Class 11 Political Science Notes Chapter 6 (नागरिकता) – Rajniti Sidhant Book

प्रिय विद्यार्थियों,
आज हम कक्षा 11 की राजनीति विज्ञान की पाठ्यपुस्तक 'राजनीति सिद्धांत' के अध्याय 6 'नागरिकता' का विस्तृत अध्ययन करेंगे। यह अध्याय न केवल आपकी बोर्ड परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि विभिन्न सरकारी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी अत्यंत प्रासंगिक है। आइए, इस अवधारणा को गहराई से समझें।
अध्याय 6: नागरिकता (Citizenship)
1. परिचय: नागरिकता का अर्थ और महत्व
आधुनिक विश्व में, राज्य और व्यक्ति के बीच संबंध का निर्धारण नागरिकता के माध्यम से होता है। नागरिकता केवल एक कानूनी अवधारणा नहीं है, बल्कि यह व्यक्तियों को एक राजनीतिक समुदाय में पूर्ण और समान सदस्यता प्रदान करती है। यह व्यक्तियों को अधिकार, कर्तव्य और पहचान देती है।
2. नागरिक और नागरिकता
- नागरिक (Citizen): वह व्यक्ति जो किसी राज्य का पूर्ण और समान सदस्य होता है, उसे उस राज्य का नागरिक कहते हैं। उसे उस राज्य के सभी नागरिक, राजनीतिक और सामाजिक अधिकार प्राप्त होते हैं और वह राज्य के प्रति कुछ कर्तव्यों का पालन करता है।
- नागरिकता (Citizenship): यह एक कानूनी, राजनीतिक और सामाजिक स्थिति है जो किसी व्यक्ति को एक विशेष राज्य या राजनीतिक समुदाय से जोड़ती है। यह व्यक्ति को उस समुदाय में पूर्ण और समान सदस्यता का दर्जा देती है।
3. नागरिकता की अवधारणा
नागरिकता की अवधारणा को तीन मुख्य आयामों में समझा जा सकता है:
- कानूनी आयाम: नागरिकता व्यक्ति को कुछ कानूनी अधिकार (जैसे वोट देने का अधिकार, सार्वजनिक पद धारण करने का अधिकार, देश में रहने का अधिकार) प्रदान करती है और कुछ कानूनी कर्तव्यों (जैसे कर चुकाना, कानून का पालन करना) को निर्धारित करती है।
- राजनीतिक आयाम: यह व्यक्ति को राजनीतिक प्रक्रिया में भाग लेने की अनुमति देती है, जैसे चुनाव में मतदान करना, चुनाव लड़ना, सार्वजनिक नीतियों को प्रभावित करना।
- सामाजिक आयाम: यह व्यक्ति को समाज में एक पहचान और समुदाय की भावना प्रदान करती है। यह सामाजिक समानता और समावेश को बढ़ावा देती है।
4. पूर्ण और समान सदस्यता
नागरिकता का आदर्श सभी नागरिकों के लिए पूर्ण और समान सदस्यता है। इसका अर्थ है कि सभी नागरिकों को बिना किसी भेदभाव के समान अधिकार प्राप्त होने चाहिए और उन्हें समाज में समान अवसर मिलने चाहिए।
- नागरिक अधिकार: जीवन का अधिकार, स्वतंत्रता का अधिकार, संपत्ति का अधिकार, धर्म का अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता आदि।
- राजनीतिक अधिकार: मतदान का अधिकार, चुनाव लड़ने का अधिकार, राजनीतिक दल बनाने का अधिकार, सरकार की आलोचना करने का अधिकार आदि।
- सामाजिक अधिकार: शिक्षा का अधिकार, स्वास्थ्य सेवा का अधिकार, न्यूनतम मजदूरी का अधिकार, आवास का अधिकार आदि।
5. समान अधिकार बनाम विशेष अधिकार
नागरिकता का आदर्श सभी के लिए समान अधिकार है, लेकिन कई बार समाज में कुछ समूह (जैसे अल्पसंख्यक, आदिवासी, महिलाएँ, विकलांग व्यक्ति) ऐतिहासिक या सामाजिक कारणों से वंचित या हाशिए पर होते हैं। ऐसे में, इन समूहों को मुख्यधारा में लाने और वास्तविक समानता प्राप्त करने के लिए विशेष अधिकारों या सकारात्मक भेदभाव (Positive Discrimination) की आवश्यकता महसूस होती है।
- तर्क: विशेष अधिकार असमानता को दूर करने और सभी को समान धरातल पर लाने के लिए आवश्यक हैं। यह समानता के सिद्धांत का उल्लंघन नहीं, बल्कि उसे प्राप्त करने का एक साधन है।
- उदाहरण: भारत में अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण का प्रावधान।
6. विश्व नागरिकता (Global Citizenship)
भूमंडलीकरण के युग में, राष्ट्रीय सीमाओं के पार भी नागरिकता की अवधारणा पर विचार किया जा रहा है। विश्व नागरिकता का अर्थ है कि व्यक्ति केवल अपने राष्ट्र का सदस्य नहीं, बल्कि एक वृहद वैश्विक समुदाय का भी सदस्य है।
