Class 12 Accountancy Notes Chapter 1 (अंश पूँजी के लिए लेखांकन) – Lekhashashtra Part-II Book

Lekhashashtra Part-II
प्रिय विद्यार्थियों,

आज हम आपकी लेखाशास्त्र (भाग-II) पुस्तक के अध्याय 1 'अंश पूँजी के लिए लेखांकन' का विस्तृत अध्ययन करेंगे। यह अध्याय सरकारी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें कंपनी लेखांकन के मूलभूत सिद्धांतों को समझाया गया है। आइए, हम इस अध्याय के प्रत्येक महत्वपूर्ण बिंदु को गहराई से समझते हैं ताकि आपकी तैयारी सुदृढ़ हो सके।


अध्याय 1: अंश पूँजी के लिए लेखांकन (Accounting for Share Capital)

1. कंपनी (Company):

कंपनी भारतीय कंपनी अधिनियम, 2013 (या पूर्ववर्ती अधिनियमों) के अंतर्गत पंजीकृत एक कृत्रिम व्यक्ति है, जिसका अपने सदस्यों से पृथक वैधानिक अस्तित्व होता है, शाश्वत उत्तराधिकार होता है और एक सामान्य मुहर होती है।

कंपनी की विशेषताएँ:

  • कृत्रिम व्यक्ति: यह कानून द्वारा निर्मित है।
  • पृथक वैधानिक अस्तित्व: कंपनी अपने सदस्यों से अलग इकाई है।
  • शाश्वत उत्तराधिकार: सदस्यों के आने-जाने से कंपनी के अस्तित्व पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
  • सीमित दायित्व: सदस्यों का दायित्व उनके द्वारा धारित अंशों के अंकित मूल्य तक सीमित होता है।
  • सामान्य मुहर: कंपनी के हस्ताक्षर के रूप में कार्य करती है।
  • अंशों की हस्तांतरणीयता: सार्वजनिक कंपनी में अंश स्वतंत्र रूप से हस्तांतरणीय होते हैं।

2. अंश पूँजी (Share Capital):

कंपनी की पूँजी को छोटी-छोटी इकाइयों में विभाजित किया जाता है, जिन्हें 'अंश' (Shares) कहते हैं। इन अंशों को जारी करके जुटाई गई पूँजी को 'अंश पूँजी' कहते हैं।

अंशों के प्रकार:
a. समता अंश (Equity Shares): ये वे अंश होते हैं जिन्हें पूर्वाधिकार अंशों के रूप में वर्गीकृत नहीं किया जाता है। इन्हें लाभांश और पूँजी वापसी का भुगतान पूर्वाधिकार अंशधारकों के बाद किया जाता है। इन्हें कंपनी के प्रबंधन में मतदान का अधिकार होता है।
b. पूर्वाधिकार अंश (Preference Shares): ये वे अंश होते हैं जिन्हें लाभांश के भुगतान और कंपनी के समापन पर पूँजी की वापसी के संबंध में समता अंशों पर पूर्वाधिकार प्राप्त होता है।
* पूर्वाधिकार अंशों के प्रकार: संचयी/गैर-संचयी, भागीदार/गैर-भागीदार, परिवर्तनीय/गैर-परिवर्तनीय, विमोचनीय/अविमोचनीय।

