Class 12 Accountancy Notes Chapter 1 (अलाभकारी संस्थाओं के लिए लेखांकन) – Lekhashashtra Part-I Book

प्रिय विद्यार्थियों,
आज हम आपकी लेखाशास्त्र की पुस्तक 'लेखाशास्त्र पार्ट-I' के अध्याय 1, 'अलाभकारी संस्थाओं के लिए लेखांकन' का विस्तृत अध्ययन करेंगे। यह अध्याय सरकारी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे संबंधित प्रश्न अवधारणात्मक और गणनात्मक दोनों प्रकार के होते हैं। आइए, इस अध्याय की मुख्य अवधारणाओं को गहराई से समझते हैं।
अध्याय 1: अलाभकारी संस्थाओं के लिए लेखांकन (Accounting for Not-for-Profit Organizations)
I. परिचय (Introduction)
अलाभकारी संस्थाएँ वे संस्थाएँ होती हैं जिनका मुख्य उद्देश्य लाभ कमाना नहीं होता, बल्कि अपने सदस्यों या समाज को कोई विशिष्ट सेवा प्रदान करना होता है। ये संस्थाएँ शिक्षा, स्वास्थ्य, धर्म, कला, संस्कृति, खेल आदि क्षेत्रों में कार्य करती हैं।
- उद्देश्य: इनका प्राथमिक उद्देश्य किसी विशिष्ट सेवा को बढ़ावा देना या सार्वजनिक कल्याण करना होता है।
- उदाहरण: स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, पुस्तकालय, धार्मिक संस्थाएँ, खेल क्लब, चैरिटेबल ट्रस्ट आदि।
- लाभकारी संस्थाओं से भिन्नता:
- उद्देश्य: लाभकारी संस्थाओं का उद्देश्य लाभ कमाना होता है, जबकि अलाभकारी संस्थाओं का उद्देश्य सेवा प्रदान करना होता है।
- मालिक: लाभकारी संस्थाओं के मालिक शेयरधारक होते हैं, जबकि अलाभकारी संस्थाओं के मालिक नहीं होते; इन्हें न्यासी (Trustees) या प्रबंध समिति द्वारा चलाया जाता है।
- वित्तीय विवरण: लाभकारी संस्थाएँ व्यापारिक खाता, लाभ-हानि खाता और तुलन-पत्र बनाती हैं, जबकि अलाभकारी संस्थाएँ प्राप्ति एवं भुगतान खाता, आय एवं व्यय खाता और स्थिति विवरण बनाती हैं।
- लाभ/अधिशेष: लाभकारी संस्थाएँ लाभ कमाती हैं जिसे मालिकों में वितरित किया जा सकता है, जबकि अलाभकारी संस्थाएँ अधिशेष (Surplus) या कमी (Deficit) दिखाती हैं जिसे वितरित नहीं किया जाता, बल्कि पूंजी निधि में जोड़ दिया जाता है।
II. अलाभकारी संस्थाओं की विशेषताएँ (Characteristics of NPOs)
- सेवा उद्देश्य: इनका मुख्य उद्देश्य समाज या सदस्यों को सेवा प्रदान करना है, न कि लाभ कमाना।
- पृथक वैधानिक इकाई: ये संस्थाएँ अपने सदस्यों से एक अलग वैधानिक अस्तित्व रखती हैं। इनका गठन ट्रस्ट, सोसाइटी या कंपनी अधिनियम की धारा 8 के तहत होता है।
- प्रबंध: इनका प्रबंधन आमतौर पर एक प्रबंध समिति या न्यासी बोर्ड द्वारा किया जाता है, जिन्हें सदस्यों द्वारा चुना जाता है।
- निधियों के स्रोत: इनकी आय के मुख्य स्रोत चंदा (Subscriptions), दान (Donations), सरकारी अनुदान (Grants), प्रवेश शुल्क (Entrance Fees), आजीवन सदस्यता शुल्क (Life Membership Fees) आदि होते हैं।
- अधिशेष का वितरण नहीं: यदि संस्था को आय पर व्यय का आधिक्य (अधिशेष) होता है, तो इसे सदस्यों में वितरित नहीं किया जाता, बल्कि इसे पूंजी निधि (Capital Fund) में जोड़ दिया जाता है।
- लेखांकन प्रणाली: ये संस्थाएँ भी सही वित्तीय स्थिति और परिणामों को जानने के लिए लेखांकन सिद्धांतों का पालन करती हैं।
III. अलाभकारी संस्थाओं के वित्तीय विवरण (Financial Statements of NPOs)
अलाभकारी संस्थाएँ वित्तीय वर्ष के अंत में निम्नलिखित वित्तीय विवरण तैयार करती हैं:
-
प्राप्ति एवं भुगतान खाता (Receipts and Payments Account):
- अर्थ: यह एक वित्तीय वर्ष के दौरान सभी नकद प्राप्तियों और नकद भुगतानों का एक सारांश होता है। यह एक वास्तविक खाते (Real Account) की प्रकृति का होता है।
- विशेषताएँ:
