Class 12 Accountancy Notes Chapter 5 (लेखांकन अनुपात) – Lekhashashtra Part-II Book

Lekhashashtra Part-II
प्रिय विद्यार्थियों,

आज हम लेखांकन अनुपात (Accounting Ratios) नामक अध्याय 5 का विस्तृत अध्ययन करेंगे, जो सरकारी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह अध्याय वित्तीय विवरणों के विश्लेषण का एक महत्वपूर्ण उपकरण है, जो आपको कंपनी की वित्तीय स्थिति और प्रदर्शन को समझने में मदद करेगा।


अध्याय 5: लेखांकन अनुपात (Accounting Ratios)

1. परिचय (Introduction)
लेखांकन अनुपात वित्तीय विवरणों में विभिन्न मदों के बीच संबंध को व्यक्त करने का एक गणितीय तरीका है। यह वित्तीय विवरणों (जैसे तुलन-पत्र और लाभ-हानि विवरण) में दी गई संख्याओं को सरल और समझने योग्य रूप में प्रस्तुत करता है, जिससे निर्णय लेने में आसानी होती है।

2. लेखांकन अनुपातों का अर्थ (Meaning of Accounting Ratios)
लेखांकन अनुपात दो या दो से अधिक लेखांकन मदों के बीच एक अंकगणितीय संबंध है। यह संबंध प्रतिशत, गुना, या भिन्न के रूप में व्यक्त किया जा सकता है।

3. लेखांकन अनुपातों के उद्देश्य (Objectives of Accounting Ratios)

  • वित्तीय विवरणों को सरल बनाना: जटिल वित्तीय डेटा को सरल और समझने योग्य बनाता है।
  • फर्म की तरलता का विश्लेषण: अल्पकालिक ऋण चुकाने की क्षमता का आकलन।
  • फर्म की शोधन क्षमता का विश्लेषण: दीर्घकालिक ऋण चुकाने की क्षमता का आकलन।
  • फर्म की परिचालन दक्षता का विश्लेषण: संसाधनों के उपयोग की दक्षता का मूल्यांकन।
  • फर्म की लाभप्रदता का विश्लेषण: लाभ कमाने की क्षमता का मूल्यांकन।
  • तुलनात्मक अध्ययन: विभिन्न अवधियों या विभिन्न फर्मों के बीच तुलना करने में सहायक।
  • भविष्यवाणी और नियोजन: भविष्य के रुझानों का अनुमान लगाने और नियोजन में मदद करता है।

4. लेखांकन अनुपातों के लाभ (Advantages of Accounting Ratios)

  • वित्तीय विवरणों के विश्लेषण में सहायक।
  • प्रबंधकीय निर्णय लेने में उपयोगी।
  • अंतर-फर्म (Inter-firm) और अंतरा-फर्म (Intra-firm) तुलना में सहायक।
  • कमजोरियों और शक्तियों की पहचान करने में सहायक।
  • बजट बनाने और पूर्वानुमान लगाने में सहायक।

5. लेखांकन अनुपातों की सीमाएँ (Limitations of Accounting Ratios)

  • ऐतिहासिक डेटा पर आधारित: अनुपात भूतकाल के डेटा पर आधारित होते हैं, जो भविष्य के लिए हमेशा सटीक नहीं होते।
  • लेखांकन नीतियों में भिन्नता: विभिन्न फर्मों द्वारा अपनाई गई विभिन्न लेखांकन नीतियाँ तुलना को कठिन बना सकती हैं।
  • गुणात्मक कारकों की उपेक्षा: अनुपात केवल मात्रात्मक जानकारी पर ध्यान केंद्रित करते हैं और गुणात्मक पहलुओं (जैसे प्रबंधन की गुणवत्ता) को अनदेखा करते हैं।
  • मूल्य स्तर में परिवर्तन: मुद्रास्फीति या अपस्फीति के कारण वित्तीय डेटा की तुलना मुश्किल हो सकती है।
  • विंडो ड्रेसिंग (Window Dressing): वित्तीय विवरणों में हेरफेर अनुपातों को भ्रामक बना सकता है।
  • मानक अनुपातों का अभाव: उद्योग-विशिष्ट मानक अनुपातों की उपलब्धता हमेशा संभव नहीं होती।

