Class 12 Biology Notes Chapter 14 (पारितंत्र) – Jeev Vigyan Book

Jeev Vigyan
प्रिय विद्यार्थियों,

आज हम कक्षा 12 जीव विज्ञान के अध्याय 14 'पारितंत्र' का विस्तृत अध्ययन करेंगे। यह अध्याय सरकारी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, अतः प्रत्येक बिंदु पर विशेष ध्यान दें।


अध्याय 14: पारितंत्र (Ecosystem)

पारितंत्र प्रकृति की एक कार्यात्मक इकाई है जहाँ जीवधारी आपस में और अपने भौतिक पर्यावरण के साथ अन्योन्यक्रिया करते हैं। एक पारितंत्र आकार में छोटा (जैसे एक तालाब) या बहुत बड़ा (जैसे एक महासागर या वन) हो सकता है।

1. पारितंत्र की संरचना और कार्य (Structure and Function of an Ecosystem)

प्रत्येक पारितंत्र में अजैविक (तापमान, वर्षा, सौर ऊर्जा, मिट्टी, अकार्बनिक पदार्थ) और जैविक (उत्पादक, उपभोक्ता, अपघटक) घटक होते हैं। इन घटकों के बीच की अन्योन्यक्रिया से पारितंत्र के कार्य जैसे उत्पादकता, अपघटन, ऊर्जा प्रवाह और पोषक चक्रण संचालित होते हैं।

A. उत्पादकता (Productivity):
यह एक निश्चित समय अवधि में प्रति इकाई क्षेत्र में जैवभार के उत्पादन की दर है।

  • प्राथमिक उत्पादकता (Primary Productivity): प्रकाश संश्लेषण के दौरान उत्पादकों (पौधों) द्वारा प्रति इकाई क्षेत्र में जैवभार या कार्बनिक पदार्थ के उत्पादन की दर। इसे भार (g-2) या ऊर्जा (kcal m-2) के रूप में व्यक्त किया जाता है।
    • सकल प्राथमिक उत्पादकता (Gross Primary Productivity - GPP): प्रकाश संश्लेषण के दौरान कार्बनिक पदार्थ के उत्पादन की कुल दर।
    • शुद्ध प्राथमिक उत्पादकता (Net Primary Productivity - NPP): GPP में से श्वसन के दौरान होने वाली ऊर्जा हानि (R) को घटाने के बाद बची हुई ऊर्जा।
      • NPP = GPP - R
      • NPP ही वह जैवभार है जो विषमपोषियों (शाकाहारी और अपघटक) के उपभोग के लिए उपलब्ध होता है।
  • द्वितीयक उत्पादकता (Secondary Productivity): उपभोक्ताओं द्वारा नए कार्बनिक पदार्थ के निर्माण की दर। यह उत्पादकों से प्राप्त ऊर्जा पर निर्भर करती है।

B. अपघटन (Decomposition):
यह एक जटिल प्रक्रिया है जिसमें जटिल कार्बनिक पदार्थों को अपघटकों (मुख्यतः जीवाणु और कवक) द्वारा सरल अकार्बनिक पदार्थों जैसे कार्बन डाइऑक्साइड, जल और पोषक तत्वों में तोड़ा जाता है।

