Class 11 Political Science Notes Chapter 7 (राष्ट्रवाद) – Rajniti Sidhant Book

प्रिय विद्यार्थियों,
आज हम राजनीति विज्ञान के अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय 'राष्ट्रवाद' पर विस्तृत चर्चा करेंगे। यह अध्याय न केवल आपकी अकादमिक समझ को विकसित करेगा, बल्कि विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी अत्यंत उपयोगी है। आइए, इस अवधारणा को गहराई से समझते हैं।
अध्याय 7: राष्ट्रवाद (Nationalism)
1. राष्ट्रवाद क्या है?
राष्ट्रवाद एक ऐसी भावना है जिसमें व्यक्ति अपने राष्ट्र के प्रति निष्ठा, भक्ति और प्रेम महसूस करता है। यह एक सामूहिक पहचान और एकजुटता की भावना है जो लोगों को एक साझा इतिहास, संस्कृति, भाषा, या क्षेत्र के आधार पर एक साथ बांधती है। राष्ट्रवाद की भावना लोगों को यह विश्वास दिलाती है कि वे एक विशिष्ट राष्ट्र के सदस्य हैं और उन्हें अपने राष्ट्र के हितों को सर्वोपरि रखना चाहिए। यह अक्सर राजनीतिक स्वायत्तता और आत्म-शासन की इच्छा से जुड़ा होता है।
2. राष्ट्र और राष्ट्रवाद के घटक/विशेषताएँ:
राष्ट्रवाद की भावना कुछ विशिष्ट घटकों पर आधारित होती है जो एक समूह को राष्ट्र के रूप में परिभाषित करते हैं:
- साझा विश्वास और सामूहिक पहचान: लोग यह महसूस करते हैं कि वे एक विशिष्ट समूह से संबंधित हैं और उनकी एक साझा पहचान है जो उन्हें दूसरों से अलग करती है।
- साझा इतिहास और सामूहिक स्मृतियाँ: एक राष्ट्र के लोग अक्सर एक साझा अतीत, सामूहिक अनुभवों, नायकों, संघर्षों और उत्सवों से जुड़े होते हैं। ये स्मृतियाँ उनकी पहचान को मजबूत करती हैं।
- साझा संस्कृति: भाषा, धर्म, रीति-रिवाज, कला, साहित्य, संगीत और परंपराएँ अक्सर एक राष्ट्र को एकजुट करती हैं। हालांकि, यह आवश्यक नहीं कि एक राष्ट्र के सभी लोगों की एक ही भाषा या धर्म हो (जैसे भारत)।
- भौगोलिक क्षेत्र: एक निश्चित भौगोलिक क्षेत्र पर दावा या उस क्षेत्र से जुड़ाव राष्ट्र की भावना को मजबूत करता है।
- राजनीतिक आकांक्षाएँ: राष्ट्रवाद अक्सर आत्म-शासन, संप्रभुता और अपने भाग्य का निर्धारण स्वयं करने की इच्छा से जुड़ा होता है, जिसे 'आत्म-निर्णय का अधिकार' कहते हैं।
- साझा हित: लोग महसूस करते हैं कि उनके सामूहिक हित जुड़े हुए हैं और एक साथ रहने से वे बेहतर तरीके से प्राप्त किए जा सकते हैं।
3. राष्ट्रवाद के विभिन्न रूप/प्रकार:
राष्ट्रवाद विभिन्न रूपों में प्रकट होता है, जिनके प्रभाव भिन्न-भिन्न होते हैं:
- उदारवादी राष्ट्रवाद: यह लोकतांत्रिक मूल्यों, नागरिक अधिकारों, सहिष्णुता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर आधारित होता है। यह राष्ट्रों के बीच शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और सहयोग का समर्थन करता है।
- सांस्कृतिक राष्ट्रवाद: यह साझा संस्कृति, भाषा, धर्म, परंपराओं और विरासत पर अत्यधिक जोर देता है। यह अक्सर अपनी संस्कृति को श्रेष्ठ मानने की ओर प्रवृत्त होता है।
