Class 11 Political Science Notes Chapter 5 (अधिकार) – Rajniti Sidhant Book

प्रिय विद्यार्थियों,
आज हम राजनीति विज्ञान के 'राजनीति सिद्धांत' पुस्तक के अध्याय 5 'अधिकार' का विस्तृत अध्ययन करेंगे, जो आपकी सरकारी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस अध्याय में हम अधिकारों की अवधारणा, उनके प्रकार, महत्व और संरक्षण के विभिन्न पहलुओं को गहराई से समझेंगे।
अध्याय 5: अधिकार (Rights)
1. अधिकार क्या हैं?
अधिकार वे दावे हैं जिन्हें व्यक्ति समाज में गरिमापूर्ण और सम्मानजनक जीवन जीने के लिए आवश्यक मानता है। ये वे परिस्थितियाँ हैं जो व्यक्ति के सर्वोत्तम विकास के लिए अनिवार्य मानी जाती हैं। ये समाज द्वारा स्वीकृत और राज्य द्वारा संरक्षित दावे होते हैं।
- दावे: अधिकार मूलतः व्यक्ति के वे दावे हैं जो वह समाज और राज्य से करता है।
- नैतिक आधार: अधिकारों का एक नैतिक आधार होता है, अर्थात् वे सही और न्यायसंगत माने जाते हैं।
- सामाजिक स्वीकृति: किसी भी दावे को अधिकार बनने के लिए समाज की स्वीकृति आवश्यक है।
- राज्य का संरक्षण: अधिकारों को कानूनी रूप देने और उन्हें लागू करने के लिए राज्य का संरक्षण अनिवार्य है।
2. अधिकारों का महत्व:
- मानव गरिमा: अधिकार व्यक्ति को गरिमापूर्ण जीवन जीने में सक्षम बनाते हैं।
- व्यक्तित्व का विकास: ये व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक और नैतिक विकास के लिए आवश्यक वातावरण प्रदान करते हैं।
- स्वतंत्रता का आधार: अधिकार व्यक्ति को मनमानी सत्ता से बचाते हैं और उसे स्वतंत्रता का उपभोग करने की शक्ति देते हैं।
- सामाजिक न्याय: ये समाज में समानता और न्याय स्थापित करने में मदद करते हैं।
- राज्य की शक्ति पर नियंत्रण: अधिकार राज्य की निरंकुश शक्ति पर अंकुश लगाते हैं और उसे जवाबदेह बनाते हैं।
3. अधिकारों के स्रोत/आधार:
-
प्राकृतिक अधिकार (Natural Rights):
- यह सिद्धांत मानता है कि कुछ अधिकार व्यक्ति को प्रकृति या ईश्वर द्वारा जन्म से ही प्राप्त होते हैं, न कि राज्य द्वारा।
- जॉन लॉक जैसे विचारकों ने जीवन, स्वतंत्रता और संपत्ति के अधिकार को प्राकृतिक अधिकार माना।
- इन अधिकारों को राज्य छीन नहीं सकता, बल्कि उसे इनकी रक्षा करनी चाहिए।
- आलोचना: इस सिद्धांत की आलोचना इस आधार पर की जाती है कि "प्राकृतिक" क्या है, यह तय करना कठिन है और यह सामाजिक संदर्भ को अनदेखा करता है।
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मानवाधिकार (Human Rights):
- यह अवधारणा 20वीं सदी में विकसित हुई, विशेषकर द्वितीय विश्व युद्ध के बाद।
- मानवाधिकार वे अधिकार हैं जो मनुष्य होने के नाते सभी व्यक्तियों को प्राप्त होते हैं, चाहे उनकी राष्ट्रीयता, लिंग, जाति, धर्म या कोई अन्य स्थिति कुछ भी हो।
- ये सार्वभौमिक, अविच्छेद्य और अहस्तांतरणीय होते हैं।
- संयुक्त राष्ट्र ने 10 दिसंबर 1948 को 'मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा' (Universal Declaration of Human Rights - UDHR) को अपनाया, जिसमें नागरिक, राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों को शामिल किया गया।
-
कानूनी अधिकार (Legal Rights):
- ये वे अधिकार हैं जिन्हें राज्य के कानून द्वारा मान्यता और संरक्षण प्राप्त होता है।
- कानूनी अधिकार राज्य द्वारा बनाए जाते हैं, संशोधित किए जाते हैं और लागू किए जाते हैं।
- इनका उल्लंघन होने पर व्यक्ति न्यायालय की शरण ले सकता है।
- भारत में मौलिक अधिकार कानूनी अधिकारों का एक महत्वपूर्ण उदाहरण हैं।
4. अधिकारों के प्रकार:
अधिकारों को मुख्य रूप से तीन पीढ़ियों या श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है:
-
पहली पीढ़ी के अधिकार (नागरिक और राजनीतिक अधिकार):
- ये स्वतंत्रता और समानता पर केंद्रित हैं।
- उदाहरण:
- जीवन का अधिकार
- स्वतंत्रता का अधिकार (भाषण, अभिव्यक्ति, आवागमन, संघ बनाने की स्वतंत्रता)
- समानता का अधिकार (कानून के समक्ष समानता)
- मतदान का अधिकार
- चुनाव लड़ने का अधिकार
- न्यायपूर्ण सुनवाई का अधिकार
- सूचना का अधिकार
- ये राज्य की शक्ति पर नकारात्मक प्रतिबंध लगाते हैं (राज्य को क्या नहीं करना चाहिए)।
-
दूसरी पीढ़ी के अधिकार (आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकार):
- ये सामाजिक न्याय और कल्याण पर केंद्रित हैं।
- उदाहरण:
- काम का अधिकार
- शिक्षा का अधिकार
- स्वास्थ्य का अधिकार
- पर्याप्त जीवन स्तर का अधिकार (भोजन, आवास, वस्त्र)
- सामाजिक सुरक्षा का अधिकार
- अपनी संस्कृति और भाषा को बनाए रखने का अधिकार
- ये राज्य पर सकारात्मक दायित्व डालते हैं (राज्य को क्या करना चाहिए)।
-
तीसरी पीढ़ी के अधिकार (सामूहिक या एकजुटता अधिकार):
- ये वैश्विक एकजुटता और पर्यावरण संरक्षण पर केंद्रित हैं।
- उदाहरण:
- स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार
- शांति का अधिकार
- विकास का अधिकार
- आत्मनिर्णय का अधिकार
- मानवीय सहायता का अधिकार
- ये अधिकार अक्सर समूह या समुदाय के लिए होते हैं।
5. अधिकार और कर्तव्य (Rights and Duties):
अधिकारों के साथ कर्तव्य भी अविभाज्य रूप से जुड़े होते हैं।
- परस्पर संबंध: मेरे अधिकार अनिवार्य रूप से दूसरों के कर्तव्य होते हैं, और मेरे कर्तव्य दूसरों के अधिकारों की पूर्ति करते हैं।
- उदाहरण: यदि मुझे शिक्षा का अधिकार है, तो यह समाज और राज्य का कर्तव्य है कि वे मुझे शिक्षा प्रदान करें। साथ ही, मेरा भी कर्तव्य है कि मैं शिक्षा का सदुपयोग करूँ और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियाँ निभाऊँ।
- नागरिक कर्तव्य: जैसे संविधान का पालन करना, राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान का सम्मान करना, सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना आदि।
6. अधिकारों का संरक्षण:
अधिकारों को केवल मान्यता देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका प्रभावी संरक्षण भी आवश्यक है।
- संविधान: लोकतांत्रिक देशों में संविधान अधिकारों को मौलिक अधिकारों के रूप में सूचीबद्ध करता है, जिससे वे राज्य के लिए बाध्यकारी हो जाते हैं।
- न्यायपालिका: स्वतंत्र और निष्पक्ष न्यायपालिका अधिकारों की संरक्षक होती है। यदि राज्य या कोई अन्य व्यक्ति अधिकारों का उल्लंघन करता है, तो न्यायपालिका उन्हें बहाल कर सकती है।
- राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) और राज्य मानवाधिकार आयोग (SHRC): ये निकाय मानवाधिकारों के उल्लंघन की जाँच करते हैं और उनके संरक्षण के लिए सिफारिशें करते हैं।
- अंतर्राष्ट्रीय संधियाँ और संगठन: संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठन मानवाधिकारों के संरक्षण और संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
7. भारत में अधिकार:
भारतीय संविधान में अधिकारों को दो मुख्य श्रेणियों में रखा गया है:
-
मौलिक अधिकार (Fundamental Rights):
- संविधान के भाग III में अनुच्छेद 12 से 35 तक वर्णित हैं।
- ये न्यायोचित (Justiciable) हैं, अर्थात् इनके उल्लंघन पर व्यक्ति सीधे सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालय जा सकता है (अनुच्छेद 32 और 226)।
- ये राज्य की शक्ति पर नकारात्मक प्रतिबंध लगाते हैं।
- छह प्रमुख मौलिक अधिकार:
- समानता का अधिकार (अनुच्छेद 14-18)