  • अपरद (Detritus): मृत पौधों के अवशेष (पत्तियाँ, छाल, फूल) और मृत जानवरों के अवशेष, जिनमें मल पदार्थ भी शामिल हैं। यह अपघटन के लिए कच्चा माल है।
  • अपघटन के चरण:
    1. खंडन (Fragmentation): अपरदभोजी (जैसे केंचुआ) अपरद को छोटे-छोटे कणों में तोड़ते हैं, जिससे सतह क्षेत्र बढ़ता है।
    2. निक्षालन (Leaching): जल में घुलनशील अकार्बनिक पोषक तत्व मिट्टी के क्षितिज में नीचे चले जाते हैं और अनुपलब्ध लवणों के रूप में अवक्षेपित हो जाते हैं।
    3. अपचयन (Catabolism): जीवाणु और कवक एंजाइमों द्वारा अपरद को सरल अकार्बनिक पदार्थों में अपघटित करते हैं।
    4. ह्यूमीकरण (Humification): यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिससे गहरे रंग का, अनाकार (amorphous) पदार्थ ह्यूमस बनता है। ह्यूमस सूक्ष्मजीवी क्रिया के प्रति अत्यधिक प्रतिरोधी होता है और धीरे-धीरे अपघटित होता है। यह पोषक तत्वों के भंडार के रूप में कार्य करता है।
    5. खनिजीकरण (Mineralisation): ह्यूमस का आगे अपघटन होता है, जिससे अकार्बनिक पोषक तत्व मुक्त होते हैं।
  • अपघटन को प्रभावित करने वाले कारक:
    • रासायनिक संघटन: लिग्निन और काइटिन से भरपूर अपरद का अपघटन धीमा होता है, जबकि नाइट्रोजन और जल में घुलनशील शर्करा से भरपूर अपरद का अपघटन तेजी से होता है।
    • जलवायु कारक:
      • तापमान: गर्म और आर्द्र वातावरण अपघटन के लिए अनुकूल होता है।
      • ऑक्सीजन: अपघटन एक वायवीय प्रक्रिया है, इसलिए ऑक्सीजन की उपलब्धता महत्वपूर्ण है।
      • नमी: पर्याप्त नमी अपघटन को बढ़ावा देती है।

C. ऊर्जा प्रवाह (Energy Flow):
सूर्य सभी पारितंत्रों के लिए ऊर्जा का एकमात्र स्रोत है (गहरे समुद्र के हाइड्रोथर्मल पारितंत्रों को छोड़कर)।

  • उत्पादक (Producers): हरे पौधे (स्वपोषी) सौर ऊर्जा का उपयोग करके प्रकाश संश्लेषण द्वारा भोजन बनाते हैं। वे कुल आपतित सौर विकिरण का केवल 1-5% ही ग्रहण कर पाते हैं, और इस ग्रहण की गई ऊर्जा का लगभग 2-10% ही सकल प्राथमिक उत्पादकता में परिवर्तित होता है।
  • उपभोक्ता (Consumers): वे जीव जो भोजन के लिए दूसरों पर निर्भर रहते हैं (विषमपोषी)।
    • प्राथमिक उपभोक्ता (Primary Consumers/शाकाहारी): पौधों को खाते हैं। (जैसे टिड्डा, गाय, खरगोश)
    • द्वितीयक उपभोक्ता (Secondary Consumers/मांसाहारी): प्राथमिक उपभोक्ताओं को खाते हैं। (जैसे मेंढक, साँप, लोमड़ी)
    • तृतीयक उपभोक्ता (Tertiary Consumers/उच्च मांसाहारी): द्वितीयक उपभोक्ताओं को खाते हैं। (जैसे बाज, शेर)
  • खाद्य श्रृंखला (Food Chain): जीवधारियों की एक श्रृंखला जिसमें ऊर्जा एक जीव से दूसरे जीव में स्थानांतरित होती है।
    • चरने वाली खाद्य श्रृंखला (Grazing Food Chain - GFC): उत्पादकों से शुरू होती है और शाकाहारी से मांसाहारी तक जाती है। (घास → टिड्डा → मेंढक → साँप → बाज)
    • अपरद खाद्य श्रृंखला (Detritus Food Chain - DFC): मृत कार्बनिक पदार्थ (अपरद) से शुरू होती है और अपघटकों (जीवाणु, कवक) से होकर अपरदभोजी जीवों तक जाती है। यह स्थलीय पारितंत्रों में ऊर्जा प्रवाह का एक प्रमुख मार्ग है।
  • खाद्य जाल (Food Web): कई खाद्य श्रृंखलाओं का आपस में जुड़ा हुआ नेटवर्क। यह प्रकृति में अधिक यथार्थवादी है क्योंकि एक जीव एक से अधिक खाद्य श्रृंखलाओं का हिस्सा हो सकता है।
  • ऊर्जा प्रवाह का नियम (10% Law): लिंडमैन (1942) द्वारा प्रतिपादित। प्रत्येक पोषण स्तर पर ऊर्जा का केवल लगभग 10% ही अगले पोषण स्तर पर स्थानांतरित होता है; शेष 90% श्वसन, उपापचय और ऊष्मा के रूप में नष्ट हो जाता है। इसलिए, पोषण स्तरों की संख्या सीमित होती है (सामान्यतः 3-5)।
  • पारिस्थितिक पिरामिड (Ecological Pyramids): विभिन्न पोषण स्तरों के बीच संबंधों का आलेखीय निरूपण।
    • संख्या का पिरामिड (Pyramid of Numbers): प्रत्येक पोषण स्तर पर अलग-अलग जीवों की संख्या को दर्शाता है। यह सीधा या उल्टा हो सकता है।
      • सीधा: घास के मैदान पारितंत्र (उत्पादक > प्राथमिक उपभोक्ता > द्वितीयक उपभोक्ता)।
      • उल्टा: परजीवी खाद्य श्रृंखला (एक पेड़ पर कई पक्षी, उन पर कई परजीवी)।
    • जैवभार का पिरामिड (Pyramid of Biomass): प्रत्येक पोषण स्तर पर जीवों के कुल शुष्क भार (जैवभार) को दर्शाता है। यह सीधा या उल्टा हो सकता है।
      • सीधा: स्थलीय पारितंत्र (उत्पादक का जैवभार > प्राथमिक उपभोक्ता का जैवभार)।
      • उल्टा: जलीय पारितंत्र (फाइटोप्लैंकटन का जैवभार < ज़ूप्लैंकटन का जैवभार)।
    • ऊर्जा का पिरामिड (Pyramid of Energy): प्रत्येक पोषण स्तर पर ऊर्जा की कुल मात्रा को दर्शाता है। यह हमेशा सीधा होता है क्योंकि ऊर्जा का प्रवाह एकदिशीय होता है और प्रत्येक स्तर पर ऊर्जा का ह्रास होता है। इसे कभी भी उल्टा नहीं किया जा सकता।

