Class 12 Biology Notes Chapter 15 (जीव विविधतता एव संरक्षण) – Jeev Vigyan Book

प्रिय विद्यार्थियों,
आज हम जीव विज्ञान के एक अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय 'जैव विविधता एवं संरक्षण' का विस्तृत अध्ययन करेंगे। यह अध्याय न केवल हमारे पर्यावरण को समझने के लिए आवश्यक है, बल्कि विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में भी इसका विशेष महत्व है। आइए, इस विषय की गहराई में उतरते हैं और इसके हर पहलू को समझते हैं।
अध्याय 15: जैव विविधता एवं संरक्षण (Biodiversity and Conservation)
परिचय:
पृथ्वी पर जीवन का विशाल और अद्भुत विस्तार ही जैव विविधता कहलाता है। यह केवल विभिन्न प्रजातियों की संख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें जीवन के सभी स्तरों पर विविधता शामिल है। मानव अस्तित्व और कल्याण के लिए जैव विविधता का संरक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण है।
1. जैव विविधता (Biodiversity)
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परिभाषा: जैव विविधता (Biological Diversity) शब्द का प्रयोग एडवर्ड विल्सन ने किया था। यह पृथ्वी पर जीवन के सभी स्तरों पर पाई जाने वाली विविधता और परिवर्तनशीलता को संदर्भित करता है, जिसमें आनुवंशिक, प्रजातीय और पारिस्थितिकीय विविधता शामिल है।
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जैव विविधता के स्तर:
- आनुवंशिक विविधता (Genetic Diversity): एक ही प्रजाति के भीतर जीनों की विविधता। यह एक प्रजाति को बदलते वातावरण के अनुकूल होने में मदद करती है।
- उदाहरण: भारत में चावल की 50,000 से अधिक आनुवंशिक रूप से भिन्न किस्में और आम की 1000 से अधिक किस्में पाई जाती हैं। राऊवोल्फिया सर्पेन्टाइना (Rauwolfia serpentina) हिमालय के विभिन्न क्षेत्रों में उगने वाला एक औषधीय पौधा है, जिसकी रेसरपीन (reserpine) नामक सक्रिय रसायन की सांद्रता और शक्ति में आनुवंशिक विविधता पाई जाती है।
- प्रजातीय विविधता (Species Diversity): एक निश्चित क्षेत्र में विभिन्न प्रजातियों की संख्या और उनकी सापेक्ष प्रचुरता।
- उदाहरण: पश्चिमी घाट में उभयचर प्रजातियों की विविधता पूर्वी घाट की तुलना में अधिक है।
- पारिस्थितिकीय विविधता (Ecological Diversity): पारिस्थितिकी तंत्र के स्तर पर विविधता। इसमें विभिन्न प्रकार के आवास, समुदाय और पारिस्थितिक प्रक्रियाएं शामिल हैं।
- उदाहरण: भारत में रेगिस्तान, वर्षावन, मैंग्रोव, प्रवाल भित्तियाँ, आर्द्रभूमि, ज्वारनदमुख और अल्पाइन घास के मैदान जैसे विभिन्न पारिस्थितिकी तंत्र पाए जाते हैं, जो स्कैंडिनेविया जैसे देशों की तुलना में अधिक पारिस्थितिकीय विविधता दर्शाते हैं।
- आनुवंशिक विविधता (Genetic Diversity): एक ही प्रजाति के भीतर जीनों की विविधता। यह एक प्रजाति को बदलते वातावरण के अनुकूल होने में मदद करती है।
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विश्व में जैव विविधता:
- IUCN (2004) के अनुसार, अब तक खोजी गई कुल प्रजातियों की संख्या 1.5 मिलियन से थोड़ी अधिक है।
- रॉबर्ट मे (Robert May) के अनुमान के अनुसार, वैश्विक प्रजाति विविधता लगभग 7 मिलियन है।
- कुल प्रजातियों में से 70% से अधिक जंतु हैं, जबकि पादप (शैवाल, कवक, ब्रायोफाइट, अनावृतबीजी और आवृतबीजी सहित) 22% से अधिक नहीं हैं।
