Class 12 Biology Notes Chapter 13 (जीव और समष्टियाँ) – Jeev Vigyan Book

प्रिय विद्यार्थियों,
आज हम जीव विज्ञान के अध्याय 13 'जीव और समष्टियाँ' का विस्तृत अध्ययन करेंगे, जो आपकी सरकारी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह अध्याय पारिस्थितिकी के मूलभूत सिद्धांतों को समझने में सहायक है।
अध्याय 13: जीव और समष्टियाँ (Organisms and Populations)
I. परिचय (Introduction)
- पारिस्थितिकी (Ecology): जीव विज्ञान की वह शाखा जिसमें जीवों और उनके पर्यावरण के बीच तथा जीवों के आपस में संबंधों का अध्ययन किया जाता है।
- पारिस्थितिकी के स्तर:
- जीव (Organism): पारिस्थितिकी अध्ययन की मूलभूत इकाई।
- समष्टि (Population): एक ही प्रजाति के जीवों का समूह जो एक निश्चित भौगोलिक क्षेत्र में एक साथ रहते हैं और आपस में प्रजनन करते हैं।
- समुदाय (Community): एक ही भौगोलिक क्षेत्र में विभिन्न प्रजातियों की समष्टियों का समूह।
- जीवोम (Biome): बड़े क्षेत्रीय या स्थलीय पारिस्थितिक तंत्र, जो जलवायु, वनस्पति और जीव-जंतुओं के आधार पर परिभाषित होते हैं (जैसे मरुस्थल, वर्षावन, टुंड्रा)।
II. जीव और उसका पर्यावरण (Organism and its Environment)
पर्यावरण में अजैविक (Abiotic) और जैविक (Biotic) दोनों प्रकार के कारक शामिल होते हैं।
A. अजैविक कारक (Abiotic Factors):
-
तापमान (Temperature):
- पारिस्थितिकी रूप से सबसे महत्वपूर्ण अजैविक कारक।
- पृथ्वी पर तापमान का वितरण असमान है (विषुवत रेखा से ध्रुवों की ओर घटता है, मैदानी इलाकों से पहाड़ों की ओर घटता है)।
- यह जीवों के एंजाइमों की गतिकी, उपापचय और अन्य शारीरिक कार्यों को प्रभावित करता है।
- यूरीथर्मल (Eurythermal): वे जीव जो तापमान की व्यापक सीमा को सहन कर सकते हैं (जैसे अधिकांश स्तनधारी, पक्षी)।
- स्टीनोथर्मल (Stenothermal): वे जीव जो तापमान की संकीर्ण सीमा को ही सहन कर सकते हैं (जैसे ध्रुवीय भालू, पेंग्विन, अधिकांश मछलियाँ)।
-
जल (Water):
- जीवन के लिए दूसरा सबसे महत्वपूर्ण कारक।
- जल की उपलब्धता मरुस्थल से लेकर गहरे महासागरों तक भिन्न होती है।
- लवणता (Salinity): जल में नमक की सांद्रता (प्रति हजार भागों में) जीवों को प्रभावित करती है।
- अंतर्देशीय जल: < 5 ppt
- समुद्र: 30-35 ppt
- हाइपरसलाइन लैगून: > 100 ppt
- यूरीहेलाइन (Euryhaline): वे जीव जो लवणता की व्यापक सीमा को सहन कर सकते हैं (जैसे सामन मछली)।
- स्टीनोहेलाइन (Stenohaline): वे जीव जो लवणता की संकीर्ण सीमा को ही सहन कर सकते हैं (जैसे अधिकांश समुद्री अकशेरुकी)।
-
प्रकाश (Light):
- स्वयंपोषी जीवों (पौधों) के लिए प्रकाश संश्लेषण का एकमात्र ऊर्जा स्रोत।
- प्रकाश की तीव्रता, अवधि (फोटोपीरियोडिज्म) पौधों के पुष्पन और जंतुओं के प्रवास, प्रजनन आदि को प्रभावित करती है।
- गहरे महासागरों में, प्रकाश की गुणवत्ता (स्पेक्ट्रल गुणवत्ता) भी महत्वपूर्ण है।
-
मृदा (Soil):
- मृदा का संघटन, कण आकार, जल धारण क्षमता, pH, खनिज संघटन और स्थलाकृति किसी क्षेत्र की वनस्पति को निर्धारित करते हैं।
- मृदा के ये गुण विभिन्न प्रकार के जीवों के आवास को भी प्रभावित करते हैं।
B. जैविक कारक (Biotic Factors):