- आवश्यकता: पर्यावरण संरक्षण, मानवाधिकारों का सम्मान, गरीबी उन्मूलन, आतंकवाद का मुकाबला जैसी वैश्विक समस्याओं का समाधान राष्ट्रीय स्तर पर संभव नहीं है। इसके लिए वैश्विक सहयोग और साझा जिम्मेदारी की भावना आवश्यक है।
- चुनौतियाँ: राष्ट्रीय संप्रभुता का मुद्दा, विभिन्न संस्कृतियों और राजनीतिक प्रणालियों के बीच समन्वय, वैश्विक संस्थानों की सीमित शक्ति।
- संभावनाएँ: अंतर्राष्ट्रीय सहयोग में वृद्धि, मानवाधिकारों की सार्वभौमिक स्वीकृति, वैश्विक शांति और सुरक्षा को बढ़ावा।
7. राष्ट्रीयता और नागरिकता में अंतर
- राष्ट्रीयता (Nationality): यह एक सांस्कृतिक, भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक जुड़ाव है जो व्यक्ति को एक विशेष राष्ट्र या सांस्कृतिक समूह से जोड़ता है। यह भाषा, धर्म, संस्कृति, इतिहास और साझा पहचान पर आधारित हो सकती है। यह जन्म से प्राप्त होती है और इसे बदला नहीं जा सकता है (हालांकि व्यक्ति एक से अधिक राष्ट्रीयता महसूस कर सकता है)।
- नागरिकता (Citizenship): यह एक कानूनी और राजनीतिक दर्जा है जो व्यक्ति को एक विशेष राज्य से जोड़ता है। यह राज्य द्वारा प्रदान की जाती है और इसे बदला जा सकता है (जैसे एक देश की नागरिकता छोड़कर दूसरे देश की लेना)।
8. भारत में नागरिकता
भारत का संविधान नागरिकता के संबंध में विस्तृत प्रावधान करता है।
- संवैधानिक प्रावधान:
- भाग II (अनुच्छेद 5 से 11): भारतीय संविधान के इस भाग में नागरिकता से संबंधित प्रावधान दिए गए हैं।
- अनुच्छेद 5: संविधान के प्रारंभ पर नागरिकता (26 जनवरी 1950)।
- अनुच्छेद 6: पाकिस्तान से भारत आने वाले कुछ व्यक्तियों के नागरिकता के अधिकार।
- अनुच्छेद 7: पाकिस्तान को प्रवास करने वाले कुछ व्यक्तियों के नागरिकता के अधिकार।
- अनुच्छेद 8: भारत के बाहर रहने वाले भारतीय मूल के कुछ व्यक्तियों के नागरिकता के अधिकार।
- अनुच्छेद 9: स्वेच्छा से विदेशी राज्य की नागरिकता प्राप्त करने वाले व्यक्तियों का नागरिक न होना।
- अनुच्छेद 10: नागरिकता के अधिकारों का बना रहना।
- अनुच्छेद 11: संसद को नागरिकता के संबंध में कानून बनाने की शक्ति।
- नागरिकता अधिनियम, 1955: संसद ने अनुच्छेद 11 के तहत इस अधिनियम को पारित किया, जो भारतीय नागरिकता प्राप्त करने और समाप्त करने के तरीकों का विस्तृत वर्णन करता है।
- नागरिकता प्राप्त करने के तरीके:
- जन्म से (By Birth): भारत में 26 जनवरी 1950 के बाद या 1 जुलाई 1987 से पहले जन्मा कोई भी व्यक्ति भारतीय नागरिक है। 1 जुलाई 1987 के बाद जन्मा व्यक्ति तभी नागरिक होगा यदि उसके जन्म के समय उसके माता-पिता में से कोई एक भारतीय नागरिक हो।
- वंश के आधार पर (By Descent): भारत के बाहर 26 जनवरी 1950 के बाद जन्मा कोई व्यक्ति भारतीय नागरिक हो सकता है यदि उसके जन्म के समय उसके पिता भारतीय नागरिक हों। (3 दिसंबर 2004 के बाद, माता या पिता में से कोई एक भारतीय नागरिक होना चाहिए)।
- पंजीकरण द्वारा (By Registration): भारतीय मूल के व्यक्ति, भारतीय नागरिकों से विवाह करने वाले व्यक्ति, या कुछ अन्य श्रेणियों के व्यक्ति आवेदन करके पंजीकरण द्वारा नागरिकता प्राप्त कर सकते हैं।
- देशीकरण द्वारा (By Naturalisation): कोई भी विदेशी व्यक्ति जो भारत में कम से कम 12 वर्ष रहा हो (या केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित अन्य शर्तें पूरी करता हो), आवेदन करके देशीयकरण द्वारा नागरिकता प्राप्त कर सकता है।
- क्षेत्र समाविष्टि द्वारा (By Incorporation of Territory): यदि भारत किसी नए क्षेत्र को अपने में मिलाता है, तो उस क्षेत्र के निवासियों को भारत की नागरिकता मिल जाती है।
- नागरिकता समाप्त होने के तरीके:
- परित्याग द्वारा (By Renunciation): कोई भी भारतीय नागरिक स्वेच्छा से अपनी नागरिकता त्याग सकता है।
