Class 11 Political Science Notes Chapter 8 (धर्मनिरपेक्षता) – Rajniti Sidhant Book

प्रिय विद्यार्थियों,
आज हम कक्षा 11 की राजनीति विज्ञान की पाठ्यपुस्तक 'राजनीतिक सिद्धांत' के अध्याय 8 'धर्मनिरपेक्षता' का विस्तृत अध्ययन करेंगे। यह अध्याय सरकारी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, अतः प्रत्येक बिंदु पर ध्यानपूर्वक विचार करें।
अध्याय 8: धर्मनिरपेक्षता (Secularism)
1. धर्मनिरपेक्षता का अर्थ और अवधारणा:
- धर्मनिरपेक्षता एक ऐसा सिद्धांत है जो राज्य को धार्मिक मामलों से दूर रखने और सभी नागरिकों को उनके धर्म की परवाह किए बिना समान व्यवहार करने की वकालत करता है।
- यह धर्म और राज्य शक्ति के पृथक्करण पर जोर देता है।
- इसका मूल विचार यह है कि राज्य का अपना कोई धर्म नहीं होगा और वह किसी भी धर्म को विशेष दर्जा नहीं देगा।
- यह सभी व्यक्तियों को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार प्रदान करता है।
2. धर्मनिरपेक्षता की आवश्यकता:
- धार्मिक वर्चस्व को रोकने के लिए: किसी एक धर्म के लोगों को दूसरे धर्म के लोगों पर हावी होने से रोकना।
- धार्मिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए: व्यक्तियों को अपनी पसंद के धर्म का पालन करने, न करने या बदलने की स्वतंत्रता देना।
- समानता और न्याय स्थापित करने के लिए: यह सुनिश्चित करना कि राज्य धर्म के आधार पर किसी भी नागरिक के साथ भेदभाव न करे।
- शांति और सद्भाव बनाए रखने के लिए: धार्मिक संघर्षों को कम करना और विभिन्न धार्मिक समुदायों के बीच सह-अस्तित्व को बढ़ावा देना।
3. धर्मनिरपेक्षता के मॉडल:
अ) पश्चिमी मॉडल (विशेषकर अमेरिकी मॉडल):
- राज्य और धर्म का पूर्ण पृथक्करण: यह मॉडल राज्य और धर्म के बीच एक स्पष्ट और कठोर दीवार खींचता है।
- गैर-हस्तक्षेप का सिद्धांत: राज्य धार्मिक मामलों में बिल्कुल भी हस्तक्षेप नहीं करता और न ही धर्म राज्य के मामलों में हस्तक्षेप करता है।
- व्यक्तिगत धार्मिक स्वतंत्रता पर जोर: यह व्यक्ति की धार्मिक स्वतंत्रता को सर्वोच्च मानता है।
- राज्य द्वारा कोई धार्मिक सहायता नहीं: राज्य किसी भी धर्म को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई वित्तीय सहायता या समर्थन नहीं देता।
- उदाहरण: संयुक्त राज्य अमेरिका। यहाँ राज्य न तो किसी धर्म का समर्थन करता है और न ही किसी धर्म का विरोध करता है।
ब) भारतीय मॉडल:
- राज्य और धर्म के बीच 'सैद्धांतिक दूरी': भारतीय धर्मनिरपेक्षता पश्चिमी मॉडल की तरह राज्य और धर्म के बीच पूर्ण पृथक्करण नहीं है, बल्कि एक 'सैद्धांतिक दूरी' बनाए रखती है।
- गैर-हस्तक्षेप और हस्तक्षेप दोनों: भारतीय राज्य धार्मिक मामलों में गैर-हस्तक्षेप का पालन करता है, लेकिन यदि आवश्यक हो तो धार्मिक प्रथाओं में सुधार के लिए हस्तक्षेप भी कर सकता है (जैसे अस्पृश्यता का उन्मूलन, सती प्रथा पर प्रतिबंध)।
- सर्वधर्म समभाव: भारतीय धर्मनिरपेक्षता सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान और सहिष्णुता पर आधारित है। राज्य सभी धर्मों को समान मानता है और किसी को भी विशेष प्राथमिकता नहीं देता।
- अल्पसंख्यकों के अधिकारों का संरक्षण: भारतीय धर्मनिरपेक्षता अल्पसंख्यकों के धार्मिक और सांस्कृतिक अधिकारों की रक्षा के लिए विशेष प्रावधान करती है (जैसे अपने शिक्षण संस्थान स्थापित करने का अधिकार)।
