Class 11 Psychology Notes Chapter 4 (मानव विकास) – Manovigyan Book

प्रिय विद्यार्थियों,
आज हम मनोविज्ञान के एक अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय, 'मानव विकास' का विस्तृत अध्ययन करेंगे। यह अध्याय न केवल आपकी कक्षा 11 की परीक्षा के लिए, बल्कि विभिन्न सरकारी परीक्षाओं, विशेषकर शिक्षण और मनोविज्ञान से संबंधित परीक्षाओं के लिए भी आधारभूत और निर्णायक है। इस अध्याय की गहन समझ आपको मानव व्यवहार और विकास के विभिन्न आयामों को समझने में मदद करेगी।
अध्याय 4: मानव विकास (Human Development)
परिचय:
मानव विकास एक जटिल और सतत प्रक्रिया है जो गर्भाधान से लेकर मृत्यु तक चलती रहती है। यह केवल शारीरिक वृद्धि नहीं, बल्कि संज्ञानात्मक, संवेगात्मक और सामाजिक परिवर्तनों का भी एक क्रम है। विकास एक व्यवस्थित, प्रगतिशील और दीर्घकालिक प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति अपने पर्यावरण के साथ अंतःक्रिया करता है।
विकास के सिद्धांत (Principles of Development):
- विकास आजीवन होता है (Development is Lifelong): यह गर्भाधान से शुरू होकर मृत्यु तक जारी रहता है। जीवन के किसी भी चरण में विकास रुकता नहीं है।
- विकास बहुआयामी होता है (Development is Multidimensional): इसमें शारीरिक, संज्ञानात्मक, संवेगात्मक और सामाजिक जैसे विभिन्न आयाम शामिल होते हैं, जो एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं।
- विकास बहुदिशात्मक होता है (Development is Multidirectional): कुछ आयामों में वृद्धि हो सकती है जबकि अन्य में कमी या स्थिरता आ सकती है। उदाहरण के लिए, वृद्धावस्था में शारीरिक क्षमता घट सकती है, लेकिन ज्ञान और अनुभव बढ़ सकते हैं।
- विकास अत्यधिक लचीला होता है (Development is Highly Plastic): व्यक्ति के विकास में संशोधन और परिवर्तन की क्षमता होती है। अनुभव और हस्तक्षेप से विकास के मार्ग को बदला जा सकता है।
- विकास प्रासंगिक होता है (Development is Contextual): विकास व्यक्ति के सामाजिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और आर्थिक संदर्भों से प्रभावित होता है।
- विकास वृद्धि और हानि दोनों को समाहित करता है (Development Involves Growth and Loss): विकास के प्रत्येक चरण में कुछ नई क्षमताएँ विकसित होती हैं, जबकि कुछ पुरानी क्षमताएँ कमज़ोर पड़ सकती हैं या खो सकती हैं।
- विकास जैविक, संज्ञानात्मक और सामाजिक-संवेगात्मक प्रक्रियाओं का एकीकरण है (Development is an Integration of Biological, Cognitive, and Socio-emotional Processes): ये तीनों प्रक्रियाएँ एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं और मिलकर मानव विकास को आकार देती हैं।
विकास के परिप्रेक्ष्य (Perspectives on Development):
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मनोगत्यात्मक परिप्रेक्ष्य (Psychodynamic Perspective):
- सिगमंड फ्रायड का मनोलैंगिक विकास सिद्धांत (Sigmund Freud's Psychosexual Development Theory): फ्रायड ने व्यक्तित्व विकास को पांच चरणों में विभाजित किया, जिसमें प्रत्येक चरण में कामुक ऊर्जा (लिबिडो) शरीर के एक विशेष क्षेत्र पर केंद्रित होती है।
- मौखिक अवस्था (Oral Stage): जन्म से 1 वर्ष (मुंह)।
- गुदीय अवस्था (Anal Stage): 1 से 3 वर्ष (गुदा)।
- लैंगिक अवस्था (Phallic Stage): 3 से 6 वर्ष (जननांग, ओडिपस/इलेक्ट्रा कॉम्प्लेक्स)।
- सुषुप्तावस्था (Latency Stage): 6 वर्ष से यौवनारंभ (यौन ऊर्जा निष्क्रिय)।
- जननांग अवस्था (Genital Stage): यौवनारंभ के बाद (परिपक्व यौन रुचि)।
