Class 12 Accountancy Notes Chapter 4 (साझेदारी फर्म का पुनर्गठन साझेदार की सेवानिवृत्ति/मृत्यु) – Lekhashashtra Part-I Book

Lekhashashtra Part-I
प्रिय विद्यार्थियों,

आज हम आपके लेखाशास्त्र विषय के अध्याय 4, 'साझेदारी फर्म का पुनर्गठन: साझेदार की सेवानिवृत्ति/मृत्यु' पर विस्तृत चर्चा करेंगे। यह अध्याय साझेदारी लेखांकन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, और सरकारी परीक्षाओं के लिए इसकी गहन समझ आवश्यक है। हम प्रत्येक अवधारणा को विस्तार से समझेंगे ताकि आप न केवल सैद्धांतिक ज्ञान प्राप्त कर सकें, बल्कि व्यावहारिक प्रश्नों को हल करने में भी सक्षम हों।


अध्याय 4: साझेदारी फर्म का पुनर्गठन: साझेदार की सेवानिवृत्ति/मृत्यु

I. परिचय

साझेदारी फर्म का पुनर्गठन तब होता है जब साझेदारों के बीच मौजूदा समझौता समाप्त हो जाता है और एक नया समझौता अस्तित्व में आता है। इसके परिणामस्वरूप साझेदारों के लाभ-हानि बांटने के अनुपात में परिवर्तन होता है। पुनर्गठन के विभिन्न कारण हो सकते हैं, जैसे:

  1. मौजूदा साझेदारों के लाभ-हानि अनुपात में परिवर्तन।
  2. एक नए साझेदार का प्रवेश।
  3. किसी मौजूदा साझेदार की सेवानिवृत्ति।
  4. किसी साझेदार की मृत्यु।

इस अध्याय में, हमारा मुख्य ध्यान किसी साझेदार की सेवानिवृत्ति और मृत्यु के कारण होने वाले साझेदारी के पुनर्गठन पर रहेगा।

II. साझेदार की सेवानिवृत्ति (Retirement of a Partner)

जब कोई साझेदार फर्म से अलग होने का निर्णय लेता है, तो इसे साझेदार की सेवानिवृत्ति कहा जाता है। सेवानिवृत्ति के कई कारण हो सकते हैं, जैसे वृद्धावस्था, खराब स्वास्थ्य, अन्य व्यवसाय में रुचि, या आपसी सहमति।

सेवानिवृत्ति के तरीके:

  1. साझेदारी समझौते के अनुसार।
  2. सभी साझेदारों की सहमति से।
  3. यदि साझेदारी ऐच्छिक है, तो अन्य सभी साझेदारों को सेवानिवृत्ति की सूचना देकर।

सेवानिवृत्ति पर आवश्यक समायोजन:
एक साझेदार की सेवानिवृत्ति पर, फर्म की वित्तीय स्थिति में कई समायोजन करने पड़ते हैं ताकि सेवानिवृत्त साझेदार को उसका उचित हिस्सा मिल सके और शेष साझेदारों के बीच नया समझौता प्रभावी हो सके। ये समायोजन निम्नलिखित हैं:

  1. नया लाभ-हानि अनुपात और प्राप्ति अनुपात की गणना।
  2. ख्याति (Goodwill) का मूल्यांकन और लेखांकन समायोजन।
  3. संपत्तियों और देनदारियों का पुनर्मूल्यांकन।
  4. अवितरित लाभों, संचयों और हानियों का समायोजन।
  5. सेवानिवृत्त साझेदार को देय राशि का निर्धारण।
  6. सेवानिवृत्त साझेदार को भुगतान।
  7. शेष साझेदारों की पूंजी का समायोजन (यदि आवश्यक हो)।

III. नया लाभ-हानि अनुपात और प्राप्ति अनुपात (New Profit Sharing Ratio and Gaining Ratio)

1. नया लाभ-हानि अनुपात (New Profit Sharing Ratio):
यह वह अनुपात है जिसमें शेष साझेदार भविष्य में फर्म के लाभों को बांटेंगे। इसकी गणना विभिन्न परिस्थितियों में की जाती है:

  • स्थिति 1: जब सेवानिवृत्त साझेदार का हिस्सा शेष साझेदारों द्वारा उनके पुराने अनुपात में प्राप्त किया जाता है।
    • उदाहरण: A, B, C साझेदार हैं, अनुपात 3:2:1 है। C सेवानिवृत्त होता है। यदि कोई अन्य जानकारी नहीं है, तो A और B का नया अनुपात 3:2 होगा।
  • स्थिति 2: जब सेवानिवृत्त साझेदार का हिस्सा शेष साझेदारों द्वारा एक विशिष्ट अनुपात में प्राप्त किया जाता है।
    • उदाहरण: A, B, C साझेदार हैं, अनुपात 3:2:1 है। C सेवानिवृत्त होता है। C का हिस्सा A और B द्वारा 1:1 के अनुपात में लिया जाता है।
    • इस स्थिति में, प्रत्येक शेष साझेदार के पुराने हिस्से में सेवानिवृत्त साझेदार के हिस्से का वह भाग जोड़ा जाता है जो उसे प्राप्त होता है।
  • स्थिति 3: जब प्रश्न में कोई विशेष जानकारी नहीं दी गई हो।
    • इस स्थिति में, यह मान लिया जाता है कि शेष साझेदार अपने पुराने अनुपात में ही लाभ बांटना जारी रखेंगे।

2. प्राप्ति अनुपात (Gaining Ratio):
यह वह अनुपात है जिसमें शेष साझेदार सेवानिवृत्त साझेदार के लाभ के हिस्से को प्राप्त करते हैं। इस अनुपात का उपयोग सेवानिवृत्त साझेदार को ख्याति के हिस्से का भुगतान करने के लिए किया जाता है।

  • सूत्र: प्राप्ति अनुपात = नया अनुपात - पुराना अनुपात
  • महत्व: ख्याति के समायोजन के लिए यह अनुपात अत्यंत महत्वपूर्ण है।

IV. ख्याति का मूल्यांकन और समायोजन (Valuation and Adjustment of Goodwill)

सेवानिवृत्त साझेदार को फर्म की ख्याति में उसके हिस्से का भुगतान किया जाता है क्योंकि उसने फर्म के लिए ख्याति अर्जित करने में अपना योगदान दिया है।

  • ख्याति के मूल्यांकन के तरीके: (विस्तृत जानकारी के लिए अध्याय 3 देखें)
    • औसत लाभ विधि
    • अधिलाभ विधि
    • पूंजीकरण विधि
  • ख्याति के समायोजन की लेखा प्रविष्टियाँ:
    • जब ख्याति को पुस्तकों में नहीं दिखाया जाता है (या पहले से मौजूद ख्याति को अपलिखित किया जाता है):
      • शेष साझेदारों के पूंजी/चालू खाते Dr. (प्राप्ति अनुपात में)
        • सेवानिवृत्त साझेदार के पूंजी/चालू खाते Cr. (ख्याति में उसके हिस्से के साथ)
          (यह सबसे सामान्य तरीका है)
    • जब पहले से मौजूद ख्याति (जो पुस्तकों में दिखाई गई है) को अपलिखित करना हो:
      • सभी साझेदारों के पूंजी/चालू खाते Dr. (पुराने लाभ-हानि अनुपात में)
        • ख्याति खाता Cr.
          (इसके बाद ऊपर दी गई समायोजन प्रविष्टि की जाती है)

V. संपत्तियों और देनदारियों का पुनर्मूल्यांकन (Revaluation of Assets and Liabilities)

पुनर्गठन की तिथि पर, संपत्तियों और देनदारियों के वास्तविक मूल्य को दर्शाने के लिए उनका पुनर्मूल्यांकन किया जाता है। इससे होने वाले लाभ या हानि को सभी साझेदारों (सेवानिवृत्त साझेदार सहित) में उनके पुराने लाभ-हानि अनुपात में बांटा जाता है।