2. पारितंत्र अनुक्रमण (Ecological Succession)

यह एक क्षेत्र में प्रजाति संरचना में होने वाले क्रमिक और अनुमानित परिवर्तनों की प्रक्रिया है।

  • अनुक्रम (Sere): अनुक्रमण के दौरान बनने वाले समुदायों का पूरा अनुक्रम।
  • अनुक्रमी समुदाय (Seral Communities): अनुक्रमण के दौरान बनने वाले विभिन्न व्यक्तिगत संक्रमणकालीन समुदाय।
  • चरम समुदाय (Climax Community): अनुक्रमण का अंतिम, स्थिर और स्व-स्थायी समुदाय जो पर्यावरण के साथ संतुलन में होता है।
  • अनुक्रमण के प्रकार:
    • प्राथमिक अनुक्रमण (Primary Succession): एक ऐसे क्षेत्र में शुरू होता है जहाँ पहले कभी कोई जीवित समुदाय नहीं था (जैसे नग्न चट्टानें, नए बने ज्वालामुखी द्वीप, नए जमे हुए लावा)। यह बहुत धीमी प्रक्रिया है, चरम समुदाय तक पहुँचने में हजारों साल लगते हैं।
      • पायनियर प्रजातियाँ (Pioneer Species): वे पहली प्रजातियाँ जो एक नग्न क्षेत्र का उपनिवेशीकरण करती हैं (जैसे नग्न चट्टानों पर लाइकेन)।
    • द्वितीयक अनुक्रमण (Secondary Succession): एक ऐसे क्षेत्र में शुरू होता है जहाँ पहले एक समुदाय मौजूद था लेकिन किसी गड़बड़ी (जैसे आग, बाढ़, कटाई) के कारण नष्ट हो गया। मिट्टी या तलछट पहले से मौजूद होते हैं, इसलिए यह प्राथमिक अनुक्रमण की तुलना में बहुत तेज होता है।
  • जलारंभी अनुक्रमण (Hydrarch Succession): जल में शुरू होता है और शुष्क परिस्थितियों वाले चरम समुदाय (वन) की ओर बढ़ता है।
    • चरण: फाइटोप्लैंकटन → निमग्न पादप → मुक्त प्लावी पादप → नरकट दलदल → दलदली घास → वन।
  • शुष्कतारंभी अनुक्रमण (Xerarch Succession): शुष्क क्षेत्रों में शुरू होता है और जलारंभी अनुक्रमण के समान जल-मध्यम परिस्थितियों वाले चरम समुदाय (वन) की ओर बढ़ता है।
    • चरण: लाइकेन → मॉस → शाक → झाड़ी → वन।