- परभक्षी, परजीवी, रोगजनक और प्रतिस्पर्धी जैसे जीव भी किसी जीव के पर्यावरण का हिस्सा होते हैं और उसे प्रभावित करते हैं।
III. अजैविक कारकों के प्रति अनुक्रियाएँ (Responses to Abiotic Factors)
जीव अपने आंतरिक वातावरण को स्थिर रखने या प्रतिकूल परिस्थितियों से निपटने के लिए विभिन्न तरीकों से प्रतिक्रिया करते हैं:
-
नियमन (Regulate):
- कुछ जीव (जैसे सभी पक्षी और स्तनधारी, कुछ निम्न कशेरुकी और अकशेरुकी) अपने शरीर के तापमान और परासरणी सांद्रता को स्थिर बनाए रखते हैं, चाहे बाहरी वातावरण में कितना भी बदलाव क्यों न आए। इसे समस्थापन (Homeostasis) कहते हैं।
- इसके लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
-
अनुरूपण (Conform):
- अधिकांश जंतु और लगभग सभी पौधे अपने आंतरिक वातावरण को स्थिर नहीं रख पाते। उनके शरीर का तापमान या परासरणी सांद्रता बाहरी वातावरण के साथ बदलती रहती है।
- छोटे जंतुओं में ऊष्मा हानि या लाभ अधिक होता है, इसलिए वे नियमन करने में असमर्थ होते हैं।
-
प्रवास (Migrate):
- जीव अस्थायी रूप से तनावपूर्ण आवास से अधिक अनुकूल क्षेत्र में चले जाते हैं और तनावपूर्ण अवधि समाप्त होने पर लौट आते हैं।
- उदाहरण: साइबेरियाई क्रेन सर्दियों में साइबेरिया से राजस्थान के केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में प्रवास करते हैं।
-
निलंबन (Suspend):
- प्रतिकूल परिस्थितियों में जीव अपनी उपापचयी गतिविधियों को कम कर देते हैं या विकास को निलंबित कर देते हैं।
- निष्क्रियता (Hibernation): शीत निष्क्रियता (जैसे ध्रुवीय भालू)।
- ग्रीष्म निष्क्रियता (Aestivation): ग्रीष्म निष्क्रियता (जैसे कुछ मछली और घोंघे)।
- डायपॉज (Diapause): विकास की निलंबित अवस्था (जैसे प्लैंकटन की कई प्रजातियाँ)।
- जीवाणु, कवक और निम्न पौधों में बीजाणु (Spores) बनते हैं, जबकि उच्च पौधों में बीज (Seeds) बनते हैं जो प्रतिकूल परिस्थितियों में अंकुरित नहीं होते।
IV. अनुकूलन (Adaptations)
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अनुकूलन जीवों की ऐसी रूपात्मक, शारीरिक या व्यवहारिक विशेषताएँ हैं जो उन्हें अपने आवास में जीवित रहने और प्रजनन करने में सक्षम बनाती हैं।
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मरुस्थलीय पौधों में अनुकूलन:
- मोटी क्यूटिकल, धंसे हुए रंध्र (वाष्पोत्सर्जन कम करने के लिए)।
- पत्तियाँ कांटों में रूपांतरित (जैसे कैक्टस)।
- CAM (Crassulacean Acid Metabolism) मार्ग, जिसमें रंध्र रात में खुलते हैं।
- चपटे, मांसल तने (फाइलोकैलेड) प्रकाश संश्लेषण करते हैं।
- गहरी जड़ें जल अवशोषण के लिए।
-
मरुस्थलीय जंतुओं में अनुकूलन:
- कंगारू चूहा: जल की आवश्यकता को आंतरिक वसा ऑक्सीकरण से पूरा करता है और मूत्र को अत्यधिक सांद्रित करता है।
- अन्य मरुस्थलीय जंतु दिन की गर्मी से बचने के लिए बिलों में रहते हैं और रात में सक्रिय होते हैं।
-
ध्रुवीय क्षेत्रों में अनुकूलन:
- सीलों जैसे जंतुओं में त्वचा के नीचे वसा की मोटी परत (ब्लबर) होती है जो ऊष्मा रोधन का काम करती है।
- एलन का नियम (Allen's Rule): ठंडी जलवायु वाले स्तनधारियों के कान और पैर छोटे होते हैं ताकि ऊष्मा हानि कम हो।
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उच्च ऊँचाई पर अनुकूलन (Altitude Sickness):