  • पुनर्मूल्यांकन खाता (Revaluation Account): यह एक नाममात्र का खाता है जो पुनर्मूल्यांकन से होने वाले लाभ या हानि को रिकॉर्ड करता है।
  • लेखा प्रविष्टियाँ:
    • संपत्ति के मूल्य में वृद्धि: संपत्ति खाता Dr. से पुनर्मूल्यांकन खाता Cr.
    • संपत्ति के मूल्य में कमी: पुनर्मूल्यांकन खाता Dr. से संपत्ति खाता Cr.
    • देनदारी के मूल्य में वृद्धि: पुनर्मूल्यांकन खाता Dr. से देनदारी खाता Cr.
    • देनदारी के मूल्य में कमी: देनदारी खाता Dr. से पुनर्मूल्यांकन खाता Cr.
    • अभिलेखित संपत्ति (Unrecorded Asset): संपत्ति खाता Dr. से पुनर्मूल्यांकन खाता Cr.
    • अभिलेखित देनदारी (Unrecorded Liability): पुनर्मूल्यांकन खाता Dr. से देनदारी खाता Cr.
    • पुनर्मूल्यांकन लाभ/हानि का वितरण:
      • लाभ होने पर: पुनर्मूल्यांकन खाता Dr. से सभी साझेदारों के पूंजी/चालू खाते Cr. (पुराने अनुपात में)
      • हानि होने पर: सभी साझेदारों के पूंजी/चालू खाते Dr. से पुनर्मूल्यांकन खाता Cr. (पुराने अनुपात में)

VI. अवितरित लाभों और संचयों का समायोजन (Adjustment of Undistributed Profits and Reserves)

पुनर्गठन की तिथि तक के सभी संचित लाभों, संचयों और हानियों को सभी साझेदारों (सेवानिवृत्त साझेदार सहित) में उनके पुराने लाभ-हानि अनुपात में बांटा जाता है। ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि ये लाभ/हानियां उस अवधि से संबंधित हैं जब सेवानिवृत्त साझेदार फर्म का हिस्सा था।

  • वितरित की जाने वाली मदें: सामान्य संचय (General Reserve), लाभ-हानि खाते का क्रेडिट शेष (लाभ), कर्मचारी क्षतिपूर्ति संचय (Workers' Compensation Reserve - WCR) (यदि कोई दावा न हो या दावे से कम हो), निवेश उतार-चढ़ाव संचय (Investment Fluctuation Reserve - IFR) (यदि बाजार मूल्य पुस्तक मूल्य से अधिक या बराबर हो)।
  • वितरित न की जाने वाली मदें (हानियां): लाभ-हानि खाते का डेबिट शेष (हानि), विज्ञापन उचंत खाता (Advertisement Suspense Account)।
  • लेखा प्रविष्टियाँ:
    • संचय/लाभ वितरण:
      • सामान्य संचय खाता Dr.
      • लाभ-हानि खाता (क्रेडिट शेष) Dr.
      • कर्मचारी क्षतिपूर्ति संचय खाता Dr. (दावे के बाद शेष)
      • निवेश उतार-चढ़ाव संचय खाता Dr. (बाजार मूल्य समायोजन के बाद शेष)
        • सभी साझेदारों के पूंजी/चालू खाते Cr. (पुराने अनुपात में)
    • संचित हानि वितरण:
      • सभी साझेदारों के पूंजी/चालू खाते Dr. (पुराने अनुपात में)
        • लाभ-हानि खाता (डेबिट शेष) Cr.
        • विज्ञापन उचंत खाता Cr.