- जंतुओं में, कीट सबसे अधिक प्रजाति-समृद्ध समूह हैं, जो कुल प्रजातियों का 70% से अधिक हैं (यानी, पृथ्वी पर हर 10 जंतुओं में से 7 कीट हैं)।
- भारत विश्व के 12 महाविविधता वाले देशों में से एक है। भारत का भू-क्षेत्रफल विश्व का केवल 2.4% है, लेकिन इसकी वैश्विक प्रजाति विविधता में 8.1% हिस्सेदारी है।
2. जैव विविधता के प्रतिरूप (Patterns of Biodiversity)
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अक्षांशीय प्रवणता (Latitudinal Gradients):
- भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर जाने पर प्रजाति विविधता घटती जाती है।
- उष्णकटिबंधीय क्षेत्र (23.5° उत्तर से 23.5° दक्षिण अक्षांश) समशीतोष्ण या ध्रुवीय क्षेत्रों की तुलना में अधिक प्रजाति-समृद्ध होते हैं।
- उदाहरण:
- कोलंबिया (भूमध्य रेखा के पास) में पक्षियों की लगभग 1400 प्रजातियाँ हैं।
- न्यूयॉर्क (41° उ. अक्षांश) में 105 प्रजातियाँ हैं।
- ग्रीनलैंड (71° उ. अक्षांश) में केवल 56 प्रजातियाँ हैं।
- भारत (अधिकतर उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में) में पक्षियों की 1200 से अधिक प्रजातियाँ हैं।
- उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में अधिक विविधता के कारण:
- स्थिर पर्यावरण: उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में लाखों वर्षों से अपेक्षाकृत स्थिर और अनुमानित जलवायु रही है, जिससे प्रजातियों के विविधीकरण के लिए अधिक समय मिला।
- कम मौसमी बदलाव: मौसमी बदलाव कम होने के कारण एक विशिष्ट आला (niche) में विशेषज्ञता को बढ़ावा मिलता है।
- उच्च सौर ऊर्जा: उच्च सौर ऊर्जा की उपलब्धता अधिक उत्पादकता और बदले में अधिक जैव विविधता की ओर ले जाती है।
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जाति-क्षेत्र संबंध (Species-Area Relationship):
- जर्मन प्रकृतिवादी और भूगोलवेत्ता अलेक्जेंडर वॉन हम्बोल्ट (Alexander von Humboldt) ने दक्षिण अमेरिकी जंगलों में अपने व्यापक अन्वेषणों के दौरान देखा कि एक क्षेत्र की खोजबीन बढ़ने पर प्रजातियों की संख्या बढ़ती है, लेकिन एक निश्चित सीमा तक ही।
- ग्राफ पर, जाति-क्षेत्र संबंध एक आयताकार अतिपरवलय (rectangular hyperbola) के रूप में दर्शाया जाता है।
- समीकरण: log S = log C + Z log A
- S = प्रजाति समृद्धि (Species richness)
- A = क्षेत्र (Area)
- Z = ढलान का गुणांक (Slope of the line) या प्रतिगमन गुणांक (regression coefficient)
- C = Y-अंतःखंड (Y-intercept)
- Z का मान आमतौर पर 0.1 से 0.2 के बीच होता है, चाहे वह किसी भी वर्गक समूह या क्षेत्र का हो (जैसे ब्रिटेन में पादप, न्यूयॉर्क में पक्षी, कैलिफोर्निया में मोलस्क)।
- हालांकि, बहुत बड़े क्षेत्रों (जैसे पूरे महाद्वीप) के लिए, Z का मान 0.6 से 1.2 तक हो सकता है।
- उदाहरण: विभिन्न महाद्वीपों के उष्णकटिबंधीय वनों में फलों को खाने वाले पक्षियों और स्तनधारियों के लिए Z का मान 1.15 है।
3. जैव विविधता का महत्व (Importance of Biodiversity)
- पारिस्थितिकीय सेवाएं:
- पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता और कार्यप्रणाली के लिए आवश्यक।
- परागण, पोषक तत्व चक्रण, जल शुद्धिकरण, मृदा निर्माण और संरक्षण।
- जलवायु विनियमन, बाढ़ और सूखे का नियंत्रण।
- आर्थिक लाभ:
- भोजन (अनाज, फल, सब्जियां), फाइबर (कपास, ऊन), लकड़ी।
- औषधीय उत्पाद (25% से अधिक औषधियाँ पौधों से प्राप्त होती हैं)।
- औद्योगिक उत्पाद (राल, रबर, डाई)।