- ऊँचाई पर (3500 मीटर से अधिक) वायुमंडलीय दबाव कम होने से ऑक्सीजन की उपलब्धता कम हो जाती है।
- लक्षण: मतली, थकान, हृदय स्पंदन।
- शरीर अनुकूलन करता है: लाल रक्त कोशिकाओं (RBC) का उत्पादन बढ़ाता है, हीमोग्लोबिन की ऑक्सीजन के प्रति बंधुता कम करता है, और श्वसन दर बढ़ाता है।
-
व्यवहारिक अनुकूलन:
- रेगिस्तानी छिपकली धूप में शरीर का तापमान बढ़ाती है और छाया में चली जाती है जब तापमान बहुत अधिक हो जाता है।
V. समष्टियाँ (Populations)
- समष्टि की परिभाषा: एक निश्चित भौगोलिक क्षेत्र में एक ही प्रजाति के व्यक्तियों का समूह जो आपस में प्रजनन करते हैं।
- समष्टि के गुण (Population Attributes):
- जन्म दर (Natality): प्रति व्यक्ति जन्मों की संख्या।
- मृत्यु दर (Mortality): प्रति व्यक्ति मृत्यु की संख्या।
- लिंग अनुपात (Sex Ratio): एक समष्टि में नर और मादा का अनुपात (जैसे 60% मादा, 40% नर)।
- आयु पिरामिड (Age Pyramids): समष्टि में विभिन्न आयु समूहों (पूर्व-प्रजनन, प्रजनन, पश्च-प्रजनन) में व्यक्तियों का अनुपात।
- विस्तारित (Expanding): युवा व्यक्तियों की संख्या अधिक (त्रिभुजाकार)।
- स्थिर (Stable): युवा और प्रजनन आयु के व्यक्तियों की संख्या लगभग बराबर (घंटी के आकार का)।
- ह्रासमान (Declining): युवा व्यक्तियों की संख्या कम (कलश के आकार का)।
- समष्टि घनत्व (Population Density): प्रति इकाई क्षेत्र या आयतन में व्यक्तियों की संख्या।
- गणना के तरीके: प्रत्यक्ष गणना, सापेक्ष घनत्व (पगचिह्न, मल छर्रे), अप्रत्यक्ष गणना (बाघों की संख्या का अनुमान)।
VI. समष्टि वृद्धि (Population Growth)
समष्टि घनत्व में परिवर्तन चार मूलभूत प्रक्रियाओं पर निर्भर करता है:
- जन्म (Natality): जन्मों की संख्या।
- मृत्यु (Mortality): मृत्यु की संख्या।
- आप्रवासन (Immigration): अन्य समष्टियों से आने वाले व्यक्ति।
- उत्प्रवासन (Emigration): समष्टि से बाहर जाने वाले व्यक्ति।
-
वृद्धि मॉडल (Growth Models):
-
चरघातांकी वृद्धि (Exponential Growth):
- जब संसाधन (भोजन, स्थान) असीमित होते हैं।
- समीकरण: dN/dt = rN
- dN/dt = समय के साथ समष्टि घनत्व में परिवर्तन।
- N = समष्टि घनत्व।
- r = आंतरिक वृद्धि दर (intrinsic rate of natural increase)।
- वक्र का आकार: J-आकार का वक्र।
- उदाहरण: किसी नए क्षेत्र में विदेशी प्रजातियों का आक्रमण।
-
लॉजिस्टिक वृद्धि (Logistic Growth):
- जब संसाधन सीमित होते हैं, जो कि प्रकृति में अधिक यथार्थवादी स्थिति है।
- समीकरण: dN/dt = rN [(K-N)/K]
- K = वहन क्षमता (Carrying Capacity), यानी किसी आवास में अधिकतम व्यक्तियों की संख्या जिसे वह बनाए रख सकता है।
- वक्र का आकार: S-आकार का वक्र (सिग्मॉइड वक्र)।
- जब N, K के करीब होता है, तो वृद्धि दर धीमी हो जाती है।
-
VII. जीवन इतिहास भिन्नताएँ (Life History Variations)
- प्रजातियों ने प्राकृतिक चयन के माध्यम से प्रजनन के लिए विभिन्न रणनीतियाँ विकसित की हैं:
- कुछ प्रजातियाँ अपने जीवनकाल में केवल एक बार प्रजनन करती हैं (जैसे प्रशांत सामन मछली, बांस)।
- कुछ प्रजातियाँ कई बार प्रजनन करती हैं (जैसे अधिकांश स्तनधारी, पक्षी)।
- कुछ प्रजातियाँ छोटे आकार के कई संतान पैदा करती हैं (जैसे सीप, पेलाजिक मछली)।