VII. सेवानिवृत्त साझेदार को देय राशि का निर्धारण और भुगतान (Ascertaining and Payment to Retiring Partner)

सेवानिवृत्त साझेदार को देय कुल राशि की गणना उसके पूंजी खाते को तैयार करके की जाती है।

  • सेवानिवृत्त साझेदार के पूंजी खाते के क्रेडिट पक्ष में आने वाली मदें:
    • पूंजी का प्रारंभिक शेष।
    • पुनर्मूल्यांकन लाभ में हिस्सा।
    • अवितरित लाभों/संचयों में हिस्सा।
    • ख्याति में हिस्सा।
    • सेवानिवृत्ति की तिथि तक के लाभ में हिस्सा (लाभ-हानि निलंबन खाते के माध्यम से)।
    • पूंजी पर ब्याज, वेतन, कमीशन (यदि साझेदारी समझौते में प्रावधान हो)।
  • सेवानिवृत्त साझेदार के पूंजी खाते के डेबिट पक्ष में आने वाली मदें:
    • आहरण।
    • पुनर्मूल्यांकन हानि में हिस्सा।
    • अवितरित हानियों में हिस्सा।
    • सेवानिवृत्ति की तिथि तक की हानि में हिस्सा (लाभ-हानि निलंबन खाते के माध्यम से)।
    • आहरण पर ब्याज (यदि साझेदारी समझौते में प्रावधान हो)।

भुगतान के तरीके:
सेवानिवृत्त साझेदार को देय कुल राशि का भुगतान निम्न प्रकार से किया जा सकता है:

  1. नकद भुगतान: पूरी राशि का तुरंत नकद भुगतान।
    • लेखा प्रविष्टि: सेवानिवृत्त साझेदार का पूंजी खाता Dr. से बैंक/नकद खाता Cr.
  2. ऋण खाते में हस्तांतरण: पूरी राशि को उसके ऋण खाते में हस्तांतरित करना, जिसे भविष्य में किस्तों में ब्याज सहित भुगतान किया जाएगा।
    • लेखा प्रविष्टि: सेवानिवृत्त साझेदार का पूंजी खाता Dr. से सेवानिवृत्त साझेदार का ऋण खाता Cr.
  3. आंशिक नकद, आंशिक ऋण: कुछ राशि का नकद भुगतान और शेष राशि को ऋण खाते में हस्तांतरित करना।
    • लेखा प्रविष्टि: सेवानिवृत्त साझेदार का पूंजी खाता Dr.
      • बैंक/नकद खाता Cr.
      • सेवानिवृत्त साझेदार का ऋण खाता Cr.

सेवानिवृत्त साझेदार के ऋण खाते पर ब्याज:

  • यदि साझेदारी समझौते में ऋण पर ब्याज के संबंध में कोई प्रावधान नहीं है, तो भारतीय साझेदारी अधिनियम, 1932 के अनुसार 6% प्रति वर्ष की दर से ब्याज देय होगा।

VIII. पूंजी का समायोजन (Adjustment of Capital - Optional)

कभी-कभी, शेष साझेदार अपनी पूंजी को नए लाभ-हानि अनुपात में समायोजित करने का निर्णय लेते हैं।

  • प्रक्रिया:
    1. सेवानिवृत्त साझेदार को भुगतान के बाद शेष साझेदारों की समायोजित पूंजी की गणना करें।
    2. फर्म की कुल नई पूंजी निर्धारित करें (यह या तो प्रश्न में दी गई होगी या शेष साझेदारों की समायोजित पूंजी के आधार पर गणना की जाएगी)।
    3. इस कुल पूंजी को शेष साझेदारों के नए लाभ-हानि अनुपात में बांटें। यह उनकी नई पूंजी होगी।
    4. प्रत्येक साझेदार की वर्तमान समायोजित पूंजी की तुलना उसकी नई आनुपातिक पूंजी से करें।
    5. यदि किसी साझेदार की वर्तमान पूंजी नई आनुपातिक पूंजी से अधिक है, तो वह अतिरिक्त राशि निकाल लेगा।
    6. यदि किसी साझेदार की वर्तमान पूंजी नई आनुपातिक पूंजी से कम है, तो वह कमी को पूरा करने के लिए अतिरिक्त पूंजी लाएगा।
  • लेखा प्रविष्टियाँ:
    • अतिरिक्त पूंजी वापस लेने पर: साझेदार का पूंजी खाता Dr. से बैंक/नकद खाता Cr.
    • कमी होने पर पूंजी लाने पर: बैंक/नकद खाता Dr. से साझेदार का पूंजी खाता Cr.