6. अनुपातों का वर्गीकरण (Classification of Ratios)
लेखांकन अनुपातों को मुख्य रूप से चार श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता है:

A. तरलता अनुपात (Liquidity Ratios):
ये अनुपात फर्म की अल्पकालिक ऋण चुकाने की क्षमता का आकलन करते हैं।

  1. चालू अनुपात (Current Ratio):

    • सूत्र: चालू परिसंपत्तियाँ / चालू देयताएँ (Current Assets / Current Liabilities)
    • आदर्श अनुपात: 2:1 (यह इंगित करता है कि चालू देयताओं को चुकाने के लिए पर्याप्त चालू परिसंपत्तियाँ उपलब्ध हैं)
    • महत्व: यह फर्म की अल्पकालिक शोधन क्षमता का सबसे सामान्य माप है।
    • चालू परिसंपत्तियाँ: नकद, बैंक, प्राप्य (देनदार + प्राप्य बिल), स्टॉक (इन्वेंट्री), अल्पकालिक निवेश, पूर्वदत्त व्यय आदि।
    • चालू देयताएँ: देय (लेनदार + देय बिल), अल्पकालिक ऋण, बैंक ओवरड्राफ्ट, बकाया व्यय, अग्रिम आय आदि।
  2. त्वरित अनुपात या अम्ल-जाँच अनुपात (Quick Ratio or Acid-Test Ratio):

    • सूत्र: त्वरित परिसंपत्तियाँ / चालू देयताएँ (Quick Assets / Current Liabilities)
    • आदर्श अनुपात: 1:1 (यह इंगित करता है कि बिना स्टॉक बेचे भी फर्म अपनी अल्पकालिक देयताओं को चुका सकती है)
    • महत्व: यह चालू अनुपात की तुलना में अधिक रूढ़िवादी माप है क्योंकि यह स्टॉक और पूर्वदत्त व्यय को बाहर करता है (जो आसानी से नकद में परिवर्तित नहीं होते)।
    • त्वरित परिसंपत्तियाँ: चालू परिसंपत्तियाँ - (स्टॉक + पूर्वदत्त व्यय)

B. शोधन क्षमता अनुपात (Solvency Ratios):
ये अनुपात फर्म की दीर्घकालिक ऋण चुकाने की क्षमता का आकलन करते हैं।

  1. ऋण-समता अनुपात (Debt-to-Equity Ratio):

    • सूत्र: दीर्घकालिक ऋण / शेयरधारक निधि (Long-term Debts / Shareholders' Funds)
    • आदर्श अनुपात: 2:1 (उच्च अनुपात जोखिम भरा माना जाता है)
    • महत्व: यह अनुपात बताता है कि फर्म की परिसंपत्तियों को वित्तपोषित करने में बाहरी निधियों (ऋण) का कितना उपयोग किया गया है, शेयरधारकों की निधियों की तुलना में।
    • दीर्घकालिक ऋण: डिबेंचर, दीर्घकालिक ऋण, बंधक ऋण आदि।
    • शेयरधारक निधि (स्वामित्व निधि): इक्विटी शेयर पूँजी + वरीयता शेयर पूँजी + संचय और अधिशेष (संचित लाभ)।
  2. कुल परिसंपत्ति से ऋण अनुपात (Total Assets to Debt Ratio):

    • सूत्र: कुल परिसंपत्तियाँ / दीर्घकालिक ऋण (Total Assets / Long-term Debts)
    • महत्व: यह बताता है कि फर्म की कुल परिसंपत्तियाँ दीर्घकालिक ऋणों को चुकाने के लिए कितनी पर्याप्त हैं। उच्च अनुपात बेहतर शोधन क्षमता दर्शाता है।
    • कुल परिसंपत्तियाँ: सभी गैर-चालू परिसंपत्तियाँ + सभी चालू परिसंपत्तियाँ।
  3. स्वामित्व अनुपात (Proprietary Ratio):

    • सूत्र: शेयरधारक निधि / कुल परिसंपत्तियाँ (Shareholders' Funds / Total Assets)
    • महत्व: यह अनुपात बताता है कि कुल परिसंपत्तियों का कितना हिस्सा शेयरधारकों की निधियों द्वारा वित्तपोषित है। उच्च अनुपात बेहतर शोधन क्षमता और सुरक्षा दर्शाता है।
  4. ब्याज व्याप्ति अनुपात (Interest Coverage Ratio):