अंश पूँजी के प्रकार (तुलन पत्र में प्रस्तुतीकरण के आधार पर):
a. अधिकृत पूँजी (Authorised Capital / Registered Capital / Nominal Capital): यह वह अधिकतम पूँजी है जिसे कंपनी अपने जीवनकाल में जारी कर सकती है। यह कंपनी के पार्षद सीमा नियम (Memorandum of Association) में वर्णित होती है।
b. निर्गमित पूँजी (Issued Capital): यह अधिकृत पूँजी का वह भाग है जिसे कंपनी ने ग्राहकों को अभिदान के लिए जारी किया है।
c. प्रार्थित पूँजी (Subscribed Capital): यह निर्गमित पूँजी का वह भाग है जिसके लिए जनता ने अभिदान किया है (अंश खरीदने के लिए आवेदन किया है)।
* प्रार्थित एवं पूर्ण प्रदत्त (Subscribed and Fully Paid-up): जब याचित राशि पूर्णतः प्राप्त हो गई हो।
* प्रार्थित किंतु पूर्ण प्रदत्त नहीं (Subscribed but Not Fully Paid-up): जब याचित राशि पूर्णतः प्राप्त न हुई हो या कंपनी ने पूरी राशि नहीं मांगी हो।
d. याचित पूँजी (Called-up Capital): यह प्रार्थित पूँजी का वह भाग है जिसे कंपनी ने अंशधारकों से भुगतान के लिए मांगा है।
e. प्रदत्त पूँजी (Paid-up Capital): यह याचित पूँजी का वह भाग है जो वास्तव में अंशधारकों द्वारा कंपनी को भुगतान किया गया है।
f. आरक्षित पूँजी (Reserve Capital): यह अधिकृत पूँजी का वह भाग है जिसे कंपनी ने केवल कंपनी के समापन के समय ही मांगने का निर्णय लिया है। यह एक विशेष प्रस्ताव द्वारा तय की जाती है और इसे तुलन पत्र में नहीं दर्शाया जाता।

3. अंशों का निर्गमन (Issue of Shares):

अंशों का निर्गमन निम्नलिखित प्रकार से किया जा सकता है:
a. सममूल्य पर (At Par): जब अंशों को उनके अंकित मूल्य पर जारी किया जाता है (उदा. ₹10 का अंश ₹10 में)।
b. प्रीमियम पर (At Premium): जब अंशों को उनके अंकित मूल्य से अधिक मूल्य पर जारी किया जाता है (उदा. ₹10 का अंश ₹12 में)। अतिरिक्त राशि को 'प्रतिभूति प्रीमियम संचय' (Securities Premium Reserve) खाते में क्रेडिट किया जाता है।
* प्रतिभूति प्रीमियम संचय का उपयोग (धारा 52):
* कंपनी के प्रारंभिक व्ययों को अपलिखित करने के लिए।
* कंपनी के सदस्यों को पूर्ण प्रदत्त बोनस अंश जारी करने के लिए।
* पूर्वाधिकार अंशों या ऋणपत्रों के शोधन पर प्रीमियम का भुगतान करने के लिए।
* अंशों या ऋणपत्रों के निर्गमन पर कमीशन या बट्टे को अपलिखित करने के लिए।
* अपने ही अंशों को खरीदने (Buy-back) के लिए।
c. बट्टे पर (At Discount): कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 53 के अनुसार, कोई भी कंपनी अपने अंशों को बट्टे पर जारी नहीं कर सकती। इसका एकमात्र अपवाद 'स्वेट इक्विटी अंश' (Sweat Equity Shares) हैं, जो धारा 54 के तहत जारी किए जाते हैं।

4. अंशों के निर्गमन की प्रक्रिया एवं लेखांकन प्रविष्टियाँ (Process and Accounting Entries for Issue of Shares):

अंशों का मूल्य सामान्यतः किस्तों में मांगा जाता है:
i. आवेदन पर (On Application): आवेदन के साथ प्राप्त राशि।
ii. आबंटन पर (On Allotment): अंशों के आबंटन के समय देय राशि।
iii. याचनाओं पर (On Calls): शेष राशि को एक या अधिक याचनाओं (प्रथम याचना, द्वितीय याचना, अंतिम याचना) में मांगा जा सकता है।

लेखांकन प्रविष्टियाँ (Journal Entries):

  1. आवेदन राशि प्राप्त होने पर:
    बैंक खाता Dr.
    अंश आवेदन खाता Cr.
    (अंशों के लिए आवेदन राशि प्राप्त हुई)

