Class 11 Sociology Notes Chapter 2 (समाजशास्त्र में प्रयुक्त शब्दावली; संकल्पनाएँ एव उनका उपयोग) – SamajShashtra-I Book

SamajShashtra-I
नमस्ते विद्यार्थियों।

आज हम कक्षा 11 की समाजशास्त्र की पुस्तक 'समाजशास्त्र परिचय' के दूसरे अध्याय 'समाजशास्त्र में प्रयुक्त शब्दावली, संकल्पनाएँ एवं उनका उपयोग' का विस्तृत अध्ययन करेंगे। यह अध्याय प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह समाजशास्त्र की आधारशिला है। इसमें दी गई संकल्पनाओं को समझे बिना समाजशास्त्र को समझना असंभव है।


अध्याय 2: समाजशास्त्र में प्रयुक्त शब्दावली, संकल्पनाएँ एवं उनका उपयोग - विस्तृत नोट्स

इस अध्याय का मुख्य उद्देश्य समाजशास्त्र के अध्ययन में प्रयोग होने वाली बुनियादी अवधारणाओं से परिचित कराना है। ये अवधारणाएँ समाज को देखने और समझने का एक विशेष दृष्टिकोण प्रदान करती हैं।

1. सामाजिक समूह (Social Group)

  • परिभाषा: सामाजिक समूह दो या दो से अधिक व्यक्तियों का एक ऐसा संग्रह है, जिनमें निरंतर अंतःक्रिया होती है, जो समान रुचियों, मूल्यों और मानदंडों को साझा करते हैं और जिनमें 'हम' की भावना (sense of belonging) पाई जाती है।

  • विशेषताएँ:

    • निरंतर अंतःक्रिया (Persistent Interaction)।
    • एक साझा पहचान और 'हम' की भावना।
    • समान हित, मूल्य और व्यवहार के प्रतिमान।
    • समूह की अपनी एक संरचना होती है।
  • समूहों के प्रकार:

    • प्राथमिक और द्वितीयक समूह (Primary and Secondary Groups): यह वर्गीकरण चार्ल्स कूले (Charles Cooley) ने दिया था।

      • प्राथमिक समूह: ये आकार में छोटे होते हैं। सदस्यों के बीच घनिष्ठ, आमने-सामने के और व्यक्तिगत संबंध होते हैं। इनमें भावनात्मक जुड़ाव अधिक होता है। उदाहरण: परिवार, मित्रों का समूह, पड़ोस।
      • द्वितीयक समूह: ये आकार में बड़े होते हैं। संबंध अवैयक्तिक, औपचारिक और लक्ष्य-उन्मुख होते हैं। इनमें भावनात्मक जुड़ाव कम होता है। उदाहरण: कार्यालय, राजनीतिक दल, स्कूल।
    • अंतःसमूह और बाह्यसमूह (In-group and Out-group): यह वर्गीकरण विलियम ग्राहम समनर (W.G. Sumner) ने दिया था।

      • अंतःसमूह (हम-समूह): वह समूह जिससे व्यक्ति अपनी पहचान जोड़ता है और उसके प्रति अपनेपन और वफादारी की भावना रखता है।
      • बाह्यसमूह (वे-समूह): वह समूह जिससे व्यक्ति अपनी पहचान नहीं जोड़ता और जिसके प्रति अक्सर उदासीनता या विरोध का भाव रखता है।
    • संदर्भ समूह (Reference Group):

      • यह वह समूह है जिसके व्यवहार, मूल्यों और जीवन-शैली को व्यक्ति अपने लिए आदर्श मानता है और उसका अनुकरण करने की आकांक्षा रखता है, भले ही वह उस समूह का सदस्य न हो। उदाहरण: एक छात्र जो सिविल सेवक बनने की तैयारी कर रहा है, उसके लिए सिविल सेवकों का समूह एक संदर्भ समूह है।
    • समवयस्क समूह (Peer Group):

      • यह मुख्य रूप से समान आयु वर्ग के लोगों का समूह होता है, जिनके हित और सामाजिक स्थिति लगभग एक जैसी होती है। यह किशोरावस्था में समाजीकरण का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।

2. प्रस्थिति और भूमिका (Status and Role)

  • प्रस्थिति (Status): समाज या एक समूह में व्यक्ति को प्राप्त पद या स्थान को प्रस्थिति कहते हैं। यह सामाजिक पहचान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

