Class 12 Biology Notes Chapter 6 (वंशागति का आणविक आधार) – Jeev Vigyan Book

Jeev Vigyan
प्रिय विद्यार्थियों, आज हम कक्षा 12 जीव विज्ञान के अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय 'वंशागति का आणविक आधार' का विस्तृत अध्ययन करेंगे। यह अध्याय न केवल आपकी बोर्ड परीक्षाओं के लिए बल्कि विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। आइए, इस अध्याय के गहन विश्लेषण में उतरें:


अध्याय 6: वंशागति का आणविक आधार (Molecular Basis of Inheritance)

यह अध्याय आनुवंशिक पदार्थ की प्रकृति, उसकी संरचना, प्रतिकृति, और जीन अभिव्यक्ति की प्रक्रिया को विस्तार से समझाता है।

1. आनुवंशिक पदार्थ की खोज (Search for Genetic Material)

प्रारंभ में, यह स्पष्ट नहीं था कि आनुवंशिक पदार्थ DNA है, RNA है या प्रोटीन। कई प्रयोगों ने अंततः DNA को आनुवंशिक पदार्थ के रूप में स्थापित किया।

  • फ्रेडरिक ग्रिफिथ का रूपांतरण सिद्धांत (Transforming Principle) - (1928)

    • ग्रिफिथ ने स्ट्रेप्टोकोकस न्यूमोनी (Streptococcus pneumoniae) नामक जीवाणु पर प्रयोग किए, जो निमोनिया का कारण बनता है।
    • जीवाणु के दो स्ट्रेन थे:
      • S-स्ट्रेन (चिकने, कैप्सूल वाले): रोगजनक (विरुलेंट), चूहे को मारने वाले।
      • R-स्ट्रेन (खुरदुरे, कैप्सूल रहित): गैर-रोगजनक (नॉन-विरुलेंट), चूहे को नहीं मारने वाले।
    • प्रयोग:
      1. R-स्ट्रेन → चूहा जीवित।
      2. S-स्ट्रेन → चूहा मृत।
      3. ऊष्मा-मृत S-स्ट्रेन → चूहा जीवित।
      4. ऊष्मा-मृत S-स्ट्रेन + R-स्ट्रेन → चूहा मृत। (मृत चूहे से जीवित S-स्ट्रेन प्राप्त हुए)
    • निष्कर्ष: ग्रिफिथ ने निष्कर्ष निकाला कि R-स्ट्रेन जीवाणु को S-स्ट्रेन में "रूपांतरित" करने वाला कोई "रूपांतरण सिद्धांत" ऊष्मा-मृत S-स्ट्रेन से R-स्ट्रेन में स्थानांतरित हो गया था। हालांकि, उन्होंने इस आनुवंशिक पदार्थ की रासायनिक प्रकृति की पहचान नहीं की।
  • बायोकेमिकल लक्षण वर्णन (Biochemical Characterization) - एवरी, मैक्लिओड, मैक्कार्टी (1933-44)

    • इन्होंने ग्रिफिथ के प्रयोग से रूपांतरण सिद्धांत की जैव-रासायनिक प्रकृति निर्धारित करने का प्रयास किया।
    • इन्होंने ऊष्मा-मृत S-स्ट्रेन से प्रोटीन, DNA और RNA को शुद्ध किया।
    • प्रयोग:
      • जब DNA को R-स्ट्रेन में मिलाया गया, तो रूपांतरण हुआ।
      • जब प्रोटीन-पाचक एंजाइम (प्रोटीएज़) या RNA-पाचक एंजाइम (RNAसेज़) को मिलाया गया, तो रूपांतरण पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा।
      • जब DNA-पाचक एंजाइम (DNAसेज़) को मिलाया गया, तो रूपांतरण रुक गया।
    • निष्कर्ष: उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि DNA ही वह आनुवंशिक पदार्थ है जो रूपांतरण का कारण बनता है।
  • हर्षे और चेज़ का प्रयोग (Hershey and Chase Experiment) - (1952)