- पर्यटन और मनोरंजन।
- नैतिक मूल्य:
- प्रत्येक प्रजाति का अपना आंतरिक मूल्य होता है, भले ही वह मानव के लिए उपयोगी न हो।
- हमारी भावी पीढ़ियों के लिए जैव विविधता को संरक्षित करने की नैतिक जिम्मेदारी।
4. जैव विविधता की क्षति (Loss of Biodiversity)
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वर्तमान दरें:
- पिछले 500 वर्षों में, IUCN की लाल सूची (Red List 2004) के अनुसार, 784 प्रजातियाँ (338 कशेरुकी, 359 अकशेरुकी और 87 पादप) विलुप्त हो चुकी हैं।
- उदाहरण: डोडो (मॉरीशस), क्वागा (अफ्रीका), थाइलेसिन (ऑस्ट्रेलिया), स्टेलर की समुद्री गाय (रूस), और बाघ की तीन उप-प्रजातियाँ (बाली, जावन, कैस्पियन)।
- वर्तमान में, 15,500 से अधिक प्रजातियाँ विलुप्ति के खतरे का सामना कर रही हैं।
- विलुप्ति की वर्तमान दर प्राकृतिक पृष्ठभूमि विलुप्ति दरों से 100 से 1000 गुना अधिक है।
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जैव विविधता की क्षति के कारण (दुष्ट चौकड़ी - The Evil Quartet):
- क. आवास क्षति एवं विखंडन (Habitat Loss and Fragmentation):
- जैव विविधता के नुकसान का सबसे महत्वपूर्ण कारण।
- मानव गतिविधियों (कृषि, शहरीकरण, प्रदूषण) के कारण प्राकृतिक आवासों का विनाश।
- उदाहरण: उष्णकटिबंधीय वर्षावनों का विनाश। अमेज़ॅन वर्षावन (पृथ्वी के फेफड़े) को सोयाबीन की खेती और मवेशियों के चरागाहों के लिए काटा जा रहा है।
- बड़े आवासों को छोटे-छोटे खंडों में तोड़ना, जिससे जंतुओं की आबादी कम हो जाती है और वे विलुप्ति के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं।
- ख. अतिदोहन (Over-exploitation):
- मानव द्वारा प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक उपयोग।
- उदाहरण: स्टेलर की समुद्री गाय और यात्री कबूतर का अतिदोहन के कारण विलुप्त होना।
- वर्तमान में, कई समुद्री मछली प्रजातियाँ अतिदोहन के कारण खतरे में हैं।
- ग. विदेशी जातियों का आक्रमण (Alien Species Invasions):
- जब बाहरी प्रजातियाँ अनजाने में या जानबूझकर एक नए क्षेत्र में लाई जाती हैं, तो वे स्थानीय प्रजातियों के लिए खतरा बन सकती हैं।
- उदाहरण:
- नील पर्च (Nile perch) को पूर्वी अफ्रीका की विक्टोरिया झील में पेश किया गया, जिससे झील में सिचलिड मछली की 200 से अधिक प्रजातियाँ विलुप्त हो गईं।
- गाजर घास (Parthenium), लैंटाना (Lantana) और जलकुंभी (Eichhornia) जैसी आक्रामक खरपतवार प्रजातियाँ स्थानीय प्रजातियों के लिए खतरा हैं।
- अफ्रीकी कैटफिश (Clarias gariepinus) को जलीय कृषि के लिए लाया गया था, लेकिन यह हमारी नदियों में देशी कैटफिश प्रजातियों के लिए खतरा बन गई है।
- घ. सह-विलुप्ति (Co-extinctions):
- जब एक प्रजाति विलुप्त हो जाती है, तो उस पर निर्भर रहने वाली अन्य प्रजातियाँ भी विलुप्त हो सकती हैं।
- उदाहरण:
- एक परपोषी मछली प्रजाति के विलुप्त होने से उसके विशिष्ट परजीवियों का भी विलुप्त होना।
- एक सहजीवी संबंध में, एक प्रजाति के विलुप्त होने से दूसरी प्रजाति का भी विलुप्त होना।
- पादप-परागणक सहजीवी संबंध में, यदि एक प्रजाति विलुप्त हो जाती है, तो दूसरी भी विलुप्त हो जाएगी।
- क. आवास क्षति एवं विखंडन (Habitat Loss and Fragmentation):
5. जैव विविधता संरक्षण (Biodiversity Conservation)
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हमें जैव विविधता का संरक्षण क्यों करना चाहिए?
