Class 12 Accountancy Notes Chapter 2 (ऋणपत्रों का नियम एवम मोचन) – Lekhashashtra Part-II Book

Lekhashashtra Part-II
प्रिय विद्यार्थियों,

आज हम आपकी लेखाशास्त्र की पुस्तक 'लेखाशास्त्र पार्ट-II' के अध्याय 2, 'ऋणपत्रों का निर्गमन एवं मोचन' का विस्तृत अध्ययन करेंगे, जो आपकी सरकारी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह अध्याय न केवल आपको सैद्धांतिक ज्ञान प्रदान करेगा, बल्कि लेखांकन प्रविष्टियों और कंपनी अधिनियम के प्रावधानों की गहरी समझ भी विकसित करेगा।


अध्याय 2: ऋणपत्रों का निर्गमन एवं मोचन

1. ऋणपत्र (Debentures) का अर्थ

ऋणपत्र एक लिखित अभिलेख या प्रमाण पत्र होता है जो कंपनी द्वारा लिए गए ऋण को स्वीकार करता है। यह कंपनी की सामान्य मुहर के अंतर्गत जारी किया जाता है और इसमें ऋण की शर्तें (जैसे ब्याज दर, मोचन की तिथि) स्पष्ट रूप से उल्लिखित होती हैं। ऋणपत्रधारी कंपनी के लेनदार होते हैं, अंशधारी नहीं।

2. ऋणपत्रों की विशेषताएँ

  • ऋण का प्रमाण: यह कंपनी द्वारा लिए गए ऋण का एक लिखित प्रमाण है।
  • निश्चित ब्याज दर: ऋणपत्रों पर एक निश्चित दर से ब्याज का भुगतान किया जाता है, भले ही कंपनी को लाभ हो या हानि।
  • सुरक्षित या असुरक्षित: ऋणपत्र सुरक्षित (कंपनी की संपत्तियों पर प्रभार) या असुरक्षित हो सकते हैं।
  • मोचन योग्य: ऋणपत्र एक निश्चित अवधि के बाद या कंपनी की इच्छा पर मोचन योग्य होते हैं।
  • कोई मतदान अधिकार नहीं: ऋणपत्रधारियों को कंपनी की बैठकों में मतदान का अधिकार नहीं होता है।
  • लेनदार: ऋणपत्रधारी कंपनी के लेनदार होते हैं, स्वामी नहीं।

3. ऋणपत्रों के प्रकार

ऋणपत्रों को विभिन्न आधारों पर वर्गीकृत किया जा सकता है:

  • सुरक्षा के आधार पर:
    • सुरक्षित ऋणपत्र (Secured Debentures): ये कंपनी की संपत्तियों पर एक प्रभार (स्थिर या चल) द्वारा सुरक्षित होते हैं।
    • असुरक्षित ऋणपत्र (Unsecured Debentures): ये किसी विशिष्ट संपत्ति पर प्रभार द्वारा सुरक्षित नहीं होते हैं।
  • मोचन के आधार पर:
    • मोचन योग्य ऋणपत्र (Redeemable Debentures): ये एक निश्चित अवधि के बाद या कंपनी के विकल्प पर चुकाए जाते हैं।
    • अमोचन योग्य ऋणपत्र (Irredeemable/Perpetual Debentures): ये कंपनी के जीवनकाल में नहीं चुकाए जाते, बल्कि कंपनी के समापन पर ही चुकाए जाते हैं। (भारत में अब ऐसे ऋणपत्र जारी करने की अनुमति नहीं है)।
  • परिवर्तनशीलता के आधार पर:
    • परिवर्तनीय ऋणपत्र (Convertible Debentures): ये ऋणपत्रधारी के विकल्प पर एक निश्चित अवधि के बाद पूर्णतः या आंशिक रूप से अंशों (इक्विटी या वरीयता) में परिवर्तित किए जा सकते हैं।
    • अपरिवर्तनीय ऋणपत्र (Non-Convertible Debentures): इन्हें अंशों में परिवर्तित नहीं किया जा सकता।
  • वाहक के आधार पर:
    • वाहक ऋणपत्र (Bearer Debentures): ये केवल सुपुर्दगी द्वारा हस्तांतरणीय होते हैं और कंपनी इनके धारक को ब्याज का भुगतान करती है।
    • पंजीकृत ऋणपत्र (Registered Debentures): ये कंपनी के रजिस्टर में पंजीकृत होते हैं और केवल कंपनी के रिकॉर्ड में नाम बदलने पर ही हस्तांतरित होते हैं।

