Class 12 Biology Notes Chapter 1 (जीवों में जनन) – Jeev Vigyan Book

प्रिय विद्यार्थियों,
आज हम जीव विज्ञान के प्रथम अध्याय 'जीवों में जनन' का विस्तार से अध्ययन करेंगे। यह अध्याय सरकारी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह जीव विज्ञान की आधारशिला रखता है। हम प्रत्येक बिंदु को गहराई से समझेंगे ताकि कोई भी महत्वपूर्ण जानकारी छूट न जाए।
अध्याय 1: जीवों में जनन (Reproduction in Organisms)
1. जीवन अवधि (Life Span)
प्रत्येक जीव का जन्म होता है, वह वृद्धि करता है, परिपक्व होता है, जनन करता है, बूढ़ा होता है और अंततः उसकी मृत्यु हो जाती है। जन्म से लेकर प्राकृतिक मृत्यु तक की अवधि को जीवन अवधि कहते हैं।
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महत्वपूर्ण बिंदु:
- जीवों की जीवन अवधि अलग-अलग होती है।
- जीवन अवधि का जीव के आकार से कोई संबंध नहीं होता। उदाहरण के लिए, एक कौआ (लगभग 15 वर्ष) और एक तोता (लगभग 140 वर्ष) आकार में समान नहीं होते, लेकिन उनकी जीवन अवधि में बहुत अंतर होता है।
- एकल-कोशिकीय जीव (जैसे अमीबा) प्राकृतिक रूप से अमर माने जाते हैं क्योंकि वे विभाजित होकर नए जीवों में बदल जाते हैं, उनकी कोई प्राकृतिक मृत्यु नहीं होती।
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कुछ जीवों की अनुमानित जीवन अवधि:
- हाथी: 60-90 वर्ष
- गुलाब: 5-7 वर्ष
- कुत्ता: 10-13 वर्ष
- तितली: 1-2 सप्ताह
- कौआ: 15 वर्ष
- केला वृक्ष: 25 वर्ष
- गाय: 20-25 वर्ष
- तोता: 140 वर्ष
- मगरमच्छ: 60 वर्ष
- घोड़ा: 25-30 वर्ष
- फल मक्खी: 1 महीना
- धान का पौधा: 3-4 महीने
- कछुआ: 100-150 वर्ष
- बरगद वृक्ष: 200+ वर्ष
2. जनन (Reproduction)
जनन वह जैविक प्रक्रिया है जिसमें एक जीव अपने समान छोटे जीव (संतति) को जन्म देता है। यह प्रक्रिया प्रजातियों की निरंतरता को सुनिश्चित करती है।
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जनन का महत्व:
- प्रजातियों की निरंतरता बनाए रखना।
- आनुवंशिक सामग्री को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाना।
- जनसंख्या में वृद्धि करना।
- लैंगिक जनन के माध्यम से विविधता उत्पन्न करना, जो विकास (evolution) में सहायक है।
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जनन के प्रकार:
- अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction): इसमें एकल जनक ही संतति उत्पन्न करता है।
- लैंगिक जनन (Sexual Reproduction): इसमें दो जनक (नर और मादा) भाग लेते हैं और युग्मकों के संलयन से संतति उत्पन्न होती है।
3. अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction)
यह जनन की वह विधि है जिसमें एकल जनक ही संतति उत्पन्न करता है। इसमें युग्मकों का निर्माण या संलयन नहीं होता है।
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विशेषताएँ:
- एकल जनक शामिल होता है।
- युग्मक निर्माण और संलयन नहीं होता।
- संतति आनुवंशिक रूप से जनक के समान होती है, इन्हें क्लोन (Clones) कहा जाता है।
- यह समसूत्री विभाजन (Mitotic division) द्वारा होता है।
- यह सरल और तीव्र प्रक्रिया है।
- सामान्यतः एकल-कोशिकीय जीवों, सरल पादपों और जंतुओं में पाया जाता है।
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अलैंगिक जनन के प्रकार:
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i. विखंडन (Fission): जनक कोशिका दो या अधिक संतति कोशिकाओं में विभाजित हो जाती है।