- संकीर्ण रूप से उपयोगितावादी (Narrowly Utilitarian):
- मानव को प्रकृति से प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ (भोजन, फाइबर, लकड़ी, औषधियाँ, औद्योगिक उत्पाद)।
- जैव-अन्वेषण (bioprospecting) - औषधीय, औद्योगिक और अन्य उत्पादों के लिए आनुवंशिक रूप से समृद्ध प्रजातियों की खोज।
- व्यापक रूप से उपयोगितावादी (Broadly Utilitarian):
- पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएं (अमेज़ॅन वर्षावन द्वारा पृथ्वी के कुल ऑक्सीजन का 20% उत्पादन, परागण, जलवायु विनियमन)।
- मनोवैज्ञानिक और सौंदर्य संबंधी लाभ (प्रकृति की सुंदरता)।
- नैतिक (Ethical):
- प्रत्येक प्रजाति का अपना आंतरिक मूल्य होता है।
- हमें अन्य लाखों प्रजातियों के साथ पृथ्वी को साझा करने की नैतिक जिम्मेदारी है।
- संकीर्ण रूप से उपयोगितावादी (Narrowly Utilitarian):
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जैव विविधता संरक्षण के तरीके:
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क. स्व-स्थाने संरक्षण (In-situ Conservation):
- प्रजातियों को उनके प्राकृतिक आवास में संरक्षित करना।
- जैव विविधता हॉटस्पॉट (Biodiversity Hotspots):
- ये अत्यधिक प्रजाति समृद्धि और उच्च स्थानिकवाद (endemism) वाले क्षेत्र हैं, जो गंभीर खतरे में हैं।
- प्रारंभ में 25 हॉटस्पॉट की पहचान की गई थी, बाद में 9 और जोड़े गए, जिससे कुल संख्या 34 हो गई।
- भारत में तीन हॉटस्पॉट हैं: पश्चिमी घाट और श्रीलंका, इंडो-बर्मा क्षेत्र और हिमालय।
- ये हॉटस्पॉट पृथ्वी के भू-क्षेत्रफल का 2% से भी कम कवर करते हैं, लेकिन सभी प्रजातियों के 30% से अधिक को आश्रय देते हैं।
- संरक्षित क्षेत्र (Protected Areas):
- राष्ट्रीय उद्यान (National Parks): वन्यजीवों और उनके आवासों की रक्षा के लिए पूरी तरह से समर्पित क्षेत्र। मानव गतिविधियों (चराई, वन उत्पाद संग्रह) की अनुमति नहीं है। भारत में 100 से अधिक राष्ट्रीय उद्यान हैं।
- वन्यजीव अभयारण्य (Wildlife Sanctuaries): विशिष्ट वन्यजीव प्रजातियों की रक्षा के लिए स्थापित क्षेत्र। सीमित मानव गतिविधियों (जैसे लकड़ी काटना, चराई) की अनुमति है, यदि वे वन्यजीवों को नुकसान न पहुँचाएँ। भारत में 500 से अधिक वन्यजीव अभयारण्य हैं।
- जीवमंडल आरक्षित क्षेत्र (Biosphere Reserves): बड़े बहुउद्देश्यीय संरक्षित क्षेत्र, जो पौधों, जंतुओं और सूक्ष्मजीवों की विविधता और अखंडता को बनाए रखने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। इनमें एक कोर ज़ोन (अप्रतिबंधित), बफर ज़ोन (सीमित अनुसंधान और शिक्षा) और संक्रमण ज़ोन (मानव बस्तियाँ और सतत उपयोग) होता है। भारत में 18 जीवमंडल आरक्षित क्षेत्र हैं।
- पवित्र उपवन (Sacred Groves):
- भारत में कुछ क्षेत्रों में, स्थानीय समुदायों द्वारा धार्मिक और सांस्कृतिक कारणों से वनों के कुछ हिस्सों को संरक्षित किया जाता है।
- ये अक्सर दुर्लभ और लुप्तप्राय प्रजातियों के लिए अंतिम शरणस्थली होते हैं।
- उदाहरण: मेघालय की खासी और जयंतिया पहाड़ियों, राजस्थान की अरावली पहाड़ियों, कर्नाटक और महाराष्ट्र के पश्चिमी घाट क्षेत्रों, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के सरगुजा, चंदा और बस्तर क्षेत्रों में पाए जाते हैं।
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ख. पर-स्थाने संरक्षण (Ex-situ Conservation):
- संकटग्रस्त प्रजातियों को उनके प्राकृतिक आवास से बाहर निकालकर विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए क्षेत्रों में संरक्षित करना।