- एरिक एरिकसन का मनोसमाजिक विकास सिद्धांत (Erik Erikson's Psychosocial Development Theory): एरिकसन ने जीवन भर आठ मनोसमाजिक चरणों का वर्णन किया, प्रत्येक चरण में एक विशिष्ट "संकट" होता है जिसे हल करने की आवश्यकता होती है।
- विश्वास बनाम अविश्वास (Trust vs. Mistrust): जन्म से 1 वर्ष।
- स्वायत्तता बनाम शर्म और संदेह (Autonomy vs. Shame and Doubt): 1 से 3 वर्ष।
- पहल बनाम अपराधबोध (Initiative vs. Guilt): 3 से 6 वर्ष।
- परिश्रम बनाम हीनता (Industry vs. Inferiority): 6 वर्ष से यौवनारंभ।
- पहचान बनाम भूमिका भ्रम (Identity vs. Role Confusion): किशोरावस्था।
- अंतरंगता बनाम अलगाव (Intimacy vs. Isolation): प्रारंभिक प्रौढ़ावस्था।
- उत्पादकता बनाम स्थिरता (Generativity vs. Stagnation): मध्य प्रौढ़ावस्था।
- अखंडता बनाम निराशा (Integrity vs. Despair): उत्तर प्रौढ़ावस्था।
- सिगमंड फ्रायड का मनोलैंगिक विकास सिद्धांत (Sigmund Freud's Psychosexual Development Theory): फ्रायड ने व्यक्तित्व विकास को पांच चरणों में विभाजित किया, जिसमें प्रत्येक चरण में कामुक ऊर्जा (लिबिडो) शरीर के एक विशेष क्षेत्र पर केंद्रित होती है।
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संज्ञानात्मक परिप्रेक्ष्य (Cognitive Perspective):
- जीन पियाजे का संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत (Jean Piaget's Cognitive Development Theory): पियाजे ने बताया कि बच्चे सक्रिय रूप से अपने ज्ञान का निर्माण करते हैं और चार चरणों से गुजरते हैं।
- संवेदी-पेशीय अवस्था (Sensorimotor Stage): जन्म से 2 वर्ष (संवेदी अनुभव और क्रियाओं के माध्यम से सीखना, वस्तु स्थायित्व)।
- पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था (Preoperational Stage): 2 से 7 वर्ष (प्रतीकात्मक सोच, अहं-केंद्रितता, जीववाद)।
- मूर्त-संक्रियात्मक अवस्था (Concrete Operational Stage): 7 से 11 वर्ष (तार्किक सोच, संरक्षण, वर्गीकरण, क्रमबद्धता)।
- औपचारिक-संक्रियात्मक अवस्था (Formal Operational Stage): 11 वर्ष और ऊपर (अमूर्त सोच, परिकल्पनात्मक-निगमनात्मक तर्क)।
- लेव वाइगोत्स्की का सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत (Lev Vygotsky's Socio-cultural Theory): वाइगोत्स्की ने सामाजिक अंतःक्रिया और सांस्कृतिक संदर्भ को संज्ञानात्मक विकास के लिए महत्वपूर्ण माना।
- समीपस्थ विकास का क्षेत्र (Zone of Proximal Development - ZPD): वह अंतर जो एक बच्चा बिना सहायता के क्या कर सकता है और दूसरों की सहायता से क्या कर सकता है, के बीच होता है।
- पाड़ (Scaffolding): अधिक जानकार व्यक्ति द्वारा बच्चे को दी जाने वाली अस्थायी सहायता।
- सूचना प्रक्रमण उपागम (Information Processing Approach): यह उपागम कंप्यूटर के समान मानव मन की तुलना करता है, जिसमें सूचना को एन्कोड, स्टोर और पुनः प्राप्त किया जाता है। यह ध्यान, स्मृति और समस्या-समाधान जैसे संज्ञानात्मक प्रक्रियाओं पर केंद्रित है।
- जीन पियाजे का संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत (Jean Piaget's Cognitive Development Theory): पियाजे ने बताया कि बच्चे सक्रिय रूप से अपने ज्ञान का निर्माण करते हैं और चार चरणों से गुजरते हैं।
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व्यवहारवादी परिप्रेक्ष्य (Behavioral Perspective):
- शास्त्रीय अनुबंधन (Classical Conditioning): इवान पावलोव द्वारा प्रतिपादित, जिसमें एक तटस्थ उद्दीपक एक स्वाभाविक उद्दीपक के साथ जुड़कर एक अनुबंधित प्रतिक्रिया उत्पन्न करता है।
