Class 11 Political Science Notes Chapter 2 (स्वतंत्रता) – Rajniti Sidhant Book

प्रिय विद्यार्थियों,
आज हम कक्षा 11 की राजनीति विज्ञान की पुस्तक 'राजनीतिक सिद्धांत' के अध्याय 2 'स्वतंत्रता' का विस्तृत अध्ययन करेंगे। यह अध्याय न केवल आपकी अकादमिक समझ को गहरा करेगा, बल्कि विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
अध्याय 2: स्वतंत्रता
1. परिचय
स्वतंत्रता मानव समाज का एक केंद्रीय मूल्य है, जिसके बिना मानवीय गरिमा और आत्म-विकास की कल्पना नहीं की जा सकती। यह केवल बंधनों के अभाव का नाम नहीं, बल्कि उन परिस्थितियों की उपलब्धता भी है, जिनमें व्यक्ति अपनी क्षमताओं का पूर्ण विकास कर सके। नेल्सन मंडेला और आंग सान सू की जैसे व्यक्तित्वों ने स्वतंत्रता के लिए अपने जीवन का बलिदान दिया, जो हमें इसके महत्व को समझाता है।
2. स्वतंत्रता का अर्थ
- शाब्दिक अर्थ: 'स्वतंत्रता' शब्द अंग्रेजी के 'लिबर्टी' (Liberty) का हिंदी रूपांतर है, जो लैटिन शब्द 'लिवर' (Liber) से बना है, जिसका अर्थ है 'बंधनों का अभाव' या 'मुक्त होना'।
- संकीर्ण अर्थ (नकारात्मक अवधारणा): व्यक्ति पर किसी भी प्रकार के बाहरी प्रतिबंधों का अभाव। यह मानता है कि व्यक्ति को अपनी इच्छानुसार कुछ भी करने की छूट होनी चाहिए, बशर्ते वह दूसरों को नुकसान न पहुँचाए।
- व्यापक अर्थ (सकारात्मक अवधारणा): यह केवल प्रतिबंधों के अभाव से कहीं अधिक है। इसका अर्थ है ऐसी परिस्थितियों का होना, जिनमें व्यक्ति अपनी क्षमताओं का विकास कर सके। इसमें व्यक्ति के आत्म-विकास के लिए आवश्यक अवसरों और सुविधाओं की उपलब्धता शामिल है।
- जे.एस. मिल के अनुसार: "अपने शरीर और मस्तिष्क पर व्यक्ति संप्रभु है।"
- निष्कर्ष: स्वतंत्रता का अर्थ मनमानी करना नहीं है। यह समाज में रहते हुए कुछ नियमों और कानूनों के दायरे में रहकर अपने अधिकारों का उपभोग करना है, ताकि सभी व्यक्तियों की स्वतंत्रता सुनिश्चित हो सके।
3. स्वतंत्रता के आयाम (Dimensions of Freedom)
स्वतंत्रता को मुख्य रूप से दो आयामों में समझा जाता है:
क) नकारात्मक स्वतंत्रता (Negative Liberty):
- मुख्य विचार: इस अवधारणा के अनुसार, स्वतंत्रता का अर्थ है 'हस्तक्षेप का अभाव'। व्यक्ति के निजी क्षेत्र में राज्य या किसी अन्य बाहरी शक्ति का न्यूनतम हस्तक्षेप होना चाहिए।
- जोर: 'क्या नहीं करना चाहिए' पर। राज्य को व्यक्ति के जीवन में अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
- समर्थक विचारक: जॉन स्टुअर्ट मिल (J.S. Mill), आईज़ाया बर्लिन (Isaiah Berlin), एफ.ए. हायक (F.A. Hayek), मिल्टन फ्रीडमैन (Milton Friedman)।
- राज्य की भूमिका: राज्य का कार्य केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखना, बाहरी आक्रमण से रक्षा करना और न्याय प्रदान करना है। इसे 'अहस्तक्षेप का सिद्धांत' (Laissez-faire) भी कहा जाता है।
- उदाहरण: भाषण की स्वतंत्रता, धार्मिक स्वतंत्रता, व्यवसाय चुनने की स्वतंत्रता, आदि।
ख) सकारात्मक स्वतंत्रता (Positive Liberty):
- मुख्य विचार: यह अवधारणा मानती है कि केवल प्रतिबंधों का अभाव ही पर्याप्त नहीं है। व्यक्ति को अपनी क्षमताओं का विकास करने और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए कुछ आवश्यक शर्तों (जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, न्यूनतम आय) की आवश्यकता होती है। राज्य को इन शर्तों को उपलब्ध कराने में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