- बर्खास्तगी द्वारा (By Termination): यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी अन्य देश की नागरिकता ग्रहण कर लेता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता स्वतः समाप्त हो जाती है।
- वंचन द्वारा (By Deprivation): केंद्र सरकार कुछ विशेष परिस्थितियों में (जैसे धोखाधड़ी से नागरिकता प्राप्त करना, संविधान के प्रति अनादर दिखाना, युद्ध के दौरान शत्रु की सहायता करना) किसी व्यक्ति की नागरिकता छीन सकती है।
- नागरिकता प्राप्त करने के तरीके:
- एकल नागरिकता (Single Citizenship): भारत में एकल नागरिकता का प्रावधान है, जिसका अर्थ है कि कोई भी व्यक्ति केवल भारतीय संघ का नागरिक होता है, किसी राज्य का नहीं। यह राष्ट्रीय एकता और अखंडता को बढ़ावा देती है।
- प्रवासी भारतीयों की स्थिति (PIO, OCI):
- भारतीय मूल के व्यक्ति (PIO - Persons of Indian Origin): वे व्यक्ति जो स्वयं या जिनके पूर्वज भारतीय मूल के थे, लेकिन अब किसी अन्य देश के नागरिक हैं।
- भारत के प्रवासी नागरिक (OCI - Overseas Citizen of India): यह एक विशेष दर्जा है जो भारत सरकार द्वारा भारतीय मूल के व्यक्तियों को दिया जाता है ताकि उन्हें भारत में कुछ अधिकार (जैसे वीजा-मुक्त यात्रा, संपत्ति खरीदने का अधिकार) मिल सकें, लेकिन वे भारत के नागरिक नहीं होते और उन्हें मतदान का अधिकार नहीं होता।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
-
भारतीय संविधान के किस भाग में नागरिकता से संबंधित प्रावधान हैं?
a) भाग I
b) भाग II
c) भाग III
d) भाग IV -
भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955 के अनुसार, नागरिकता प्राप्त करने के कितने तरीके हैं?
a) 3
b) 4
c) 5
d) 6 -
निम्न में से कौन-सा नागरिकता समाप्त होने का एक तरीका नहीं है?
a) परित्याग द्वारा
b) बर्खास्तगी द्वारा
c) देशीकरण द्वारा
d) वंचन द्वारा -
भारत में किस प्रकार की नागरिकता का प्रावधान है?
a) दोहरी नागरिकता
b) एकल नागरिकता
c) बहुल नागरिकता
d) इनमें से कोई नहीं -
विश्व नागरिकता की अवधारणा किस कारण से महत्वपूर्ण हो गई है?
a) राष्ट्रीय सीमाओं का मजबूत होना
b) भूमंडलीकरण और वैश्विक समस्याएँ
c) स्थानीय सरकारों का उदय
d) धार्मिक कट्टरता का बढ़ना -
नागरिकता का अर्थ केवल कानूनी दर्जा नहीं, बल्कि एक समुदाय में ______ है।
a) केवल राजनीतिक भागीदारी
b) केवल सामाजिक पहचान
c) पूर्ण और समान सदस्यता
d) केवल आर्थिक लाभ -
भारतीय संविधान का कौन सा अनुच्छेद संसद को नागरिकता के संबंध में कानून बनाने की शक्ति देता है?
a) अनुच्छेद 5
b) अनुच्छेद 8
c) अनुच्छेद 10
d) अनुच्छेद 11 -
यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी अन्य देश की नागरिकता ग्रहण कर लेता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता किस तरीके से समाप्त हो जाती है?
a) परित्याग द्वारा
b) बर्खास्तगी द्वारा
c) वंचन द्वारा
d) देशीकरण द्वारा -
राष्ट्रीयता मुख्यतः किस प्रकार का जुड़ाव है?
a) कानूनी
b) राजनीतिक
c) सांस्कृतिक और भावनात्मक
d) आर्थिक -
भारत में अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लिए आरक्षण का प्रावधान नागरिकता के किस पहलू से संबंधित है?
a) केवल राजनीतिक अधिकार
b) समान अधिकार बनाम विशेष अधिकार
c) विश्व नागरिकता
d) नागरिकता का परित्याग
उत्तरमाला (MCQs):
- b) भाग II
- c) 5
- c) देशीकरण द्वारा (यह नागरिकता प्राप्त करने का तरीका है)
- b) एकल नागरिकता
- b) भूमंडलीकरण और वैश्विक समस्याएँ
- c) पूर्ण और समान सदस्यता
- d) अनुच्छेद 11
- b) बर्खास्तगी द्वारा
- c) सांस्कृतिक और भावनात्मक
- b) समान अधिकार बनाम विशेष अधिकार
मुझे आशा है कि ये विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपको 'नागरिकता' अध्याय को गहराई से समझने और सरकारी परीक्षाओं की तैयारी में सहायक होंगे। किसी भी अन्य सहायता के लिए आप पूछ सकते हैं।