- स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 19-22)
- शोषण के विरुद्ध अधिकार (अनुच्छेद 23-24)
- धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 25-28)
- संस्कृति और शिक्षा संबंधी अधिकार (अनुच्छेद 29-30)
- संवैधानिक उपचारों का अधिकार (अनुच्छेद 32)
- संपत्ति का अधिकार (अनुच्छेद 31) मूल रूप से मौलिक अधिकार था, लेकिन 44वें संशोधन (1978) द्वारा इसे हटाकर एक कानूनी अधिकार (अनुच्छेद 300A) बना दिया गया।
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राज्य के नीति निदेशक सिद्धांत (Directive Principles of State Policy - DPSP):
- संविधान के भाग IV में अनुच्छेद 36 से 51 तक वर्णित हैं।
- ये गैर-न्यायोचित (Non-Justiciable) हैं, अर्थात् इनके उल्लंघन पर न्यायालय की शरण नहीं ली जा सकती।
- ये राज्य के लिए आदर्श और लक्ष्य निर्धारित करते हैं कि उसे किस प्रकार की नीतियाँ बनानी चाहिए।
- ये राज्य पर सकारात्मक दायित्व डालते हैं।
- उदाहरण: काम का अधिकार, शिक्षा का अधिकार, समान कार्य के लिए समान वेतन, पोषाहार स्तर और जीवन स्तर को ऊपर उठाना।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs):
-
अधिकारों को समाज द्वारा स्वीकृत और राज्य द्वारा संरक्षित दावे किसने कहा है?
a) जॉन लॉक
b) लास्की
c) टी.एच. ग्रीन
d) बार्कर -
निम्नलिखित में से कौन सा अधिकार प्राकृतिक अधिकार सिद्धांत से संबंधित है?
a) शिक्षा का अधिकार
b) जीवन, स्वतंत्रता और संपत्ति का अधिकार
c) मतदान का अधिकार
d) स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार -
'मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा' (UDHR) को संयुक्त राष्ट्र द्वारा कब अपनाया गया था?
a) 24 अक्टूबर 1945
b) 10 दिसंबर 1948
c) 26 जनवरी 1950
d) 15 अगस्त 1947 -
भारतीय संविधान के किस भाग में मौलिक अधिकारों का वर्णन किया गया है?
a) भाग II
b) भाग III
c) भाग IV
d) भाग V -
निम्नलिखित में से कौन सा अधिकार भारतीय संविधान में मौलिक अधिकार नहीं है?
a) समानता का अधिकार
b) स्वतंत्रता का अधिकार
c) संपत्ति का अधिकार
d) शोषण के विरुद्ध अधिकार -
राज्य के नीति निदेशक सिद्धांत (DPSP) भारतीय संविधान के किस भाग में वर्णित हैं?
a) भाग II
b) भाग III
c) भाग IV
d) भाग V -
मौलिक अधिकारों के उल्लंघन पर व्यक्ति सीधे सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालय जा सकता है, यह किस अधिकार के तहत संभव है?
a) समानता का अधिकार
b) स्वतंत्रता का अधिकार
c) संवैधानिक उपचारों का अधिकार
d) धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार -
निम्नलिखित में से कौन सा अधिकार दूसरी पीढ़ी के अधिकारों की श्रेणी में आता है?
a) मतदान का अधिकार
b) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
c) काम का अधिकार
d) न्यायपूर्ण सुनवाई का अधिकार -
44वें संविधान संशोधन (1978) द्वारा किस अधिकार को मौलिक अधिकारों की सूची से हटाकर कानूनी अधिकार बना दिया गया?
a) शिक्षा का अधिकार
b) संपत्ति का अधिकार
c) निजता का अधिकार
d) शोषण के विरुद्ध अधिकार -
अधिकारों के साथ क्या अविभाज्य रूप से जुड़ा होता है?
a) धन
b) शक्ति
c) कर्तव्य
d) विशेषाधिकार
उत्तरमाला:
- b) लास्की
- b) जीवन, स्वतंत्रता और संपत्ति का अधिकार
- b) 10 दिसंबर 1948
- b) भाग III
- c) संपत्ति का अधिकार
- c) भाग IV
- c) संवैधानिक उपचारों का अधिकार
- c) काम का अधिकार
- b) संपत्ति का अधिकार
- c) कर्तव्य
मुझे आशा है कि ये विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपकी परीक्षा की तैयारी में सहायक होंगे। किसी भी अन्य प्रश्न के लिए आप पूछ सकते हैं।