Class 12 Biology Notes Chapter 5 (आनुवंशिकी तथा विकास) – Jeev Vigyan Book

प्रिय विद्यार्थियों,
आज हम जीव विज्ञान के अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय 'आनुवंशिकी तथा विकास' का विस्तृत अध्ययन करेंगे। यह अध्याय न केवल आपकी बोर्ड परीक्षाओं के लिए, बल्कि विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। हम इसमें आनुवंशिकी के सिद्धांतों, विविधताओं, और जीवन के विकास की यात्रा को गहराई से समझेंगे।
अध्याय 5: आनुवंशिकी तथा विकास
यह अध्याय मुख्य रूप से NCERT की कक्षा 12 जीव विज्ञान पुस्तक के अध्याय 5 'वंशागति तथा विविधता के सिद्धांत' और अध्याय 7 'विकास' के महत्वपूर्ण बिंदुओं को समाहित करता है।
भाग 1: आनुवंशिकी (Genetics)
(वंशागति तथा विविधता के सिद्धांत)
1. परिचय:
- आनुवंशिकी (Genetics): जीव विज्ञान की वह शाखा जो वंशागति (heredity) और विविधताओं (variations) का अध्ययन करती है।
- वंशागति (Heredity): लक्षणों का एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में संचरण।
- विविधता (Variation): एक ही प्रजाति के सदस्यों या संततियों के बीच पाए जाने वाले अंतर।
2. मेंडल के वंशागति के नियम:
ग्रेगर जॉन मेंडल (1822-1884) को "आनुवंशिकी का जनक" कहा जाता है। उन्होंने उद्यान मटर (Pisum sativum) पर सात वर्षों (1856-1863) तक संकरण के प्रयोग किए और वंशागति के नियमों को प्रतिपादित किया।
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मेंडल द्वारा मटर के पौधे के चुनाव के कारण:
- यह एक वार्षिक पौधा है, अतः कम समय में कई पीढ़ियों का अध्ययन संभव।
- इसमें अनेक स्पष्ट विपरीत लक्षण (सात जोड़ी) पाए जाते हैं।
- यह द्विलिंगी पुष्प वाला पौधा है, अतः स्व-परागण द्वारा शुद्ध वंशक्रम प्राप्त करना आसान है।
- कृत्रिम पर-परागण आसानी से कराया जा सकता है।
- बड़ी संख्या में बीज उत्पन्न होते हैं।
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मेंडल द्वारा अध्ययन किए गए सात विपरीत लक्षण:
- तने की ऊँचाई: लंबा (प्रभावी) / बौना (अप्रभावी)
- पुष्प का रंग: बैंगनी (प्रभावी) / सफेद (अप्रभावी)
- पुष्प की स्थिति: अक्षीय (प्रभावी) / अंतस्थ (अप्रभावी)
- फली का आकार: फूली हुई (प्रभावी) / सिकुड़ी हुई (अप्रभावी)
- फली का रंग: हरा (प्रभावी) / पीला (अप्रभावी)
- बीज का आकार: गोल (प्रभावी) / झुर्रीदार (अप्रभावी)
- बीज का रंग: पीला (प्रभावी) / हरा (अप्रभावी)
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एकसंकर क्रॉस (Monohybrid Cross): एक समय में केवल एक जोड़ी विपरीत लक्षणों की वंशागति का अध्ययन।
- प्रयोग: लंबे (TT) और बौने (tt) मटर के पौधों के बीच क्रॉस।
- F1 पीढ़ी: सभी पौधे लंबे (Tt) थे।
- F2 पीढ़ी (F1 का स्व-परागण): लंबे और बौने पौधे 3:1 के अनुपात में प्राप्त हुए।
- फेनोटाइपिक अनुपात: 3 (लंबे) : 1 (बौने)
- जीनोटाइपिक अनुपात: 1 (TT) : 2 (Tt) : 1 (tt)
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मेंडल के नियम (एकसंकर क्रॉस पर आधारित):