    • यह प्रयोग निर्णायक था और इसने स्पष्ट रूप से साबित किया कि DNA आनुवंशिक पदार्थ है।
    • इन्होंने बैक्टीरियोफेज (जीवाणुभोजी) का उपयोग किया, जो जीवाणुओं को संक्रमित करने वाला एक वायरस है।
    • सिद्धांत: वायरस अपने आनुवंशिक पदार्थ को जीवाणु कोशिका में स्थानांतरित करता है।
    • प्रयोग:
      1. कुछ वायरसों को रेडियोधर्मी फॉस्फोरस (³²P) वाले माध्यम में उगाया गया। DNA में फॉस्फोरस होता है, प्रोटीन में नहीं। इस प्रकार, इन वायरसों का DNA रेडियोधर्मी हो गया।
      2. कुछ अन्य वायरसों को रेडियोधर्मी सल्फर (³⁵S) वाले माध्यम में उगाया गया। प्रोटीन में सल्फर होता है, DNA में नहीं। इस प्रकार, इन वायरसों का प्रोटीन रेडियोधर्मी हो गया।
      3. इन रेडियोधर्मी वायरसों को ई. कोलाई (E. coli) जीवाणु को संक्रमित करने दिया गया।
      4. संक्रमण के बाद, ब्लेंडर का उपयोग करके वायरल कोट (प्रोटीन) को जीवाणु से अलग किया गया।
      5. अपकेंद्रण (Centrifugation) द्वारा जीवाणु कोशिकाओं को अलग किया गया।
    • परिणाम:
      • ³²P वाले वायरसों से संक्रमित जीवाणुओं में रेडियोधर्मिता पाई गई (DNA जीवाणु में प्रवेश कर गया)।
      • ³⁵S वाले वायरसों से संक्रमित जीवाणुओं में रेडियोधर्मिता नहीं पाई गई (प्रोटीन जीवाणु में प्रवेश नहीं कर पाया)।
    • निष्कर्ष: DNA ही वह पदार्थ है जो वायरसों से जीवाणुओं में प्रवेश करके आनुवंशिक जानकारी को स्थानांतरित करता है, अतः DNA ही आनुवंशिक पदार्थ है।

2. न्यूक्लिक अम्ल की संरचना (Structure of Nucleic Acids)

न्यूक्लिक अम्ल (DNA और RNA) न्यूक्लियोटाइड्स के बहुलक होते हैं। प्रत्येक न्यूक्लियोटाइड तीन घटकों से बना होता है:
1. नाइट्रोजनी क्षार (Nitrogenous base)
2. पेंटोज शर्करा (Pentose sugar)
3. फॉस्फेट समूह (Phosphate group)

  • नाइट्रोजनी क्षार:

    • प्यूरीन (Purines): एडेनिन (A) और गुआनिन (G)
    • पिरिमिडीन (Pyrimidines): साइटोसिन (C), थाइमिन (T) (DNA में), और यूरेसिल (U) (RNA में)
  • पेंटोज शर्करा:

    • डीऑक्सीराइबोज (Deoxyribose): DNA में
    • राइबोज (Ribose): RNA में
  • न्यूक्लियोसाइड (Nucleoside): नाइट्रोजनी क्षार + पेंटोज शर्करा (जैसे एडेनोसिन, गुआनोसिन, साइटिडीन, थाइमिडीन, यूरिडीन)।

  • न्यूक्लियोटाइड (Nucleotide): न्यूक्लियोसाइड + फॉस्फेट समूह (जैसे एडेनिलिक अम्ल, गुआनिलिक अम्ल)।

DNA की संरचना (Structure of DNA)

  • जेम्स वाटसन और फ्रांसिस क्रिक का डबल हेलिक्स मॉडल (1953):