- यह नकद बही (Cash Book) का सारांश होता है।
- यह नकद आधार (Cash Basis) पर तैयार किया जाता है, अर्थात इसमें केवल वास्तविक नकद लेन-देन ही दर्ज किए जाते हैं।
- इसमें पूंजीगत (Capital) और आयगत (Revenue) दोनों प्रकृति की मदें शामिल होती हैं।
- इसमें चालू वर्ष, पिछले वर्ष और अगले वर्ष से संबंधित सभी नकद प्राप्तियाँ और भुगतान शामिल होते हैं।
- यह हमेशा डेबिट शेष (प्रारंभिक नकद/बैंक शेष) से शुरू होता है और क्रेडिट शेष (अंतिम नकद/बैंक शेष) पर समाप्त होता है।
- गैर-नकद मदें (जैसे ह्रास, अदत्त व्यय) इसमें शामिल नहीं होतीं।
- प्रारूप:
प्राप्तियाँ (Dr.) राशि भुगतान (Cr.) राशि शेष आगे लाया गया (नकद/बैंक) XXX शेष आगे लाया गया (बैंक ओवरड्राफ्ट) XXX चंदा XXX मजदूरी एवं वेतन XXX दान XXX किराया XXX प्रवेश शुल्क XXX बीमा XXX सरकारी अनुदान XXX मुद्रण एवं लेखन सामग्री XXX आजीवन सदस्यता शुल्क XXX डाक एवं तार XXX पुरानी खेल सामग्री की बिक्री XXX स्थायी संपत्ति की खरीद XXX ब्याज XXX निवेश की खरीद XXX लॉकर किराया XXX ऋण का भुगतान XXX स्थायी संपत्ति की बिक्री XXX शेष आगे ले जाया गया (नकद/बैंक) XXX कुल XXX कुल XXX
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आय एवं व्यय खाता (Income and Expenditure Account):
- अर्थ: यह एक लाभ-हानि खाते के समान होता है और एक विशिष्ट लेखा अवधि के लिए संस्था की आयगत प्रकृति की आय और व्ययों को दर्शाता है। यह एक नाममात्र खाता (Nominal Account) होता है।
- विशेषताएँ:
- यह उपार्जन आधार (Accrual Basis) पर तैयार किया जाता है, अर्थात इसमें चालू वर्ष से संबंधित सभी आय और व्यय शामिल होते हैं, चाहे वे नकद में प्राप्त हुए हों या भुगतान किए गए हों या नहीं।
- इसमें केवल आयगत (Revenue) प्रकृति की मदें ही शामिल होती हैं। पूंजीगत मदों को इसमें शामिल नहीं किया जाता।
- इसमें गैर-नकद मदें जैसे ह्रास, अदत्त व्यय, पूर्वदत्त व्यय, उपार्जित आय आदि के समायोजन किए जाते हैं।
- यह अधिशेष (Surplus) या कमी (Deficit) दर्शाता है। अधिशेष तब होता है जब आय व्यय से अधिक होती है, और कमी तब होती है जब व्यय आय से अधिक होते हैं।
- अधिशेष को पूंजी निधि में जोड़ा जाता है और कमी को पूंजी निधि से घटाया जाता है।
- प्रारूप:
व्यय (Dr.) राशि आय (Cr.) राशि वेतन XXX चंदा XXX किराया XXX दान (सामान्य) XXX मुद्रण एवं लेखन सामग्री XXX प्रवेश शुल्क (यदि आयगत) XXX ह्रास XXX ब्याज XXX खेल सामग्री का उपभोग XXX लॉकर किराया XXX बीमा (समायोजन के बाद) XXX पुरानी सामग्री की बिक्री XXX अधिशेष (आय का व्यय पर आधिक्य) XXX कमी (व्यय का आय पर आधिक्य) XXX कुल XXX कुल XXX
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स्थिति विवरण (Balance Sheet):
- अर्थ: यह एक निश्चित तिथि पर संस्था की वित्तीय स्थिति को दर्शाता है। यह लाभकारी संस्थाओं के तुलन-पत्र के समान होता है।
- विशेषताएँ:
- यह एक निश्चित तिथि पर संस्था की संपत्तियों और देनदारियों को दर्शाता है।
- इसमें पूंजी निधि (Capital Fund) को दर्शाया जाता है, जिसमें अधिशेष जोड़ा जाता है और कमी घटाई जाती है।
- विशिष्ट कोष (Specific Funds) को दायित्व पक्ष में दर्शाया जाता है।
- इसमें पूंजीगत प्राप्तियाँ और पूंजीगत भुगतान शामिल होते हैं।
- प्रारूप:
दायित्व राशि संपत्तियाँ राशि पूंजी निधि XXX नकद एवं बैंक XXX (+) अधिशेष / (-) कमी XXX अदत्त चंदा XXX (+) आजीवन सदस्यता शुल्क XXX पूर्वदत्त व्यय XXX (+) विशिष्ट दान / विरासत XXX निवेश XXX विशिष्ट कोष (जैसे भवन कोष) XXX स्थायी संपत्तियाँ XXX अदत्त व्यय XXX उपार्जित आय XXX अग्रिम प्राप्त चंदा XXX स्टॉक (खेल सामग्री, दवाइयाँ) XXX लेनदार XXX कुल XXX कुल XXX