- प्रभाविता का नियम (Law of Dominance):
- जब विपरीत लक्षणों वाले कारकों (जीन) का एक युग्म एक साथ होता है, तो केवल एक कारक (प्रभावी कारक) ही स्वयं को व्यक्त कर पाता है, जबकि दूसरा (अप्रभावी कारक) छिपा रहता है।
- F1 पीढ़ी में केवल प्रभावी लक्षण ही प्रकट होता है।
- विसेग्रेगेशन का नियम / युग्मकों की शुद्धता का नियम (Law of Segregation / Law of Purity of Gametes):
- युग्मक निर्माण के समय, प्रत्येक युग्मक में प्रत्येक लक्षण के लिए केवल एक कारक (एलिल) जाता है।
- दोनों एलिल एक-दूसरे से पृथक हो जाते हैं और एक-दूसरे को दूषित नहीं करते।
- यह नियम सार्वभौमिक है और इसका कोई अपवाद नहीं है।
- प्रभाविता का नियम (Law of Dominance):
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द्विसंकर क्रॉस (Dihybrid Cross): एक समय में दो जोड़ी विपरीत लक्षणों की वंशागति का अध्ययन।
- प्रयोग: गोल और पीले बीज (RRYY) वाले पौधों का झुर्रीदार और हरे बीज (rryy) वाले पौधों से क्रॉस।
- F1 पीढ़ी: सभी पौधे गोल और पीले बीज (RrYy) वाले थे।
- F2 पीढ़ी (F1 का स्व-परागण): चार प्रकार के पौधे प्राप्त हुए।
- फेनोटाइपिक अनुपात: 9 (गोल, पीले) : 3 (गोल, हरे) : 3 (झुर्रीदार, पीले) : 1 (झुर्रीदार, हरे)
-
मेंडल का नियम (द्विसंकर क्रॉस पर आधारित):
3. स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम (Law of Independent Assortment):
* जब दो या दो से अधिक विपरीत लक्षणों की वंशागति एक साथ होती है, तो एक लक्षण के कारकों का युग्म दूसरे लक्षण के कारकों के युग्म से स्वतंत्र रूप से पृथक होता है।
* विभिन्न लक्षणों के कारक युग्मक निर्माण के दौरान एक-दूसरे से स्वतंत्र रूप से संयोजित होते हैं। -
परीक्षण संकरण (Test Cross):
- F1 पीढ़ी के संकर (या अज्ञात जीनोटाइप वाले जीव) का अप्रभावी जनक के साथ संकरण।
- इसका उपयोग अज्ञात जीनोटाइप वाले जीव के जीनोटाइप का पता लगाने के लिए किया जाता है।
- एकसंकर परीक्षण संकरण का अनुपात 1:1 होता है।
- द्विसंकर परीक्षण संकरण का अनुपात 1:1:1:1 होता है।
3. वंशागति के अपवाद (Deviations from Mendelian Inheritance):
- अपूर्ण प्रभाविता (Incomplete Dominance):
- जब F1 पीढ़ी में कोई भी एलिल पूर्ण रूप से प्रभावी नहीं होता, और एक मध्यवर्ती फेनोटाइप प्रकट होता है।
- उदाहरण: स्नैपड्रैगन (एंटीराइनम प्रजाति) या मीराबिलिस जलापा (4 बजे का पौधा) में लाल और सफेद फूलों के बीच क्रॉस से F1 में गुलाबी फूल।
- फेनोटाइपिक और जीनोटाइपिक अनुपात F2 में: 1:2:1 (लाल:गुलाबी:सफेद)।
- सहप्रभाविता (Co-dominance):
- जब F1 पीढ़ी में दोनों एलिल स्वयं को पूर्ण रूप से व्यक्त करते हैं।
- उदाहरण: मानव में ABO रक्त समूह। एलिल I^A और I^B दोनों प्रभावी हैं और दोनों चीनी (शर्करा) का उत्पादन करते हैं, जबकि एलिल i अप्रभावी है।
- बहुविकल्पता (Multiple Allelism):
- जब किसी एक जीन के दो से अधिक एलिल एक जनसंख्या में मौजूद होते हैं।
- उदाहरण: मानव में ABO रक्त समूह (तीन एलिल: I^A, I^B, i)।