    • प्रदत्त प्रस्थिति (Ascribed Status): यह वह प्रस्थिति है जो व्यक्ति को जन्म के आधार पर बिना किसी प्रयास के प्राप्त होती है। उदाहरण: जाति, लिंग, आयु, प्रजाति।
    • अर्जित प्रस्थिति (Achieved Status): यह वह प्रस्थिति है जिसे व्यक्ति अपनी योग्यता, कौशल और प्रयासों से प्राप्त करता है। उदाहरण: डॉक्टर, शिक्षक, खिलाड़ी, पति/पत्नी।
  • भूमिका (Role): प्रस्थिति का गतिशील पहलू भूमिका कहलाता है। यह वह व्यवहार है जिसकी अपेक्षा एक विशेष प्रस्थिति धारण करने वाले व्यक्ति से की जाती है। हर प्रस्थिति से जुड़ी कुछ भूमिकाएँ होती हैं।

    • भूमिका संघर्ष (Role Conflict): जब एक व्यक्ति को दो या दो से अधिक भिन्न-भिन्न प्रस्थितियों से जुड़ी परस्पर विरोधी भूमिकाएँ निभानी पड़ती हैं, तो उसे भूमिका संघर्ष कहते हैं। उदाहरण: एक महिला पुलिस अधिकारी जिसे एक प्रदर्शनकारी भीड़ को नियंत्रित करना है जिसमें उसका अपना बेटा भी शामिल है। यहाँ 'माँ' की भूमिका और 'पुलिस अधिकारी' की भूमिका में संघर्ष है।
    • भूमिका तनाव (Role Strain): जब एक ही प्रस्थिति से जुड़ी भूमिकाओं में तनाव या खिंचाव उत्पन्न होता है, तो उसे भूमिका तनाव कहते हैं। उदाहरण: एक शिक्षक से अपेक्षा की जाती है कि वह छात्रों के प्रति मित्रवत भी रहे और अनुशासन भी बनाए रखे। इन दोनों अपेक्षाओं में कभी-कभी तनाव उत्पन्न हो जाता है।

3. सामाजिक स्तरीकरण (Social Stratification)

  • परिभाषा: सामाजिक स्तरीकरण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा समाज के विभिन्न समूहों को संपत्ति, शक्ति और प्रतिष्ठा के आधार पर एक ऊँच-नीच के क्रम (पदानुक्रम) में व्यवस्थित किया जाता है। यह समाज में व्याप्त संरचनात्मक असमानता को दर्शाता है।

  • विशेषताएँ:

    • यह व्यक्ति की नहीं, बल्कि समाज की एक विशेषता है।
    • यह पीढ़ी-दर-पीढ़ी बना रहता है।
    • यह सार्वभौमिक है, लेकिन इसका स्वरूप भिन्न-भिन्न समाजों में अलग होता है।
    • इसमें केवल असमानता ही नहीं, बल्कि इसको न्यायोचित ठहराने वाली विचारधारा भी शामिल होती है।
  • स्तरीकरण की प्रमुख प्रणालियाँ:

    • दासता (Slavery): एक व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति की संपत्ति माना जाता है।
    • जाति (Caste): यह एक बंद व्यवस्था है, जिसमें व्यक्ति की सामाजिक स्थिति पूरी तरह से जन्म पर आधारित होती है। इसमें सामाजिक गतिशीलता (ऊपर या नीचे जाना) लगभग असंभव होती है। यह प्रदत्त प्रस्थिति पर आधारित है।
    • वर्ग (Class): यह एक खुली व्यवस्था है, जो मुख्य रूप से आर्थिक कारकों (आय, संपत्ति) और व्यक्तिगत उपलब्धियों पर आधारित होती है। इसमें सामाजिक गतिशीलता संभव है। यह अर्जित प्रस्थिति पर आधारित है।

4. सामाजिक नियंत्रण (Social Control)

  • परिभाषा: सामाजिक नियंत्रण उन सभी साधनों और प्रक्रियाओं को संदर्भित करता है जिनके द्वारा समाज अपने सदस्यों के व्यवहार को नियंत्रित, निर्देशित और व्यवस्थित करता है ताकि सामाजिक व्यवस्था बनी रहे।

  • उद्देश्य: समाज में अनुरूपता (conformity) और व्यवस्था बनाए रखना तथा विचलित व्यवहार (deviant behavior) को रोकना।

  • सामाजिक नियंत्रण के प्रकार:

    • औपचारिक सामाजिक नियंत्रण (Formal Social Control):

      • यह राज्य या अन्य औपचारिक संस्थाओं द्वारा लिखित कानूनों, नियमों और विनियमों के माध्यम से लागू किया जाता है।
      • इसका उल्लंघन करने पर निश्चित दंड का प्रावधान होता है।
      • उदाहरण: पुलिस, न्यायालय, सेना, कानून।
    • अनौपचारिक सामाजिक नियंत्रण (Informal Social Control):