4. ऋणपत्रों का निर्गमन (Issue of Debentures)

ऋणपत्रों का निर्गमन विभिन्न तरीकों से किया जा सकता है:

A. नकद के लिए (For Cash):
ऋणपत्रों का निर्गमन सममूल्य पर, प्रीमियम पर या बट्टे पर किया जा सकता है।

  • सममूल्य पर (At Par): जब ऋणपत्र उनके अंकित मूल्य पर जारी किए जाते हैं।

    • आवेदन पर: बैंक खाता Dr. to ऋणपत्र आवेदन खाता Cr.
    • आवंटन पर: ऋणपत्र आवेदन खाता Dr. to ऋणपत्र खाता Cr.
    • (यदि किस्तों में):
      • आवेदन पर राशि प्राप्त होने पर: बैंक खाता Dr. to ऋणपत्र आवेदन खाता Cr.
      • आवेदन राशि ऋणपत्र खाते में हस्तांतरित करने पर: ऋणपत्र आवेदन खाता Dr. to ऋणपत्र खाता Cr.
      • आवंटन राशि देय होने पर: ऋणपत्र आवंटन खाता Dr. to ऋणपत्र खाता Cr.
      • आवंटन राशि प्राप्त होने पर: बैंक खाता Dr. to ऋणपत्र आवंटन खाता Cr.
      • याचना राशि देय होने पर: ऋणपत्र प्रथम/अंतिम याचना खाता Dr. to ऋणपत्र खाता Cr.
      • याचना राशि प्राप्त होने पर: बैंक खाता Dr. to ऋणपत्र प्रथम/अंतिम याचना खाता Cr.
  • प्रीमियम पर (At Premium): जब ऋणपत्र उनके अंकित मूल्य से अधिक मूल्य पर जारी किए जाते हैं। प्रीमियम कंपनी के लिए पूंजीगत लाभ होता है और इसे 'प्रतिभूति प्रीमियम संचय' खाते में क्रेडिट किया जाता है।

    • आवंटन पर प्रीमियम होने पर:
      • आवंटन राशि देय होने पर: ऋणपत्र आवंटन खाता Dr. to ऋणपत्र खाता Cr. to प्रतिभूति प्रीमियम संचय खाता Cr.
      • आवंटन राशि प्राप्त होने पर: बैंक खाता Dr. to ऋणपत्र आवंटन खाता Cr.
  • बट्टे पर (At Discount): जब ऋणपत्र उनके अंकित मूल्य से कम मूल्य पर जारी किए जाते हैं। बट्टा कंपनी के लिए पूंजीगत हानि होती है।

    • आवंटन पर बट्टा होने पर:
      • आवंटन राशि देय होने पर: ऋणपत्र आवंटन खाता Dr. बट्टा ऑन ऋणपत्र निर्गमन खाता Dr. to ऋणपत्र खाता Cr.
      • आवंटन राशि प्राप्त होने पर: बैंक खाता Dr. to ऋणपत्र आवंटन खाता Cr.
    • ऋणपत्रों के निर्गमन पर बट्टे का अपलेखन (Amortization of Discount on Issue of Debentures):
      • ऋणपत्रों के निर्गमन पर बट्टा एक पूंजीगत हानि है जिसे कंपनी के जीवनकाल में, या ऋणपत्रों के जीवनकाल में, लाभ-हानि विवरण से अपलेखित किया जाता है।
      • प्रविष्टि: लाभ-हानि विवरण Dr. to ऋणपत्रों के निर्गमन पर बट्टा खाता Cr. (या प्रतिभूति प्रीमियम संचय से भी अपलेखित किया जा सकता है)।
      • यदि ऋणपत्रों को किस्तों में मोचित किया जाता है, तो बट्टे को प्रत्येक वर्ष बकाया ऋणपत्रों के अनुपात में अपलेखित किया जाता है।

B. रोकड़ के अतिरिक्त अन्य प्रतिफल के लिए (For Consideration Other Than Cash):
जब कंपनी किसी संपत्ति या व्यवसाय का क्रय करती है और विक्रेता को भुगतान नकद में न करके ऋणपत्रों के निर्गमन द्वारा करती है।