- आक्रामक/विस्तारवादी राष्ट्रवाद: यह अपने राष्ट्र को अन्य राष्ट्रों से श्रेष्ठ मानता है और अक्सर अन्य राष्ट्रों पर प्रभुत्व स्थापित करने या उनके क्षेत्रों का विस्तार करने की इच्छा रखता है। यह युद्ध और संघर्ष का कारण बन सकता है (जैसे नाज़ी जर्मनी)।
- उपनिवेशवाद विरोधी राष्ट्रवाद: यह उपनिवेशवादी शासन से मुक्ति पाने और अपनी स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए संघर्ष करने वाले राष्ट्रों में विकसित होता है। भारत का स्वतंत्रता संग्राम इसका एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
- राज्य-आधारित राष्ट्रवाद: जहाँ राष्ट्र की पहचान राज्य की सीमाओं और उसके कानूनों से परिभाषित होती है, न कि किसी विशेष जातीय या सांस्कृतिक समूह से।
4. राष्ट्रवाद के सकारात्मक पहलू/गुण:
राष्ट्रवाद के कई सकारात्मक प्रभाव हो सकते हैं:
- एकता और एकजुटता: यह लोगों को एक सूत्र में बांधता है और उनमें सामूहिक पहचान की भावना पैदा करता है।
- प्रेरणा और बलिदान: यह लोगों को अपने राष्ट्र के लिए त्याग और बलिदान करने के लिए प्रेरित करता है।
- स्वतंत्रता संग्राम: उपनिवेशवादी शासन से मुक्ति पाने और अपनी संप्रभुता स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- सामाजिक सुधार: एक राष्ट्र के भीतर सामाजिक न्याय और समानता को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित कर सकता है।
- विकास: राष्ट्रीय गौरव की भावना आर्थिक और तकनीकी विकास को बढ़ावा दे सकती है।
5. राष्ट्रवाद के नकारात्मक पहलू/दोष:
राष्ट्रवाद के कुछ नकारात्मक परिणाम भी हो सकते हैं:
- विभाजन और संघर्ष: यह 'हम' बनाम 'वे' की भावना को बढ़ावा दे सकता है, जिससे आंतरिक और बाहरी संघर्ष उत्पन्न हो सकते हैं।
- युद्ध और हिंसा: आक्रामक राष्ट्रवाद अक्सर युद्धों, क्षेत्रीय विवादों और जातीय हिंसा को जन्म देता है।
- संकीर्णता और असहिष्णुता: यह अन्य संस्कृतियों, धर्मों या राष्ट्रों के प्रति असहिष्णुता और घृणा को बढ़ावा दे सकता है।
- अल्पसंख्यकों का दमन: बहुसंख्यक राष्ट्रवाद अक्सर अल्पसंख्यक समूहों के अधिकारों का हनन करता है और उन्हें हाशिए पर धकेल सकता है।
- साम्राज्यवाद और उपनिवेशवाद: अपने राष्ट्र के हितों को सर्वोच्च मानकर अन्य राष्ट्रों पर प्रभुत्व स्थापित करने की प्रवृत्ति।
6. आत्म-निर्णय का अधिकार (Right to Self-Determination):
आत्म-निर्णय का अधिकार यह है कि किसी राष्ट्र या समुदाय को अपनी राजनीतिक स्थिति को स्वतंत्र रूप से निर्धारित करने का अधिकार है, बिना किसी बाहरी हस्तक्षेप के।
- महत्व: यह अधिकार उपनिवेशवाद से मुक्ति, संप्रभुता और लोकतांत्रिक शासन के लिए महत्वपूर्ण है।
- चुनौतियाँ: एक राष्ट्र-राज्य के भीतर कई उप-समूहों द्वारा आत्म-निर्णय की मांगें अलगाववाद को जन्म दे सकती हैं, जिससे राज्यों की क्षेत्रीय अखंडता और अंतर्राष्ट्रीय स्थिरता को खतरा हो सकता है। यह परिभाषित करना भी मुश्किल है कि कौन सा समूह 'राष्ट्र' के रूप में आत्म-निर्णय का हकदार है।
7. राष्ट्रवाद और बहुसंस्कृतिवाद:
