Class 12 Accountancy Notes Chapter 5 (साझेदारी फर्म का विघटन) – Lekhashashtra Part-I Book

प्रिय विद्यार्थियों, आज हम कक्षा 12 लेखाशास्त्र के अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय 'साझेदारी फर्म का विघटन' का विस्तृत अध्ययन करेंगे। यह अध्याय न केवल आपकी बोर्ड परीक्षाओं के लिए बल्कि विभिन्न प्रतियोगी सरकारी परीक्षाओं के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस अध्याय की गहन समझ आपको लेखांकन के सिद्धांतों और व्यवहारिक अनुप्रयोगों को समझने में मदद करेगी। आइए, हम इस विषय की गहराई में उतरें और प्रत्येक पहलू को विस्तार से समझें।
अध्याय 5: साझेदारी फर्म का विघटन (Dissolution of Partnership Firm)
1. विघटन का अर्थ (Meaning of Dissolution)
- साझेदारी का विघटन (Dissolution of Partnership): जब साझेदारों के बीच संबंध बदल जाते हैं, लेकिन फर्म का व्यवसाय जारी रहता है, तो इसे साझेदारी का विघटन या पुनर्गठन कहते हैं। उदाहरण के लिए, किसी नए साझेदार का प्रवेश, किसी साझेदार की सेवानिवृत्ति या मृत्यु, लाभ-हानि अनुपात में परिवर्तन आदि।
- फर्म का विघटन (Dissolution of Firm): जब साझेदारों के बीच का संबंध समाप्त हो जाता है और फर्म का व्यवसाय बंद हो जाता है, तो इसे फर्म का विघटन कहते हैं। इस स्थिति में, फर्म की सभी संपत्तियों को बेचा जाता है, बाहरी दायित्वों का भुगतान किया जाता है, और शेष राशि साझेदारों के बीच वितरित की जाती है। भारतीय साझेदारी अधिनियम, 1932 की धारा 39 के अनुसार, "एक फर्म का विघटन सभी साझेदारों के बीच साझेदारी के विघटन को संदर्भित करता है।"
2. फर्म के विघटन की विधियाँ (Modes of Dissolution of a Firm) - भारतीय साझेदारी अधिनियम, 1932 की धारा 39 से 44
फर्म का विघटन निम्नलिखित तरीकों से हो सकता है:
- 1. अनुबंध द्वारा विघटन (Dissolution by Agreement) - धारा 40:
- सभी साझेदारों की सहमति से।
- साझेदारों के बीच हुए किसी पूर्व अनुबंध के अनुसार।
- 2. अनिवार्य विघटन (Compulsory Dissolution) - धारा 41:
- जब सभी साझेदार या एक को छोड़कर सभी साझेदार दिवालिया हो जाते हैं, जिससे वे अनुबंध करने में अक्षम हो जाते हैं।
- जब फर्म का व्यवसाय अवैध हो जाता है।
- जब कोई ऐसी घटना घटित हो जाती है जिससे फर्म का व्यवसाय चलाना गैरकानूनी हो जाता है।
- 3. कुछ घटनाओं के घटित होने पर विघटन (Dissolution on Happening of Certain Events) - धारा 42:
- यदि फर्म किसी निश्चित अवधि के लिए बनाई गई थी और वह अवधि समाप्त हो जाती है।
- यदि फर्म किसी विशेष कार्य को पूरा करने के लिए बनाई गई थी और वह कार्य पूरा हो जाता है।
- किसी साझेदार की मृत्यु होने पर (जब तक कि अनुबंध में अन्यथा प्रावधान न हो)।
- किसी साझेदार के दिवालिया होने पर (जब तक कि अनुबंध में अन्यथा प्रावधान न हो)।
- 4. सूचना द्वारा विघटन (Dissolution by Notice) - धारा 43:
- यह केवल 'ऐच्छिक साझेदारी' (Partnership at Will) के मामले में लागू होता है।
- कोई भी साझेदार अन्य सभी साझेदारों को फर्म के विघटन के अपने इरादे की लिखित सूचना देकर फर्म का विघटन कर सकता है।
- 5. न्यायालय द्वारा विघटन (Dissolution by Court) - धारा 44:
न्यायालय निम्नलिखित आधारों पर किसी साझेदार के आवेदन पर फर्म के विघटन का आदेश दे सकता है:- जब कोई साझेदार मानसिक रूप से अस्वस्थ (पागल) हो जाए।
- जब कोई साझेदार स्थायी रूप से अपने कर्तव्यों का पालन करने में अक्षम हो जाए।
- जब कोई साझेदार फर्म के व्यवसाय को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करने वाला दुराचार का दोषी हो।
- जब कोई साझेदार जानबूझकर साझेदारी अनुबंध का उल्लंघन करता हो।
- जब फर्म का व्यवसाय निरंतर हानि में चल रहा हो और भविष्य में लाभ की कोई संभावना न हो।
- जब न्यायालय को किसी अन्य आधार पर फर्म का विघटन उचित और न्यायसंगत लगे।
3. खातों का निपटारा (Settlement of Accounts) - भारतीय साझेदारी अधिनियम, 1932 की धारा 48
फर्म के विघटन पर, खातों का निपटारा निम्नलिखित नियमों के अनुसार किया जाता है:
- 1. हानियों का भुगतान (Application of Losses):
- सबसे पहले फर्म के लाभों में से।
- फिर साझेदारों की पूँजी में से।
- अंत में, यदि आवश्यक हो, तो साझेदारों द्वारा व्यक्तिगत रूप से उनके लाभ-हानि अनुपात में।
- 2. संपत्तियों का उपयोग (Application of Assets):
फर्म की संपत्तियों को (हानियों की पूर्ति के लिए साझेदारों द्वारा लाई गई किसी भी राशि सहित) निम्नलिखित क्रम में लागू किया जाएगा:- फर्म के बाहरी ऋणों का भुगतान करने के लिए।
- साझेदारों को उनके द्वारा दिए गए ऋणों (पूँजी से भिन्न) का भुगतान करने के लिए।
- साझेदारों को उनकी पूँजी का भुगतान करने के लिए।
- यदि कोई अधिशेष बचता है, तो उसे साझेदारों के बीच उनके लाभ-हानि अनुपात में विभाजित किया जाएगा।
4. फर्म के ऋण बनाम निजी ऋण (Firm's Debts and Private Debts) - धारा 49
- फर्म की संपत्ति: पहले फर्म के ऋणों का भुगतान करने के लिए उपयोग की जाएगी। यदि कोई अधिशेष बचता है, तो उसे साझेदारों के निजी ऋणों के भुगतान के लिए उपयोग किया जा सकता है।
- साझेदार की निजी संपत्ति: पहले साझेदार के निजी ऋणों का भुगतान करने के लिए उपयोग की जाएगी। यदि कोई अधिशेष बचता है, तो उसे फर्म के ऋणों का भुगतान करने के लिए उपयोग किया जा सकता है, यदि फर्म की संपत्ति अपर्याप्त हो।
5. लेखांकन व्यवहार (Accounting Treatment)
फर्म के विघटन पर, निम्नलिखित खाते तैयार किए जाते हैं:
-
1. वसूली खाता (Realisation Account):
- यह एक नाममात्र खाता है जिसका उद्देश्य फर्म की संपत्तियों की बिक्री और दायित्वों के भुगतान से होने वाले लाभ या हानि का पता लगाना है।
- प्रक्रिया:
- सभी संपत्तियों (रोकड़/बैंक शेष को छोड़कर) को उनके पुस्तक मूल्य पर वसूली खाते के डेबिट पक्ष में हस्तांतरित किया जाता है।
- सभी बाहरी दायित्वों (जैसे लेनदार, देय बिल, बैंक ओवरड्राफ्ट, साझेदार के ऋण को छोड़कर) को उनके पुस्तक मूल्य पर वसूली खाते के क्रेडिट पक्ष में हस्तांतरित किया जाता है।
- संपत्तियों की बिक्री से प्राप्त राशि को वसूली खाते के क्रेडिट पक्ष में दर्ज किया जाता है।
- साझेदार द्वारा ली गई किसी भी संपत्ति को साझेदार के पूँजी खाते के माध्यम से वसूली खाते के क्रेडिट पक्ष में दर्ज किया जाता है।
- दायित्वों के भुगतान की राशि को वसूली खाते के डेबिट पक्ष में दर्ज किया जाता है।
