Class 11 Psychology Notes Chapter 6 (अधिगम) – Manovigyan Book

Manovigyan
प्रिय विद्यार्थियों,

आज हम मनोविज्ञान के एक अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय 'अधिगम' (Learning) पर विस्तृत चर्चा करेंगे। यह अध्याय न केवल आपकी सैद्धांतिक समझ के लिए आवश्यक है, बल्कि विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में भी इससे संबंधित प्रश्न बहुतायत में पूछे जाते हैं। अधिगम हमारे व्यवहार में होने वाले परिवर्तनों को समझने की कुंजी है, और मानव जीवन के हर पहलू में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।

चलिए, इस अध्याय के मुख्य बिंदुओं को गहराई से समझते हैं:


अध्याय 6: अधिगम (Learning)

1. अधिगम क्या है? (What is Learning?)

अधिगम को सामान्यतः अनुभव या अभ्यास के परिणामस्वरूप व्यवहार में अपेक्षाकृत स्थायी परिवर्तन के रूप में परिभाषित किया जाता है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके माध्यम से व्यक्ति ज्ञान, कौशल, दृष्टिकोण और मूल्यों को प्राप्त करता है।

  • क्रो एंड क्रो (Crow and Crow) के अनुसार: "अधिगम आदतों, ज्ञान और अभिवृत्तियों का अर्जन है।"

2. अधिगम की विशेषताएँ (Characteristics of Learning):

  • व्यवहार में परिवर्तन: अधिगम का सबसे स्पष्ट परिणाम व्यवहार में परिवर्तन होता है। यह परिवर्तन प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष हो सकता है।
  • अनुभव या अभ्यास के कारण: अधिगम किसी अनुभव या बार-बार के अभ्यास के परिणामस्वरूप होता है, न कि परिपक्वता, बीमारी या थकान के कारण।
  • अपेक्षाकृत स्थायी परिवर्तन: अधिगम से होने वाले परिवर्तन अल्पकालिक नहीं होते, बल्कि अपेक्षाकृत स्थायी होते हैं, हालांकि वे पूरी तरह से अपरिवर्तनीय नहीं होते।
  • उद्देश्यपूर्ण और लक्ष्य-उन्मुख: अधिगम अक्सर किसी विशिष्ट लक्ष्य या उद्देश्य की प्राप्ति के लिए होता है।
  • सार्वभौमिक प्रक्रिया: अधिगम सभी जीवित प्राणियों में पाया जाता है, चाहे वे मानव हों या पशु।
  • अनुकूलन में सहायक: अधिगम व्यक्ति को अपने पर्यावरण के साथ बेहतर ढंग से अनुकूलन करने में मदद करता है।
  • सतत प्रक्रिया: अधिगम जीवन भर चलने वाली एक सतत प्रक्रिया है।

3. अधिगम के प्रकार / सिद्धांत (Types / Theories of Learning):

मनोवैज्ञानिकों ने अधिगम को समझने के लिए विभिन्न सिद्धांतों का प्रतिपादन किया है। प्रमुख सिद्धांत निम्नलिखित हैं:

A. शास्त्रीय अनुबंधन (Classical Conditioning):

  • प्रतिपादक: इवान पावलोव (Ivan Pavlov), एक रूसी शरीर विज्ञानी।
  • प्रयोग: उन्होंने कुत्तों पर लार के स्राव पर प्रयोग किया।
    • अनानुबंधित उद्दीपक (Unconditioned Stimulus - UCS): भोजन (जो स्वाभाविक रूप से लार उत्पन्न करता है)।
    • अनानुबंधित अनुक्रिया (Unconditioned Response - UCR): भोजन देखकर लार का स्राव (स्वाभाविक अनुक्रिया)।
    • अनुबंधित उद्दीपक (Conditioned Stimulus - CS): घंटी की आवाज (जो पहले कोई लार उत्पन्न नहीं करती थी)।
    • अनुबंधित अनुक्रिया (Conditioned Response - CR): घंटी की आवाज सुनकर लार का स्राव (सीखी हुई अनुक्रिया)।
  • प्रक्रिया: पावलोव ने भोजन देने से ठीक पहले घंटी बजाई। कई बार दोहराने के बाद, कुत्ते ने केवल घंटी की आवाज सुनकर ही लार टपकाना शुरू कर दिया, भले ही भोजन मौजूद न हो।
  • शास्त्रीय अनुबंधन के सिद्धांत:
    • अधिग्रहण (Acquisition): वह प्रक्रिया जिसके द्वारा अनुबंधित अनुक्रिया पहली बार स्थापित होती है और धीरे-धीरे बढ़ती है।
    • विलोपन (Extinction): यदि अनुबंधित उद्दीपक (घंटी) को बार-बार अनानुबंधित उद्दीपक (भोजन) के बिना प्रस्तुत किया जाए, तो अनुबंधित अनुक्रिया (लार) धीरे-धीरे कम हो जाती है और अंततः समाप्त हो जाती है।
    • स्वतः पुनर्लाभ (Spontaneous Recovery): विलोपन के बाद, कुछ समय पश्चात् यदि अनुबंधित उद्दीपक को पुनः प्रस्तुत किया जाए, तो अनुबंधित अनुक्रिया बिना किसी नए प्रशिक्षण के अचानक फिर से प्रकट हो सकती है, हालांकि यह पहले जितनी तीव्र नहीं होती।
    • उद्दीपक सामान्यीकरण (Stimulus Generalization): एक बार जब कोई अनुक्रिया एक विशिष्ट उद्दीपक से अनुबंधित हो जाती है, तो वह समान उद्दीपकों के प्रति भी वैसी ही अनुक्रिया कर सकता है। (जैसे, घंटी की जगह किसी और समान ध्वनि पर भी लार टपकाना)।
    • उद्दीपक विभेदन (Stimulus Discrimination): व्यक्ति या जानवर समान उद्दीपकों के बीच अंतर करना सीख जाता है और केवल विशिष्ट अनुबंधित उद्दीपक के प्रति ही अनुक्रिया करता है।

B. नैमित्तिक अनुबंधन / क्रियाप्रसूत अनुबंधन (Operant Conditioning):

  • प्रतिपादक: बी.एफ. स्किनर (B.F. Skinner) ने इस सिद्धांत को विकसित किया, हालांकि एडवर्ड थॉर्नडाइक (Edward Thorndike) के 'प्रयास एवं त्रुटि का सिद्धांत' (Law of Effect) ने इसकी नींव रखी।
  • थॉर्नडाइक का प्रयास एवं त्रुटि का सिद्धांत:
    • प्रयोग: बिल्ली पर पहेली बॉक्स (Puzzle Box) में प्रयोग। बिल्ली ने कई प्रयासों के बाद लीवर दबाकर बाहर निकलना सीखा।
    • नियम:
      • तत्परता का नियम (Law of Readiness): जब व्यक्ति सीखने के लिए तैयार होता है, तो वह अधिक प्रभावी ढंग से सीखता है।
      • अभ्यास का नियम (Law of Exercise): किसी कार्य का बार-बार अभ्यास करने से वह मजबूत होता है, और अभ्यास न करने से वह कमजोर होता है (उपयोग और अनुपयोग का नियम)।
      • प्रभाव का नियम (Law of Effect): जिस व्यवहार के सुखद परिणाम होते हैं, उसे दोहराने की संभावना बढ़ जाती है, और जिस व्यवहार के अप्रिय परिणाम होते हैं, उसे दोहराने की संभावना कम हो जाती है।
  • स्किनर का क्रियाप्रसूत अनुबंधन:
    • प्रयोग: स्किनर बॉक्स में चूहे या कबूतर पर प्रयोग। जानवर एक लीवर दबाकर या कुंजी चोंच मारकर भोजन प्राप्त करना सीखता है।
    • मुख्य अवधारणा: व्यवहार उसके परिणामों से प्रभावित होता है।
    • प्रबलन (Reinforcement): किसी अनुक्रिया की आवृत्ति को बढ़ाने वाली कोई भी घटना।
      • सकारात्मक प्रबलन (Positive Reinforcement): किसी वांछित व्यवहार के बाद सुखद उद्दीपक (जैसे भोजन, प्रशंसा) देना।
      • नकारात्मक प्रबलन (Negative Reinforcement): किसी वांछित व्यवहार के बाद अप्रिय उद्दीपक (जैसे शोर, दर्द) को हटाना। (यह दंड नहीं है, यह व्यवहार को बढ़ाता है)।
    • दंड (Punishment): किसी अनुक्रिया की आवृत्ति को कम करने वाली कोई भी घटना।
      • सकारात्मक दंड (Positive Punishment): किसी अवांछित व्यवहार के बाद अप्रिय उद्दीपक (जैसे डांट, बिजली का झटका) देना।
      • नकारात्मक दंड (Negative Punishment): किसी अवांछित व्यवहार के बाद सुखद उद्दीपक (जैसे खिलौना, विशेषाधिकार) को हटाना।
    • प्रबलन अनुसूचियाँ (Schedules of Reinforcement):
      • सतत प्रबलन (Continuous Reinforcement): हर सही अनुक्रिया पर प्रबलन देना। (प्रारंभिक अधिगम के लिए अच्छा)।
      • आंशिक प्रबलन (Partial/Intermittent Reinforcement): कुछ अनुक्रियाओं पर ही प्रबलन देना। (विलोपन के प्रति अधिक प्रतिरोधी)।
        • निश्चित अनुपात अनुसूची (Fixed Ratio - FR): निश्चित संख्या में अनुक्रियाओं के बाद प्रबलन। (जैसे, हर 5वीं अनुक्रिया पर)।
        • परिवर्ती अनुपात अनुसूची (Variable Ratio - VR): परिवर्तनीय संख्या में अनुक्रियाओं के बाद प्रबलन। (जैसे, औसतन हर 5वीं अनुक्रिया पर, लेकिन कभी 3री तो कभी 7वीं)। सबसे प्रभावी और विलोपन प्रतिरोधी।
        • निश्चित अंतराल अनुसूची (Fixed Interval - FI): निश्चित समय अंतराल के बाद पहली अनुक्रिया पर प्रबलन। (जैसे, हर 5 मिनट बाद पहली अनुक्रिया पर)।
        • परिवर्ती अंतराल अनुसूची (Variable Interval - VI): परिवर्तनीय समय अंतराल के बाद पहली अनुक्रिया पर प्रबलन। (जैसे, औसतन हर 5 मिनट बाद पहली अनुक्रिया पर)।
    • आकार देना (Shaping): जटिल व्यवहारों को सिखाने के लिए, वांछित व्यवहार के क्रमिक सन्निकटन को प्रबलित करना।