बहुसंस्कृतिवाद एक ऐसी नीति या विचार है जो एक ही राष्ट्र के भीतर विभिन्न संस्कृतियों, भाषाओं और धर्मों के सह-अस्तित्व और सम्मान को बढ़ावा देता है।
- संबंध: आधुनिक राष्ट्रों में अक्सर विविध सांस्कृतिक समूह होते हैं। समावेशी राष्ट्रवाद बहुसंस्कृतिवाद को अपनाता है, जबकि संकीर्ण राष्ट्रवाद इसे चुनौती के रूप में देख सकता है।
- चुनौतियाँ: राष्ट्रीय एकता बनाए रखते हुए सांस्कृतिक विविधता का सम्मान करना एक जटिल कार्य है।
8. भारत में राष्ट्रवाद:
भारतीय राष्ट्रवाद एक अनूठी अवधारणा है, जो उपनिवेशवाद विरोधी संघर्ष से उभरी है:
- उपनिवेशवाद विरोधी राष्ट्रवाद: भारत में राष्ट्रवाद ब्रिटिश शासन के खिलाफ एकजुट होने की भावना से पैदा हुआ था।
- समावेशी और धर्मनिरपेक्ष: भारतीय राष्ट्रवाद किसी एक धर्म, भाषा या संस्कृति पर आधारित नहीं है, बल्कि यह विविधता में एकता और धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों पर आधारित है।
- गांधीवादी राष्ट्रवाद: महात्मा गांधी ने अहिंसा, सर्वधर्म समभाव, ग्राम स्वराज और सभी वर्गों के उत्थान पर आधारित राष्ट्रवाद की वकालत की। उनका राष्ट्रवाद नैतिक मूल्यों और मानवीय गरिमा पर केंद्रित था।
- नेहरूवादी राष्ट्रवाद: जवाहरलाल नेहरू ने आधुनिक, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक और समाजवादी भारत की कल्पना की। उन्होंने गुटनिरपेक्षता और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को भारतीय राष्ट्रवाद का अभिन्न अंग माना।
- चुनौतियाँ: भाषावाद, क्षेत्रवाद, सांप्रदायिकता और जातिवाद भारतीय राष्ट्रवाद के समक्ष चुनौतियाँ प्रस्तुत करते हैं।
9. आज के विश्व में राष्ट्रवाद:
वैश्वीकरण और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के युग में राष्ट्रवाद की भूमिका बदल रही है:
- वैश्वीकरण का प्रभाव: वैश्वीकरण ने राष्ट्र-राज्यों की संप्रभुता को कुछ हद तक चुनौती दी है, क्योंकि आर्थिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय मुद्दे राष्ट्रीय सीमाओं से परे हो गए हैं।
- नई चुनौतियाँ: आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन, वैश्विक महामारी और आर्थिक संकट जैसी समस्याओं से निपटने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग अपरिहार्य हो गया है।
- पहचान आधारित राष्ट्रवाद का उभार: कई देशों में हाल के वर्षों में पहचान आधारित राष्ट्रवाद का उभार देखा गया है, जो अक्सर प्रवासन और सांस्कृतिक परिवर्तनों की प्रतिक्रिया में होता है।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
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राष्ट्रवाद की सबसे उपयुक्त परिभाषा क्या है?
अ) एक देश के भीतर विभिन्न संस्कृतियों का सह-अस्तित्व।
ब) अपने राष्ट्र के प्रति निष्ठा, भक्ति और प्रेम की भावना।
स) अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और शांति को बढ़ावा देना।
द) किसी एक जातीय समूह का शासन। -
निम्नलिखित में से कौन-सा राष्ट्रवाद का एक सकारात्मक पहलू नहीं है?