    • यह मॉडल एक्स-रे विवर्तन डेटा (मॉरिस विल्किंस और रोजालिंड फ्रैंकलिन द्वारा) पर आधारित था।
    • मुख्य विशेषताएं:
      1. DNA दो पॉलीन्यूक्लियोटाइड श्रृंखलाओं से बना होता है, जो एक अक्ष के चारों ओर कुंडलित होकर एक डबल हेलिक्स बनाते हैं।
      2. दोनों श्रृंखलाओं की ध्रुवता प्रतिसमांतर (antiparallel) होती है, यानी एक श्रृंखला 5'→3' दिशा में चलती है, जबकि दूसरी 3'→5' दिशा में चलती है।
      3. क्षार भीतर की ओर होते हैं और शर्करा-फॉस्फेट बैकबोन बाहर की ओर होता है।
      4. क्षार युग्मन (Base pairing) विशिष्ट होता है:
        • एडेनिन (A) हमेशा थाइमिन (T) के साथ दो हाइड्रोजन बंधों (A=T) द्वारा जुड़ता है।
        • गुआनिन (G) हमेशा साइटोसिन (C) के साथ तीन हाइड्रोजन बंधों (G≡C) द्वारा जुड़ता है।
        • यह क्षार पूरकता (complementarity) को दर्शाता है।
      5. प्रत्येक कुंडल का पिच 3.4 नैनोमीटर (nm) होता है, जिसमें लगभग 10 क्षार युग्म (base pairs, bp) होते हैं।
      6. डबल हेलिक्स का व्यास लगभग 2 नैनोमीटर होता है।
      7. कुंडलित संरचना में एक बड़ी खांच (major groove) और एक छोटी खांच (minor groove) होती है।
  • DNA पैकेजिंग (DNA Packaging):

    • मानव कोशिका में DNA की लंबाई लगभग 2.2 मीटर होती है, जिसे 6 माइक्रोमीटर के नाभिक में पैक करना होता है।
    • प्रोकैरियोट्स में: DNA एक न्यूक्लियोइड (nucleoid) नामक क्षेत्र में ऋणात्मक रूप से आवेशित होता है और कुछ धनात्मक रूप से आवेशित प्रोटीन द्वारा संघनित होता है।
    • यूकेरियोट्स में:
      • DNA धनात्मक रूप से आवेशित हिस्टोन प्रोटीन (H2A, H2B, H3, H4 के दो-दो अणुओं का अष्टक) के चारों ओर कुंडलित होता है।
      • DNA का लगभग 200 bp हिस्टोन अष्टक के चारों ओर लिपटकर एक संरचना बनाता है जिसे न्यूक्लियोसोम (nucleosome) कहते हैं।
      • दो न्यूक्लियोसोम को जोड़ने वाले DNA को लिंकर DNA (linker DNA) कहते हैं, जिस पर H1 हिस्टोन प्रोटीन जुड़ता है।
      • न्यूक्लियोसोम क्रोमेटिन में "मोतियों की माला" (beads-on-string) जैसी संरचना बनाते हैं।
      • क्रोमेटिन फाइबर आगे संघनित होकर सोलेनोइड (solenoid) संरचना बनाते हैं, फिर और संघनित होकर क्रोमोसोम बनाते हैं।
      • यूक्रोमेटिन (Euchromatin): शिथिल रूप से पैक, हल्के रंग का, अनुलेखनीय रूप से सक्रिय।
      • हेटेरोक्रोमेटिन (Heterochromatin): सघन रूप से पैक, गहरे रंग का, अनुलेखनीय रूप से निष्क्रिय।

RNA की संरचना (Structure of RNA)

  • RNA आमतौर पर एकल-रज्जुक (single-stranded) होता है, हालांकि कुछ वायरसों में यह द्विरज्जुक भी हो सकता है।
  • इसमें राइबोज शर्करा और नाइट्रोजनी क्षार A, G, C, U (थाइमिन के स्थान पर यूरेसिल) होते हैं।
  • RNA के मुख्य प्रकार:
    • मैसेंजर RNA (mRNA): आनुवंशिक जानकारी को DNA से राइबोसोम तक ले जाता है।
    • ट्रांसफर RNA (tRNA): अमीनो अम्ल को राइबोसोम तक ले जाता है।
    • राइबोसोमल RNA (rRNA): राइबोसोम का संरचनात्मक घटक है और उत्प्रेरक के रूप में कार्य करता है।

3. आनुवंशिक पदार्थ के गुण (Properties of Genetic Material)

एक अणु को आनुवंशिक पदार्थ के रूप में कार्य करने के लिए निम्नलिखित गुणों को पूरा करना चाहिए:

  1. प्रतिकृति बनाने की क्षमता (Ability to replicate): यह अपनी प्रतिकृति बनाने में सक्षम होना चाहिए (स्व-प्रतिकृति)।
  2. रासायनिक और संरचनात्मक रूप से स्थिर (Chemically and structurally stable): यह कोशिका के जीवन चक्र की विभिन्न अवस्थाओं में स्थिर होना चाहिए।
  3. धीरे-धीरे उत्परिवर्तन करने की क्षमता (Scope for slow mutation): इसमें उत्परिवर्तन (परिवर्तन) की संभावना होनी चाहिए, जो विकास के लिए आवश्यक है।
  4. मेंडेलियन लक्षणों के रूप में स्वयं को व्यक्त करने की क्षमता (Ability to express itself in the form of Mendelian characters): यह स्वयं को फीनोटाइपिक लक्षणों के रूप में व्यक्त करने में सक्षम होना चाहिए।
  • DNA बनाम RNA:
    • DNA अधिक स्थिर है:
      • इसमें थाइमिन होता है (यूरेसिल की तुलना में अधिक स्थिर)।
      • डीऑक्सीराइबोज में 2'-OH समूह की अनुपस्थिति इसे कम प्रतिक्रियाशील बनाती है।
      • द्विरज्जुक संरचना इसे बाहरी परिवर्तनों से बचाती है।
    • RNA अधिक प्रतिक्रियाशील है:
      • इसमें यूरेसिल होता है।
      • राइबोज में 2'-OH समूह की उपस्थिति इसे अधिक प्रतिक्रियाशील और आसानी से अपघटित होने वाला बनाती है।
      • एकल-रज्जुक संरचना इसे अधिक संवेदनशील बनाती है।
    • निष्कर्ष: DNA बेहतर आनुवंशिक पदार्थ है क्योंकि यह अधिक स्थिर है और प्रतिकृति बना सकता है। RNA कुछ वायरसों में आनुवंशिक पदार्थ के रूप में कार्य करता है, लेकिन यह मुख्य रूप से उत्प्रेरक और एडाप्टर अणु के रूप में कार्य करता है।

4. प्रतिकृति (Replication)

  • अर्ध-संरक्षी प्रतिकृति (Semi-conservative replication):

    • वाटसन और क्रिक ने प्रस्तावित किया कि DNA प्रतिकृति अर्ध-संरक्षी होती है, जिसका अर्थ है कि प्रत्येक नए DNA अणु में एक मूल (जनक) स्ट्रैंड और एक नया संश्लेषित स्ट्रैंड होता है।
    • मेसेल्सन और स्टाहल का प्रयोग (Meselson and Stahl Experiment) - (1958):
      • इन्होंने ई. कोलाई को कई पीढ़ियों तक भारी नाइट्रोजन (¹⁵N) वाले माध्यम में उगाया, जिससे जीवाणु का DNA पूरी तरह से ¹⁵N-युक्त हो गया।
      • फिर, जीवाणुओं को हल्के नाइट्रोजन (¹⁴N) वाले माध्यम में स्थानांतरित किया गया।
      • विभिन्न पीढ़ियों के DNA को सीज़ियम क्लोराइड (CsCl) घनत्व प्रवणता अपकेंद्रण द्वारा अलग किया गया।
      • परिणाम:
        • पहली पीढ़ी (20 मिनट बाद) में, DNA का एक संकर बैंड (¹⁵N और ¹⁴N का मिश्रण) प्राप्त हुआ।
        • दूसरी पीढ़ी (40 मिनट बाद) में, दो बैंड प्राप्त हुए: एक संकर बैंड और एक हल्का ¹⁴N-युक्त DNA बैंड।
      • निष्कर्ष: यह प्रयोग अर्ध-संरक्षी प्रतिकृति के मॉडल की पुष्टि करता है।
    • टेलर का प्रयोग (Taylor's experiment) - (1958): इन्होंने विसिया फाबा (Vicia faba) पर रेडियोधर्मी थाइमिडीन का उपयोग करके यूकेरियोट्स में भी अर्ध-संरक्षी प्रतिकृति की पुष्टि की।
  • प्रतिकृति की क्रियाविधि (Mechanism of Replication):