- बहुप्रभाविता (Pleiotropy):
- जब एक एकल जीन एक से अधिक फेनोटाइपिक लक्षणों को प्रभावित करता है।
- उदाहरण: फिनाइलकीटोन्यूरिया (एक एंजाइम की कमी से कई लक्षण), सिकल सेल एनीमिया (एक जीन कई शारीरिक समस्याओं का कारण बनता है)।
- पॉलीजेनिक वंशागति (Polygenic Inheritance):
- जब एक लक्षण का नियंत्रण दो या दो से अधिक जीनों द्वारा होता है, और ये जीन पर्यावरण से भी प्रभावित होते हैं।
- उदाहरण: मानव त्वचा का रंग, ऊँचाई, बुद्धि।
4. गुणसूत्रीय वंशागति का सिद्धांत (Chromosomal Theory of Inheritance):
- वॉल्टर सटन और थियोडोर बोवेरी (1902) ने मेंडल के कारकों (जीन) और गुणसूत्रों के व्यवहार के बीच समानताएं देखीं।
- मुख्य बिंदु:
- जीन गुणसूत्रों पर विशिष्ट स्थानों (लोकस) पर स्थित होते हैं।
- युग्मक निर्माण के दौरान गुणसूत्रों का पृथक्करण और स्वतंत्र अपव्यूहन होता है, जो जीन के पृथक्करण और स्वतंत्र अपव्यूहन को दर्शाता है।
- निषेचन के बाद द्विगुणित अवस्था बहाल होती है।
- थॉमस हंट मॉर्गन (T.H. Morgan) ने फल मक्खी (Drosophila melanogaster) पर प्रयोग करके इस सिद्धांत की प्रायोगिक पुष्टि की।
5. सहलग्नता और पुनर्संयोजन (Linkage and Recombination):
- सहलग्नता (Linkage): एक ही गुणसूत्र पर स्थित जीनों की एक साथ वंशागत होने की प्रवृत्ति।
- मॉर्गन का कार्य: उन्होंने ड्रोसोफिला पर प्रयोग करते हुए पाया कि कुछ जीन एक साथ वंशागत होते हैं, और उनके बीच पुनर्संयोजन की आवृत्ति कम होती है।
- पूर्ण सहलग्नता (Complete Linkage): जब जीन इतने करीब होते हैं कि वे कभी अलग नहीं होते (दुर्लभ)।
- अपूर्ण सहलग्नता (Incomplete Linkage): जब जीन अलग हो सकते हैं (क्रॉसिंग ओवर के कारण)।
- पुनर्संयोजन (Recombination): क्रॉसिंग ओवर के कारण नए जीन संयोजनों का निर्माण।
- जीन मानचित्रण (Gene Mapping): अल्फ्रेड स्टर्टेवेंट (मॉर्गन के छात्र) ने पुनर्संयोजन आवृत्ति का उपयोग करके गुणसूत्रों पर जीनों की दूरी और स्थिति का निर्धारण किया। 1% पुनर्संयोजन आवृत्ति को 1 सेंटीमॉर्गन (cM) या 1 मानचित्र इकाई (map unit) के बराबर माना जाता है।
6. लिंग निर्धारण (Sex Determination):
- वह क्रियाविधि जिसके द्वारा किसी जीव का लिंग निर्धारित होता है।
- मानव में (XX-XY):
- मादा: XX (समयुग्मकी), केवल X गुणसूत्र वाले अंडे उत्पन्न करती है।
- नर: XY (विषमयुग्मकी), X और Y गुणसूत्र वाले शुक्राणु उत्पन्न करता है।
- संतान का लिंग नर के शुक्राणु द्वारा निर्धारित होता है।
- पक्षी में (ZW-ZZ):
- मादा: ZW (विषमयुग्मकी), लिंग निर्धारण मादा द्वारा।
- नर: ZZ (समयुग्मकी)।
- कीटों में (XO-XX):
- मादा: XX, नर: XO (केवल एक X गुणसूत्र)।
- मधुमक्खी में (हैप्लो-डिप्लॉयड):
- अनिषेचित अंडे से नर (ड्रोन) विकसित होते हैं (अगुणित)।
- निषेचित अंडे से मादा (रानी और श्रमिक) विकसित होती हैं (द्विगुणित)।
7. उत्परिवर्तन (Mutation):
- DNA अनुक्रमों में अचानक और वंशागत परिवर्तन।