C. प्रेक्षणात्मक अधिगम / सामाजिक अधिगम (Observational Learning / Social Learning):

  • प्रतिपादक: अल्बर्ट बंडूरा (Albert Bandura)।
  • मुख्य विचार: व्यक्ति दूसरों को देखकर और उनका अनुकरण करके सीखते हैं। इसे 'मॉडलिंग' भी कहते हैं।
  • प्रयोग: बॉबो डॉल प्रयोग (बच्चों ने वयस्कों को बॉबो डॉल के प्रति आक्रामक व्यवहार करते देखा और बाद में खुद भी वैसा ही व्यवहार किया)।
  • प्रक्रियाएँ:
    • अवधान (Attention): अधिगमकर्ता को मॉडल के व्यवहार पर ध्यान देना चाहिए।
    • धारण (Retention): अधिगमकर्ता को मॉडल के व्यवहार को स्मृति में बनाए रखना चाहिए।
    • पुनरुत्पादन (Reproduction): अधिगमकर्ता को मॉडल के व्यवहार को शारीरिक रूप से पुनरुत्पादित करने में सक्षम होना चाहिए।
    • अभिप्रेरणा (Motivation): अधिगमकर्ता को व्यवहार को दोहराने के लिए प्रेरित होना चाहिए (प्रबलन या प्रत्याशित प्रबलन)।

D. संज्ञानात्मक अधिगम (Cognitive Learning):

  • यह अधिगम की आंतरिक मानसिक प्रक्रियाओं (सोच, समस्या-समाधान, स्मृति) पर जोर देता है।
  • अंतर्दृष्टि अधिगम (Insight Learning):
    • प्रतिपादक: वोल्फगैंग कोहलर (Wolfgang Köhler) - गेस्टाल्ट मनोवैज्ञानिक।
    • प्रयोग: चिंपैंजी 'सुल्तान' पर प्रयोग। सुल्तान ने अचानक छड़ी का उपयोग करके या बक्से पर चढ़कर केले तक पहुंचना सीखा।
    • मुख्य विचार: समस्या का समाधान अचानक 'अंतर्दृष्टि' या 'आहा!' अनुभव के माध्यम से होता है, न कि केवल प्रयास और त्रुटि से। यह स्थिति के तत्वों के बीच संबंधों को समझने पर आधारित है।
  • अव्यक्त अधिगम (Latent Learning):
    • प्रतिपादक: एडवर्ड टोलमैन (Edward Tolman)।
    • प्रयोग: चूहे पर भूलभुलैया में प्रयोग। चूहों ने बिना किसी स्पष्ट प्रबलन के भूलभुलैया का नक्शा (संज्ञानात्मक मानचित्र) सीख लिया था, और जब प्रबलन दिया गया, तो उन्होंने तुरंत अपना अधिगम प्रदर्शित किया।
    • मुख्य विचार: अधिगम बिना किसी तत्काल व्यवहार प्रदर्शन या प्रबलन के हो सकता है। ज्ञान का अधिग्रहण हो सकता है, लेकिन वह तब तक 'अव्यक्त' रहता है जब तक कि उसे प्रदर्शित करने के लिए कोई प्रेरणा या आवश्यकता न हो।