- राज्य द्वारा धार्मिक सहायता: भारतीय राज्य कुछ धार्मिक गतिविधियों को सहायता प्रदान कर सकता है (जैसे हज यात्रा या तीर्थ यात्रा के लिए सब्सिडी), बशर्ते यह सभी धर्मों के लिए समान रूप से उपलब्ध हो या अल्पसंख्यकों के उत्थान के लिए हो।
- संविधान में प्रावधान:
- प्रस्तावना: 42वें संविधान संशोधन (1976) द्वारा 'धर्मनिरपेक्ष' शब्द जोड़ा गया।
- मौलिक अधिकार:
- अनुच्छेद 14: कानून के समक्ष समानता।
- अनुच्छेद 15: धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव का निषेध।
- अनुच्छेद 16: सार्वजनिक नियोजन के मामलों में अवसर की समानता।
- अनुच्छेद 25: अंतःकरण की स्वतंत्रता और धर्म के अबाध रूप से मानने, आचरण करने और प्रचार करने की स्वतंत्रता।
- अनुच्छेद 26: धार्मिक कार्यों के प्रबंध की स्वतंत्रता।
- अनुच्छेद 27: किसी विशिष्ट धर्म की अभिवृद्धि के लिए करों के संदाय से स्वतंत्रता।
- अनुच्छेद 28: कुछ शिक्षा संस्थाओं में धार्मिक शिक्षा या धार्मिक उपासना में उपस्थित होने से स्वतंत्रता।
4. पश्चिमी और भारतीय धर्मनिरपेक्षता में प्रमुख अंतर:
| विशेषता | पश्चिमी मॉडल (उदा. अमेरिका) | भारतीय मॉडल |
|---|---|---|
| राज्य-धर्म संबंध | पूर्ण पृथक्करण, कठोर दीवार। | सैद्धांतिक दूरी, आवश्यकता पड़ने पर हस्तक्षेप। |
| हस्तक्षेप | राज्य धार्मिक मामलों में बिल्कुल हस्तक्षेप नहीं करता। | राज्य धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप कर सकता है (सुधार हेतु)। |
| व्यक्ति/समुदाय | व्यक्ति की धार्मिक स्वतंत्रता पर अधिक जोर। | व्यक्ति और धार्मिक समुदाय दोनों के अधिकारों पर जोर। |
| राज्य की सहायता | राज्य किसी भी धर्म को कोई सहायता नहीं देता। | राज्य कुछ शर्तों के साथ धार्मिक संस्थाओं को सहायता दे सकता है। |
| लक्ष्य | धार्मिक वर्चस्व को रोकना, व्यक्तिगत स्वतंत्रता। | धार्मिक वर्चस्व को रोकना, धार्मिक समानता, अल्पसंख्यकों का संरक्षण। |
5. भारतीय धर्मनिरपेक्षता के समक्ष चुनौतियाँ:
- सांप्रदायिकता: विभिन्न धार्मिक समुदायों के बीच तनाव और संघर्ष।
- धार्मिक पहचान की राजनीति: राजनीतिक दल धार्मिक पहचान का उपयोग वोट बैंक के लिए करते हैं।
- अल्पसंख्यक तुष्टिकरण के आरोप: कुछ लोग भारतीय धर्मनिरपेक्षता पर अल्पसंख्यकों के तुष्टिकरण का आरोप लगाते हैं।
- समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) का मुद्दा: विभिन्न धार्मिक समुदायों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून (विवाह, तलाक, उत्तराधिकार) भारतीय धर्मनिरपेक्षता के लिए एक चुनौती है। संविधान का अनुच्छेद 44 राज्य को समान नागरिक संहिता लागू करने का निर्देश देता है।
- राज्य के हस्तक्षेप की सीमा: धार्मिक मामलों में राज्य कब और कितना हस्तक्षेप कर सकता है, इस पर बहस।
6. धर्मनिरपेक्षता का महत्व:
- यह एक बहुधार्मिक समाज में शांति और सहिष्णुता सुनिश्चित करता है।
- यह सभी नागरिकों को समान अधिकार और स्वतंत्रता प्रदान करता है।
- यह धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करता है।
- यह एक लोकतांत्रिक और न्यायपूर्ण समाज की नींव है।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
-
भारतीय संविधान की प्रस्तावना में 'धर्मनिरपेक्ष' शब्द किस संविधान संशोधन द्वारा जोड़ा गया?