- द्वि-विखंडन (Binary Fission): जनक कोशिका दो समान भागों में विभाजित होती है।
- उदाहरण: अमीबा, पैरामीशियम, जीवाणु।
- बहु-विखंडन (Multiple Fission): जनक कोशिका कई संतति कोशिकाओं में विभाजित होती है। प्रतिकूल परिस्थितियों में, अमीबा जैसे जीव अपने पादाभ (pseudopodia) को सिकोड़कर अपने चारों ओर एक त्रिस्तरीय कठोर आवरण (पुटी/Cyst) बना लेते हैं। इस प्रक्रिया को पुटीभवन (Encystation) कहते हैं। पुटी के अंदर, नाभिक कई बार विभाजित होकर कई संतति नाभिक बनाता है, और प्रत्येक नाभिक के चारों ओर थोड़ा कोशिकाद्रव्य इकट्ठा होकर छोटे अमीबा (छद्मपादाभ बीजाणु/Pseudopodiospores) बनाता है। अनुकूल परिस्थितियां आने पर, पुटी की दीवार फट जाती है और बीजाणु बाहर निकल आते हैं।
- उदाहरण: प्लाज्मोडियम (मलेरिया परजीवी), अमीबा (प्रतिकूल परिस्थितियों में)।
- द्वि-विखंडन (Binary Fission): जनक कोशिका दो समान भागों में विभाजित होती है।
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ii. मुकुलन (Budding): जनक के शरीर पर एक या अधिक कलिकाएँ (buds) विकसित होती हैं, जो परिपक्व होने पर जनक से अलग होकर नए जीव का निर्माण करती हैं।
- उदाहरण: यीस्ट (एककोशिकीय कवक), हाइड्रा।
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iii. बीजाणु निर्माण (Spore Formation): बीजाणु सूक्ष्म, पतली भित्ति वाली संरचनाएँ होती हैं जो प्रतिकूल परिस्थितियों में जीवित रह सकती हैं और अनुकूल परिस्थितियों में नए जीव में विकसित हो सकती हैं।
- चल बीजाणु (Zoospores): ये सूक्ष्म, गतिशील (कशाभिका युक्त) बीजाणु होते हैं।
- उदाहरण: क्लेमाइडोमोनास (एकलकोशिकीय शैवाल)।
- कोनिडिया (Conidia): ये अचल, बाह्य बीजाणु होते हैं जो कवकजाल पर बनते हैं।
- उदाहरण: पेनिसीलियम (कवक)।
- कलिकाएँ (Gemmules): ये आंतरिक कलिकाएँ होती हैं जो स्पंज में बनती हैं। प्रतिकूल परिस्थितियों में, ये जनक से अलग होकर नए स्पंज को जन्म देती हैं।
- उदाहरण: स्पंज।
- चल बीजाणु (Zoospores): ये सूक्ष्म, गतिशील (कशाभिका युक्त) बीजाणु होते हैं।
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iv. खंडन (Fragmentation): जनक का शरीर कई टुकड़ों में टूट जाता है, और प्रत्येक टुकड़ा एक नए जीव में विकसित हो जाता है।
- उदाहरण: स्पाइरोगाइरा (शैवाल), राइजोपस (कवक)।
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v. पुनरुद्भवन (Regeneration): यह खोए हुए शरीर के अंगों को पुनः प्राप्त करने या पूरे जीव को एक छोटे खंड से विकसित करने की क्षमता है।
- उदाहरण: प्लेनेरिया (वास्तविक पुनरुद्भवन), हाइड्रा।
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vi. कायिक प्रवर्धन (Vegetative Propagation): यह पौधों में अलैंगिक जनन की एक विधि है जहाँ पौधे के किसी भी कायिक भाग (जड़, तना, पत्ती) से नया पौधा विकसित होता है। इन कायिक भागों को कायिक प्रवर्धक (Vegetative Propagules) कहते हैं।
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प्राकृतिक कायिक प्रवर्धन:
- जड़ द्वारा: शकरकंद, डहेलिया, शतावरी।
- तना द्वारा:
- कंद (Tuber): आलू (आँखें या कलिकाएँ)।
- प्रकंद (Rhizome): अदरक, हल्दी, केला।
- शल्ककंद (Bulb): प्याज, लहसुन।
- भूस्तारी (Stolon): पुदीना, स्ट्रॉबेरी।
- भूस्तरिका (Offset): जलकुंभी (वॉटर हायसिंथ), पिस्टिया।