4. अधिगम का स्थानांतरण (Transfer of Learning):

एक स्थिति में अर्जित ज्ञान या कौशल का दूसरी स्थिति में उपयोग करना अधिगम का स्थानांतरण कहलाता है।

  • सकारात्मक स्थानांतरण (Positive Transfer): जब एक स्थिति में सीखा गया अधिगम दूसरी स्थिति में अधिगम में सहायता करता है। (जैसे, साइकिल चलाना सीखने के बाद मोटरसाइकिल चलाना आसान होता है)।
  • नकारात्मक स्थानांतरण (Negative Transfer): जब एक स्थिति में सीखा गया अधिगम दूसरी स्थिति में अधिगम में बाधा डालता है। (जैसे, बाएं हाथ से लिखने वाले व्यक्ति के लिए दाएं हाथ से लिखना सीखना)।
  • शून्य स्थानांतरण (Zero Transfer): जब एक स्थिति में सीखा गया अधिगम दूसरी स्थिति में अधिगम पर कोई प्रभाव नहीं डालता। (जैसे, गणित सीखने का पाक कला पर कोई प्रभाव नहीं)।

5. अधिगम वक्र (Learning Curve):

अधिगम की प्रगति को ग्राफिक रूप से दर्शाने वाला वक्र।

  • उत्तल वक्र (Convex Curve): अधिगम की शुरुआत में तेजी से प्रगति होती है, फिर धीरे-धीरे कम हो जाती है।
  • अवतल वक्र (Concave Curve): अधिगम की शुरुआत में धीमी प्रगति होती है, फिर तेजी से बढ़ती है।
  • 'S' आकार का वक्र (S-shaped Curve): शुरुआत में धीमी, फिर तेजी से, और अंत में फिर से धीमी प्रगति। यह सबसे सामान्य वक्र है।

6. अधिगम को प्रभावित करने वाले कारक (Factors Affecting Learning):

  • अधिगमकर्ता से संबंधित कारक (Learner-related Factors):
    • अभिप्रेरणा (Motivation): सीखने की इच्छा। उच्च अभिप्रेरणा बेहतर अधिगम की ओर ले जाती है।
    • परिपक्वता (Maturation): शारीरिक और मानसिक परिपक्वता अधिगम के लिए आवश्यक है।
    • बुद्धि (Intelligence): उच्च बुद्धि वाले व्यक्ति तेजी से और अधिक प्रभावी ढंग से सीखते हैं।
    • रुचि और अभिवृत्ति (Interest and Attitude): जिस विषय में रुचि होती है, उसे सीखना आसान होता है।
    • तैयारी (Readiness): शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार होना।
  • अधिगम सामग्री से संबंधित कारक (Material-related Factors):
    • अर्थपूर्णता (Meaningfulness): सामग्री जितनी अधिक अर्थपूर्ण होगी, उसे सीखना उतना ही आसान होगा।
    • लंबाई और जटिलता (Length and Complexity): सामग्री जितनी लंबी या जटिल होगी, उसे सीखना उतना ही कठिन होगा।
    • संगठन (Organization): सुव्यवस्थित सामग्री को आसानी से सीखा जा सकता है।
  • अधिगम विधि से संबंधित कारक (Method-related Factors):
    • पूर्ण बनाम अंश विधि (Whole vs. Part Method): सामग्री की प्रकृति के आधार पर कौन सी विधि बेहतर है।
    • वितरित बनाम अवितरित अभ्यास (Distributed vs. Massed Practice): थोड़े-थोड़े अंतराल पर अभ्यास (वितरित) आमतौर पर एक साथ लंबे समय तक अभ्यास (अवितरित) से बेहतर होता है।
    • प्रबलन और प्रतिपुष्टि (Reinforcement and Feedback): उचित प्रबलन और तत्काल प्रतिपुष्टि अधिगम को बढ़ाती है।
  • पर्यावरण संबंधी कारक (Environmental Factors):
    • भौतिक वातावरण: शांत और अनुकूल वातावरण अधिगम के लिए सहायक होता है।
    • सामाजिक वातावरण: शिक्षक-छात्र संबंध, सहकर्मी समूह का प्रभाव।

बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions - MCQs)

यहाँ अधिगम अध्याय पर आधारित 10 बहुविकल्पीय प्रश्न दिए गए हैं:

1. अधिगम को व्यवहार में अपेक्षाकृत स्थायी परिवर्तन के रूप में परिभाषित किया जाता है जो किसके परिणामस्वरूप होता है?
a) बीमारी या थकान
b) परिपक्वता
c) अनुभव या अभ्यास
d) जन्मजात प्रवृत्ति

2. इवान पावलोव का शास्त्रीय अनुबंधन सिद्धांत किस जानवर पर किए गए प्रयोगों पर आधारित है?
a) चूहा
b) कबूतर
c) कुत्ता
d) बिल्ली

3. शास्त्रीय अनुबंधन में, जब अनुबंधित उद्दीपक को बार-बार अनानुबंधित उद्दीपक के बिना प्रस्तुत किया जाता है, तो अनुबंधित अनुक्रिया धीरे-धीरे समाप्त हो जाती है। इस प्रक्रिया को क्या कहते हैं?
a) अधिग्रहण
b) विलोपन
c) स्वतः पुनर्लाभ
d) उद्दीपक सामान्यीकरण

4. बी.एफ. स्किनर का नाम मुख्य रूप से किस प्रकार के अधिगम सिद्धांत से जुड़ा है?
a) शास्त्रीय अनुबंधन
b) प्रेक्षणात्मक अधिगम
c) क्रियाप्रसूत अनुबंधन
d) अंतर्दृष्टि अधिगम

5. किसी वांछित व्यवहार के बाद एक अप्रिय उद्दीपक को हटाने से उस व्यवहार की आवृत्ति बढ़ जाती है। इसे क्या कहते हैं?
a) सकारात्मक प्रबलन
b) नकारात्मक प्रबलन
c) सकारात्मक दंड
d) नकारात्मक दंड

6. अल्बर्ट बंडूरा के प्रेक्षणात्मक अधिगम सिद्धांत में, मॉडल के व्यवहार को स्मृति में बनाए रखने की प्रक्रिया को क्या कहा जाता है?
a) अवधान
b) धारण
c) पुनरुत्पादन
d) अभिप्रेरणा

7. वोल्फगैंग कोहलर ने चिंपैंजी पर किए गए अपने प्रयोगों के माध्यम से किस प्रकार के अधिगम का प्रदर्शन किया?
a) अव्यक्त अधिगम
b) अंतर्दृष्टि अधिगम
c) शास्त्रीय अनुबंधन
d) क्रियाप्रसूत अनुबंधन

8. जब एक स्थिति में सीखा गया अधिगम दूसरी स्थिति में अधिगम में बाधा डालता है, तो इसे क्या कहते हैं?
a) सकारात्मक स्थानांतरण
b) नकारात्मक स्थानांतरण
c) शून्य स्थानांतरण
d) ऊर्ध्वाधर स्थानांतरण

9. अधिगम की वह अनुसूची जिसमें एक निश्चित संख्या में अनुक्रियाओं के बाद प्रबलन दिया जाता है, क्या कहलाती है?
a) निश्चित अंतराल अनुसूची
b) परिवर्ती अंतराल अनुसूची
c) निश्चित अनुपात अनुसूची
d) परिवर्ती अनुपात अनुसूची

10. निम्नलिखित में से कौन सा कारक अधिगमकर्ता से संबंधित नहीं है जो अधिगम को प्रभावित करता है?
a) अभिप्रेरणा
b) बुद्धि
c) अधिगम सामग्री की अर्थपूर्णता
d) परिपक्वता


उत्तरमाला:

  1. c) अनुभव या अभ्यास
  2. c) कुत्ता
  3. b) विलोपन
  4. c) क्रियाप्रसूत अनुबंधन
  5. b) नकारात्मक प्रबलन
  6. b) धारण
  7. b) अंतर्दृष्टि अधिगम
  8. b) नकारात्मक स्थानांतरण
  9. c) निश्चित अनुपात अनुसूची
  10. c) अधिगम सामग्री की अर्थपूर्णता

आशा है कि यह विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपको 'अधिगम' अध्याय की गहरी समझ प्रदान करेंगे और आपकी सरकारी परीक्षा की तैयारी में सहायक सिद्ध होंगे। अपनी तैयारी जारी रखें और सफलता प्राप्त करें!

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