  • संपत्ति/व्यवसाय क्रय करने पर:
    • विविध संपत्तियाँ खाता Dr. (या व्यवसाय क्रय करने पर: विविध संपत्तियाँ Dr. to विविध देनदार Dr. to विक्रेता खाता Cr. to विविध देनदार Cr.)
    • यदि क्रय प्रतिफल शुद्ध संपत्ति से अधिक हो: ख्याति खाता Dr.
    • यदि क्रय प्रतिफल शुद्ध संपत्ति से कम हो: पूंजी संचय खाता Cr.
    • to विक्रेता खाता Cr.
  • विक्रेता को ऋणपत्र जारी करने पर:
    • सममूल्य पर: विक्रेता खाता Dr. to ऋणपत्र खाता Cr.
    • प्रीमियम पर: विक्रेता खाता Dr. to ऋणपत्र खाता Cr. to प्रतिभूति प्रीमियम संचय खाता Cr.
    • बट्टे पर: विक्रेता खाता Dr. बट्टा ऑन ऋणपत्र निर्गमन खाता Dr. to ऋणपत्र खाता Cr.
    • (जारी किए जाने वाले ऋणपत्रों की संख्या = देय राशि / (प्रति ऋणपत्र निर्गमन मूल्य))

C. संपार्श्विक प्रतिभूति के रूप में (As Collateral Security):
जब कंपनी बैंक या वित्तीय संस्थान से ऋण लेती है और ऋणपत्रों को अतिरिक्त सुरक्षा के रूप में गिरवी रखती है। इन ऋणपत्रों पर कंपनी द्वारा ब्याज का भुगतान नहीं किया जाता है, बल्कि मुख्य ऋण पर ब्याज दिया जाता है।

  • लेखांकन की दो विधियाँ:
    1. कोई प्रविष्टि नहीं (No Entry): केवल तुलन-पत्र के फुटनोट में इसका उल्लेख किया जाता है।
    2. प्रविष्टि करना (Entry Made):
      • ऋणपत्र सस्पेंस खाता Dr. to ऋणपत्र खाता Cr.
      • तुलन-पत्र में:
        • देयता पक्ष: दीर्घकालिक ऋण के अंतर्गत मुख्य ऋण दिखाया जाता है।
        • ऋणपत्रों को घटाकर: ऋणपत्र खाता (जारी किए गए) में से ऋणपत्र सस्पेंस खाता घटाकर शुद्ध शून्य दिखाया जाता है।

5. ऋणपत्रों पर ब्याज (Interest on Debentures)

  • ऋणपत्रों पर ब्याज एक निश्चित दर से देय होता है, भले ही कंपनी को लाभ हो या हानि।
  • यह लाभ-हानि विवरण के विरुद्ध प्रभारित किया जाता है।
  • ब्याज देय होने पर: ऋणपत्र ब्याज खाता Dr. to ऋणपत्रधारी खाता Cr. to TDS देय खाता Cr. (यदि लागू हो)
  • TDS (स्रोत पर कर कटौती) भुगतान पर: TDS देय खाता Dr. to बैंक खाता Cr.
  • ऋणपत्रधारियों को भुगतान पर: ऋणपत्रधारी खाता Dr. to बैंक खाता Cr.
  • ब्याज को लाभ-हानि विवरण में हस्तांतरित करने पर: लाभ-हानि विवरण Dr. to ऋणपत्र ब्याज खाता Cr.

6. ऋणपत्रों का मोचन (Redemption of Debentures)

मोचन का अर्थ है ऋणपत्रधारियों को उनके ऋणपत्रों के बदले में भुगतान करना। मोचन सममूल्य पर, प्रीमियम पर या बट्टे पर हो सकता है।

A. मोचन के स्रोत:

  • पूंजी से मोचन (Redemption out of Capital): जब मोचन के लिए लाभ का उपयोग नहीं किया जाता है। (कंपनी अधिनियम 2013 के अनुसार, कुछ अपवादों को छोड़कर, लाभ में से DRR बनाना अनिवार्य है)।
  • लाभ से मोचन (Redemption out of Profits): जब मोचन के लिए पर्याप्त लाभ आरक्षित किए जाते हैं।
  • नए ऋणपत्रों/अंशों के निर्गमन से मोचन (Redemption by Issue of New Debentures/Shares): इसे 'रोलिंग ओवर' कहा जाता है।

B. मोचन की विधियाँ:

  1. एकमुश्त भुगतान (Lump Sum Payment): एक निश्चित तिथि पर सभी ऋणपत्रों का एक साथ भुगतान।

    • ऋणपत्र शोधन संचय (Debenture Redemption Reserve - DRR):