- साझेदार द्वारा लिए गए किसी भी दायित्व को साझेदार के पूँजी खाते के माध्यम से वसूली खाते के डेबिट पक्ष में दर्ज किया जाता है।
- वसूली व्यय को वसूली खाते के डेबिट पक्ष में दर्ज किया जाता है।
- वसूली खाते का शेष (लाभ या हानि) साझेदारों के पूँजी खातों में उनके लाभ-हानि अनुपात में हस्तांतरित किया जाता है।
-
2. साझेदारों का ऋण खाता (Partner's Loan Account):
- यदि किसी साझेदार ने फर्म को ऋण दिया है, तो इस ऋण का भुगतान बाहरी लेनदारों के भुगतान के बाद और साझेदारों की पूँजी का भुगतान करने से पहले किया जाता है।
- यह खाता सीधे रोकड़/बैंक खाते से भुगतान करके बंद किया जाता है।
-
3. साझेदारों के पूँजी खाते (Partners' Capital Accounts):
- प्रारंभिक शेष क्रेडिट पक्ष में दिखाए जाते हैं।
- वसूली खाते से लाभ क्रेडिट पक्ष में और हानि डेबिट पक्ष में हस्तांतरित की जाती है।
- संचित लाभ (जैसे सामान्य संचय, लाभ-हानि खाते का क्रेडिट शेष, कर्मचारी क्षतिपूर्ति कोष का अधिशेष) साझेदारों के पूँजी खातों में उनके लाभ-हानि अनुपात में क्रेडिट किए जाते हैं।
- संचित हानियाँ (जैसे लाभ-हानि खाते का डेबिट शेष, विज्ञापन उचंती खाता) साझेदारों के पूँजी खातों में उनके लाभ-हानि अनुपात में डेबिट की जाती हैं।
- साझेदार द्वारा ली गई संपत्ति डेबिट की जाती है।
- साझेदार द्वारा लिए गए दायित्व क्रेडिट किए जाते हैं।
- अंतिम शेष का भुगतान रोकड़/बैंक खाते से किया जाता है या यदि कोई कमी है, तो साझेदार द्वारा रोकड़ लाई जाती है।
-
4. रोकड़/बैंक खाता (Cash/Bank Account):
- यह खाता फर्म के विघटन पर अंतिम खाता होता है।
- प्रारंभिक रोकड़/बैंक शेष डेबिट पक्ष में दिखाया जाता है।
- संपत्तियों की बिक्री से प्राप्त राशि डेबिट की जाती है।
- दायित्वों के भुगतान, वसूली व्यय, साझेदारों के ऋण और साझेदारों की पूँजी के भुगतान को क्रेडिट किया जाता है।
- इस खाते का अंतिम शेष हमेशा शून्य होना चाहिए, जो यह दर्शाता है कि सभी लेनदेन सही ढंग से दर्ज किए गए हैं।
महत्वपूर्ण रोज़नामचा प्रविष्टियाँ (Important Journal Entries):
-
संपत्तियों को वसूली खाते में हस्तांतरित करने पर (रोकड़/बैंक और काल्पनिक संपत्तियों को छोड़कर):
वसूली खाता Dr.
विविध संपत्तियों खाता Cr.
(संपत्तियों को पुस्तक मूल्य पर वसूली खाते में हस्तांतरित किया गया) -
बाहरी दायित्वों को वसूली खाते में हस्तांतरित करने पर (साझेदार के ऋण को छोड़कर):
विविध दायित्व खाता Dr.
वसूली खाता Cr.
(बाहरी दायित्वों को पुस्तक मूल्य पर वसूली खाते में हस्तांतरित किया गया) -
संपत्तियों की बिक्री पर:
रोकड़/बैंक खाता Dr.
वसूली खाता Cr.
(संपत्तियों की बिक्री से प्राप्त राशि) -
किसी साझेदार द्वारा संपत्ति लेने पर:
साझेदार का पूँजी खाता Dr.
वसूली खाता Cr.
(साझेदार द्वारा ली गई संपत्ति) -
दायित्वों के भुगतान पर:
वसूली खाता Dr.
रोकड़/बैंक खाता Cr.
(दायित्वों का भुगतान किया गया) -
किसी साझेदार द्वारा दायित्व लेने पर:
वसूली खाता Dr.
साझेदार का पूँजी खाता Cr.
(साझेदार द्वारा लिया गया दायित्व) -
वसूली व्यय के भुगतान पर:
वसूली खाता Dr.
रोकड़/बैंक खाता Cr.