- क्रियाप्रसूत अनुबंधन (Operant Conditioning): बी.एफ. स्किनर द्वारा प्रतिपादित, जिसमें व्यवहार को उसके परिणामों (पुरस्कार या दंड) द्वारा आकार दिया जाता है।
- सामाजिक अधिगम सिद्धांत (Social Learning Theory): अल्बर्ट बंडूरा द्वारा प्रतिपादित, जिसमें व्यक्ति दूसरों के व्यवहार का अवलोकन और अनुकरण करके सीखते हैं। मॉडलिंग और अवलोकन अधिगम महत्वपूर्ण हैं।
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पारिस्थितिकीय परिप्रेक्ष्य (Ecological Perspective):
- यूरी ब्रॉनफेनब्रेनर का बायोइकोलॉजिकल मॉडल (Urie Bronfenbrenner's Bioecological Model): यह मॉडल मानव विकास को कई अंतःसंबंधित पर्यावरणीय प्रणालियों के भीतर देखता है।
- लघुमंडल (Microsystem): तत्काल वातावरण (परिवार, स्कूल, सहकर्मी)।
- मध्यमंडल (Mesosystem): लघुमंडलों के बीच संबंध (परिवार-स्कूल संबंध)।
- बहिर्मंडल (Exosystem): अप्रत्यक्ष प्रभाव वाले सामाजिक सेटिंग्स (माता-पिता का कार्यस्थल, सामुदायिक सेवाएं)।
- वृहत्तमंडल (Macrosystem): व्यापक सांस्कृतिक मूल्य, कानून और रीति-रिवाज।
- कालमंडल (Chronosystem): जीवन घटनाओं और ऐतिहासिक परिवर्तनों का समय के साथ प्रभाव।
- यूरी ब्रॉनफेनब्रेनर का बायोइकोलॉजिकल मॉडल (Urie Bronfenbrenner's Bioecological Model): यह मॉडल मानव विकास को कई अंतःसंबंधित पर्यावरणीय प्रणालियों के भीतर देखता है।
विकास के चरण (Stages of Development):
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गर्भावस्था (Prenatal Period): गर्भाधान से जन्म तक (लगभग 280 दिन)।
- अंडावस्था (Germinal Stage): गर्भाधान से 2 सप्ताह (जाइगोट का निर्माण, गर्भाशय में आरोपण)।
- भ्रूणावस्था (Embryonic Stage): 2 से 8 सप्ताह (प्रमुख अंगों और शरीर प्रणालियों का विकास)।
- गर्भावास्था (Fetal Stage): 8 सप्ताह से जन्म (अंगों का परिपक्वन, तीव्र वृद्धि)।
- टेराटोजेन (Teratogens): ऐसे कारक (जैसे दवाएं, शराब, बीमारियां) जो भ्रूण के विकास को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकते हैं।
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शैशवावस्था (Infancy): जन्म से 2 वर्ष।
- शारीरिक और गत्यात्मक विकास: तीव्र वृद्धि, प्रतिवर्त क्रियाएँ (चूसना, पकड़ना), सिर उठाना, बैठना, घुटनों के बल चलना, चलना।
- संज्ञानात्मक विकास: पियाजे की संवेदी-पेशीय अवस्था, वस्तु स्थायित्व का विकास, भाषा की शुरुआत।
- सामाजिक-संवेगात्मक विकास: जुड़ाव (Attachment) का निर्माण (मां/देखभालकर्ता से), अजनबियों से डर, सामाजिक मुस्कान।
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प्रारंभिक बाल्यावस्था (Early Childhood): 2 से 6 वर्ष।
- शारीरिक विकास: धीमी लेकिन स्थिर वृद्धि, गत्यात्मक कौशल में सुधार (दौड़ना, कूदना, चित्र बनाना)।
- संज्ञानात्मक विकास: पियाजे की पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था, प्रतीकात्मक खेल, भाषा का तेजी से विकास, अहं-केंद्रितता, जीववाद।
- सामाजिक-संवेगात्मक विकास: आत्म-अवधारणा का विकास, लिंग भूमिकाओं की समझ, साथियों के साथ खेल (समानांतर, सहयोगी)।
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उत्तर बाल्यावस्था (Middle and Late Childhood): 6 से 11 वर्ष।
- शारीरिक विकास: धीमी और स्थिर वृद्धि, गत्यात्मक कौशल में और सुधार (खेलकूद)।
- संज्ञानात्मक विकास: पियाजे की मूर्त-संक्रियात्मक अवस्था, तार्किक सोच, संरक्षण की समझ, वर्गीकरण, क्रमबद्धता, स्मृति और ध्यान में सुधार।
- सामाजिक-संवेगात्मक विकास: आत्म-सम्मान का विकास, मित्रता का महत्व, नैतिक तर्क की शुरुआत, साथियों का प्रभाव बढ़ता है।