IX. साझेदार की मृत्यु (Death of a Partner)

साझेदार की मृत्यु भी साझेदारी के पुनर्गठन का एक कारण है। मृत्यु की स्थिति में, सेवानिवृत्ति के समान ही समायोजन किए जाते हैं, लेकिन कुछ महत्वपूर्ण अंतर होते हैं:

  1. मृत्यु की तिथि अनिश्चित होती है: सेवानिवृत्ति की तिथि पहले से ज्ञात होती है, जबकि मृत्यु कभी भी हो सकती है।
  2. कानूनी प्रतिनिधि/निष्पादक (Executor): मृत साझेदार के हिस्से का भुगतान उसके कानूनी प्रतिनिधि (निष्पादक) को किया जाता है, न कि सीधे साझेदार को।
  3. मृत्यु की तिथि तक लाभ/हानि का हिस्सा: मृत साझेदार को उसकी मृत्यु की तिथि तक के लाभ या हानि में हिस्सा दिया जाता है।
    • लाभ/हानि का निर्धारण: यह आमतौर पर पिछले वर्ष के लाभ के आधार पर, औसत लाभ के आधार पर, या बिक्री के आधार पर आनुपातिक रूप से गणना की जाती है।
    • लेखा प्रविष्टि (लाभ होने पर): लाभ-हानि निलंबन खाता (Profit and Loss Suspense Account) Dr. से मृत साझेदार के पूंजी खाते Cr.
    • लेखा प्रविष्टि (हानि होने पर): मृत साझेदार के पूंजी खाते Dr. से लाभ-हानि निलंबन खाता Cr.
  4. मृत्यु की तिथि तक पूंजी पर ब्याज, आहरण, आहरण पर ब्याज, वेतन/कमीशन: इन सभी मदों की गणना मृत्यु की तिथि तक की जाती है और मृत साझेदार के पूंजी खाते में समायोजित किया जाता है।

मृत साझेदार के निष्पादक का खाता (Deceased Partner's Executor's Account):

  • मृत साझेदार के पूंजी खाते का अंतिम शेष उसके निष्पादक के खाते में हस्तांतरित किया जाता है।
    • लेखा प्रविष्टि: मृत साझेदार का पूंजी खाता Dr. से मृत साझेदार के निष्पादक का खाता Cr.
  • निष्पादक को भुगतान सेवानिवृत्त साझेदार के समान ही किया जाता है (नकद, ऋण, या आंशिक)।
    • लेखा प्रविष्टि: मृत साझेदार के निष्पादक का खाता Dr. से बैंक/नकद खाता Cr. (या मृत साझेदार के निष्पादक का ऋण खाता Cr.)

X. संयुक्त जीवन बीमा पॉलिसी (Joint Life Policy - JLP)

फर्म द्वारा अपने सभी साझेदारों के जीवन पर ली गई एक बीमा पॉलिसी को संयुक्त जीवन बीमा पॉलिसी कहते हैं। इसका उद्देश्य किसी साझेदार की मृत्यु की स्थिति में फर्म को वित्तीय कठिनाई से बचाना है।