- बिंदु उत्परिवर्तन (Point Mutation): एक एकल क्षार युग्म में परिवर्तन।
- उदाहरण: सिकल सेल एनीमिया (हीमोग्लोबिन जीन में एक एकल अमीनो अम्ल परिवर्तन)।
- फ्रेमशिफ्ट उत्परिवर्तन (Frameshift Mutation): क्षार युग्मों के विलोपन (deletion) या निवेशन (insertion) के कारण रीडिंग फ्रेम में बदलाव।
- गुणसूत्रीय उत्परिवर्तन (Chromosomal Aberrations): गुणसूत्रों की संख्या या संरचना में परिवर्तन।
- उदाहरण: विलोपन, दोहराव, व्युत्क्रमण, स्थानांतरण।
8. आनुवंशिक विकार (Genetic Disorders):
- मेंडेलियन विकार (Mendelian Disorders): एकल जीन में परिवर्तन के कारण होते हैं।
- हीमोफीलिया (Haemophilia): X-सहलग्न अप्रभावी विकार। रक्त का थक्का जमने में समस्या। मादा वाहक होती हैं, नर प्रभावित होते हैं।
- वर्णांधता (Colour Blindness): X-सहलग्न अप्रभावी विकार। लाल और हरे रंग में भेद करने में असमर्थता।
- सिकल सेल एनीमिया (Sickle Cell Anemia): अलिंगसूत्री अप्रभावी विकार। हीमोग्लोबिन अणु में बीटा-ग्लोबिन श्रृंखला के छठे अमीनो अम्ल (ग्लूटामिक अम्ल) का वैलीन द्वारा प्रतिस्थापन। RBCs हँसिया के आकार की हो जाती हैं।
- फिनाइलकीटोन्यूरिया (Phenylketonuria - PKU): अलिंगसूत्री अप्रभावी विकार। फिनाइलएलानिन हाइड्रोक्सीलेस एंजाइम की कमी से फिनाइलएलानिन का टायरोसिन में परिवर्तन नहीं होता, जिससे मस्तिष्क क्षति और मानसिक मंदता होती है।
- थैलेसीमिया (Thalassemia): अलिंगसूत्री अप्रभावी विकार। हीमोग्लोबिन के अल्फा या बीटा ग्लोबिन श्रृंखला के संश्लेषण में कमी।
- गुणसूत्रीय विकार (Chromosomal Disorders): गुणसूत्रों की संख्या या संरचना में परिवर्तन के कारण होते हैं।
- डाउन सिंड्रोम (Down's Syndrome): 21वें गुणसूत्र की ट्राइसोमी (तीन प्रतियां)। मानसिक मंदता, छोटे कद, गोल सिर, खुली जीभ, आंशिक रूप से खुला मुँह।
- क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम (Klinefelter's Syndrome): लिंग गुणसूत्रों की ट्राइसोमी (XXY)। नर में मादा के लक्षण (गाइनेकोमैस्टिया), बाँझपन।
- टर्नर सिंड्रोम (Turner's Syndrome): लिंग गुणसूत्रों की मोनोसोमी (XO)। मादा में एक X गुणसूत्र की कमी। बाँझपन, अविकसित अंडाशय, छोटे कद।
भाग 2: विकास (Evolution)
1. जीवन की उत्पत्ति (Origin of Life):
- बिग बैंग सिद्धांत: ब्रह्मांड की उत्पत्ति का सबसे स्वीकृत सिद्धांत।
- पृथ्वी का निर्माण: लगभग 4.5 बिलियन वर्ष पूर्व।
- रासायनिक विकास (Chemical Evolution): ओपेरिन (रूस) और हाल्डेन (इंग्लैंड) द्वारा प्रस्तावित।
- प्रारंभिक पृथ्वी का वातावरण अपचायक था (कोई मुक्त ऑक्सीजन नहीं)।
- सरल अकार्बनिक अणुओं से जटिल कार्बनिक अणुओं (अमीनो अम्ल, शर्करा, न्यूक्लियोटाइड) का निर्माण।
- मिलर का प्रयोग (Miller's Experiment - 1953): स्टेनली मिलर और हेरोल्ड यूरे ने एक बंद फ्लास्क में प्रारंभिक पृथ्वी की स्थितियों (उच्च तापमान, बिजली, मीथेन, अमोनिया, हाइड्रोजन, जल वाष्प) को दोहराया और अमीनो अम्ल का संश्लेषण किया।