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किशोरावस्था (Adolescence): 12 से 18/19 वर्ष।
- शारीरिक विकास: यौवनारंभ (Puberty), तीव्र शारीरिक वृद्धि, द्वितीयक लैंगिक लक्षणों का विकास।
- संज्ञानात्मक विकास: पियाजे की औपचारिक-संक्रियात्मक अवस्था, अमूर्त सोच, परिकल्पनात्मक-निगमनात्मक तर्क, आदर्शवाद, आत्म-केंद्रितता (काल्पनिक दर्शक, व्यक्तिगत दंतकथा)।
- सामाजिक-संवेगात्मक विकास: पहचान निर्माण (एरिकसन), माता-पिता और साथियों के साथ संबंधों में परिवर्तन, स्वतंत्रता की खोज, जोखिम लेने वाले व्यवहार, यौन पहचान का विकास।
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प्रारंभिक प्रौढ़ावस्था (Early Adulthood): 20 से 40 वर्ष।
- शारीरिक विकास: शारीरिक क्षमताएं चरम पर, फिर धीरे-धीरे गिरावट शुरू।
- संज्ञानात्मक विकास: व्यावहारिक और लचीली सोच, समस्या-समाधान कौशल।
- सामाजिक-संवेगात्मक विकास: अंतरंगता और संबंध स्थापित करना (एरिकसन), करियर का चुनाव, विवाह, परिवार का निर्माण।
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मध्य प्रौढ़ावस्था (Middle Adulthood): 40 से 65 वर्ष।
- शारीरिक विकास: शारीरिक गिरावट स्पष्ट होती है (दृष्टि, श्रवण), रजोनिवृत्ति (महिलाओं में), एंड्रोपॉज (पुरुषों में)।
- संज्ञानात्मक विकास: अनुभव-आधारित ज्ञान (क्रिस्टलीकृत बुद्धि) बढ़ता है, प्रसंस्करण गति धीमी हो सकती है।
- सामाजिक-संवेगात्मक विकास: उत्पादकता (एरिकसन), बच्चों का घर छोड़ना ("खाली घोंसला सिंड्रोम"), करियर में स्थिरता या बदलाव, माता-पिता की देखभाल।
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उत्तर प्रौढ़ावस्था (Late Adulthood): 65 वर्ष और ऊपर।
- शारीरिक विकास: शारीरिक गिरावट जारी, स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ सकती हैं।
- संज्ञानात्मक विकास: स्मृति और प्रसंस्करण गति में कमी, लेकिन ज्ञान और अनुभव का उपयोग।
- सामाजिक-संवेगात्मक विकास: जीवन की समीक्षा (अखंडता बनाम निराशा), सेवानिवृत्ति, सामाजिक नेटवर्क में बदलाव, मृत्यु का सामना।
विकास को प्रभावित करने वाले कारक (Factors Influencing Development):
- आनुवंशिकता (Heredity): माता-पिता से प्राप्त जीन जो शारीरिक विशेषताओं, बुद्धि और कुछ व्यक्तित्व लक्षणों को प्रभावित करते हैं।
- पर्यावरण (Environment): व्यक्ति के आसपास के सभी बाहरी कारक, जैसे परिवार, स्कूल, संस्कृति, सामाजिक-आर्थिक स्थिति, पोषण और अनुभव।
- परिपक्वता (Maturation): जैविक रूप से निर्धारित विकासवादी परिवर्तन जो उम्र के साथ होते हैं, जैसे चलना या यौवनारंभ।
- पोषण (Nutrition): शारीरिक और संज्ञानात्मक विकास के लिए आवश्यक। कुपोषण विकास को बाधित कर सकता है।
- रोग और स्वास्थ्य (Diseases and Health): बचपन की बीमारियाँ या दीर्घकालिक स्वास्थ्य स्थितियाँ विकास को प्रभावित कर सकती हैं।
- सांस्कृतिक संदर्भ (Cultural Context): संस्कृति मूल्य, विश्वास, प्रथाएं और सामाजिक अपेक्षाएं प्रदान करती है जो विकास को आकार देती हैं।
- सामाजिक-आर्थिक स्थिति (Socio-economic Status - SES): शिक्षा, आय और व्यवसाय का स्तर संसाधनों और अवसरों तक पहुंच को प्रभावित करता है।
- परिवार और साथियों का प्रभाव (Family and Peer Influence): परिवार प्राथमिक समाजीकरण का स्रोत है, जबकि सहकर्मी सामाजिक कौशल और पहचान निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions - MCQs)
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फ्रायड के मनोलैंगिक विकास सिद्धांत के अनुसार, किस अवस्था में कामुक ऊर्जा जननांगों पर केंद्रित होती है और ओडिपस/इलेक्ट्रा कॉम्प्लेक्स विकसित होता है?