      • कंपनी अधिनियम 2013 के प्रावधान (नियम 18(7) कंपनी (अंश पूंजी और ऋणपत्र) नियम, 2014):
        • कोई भी कंपनी जो सार्वजनिक निर्गमन के माध्यम से ऋणपत्र जारी करती है, उसे ऋणपत्रों के अंकित मूल्य के कम से कम 25% के बराबर DRR बनाना होगा।
        • यह DRR कंपनी के लाभ में से बनाया जाता है और इसे सामान्य संचय से अलग दिखाया जाता है।
        • DRR का उपयोग केवल ऋणपत्रों के मोचन के लिए किया जा सकता है।
        • DRR की आवश्यकता से छूट:
          • ऑल इंडिया फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस (AIFI)
          • बैंकिंग कंपनियां
          • गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (NBFCs)
          • हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां (HFCs)
          • लिस्टेड कंपनियां जो निजी प्लेसमेंट आधार पर ऋणपत्र जारी करती हैं।
        • अन्य सभी लिस्टेड कंपनियों और अनलिस्टेड कंपनियों को DRR बनाना अनिवार्य है।
        • प्रविष्टि: लाभ-हानि विवरण का शेष Dr. to ऋणपत्र शोधन संचय खाता Cr.
    • ऋणपत्र शोधन निवेश (Debenture Redemption Investment - DRI):

      • कंपनी अधिनियम 2013 के प्रावधान (नियम 18(7) कंपनी (अंश पूंजी और ऋणपत्र) नियम, 2014):
        • प्रत्येक कंपनी (जो DRR बनाने के लिए बाध्य है) को 30 अप्रैल तक, उस वित्तीय वर्ष में मोचित होने वाले ऋणपत्रों के अंकित मूल्य के कम से कम 15% के बराबर राशि का निवेश करना अनिवार्य है।
        • यह निवेश अनुसूचित बैंक में सावधि जमा, सरकारी प्रतिभूतियों या अन्य निर्दिष्ट प्रतिभूतियों में किया जा सकता है।
        • प्रविष्टि: ऋणपत्र शोधन निवेश खाता Dr. to बैंक खाता Cr.
        • मोचन के समय निवेश को भुनाया जाता है: बैंक खाता Dr. to ऋणपत्र शोधन निवेश खाता Cr.
    • मोचन की लेखांकन प्रविष्टियाँ (एकमुश्त):

      • मोचन के लिए ऋणपत्र देय होने पर: ऋणपत्र खाता Dr. to ऋणपत्रधारी खाता Cr.
      • ऋणपत्रधारियों को भुगतान करने पर: ऋणपत्रधारी खाता Dr. to बैंक खाता Cr.
      • DRR को सामान्य संचय में हस्तांतरित करने पर (मोचन के बाद): ऋणपत्र शोधन संचय खाता Dr. to सामान्य संचय खाता Cr.
  2. किस्तों में भुगतान (Payment in Instalments) - आहरण द्वारा:

    • कंपनी ऋणपत्रों का मोचन किस्तों में करती है, आमतौर पर लॉटरी द्वारा आहरित करके।
    • लेखांकन प्रविष्टियाँ एकमुश्त भुगतान के समान होती हैं, लेकिन प्रत्येक किस्त के लिए की जाती हैं।
    • DRR और DRI की गणना प्रत्येक वर्ष मोचित होने वाले ऋणपत्रों के आधार पर की जाती है।
  3. खुले बाजार से क्रय (Purchase from Open Market):

