Class 11 Political Science Notes Chapter 3 (समानता) – Rajniti Sidhant Book

प्रिय विद्यार्थियों, आज हम राजनीति सिद्धांत की पुस्तक के अध्याय 3 'समानता' पर विस्तृत चर्चा करेंगे। यह अध्याय न केवल आपकी वैचारिक समझ को गहरा करेगा, बल्कि विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। आइए, इस अवधारणा के विभिन्न पहलुओं को गहराई से समझते हैं।
अध्याय 3: समानता
I. परिचय
- समानता आधुनिक राजनीतिक विचार का एक केंद्रीय आदर्श है।
- यह एक ऐसा मूल्य है जिसके लिए सदियों से संघर्ष होता रहा है।
- इसका अर्थ केवल यह नहीं है कि सभी मनुष्य समान हैं, बल्कि यह भी है कि वे समान व्यवहार और समान सम्मान के हकदार हैं।
- समानता के बिना स्वतंत्रता और न्याय का कोई वास्तविक अर्थ नहीं है।
II. समानता क्या है?
समानता का अर्थ दो मुख्य विचारों से है:
- विशेषाधिकारों का अभाव: किसी भी व्यक्ति को जन्म, जाति, धर्म, लिंग, नस्ल या अन्य किसी आधार पर विशेष अधिकार या सुविधाएँ नहीं मिलनी चाहिए। सभी को समान सम्मान और समान स्थिति प्राप्त होनी चाहिए।
- अवसर की समानता: सभी व्यक्तियों को अपनी क्षमताओं और प्रतिभाओं को विकसित करने तथा अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए समान अवसर मिलने चाहिए। इसका मतलब यह नहीं है कि सभी को समान परिणाम मिलेंगे, बल्कि यह है कि सभी के लिए प्रारंभिक बिंदु समान होने चाहिए।
- मानवीय गरिमा: समानता इस सिद्धांत पर आधारित है कि सभी मनुष्य अपनी मानवीयता के कारण समान मूल्य और गरिमा रखते हैं।
III. समानता के आयाम (Dimensions of Equality)
समानता को मुख्य रूप से तीन आयामों में देखा जाता है:
-
राजनीतिक समानता (Political Equality):
- यह सभी नागरिकों को समान नागरिकता का दर्जा प्रदान करती है।
- मुख्य तत्व:
- सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार: सभी वयस्क नागरिकों को बिना किसी भेदभाव के मतदान का अधिकार।
- चुनाव लड़ने का अधिकार: सभी नागरिकों को योग्यता के आधार पर चुनाव लड़ने का अधिकार।
- सार्वजनिक पद धारण करने का अधिकार: सभी नागरिकों को योग्यता के आधार पर सरकारी पदों पर नियुक्त होने का अधिकार।
- कानून के समक्ष समानता: सभी नागरिकों पर समान कानून लागू होना और उन्हें समान रूप से कानून का संरक्षण मिलना।
- एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य: प्रत्येक वोट का समान महत्व होना।
-
आर्थिक समानता (Economic Equality):
- इसका अर्थ यह नहीं है कि सभी के पास समान धन या संपत्ति हो, बल्कि यह है कि धन और आय की अत्यधिक असमानता को कम किया जाए।
- मुख्य तत्व:
- न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति: सभी को बुनियादी जरूरतें (भोजन, आवास, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा) मिलनी चाहिए।
- शोषण से मुक्ति: किसी भी व्यक्ति का आर्थिक शोषण नहीं होना चाहिए।
- अवसर की समानता: आर्थिक क्षेत्र में सभी को अपनी प्रतिभा विकसित करने और रोजगार प्राप्त करने के समान अवसर मिलने चाहिए।
- धन के संकेंद्रण को रोकना: कुछ व्यक्तियों के हाथों में धन के अत्यधिक जमाव को रोकना।
- आर्थिक समानता अक्सर सामाजिक समानता से जुड़ी होती है, क्योंकि आर्थिक असमानता सामाजिक असमानता को जन्म देती है।
-
सामाजिक समानता (Social Equality):
- यह समाज में जाति, धर्म, लिंग, नस्ल, जन्म स्थान, वर्ग आदि के आधार पर किसी भी प्रकार के भेदभाव का निषेध करती है।
- मुख्य तत्व:
- भेदभाव का अभाव: किसी भी व्यक्ति के साथ उसकी सामाजिक पहचान के आधार पर भेदभाव न हो।
- अस्पृश्यता का उन्मूलन: भारत जैसे देशों में अस्पृश्यता जैसी कुप्रथाओं का अंत।
- सार्वजनिक स्थानों तक समान पहुँच: सभी को सार्वजनिक कुओं, सड़कों, विद्यालयों, मंदिरों आदि तक समान पहुँच।
- शैक्षिक और सांस्कृतिक अवसरों की समानता: सभी को शिक्षा और सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लेने के समान अवसर।
- यह सुनिश्चित करती है कि समाज में किसी भी समूह को विशेषाधिकार प्राप्त न हों और किसी को भी हीन न समझा जाए।