    • DNA प्रतिकृति एक जटिल प्रक्रिया है जिसमें कई एंजाइम और प्रोटीन शामिल होते हैं।
    • यह प्रतिकृति के मूल बिंदु (origin of replication) से शुरू होती है।
    • मुख्य एंजाइम:
      • DNA हेलिकेज़ (DNA helicase): DNA डबल हेलिक्स को खोलता है और हाइड्रोजन बंधों को तोड़ता है, जिससे प्रतिकृति फोर्क (replication fork) बनता है।
      • सिंगल-स्ट्रैंड बाइंडिंग प्रोटीन (SSB proteins): खुले हुए DNA स्ट्रैंड्स को फिर से जुड़ने से रोकते हैं।
      • टोपोआइसोमरेज़ (Topoisomerase): DNA को खोलने से उत्पन्न होने वाले तनाव को कम करता है।
      • DNA पॉलीमरेज़ (DNA polymerase): मुख्य प्रतिकृति एंजाइम है। यह टेम्पलेट स्ट्रैंड पर नए न्यूक्लियोटाइड्स जोड़ता है। यह हमेशा 5'→3' दिशा में संश्लेषण करता है।
      • प्राइमेज़ (Primase): RNA प्राइमर (RNA primer) का संश्लेषण करता है, जो DNA पॉलीमरेज़ के लिए एक प्रारंभिक बिंदु प्रदान करता है।
      • DNA लाइगेज़ (DNA ligase): ओकाजाकी खंडों को जोड़ता है।
    • प्रक्रिया:
      1. प्रारंभन (Initiation): प्रतिकृति मूल बिंदु पर शुरू होती है, हेलिकेज़ DNA को खोलता है।
      2. दीर्घीकरण (Elongation):
        • DNA पॉलीमरेज़ टेम्पलेट स्ट्रैंड पर नए न्यूक्लियोटाइड्स जोड़ता है।
        • एक स्ट्रैंड (3'→5' टेम्पलेट) पर संश्लेषण सतत होता है, इसे लीडिंग स्ट्रैंड (leading strand) कहते हैं।
        • दूसरे स्ट्रैंड (5'→3' टेम्पलेट) पर संश्लेषण असतत होता है, छोटे-छोटे खंडों में होता है जिन्हें ओकाजाकी खंड (Okazaki fragments) कहते हैं। इस स्ट्रैंड को लैगिंग स्ट्रैंड (lagging strand) कहते हैं।
        • ओकाजाकी खंडों को बाद में DNA लाइगेज़ द्वारा जोड़ा जाता है।
      3. समापन (Termination): जब प्रतिकृति पूरी हो जाती है, तो दो नए DNA अणु बनते हैं।

5. अनुलेखन (Transcription)

  • DNA से आनुवंशिक जानकारी का RNA में प्रतिलिपि बनाना अनुलेखन कहलाता है।

  • इसमें DNA के केवल एक स्ट्रैंड (टेम्पलेट स्ट्रैंड) का उपयोग होता है।

  • अनुलेखन इकाई (Transcription Unit):

    • प्रमोटर (Promoter): DNA अनुक्रम जहां RNA पॉलीमरेज़ जुड़ता है और अनुलेखन शुरू होता है।
    • संरचनात्मक जीन (Structural gene): DNA का वह खंड जिसका अनुलेखन RNA में होता है।
    • टर्मिनेटर (Terminator): DNA अनुक्रम जहां अनुलेखन समाप्त होता है।
    • टेम्पलेट स्ट्रैंड (3'→5' ध्रुवता) का अनुलेखन होता है, जबकि कोडिंग स्ट्रैंड (5'→3' ध्रुवता) का अनुलेखन नहीं होता है, लेकिन इसकी अनुक्रम RNA के समान होता है (थाइमिन के स्थान पर यूरेसिल)।
  • अनुलेखन की क्रियाविधि (Mechanism of Transcription):

    • RNA पॉलीमरेज़ (RNA polymerase): यह एंजाइम अनुलेखन को उत्प्रेरित करता है।
      • प्रोकैरियोट्स में: केवल एक प्रकार का RNA पॉलीमरेज़ सभी प्रकार के RNA (mRNA, tRNA, rRNA) का संश्लेषण करता है।
      • यूकेरियोट्स में: तीन प्रकार के RNA पॉलीमरेज़ होते हैं:
        • RNA पॉलीमरेज़ I: rRNA (28S, 18S, 5.8S) का अनुलेखन करता है।
        • RNA पॉलीमरेज़ II: mRNA के पूर्ववर्ती (hnRNA) का अनुलेखन करता है।
        • RNA पॉलीमरेज़ III: tRNA, 5S rRNA और snRNA का अनुलेखन करता है।
    • चरण:
      1. प्रारंभन (Initiation): RNA पॉलीमरेज़ प्रमोटर से जुड़ता है। प्रोकैरियोट्स में, सिग्मा (σ) कारक RNA पॉलीमरेज़ को प्रमोटर से जुड़ने में मदद करता है। DNA के कुंडल खुलते हैं।
      2. दीर्घीकरण (Elongation): RNA पॉलीमरेज़ DNA टेम्पलेट पर न्यूक्लियोटाइड्स जोड़ता है, RNA श्रृंखला को 5'→3' दिशा में संश्लेषित करता है।
      3. समापन (Termination): RNA पॉलीमरेज़ टर्मिनेटर क्षेत्र तक पहुंचता है। प्रोकैरियोट्स में, रो (ρ) कारक अनुलेखन को समाप्त करने में मदद करता है। RNA पॉलीमरेज़ DNA से अलग हो जाता है और नवगठित RNA श्रृंखला मुक्त हो जाती है।
  • यूकेरियोट्स में अनुलेखन के बाद का प्रसंस्करण (Post-transcriptional Processing in Eukaryotes):