- कुछ प्रजातियाँ बड़े आकार के कम संतान पैदा करती हैं (जैसे स्तनधारी, पक्षी)।
VIII. समष्टि पारस्परिक क्रियाएँ (Population Interactions)
विभिन्न प्रजातियों के बीच होने वाली पारस्परिक क्रियाएँ:
-
परस्पर लाभ (Mutualism) (+/+): दोनों प्रजातियों को लाभ होता है।
- उदाहरण:
- लाइकेन (कवक और शैवाल के बीच)।
- माइकोराइजा (कवक और उच्च पौधों की जड़ों के बीच)।
- अंजीर और ततैया (ततैया परागण करती है, अंजीर अंडे देने की जगह देती है)।
- ऑर्किड और मधुमक्खी (परागण के लिए)।
- पशुओं के आंत में सूक्ष्मजीव जो सेल्यूलोज पाचन में मदद करते हैं।
- उदाहरण:
-
प्रतिस्पर्धा (Competition) (-/-): दोनों प्रजातियों को हानि होती है क्योंकि वे सीमित संसाधनों के लिए प्रतिस्पर्धा करती हैं।
- गाउसे का स्पर्धी अपवर्जन सिद्धांत (Gause's Competitive Exclusion Principle): दो निकट संबंधी प्रजातियाँ समान सीमित संसाधनों के लिए प्रतिस्पर्धा करती हैं, तो प्रतिस्पर्धी रूप से बेहतर प्रजाति अंततः दूसरी को बाहर कर देगी।
- संसाधन विभाजन (Resource Partitioning): प्रतिस्पर्धा से बचने के लिए, प्रजातियाँ संसाधनों का उपयोग करने के अपने तरीकों को बदल लेती हैं (जैसे अलग-अलग समय पर भोजन करना)।
- उदाहरण: मैकआर्थर के वार्बलर ने एक ही पेड़ पर पांच अलग-अलग प्रजातियों को बिना प्रतिस्पर्धा के सह-अस्तित्व में रहने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में भोजन किया।
-
परभक्षण (Predation) (+/-): एक प्रजाति (परभक्षी) को लाभ होता है, जबकि दूसरी (शिकार) को हानि होती है।
- प्रकृति में ऊर्जा स्थानांतरण का एक महत्वपूर्ण तरीका।
- परभक्षी शिकार की समष्टि को नियंत्रण में रखते हैं।
- शिकार के बचाव के तरीके:
- छलावरण (Camouflage): शिकारियों से बचने के लिए।
- विषैले रसायन: मोनार्क तितली अपने शरीर में हृदय ग्लाइकोसाइड जमा करती है, जिससे वह शिकारियों के लिए अरुचिकर हो जाती है।
- कांटे: कैक्टस, बबूल।
- रासायनिक रक्षा: निकोटीन, कैफीन, अफीम।
-
परजीविता (Parasitism) (+/-): एक प्रजाति (परजीवी) को लाभ होता है, जबकि दूसरी (पोषक) को हानि होती है। परजीवी पोषक के शरीर पर या अंदर रहते हैं।
- बाह्य परजीवी (Ectoparasites): जूँ, टिक, अमरबेल (पौधा)।
- अंतः परजीवी (Endoparasites): यकृत फ्लूक, गोलकृमि।
- ब्रूड परजीविता (Brood Parasitism): कोयल अपने अंडे कौवे के घोंसले में देती है, और कौवा अपने अंडों के साथ कोयल के अंडों को भी सेता है और बच्चों का पालन-पोषण करता है।
-
सहभोजिता (Commensalism) (+/0): एक प्रजाति को लाभ होता है, जबकि दूसरी को न तो लाभ होता है और न ही हानि।
- उदाहरण:
- ऑर्किड (अधिपादप) आम के पेड़ की शाखा पर उगता है।
- बार्नेकल व्हेल की पीठ पर उगते हैं।
- कैटल एग्रेट (बगुला) चरने वाले पशुओं के पास रहते हैं और उनके चलने से परेशान हुए कीटों को खाते हैं।
- उदाहरण:
-
अंतरक्रिया (Amensalism) (-/0): एक प्रजाति को हानि होती है, जबकि दूसरी को न तो लाभ होता है और न ही हानि।
- उदाहरण: पेनिसिलियम कवक द्वारा उत्पादित पेनिसिलिन स्टैफिलोकोकस बैक्टीरिया के विकास को रोकती है।
बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions - MCQs)
-
निम्नलिखित में से कौन सा जीव तापमान की व्यापक सीमा को सहन कर सकता है?