IV. समानता को बढ़ावा कैसे दें? (How to Promote Equality?)
समानता को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न रणनीतियाँ अपनाई जाती हैं:
-
औपचारिक समानता स्थापित करना (Establishing Formal Equality):
- कानून के शासन द्वारा सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और कानून के समक्ष समान व्यवहार सुनिश्चित करना।
- भेदभावपूर्ण कानूनों और नीतियों को समाप्त करना।
- उदाहरण: भारत के संविधान का अनुच्छेद 14 (कानून के समक्ष समानता), अनुच्छेद 15 (भेदभाव का निषेध)।
-
विभेदक बर्ताव द्वारा समानता (Equality through Differential Treatment / Affirmative Action):
- यह स्वीकार करता है कि केवल औपचारिक समानता पर्याप्त नहीं है, क्योंकि ऐतिहासिक और सामाजिक असमानताओं के कारण कुछ समूह वंचित रह जाते हैं।
- सकारात्मक कार्यवाही (Positive Discrimination / Affirmative Action): वंचित समूहों को मुख्यधारा में लाने और उन्हें समान स्तर पर लाने के लिए राज्य द्वारा विशेष उपाय किए जाते हैं।
- आरक्षण (Reservation): शिक्षा, रोजगार और विधायिका में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित करना।
- विशेष सुविधाएँ: छात्रवृत्ति, विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम, मुफ्त शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएँ आदि प्रदान करना।
- तर्क: समान लोगों के साथ समान व्यवहार और असमान लोगों के साथ असमान व्यवहार करके ही वास्तविक समानता प्राप्त की जा सकती है।
-
समानता के लिए राज्य का हस्तक्षेप (State Intervention for Equality):
- राज्य आर्थिक और सामाजिक असमानताओं को कम करने के लिए सक्रिय भूमिका निभाता है।
- सार्वजनिक सुविधाओं का प्रावधान: सभी नागरिकों को शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, स्वच्छता जैसी बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध कराना।
- न्यूनतम मजदूरी कानून: श्रमिकों के शोषण को रोकने और उन्हें गरिमापूर्ण जीवन जीने के लिए न्यूनतम मजदूरी सुनिश्चित करना।
- भूमि सुधार: भूमि के असमान वितरण को ठीक करना।
- सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ: वृद्धावस्था पेंशन, बेरोजगारी भत्ता, खाद्य सुरक्षा आदि प्रदान करना।
V. समानता के मुख्य सिद्धांत
- समान लोगों के साथ समान व्यवहार: सभी व्यक्तियों को समान अधिकार और कानून के समक्ष समान व्यवहार मिलना चाहिए, बशर्ते उनकी योग्यता और क्षमताएँ समान हों।
- असमान लोगों के साथ असमान व्यवहार: विशेष परिस्थितियों वाले लोगों या वंचित समूहों के लिए विशेष प्रावधान करना ताकि वे समान स्तर पर आ सकें। यह सकारात्मक भेदभाव का आधार है।
- आवश्यकताओं के अनुसार व्यवहार: कुछ विचारकों (जैसे मार्क्सवादी) का मानना है कि लोगों को उनकी आवश्यकताओं के अनुसार संसाधन मिलने चाहिए, न कि केवल उनकी योग्यता या योगदान के अनुसार।
VI. समानता और स्वतंत्रता के बीच संबंध
- उदारवादी दृष्टिकोण: पारंपरिक उदारवादी स्वतंत्रता को प्राथमिकता देते हैं और समानता को अवसर की समानता तक सीमित रखते हैं। वे मानते हैं कि अत्यधिक समानता व्यक्तिगत स्वतंत्रता को बाधित कर सकती है।
- समाजवादी/मार्क्सवादी दृष्टिकोण: ये विचारक मानते हैं कि आर्थिक समानता के बिना स्वतंत्रता का कोई वास्तविक अर्थ नहीं है। वे स्वतंत्रता और समानता को पूरक मानते हैं।
- आधुनिक दृष्टिकोण: अधिकांश आधुनिक विचारक मानते हैं कि स्वतंत्रता और समानता एक-दूसरे के पूरक हैं। वास्तविक स्वतंत्रता के लिए कुछ हद तक समानता आवश्यक है, और समानता के लिए स्वतंत्रता भी महत्वपूर्ण है। अत्यधिक असमानता स्वतंत्रता को सीमित करती है।
VII. विभिन्न दृष्टिकोण
-
उदारवादी दृष्टिकोण:
- अवसर की समानता पर जोर देते हैं।
- राज्य के न्यूनतम हस्तक्षेप का समर्थन करते हैं।
- व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अधिकारों को प्राथमिकता देते हैं।