- जोर: 'क्या करना चाहिए' पर। राज्य को ऐसे सकारात्मक कदम उठाने चाहिए जो व्यक्ति को अपनी स्वतंत्रता का वास्तविक उपभोग करने में सक्षम बनाएँ।
- समर्थक विचारक: जीन-जैक्स रूसो (J.J. Rousseau), हीगल (Hegel), टी.एच. ग्रीन (T.H. Green), कार्ल मार्क्स (Karl Marx)।
- राज्य की भूमिका: राज्य को गरीबी, अशिक्षा, बीमारी और असमानता जैसी बाधाओं को दूर करने के लिए सक्रिय नीतियाँ अपनानी चाहिए, ताकि सभी नागरिक अपनी स्वतंत्रता का वास्तविक अर्थों में अनुभव कर सकें।
- उदाहरण: शिक्षा का अधिकार, काम का अधिकार, सामाजिक सुरक्षा का अधिकार।
4. हानि का सिद्धांत (Harm Principle) - जॉन स्टुअर्ट मिल
जे.एस. मिल ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक "ऑन लिबर्टी" (On Liberty) (1859) में 'हानि के सिद्धांत' का प्रतिपादन किया। इस सिद्धांत के अनुसार:
- उद्देश्य: व्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक नियंत्रण के बीच संतुलन स्थापित करना।
- सिद्धांत: राज्य या समाज किसी व्यक्ति के कार्यों में केवल तभी हस्तक्षेप कर सकता है, जब उसके कार्यों से दूसरों को हानि पहुँचती हो।
- कार्यों का वर्गीकरण: मिल ने व्यक्ति के कार्यों को दो श्रेणियों में बांटा:
- स्व-संबंधी कार्य (Self-regarding Actions): वे कार्य जिनका प्रभाव केवल कर्ता (व्यक्ति) पर पड़ता है और किसी अन्य व्यक्ति को सीधे तौर पर प्रभावित नहीं करते। इन कार्यों में राज्य या समाज को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
- उदाहरण: किसी व्यक्ति का निजी खान-पान, वेशभूषा, धार्मिक विश्वास।
- पर-संबंधी कार्य (Other-regarding Actions): वे कार्य जिनका प्रभाव दूसरों पर भी पड़ता है। यदि ऐसे कार्यों से दूसरों को हानि पहुँचती है, तो राज्य या समाज हस्तक्षेप कर सकता है।
- उदाहरण: सार्वजनिक स्थान पर शोर मचाना, किसी को शारीरिक चोट पहुँचाना, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाना।
- स्व-संबंधी कार्य (Self-regarding Actions): वे कार्य जिनका प्रभाव केवल कर्ता (व्यक्ति) पर पड़ता है और किसी अन्य व्यक्ति को सीधे तौर पर प्रभावित नहीं करते। इन कार्यों में राज्य या समाज को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
- मिल का तर्क: व्यक्ति को अपने स्व-संबंधी कार्यों में पूर्ण स्वतंत्रता होनी चाहिए, क्योंकि वह अपने शरीर और मस्तिष्क का एकमात्र संप्रभु है।
5. स्वतंत्रता के प्रकार (Types of Freedom)
- प्राकृतिक स्वतंत्रता (Natural Liberty): यह बिना किसी प्रतिबंध के, प्रकृति द्वारा प्रदत्त स्वतंत्रता की अवधारणा है। यह एक अव्यावहारिक विचार है, क्योंकि समाज में पूर्ण प्रतिबंधहीनता अराजकता ला सकती है।
- व्यक्तिगत स्वतंत्रता (Personal Liberty): व्यक्ति के निजी जीवन से संबंधित स्वतंत्रताएँ, जैसे खान-पान, वेशभूषा, विवाह, परिवार। इसमें राज्य का न्यूनतम हस्तक्षेप होता है।
- नागरिक स्वतंत्रता (Civil Liberty): एक नागरिक के रूप में व्यक्ति को प्राप्त स्वतंत्रताएँ, जो कानून द्वारा सुरक्षित होती हैं। इसमें जीवन का अधिकार, संपत्ति का अधिकार, भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, धार्मिक स्वतंत्रता, संघ बनाने की स्वतंत्रता आदि शामिल हैं।
- राजनीतिक स्वतंत्रता (Political Liberty): नागरिकों को शासन प्रणाली में भाग लेने का अधिकार। इसमें मतदान का अधिकार, चुनाव लड़ने का अधिकार, सार्वजनिक पद धारण करने का अधिकार, सरकार की आलोचना करने का अधिकार आदि शामिल हैं।