- स्तंभ कंद (Corm): अरवी, जिमीकंद।
- पत्ती द्वारा: ब्रायोफिलम (पर्ण कलिकाएँ पत्ती के किनारों पर विकसित होती हैं)।
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कृत्रिम कायिक प्रवर्धन (मानव निर्मित):
- कलम लगाना (Cutting): गुलाब, गन्ना।
- दाब लगाना (Layering): चमेली, नींबू।
- ग्राफ्टिंग (Grafting): आम, सेब।
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बंगाल का आतंक (Terror of Bengal): जलकुंभी (Eichhornia crassipes) एक आक्रामक खरपतवार है जो भारत में अपने सुंदर फूलों और पत्तियों के आकार के कारण लाया गया था। यह पानी में बहुत तेजी से कायिक प्रवर्धन (भूस्तरिका द्वारा) करता है, जिससे जल निकायों की सतह पूरी तरह से ढक जाती है। यह पानी से ऑक्सीजन खींच लेता है, जिससे जलीय जीवों (विशेषकर मछलियों) की मृत्यु हो जाती है। इसे नियंत्रित करना बहुत मुश्किल है।
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4. लैंगिक जनन (Sexual Reproduction)
यह जनन की वह विधि है जिसमें दो जनक (नर और मादा) भाग लेते हैं और युग्मकों के संलयन से संतति उत्पन्न होती है।
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विशेषताएँ:
- दो जनक (नर और मादा) शामिल होते हैं।
- युग्मकों (gametes) का निर्माण और संलयन (fertilization) होता है।
- युग्मकों का निर्माण अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis) द्वारा होता है।
- संतति आनुवंशिक रूप से जनक से भिन्न होती है (विविधता पाई जाती है)।
- यह एक जटिल और धीमी प्रक्रिया है।
- उच्च पादपों और जंतुओं में पाया जाता है।
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लैंगिक जनन की घटनाएँ (Phases of Sexual Reproduction):
लैंगिक जनन में होने वाली घटनाओं को तीन मुख्य चरणों में बांटा जा सकता है:-
A. निषेचन-पूर्व घटनाएँ (Pre-fertilisation Events): निषेचन से पहले होने वाली सभी घटनाएँ।
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i. युग्मकजनन (Gametogenesis): युग्मकों (नर और मादा) के निर्माण की प्रक्रिया।
- युग्मक हमेशा अगुणित (haploid, n) होते हैं।
- समयुग्मकी (Homogametes/Isogametes): ऐसे युग्मक जो आकार और आकृति में समान होते हैं, उन्हें अलग पहचानना मुश्किल होता है। उदाहरण: क्लेडोफोरा (शैवाल)।
- विषमयुग्मकी (Heterogametes): ऐसे युग्मक जो आकार और आकृति में भिन्न होते हैं। नर युग्मक को शुक्राणु (sperm) या पुंयुग्मक (antherozoid) और मादा युग्मक को अंडाणु (ovum) या अंड कोशिका (egg cell) कहते हैं। उदाहरण: मनुष्य, फुकस (शैवाल)।
- कोशिका विभाजन:
- अगुणित जनक (जैसे मोनेरा, कवक, शैवाल, ब्रायोफाइटा) में युग्मक समसूत्री विभाजन द्वारा बनते हैं।
- द्विगुणित जनक (जैसे टेरिडोफाइटा, जिम्नोस्पर्म, एंजियोस्पर्म, अधिकांश जंतु) में युग्मक अर्धसूत्री विभाजन द्वारा बनते हैं। अर्धसूत्री विभाजन के दौरान गुणसूत्रों की संख्या आधी हो जाती है।
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ii. युग्मक स्थानांतरण (Gamete Transfer): नर और मादा युग्मकों को एक साथ लाने की प्रक्रिया ताकि निषेचन हो सके।
- अधिकांश जीवों में, नर युग्मक गतिशील होते हैं और मादा युग्मक अचल होते हैं।
- शैवाल, ब्रायोफाइटा और टेरिडोफाइटा में, नर युग्मक को मादा युग्मक तक पहुँचने के लिए जल माध्यम की आवश्यकता होती है।
