संप्रदाय की अभिवृद्धि या पोषण में खर्च की जाती हो।
  • अनुच्छेद 28: कुछ शिक्षा संस्थाओं में धार्मिक शिक्षा या धार्मिक उपासना में उपस्थित होने से स्वतंत्रता
    • राज्य निधि से पूर्णतः पोषित किसी भी शिक्षा संस्था में कोई धार्मिक शिक्षा नहीं दी जाएगी।
    • राज्य द्वारा मान्यता प्राप्त या सहायता प्राप्त संस्थाओं में किसी भी व्यक्ति को उसकी सहमति के बिना धार्मिक शिक्षा में भाग लेने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा।

E. संस्कृति और शिक्षा संबंधी अधिकार (Cultural and Educational Rights) - अनुच्छेद 29-30

  • अनुच्छेद 29: अल्पसंख्यकों के हितों का संरक्षण
    • भारत के राज्यक्षेत्र में रहने वाले नागरिकों के किसी भी वर्ग को, जिसकी अपनी विशिष्ट भाषा, लिपि या संस्कृति है, उसे बनाए रखने का अधिकार होगा।
    • किसी भी नागरिक को राज्य द्वारा पोषित या राज्य निधि से सहायता प्राप्त किसी भी शिक्षा संस्था में धर्म, मूलवंश, जाति या भाषा के आधार पर प्रवेश से वंचित नहीं किया जाएगा।
  • अनुच्छेद 30: शिक्षा संस्थाओं की स्थापना और प्रशासन करने का अल्पसंख्यक वर्गों का अधिकार
    • सभी अल्पसंख्यक वर्गों (धर्म या भाषा पर आधारित) को अपनी पसंद की शिक्षा संस्थाएँ स्थापित करने और उनका प्रशासन करने का अधिकार होगा।
    • राज्य ऐसी संस्थाओं को सहायता देने में कोई भेदभाव नहीं करेगा।

F. संवैधानिक उपचारों का अधिकार (Right to Constitutional Remedies) - अनुच्छेद 32

  • डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने इस अधिकार को "संविधान की आत्मा और हृदय (Soul and Heart of the Constitution)" कहा है।
  • यह अधिकार मौलिक अधिकारों को प्रवर्तित कराने की गारंटी देता है। यदि किसी व्यक्ति के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होता है, तो वह सीधे सर्वोच्च न्यायालय (या उच्च न्यायालय अनुच्छेद 226 के तहत) में जा सकता है।
  • सर्वोच्च न्यायालय मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए पाँच प्रकार की रिटें (Writs) जारी कर सकता है:
    1. बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus): 'सशरीर प्रस्तुत करो'। यह रिट उस व्यक्ति के संबंध में जारी की जाती है जिसे हिरासत में लिया गया है, ताकि न्यायालय यह जांच सके कि हिरासत वैध है या नहीं।
    2. परमादेश (Mandamus): 'हम आदेश देते हैं'। यह रिट सार्वजनिक अधिकारियों को उनके कानूनी कर्तव्यों का पालन करने का आदेश देने के लिए जारी की जाती है।
    3. प्रतिषेध (Prohibition): 'रोकना'। यह रिट उच्च न्यायालय द्वारा निचली अदालतों को अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाने से रोकने के लिए जारी की जाती है।
    4. उत्प्रेषण (Certiorari): 'प्रमाणित होना' या 'सूचित किया जाना'। यह रिट उच्च न्यायालय द्वारा निचली अदालतों या न्यायाधिकरणों के किसी मामले को अपने पास मंगवाने या उनके निर्णय को रद्द करने के लिए जारी की जाती है।
    5. अधिकार पृच्छा (Quo Warranto): 'किस अधिकार से'। यह रिट किसी व्यक्ति द्वारा सार्वजनिक पद पर अवैध रूप से कब्जा करने से रोकने के लिए जारी की जाती है।

3. संपत्ति का अधिकार (Right to Property)

  • मूल संविधान में संपत्ति का अधिकार (अनुच्छेद 31) एक मौलिक अधिकार था।
  • 44वें संविधान संशोधन, 1978 द्वारा इसे मौलिक अधिकारों की सूची से हटा दिया गया।
  • अब यह अनुच्छेद 300A के तहत एक कानूनी (विधिक) अधिकार है। इसका अर्थ है कि किसी व्यक्ति को कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया के बिना उसकी संपत्ति से वंचित नहीं किया जा सकता।

4. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (National Human Rights Commission - NHRC)

  • भारत में मानवाधिकारों की सुरक्षा और संवर्धन के लिए 1993 में स्थापित एक स्वतंत्र वैधानिक निकाय।
  • यह मौलिक अधिकारों के उल्लंघन की जांच करता है और सरकार को सिफारिशें देता है।

5. राज्य के नीति-निदेशक सिद्धांत (Directive Principles of State Policy - DPSP)

  • संविधान के भाग IV में अनुच्छेद 36 से 51 तक वर्णित हैं।
  • ये सिद्धांत सरकार के लिए दिशा-निर्देश हैं, जिनका उद्देश्य सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र की स्थापना करना है।
  • गैर-न्यायसंगत (Non-justiciable): इन्हें न्यायालय द्वारा प्रवर्तित नहीं कराया जा सकता।
  • मौलिक अधिकारों से संबंध: यद्यपि ये न्यायसंगत नहीं हैं, फिर भी ये देश के शासन में मूलभूत हैं और कानून बनाते समय राज्य का कर्तव्य है कि वह इन सिद्धांतों को लागू करे। कई बार मौलिक अधिकारों और नीति-निदेशक सिद्धांतों के बीच टकराव की स्थिति उत्पन्न हुई है, जिसे न्यायालयों ने सुलझाने का प्रयास किया है।

कुछ महत्वपूर्ण नीति-निदेशक सिद्धांत:

  • अनुच्छेद 38: राज्य लोक कल्याण की अभिवृद्धि के लिए सामाजिक व्यवस्था बनाएगा।
  • अनुच्छेद 39: समान कार्य के लिए समान वेतन, धन के समान वितरण आदि।
  • अनुच्छेद 40: ग्राम पंचायतों का संगठन।
  • अनुच्छेद 44: नागरिकों के लिए एक समान सिविल संहिता।
  • अनुच्छेद 45: बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा (अब अनुच्छेद 21A के तहत मौलिक अधिकार भी)।
  • अनुच्छेद 46: अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य दुर्बल वर्गों के शिक्षा और अर्थ संबंधी हितों की अभिवृद्धि।
  • अनुच्छेद 48A: पर्यावरण का संरक्षण तथा संवर्धन और वन तथा वन्य जीवों की रक्षा।
  • अनुच्छेद 50: कार्यपालिका से न्यायपालिका का पृथक्करण।
  • अनुच्छेद 51: अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा की अभिवृद्धि।

6. मौलिक कर्तव्य (Fundamental Duties)

  • 42वें संविधान संशोधन, 1976 द्वारा संविधान के भाग IVA में अनुच्छेद 51A के तहत जोड़े गए।
  • ये स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिशों पर आधारित हैं।
  • मूल रूप से 10 मौलिक कर्तव्य थे, बाद में 86वें संविधान संशोधन, 2002 द्वारा 11वां मौलिक कर्तव्य जोड़ा गया।
  • गैर-न्यायसंगत: इन्हें न्यायालय द्वारा प्रवर्तित नहीं कराया जा सकता।
  • उद्देश्य: नागरिकों को अपने राष्ट्र और समाज के प्रति जिम्मेदारियों का स्मरण कराना।

11 मौलिक कर्तव्य:

  1. संविधान का पालन करे और उसके आदर्शों, संस्थाओं, राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान का आदर करे।
  2. स्वतंत्रता के लिए हमारे राष्ट्रीय आंदोलन को प्रेरित करने वाले उच्च आदर्शों को हृदय में संजोए रखे और उनका पालन करे।
  3. भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करे और उसे अक्षुण्ण रखे।
  4. देश की रक्षा करे और आह्वान किए जाने पर राष्ट्र की सेवा करे।
  5. भारत के सभी लोगों में समरसता और समान भ्रातृत्व की भावना का निर्माण करे, जो धर्म, भाषा और प्रदेश या वर्ग पर आधारित सभी भेदभावों से परे हो; ऐसी प्रथाओं का त्याग करे जो स्त्रियों के सम्मान के विरुद्ध हैं।
  6. हमारी सामासिक संस्कृति की गौरवशाली परंपरा का महत्व समझे और उसका परिरक्षण करे।
  7. प्राकृतिक पर्यावरण की, जिसके अंतर्गत वन, झील, नदी और वन्य जीव हैं, रक्षा करे और उसका संवर्धन करे तथा प्राणी मात्र के प्रति दया भाव रखे।
  8. वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानववाद और ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना का विकास करे।
  9. सार्वजनिक संपत्ति को सुरक्षित रखे और हिंसा से दूर रहे।
  10. व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधियों के सभी क्षेत्रों में उत्कर्ष की ओर बढ़ने का सतत प्रयास करे जिससे राष्ट्र निरंतर बढ़ते हुए प्रयत्न और उपलब्धि की नई ऊंचाइयों को छू ले।
  11. (86वें संशोधन, 2002 द्वारा जोड़ा गया): यदि माता-पिता या संरक्षक है, तो छह वर्ष से चौदह वर्ष तक की आयु के बीच के अपने बच्चे या, यथास्थिति, प्रतिपाल्य को शिक्षा के अवसर प्रदान करे।