  • लेखांकन व्यवहार:
    • 1. प्रीमियम को सामान्य व्यय मानना:
      • प्रीमियम का भुगतान: लाभ-हानि खाता Dr. से बैंक खाता Cr.
      • मृत्यु पर पॉलिसी राशि प्राप्त होने पर: बैंक खाता Dr. से सभी साझेदारों के पूंजी खाते Cr. (पुराने लाभ-हानि अनुपात में)
    • 2. प्रीमियम को संपत्ति मानना (समर्पण मूल्य पर):
      • प्रीमियम का भुगतान: संयुक्त जीवन बीमा पॉलिसी खाता Dr. से बैंक खाता Cr.
      • वर्ष के अंत में: लाभ-हानि खाता Dr. से संयुक्त जीवन बीमा पॉलिसी खाता Cr. (समर्पण मूल्य से अधिक राशि को अपलिखित करने के लिए)।
      • मृत्यु पर पॉलिसी राशि प्राप्त होने पर: बैंक खाता Dr. से संयुक्त जीवन बीमा पॉलिसी खाता Cr. (पॉलिसी राशि - पुस्तक मूल्य), फिर संयुक्त जीवन बीमा पॉलिसी खाता Dr. से सभी साझेदारों के पूंजी खाते Cr. (पुराने लाभ-हानि अनुपात में)।
    • 3. संयुक्त जीवन बीमा पॉलिसी संचय विधि (JLP Reserve Method):
      • प्रीमियम का भुगतान: संयुक्त जीवन बीमा पॉलिसी खाता Dr. से बैंक खाता Cr.
      • प्रत्येक वर्ष लाभ-हानि विनियोजन खाते से JLP संचय बनाना: लाभ-हानि विनियोजन खाता Dr. से संयुक्त जीवन बीमा पॉलिसी संचय खाता Cr. (प्रीमियम राशि)।
      • JLP खाता को समर्पण मूल्य पर समायोजित करना।
      • मृत्यु पर पॉलिसी राशि प्राप्त होने पर: बैंक खाता Dr. से संयुक्त जीवन बीमा पॉलिसी खाता Cr. (पॉलिसी राशि - पुस्तक मूल्य), फिर संयुक्त जीवन बीमा पॉलिसी संचय खाता Dr. से सभी साझेदारों के पूंजी खाते Cr. (पुराने अनुपात में)। JLP खाता शेष को भी साझेदारों में बांटा जाता है।

XI. कुछ महत्वपूर्ण शब्दावली:

  • प्राप्ति अनुपात (Gaining Ratio): वह अनुपात जिसमें शेष साझेदार सेवानिवृत्त/मृत साझेदार के हिस्से को प्राप्त करते हैं।
  • नया लाभ-हानि अनुपात (New Profit Sharing Ratio): सेवानिवृत्ति/मृत्यु के बाद शेष साझेदारों के बीच भविष्य में लाभ बांटने का अनुपात।
  • पुनर्मूल्यांकन खाता (Revaluation Account): संपत्तियों और देनदारियों के पुनर्मूल्यांकन से होने वाले लाभ या हानि को रिकॉर्ड करने के लिए बनाया गया खाता।
  • ख्याति (Goodwill): फर्म की प्रतिष्ठा और अच्छी साख का मौद्रिक मूल्य।
  • निष्पादक (Executor): मृत व्यक्ति की वसीयत को निष्पादित करने या उसकी संपत्ति का प्रबंधन करने के लिए नियुक्त व्यक्ति।
  • लाभ-हानि निलंबन खाता (Profit and Loss Suspense Account): साझेदार की मृत्यु की तिथि तक के लाभ या हानि के हिस्से को समायोजित करने के लिए उपयोग किया जाने वाला खाता।
  • संयुक्त जीवन बीमा पॉलिसी (Joint Life Policy): सभी साझेदारों के जीवन पर फर्म द्वारा ली गई बीमा पॉलिसी।

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) - 10 प्रश्न

1. साझेदार की सेवानिवृत्ति पर, शेष साझेदारों का प्राप्ति अनुपात (Gaining Ratio) की गणना का सूत्र क्या है?
a) पुराना अनुपात - नया अनुपात
b) नया अनुपात - पुराना अनुपात
c) पुराना अनुपात + नया अनुपात
d) नया अनुपात + पुराना अनुपात

2. A, B और C साझेदार हैं जो लाभ-हानि को 3:2:1 के अनुपात में बांटते हैं। B सेवानिवृत्त होता है। यदि कोई अन्य जानकारी नहीं दी गई है, तो A और C का नया लाभ-हानि अनुपात क्या होगा?
a) 3:1
b) 1:3
c) 2:1
d) 1:2