  2. आवेदन राशि को अंश पूँजी खाते में हस्तांतरित करने पर (और आबंटन करने पर):
    अंश आवेदन खाता Dr.
    अंश पूँजी खाता Cr.
    (अंशों के लिए आवेदन राशि को अंश पूँजी खाते में हस्तांतरित किया गया)

    • अधि-अभिदान की स्थिति में:
      • अतिरिक्त आवेदन राशि वापस करने पर:
        अंश आवेदन खाता Dr.
        बैंक खाता Cr.
        (अतिरिक्त आवेदन राशि वापस की गई)
      • अतिरिक्त आवेदन राशि को आबंटन पर समायोजित करने पर:
        अंश आवेदन खाता Dr.
        अंश आबंटन खाता Cr.
        (अतिरिक्त आवेदन राशि को आबंटन पर समायोजित किया गया)
  3. आबंटन राशि देय होने पर:
    अंश आबंटन खाता Dr.
    अंश पूँजी खाता Cr.
    (अंश आबंटन राशि देय हुई)

    • यदि प्रीमियम पर निर्गमित हो:
      अंश आबंटन खाता Dr.
      अंश पूँजी खाता Cr.
      प्रतिभूति प्रीमियम संचय खाता Cr.
      (अंश आबंटन राशि प्रीमियम सहित देय हुई)
  4. आबंटन राशि प्राप्त होने पर:
    बैंक खाता Dr.
    अंश आबंटन खाता Cr.
    (अंश आबंटन राशि प्राप्त हुई)

  5. याचना राशि देय होने पर (प्रथम याचना, द्वितीय याचना आदि):
    अंश प्रथम याचना खाता Dr.
    अंश पूँजी खाता Cr.
    (अंश प्रथम याचना राशि देय हुई)

    • यदि प्रीमियम पर निर्गमित हो (और प्रीमियम याचना पर देय हो):
      अंश प्रथम याचना खाता Dr.
      अंश पूँजी खाता Cr.
      प्रतिभूति प्रीमियम संचय खाता Cr.
      (अंश प्रथम याचना राशि प्रीमियम सहित देय हुई)
  6. याचना राशि प्राप्त होने पर:
    बैंक खाता Dr.
    अंश प्रथम याचना खाता Cr.
    (अंश प्रथम याचना राशि प्राप्त हुई)

5. अधि-अभिदान (Over-subscription) और अल्पाभिदान (Under-subscription):

  • अधि-अभिदान: जब कंपनी द्वारा निर्गमित अंशों की संख्या से अधिक अंशों के लिए आवेदन प्राप्त होते हैं।
    • समायोजन के तरीके:
      • कुछ आवेदनों को पूर्णतः अस्वीकार करना और राशि वापस करना।
      • सभी आवेदकों को आनुपातिक आधार पर अंश आबंटित करना (Pro-rata Allotment)।
      • उपरोक्त दोनों का मिश्रण।
  • अल्पाभिदान: जब कंपनी द्वारा निर्गमित अंशों की संख्या से कम अंशों के लिए आवेदन प्राप्त होते हैं। यदि न्यूनतम अभिदान (Minimum Subscription) प्राप्त नहीं होता है, तो कंपनी अंशों का आबंटन नहीं कर सकती और सभी आवेदन राशि वापस करनी होती है। (कंपनी अधिनियम, 2013 के अनुसार, न्यूनतम अभिदान 90% है)।

6. अग्रिम याचना (Calls-in-Advance):

जब कोई अंशधारक कंपनी द्वारा मांगने से पहले ही याचना राशि का भुगतान कर देता है।

  • लेखांकन:
    बैंक खाता Dr.
    अग्रिम याचना खाता Cr.
  • याचना देय होने पर अग्रिम याचना का समायोजन:
    अग्रिम याचना खाता Dr.
    संबंधित याचना खाता Cr.
  • ब्याज: कंपनी अग्रिम याचना पर ब्याज का भुगतान कर सकती है (सारणी F के अनुसार अधिकतम 12% प्रति वर्ष)।

7. बकाया याचना (Calls-in-Arrears):