- जीवन के प्रथम रूप: लगभग 3.8 बिलियन वर्ष पूर्व। संभवतः अवायवीय और रसायनपोषी।
2. विकास के प्रमाण (Evidences of Evolution):
- जीवाश्म विज्ञान (Palaeontological Evidences):
- जीवाश्म (Fossils) चट्टानों में संरक्षित प्राचीन जीवन के अवशेष हैं।
- ये विभिन्न भूवैज्ञानिक कालों में जीवन रूपों के अस्तित्व को दर्शाते हैं।
- घोड़े के विकास का जीवाश्म रिकॉर्ड एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
- तुलनात्मक शरीर रचना और आकारिकी (Comparative Anatomy and Morphology):
- समजात अंग (Homologous Organs): समान मूल संरचना, लेकिन विभिन्न कार्य।
- उदाहरण: व्हेल के फ्लिपर, चमगादड़ के पंख, चीता के अग्रपाद और मानव के हाथ - सभी की आंतरिक अस्थि संरचना समान है, लेकिन कार्य भिन्न हैं। यह अपसारी विकास (Divergent Evolution) को दर्शाता है।
- समवृत्ति अंग (Analogous Organs): विभिन्न मूल संरचना, लेकिन समान कार्य।
- उदाहरण: पक्षी और कीट के पंख (दोनों उड़ने के लिए, लेकिन संरचनात्मक रूप से भिन्न)। यह अभिसारी विकास (Convergent Evolution) को दर्शाता है।
- समजात अंग (Homologous Organs): समान मूल संरचना, लेकिन विभिन्न कार्य।
- भ्रूण विज्ञान (Embryological Evidences):
- अर्न्स्ट हेकेल ने प्रस्तावित किया कि "व्यक्तिवृत्त जातिवृत्त की पुनरावृत्ति करता है" (Ontogeny recapitulates Phylogeny)। हालांकि, यह सिद्धांत पूरी तरह से स्वीकार्य नहीं है क्योंकि भ्रूण कभी भी वयस्क अवस्था को दोहराते नहीं हैं।
- सभी कशेरुकियों के भ्रूणों में कुछ सामान्य प्रारंभिक अवस्थाएँ होती हैं, जैसे गिल स्लिट्स और नोटोकॉर्ड।
- आणविक प्रमाण (Molecular Evidences):
- विभिन्न जीवों के DNA, RNA और प्रोटीन अनुक्रमों में समानताएं विकासवादी संबंधों को दर्शाती हैं।
- जितनी अधिक समानता, उतनी ही निकटता से संबंधित प्रजातियाँ।
3. विकास के सिद्धांत (Theories of Evolution):
- लैमार्कवाद (Lamarckism - 1809): जीन बैप्टिस्ट डी लैमार्क।
- उपयोग और अनुपयोग का सिद्धांत: अंगों का अधिक उपयोग उन्हें विकसित करता है, जबकि अनुपयोग उन्हें कमजोर करता है।
- उपार्जित लक्षणों की वंशागति: जीवनकाल में प्राप्त लक्षण अगली पीढ़ी में संचरित होते हैं।
- उदाहरण: जिराफ की लंबी गर्दन (लगातार ऊँची पत्तियों तक पहुँचने के लिए)। यह सिद्धांत अब अमान्य है।
- डार्विनवाद (Darwinism - 1859): चार्ल्स डार्विन।
- प्राकृतिक वरण (Natural Selection): प्रकृति उन जीवों का चयन करती है जो अपने पर्यावरण के लिए सबसे उपयुक्त होते हैं।
- शाखावत अवतरण (Branching Descent): सभी जीव एक सामान्य पूर्वज से विकसित हुए हैं और समय के साथ शाखाओं में बंट गए हैं।
- मुख्य अवधारणाएँ:
- अतिप्रजनन (Overproduction): जीव अधिक संतति उत्पन्न करते हैं।
- जीवन के लिए संघर्ष (Struggle for Existence): सीमित संसाधनों के लिए प्रतिस्पर्धा।
- विविधताएँ (Variations): आबादी में अंतर होते हैं।
- योग्यतम की उत्तरजीविता (Survival of the Fittest): सबसे उपयुक्त जीव जीवित रहते हैं और प्रजनन करते हैं।