    • कंपनी अपने स्वयं के ऋणपत्रों को खुले बाजार से क्रय कर सकती है। इसके दो उद्देश्य हो सकते हैं:
      • तुरंत रद्द करना (For Immediate Cancellation): यदि कंपनी को लगता है कि खुले बाजार में ऋणपत्र कम मूल्य पर उपलब्ध हैं।
        • क्रय करने पर: अपने ऋणपत्र खाता Dr. to बैंक खाता Cr.
        • रद्द करने पर: ऋणपत्र खाता Dr. to अपने ऋणपत्र खाता Cr. to ऋणपत्र शोधन पर लाभ खाता Cr. (यदि क्रय मूल्य अंकित मूल्य से कम हो) / लाभ-हानि विवरण Dr. (यदि क्रय मूल्य अंकित मूल्य से अधिक हो)
        • ऋणपत्र शोधन पर लाभ को पूंजी संचय में हस्तांतरित करने पर: ऋणपत्र शोधन पर लाभ खाता Dr. to पूंजी संचय खाता Cr.
      • निवेश के रूप में रखना (As Investment - Own Debentures): कंपनी भविष्य में रद्द करने या पुनर्विक्रय के उद्देश्य से अपने ऋणपत्रों को निवेश के रूप में रख सकती है।
        • क्रय करने पर: अपने ऋणपत्रों में निवेश खाता Dr. to बैंक खाता Cr.
        • ब्याज प्राप्त होने पर: बैंक खाता Dr. to अपने ऋणपत्रों में निवेश खाता Cr. (क्योंकि कंपनी को खुद को ब्याज नहीं मिलता, यह निवेश पर आय है)
        • रद्द करने पर: ऋणपत्र खाता Dr. to अपने ऋणपत्रों में निवेश खाता Cr. to ऋणपत्र शोधन पर लाभ खाता Cr. (यदि निवेश मूल्य अंकित मूल्य से कम हो) / लाभ-हानि विवरण Dr. (यदि निवेश मूल्य अंकित मूल्य से अधिक हो)
        • ऋणपत्र शोधन पर लाभ को पूंजी संचय में हस्तांतरित करने पर: ऋणपत्र शोधन पर लाभ खाता Dr. to पूंजी संचय खाता Cr.
  4. ऋणपत्रों को अंशों में परिवर्तित करना (Conversion into Shares/New Debentures):

    • परिवर्तनीय ऋणपत्रों को ऋणपत्रधारी के विकल्प पर अंशों (इक्विटी या वरीयता) या नए ऋणपत्रों में परिवर्तित किया जा सकता है।
    • परिवर्तन देय होने पर: ऋणपत्र खाता Dr. to ऋणपत्रधारी खाता Cr.
    • अंशों/नए ऋणपत्रों के निर्गमन पर: ऋणपत्रधारी खाता Dr. to अंश पूंजी खाता Cr. to प्रतिभूति प्रीमियम संचय खाता Cr. (यदि अंश प्रीमियम पर जारी किए गए हों) / to नए ऋणपत्र खाता Cr.
    • इस विधि में DRR की आवश्यकता नहीं होती है, क्योंकि कोई नकद बहिर्वाह नहीं होता।

C. मोचन पर लाभ या हानि (Profit or Loss on Redemption):

  • यदि मोचन मूल्य अंकित मूल्य से कम है, तो 'ऋणपत्र शोधन पर लाभ' होता है, जो एक पूंजीगत लाभ है और इसे पूंजी संचय में हस्तांतरित किया जाता है।
  • यदि मोचन मूल्य अंकित मूल्य से अधिक है (प्रीमियम पर मोचन), तो 'ऋणपत्र शोधन प्रीमियम' एक पूंजीगत हानि है, जिसे आमतौर पर लाभ-हानि विवरण या प्रतिभूति प्रीमियम संचय से अपलेखित किया जाता है।

7. तुलन-पत्र में प्रस्तुतीकरण (Presentation in Balance Sheet)

  • ऋणपत्र: 'गैर-चालू देयताएं' के अंतर्गत 'दीर्घकालिक उधार' शीर्षक के तहत दिखाए जाते हैं।
  • ऋणपत्र शोधन संचय (DRR): 'इक्विटी और देयताएं' के अंतर्गत 'अंशधारक निधि' शीर्षक के तहत 'संचय और अधिशेष' में दिखाया जाता है।
  • ऋणपत्र शोधन निवेश (DRI): 'परिसंपत्तियां' के अंतर्गत 'गैर-चालू निवेश' शीर्षक के तहत दिखाया जाता है।
  • ऋणपत्रों के निर्गमन पर बट्टा/प्रीमियम: बट्टा 'अन्य गैर-चालू परिसंपत्तियां' के अंतर्गत अपलेखित होने तक दिखाया जाता है। प्रीमियम 'प्रतिभूति प्रीमियम संचय' के अंतर्गत 'संचय और अधिशेष' में दिखाया जाता है।

सरकारी परीक्षाओं के लिए विशेष बिंदु:

  • कंपनी अधिनियम 2013 और SEBI दिशानिर्देश: DRR और DRI से संबंधित नवीनतम प्रावधानों को याद रखना महत्वपूर्ण है। विशेष रूप से DRR से छूट प्राप्त कंपनियों की सूची।
  • लेखांकन प्रविष्टियों पर पकड़: प्रत्येक स्थिति (सममूल्य, प्रीमियम, बट्टा, नकद, अन्य प्रतिफल, संपार्श्विक सुरक्षा, मोचन की विभिन्न विधियाँ) के लिए सही लेखांकन प्रविष्टियाँ याद रखें।
  • बट्टे/प्रीमियम का अपलेखन: बट्टे के अपलेखन की विधि और प्रीमियम के उपयोग को समझें।
  • ब्याज की गणना और TDS: ब्याज की सही गणना करना और TDS के प्रावधानों को समझना।
  • तुलन-पत्र प्रस्तुतीकरण: विभिन्न मदों को तुलन-पत्र में कहाँ दिखाया जाता है, यह जानना आवश्यक है।
  • खुले बाजार से क्रय पर लाभ/हानि: इस पर विशेष ध्यान दें, क्योंकि यह अक्सर भ्रमित करने वाला होता है।

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

  1. ऋणपत्रधारी होते हैं:
    a) कंपनी के स्वामी
    b) कंपनी के लेनदार
    c) कंपनी के निदेशक
    d) कंपनी के प्रबंधक
    उत्तर: b) कंपनी के लेनदार

  2. ऋणपत्रों के निर्गमन पर बट्टा है:
    a) राजस्व हानि
    b) पूंजीगत लाभ
    c) पूंजीगत हानि
    d) राजस्व लाभ
    उत्तर: c) पूंजीगत हानि

  3. कंपनी अधिनियम 2013 के अनुसार, ऋणपत्र शोधन संचय (DRR) को ऋणपत्रों के अंकित मूल्य के कम से कम कितने प्रतिशत के बराबर बनाया जाना चाहिए?
    a) 10%
    b) 15%
    c) 25%
    d) 50%
    उत्तर: c) 25%

  4. ऋणपत्र शोधन निवेश (DRI) को प्रत्येक वर्ष 30 अप्रैल तक उस वित्तीय वर्ष में मोचित होने वाले ऋणपत्रों के अंकित मूल्य के कम से कम कितने प्रतिशत के बराबर किया जाना चाहिए?
    a) 10%
    b) 15%
    c) 25%
    d) 50%
    उत्तर: b) 15%

  5. निम्न में से किस कंपनी को ऋणपत्र शोधन संचय (DRR) बनाने की आवश्यकता से छूट प्राप्त है?
    a) विनिर्माण कंपनी
    b) बैंकिंग कंपनी
    c) सेवा प्रदाता कंपनी
    d) रिटेल कंपनी
    उत्तर: b) बैंकिंग कंपनी

  6. यदि ऋणपत्रों को संपार्श्विक प्रतिभूति के रूप में जारी किया जाता है और इसके लिए लेखा पुस्तकों में प्रविष्टि की जाती है, तो किस खाते को डेबिट किया जाता है?
    a) बैंक खाता
    b) ऋणपत्र खाता
    c) ऋणपत्र सस्पेंस खाता
    d) ऋण खाता
    उत्तर: c) ऋणपत्र सस्पेंस खाता

  7. ऋणपत्रों के मोचन पर लाभ को हस्तांतरित किया जाता है:
    a) सामान्य संचय
    b) लाभ-हानि विवरण
    c) पूंजी संचय
    d) प्रतिभूति प्रीमियम संचय
    उत्तर: c) पूंजी संचय

  8. एक कंपनी ने ₹100 वाले 1,000 ऋणपत्र 10% बट्टे पर जारी किए। बट्टे की राशि होगी:
    a) ₹1,000
    b) ₹10,000
    c) ₹100
    d) ₹90,000
    उत्तर: b) ₹10,000 (1,000 ऋणपत्र * ₹100 * 10% = ₹10,000)

  9. ऋणपत्र शोधन संचय (DRR) को तुलन-पत्र में कहाँ दर्शाया जाता है?
    a) दीर्घकालिक उधार
    b) चालू देयताएं
    c) संचय और अधिशेष
    d) गैर-चालू निवेश
    उत्तर: c) संचय और अधिशेष

  10. यदि एक कंपनी ₹1,00,000 की मशीनरी खरीदती है और विक्रेता को ₹100 वाले 1,000 ऋणपत्र सममूल्य पर जारी करती है, तो विक्रेता को डेबिट किया जाएगा:
    a) ₹1,00,000
    b) ₹90,000
    c) ₹1,10,000
    d) ₹10,000
    उत्तर: a) ₹1,00,000


मुझे आशा है कि यह विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपकी सरकारी परीक्षाओं की तैयारी में अत्यंत सहायक सिद्ध होंगे। अपनी पढ़ाई जारी रखें और किसी भी संदेह के लिए पूछने में संकोच न करें। शुभकामनाएँ!

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