3. पोषक चक्र (Nutrient Cycling)

जीवमंडल में विभिन्न घटकों के माध्यम से पोषक तत्वों की गति को पोषक चक्र या जैव-भू-रासायनिक चक्र कहते हैं।

  • पोषक तत्वों के प्रकार:
    • गैसीय चक्र (Gaseous Cycle): वायुमंडल में पोषक तत्वों का जलाशय होता है (जैसे कार्बन, नाइट्रोजन)।
    • अवसादी चक्र (Sedimentary Cycle): पृथ्वी की पपड़ी में पोषक तत्वों का जलाशय होता है (जैसे सल्फर, फॉस्फोरस, कैल्शियम)।
  • पर्यावरण कारक: मिट्टी, नमी, pH, तापमान पोषक चक्र की दर को नियंत्रित करते हैं।

A. कार्बन चक्र (Carbon Cycle):

  • जलाशय: वायुमंडल (लगभग 1% कार्बन डाइऑक्साइड), महासागर (सबसे बड़ा जलाशय, 71% कार्बन घुला हुआ), जीवाश्म ईंधन, कार्बनिक पदार्थ (ह्यूमस)।
  • प्रक्रियाएँ:
    1. प्रकाश संश्लेषण: पौधे वायुमंडलीय CO2 को ग्रहण करते हैं और कार्बनिक यौगिकों में परिवर्तित करते हैं।
    2. श्वसन: पौधे, जानवर और अपघटक CO2 को वायुमंडल में छोड़ते हैं।
    3. अपघटन: मृत कार्बनिक पदार्थों का अपघटन CO2 छोड़ता है।
    4. दहन: जीवाश्म ईंधन, लकड़ी और अन्य कार्बनिक पदार्थों के जलने से CO2 मुक्त होती है।
    5. महासागरीय विनिमय: महासागर वायुमंडलीय CO2 के साथ CO2 का विनिमय करते हैं।
    6. ज्वालामुखी गतिविधि: ज्वालामुखी विस्फोट से भी CO2 मुक्त होती है।

B. फॉस्फोरस चक्र (Phosphorus Cycle):

  • जलाशय: पृथ्वी की पपड़ी में फॉस्फेट चट्टानें (सबसे बड़ा जलाशय)। वायुमंडल में फॉस्फोरस का कोई महत्वपूर्ण गैसीय विनिमय नहीं होता है।
  • प्रक्रियाएँ:
    1. अपक्षय: चट्टानों के अपक्षय से फॉस्फेट मिट्टी के घोल में मुक्त होते हैं।
    2. अवशोषण: पौधों द्वारा मिट्टी से फॉस्फेट आयनों का अवशोषण।
    3. उपभोग: शाकाहारी पौधों को खाते हैं, मांसाहारी शाकाहारी को खाते हैं।
    4. अपघटन: मृत जीवों और अपशिष्ट उत्पादों से फॉस्फोरस अपघटकों द्वारा मुक्त किया जाता है और मिट्टी में लौटता है।
    5. अवसादन: कुछ फॉस्फेट जल निकायों में अवसादों के रूप में जमा हो जाते हैं।

4. पारितंत्र सेवाएँ (Ecosystem Services)

ये पारितंत्रों द्वारा प्रदान किए जाने वाले उत्पाद और प्रक्रियाएँ हैं जिनसे मानव को लाभ होता है।

  • उदाहरण:
    • वायु और जल का शुद्धिकरण।
    • सूखे और बाढ़ को कम करना।
    • पोषक तत्वों का चक्रण।
    • मिट्टी का निर्माण।
    • फसलों का परागण।
    • वन्यजीवों को आवास प्रदान करना।
    • जैव विविधता का रखरखाव।
    • जलवायु का विनियमन।
    • मनोरंजक, सांस्कृतिक और सौंदर्य संबंधी मूल्य।
  • रॉबर्ट कॉन्स्टैंजा (Robert Costanza) और उनके सहयोगियों (1997) का आकलन: उन्होंने पारितंत्र सेवाओं के वार्षिक मूल्य को लगभग US $33 ट्रिलियन प्रति वर्ष अनुमानित किया, जो वैश्विक सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP) के लगभग दोगुना है।