- बाजार अर्थव्यवस्था और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देते हैं।
- परिणाम की समानता के बजाय प्रक्रियात्मक समानता (कानून के समक्ष समानता) पर बल देते हैं।
-
मार्क्सवादी दृष्टिकोण:
- आर्थिक समानता पर अत्यधिक जोर देते हैं।
- वर्गविहीन और शोषणविहीन समाज की कल्पना करते हैं।
- निजी संपत्ति के उन्मूलन और उत्पादन के साधनों पर सामाजिक स्वामित्व की वकालत करते हैं।
- राज्य के व्यापक हस्तक्षेप का समर्थन करते हैं ताकि आर्थिक असमानता को दूर किया जा सके।
- परिणाम की समानता को महत्वपूर्ण मानते हैं।
-
नारीवादी दृष्टिकोण (Feminism):
- लैंगिक समानता पर विशेष जोर देते हैं।
- पितृसत्तात्मक समाज और लैंगिक भेदभाव की आलोचना करते हैं।
- महिलाओं को शिक्षा, रोजगार, राजनीतिक भागीदारी और सामाजिक जीवन में पुरुषों के समान अवसर और अधिकार मिलने चाहिए।
- महिलाओं के विरुद्ध हिंसा और भेदभाव को समाप्त करने की वकालत करते हैं।
VIII. निष्कर्ष
समानता एक जटिल और बहुआयामी अवधारणा है। इसे पूरी तरह से प्राप्त करना एक आदर्श है जिसके लिए निरंतर सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक प्रयासों की आवश्यकता होती है। विभिन्न आयामों में समानता प्राप्त करना एक प्रगतिशील प्रक्रिया है जो न्यायपूर्ण समाज के निर्माण के लिए अपरिहार्य है।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
-
निम्नलिखित में से कौन-सा समानता का एक आयाम नहीं है?
अ) राजनीतिक समानता
ब) आर्थिक समानता
स) सामाजिक समानता
द) व्यक्तिगत असमानता -
'कानून के समक्ष समानता' किस प्रकार की समानता का उदाहरण है?
अ) आर्थिक समानता
ब) सामाजिक समानता
स) राजनीतिक समानता
द) सांस्कृतिक समानता -
भारत के संविधान का कौन-सा अनुच्छेद अस्पृश्यता के उन्मूलन से संबंधित है?
अ) अनुच्छेद 14
ब) अनुच्छेद 15
स) अनुच्छेद 16
द) अनुच्छेद 17 -
सकारात्मक कार्यवाही (Affirmative Action) का मुख्य उद्देश्य क्या है?
अ) सभी के साथ समान व्यवहार करना
ब) वंचित समूहों को मुख्यधारा में लाना
स) व्यक्तिगत स्वतंत्रता को बढ़ावा देना
द) आर्थिक असमानता को बढ़ाना -
किस विचारक समूह का मानना है कि आर्थिक समानता के बिना स्वतंत्रता का कोई वास्तविक अर्थ नहीं है?
अ) उदारवादी
ब) मार्क्सवादी
स) अराजकतावादी
द) फासीवादी -
'एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य' का सिद्धांत किस समानता से संबंधित है?
अ) सामाजिक समानता
ब) आर्थिक समानता
स) राजनीतिक समानता
द) लैंगिक समानता -
न्यूनतम मजदूरी कानून किस प्रकार की समानता को बढ़ावा देने का एक तरीका है?
अ) राजनीतिक समानता
ब) आर्थिक समानता
स) सामाजिक समानता
द) औपचारिक समानता -
नारीवादी (Feminist) सिद्धांत मुख्य रूप से किस प्रकार की असमानता पर ध्यान केंद्रित करता है?
अ) आर्थिक असमानता
ब) राजनीतिक असमानता
स) लैंगिक असमानता
द) धार्मिक असमानता -
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन अवसर की समानता का सबसे अच्छा वर्णन करता है?
अ) सभी को समान धन मिलना चाहिए।
ब) सभी को अपनी प्रतिभा विकसित करने के समान प्रारंभिक बिंदु मिलने चाहिए।
स) सभी को समान परिणाम प्राप्त होने चाहिए।
द) सरकार को सभी के लिए समान रोजगार सुनिश्चित करना चाहिए। -
आरक्षण (Reservation) किस सिद्धांत पर आधारित है?
अ) समान लोगों के साथ समान व्यवहार
ब) असमान लोगों के साथ असमान व्यवहार
स) व्यक्तिगत योग्यता को अनदेखा करना
द) धन के समान वितरण
उत्तरमाला (MCQs):
- द) व्यक्तिगत असमानता
- स) राजनीतिक समानता
- द) अनुच्छेद 17
- ब) वंचित समूहों को मुख्यधारा में लाना
- ब) मार्क्सवादी
- स) राजनीतिक समानता
- ब) आर्थिक समानता
- स) लैंगिक असमानता
- ब) सभी को अपनी प्रतिभा विकसित करने के समान प्रारंभिक बिंदु मिलने चाहिए।
- ब) असमान लोगों के साथ असमान व्यवहार