- प्राणि उद्यान (Zoological Parks) और वनस्पति उद्यान (Botanical Gardens):
- संकटग्रस्त प्रजातियों को कैद में रखा जाता है और प्रजनन कराया जाता है।
- जन जागरूकता और शिक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण।
- बीज बैंक (Seed Banks) और जीन बैंक (Gene Banks):
- बीज, परागकण, ऊतक और कोशिकाओं को दीर्घकालिक भंडारण के लिए संरक्षित किया जाता है।
- आनुवंशिक विविधता को भविष्य के लिए सुरक्षित रखते हैं।
- क्रायोप्रिजर्वेशन (Cryopreservation):
- अत्यंत कम तापमान (-196°C पर तरल नाइट्रोजन में) पर युग्मकों को संरक्षित करना।
- यह लुप्तप्राय प्रजातियों के व्यवहार्य और उपजाऊ युग्मकों को लंबे समय तक संग्रहीत करने में सक्षम बनाता है।
- ऊतक संवर्धन (tissue culture) तकनीकों का भी उपयोग किया जाता है।
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अंतर्राष्ट्रीय प्रयास:
- पृथ्वी शिखर सम्मेलन (Earth Summit):
- 1992 में रियो डी जनेरियो में आयोजित किया गया।
- सभी राष्ट्रों से जैव विविधता के संरक्षण और सतत उपयोग के लिए उचित उपाय करने का आग्रह किया।
- विश्व सतत विकास शिखर सम्मेलन (World Summit on Sustainable Development):
- 2002 में दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में आयोजित किया गया।
- 190 देशों ने 2010 तक जैव विविधता की वर्तमान हानि दर में महत्वपूर्ण कमी लाने की प्रतिबद्धता जताई।
- पृथ्वी शिखर सम्मेलन (Earth Summit):
यह अध्याय हमें जैव विविधता के महत्व और इसके संरक्षण की तत्काल आवश्यकता को समझाता है। हमें अपनी पृथ्वी के इस अमूल्य खजाने को बचाने के लिए व्यक्तिगत और सामूहिक दोनों स्तरों पर प्रयास करने होंगे।
बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions - MCQs)
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निम्नलिखित में से कौन जैव विविधता का स्तर नहीं है?
a) आनुवंशिक विविधता
b) प्रजातीय विविधता
c) पारिस्थितिकीय विविधता
d) भौतिक विविधता -
राऊवोल्फिया सर्पेन्टाइना (Rauwolfia serpentina) में किस प्रकार की जैव विविधता पाई जाती है?
a) प्रजातीय विविधता
b) आनुवंशिक विविधता
c) पारिस्थितिकीय विविधता
d) भौगोलिक विविधता -
विश्व में कुल ज्ञात प्रजातियों में से कितने प्रतिशत से अधिक जंतु हैं?
a) 22%
b) 50%
c) 70%
d) 80% -
अलेक्जेंडर वॉन हम्बोल्ट द्वारा प्रतिपादित जाति-क्षेत्र संबंध समीकरण में 'Z' क्या दर्शाता है?
a) प्रजाति समृद्धि
b) क्षेत्र
c) ढलान का गुणांक
d) Y-अंतःखंड -
निम्नलिखित में से कौन जैव विविधता की क्षति का कारण नहीं है?
a) आवास क्षति एवं विखंडन
b) अतिदोहन
c) विदेशी जातियों का आक्रमण
d) स्व-स्थाने संरक्षण -
मॉरीशस में विलुप्त हुआ प्रसिद्ध पक्षी कौन सा है?
a) क्वागा
b) डोडो
c) स्टेलर की समुद्री गाय
d) यात्री कबूतर -
विक्टोरिया झील में नील पर्च (Nile perch) के प्रवेश से किस मछली की 200 से अधिक प्रजातियाँ विलुप्त हो गईं?
a) कैटफिश
b) सिचलिड मछली
c) सार्डिन
d) ट्राउट -
भारत में कितने जैव विविधता हॉटस्पॉट हैं?
a) 2
b) 3
c) 4
d) 5 -
पवित्र उपवन (Sacred Groves) किन क्षेत्रों में पाए जाते हैं?
a) मेघालय की खासी और जयंतिया पहाड़ियों
b) राजस्थान की अरावली पहाड़ियों
c) मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के सरगुजा क्षेत्र
d) उपरोक्त सभी -
क्रायोप्रिजर्वेशन में युग्मकों को किस तापमान पर तरल नाइट्रोजन में संरक्षित किया जाता है?
a) 0°C
b) -80°C
c) -196°C
d) 4°C
उत्तर कुंजी (Answer Key):
- d)
- b)
- c)
- c)
- d)
- b)
- b)
- b)
- d)
- c)