a) मौखिक अवस्था
b) गुदीय अवस्था
c) लैंगिक अवस्था
d) सुषुप्तावस्था -
एरिक एरिकसन के मनोसमाजिक विकास सिद्धांत में, किशोरावस्था का मुख्य संकट क्या है?
a) विश्वास बनाम अविश्वास
b) स्वायत्तता बनाम शर्म और संदेह
c) पहचान बनाम भूमिका भ्रम
d) अंतरंगता बनाम अलगाव -
जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत के अनुसार, बच्चे किस अवस्था में अमूर्त सोच और परिकल्पनात्मक-निगमनात्मक तर्क विकसित करते हैं?
a) संवेदी-पेशीय अवस्था
b) पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था
c) मूर्त-संक्रियात्मक अवस्था
d) औपचारिक-संक्रियात्मक अवस्था -
वाइगोत्स्की के सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत में, "समीपस्थ विकास का क्षेत्र" (ZPD) क्या दर्शाता है?
a) बच्चे की वर्तमान संज्ञानात्मक क्षमता
b) वह अंतर जो एक बच्चा बिना सहायता के क्या कर सकता है और दूसरों की सहायता से क्या कर सकता है, के बीच
c) वह क्षेत्र जहाँ बच्चे को कोई सहायता नहीं चाहिए
d) बच्चे का अधिकतम संभावित विकास स्तर -
ब्रॉनफेनब्रेनर के पारिस्थितिकीय मॉडल में, बच्चे के तत्काल वातावरण (जैसे परिवार, स्कूल) को किस प्रणाली के रूप में जाना जाता है?
a) मध्यमंडल (Mesosystem)
b) बहिर्मंडल (Exosystem)
c) लघुमंडल (Microsystem)
d) वृहत्तमंडल (Macrosystem) -
गर्भावस्था के किस चरण में प्रमुख अंगों और शरीर प्रणालियों का तेजी से विकास होता है?
a) अंडावस्था
b) भ्रूणावस्था
c) गर्भावास्था
d) जन्मपूर्व अवस्था -
किस अवस्था में बच्चे में "वस्तु स्थायित्व" (Object Permanence) का विकास होता है?
a) पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था
b) संवेदी-पेशीय अवस्था
c) मूर्त-संक्रियात्मक अवस्था
d) औपचारिक-संक्रियात्मक अवस्था -
अल्बर्ट बंडूरा का सामाजिक अधिगम सिद्धांत किस पर जोर देता है?
a) प्रतिवर्त क्रियाएँ
b) पुरस्कार और दंड
c) अवलोकन और अनुकरण
d) सहज प्रवृत्ति -
मध्य प्रौढ़ावस्था में महिलाओं में होने वाले शारीरिक परिवर्तन, जिसमें मासिक धर्म चक्र समाप्त हो जाता है, को क्या कहते हैं?
a) एंड्रोपॉज
b) यौवनारंभ
c) रजोनिवृत्ति
d) गर्भधारण -
निम्नलिखित में से कौन सा कारक मानव विकास को प्रभावित करने वाले पर्यावरणीय कारकों में से एक नहीं है?
a) पोषण
b) आनुवंशिकता
c) सामाजिक-आर्थिक स्थिति
d) सांस्कृतिक संदर्भ
उत्तरमाला:
- c) लैंगिक अवस्था
- c) पहचान बनाम भूमिका भ्रम
- d) औपचारिक-संक्रियात्मक अवस्था
- b) वह अंतर जो एक बच्चा बिना सहायता के क्या कर सकता है और दूसरों की सहायता से क्या कर सकता है, के बीच
- c) लघुमंडल (Microsystem)
- b) भ्रूणावस्था
- b) संवेदी-पेशीय अवस्था
- c) अवलोकन और अनुकरण
- c) रजोनिवृत्ति
- b) आनुवंशिकता
मुझे आशा है कि ये विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपके अध्ययन में सहायक होंगे। किसी भी संदेह या अतिरिक्त जानकारी के लिए, आप पूछ सकते हैं। शुभकामनाएँ!