- उच्च पौधों (एंजियोस्पर्म) में, परागकण (नर युग्मक) परागण (Pollination) द्वारा वर्तिकाग्र तक पहुँचते हैं।
- स्व-परागण (Self-pollination): परागकण उसी फूल या उसी पौधे के दूसरे फूल पर स्थानांतरित होते हैं।
- पर-परागण (Cross-pollination): परागकण दूसरे पौधे के फूल पर स्थानांतरित होते हैं।
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B. निषेचन (Fertilisation/Syngamy): नर और मादा युग्मकों के संलयन की प्रक्रिया, जिसके परिणामस्वरूप द्विगुणित युग्मनज (Zygote) का निर्माण होता है।
- अनिषेकजनन (Parthenogenesis): कुछ जीवों (जैसे रोटीफर्स, मधुमक्खी, कुछ छिपकलियां, टर्की पक्षी) में मादा युग्मक बिना निषेचन के ही नए जीव में विकसित हो जाता है।
- निषेचन के प्रकार:
- बाह्य निषेचन (External Fertilisation): युग्मक संलयन शरीर के बाहर, आमतौर पर जल माध्यम में होता है।
- उदाहरण: अधिकांश शैवाल, मछलियाँ, उभयचर (मेढक)।
- इसमें संतति के शिकार होने का खतरा अधिक होता है।
- आंतरिक निषेचन (Internal Fertilisation): युग्मक संलयन मादा के शरीर के अंदर होता है।
- उदाहरण: सरीसृप, पक्षी, स्तनधारी, अधिकांश स्थलीय पादप (कवक, ब्रायोफाइटा, टेरिडोफाइटा, जिम्नोस्पर्म, एंजियोस्पर्म)।
- इसमें नर युग्मक गतिशील होते हैं और मादा युग्मक तक पहुँचते हैं।
- बाह्य निषेचन (External Fertilisation): युग्मक संलयन शरीर के बाहर, आमतौर पर जल माध्यम में होता है।
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C. निषेचन-पश्च घटनाएँ (Post-fertilisation Events): निषेचन के बाद होने वाली सभी घटनाएँ।
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i. युग्मनज (Zygote):
- यह लैंगिक जनन का एक महत्वपूर्ण लिंक है जो एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी के बीच निरंतरता सुनिश्चित करता है।
- यह हमेशा द्विगुणित (diploid, 2n) होता है।
- इसका आगे विकास जीव के प्रकार और उसके पर्यावरण पर निर्भर करता है।
- कवक और शैवाल में, युग्मनज एक मोटी भित्ति विकसित करता है जो इसे सूखने और क्षति से बचाती है, और यह अंकुरण से पहले विश्राम की अवधि से गुजरता है।
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ii. भ्रूणोद्भव (Embryogenesis): युग्मनज से भ्रूण के विकास की प्रक्रिया।
- इसमें कोशिका विभाजन (Cell Division) और कोशिका विभेदन (Cell Differentiation) शामिल होता है।
- कोशिका विभाजन से कोशिकाओं की संख्या बढ़ती है।
- कोशिका विभेदन से कोशिकाएँ विशिष्ट ऊतकों और अंगों का निर्माण करती हैं।
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जंतुओं में भ्रूणोद्भव के आधार पर:
- अंडप्रजक (Oviparous): ये जीव अंडे देते हैं। निषेचित अंडे एक कठोर कैल्शियममय कवच से ढके होते हैं और मादा के शरीर से बाहर सुरक्षित स्थान पर दिए जाते हैं। भ्रूण का विकास अंडे के अंदर होता है, और एक निश्चित ऊष्मायन अवधि के बाद, शिशु अंडे से बाहर आते हैं।
- उदाहरण: सरीसृप, पक्षी।
- सजीवप्रजक (Viviparous): ये जीव सीधे शिशु को जन्म देते हैं। युग्मनज का विकास मादा के शरीर के अंदर होता है। शिशु के पर्याप्त वृद्धि और विकास के बाद, मादा उसे जन्म देती है। शिशु की देखभाल और सुरक्षा के कारण सजीवप्रजक जीवों में जीवित रहने की संभावना अधिक होती है।
- उदाहरण: अधिकांश स्तनधारी (मनुष्य सहित)।