      • यह परिवार, मित्र समूह, और समुदाय द्वारा अलिखित सामाजिक मानदंडों, परंपराओं और मूल्यों के माध्यम से लागू किया जाता है।
      • इसका उल्लंघन करने पर निंदा, उपहास, बहिष्कार जैसी सामाजिक प्रतिक्रियाएँ होती हैं।
      • उदाहरण: हँसी उड़ाना, आलोचना करना, सामाजिक बहिष्कार, प्रशंसा।

अभ्यास हेतु बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

प्रश्न 1. परिवार और मित्रों का समूह, समाजशास्त्रीय शब्दावली में किस प्रकार के समूह का उदाहरण है?
(क) द्वितीयक समूह
(ख) संदर्भ समूह
(ग) प्राथमिक समूह
(घ) बाह्यसमूह

प्रश्न 2. एक डॉक्टर या एक शिक्षक की सामाजिक स्थिति निम्नलिखित में से किसका उदाहरण है?
(क) प्रदत्त प्रस्थिति
(ख) अर्जित प्रस्थिति
(ग) भूमिका संघर्ष
(घ) सामाजिक नियंत्रण

प्रश्न 3. जब कोई व्यक्ति किसी दूसरे समूह की जीवन-शैली का अनुकरण करता है क्योंकि वह उस समूह का सदस्य बनना चाहता है, तो वह समूह कहलाता है:
(क) समवयस्क समूह
(ख) अंतःसमूह
(ग) बाह्यसमूह
(घ) संदर्भ समूह

प्रश्न 4. समाज में संपत्ति, शक्ति और प्रतिष्ठा के आधार पर समूहों का ऊँच-नीच के क्रम में विभाजन क्या कहलाता है?
(क) सामाजिक नियंत्रण
(ख) सामाजिक स्तरीकरण
(ग) समाजीकरण
(घ) सामाजिक गतिशीलता

प्रश्न 5. जाति और वर्ग-आधारित स्तरीकरण में मुख्य अंतर क्या है?
(क) जाति अर्जित है, जबकि वर्ग प्रदत्त है।
(ख) जाति एक खुली व्यवस्था है, जबकि वर्ग एक बंद व्यवस्था है।
(ग) जाति जन्म पर आधारित है, जबकि वर्ग मुख्य रूप से आर्थिक स्थिति पर।
(घ) जाति व्यवस्था में गतिशीलता संभव है, वर्ग में नहीं।

प्रश्न 6. पुलिस और न्यायालय द्वारा लागू किए जाने वाले नियम किस प्रकार के सामाजिक नियंत्रण का उदाहरण हैं?
(क) अनौपचारिक सामाजिक नियंत्रण
(ख) औपचारिक सामाजिक नियंत्रण
(ग) सकारात्मक सामाजिक नियंत्रण
(घ) नकारात्मक सामाजिक नियंत्रण

प्रश्न 7. एक कामकाजी माँ को अपने दफ्तर के काम और बच्चे की देखभाल के बीच तालमेल बिठाने में जो कठिनाई होती है, उसे क्या कहेंगे?
(क) भूमिका तनाव (Role Strain)
(ख) भूमिका संघर्ष (Role Conflict)
(ग) प्रस्थिति संघर्ष
(घ) सामाजिक विघटन

प्रश्न 8. 'हम-समूह' (We-group) की अवधारणा निम्नलिखित में से किस संकल्पना से संबंधित है?
(क) द्वितीयक समूह
(ख) संदर्भ समूह
(ग) अंतःसमूह
(घ) समवयस्क समूह

प्रश्न 9. किसी प्रस्थिति से जुड़े अपेक्षित व्यवहार को क्या कहा जाता है?
(क) मानदंड
(ख) मूल्य
(ग) भूमिका
(घ) कानून

प्रश्न 10. उपहास, निंदा और सामाजिक बहिष्कार किस प्रकार के सामाजिक नियंत्रण के साधन हैं?
(क) औपचारिक
(ख) कानूनी
(ग) अनौपचारिक
(घ) राजनीतिक


उत्तरमाला:

  1. (ग) प्राथमिक समूह
  2. (ख) अर्जित प्रस्थिति
  3. (घ) संदर्भ समूह
  4. (ख) सामाजिक स्तरीकरण
  5. (ग) जाति जन्म पर आधारित है, जबकि वर्ग मुख्य रूप से आर्थिक स्थिति पर।
  6. (ख) औपचारिक सामाजिक नियंत्रण
  7. (ख) भूमिका संघर्ष (क्योंकि 'माँ' और 'कर्मचारी' दो अलग-अलग प्रस्थितियाँ हैं)
  8. (ग) अंतःसमूह
  9. (ग) भूमिका
  10. (ग) अनौपचारिक

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