IV. विशिष्ट मदों का लेखांकन (Accounting for Specific Items)
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चंदा (Subscriptions): यह अलाभकारी संस्थाओं की आय का मुख्य स्रोत होता है। यह आयगत प्रकृति का होता है और आय एवं व्यय खाते के क्रेडिट पक्ष में दर्शाया जाता है।
- चालू वर्ष के चंदे की गणना:
प्रारंभिक अदत्त चंदा (-)
प्रारंभिक अग्रिम चंदा (+)
प्राप्ति एवं भुगतान खाते में प्राप्त चंदा (+)
अंतिम अदत्त चंदा (+)
अंतिम अग्रिम चंदा (-)
= चालू वर्ष के लिए आय एवं व्यय खाते में दर्शाया जाने वाला चंदा - सूत्र:
आय एवं व्यय खाते में दर्शाया जाने वाला चंदा = प्राप्ति एवं भुगतान खाते में प्राप्त चंदा
(+) चालू वर्ष का अदत्त चंदा
(-) पिछले वर्ष का अदत्त चंदा (जो चालू वर्ष में प्राप्त हुआ)
(+) पिछले वर्ष अग्रिम प्राप्त चंदा (जो चालू वर्ष से संबंधित है)
(-) चालू वर्ष में अग्रिम प्राप्त चंदा (जो अगले वर्ष से संबंधित है)
- चालू वर्ष के चंदे की गणना:
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प्रवेश शुल्क / प्रवेश शुल्क (Entrance Fees / Admission Fees):
- यदि राशि छोटी हो, तो इसे आयगत माना जाता है और आय एवं व्यय खाते के क्रेडिट पक्ष में दर्शाया जाता है।
- यदि राशि बड़ी हो या संस्था की नीति इसे पूंजीगत मानने की हो, तो इसे पूंजी निधि में जोड़ा जाता है और स्थिति विवरण के दायित्व पक्ष में दर्शाया जाता है। (सामान्यतः इसे आयगत माना जाता है, जब तक कि स्पष्ट निर्देश न हों)।
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आजीवन सदस्यता शुल्क (Life Membership Fees): यह एक पूंजीगत प्राप्ति है क्योंकि यह एक सदस्य से उसके पूरे जीवनकाल के लिए एक बार प्राप्त होती है। इसे पूंजी निधि में जोड़ा जाता है और स्थिति विवरण के दायित्व पक्ष में दर्शाया जाता है।
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दान (Donations):
- सामान्य दान (General Donations): यदि दान किसी विशिष्ट उद्देश्य के लिए नहीं है, तो इसे सामान्य दान कहते हैं। छोटी राशि के सामान्य दान को आयगत माना जाता है और आय एवं व्यय खाते के क्रेडिट पक्ष में दर्शाया जाता है। बड़ी राशि के सामान्य दान को पूंजीगत माना जा सकता है और पूंजी निधि में जोड़ा जा सकता है।
- विशिष्ट दान (Specific Donations): यदि दान किसी विशिष्ट उद्देश्य के लिए प्राप्त होता है (जैसे भवन निर्माण, पुरस्कार वितरण), तो इसे पूंजीगत माना जाता है और स्थिति विवरण के दायित्व पक्ष में एक अलग कोष के रूप में दर्शाया जाता है।
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विरासत / वसीयत (Legacies): यह वह राशि है जो किसी व्यक्ति की वसीयत के अनुसार संस्था को प्राप्त होती है। यह पूंजीगत प्रकृति की होती है और पूंजी निधि में जोड़ी जाती है या यदि किसी विशिष्ट उद्देश्य के लिए हो, तो एक अलग कोष के रूप में दर्शाई जाती है।
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सरकारी अनुदान (Grants):
- सामान्य अनुदान (General Grants): यदि अनुदान किसी विशिष्ट उद्देश्य के लिए नहीं है, तो इसे आयगत माना जाता है और आय एवं व्यय खाते के क्रेडिट पक्ष में दर्शाया जाता है।
- विशिष्ट अनुदान (Specific Grants): यदि अनुदान किसी विशिष्ट उद्देश्य के लिए है (जैसे भवन अनुदान, खेल उपकरण अनुदान), तो इसे पूंजीगत माना जाता है और स्थिति विवरण के दायित्व पक्ष में एक अलग कोष के रूप में दर्शाया जाता है।