(वसूली व्यय का भुगतान किया गया) -
वसूली पर लाभ होने पर:
वसूली खाता Dr.
साझेदारों के पूँजी खाते Cr. (लाभ-हानि अनुपात में)
(वसूली पर लाभ साझेदारों के पूँजी खातों में हस्तांतरित) -
वसूली पर हानि होने पर:
साझेदारों के पूँजी खाते Dr. (लाभ-हानि अनुपात में)
वसूली खाता Cr.
(वसूली पर हानि साझेदारों के पूँजी खातों में हस्तांतरित) -
साझेदार के ऋण के भुगतान पर:
साझेदार का ऋण खाता Dr.
रोकड़/बैंक खाता Cr.
(साझेदार के ऋण का भुगतान किया गया) -
संचित लाभ (जैसे सामान्य संचय, लाभ-हानि क्रेडिट शेष) को हस्तांतरित करने पर:
सामान्य संचय/लाभ-हानि खाता Dr.
साझेदारों के पूँजी खाते Cr. (लाभ-हानि अनुपात में)
(संचित लाभ साझेदारों के पूँजी खातों में हस्तांतरित) -
संचित हानि (जैसे लाभ-हानि डेबिट शेष, विज्ञापन उचंती) को हस्तांतरित करने पर:
साझेदारों के पूँजी खाते Dr. (लाभ-हानि अनुपात में)
लाभ-हानि खाता/विज्ञापन उचंती खाता Cr.
(संचित हानि साझेदारों के पूँजी खातों में हस्तांतरित) -
साझेदारों की पूँजी के अंतिम भुगतान पर:
साझेदार का पूँजी खाता Dr.
रोकड़/बैंक खाता Cr.
(साझेदार की अंतिम देय राशि का भुगतान किया गया) -
साझेदार द्वारा कमी की राशि लाने पर:
रोकड़/बैंक खाता Dr.
साझेदार का पूँजी खाता Cr.
(साझेदार द्वारा कमी की राशि लाई गई)
स्मरण योग्य महत्वपूर्ण बिंदु (Important Points to Remember):
- अलेखी संपत्तियाँ और दायित्व (Unrecorded Assets and Liabilities): इन्हें वसूली खाते में हस्तांतरित नहीं किया जाता है। यदि कोई अलेखी संपत्ति बेची जाती है, तो बिक्री मूल्य सीधे रोकड़/बैंक खाते के डेबिट में और वसूली खाते के क्रेडिट में दर्ज किया जाता है। यदि कोई अलेखी दायित्व का भुगतान किया जाता है, तो भुगतान राशि सीधे वसूली खाते के डेबिट में और रोकड़/बैंक खाते के क्रेडिट में दर्ज की जाती है।
- ख्याति (Goodwill): यदि तुलन-पत्र में ख्याति दर्शाई गई है, तो इसे अन्य संपत्तियों की तरह वसूली खाते के डेबिट में हस्तांतरित किया जाता है। यदि ख्याति की बिक्री से कोई राशि प्राप्त होती है, तो उसे वसूली खाते के क्रेडिट में दर्ज किया जाता है। यदि ख्याति का कोई मूल्य नहीं मिलता है, तो कोई प्रविष्टि नहीं की जाती है।
- कर्मचारी क्षतिपूर्ति कोष (Workmen Compensation Fund) और निवेश उच्चावचन कोष (Investment Fluctuation Fund):
- यदि कोई दावा या हानि नहीं है, तो पूरी राशि साझेदारों के पूँजी खातों में उनके लाभ-हानि अनुपात में वितरित कर दी जाती है।
- यदि कोई दावा या हानि है, तो पहले दावे या हानि की राशि का भुगतान किया जाता है, और शेष राशि (यदि कोई हो) साझेदारों में वितरित कर दी जाती है।
- संयुक्त जीवन बीमा पॉलिसी (Joint Life Policy): यदि पॉलिसी का समर्पण मूल्य है, तो इसे वसूली खाते के डेबिट में हस्तांतरित किया जाता है और समर्पण मूल्य प्राप्त होने पर वसूली खाते के क्रेडिट में दर्ज किया जाता है।
- वसूली व्यय (Realisation Expenses):
- यदि फर्म वहन करती है और भुगतान करती है: वसूली खाता Dr. To रोकड़/बैंक खाता।
- यदि साझेदार वहन करता है और फर्म भुगतान करती है: साझेदार का पूँजी खाता Dr. To रोकड़/बैंक खाता।
- यदि फर्म वहन करती है और साझेदार भुगतान करता है: वसूली खाता Dr. To साझेदार का पूँजी खाता।
- यदि साझेदार वहन करता है और साझेदार ही भुगतान करता है: कोई प्रविष्टि नहीं।
बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions - MCQs)
-
फर्म के विघटन पर, साझेदारों के पूँजी खाते में संचित लाभ और हानियों को किस अनुपात में हस्तांतरित किया जाता है?