जब कोई अंशधारक देय याचना राशि का भुगतान नियत तिथि तक नहीं कर पाता है।

  • लेखांकन:
    • या तो याचना खाते को क्रेडिट करके बकाया राशि को खुला रखा जा सकता है।
    • या 'बकाया याचना खाता' खोलकर डेबिट किया जा सकता है।
      बकाया याचना खाता Dr.
      संबंधित याचना खाता Cr.
  • ब्याज: कंपनी बकाया याचना पर ब्याज वसूल कर सकती है (सारणी F के अनुसार अधिकतम 10% प्रति वर्ष)।

8. अंशों का हरण (Forfeiture of Shares):

जब कोई अंशधारक याचना राशि (या आबंटन राशि) का भुगतान करने में विफल रहता है, तो कंपनी उसके अंशों को जब्त कर सकती है। हरण का अर्थ है अंशधारक के अधिकारों को समाप्त करना और उसके द्वारा भुगतान की गई राशि को जब्त करना।

लेखांकन प्रविष्टियाँ:
a. जब अंश सममूल्य पर या प्रीमियम पर निर्गमित किए गए हों और प्रीमियम प्राप्त हो चुका हो:
अंश पूँजी खाता Dr. (याचित राशि से)
बकाया याचना खाता Cr. (भुगतान न की गई राशि से)
अंश हरण खाता Cr. (भुगतान की गई राशि से)
(अंशों का हरण किया गया)

b. जब अंश प्रीमियम पर निर्गमित किए गए हों और प्रीमियम राशि प्राप्त न हुई हो:
अंश पूँजी खाता Dr. (याचित राशि से)
प्रतिभूति प्रीमियम संचय खाता Dr. (भुगतान न किए गए प्रीमियम से)
बकाया याचना खाता Cr. (भुगतान न की गई राशि से)
अंश हरण खाता Cr. (भुगतान की गई राशि से, प्रीमियम को छोड़कर)
(अंशों का हरण किया गया)

9. हरण किए गए अंशों का पुनर्निर्गमन (Re-issue of Forfeited Shares):

कंपनी हरण किए गए अंशों को पुनः निर्गमित कर सकती है। इन्हें सममूल्य पर, प्रीमियम पर या बट्टे पर भी निर्गमित किया जा सकता है।

  • बट्टे की अधिकतम सीमा: पुनर्निर्गमन पर दिया जाने वाला बट्टा हरण खाते में जमा राशि से अधिक नहीं हो सकता।
    • उदाहरण: यदि ₹10 के अंश पर ₹6 हरण किए गए हैं, तो इसे न्यूनतम ₹4 में पुनर्निर्गमित किया जा सकता है (₹10 - ₹6 = ₹4)।

लेखांकन प्रविष्टियाँ:
a. जब अंशों का पुनर्निर्गमन सममूल्य पर हो:
बैंक खाता Dr.
अंश पूँजी खाता Cr.
(हरण किए गए अंशों का सममूल्य पर पुनर्निर्गमन)

b. जब अंशों का पुनर्निर्गमन प्रीमियम पर हो:
बैंक खाता Dr.
अंश पूँजी खाता Cr.
प्रतिभूति प्रीमियम संचय खाता Cr.
(हरण किए गए अंशों का प्रीमियम पर पुनर्निर्गमन)

c. जब अंशों का पुनर्निर्गमन बट्टे पर हो:
बैंक खाता Dr.
अंश हरण खाता Dr. (बट्टे की राशि से)
अंश पूँजी खाता Cr.
(हरण किए गए अंशों का बट्टे पर पुनर्निर्गमन)

पूँजी संचय में हस्तांतरण (Transfer to Capital Reserve):
पुनर्निर्गमन के बाद, हरण खाते में बची हुई शेष राशि (जो बट्टे के रूप में उपयोग नहीं की गई) को पूँजीगत लाभ माना जाता है और इसे 'पूँजी संचय खाते' में हस्तांतरित किया जाता है।