    • सूत्र: कर और ब्याज से पूर्व लाभ / ब्याज व्यय (Profit Before Interest and Tax / Interest Expense)
    • महत्व: यह अनुपात बताता है कि फर्म अपने लाभ से ब्याज भुगतानों को कितनी बार कवर कर सकती है। उच्च अनुपात ऋणदाताओं के लिए अधिक सुरक्षा दर्शाता है।

C. क्रियाशीलता अनुपात या कार्य निष्पादन अनुपात (Activity Ratios or Performance Ratios):
ये अनुपात फर्म के संसाधनों का कितनी कुशलता से उपयोग किया जा रहा है, इसका आकलन करते हैं।

  1. स्कंध आवर्त अनुपात (Inventory Turnover Ratio):

    • सूत्र: बेचे गए माल की लागत / औसत स्कंध (Cost of Revenue from Operations / Average Inventory)
    • महत्व: यह अनुपात बताता है कि एक निश्चित अवधि में स्टॉक को कितनी बार बेचा और बदला गया है। उच्च अनुपात कुशल स्टॉक प्रबंधन को दर्शाता है।
    • बेचे गए माल की लागत (Cost of Revenue from Operations): प्रारंभिक स्कंध + शुद्ध खरीद + प्रत्यक्ष व्यय - अंतिम स्कंध। (या राजस्व से परिचालन - सकल लाभ)
    • औसत स्कंध: (प्रारंभिक स्कंध + अंतिम स्कंध) / 2
  2. व्यापारिक प्राप्य आवर्त अनुपात (Trade Receivables Turnover Ratio):

    • सूत्र: शुद्ध उधार राजस्व से परिचालन / औसत व्यापारिक प्राप्य (Net Credit Revenue from Operations / Average Trade Receivables)
    • महत्व: यह अनुपात बताता है कि फर्म अपने देनदारों से कितनी जल्दी नकदी एकत्र कर रही है। उच्च अनुपात कुशल ऋण संग्रह को दर्शाता है।
    • औसत व्यापारिक प्राप्य: (प्रारंभिक देनदार + प्रारंभिक प्राप्य बिल + अंतिम देनदार + अंतिम प्राप्य बिल) / 2
    • औसत संग्रह अवधि (Average Collection Period): 365 दिन / व्यापारिक प्राप्य आवर्त अनुपात
  3. व्यापारिक देय आवर्त अनुपात (Trade Payables Turnover Ratio):

    • सूत्र: शुद्ध उधार खरीद / औसत व्यापारिक देय (Net Credit Purchases / Average Trade Payables)
    • महत्व: यह अनुपात बताता है कि फर्म अपने लेनदारों को कितनी जल्दी भुगतान कर रही है।
    • औसत व्यापारिक देय: (प्रारंभिक लेनदार + प्रारंभिक देय बिल + अंतिम लेनदार + अंतिम देय बिल) / 2
    • औसत भुगतान अवधि (Average Payment Period): 365 दिन / व्यापारिक देय आवर्त अनुपात
  4. कार्यशील पूँजी आवर्त अनुपात (Working Capital Turnover Ratio):

    • सूत्र: राजस्व से परिचालन / कार्यशील पूँजी (Revenue from Operations / Working Capital)
    • महत्व: यह अनुपात बताता है कि कार्यशील पूँजी का उपयोग बिक्री उत्पन्न करने में कितनी कुशलता से किया जा रहा है। उच्च अनुपात कुशल उपयोग को दर्शाता है।
    • कार्यशील पूँजी: चालू परिसंपत्तियाँ - चालू देयताएँ

D. लाभप्रदता अनुपात (Profitability Ratios):
ये अनुपात फर्म की लाभ कमाने की क्षमता का आकलन करते हैं।

  1. सकल लाभ अनुपात (Gross Profit Ratio):