अभ्यास प्रश्न (Multiple Choice Questions - MCQs)

  1. प्रकाश संश्लेषण के दौरान कार्बनिक पदार्थ के उत्पादन की कुल दर को क्या कहते हैं?
    a) शुद्ध प्राथमिक उत्पादकता (NPP)
    b) सकल प्राथमिक उत्पादकता (GPP)
    c) द्वितीयक उत्पादकता
    d) शुद्ध सामुदायिक उत्पादकता

  2. अपघटन प्रक्रिया में 'ह्यूमीकरण' से क्या बनता है?
    a) सरल अकार्बनिक पदार्थ
    b) जल में घुलनशील पोषक तत्व
    c) गहरे रंग का, अनाकार ह्यूमस
    d) छोटे अपरद कण

  3. ऊर्जा का पिरामिड हमेशा कैसा होता है?
    a) सीधा
    b) उल्टा
    c) सीधा या उल्टा हो सकता है
    d) बेलनाकार

  4. लिंडमैन का 10% नियम किससे संबंधित है?
    a) पोषक चक्रण
    b) अपघटन
    c) ऊर्जा प्रवाह
    d) पारितंत्र अनुक्रमण

  5. एक ऐसे क्षेत्र में अनुक्रमण जो पहले कभी किसी जीवित समुदाय द्वारा उपनिवेशित नहीं था, क्या कहलाता है?
    a) द्वितीयक अनुक्रमण
    b) प्राथमिक अनुक्रमण
    c) चरम अनुक्रमण
    d) जलारंभी अनुक्रमण

  6. निम्नलिखित में से कौन सा गैसीय पोषक चक्र का उदाहरण है?
    a) फॉस्फोरस चक्र
    b) सल्फर चक्र
    c) कार्बन चक्र
    d) कैल्शियम चक्र

  7. फॉस्फोरस चक्र का सबसे बड़ा जलाशय कहाँ पाया जाता है?
    a) वायुमंडल
    b) महासागर
    c) पृथ्वी की पपड़ी में फॉस्फेट चट्टानें
    d) जीवाश्म ईंधन

  8. अपरद खाद्य श्रृंखला (DFC) में ऊर्जा का प्राथमिक स्रोत क्या है?
    a) सूर्य का प्रकाश
    b) जीवित पौधे
    c) मृत कार्बनिक पदार्थ
    d) रासायनिक ऊर्जा

  9. पारितंत्र सेवाओं के रूप में फसलों का परागण किसके द्वारा प्रदान किया जाता है?
    a) केवल मधुमक्खियों द्वारा
    b) कीड़ों, पक्षियों और चमगादड़ों जैसे परागणकों द्वारा
    c) केवल हवा द्वारा
    d) केवल जल द्वारा

  10. रॉबर्ट कॉन्स्टैंजा और उनके सहयोगियों ने पारितंत्र सेवाओं का वार्षिक मूल्य लगभग कितना अनुमानित किया था?
    a) US $10 ट्रिलियन
    b) US $50 ट्रिलियन
    c) US $33 ट्रिलियन
    d) US $100 ट्रिलियन


उत्तर कुंजी:

  1. b) सकल प्राथमिक उत्पादकता (GPP)
  2. c) गहरे रंग का, अनाकार ह्यूमस
  3. a) सीधा
  4. c) ऊर्जा प्रवाह
  5. b) प्राथमिक अनुक्रमण
  6. c) कार्बन चक्र
  7. c) पृथ्वी की पपड़ी में फॉस्फेट चट्टानें
  8. c) मृत कार्बनिक पदार्थ
  9. b) कीड़ों, पक्षियों और चमगादड़ों जैसे परागणकों द्वारा
  10. c) US $33 ट्रिलियन

मुझे आशा है कि ये विस्तृत नोट्स और अभ्यास प्रश्न आपको 'पारितंत्र' अध्याय को गहराई से समझने और सरकारी परीक्षाओं की तैयारी में सहायक होंगे। शुभकामनाएँ!

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