- आर्थिक स्वतंत्रता (Economic Liberty): व्यक्ति को अपनी आजीविका कमाने, शोषण से मुक्ति और न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति का अधिकार। इसका अर्थ है गरीबी, बेरोजगारी और आर्थिक असमानता से मुक्ति।
- नैतिक स्वतंत्रता (Moral Liberty): व्यक्ति की अपनी इच्छाओं और आवेगों पर नियंत्रण रखने की क्षमता। यह व्यक्ति की विवेकशीलता और आत्म-नियंत्रण से संबंधित है।
6. स्वतंत्रता के रक्षक/सुरक्षा उपाय (Safeguards of Freedom)
स्वतंत्रता को बनाए रखने और उसकी रक्षा के लिए निम्नलिखित उपाय आवश्यक हैं:
- लोकतांत्रिक शासन प्रणाली: नागरिकों को अधिकार और भागीदारी सुनिश्चित करती है।
- मौलिक अधिकारों की व्यवस्था: संविधान द्वारा प्रदत्त और न्यायपालिका द्वारा संरक्षित अधिकार।
- स्वतंत्र न्यायपालिका: कानूनों की व्याख्या करती है और अधिकारों का उल्लंघन होने पर सुरक्षा प्रदान करती है।
- कानून का शासन (Rule of Law): सभी नागरिकों के लिए समान कानून और विधि के समक्ष समानता।
- सत्ता का विकेंद्रीकरण: शक्ति को एक जगह केंद्रित होने से रोकना, ताकि निरंकुशता न पनपे।
- जागरूक जनमत और शिक्षा: नागरिक अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक हों।
- आर्थिक समानता: आर्थिक विषमताएँ स्वतंत्रता को सीमित करती हैं।
- प्रेस की स्वतंत्रता: सूचना और विचारों के मुक्त प्रवाह को सुनिश्चित करती है।
- स्थानीय स्वशासन: नागरिकों को अपने स्थानीय मुद्दों पर निर्णय लेने का अधिकार देता है।
7. स्वतंत्रता और समानता (Freedom and Equality)
- स्वतंत्रता और समानता को अक्सर एक-दूसरे का पूरक माना जाता है, न कि विरोधी।
- पूरक संबंध: वास्तविक स्वतंत्रता तभी संभव है जब समाज में एक हद तक समानता हो। अत्यधिक आर्थिक और सामाजिक असमानताएँ कुछ लोगों की स्वतंत्रता को अर्थहीन बना देती हैं।
- गरीबी, अशिक्षा और भेदभाव से ग्रस्त व्यक्ति के लिए स्वतंत्रता के अधिकार केवल कागजी होते हैं।
- लास्की, रूसो जैसे विचारकों ने समानता के बिना स्वतंत्रता को अधूरा माना है। समानता अवसरों की समानता सुनिश्चित करती है, जिससे सभी व्यक्ति अपनी स्वतंत्रता का उपभोग कर सकें।
8. स्वतंत्रता के प्रतीक
- नेल्सन मंडेला (Nelson Mandela): दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद (Apartheid) के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक। उन्होंने 28 वर्ष जेल में बिताए और अंततः 1994 में दक्षिण अफ्रीका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति बने। उनकी आत्मकथा का नाम "लॉन्ग वॉक टू फ्रीडम" (Long Walk to Freedom) है।
- आंग सान सू की (Aung San Suu Kyi): म्यांमार (बर्मा) में लोकतंत्र और मानवाधिकारों के लिए अहिंसक संघर्ष का प्रतीक। उन्होंने कई वर्षों तक नज़रबंदी में रहते हुए भी अपने देश में लोकतंत्र की स्थापना के लिए आवाज उठाई। उन्हें 1991 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
- महात्मा गांधी: भारत में ब्रिटिश उपनिवेशवाद से स्वतंत्रता के लिए अहिंसक आंदोलन का नेतृत्व किया। उन्होंने 'स्वराज' (स्व-शासन) की अवधारणा को बढ़ावा दिया, जिसका अर्थ केवल राजनीतिक स्वतंत्रता नहीं, बल्कि आत्म-नियंत्रण और नैतिक स्वतंत्रता भी था।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
-
'लिबर्टी' शब्द किस लैटिन शब्द से लिया गया है?