  • प्रविष्टि:
    अंश हरण खाता Dr.
    पूँजी संचय खाता Cr.
    (हरण खाते की शेष राशि को पूँजी संचय में हस्तांतरित किया गया)

10. चुकौती के अतिरिक्त अन्य प्रतिफल के लिए अंशों का निर्गमन (Issue of Shares for Consideration Other Than Cash):

कंपनी अंशों को नकद के बदले किसी अन्य प्रतिफल (जैसे संपत्ति खरीदना, सेवाओं के बदले) के लिए भी जारी कर सकती है।

  • विक्रेता को अंश जारी करना:
    संपत्ति खाता Dr.
    विक्रेता खाता Cr.
    (संपत्ति खरीदी गई)

    विक्रेता खाता Dr.
    अंश पूँजी खाता Cr.
    (विक्रेता को अंश जारी किए गए)

    • यदि प्रीमियम पर:
      विक्रेता खाता Dr.
      अंश पूँजी खाता Cr.
      प्रतिभूति प्रीमियम संचय खाता Cr.
  • प्रवर्तकों को अंश जारी करना (उनकी सेवाओं के लिए):
    ख्याति खाता / कंपनी निर्माण व्यय खाता Dr.
    अंश पूँजी खाता Cr.

  • अंडरराइटरों को अंश जारी करना (उनके कमीशन के बदले):
    अंडरराइटिंग कमीशन खाता Dr.
    अंडरराइटर खाता Cr.

    अंडरराइटर खाता Dr.
    अंश पूँजी खाता Cr.

11. तुलन पत्र में अंश पूँजी का प्रस्तुतीकरण (Presentation of Share Capital in Balance Sheet):

कंपनी अधिनियम, 2013 की अनुसूची III, भाग I के अनुसार, तुलन पत्र में अंश पूँजी को 'इक्विटी और देनदारियाँ' (Equity and Liabilities) शीर्षक के तहत 'अंशधारक निधि' (Shareholders' Funds) के उप-शीर्षक के अंतर्गत दर्शाया जाता है।

अंशधारक निधि:
a. अंश पूँजी (Share Capital):
* अधिकृत पूँजी (केवल नोट्स टू अकाउंट्स में)
* निर्गमित पूँजी (केवल नोट्स टू अकाउंट्स में)
* प्रार्थित पूँजी (Subscribed Capital)
* प्रार्थित एवं पूर्ण प्रदत्त
* प्रार्थित किंतु पूर्ण प्रदत्त नहीं
(बकाया याचना को प्रार्थित किंतु पूर्ण प्रदत्त नहीं में से घटाया जाता है, जबकि अग्रिम याचना को 'अन्य चालू देनदारियाँ' में दर्शाया जाता है।)
b. संचय एवं अधिशेष (Reserves and Surplus): इसमें प्रतिभूति प्रीमियम संचय, पूँजी संचय आदि शामिल होते हैं।

12. कर्मचारी स्टॉक विकल्प योजना (ESOP) और स्वेट इक्विटी अंश (Sweat Equity Shares):

  • कर्मचारी स्टॉक विकल्प योजना (ESOP): यह कर्मचारियों को भविष्य में एक निश्चित मूल्य पर कंपनी के अंश खरीदने का अधिकार देती है। इसका उद्देश्य कर्मचारियों को कंपनी के विकास में भागीदार बनाना है।
  • स्वेट इक्विटी अंश (Sweat Equity Shares): ये अंश कंपनी द्वारा अपने निदेशकों या कर्मचारियों को नकदी के अलावा अन्य प्रतिफल के लिए (जैसे मूल्यवान तकनीकी ज्ञान प्रदान करने या बौद्धिक संपदा अधिकारों के लिए) बट्टे पर या नकद के अलावा अन्य प्रतिफल के लिए जारी किए जाते हैं।

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

यहां इस अध्याय पर आधारित 10 बहुविकल्पीय प्रश्न दिए गए हैं, जो आपकी परीक्षा की तैयारी में सहायक होंगे:

  1. कंपनी अधिनियम, 2013 के अनुसार, प्रतिभूति प्रीमियम संचय का उपयोग निम्नलिखित में से किस उद्देश्य के लिए नहीं किया जा सकता है?
    a) प्रारंभिक व्ययों को अपलिखित करने के लिए।
    b) पूर्ण प्रदत्त बोनस अंश जारी करने के लिए।
    c) लाभांश के वितरण के लिए।
    d) अंशों या ऋणपत्रों के निर्गमन पर कमीशन को अपलिखित करने के लिए।

  2. अधिकृत पूँजी का वह भाग जिसे कंपनी ने जनता को अभिदान के लिए जारी किया है, कहलाता है:
    a) प्रार्थित पूँजी
    b) याचित पूँजी
    c) निर्गमित पूँजी
    d) प्रदत्त पूँजी

  3. जब अंशों को उनके अंकित मूल्य से अधिक मूल्य पर जारी किया जाता है, तो अतिरिक्त राशि को क्रेडिट किया जाता है:
    a) अंश पूँजी खाता
    b) प्रतिभूति प्रीमियम संचय खाता
    c) पूँजी संचय खाता
    d) लाभ और हानि विवरण

  4. अंशों के हरण के बाद, हरण खाते में बची हुई शेष राशि को हस्तांतरित किया जाता है:
    a) सामान्य संचय खाता
    b) पूँजी संचय खाता
    c) लाभ और हानि विवरण
    d) प्रतिभूति प्रीमियम संचय खाता

  5. यदि अंशधारकों द्वारा देय याचना राशि का भुगतान नहीं किया जाता है, तो उसे कहा जाता है:
    a) अग्रिम याचना
    b) बकाया याचना
    c) याचित पूँजी
    d) प्रदत्त पूँजी

  6. भारतीय कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 53 के अनुसार, कोई भी कंपनी अपने अंशों को बट्टे पर जारी नहीं कर सकती, सिवाय:
    a) पूर्वाधिकार अंश
    b) समता अंश
    c) स्वेट इक्विटी अंश
    d) बोनस अंश

  7. कंपनी के समापन पर पूँजी की वापसी में समता अंशों पर पूर्वाधिकार रखने वाले अंश कहलाते हैं:
    a) समता अंश
    b) पूर्वाधिकार अंश
    c) बोनस अंश
    d) संस्थापक अंश

  8. अधि-अभिदान की स्थिति में, अतिरिक्त आवेदन राशि को आबंटन पर समायोजित करने पर, कौन सा खाता क्रेडिट किया जाता है?
    a) बैंक खाता
    b) अंश आवेदन खाता
    c) अंश आबंटन खाता
    d) अंश पूँजी खाता

  9. सारणी F के अनुसार, बकाया याचना पर अधिकतम वार्षिक ब्याज दर क्या है?
    a) 6%
    b) 8%
    c) 10%
    d) 12%

  10. तुलन पत्र में अंश पूँजी को किस मुख्य शीर्षक के अंतर्गत दर्शाया जाता है?
    a) गैर-चालू देनदारियाँ
    b) चालू देनदारियाँ
    c) अंशधारक निधि
    d) गैर-चालू संपत्तियाँ


उत्तरमाला (MCQs):

  1. c) लाभांश के वितरण के लिए।
  2. c) निर्गमित पूँजी
  3. b) प्रतिभूति प्रीमियम संचय खाता
  4. b) पूँजी संचय खाता
  5. b) बकाया याचना
  6. c) स्वेट इक्विटी अंश
  7. b) पूर्वाधिकार अंश
  8. c) अंश आबंटन खाता
  9. c) 10%
  10. c) अंशधारक निधि

मुझे आशा है कि ये विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपको इस अध्याय को समझने और सरकारी परीक्षाओं की तैयारी करने में बहुत मदद करेंगे। अपनी पढ़ाई जारी रखें और सफलता प्राप्त करें!

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