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

1. भारतीय संविधान के किस भाग में मौलिक अधिकारों का वर्णन किया गया है?
a) भाग II
b) भाग III
c) भाग IV
d) भाग V

2. निम्नलिखित में से कौन सा मौलिक अधिकार डॉ. बी.आर. अम्बेडकर द्वारा "संविधान की आत्मा और हृदय" कहा गया है?
a) समता का अधिकार
b) स्वतंत्रता का अधिकार
c) संवैधानिक उपचारों का अधिकार
d) धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार

3. संपत्ति के अधिकार को मौलिक अधिकारों की सूची से किस संविधान संशोधन द्वारा हटाया गया?
a) 42वां संविधान संशोधन, 1976
b) 44वां संविधान संशोधन, 1978
c) 52वां संविधान संशोधन, 1985
d) 61वां संविधान संशोधन, 1989

4. 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों के लिए शिक्षा का अधिकार (अनुच्छेद 21A) किस संविधान संशोधन द्वारा जोड़ा गया?
a) 86वां संविधान संशोधन, 2002
b) 91वां संविधान संशोधन, 2003
c) 93वां संविधान संशोधन, 2005
d) 97वां संविधान संशोधन, 2011

5. निम्नलिखित में से कौन सी रिट 'सशरीर प्रस्तुत करो' के अर्थ में जारी की जाती है?
a) परमादेश
b) प्रतिषेध
c) बंदी प्रत्यक्षीकरण
d) उत्प्रेषण

6. भारतीय संविधान का कौन सा अनुच्छेद अस्पृश्यता का अंत करता है?
a) अनुच्छेद 14
b) अनुच्छेद 15
c) अनुच्छेद 16
d) अनुच्छेद 17

7. मौलिक कर्तव्य भारतीय संविधान में किस समिति की सिफारिश पर जोड़े गए थे?
a) बलवंत राय मेहता समिति
b) स्वर्ण सिंह समिति
c) सरकारीया आयोग
d) केलकर समिति

8. निम्नलिखित में से कौन सा मौलिक अधिकार आपातकाल के दौरान भी निलंबित नहीं किया जा सकता?
a) अनुच्छेद 19 (स्वतंत्रता का अधिकार)
b) अनुच्छेद 20 (अपराधों के लिए दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण)
c) अनुच्छेद 21 (प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण)
d) b और c दोनों

9. भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के तहत अल्पसंख्यकों को अपनी पसंद की शिक्षा संस्थाएँ स्थापित करने और उनका प्रशासन करने का अधिकार है?
a) अनुच्छेद 28
b) अनुच्छेद 29
c) अनुच्छेद 30
d) अनुच्छेद 31

10. राज्य के नीति-निदेशक सिद्धांत हैं:
a) न्यायसंगत
b) गैर-न्यायसंगत
c) कुछ मामलों में न्यायसंगत
d) केवल सर्वोच्च न्यायालय द्वारा न्यायसंगत


उत्तरमाला:

  1. b) भाग III
  2. c) संवैधानिक उपचारों का अधिकार
  3. b) 44वां संविधान संशोधन, 1978
  4. a) 86वां संविधान संशोधन, 2002
  5. c) बंदी प्रत्यक्षीकरण
  6. d) अनुच्छेद 17
  7. b) स्वर्ण सिंह समिति
  8. d) b और c दोनों
  9. c) अनुच्छेद 30
  10. b) गैर-न्यायसंगत

मुझे आशा है कि यह विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपको इस अध्याय को गहराई से समझने और आपकी सरकारी परीक्षा की तैयारी में सहायक होंगे। किसी भी संदेह या प्रश्न के लिए आप पूछ सकते हैं। शुभकामनाएँ!

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