क) 40वाँ संशोधन
ख) 42वाँ संशोधन
ग) 44वाँ संशोधन
घ) 52वाँ संशोधन -
भारतीय संविधान का कौन सा अनुच्छेद 'अंतःकरण की स्वतंत्रता और धर्म के अबाध रूप से मानने, आचरण करने और प्रचार करने की स्वतंत्रता' से संबंधित है?
क) अनुच्छेद 24
ख) अनुच्छेद 25
ग) अनुच्छेद 26
घ) अनुच्छेद 27 -
पश्चिमी धर्मनिरपेक्षता (जैसे अमेरिकी मॉडल) की मुख्य विशेषता क्या है?
क) राज्य का धार्मिक मामलों में सक्रिय हस्तक्षेप
ख) राज्य और धर्म का पूर्ण पृथक्करण
ग) राज्य द्वारा एक धर्म को विशेष दर्जा
घ) धार्मिक अल्पसंख्यकों को विशेष वित्तीय सहायता -
भारतीय धर्मनिरपेक्षता के संदर्भ में 'सर्वधर्म समभाव' का क्या अर्थ है?
क) सभी धर्मों को राज्य का समान समर्थन
ख) राज्य का कोई धर्म न होना
ग) सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान और सहिष्णुता
घ) धर्म को राजनीति से पूरी तरह अलग रखना -
निम्नलिखित में से कौन भारतीय धर्मनिरपेक्षता के समक्ष एक चुनौती नहीं है?
क) सांप्रदायिकता
ख) समान नागरिक संहिता की मांग
ग) धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार
घ) अल्पसंख्यक तुष्टिकरण के आरोप -
भारतीय संविधान का कौन सा अनुच्छेद राज्य को समान नागरिक संहिता लागू करने का निर्देश देता है?
क) अनुच्छेद 40
ख) अनुच्छेद 44
ग) अनुच्छेद 48
घ) अनुच्छेद 50 -
भारतीय धर्मनिरपेक्षता पश्चिमी धर्मनिरपेक्षता से किस प्रकार भिन्न है?
क) भारतीय मॉडल में राज्य धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करता।
ख) भारतीय मॉडल में राज्य और धर्म के बीच पूर्ण पृथक्करण है।
ग) भारतीय मॉडल में राज्य आवश्यकता पड़ने पर धार्मिक मामलों में सुधार के लिए हस्तक्षेप कर सकता है।
घ) भारतीय मॉडल केवल व्यक्तिगत धार्मिक स्वतंत्रता पर केंद्रित है। -
धर्मनिरपेक्ष राज्य में राज्य का अपना कोई धर्म नहीं होता, यह कथन किस अवधारणा को दर्शाता है?
क) धर्मतंत्र
ख) राजतंत्र
ग) धर्मनिरपेक्षता
घ) कुलीनतंत्र -
निम्नलिखित में से कौन सा मौलिक अधिकार धार्मिक कार्यों के प्रबंध की स्वतंत्रता से संबंधित है?
क) अनुच्छेद 25
ख) अनुच्छेद 26
ग) अनुच्छेद 27
घ) अनुच्छेद 28 -
भारतीय धर्मनिरपेक्षता का एक महत्वपूर्ण पहलू है:
क) धार्मिक अल्पसंख्यकों को विशेष अधिकार न देना।
ख) सभी धर्मों के प्रति राज्य का उदासीन रवैया।
ग) धार्मिक समुदायों के भीतर समानता सुनिश्चित करना।
घ) धर्म और राजनीति का पूर्ण अलगाव।
उत्तरमाला:
- ख) 42वाँ संशोधन
- ख) अनुच्छेद 25
- ख) राज्य और धर्म का पूर्ण पृथक्करण
- ग) सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान और सहिष्णुता
- ग) धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार
- ख) अनुच्छेद 44
- ग) भारतीय मॉडल में राज्य आवश्यकता पड़ने पर धार्मिक मामलों में सुधार के लिए हस्तक्षेप कर सकता है।
- ग) धर्मनिरपेक्षता
- ख) अनुच्छेद 26
- ग) धार्मिक समुदायों के भीतर समानता सुनिश्चित करना
मुझे आशा है कि यह विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपको 'धर्मनिरपेक्षता' अध्याय को गहराई से समझने और सरकारी परीक्षाओं की तैयारी में सहायक होंगे। शुभकामनाएँ!