- अंडप्रजक (Oviparous): ये जीव अंडे देते हैं। निषेचित अंडे एक कठोर कैल्शियममय कवच से ढके होते हैं और मादा के शरीर से बाहर सुरक्षित स्थान पर दिए जाते हैं। भ्रूण का विकास अंडे के अंदर होता है, और एक निश्चित ऊष्मायन अवधि के बाद, शिशु अंडे से बाहर आते हैं।
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पुष्पी पादपों में भ्रूणोद्भव:
- निषेचन के बाद, अंडाशय फल में विकसित होता है।
- बीजांड बीज में विकसित होते हैं।
- पुंकेसर, वर्तिकाग्र, वर्तिका और बाह्यदल जैसे अन्य पुष्प भाग मुरझाकर गिर जाते हैं।
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लैंगिक जनन की प्रावस्थाएँ (Phases of Life Cycle in Sexually Reproducing Organisms)
लैंगिक जनन करने वाले जीवों के जीवन में तीन मुख्य प्रावस्थाएँ होती हैं:
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किशोरावस्था / कायिक प्रावस्था (Juvenile/Vegetative Phase):
- यह जनन से पहले की वृद्धि अवधि है।
- जंतुओं में इसे किशोरावस्था कहते हैं, जबकि पौधों में इसे कायिक प्रावस्था कहते हैं।
- इस अवधि के दौरान जीव शारीरिक वृद्धि और विकास करता है।
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जनन प्रावस्था (Reproductive Phase):
- यह वह अवधि है जब जीव जनन करने में सक्षम होता है।
- पौधों में:
- वार्षिक (जैसे चावल, गेहूं) और द्विवार्षिक (जैसे मूली, गाजर) पौधे अपनी कायिक, जनन और जीर्णता प्रावस्थाओं को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।
- बहुवार्षिक पौधों में इन प्रावस्थाओं को पहचानना मुश्किल होता है।
- कुछ पौधे असामान्य रूप से फूलते हैं:
- बाँस (Bamboo): अपने जीवनकाल में केवल एक बार (50-100 वर्ष बाद) फूलता है और फल देता है, फिर मर जाता है।
- नीला कुरिंजी (Strobilanthes kunthiana): हर 12 साल में एक बार फूलता है। अंतिम बार सितंबर-अक्टूबर 2018 में फूला था, जिससे केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु के पहाड़ी क्षेत्रों में पर्यटकों की भीड़ उमड़ पड़ी थी।
- जंतुओं में:
- प्राइमेट्स (Primates) (जैसे बंदर, लंगूर, मनुष्य) में जनन प्रावस्था के दौरान होने वाले चक्रीय परिवर्तनों को मासिक धर्म चक्र (Menstrual Cycle) कहते हैं।
- गैर-प्राइमेट्स (Non-primates) (जैसे गाय, भेड़, चूहा, हिरण, कुत्ता, बाघ) में होने वाले चक्रीय परिवर्तनों को ऋतुस्राव चक्र (Estrous Cycle) कहते हैं।
- जंगली परिस्थितियों में रहने वाले स्तनधारियों में, यह चक्र केवल अनुकूल जनन अवधि में होता है, इसलिए उन्हें मौसमी प्रजनक (Seasonal Breeders) कहते हैं।
- जो स्तनधारी पूरे जनन काल में जनन के लिए सक्रिय रहते हैं, उन्हें सतत प्रजनक (Continuous Breeders) कहते हैं।
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जीर्णता प्रावस्था (Senescent Phase):
- यह जनन प्रावस्था के अंत और मृत्यु के बीच की अवधि है।
- इसमें उपापचयी क्रियाएँ धीमी हो जाती हैं और शरीर में गिरावट आने लगती है।
- अंततः जीव की मृत्यु हो जाती है।
जीवों में लैंगिकता (Sexuality in Organisms)
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पादपों में:
- उभयलिंगाश्रयी (Monoecious): जब नर और मादा दोनों फूल या जननांग एक ही पौधे पर मौजूद होते हैं।
- उदाहरण: मक्का (नर और मादा फूल एक ही पौधे पर, अलग-अलग स्थानों पर), नारियल, कद्दू, कारा (शैवाल)।
- एकलिंगाश्रयी (Dioecious): जब नर और मादा फूल या जननांग अलग-अलग पौधों पर मौजूद होते हैं।