- अनुकूलन (Adaptation): पर्यावरण के अनुकूल होने की क्षमता।
- उदाहरण:
- औद्योगिक अतिकृष्णता (Industrial Melanism): इंग्लैंड में औद्योगिक क्रांति के बाद काली पतंगों (Biston betularia) की संख्या में वृद्धि।
- कीटनाशक प्रतिरोधी कीटों और एंटीबायोटिक प्रतिरोधी जीवाणुओं का विकास।
- उत्परिवर्तन सिद्धांत (Mutation Theory - 1901): ह्यूगो डी व्रीस।
- विकास उत्परिवर्तनों के कारण होता है, जो अचानक और बड़े परिवर्तन (साल्टेशन - Saltation) होते हैं।
- डार्विन के अनुसार छोटे, दिशात्मक परिवर्तन होते हैं, जबकि डी व्रीस के अनुसार बड़े, यादृच्छिक परिवर्तन होते हैं।
- आधुनिक संश्लेषणात्मक सिद्धांत (Modern Synthetic Theory): डार्विन के प्राकृतिक वरण को मेंडल के आनुवंशिकी, उत्परिवर्तन, जीन प्रवाह, आनुवंशिक अपवहन और पुनर्संयोजन के साथ एकीकृत करता है।
4. हार्डी-वीनबर्ग सिद्धांत (Hardy-Weinberg Principle):
- यह सिद्धांत बताता है कि एक बड़ी, यादृच्छिक रूप से संभोग करने वाली आबादी में, यदि कोई विकासवादी बल कार्य नहीं कर रहा है, तो जीन आवृत्तियाँ और जीनोटाइप आवृत्तियाँ पीढ़ी-दर-पीढ़ी स्थिर रहती हैं।
- समीकरण: p² + 2pq + q² = 1
- p = प्रभावी एलिल की आवृत्ति
- q = अप्रभावी एलिल की आवृत्ति
- p² = समयुग्मकी प्रभावी जीनोटाइप की आवृत्ति
- q² = समयुग्मकी अप्रभावी जीनोटाइप की आवृत्ति
- 2pq = विषमयुग्मकी जीनोटाइप की आवृत्ति
- संतुलन को प्रभावित करने वाले कारक (जो विकास का कारण बनते हैं):
- जीन प्रवाह (Gene Flow): आबादी के बीच जीनों का स्थानांतरण।
- आनुवंशिक अपवहन (Genetic Drift): संयोगवश जीन आवृत्तियों में यादृच्छिक परिवर्तन, खासकर छोटी आबादी में।
- संस्थापक प्रभाव (Founder Effect): जब एक छोटी आबादी एक नए क्षेत्र में जाती है और एक नई आबादी स्थापित करती है।
- बोतल गर्दन प्रभाव (Bottleneck Effect): जब एक बड़ी आबादी किसी आपदा के कारण नाटकीय रूप से कम हो जाती है।
- उत्परिवर्तन (Mutation): नए एलिलों का निर्माण।
- पुनर्संयोजन (Recombination): नए जीन संयोजनों का निर्माण।
- प्राकृतिक वरण (Natural Selection): सबसे उपयुक्त जीनोटाइप का चयन।
5. अनुकूली विकिरण (Adaptive Radiation):
- एक सामान्य पूर्वज से विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में फैलने और विभिन्न पारिस्थितिक निशों के अनुकूल होने के कारण विभिन्न प्रजातियों का विकास।
- उदाहरण:
- डार्विन की फिंचें (Darwin's Finches): गैलापागोस द्वीप समूह में विभिन्न प्रकार की फिंचें, जो उनके चोंच के आकार और भोजन की आदतों में भिन्न थीं, लेकिन एक सामान्य बीज खाने वाले पूर्वज से विकसित हुईं।
- ऑस्ट्रेलियाई मार्सुपियल (Australian Marsupials): एक सामान्य मार्सुपियल पूर्वज से विभिन्न प्रकार के मार्सुपियल (जैसे कंगारू, कोआला, वोंबैट) का विकास।
6. मानव का विकास (Human Evolution):
- मानव का विकास लगभग 15 मिलियन वर्ष पूर्व शुरू हुआ।
- पूर्वज और उनकी विशेषताएँ:
- ड्रायोपिथिकस (Dryopithecus): लगभग 15 मिलियन वर्ष पूर्व। वानर के समान।
- रामापिथिकस (Ramapithecus): वानर और मानव दोनों के लक्षण।
- ऑस्ट्रेलोपिथिकस (Australopithecus): लगभग 2 मिलियन वर्ष पूर्व। पूर्वी अफ्रीका में रहते थे। दो पैरों पर चलते थे। फल खाते थे। मस्तिष्क क्षमता लगभग 400-600 cc।
- होमो हैबिलिस (Homo habilis): "कुशल मानव"। लगभग 2 मिलियन वर्ष पूर्व। मस्तिष्क क्षमता 650-800 cc। औजारों का उपयोग करते थे। मांस नहीं खाते थे।
- होमो इरेक्टस (Homo erectus): "सीधा खड़ा मानव"। लगभग 1.5 मिलियन वर्ष पूर्व। मस्तिष्क क्षमता 900 cc। मांस खाते थे। आग का उपयोग करते थे।
- होमो नियंडरथलेंसिस (Homo neanderthalensis): लगभग 1,00,000 से 40,000 वर्ष पूर्व। मस्तिष्क क्षमता 1400 cc। शरीर को ढँकते थे और मृतकों को दफनाते थे।
- होमो सेपियन्स (Homo sapiens): "बुद्धिमान मानव"। अफ्रीका में विकसित हुए। लगभग 75,000-10,000 वर्ष पूर्व आधुनिक मानव का विकास हुआ। मस्तिष्क क्षमता 1350 cc। गुफा चित्रकला, कृषि, सभ्यता।
बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions - MCQs):
-
मेंडल ने अपने आनुवंशिकी प्रयोगों के लिए किस पौधे का चुनाव किया?
a) चना
b) मटर
c) मक्का
d) गेहूँ -
एकसंकर क्रॉस में F2 पीढ़ी का फेनोटाइपिक अनुपात क्या होता है?
a) 1:2:1
b) 3:1
c) 9:3:3:1
d) 1:1 -
मानव में ABO रक्त समूह किस प्रकार की वंशागति का उदाहरण है?
a) अपूर्ण प्रभाविता
b) सहप्रभाविता
c) बहुविकल्पता
d) b और c दोनों -
डाउन सिंड्रोम किस गुणसूत्र की ट्राइसोमी के कारण होता है?
a) 13वें
b) 18वें
c) 21वें
d) X गुणसूत्र -
सहलग्नता का सिद्धांत किसने दिया और किस जीव पर प्रयोग किए?
a) मेंडल, मटर
b) मॉर्गन, ड्रोसोफिला
c) सटन और बोवेरी, मानव
d) डी व्रीस, ईवनिंग प्रिमरोज -
"उपार्जित लक्षणों की वंशागति" का सिद्धांत किसने प्रतिपादित किया था?
a) चार्ल्स डार्विन
b) जीन बैप्टिस्ट डी लैमार्क
c) ह्यूगो डी व्रीस
d) अल्फ्रेड रसेल वैलेस -
पक्षी के पंख और कीट के पंख किस प्रकार के अंगों के उदाहरण हैं?
a) समजात अंग
b) समवृत्ति अंग
c) अवशेषी अंग
d) a और b दोनों -
हार्डी-वीनबर्ग समीकरण में 2pq किसे दर्शाता है?
a) समयुग्मकी प्रभावी जीनोटाइप की आवृत्ति
b) समयुग्मकी अप्रभावी जीनोटाइप की आवृत्ति
c) विषमयुग्मकी जीनोटाइप की आवृत्ति
d) एलिल की आवृत्ति -
मिलर के प्रयोग में, प्रारंभिक पृथ्वी के वातावरण में कौन सी गैसें शामिल नहीं थीं?
a) मीथेन
b) अमोनिया
c) हाइड्रोजन
d) ऑक्सीजन -
होमो इरेक्टस की मस्तिष्क क्षमता लगभग कितनी थी?
a) 400-600 cc
b) 650-800 cc
c) 900 cc
d) 1400 cc
उत्तरमाला:
- b) मटर
- b) 3:1
- d) b और c दोनों
- c) 21वें
- b) मॉर्गन, ड्रोसोफिला
- b) जीन बैप्टिस्ट डी लैमार्क
- b) समवृत्ति अंग
- c) विषमयुग्मकी जीनोटाइप की आवृत्ति
- d) ऑक्सीजन
- c) 900 cc
मुझे आशा है कि ये विस्तृत नोट्स और प्रश्नोत्तर आपकी तैयारी में सहायक सिद्ध होंगे। किसी भी संदेह या अतिरिक्त जानकारी के लिए आप पूछ सकते हैं। शुभकामनाएँ!