a) स्टीनोथर्मल जीव
b) यूरीथर्मल जीव
c) स्टीनोहेलाइन जीव
d) यूरीहेलाइन जीव -
कंगारू चूहा मरुस्थल में बिना पानी पिये जीवित रह सकता है क्योंकि:
a) यह रात में सक्रिय होता है।
b) यह अपने शरीर की वसा के ऑक्सीकरण से पानी प्राप्त करता है।
c) यह अपने मूत्र को अत्यधिक पतला करता है।
d) यह अपने शरीर में पानी जमा करता है। -
जब संसाधन असीमित होते हैं, तो समष्टि वृद्धि वक्र का आकार कैसा होता है?
a) S-आकार का
b) J-आकार का
c) L-आकार का
d) U-आकार का -
गाउसे का स्पर्धी अपवर्जन सिद्धांत क्या कहता है?
a) दो निकट संबंधी प्रजातियाँ एक ही सीमित संसाधन के लिए प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकतीं।
b) प्रतिस्पर्धी रूप से बेहतर प्रजाति अंततः दूसरी को बाहर कर देगी।
c) प्रजातियाँ प्रतिस्पर्धा से बचने के लिए संसाधनों का विभाजन करती हैं।
d) प्रतिस्पर्धा से प्रजातियों को हमेशा लाभ होता है। -
माइकोराइजा निम्नलिखित में से किस प्रकार की पारस्परिक क्रिया का उदाहरण है?
a) परभक्षण
b) परजीविता
c) सहभोजिता
d) परस्पर लाभ -
उच्च ऊँचाई पर 'एल्टीट्यूड सिकनेस' के लक्षणों में से एक नहीं है:
a) मतली
b) थकान
c) हृदय स्पंदन में वृद्धि
d) RBC उत्पादन में कमी -
कोयल द्वारा कौवे के घोंसले में अंडे देना किसका उदाहरण है?
a) परभक्षण
b) ब्रूड परजीविता
c) सहभोजिता
d) परस्पर लाभ -
वहन क्षमता (Carrying Capacity) 'K' किस वृद्धि मॉडल से संबंधित है?
a) चरघातांकी वृद्धि
b) लॉजिस्टिक वृद्धि
c) दोनों a और b
d) इनमें से कोई नहीं -
एलन का नियम किससे संबंधित है?
a) मरुस्थलीय पौधों के अनुकूलन
b) ठंडी जलवायु में स्तनधारियों के शरीर के अंगों का आकार
c) उच्च ऊँचाई पर अनुकूलन
d) जल में लवणता के प्रति सहनशीलता -
निम्नलिखित में से कौन सा बाह्य परजीवी का उदाहरण है?
a) यकृत फ्लूक
b) गोलकृमि
c) जूँ
d) प्लाज्मोडियम
उत्तर कुंजी:
- b) यूरीथर्मल जीव
- b) यह अपने शरीर की वसा के ऑक्सीकरण से पानी प्राप्त करता है।
- b) J-आकार का
- b) प्रतिस्पर्धी रूप से बेहतर प्रजाति अंततः दूसरी को बाहर कर देगी।
- d) परस्पर लाभ
- d) RBC उत्पादन में कमी (वास्तव में RBC उत्पादन बढ़ता है)
- b) ब्रूड परजीविता
- b) लॉजिस्टिक वृद्धि
- b) ठंडी जलवायु में स्तनधारियों के शरीर के अंगों का आकार
- c) जूँ
मुझे आशा है कि यह विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपको इस अध्याय को गहराई से समझने और अपनी परीक्षाओं की तैयारी में मदद करेंगे। शुभकामनाएँ!