3. साझेदार की सेवानिवृत्ति पर ख्याति के समायोजन के लिए किस अनुपात का उपयोग किया जाता है?
a) पुराना लाभ-हानि अनुपात
b) नया लाभ-हानि अनुपात
c) प्राप्ति अनुपात
d) त्याग अनुपात

4. पुनर्मूल्यांकन खाते पर लाभ या हानि को सभी साझेदारों के पूंजी खाते में किस अनुपात में बांटा जाता है?
a) नया लाभ-हानि अनुपात
b) पुराना लाभ-हानि अनुपात
c) प्राप्ति अनुपात
d) त्याग अनुपात

5. एक साझेदार की सेवानिवृत्ति पर, सामान्य संचय (General Reserve) का वितरण किया जाता है:
a) केवल शेष साझेदारों में
b) सभी साझेदारों में (सेवानिवृत्त साझेदार सहित)
c) केवल सेवानिवृत्त साझेदार में
d) इनमें से कोई नहीं

6. यदि सेवानिवृत्त साझेदार को देय राशि का तुरंत भुगतान नहीं किया जाता है, तो उसे हस्तांतरित किया जाता है:
a) लाभ-हानि निलंबन खाते में
b) पुनर्मूल्यांकन खाते में
c) सेवानिवृत्त साझेदार के ऋण खाते में
d) पूंजी खाते में

7. साझेदारी अधिनियम, 1932 के अनुसार, यदि सेवानिवृत्त साझेदार के ऋण खाते पर ब्याज के संबंध में कोई समझौता नहीं है, तो ब्याज की दर क्या होगी?
a) 5% प्रति वर्ष
b) 6% प्रति वर्ष
c) 8% प्रति वर्ष
d) 12% प्रति वर्ष

8. साझेदार की मृत्यु की स्थिति में, उसकी मृत्यु की तिथि तक के लाभ के हिस्से को समायोजित करने के लिए किस खाते का उपयोग किया जाता है?
a) लाभ-हानि विनियोजन खाता
b) लाभ-हानि खाता
c) लाभ-हानि निलंबन खाता
d) सामान्य संचय खाता

9. संयुक्त जीवन बीमा पॉलिसी (JLP) का प्रीमियम यदि लाभ-हानि खाते में व्यय के रूप में दिखाया जाता है, तो साझेदार की मृत्यु पर प्राप्त JLP राशि को किस अनुपात में बांटा जाएगा?
a) नया लाभ-हानि अनुपात
b) पुराना लाभ-हानि अनुपात
c) प्राप्ति अनुपात
d) त्याग अनुपात

10. मृत साझेदार के पूंजी खाते का अंतिम शेष किसे हस्तांतरित किया जाता है?
a) शेष साझेदारों के पूंजी खाते में
b) लाभ-हानि खाते में
c) मृत साझेदार के निष्पादक के खाते में
d) सामान्य संचय खाते में


MCQs के उत्तर:

  1. b) नया अनुपात - पुराना अनुपात
  2. a) 3:1
  3. c) प्राप्ति अनुपात
  4. b) पुराना लाभ-हानि अनुपात
  5. b) सभी साझेदारों में (सेवानिवृत्त साझेदार सहित)
  6. c) सेवानिवृत्त साझेदार के ऋण खाते में
  7. b) 6% प्रति वर्ष
  8. c) लाभ-हानि निलंबन खाता
  9. b) पुराना लाभ-हानि अनुपात
  10. c) मृत साझेदार के निष्पादक के खाते में

मुझे आशा है कि यह विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपकी सरकारी परीक्षाओं की तैयारी में अत्यंत सहायक सिद्ध होंगे। किसी भी अवधारणा को समझने में यदि कोई कठिनाई हो, तो आप पूछ सकते हैं। शुभकामनाएँ!

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