a) समान अनुपात में
b) पूँजी अनुपात में
c) लाभ-हानि अनुपात में
d) ऋण अनुपात में -
वसूली खाता किस प्रकार का खाता है?
a) व्यक्तिगत खाता
b) वास्तविक खाता
c) नाममात्र खाता
d) इनमें से कोई नहीं -
फर्म के विघटन पर, साझेदार के ऋण खाते का भुगतान कब किया जाता है?
a) बाहरी लेनदारों के भुगतान से पहले
b) बाहरी लेनदारों के भुगतान के बाद और साझेदारों की पूँजी के भुगतान से पहले
c) साझेदारों की पूँजी के भुगतान के बाद
d) कभी नहीं -
भारतीय साझेदारी अधिनियम, 1932 की किस धारा के अनुसार फर्म के विघटन पर खातों का निपटारा किया जाता है?
a) धारा 39
b) धारा 42
c) धारा 48
d) धारा 49 -
फर्म के विघटन पर, यदि कोई साझेदार फर्म की संपत्ति लेता है, तो इसे कहाँ डेबिट किया जाएगा?
a) वसूली खाता
b) साझेदार का ऋण खाता
c) साझेदार का पूँजी खाता
d) रोकड़ खाता -
फर्म के विघटन पर, बाहरी लेनदारों का भुगतान करने के बाद, अगला भुगतान किसे किया जाता है?
a) साझेदारों की पूँजी
b) साझेदारों के ऋण
c) संचित लाभ
d) इनमें से कोई नहीं -
यदि वसूली व्यय साझेदार द्वारा वहन किए जाते हैं और फर्म द्वारा भुगतान किए जाते हैं, तो कौन सा खाता डेबिट होगा?
a) वसूली खाता
b) साझेदार का पूँजी खाता
c) रोकड़ खाता
d) लाभ-हानि खाता -
फर्म के अनिवार्य विघटन का एक कारण क्या है?
a) सभी साझेदारों की सहमति
b) एक साझेदार का दिवालिया होना (जब तक कि अनुबंध में अन्यथा प्रावधान न हो)
c) फर्म का व्यवसाय अवैध हो जाना
d) किसी साझेदार द्वारा सूचना देना -
फर्म के विघटन पर, यदि कोई अलेखी संपत्ति बेची जाती है, तो वसूली खाते में क्या प्रविष्टि होगी?
a) वसूली खाते के डेबिट में
b) वसूली खाते के क्रेडिट में
c) कोई प्रविष्टि नहीं
d) साझेदार के पूँजी खाते के क्रेडिट में -
निम्न में से कौन सा फर्म के विघटन का परिणाम नहीं है?
a) फर्म का व्यवसाय बंद हो जाता है।
b) साझेदारों के बीच संबंध समाप्त हो जाते हैं।
c) संपत्तियों को बेचा जाता है और दायित्वों का भुगतान किया जाता है।
d) साझेदारों के लाभ-हानि अनुपात में परिवर्तन होता है।
उत्तर कुंजी (Answer Key):
- c) लाभ-हानि अनुपात में
- c) नाममात्र खाता
- b) बाहरी लेनदारों के भुगतान के बाद और साझेदारों की पूँजी के भुगतान से पहले
- c) धारा 48
- c) साझेदार का पूँजी खाता
- b) साझेदारों के ऋण
- b) साझेदार का पूँजी खाता
- c) फर्म का व्यवसाय अवैध हो जाना
- b) वसूली खाते के क्रेडिट में
- d) साझेदारों के लाभ-हानि अनुपात में परिवर्तन होता है।
मुझे आशा है कि यह विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपको इस अध्याय को गहराई से समझने और सरकारी परीक्षाओं की तैयारी में सहायक होंगे। शुभकामनाएँ!