- उदाहरण: पपीता, खजूर, मार्केन्शिया (ब्रायोफाइट)।
- उभयलिंगाश्रयी (Monoecious): जब नर और मादा दोनों फूल या जननांग एक ही पौधे पर मौजूद होते हैं।
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कवकों में:
- समथैलसी (Homothallic): जब नर और मादा जननांग एक ही कवकजाल पर होते हैं।
- विषमथैलसी (Heterothallic): जब नर और मादा जननांग अलग-अलग कवकजाल पर होते हैं।
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जंतुओं में:
- उभयलिंगी (Bisexual) या द्विलिंगी (Hermaphrodite): जब नर और मादा दोनों जननांग एक ही जीव में मौजूद होते हैं।
- उदाहरण: केंचुआ, फीताकृमि, स्पंज, जोंक।
- एकलिंगी (Unisexual): जब नर और मादा जननांग अलग-अलग जीवों में मौजूद होते हैं।
- उदाहरण: मनुष्य, कॉकरोच, मछली।
- उभयलिंगी (Bisexual) या द्विलिंगी (Hermaphrodite): जब नर और मादा दोनों जननांग एक ही जीव में मौजूद होते हैं।
गुणसूत्र संख्या (Chromosome Number)
युग्मक अगुणित (n) होते हैं, जबकि युग्मनज द्विगुणित (2n) होता है।
| जीव | गुणसूत्र संख्या (2n) | युग्मक में गुणसूत्र (n) |
|---|---|---|
| मनुष्य | 46 | 23 |
| घरेलू मक्खी | 12 | 6 |
| चूहा | 42 | 21 |
| कुत्ता | 78 | 39 |
| बिल्ली | 38 | 19 |
| फल मक्खी | 8 | 4 |
| प्याज | 16 | 8 |
| मक्का | 20 | 10 |
| चावल | 24 | 12 |
| आलू | 48 | 24 |
| तितली | 380 | 190 |
| ओफियोग्लोसम (फर्न) | 1260 | 630 |
यह अध्याय जीवों में जनन की मूलभूत प्रक्रियाओं को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। मुझे आशा है कि यह विस्तृत नोट्स आपको सरकारी परीक्षाओं की तैयारी में सहायक होंगे।
बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions - MCQs)
निर्देश: सही विकल्प का चयन करें।
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जन्म से लेकर जीव की प्राकृतिक मृत्यु तक की अवधि को क्या कहते हैं?
a) जनन अवधि
b) जीवन चक्र
c) जीवन अवधि
d) किशोरावस्था -
निम्नलिखित में से कौन सा जीव प्राकृतिक रूप से अमर माना जाता है?
a) हाइड्रा
b) अमीबा
c) यीस्ट
d) प्लाज्मोडियम -
अलैंगिक जनन द्वारा उत्पन्न संतति को आनुवंशिक रूप से समान होने के कारण क्या कहा जाता है?
a) हाइब्रिड
b) क्लोन
c) म्यूटेंट
d) पॉलीप्लॉइड -
यीस्ट में अलैंगिक जनन की सामान्य विधि क्या है?
a) विखंडन
b) मुकुलन
c) बीजाणु निर्माण
d) खंडन -
"बंगाल का आतंक" किस पौधे को कहा जाता है जो अपने तीव्र कायिक प्रवर्धन के लिए जाना जाता है?
a) जलकुंभी
b) कमल
c) लिली
d) ब्रायोफिलम -
नीला कुरिंजी (Strobilanthes kunthiana) कितने वर्षों में एक बार फूलता है?
a) 5 वर्ष
b) 10 वर्ष
c) 12 वर्ष
d) 20 वर्ष -
जब नर और मादा दोनों जननांग एक ही जीव में मौजूद होते हैं, तो उसे क्या कहते हैं?
a) एकलिंगी
b) उभयलिंगी
c) एकलिंगाश्रयी
d) विषमयुग्मकी -
वह प्रक्रिया जिसमें मादा युग्मक बिना निषेचन के ही नए जीव में विकसित हो जाता है, क्या कहलाती है?
a) अनिषेकफलन
b) अनिषेकजनन
c) भ्रूणोद्भव
d) युग्मकजनन -
बाह्य निषेचन किसमें पाया जाता है?
a) सरीसृप
b) पक्षी
c) उभयचर
d) स्तनधारी -
लैंगिक जनन के परिणामस्वरूप बनने वाला द्विगुणित (2n) संरचना कौन सी है?
a) युग्मक
b) भ्रूण
c) युग्मनज
d) बीजाणु
उत्तर कुंजी (Answer Key):
- c) जीवन अवधि
- b) अमीबा
- b) क्लोन
- b) मुकुलन
- a) जलकुंभी
- c) 12 वर्ष
- b) उभयलिंगी
- b) अनिषेकजनन
- c) उभयचर
- c) युग्मनज