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स्थायी संपत्तियों की बिक्री (Sale of Fixed Assets):
- स्थायी संपत्ति की बिक्री से प्राप्त नकद राशि प्राप्ति एवं भुगतान खाते के डेबिट पक्ष में आती है।
- बिक्री पर होने वाले लाभ या हानि को आय एवं व्यय खाते में दर्शाया जाता है।
- लाभ = बिक्री मूल्य - (पुस्तक मूल्य - ह्रास)
- हानि = (पुस्तक मूल्य - ह्रास) - बिक्री मूल्य
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उपभोग्य वस्तुओं का लेखांकन (Accounting for Consumable Items): (जैसे खेल सामग्री, दवाइयाँ, लेखन सामग्री)
- आय एवं व्यय खाते में उपभोग की गई राशि को दर्शाया जाता है।
- उपभोग की गई सामग्री की गणना:
प्रारंभिक स्टॉक (+)
चालू वर्ष में खरीद (+)
अंतिम स्टॉक (-)
= उपभोग की गई सामग्री
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कोष (Funds):
- विशिष्ट कोष (Specific Funds): ये वे कोष होते हैं जो किसी विशिष्ट उद्देश्य के लिए बनाए जाते हैं (जैसे पुरस्कार कोष, मैच कोष, भवन कोष)। इन कोषों से संबंधित आय (जैसे ब्याज) को कोष में जोड़ा जाता है और व्ययों को कोष से घटाया जाता है। इन्हें स्थिति विवरण के दायित्व पक्ष में दर्शाया जाता है।
- सामान्य कोष (General Fund) / पूंजी निधि (Capital Fund): यह अलाभकारी संस्थाओं की पूंजी होती है। इसमें अधिशेष जोड़ा जाता है और कमी घटाई जाती है।
V. प्राप्ति एवं भुगतान खाते से आय एवं व्यय खाता और स्थिति विवरण तैयार करना (Preparation of Income & Expenditure Account and Balance Sheet from Receipts & Payments Account)
यह प्रक्रिया निम्नलिखित चरणों में पूरी की जाती है:
- प्रारंभिक स्थिति विवरण तैयार करना: वर्ष के प्रारंभ में संपत्तियों और देनदारियों का उपयोग करके प्रारंभिक पूंजी निधि (Capital Fund) की गणना की जाती है।
- पूंजी निधि = प्रारंभिक संपत्तियाँ - प्रारंभिक देनदारियाँ
- आय एवं व्यय खाता तैयार करना:
- प्राप्ति एवं भुगतान खाते से सभी आयगत प्राप्तियों को आय एवं व्यय खाते के क्रेडिट पक्ष में और आयगत भुगतानों को डेबिट पक्ष में स्थानांतरित करें।
- गैर-नकद मदों और समायोजनों (जैसे अदत्त व्यय, पूर्वदत्त व्यय, ह्रास, उपार्जित आय, अग्रिम आय, उपभोग्य वस्तुओं का समायोजन) को ध्यान में रखें।
- स्थायी संपत्तियों की बिक्री पर लाभ या हानि को आय एवं व्यय खाते में दर्शाएँ।
- अधिशेष या कमी की गणना करें।
- अंतिम स्थिति विवरण तैयार करना:
- प्रारंभिक स्थिति विवरण से पूंजी निधि को लें।
- पूंजी निधि में अधिशेष जोड़ें या कमी घटाएँ।
- आजीवन सदस्यता शुल्क, विशिष्ट दान, विरासत आदि को पूंजी निधि में जोड़ें या अलग से दर्शाएँ।
- सभी स्थायी संपत्तियों को उनके समायोजित मूल्य पर दर्शाएँ (ह्रास घटाने के बाद)।
- सभी चालू संपत्तियाँ (नकद, बैंक, अदत्त चंदा, पूर्वदत्त व्यय, स्टॉक) और चालू देनदारियाँ (अदत्त व्यय, अग्रिम चंदा) दर्शाएँ।
- विशिष्ट कोषों को दायित्व पक्ष में दर्शाएँ।
VI. पूंजी निधि (Capital Fund / General Fund)
- यह अलाभकारी संस्थाओं की पूंजी होती है।
- इसकी गणना प्रारंभिक स्थिति विवरण बनाकर की जाती है:
पूंजी निधि = प्रारंभिक संपत्तियाँ - प्रारंभिक देनदारियाँ - आय एवं व्यय खाते से प्राप्त अधिशेष को इसमें जोड़ा जाता है, और कमी को इससे घटाया जाता है।
- आजीवन सदस्यता शुल्क, विशिष्ट दान (यदि पूंजीगत माने गए हों) और विरासत को भी इसमें जोड़ा जाता है।
बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions - MCQs)
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दें:
-
अलाभकारी संस्थाओं का मुख्य उद्देश्य क्या होता है?