    • सूत्र: (सकल लाभ / राजस्व से परिचालन) × 100 (Gross Profit / Revenue from Operations) × 100
    • महत्व: यह अनुपात बिक्री से सकल लाभ का प्रतिशत दर्शाता है। यह विनिर्माण और व्यापारिक दक्षता का सूचक है।
    • सकल लाभ: राजस्व से परिचालन - बेचे गए माल की लागत
  2. परिचालन अनुपात (Operating Ratio):

    • सूत्र: (बेचे गए माल की लागत + परिचालन व्यय / राजस्व से परिचालन) × 100 ((Cost of Revenue from Operations + Operating Expenses) / Revenue from Operations) × 100
    • महत्व: यह अनुपात परिचालन गतिविधियों की दक्षता को दर्शाता है। कम अनुपात बेहतर दक्षता को दर्शाता है।
    • परिचालन व्यय: कार्यालय और प्रशासनिक व्यय, बिक्री और वितरण व्यय, मूल्यह्रास आदि। (गैर-परिचालन व्यय जैसे ब्याज, हानि आदि शामिल नहीं हैं)।
  3. परिचालन लाभ अनुपात (Operating Profit Ratio):

    • सूत्र: (परिचालन लाभ / राजस्व से परिचालन) × 100 (Operating Profit / Revenue from Operations) × 100
    • महत्व: यह अनुपात परिचालन गतिविधियों से अर्जित लाभ का प्रतिशत दर्शाता है। उच्च अनुपात बेहतर परिचालन दक्षता को दर्शाता है।
    • परिचालन लाभ: सकल लाभ - परिचालन व्यय (या राजस्व से परिचालन - बेचे गए माल की लागत - परिचालन व्यय)
    • या: 100% - परिचालन अनुपात
  4. शुद्ध लाभ अनुपात (Net Profit Ratio):

    • सूत्र: (शुद्ध लाभ (कर के बाद) / राजस्व से परिचालन) × 100 (Net Profit (After Tax) / Revenue from Operations) × 100
    • महत्व: यह अनुपात बिक्री से शुद्ध लाभ का प्रतिशत दर्शाता है। यह फर्म की समग्र लाभप्रदता का अंतिम माप है।
  5. विनियोजित पूँजी पर प्रत्याय या निवेश पर प्रत्याय (Return on Investment / Return on Capital Employed - ROI/ROCE):

    • सूत्र: (कर और ब्याज से पूर्व लाभ / विनियोजित पूँजी) × 100 ((Profit Before Interest and Tax / Capital Employed) × 100)
    • महत्व: यह अनुपात बताता है कि फर्म अपनी विनियोजित पूँजी का उपयोग करके कितनी कुशलता से लाभ कमा रही है। उच्च अनुपात बेहतर प्रदर्शन को दर्शाता है।
    • विनियोजित पूँजी: शेयरधारक निधि + दीर्घकालिक ऋण (या कुल परिसंपत्तियाँ - चालू देयताएँ)

महत्वपूर्ण शब्दावली और गणना (Important Terminology and Calculations):

  • राजस्व से परिचालन (Revenue from Operations): शुद्ध बिक्री (नकद बिक्री + उधार बिक्री - बिक्री वापसी)।
  • बेचे गए माल की लागत (Cost of Revenue from Operations): प्रारंभिक स्टॉक + शुद्ध खरीद + प्रत्यक्ष व्यय - अंतिम स्टॉक।
  • परिचालन व्यय (Operating Expenses): वे व्यय जो व्यवसाय के सामान्य संचालन से संबंधित होते हैं, जैसे प्रशासनिक व्यय, बिक्री व्यय, मूल्यह्रास।
  • गैर-परिचालन व्यय/आय (Non-Operating Expenses/Income): वे व्यय/आय जो व्यवसाय के मुख्य संचालन से संबंधित नहीं होते, जैसे ब्याज व्यय, परिसंपत्ति की बिक्री पर लाभ/हानि, लाभांश आय।
  • कर और ब्याज से पूर्व लाभ (Profit Before Interest and Tax - PBIT): राजस्व से परिचालन - बेचे गए माल की लागत - परिचालन व्यय + गैर-परिचालन आय - गैर-परिचालन व्यय।
  • कार्यशील पूँजी (Working Capital): चालू परिसंपत्तियाँ - चालू देयताएँ।
  • शेयरधारक निधि (Shareholders' Funds): इक्विटी शेयर पूँजी + वरीयता शेयर पूँजी + संचय और अधिशेष - काल्पनिक परिसंपत्तियाँ।
  • दीर्घकालिक ऋण (Long-term Debts): वे ऋण जिनका भुगतान एक वर्ष से अधिक की अवधि में करना होता है।
  • कुल परिसंपत्तियाँ (Total Assets): गैर-चालू परिसंपत्तियाँ + चालू परिसंपत्तियाँ।

बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions - MCQs)

  1. निम्न में से कौन सा अनुपात अल्पकालिक शोधन क्षमता को मापता है?
    a) ऋण-समता अनुपात
    b) सकल लाभ अनुपात
    c) चालू अनुपात
    d) स्कंध आवर्त अनुपात

  2. एक फर्म का आदर्श चालू अनुपात क्या है?
    a) 1:1
    b) 2:1
    c) 0.5:1
    d) 3:1

  3. त्वरित अनुपात की गणना करते समय निम्न में से किसे चालू परिसंपत्तियों से घटाया जाता है?
    a) नकद
    b) बैंक शेष
    c) स्टॉक
    d) देनदार

  4. यदि चालू परिसंपत्तियाँ ₹ 4,00,000 और चालू देयताएँ ₹ 2,00,000 हैं, तो चालू अनुपात क्या होगा?
    a) 0.5:1
    b) 1:2
    c) 2:1
    d) 4:1

  5. ऋण-समता अनुपात निम्न में से किस श्रेणी का अनुपात है?
    a) तरलता अनुपात
    b) शोधन क्षमता अनुपात
    c) क्रियाशीलता अनुपात
    d) लाभप्रदता अनुपात

  6. विनियोजित पूँजी पर प्रत्याय (ROI) की गणना के लिए निम्न में से कौन सा सूत्र सही है?
    a) (शुद्ध लाभ / राजस्व से परिचालन) × 100
    b) (कर और ब्याज से पूर्व लाभ / विनियोजित पूँजी) × 100
    c) (सकल लाभ / राजस्व से परिचालन) × 100
    d) (परिचालन लाभ / राजस्व से परिचालन) × 100

  7. स्कंध आवर्त अनुपात का उच्च होना क्या दर्शाता है?
    a) खराब स्टॉक प्रबंधन
    b) कुशल स्टॉक प्रबंधन
    c) उच्च लाभप्रदता
    d) निम्न शोधन क्षमता

  8. यदि बेचे गए माल की लागत ₹ 6,00,000 और औसत स्कंध ₹ 1,20,000 है, तो स्कंध आवर्त अनुपात क्या होगा?
    a) 5 गुना
    b) 0.2 गुना
    c) 6 गुना
    d) 10 गुना

  9. परिचालन अनुपात की गणना में निम्न में से कौन सा व्यय शामिल नहीं किया जाता है?
    a) कार्यालय व्यय
    b) बिक्री व्यय
    c) ब्याज व्यय
    d) मूल्यह्रास

  10. स्वामित्व अनुपात क्या मापता है?
    a) कुल परिसंपत्तियों में ऋणदाताओं का हिस्सा
    b) कुल परिसंपत्तियों में शेयरधारकों का हिस्सा
    c) फर्म की अल्पकालिक शोधन क्षमता
    d) फर्म की परिचालन दक्षता


MCQs के उत्तर:

  1. c) चालू अनुपात
  2. b) 2:1
  3. c) स्टॉक
  4. c) 2:1 (₹4,00,000 / ₹2,00,000)
  5. b) शोधन क्षमता अनुपात
  6. b) (कर और ब्याज से पूर्व लाभ / विनियोजित पूँजी) × 100
  7. b) कुशल स्टॉक प्रबंधन
  8. a) 5 गुना (₹6,00,000 / ₹1,20,000)
  9. c) ब्याज व्यय
  10. b) कुल परिसंपत्तियों में शेयरधारकों का हिस्सा

मुझे आशा है कि यह विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपकी सरकारी परीक्षाओं की तैयारी में सहायक सिद्ध होंगे। इस अध्याय के सूत्रों और उनके घटकों को अच्छी तरह से समझें और अभ्यास करें। शुभकामनाएँ!

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