क) लिबरल
ख) लिवर
ग) लिबरेट
घ) लिबर्टीस -
"अपने शरीर और मस्तिष्क पर व्यक्ति संप्रभु है।" यह कथन किस विचारक का है?
क) आईज़ाया बर्लिन
ख) जॉन स्टुअर्ट मिल
ग) टी.एच. ग्रीन
घ) कार्ल मार्क्स -
नकारात्मक स्वतंत्रता के प्रमुख समर्थक कौन हैं?
क) रूसो
ख) हीगल
ग) एफ.ए. हायक
घ) कार्ल मार्क्स -
जे.एस. मिल की प्रसिद्ध पुस्तक का नाम क्या है जिसमें उन्होंने 'हानि का सिद्धांत' प्रतिपादित किया?
क) द रिपब्लिक
ख) सोशल कॉन्ट्रैक्ट
ग) ऑन लिबर्टी
घ) दास कैपिटल -
'हानि के सिद्धांत' के अनुसार, राज्य को व्यक्ति के किस प्रकार के कार्यों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए?
क) पर-संबंधी कार्य
ख) स्व-संबंधी कार्य
ग) आपराधिक कार्य
घ) राजनीतिक कार्य -
दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक कौन थे?
क) महात्मा गांधी
ख) आंग सान सू की
ग) नेल्सन मंडेला
घ) मार्टिन लूथर किंग जूनियर -
म्यांमार में लोकतंत्र के लिए संघर्ष करने वाली प्रमुख हस्ती कौन हैं?
क) इंदिरा गांधी
ख) बेनजीर भुट्टो
ग) आंग सान सू की
घ) मार्गरेट थैचर -
सकारात्मक स्वतंत्रता किस बात पर जोर देती है?
क) राज्य के न्यूनतम हस्तक्षेप पर
ख) बंधनों के पूर्ण अभाव पर
ग) व्यक्ति के आत्म-विकास के लिए आवश्यक शर्तों की उपलब्धता पर
घ) व्यक्ति को मनमानी करने की छूट पर -
निम्नलिखित में से कौन-सी स्वतंत्रता के रक्षक के रूप में नहीं देखी जाती है?
क) स्वतंत्र न्यायपालिका
ख) मौलिक अधिकार
ग) निरंकुश शासन
घ) कानून का शासन -
आर्थिक स्वतंत्रता का क्या अर्थ है?
क) बिना किसी प्रतिबंध के धन कमाने की स्वतंत्रता
ख) आजीविका कमाने, शोषण से मुक्ति और न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति
ग) केवल पूंजीपतियों की स्वतंत्रता
घ) राज्य द्वारा सभी आर्थिक गतिविधियों का नियंत्रण
उत्तर कुंजी:
- ख) लिवर
- ख) जॉन स्टुअर्ट मिल
- ग) एफ.ए. हायक
- ग) ऑन लिबर्टी
- ख) स्व-संबंधी कार्य
- ग) नेल्सन मंडेला
- ग) आंग सान सू की
- ग) व्यक्ति के आत्म-विकास के लिए आवश्यक शर्तों की उपलब्धता पर
- ग) निरंकुश शासन
- ख) आजीविका कमाने, शोषण से मुक्ति और न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति
मुझे आशा है कि यह विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपको 'स्वतंत्रता' अध्याय को गहराई से समझने और सरकारी परीक्षाओं की तैयारी में सहायक होंगे। अपनी पढ़ाई जारी रखें और किसी भी संदेह के लिए पूछने में संकोच न करें।