a) लाभ कमाना
b) शेयरधारकों को लाभांश वितरित करना
c) समाज या सदस्यों को सेवा प्रदान करना
d) सरकारी करों का भुगतान करना -
प्राप्ति एवं भुगतान खाता किस आधार पर तैयार किया जाता है?
a) उपार्जन आधार
b) नकद आधार
c) संकर आधार
d) इनमें से कोई नहीं -
आय एवं व्यय खाता किस प्रकृति का होता है?
a) वास्तविक खाता
b) व्यक्तिगत खाता
c) नाममात्र खाता
d) इनमें से कोई नहीं -
आजीवन सदस्यता शुल्क को आमतौर पर माना जाता है:
a) आयगत प्राप्ति
b) पूंजीगत प्राप्ति
c) व्यय
d) संपत्ति -
यदि चंदा बकाया हो, तो उसे आय एवं व्यय खाते में कैसे समायोजित किया जाता है?
a) प्राप्त चंदे से घटाया जाता है
b) प्राप्त चंदे में जोड़ा जाता है
c) इसे अनदेखा किया जाता है
d) इसे केवल स्थिति विवरण में दिखाया जाता है -
आय एवं व्यय खाता क्या दर्शाता है?
a) नकद शेष
b) वित्तीय स्थिति
c) अधिशेष या कमी
d) कुल प्राप्तियाँ और भुगतान -
निम्न में से कौन सी मद आय एवं व्यय खाते में नहीं दिखाई जाती है?
a) ह्रास
b) वेतन
c) स्थायी संपत्ति की खरीद
d) चंदा -
एक अलाभकारी संस्था के लिए 'पूंजी निधि' का अर्थ है:
a) संस्था की कुल देनदारियाँ
b) संस्था की कुल संपत्तियाँ
c) संस्था की पूंजी
d) सरकार से प्राप्त अनुदान -
प्राप्ति एवं भुगतान खाते में _______ मदें शामिल होती हैं।
a) केवल आयगत
b) केवल पूंजीगत
c) आयगत और पूंजीगत दोनों
d) गैर-नकद -
यदि किसी विशिष्ट उद्देश्य के लिए दान प्राप्त होता है (जैसे भवन कोष), तो इसे कहाँ दिखाया जाता है?
a) आय एवं व्यय खाते के क्रेडिट पक्ष में
b) आय एवं व्यय खाते के डेबिट पक्ष में
c) स्थिति विवरण के दायित्व पक्ष में एक अलग कोष के रूप में
d) स्थिति विवरण के संपत्ति पक्ष में
उत्तर कुंजी (Answer Key):
- c) समाज या सदस्यों को सेवा प्रदान करना
- b) नकद आधार
- c) नाममात्र खाता
- b) पूंजीगत प्राप्ति
- b) प्राप्त चंदे में जोड़ा जाता है
- c) अधिशेष या कमी
- c) स्थायी संपत्ति की खरीद
- c) संस्था की पूंजी
- c) आयगत और पूंजीगत दोनों
- c) स्थिति विवरण के दायित्व पक्ष में एक अलग कोष के रूप में
मुझे आशा है कि यह विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपको इस अध्याय को समझने और सरकारी परीक्षाओं की तैयारी में सहायक होंगे। किसी भी अन्य प्रश्न के लिए आप पूछ सकते हैं। शुभकामनाएँ!