अ) राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देना।
ब) स्वतंत्रता संग्राम को प्रेरित करना।
स) अन्य राष्ट्रों के प्रति असहिष्णुता और घृणा।
द) सामूहिक पहचान प्रदान करना। -
'आत्म-निर्णय का अधिकार' का क्या अर्थ है?
अ) किसी व्यक्ति का अपने जीवन के निर्णय स्वयं लेने का अधिकार।
ब) किसी राष्ट्र या समुदाय का अपनी राजनीतिक स्थिति स्वयं निर्धारित करने का अधिकार।
स) किसी राज्य का अन्य राज्यों के मामलों में हस्तक्षेप करने का अधिकार।
द) व्यक्तियों का अपनी पसंद का धर्म चुनने का अधिकार। -
उपनिवेशवाद विरोधी राष्ट्रवाद का मुख्य उद्देश्य क्या था?
अ) अपने राष्ट्र को अन्य राष्ट्रों से श्रेष्ठ साबित करना।
ब) उपनिवेशवादी शासन से मुक्ति प्राप्त करना।
स) अन्य देशों पर आर्थिक प्रभुत्व स्थापित करना।
द) एक वैश्विक सरकार का गठन करना। -
किस प्रकार का राष्ट्रवाद अक्सर युद्ध और संघर्ष का कारण बनता है?
अ) उदारवादी राष्ट्रवाद
ब) सांस्कृतिक राष्ट्रवाद
स) आक्रामक/विस्तारवादी राष्ट्रवाद
द) उपनिवेशवाद विरोधी राष्ट्रवाद -
महात्मा गांधी के राष्ट्रवाद की प्रमुख विशेषता क्या थी?
अ) सैन्य शक्ति पर आधारित राष्ट्रवाद।
ब) केवल एक धर्म पर आधारित राष्ट्रवाद।
स) अहिंसा, सर्वधर्म समभाव और ग्राम स्वराज पर आधारित राष्ट्रवाद।
द) औद्योगिक विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता देना। -
निम्नलिखित में से कौन-सा भारतीय राष्ट्रवाद का एक प्रमुख लक्षण है?
अ) केवल एक भाषा पर आधारित।
ब) केवल एक धर्म पर आधारित।
स) विविधता में एकता, धर्मनिरपेक्षता और समावेशिता।
द) अन्य राष्ट्रों पर प्रभुत्व स्थापित करने की इच्छा। -
वैश्वीकरण ने राष्ट्रवाद को कैसे प्रभावित किया है?
अ) इसने राष्ट्र-राज्यों की संप्रभुता को पूरी तरह समाप्त कर दिया है।
ब) इसने राष्ट्र-राज्यों की संप्रभुता को कुछ हद तक चुनौती दी है।
स) इसने राष्ट्रवाद को और अधिक आक्रामक बना दिया है।
द) इसका राष्ट्रवाद पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। -
एक 'राष्ट्र' के निर्माण के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा तत्व सबसे कम आवश्यक है?
अ) साझा इतिहास
ब) साझा संस्कृति
स) साझा राजनीतिक आकांक्षाएँ
द) सभी नागरिकों का एक ही धर्म होना -
'हम' बनाम 'वे' की भावना किस प्रकार के राष्ट्रवाद से जुड़ी है?
अ) उदारवादी राष्ट्रवाद
ब) समावेशी राष्ट्रवाद
स) संकीर्ण और विभाजनकारी राष्ट्रवाद
द) उपनिवेशवाद विरोधी राष्ट्रवाद
उत्तर कुंजी:
- ब
- स
- ब
- ब
- स
- स
- स
- ब
- द
- स
मुझे आशा है कि ये विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपको 'राष्ट्रवाद' की अवधारणा को समझने और सरकारी परीक्षाओं की तैयारी में सहायक होंगे। अपनी पढ़ाई जारी रखें और किसी भी प्रश्न के लिए पूछने में संकोच न करें।