    • यूकेरियोट्स में, प्राथमिक अनुलेख (primary transcript) या hnRNA (heterogeneous nuclear RNA) में गैर-कोडिंग अनुक्रम (इंट्रॉन) और कोडिंग अनुक्रम (एक्सॉन) दोनों होते हैं।
    • mRNA बनने से पहले hnRNA को संसाधित किया जाता है:
      1. कैपिंग (Capping): hnRNA के 5' सिरे पर मिथाइलगुआनोसिन ट्राइफॉस्फेट (methylguanosine triphosphate) जोड़ा जाता है।
      2. टेलिंग (Tailing): hnRNA के 3' सिरे पर 200-300 एडेनिन अवशेषों की पॉली-ए टेल (poly-A tail) जोड़ी जाती है।
      3. स्प्लिसिंग (Splicing): इंट्रॉन को हटा दिया जाता है और एक्सॉन को एक विशिष्ट क्रम में जोड़ा जाता है। यह प्रक्रिया स्प्लिसियोसोम (spliceosome) द्वारा की जाती है।
    • संसाधित mRNA (अब केवल एक्सॉन युक्त) नाभिक से कोशिका द्रव्य में स्थानांतरण के लिए तैयार होता है।

6. आनुवंशिक कूट (Genetic Code)

  • आनुवंशिक जानकारी DNA में न्यूक्लियोटाइड्स के अनुक्रम के रूप में संग्रहीत होती है, और यह जानकारी प्रोटीन में अमीनो अम्ल के अनुक्रम में अनुवादित होती है।

  • जॉर्ज गैमोव (George Gamow): ने प्रस्तावित किया कि अमीनो अम्ल को कोड करने के लिए कोड ट्रिपलेट (तीन न्यूक्लियोटाइड का समूह) होना चाहिए।

  • निरनबर्ग और माथाई (Nirenberg and Mathaei): ने सेल-फ्री सिस्टम में प्रोटीन संश्लेषण के लिए कृत्रिम mRNA का उपयोग करके कोडॉन की पहचान की।

  • हरगोविंद खुराना (Har Gobind Khorana): ने DNA/RNA के रासायनिक संश्लेषण की विधि विकसित की।

  • आनुवंशिक कूट की विशेषताएं (Salient Features of Genetic Code):

    1. ट्रिपलेट कोडॉन (Triplet codon): एक अमीनो अम्ल को तीन नाइट्रोजनी क्षार के अनुक्रम द्वारा कोडित किया जाता है, जिसे कोडॉन कहते हैं। कुल 64 कोडॉन होते हैं।
    2. असंदिग्ध और विशिष्ट (Unambiguous and specific): एक कोडॉन केवल एक विशिष्ट अमीनो अम्ल को कोड करता है।
    3. अपह्रासित (Degenerate): अधिकांश अमीनो अम्ल एक से अधिक कोडॉन द्वारा कोडित होते हैं (जैसे, ल्यूसिन के लिए 6 कोडॉन)।
    4. अतिव्यापी नहीं (Non-overlapping): एक क्षार एक से अधिक कोडॉन का हिस्सा नहीं होता है।
    5. कोमा रहित (Comma-less): कोडॉन के बीच कोई विराम चिह्न नहीं होता है।
    6. सार्वभौमिक (Universal): एक विशिष्ट कोडॉन (जैसे AUG) लगभग सभी जीवों में एक ही अमीनो अम्ल (मेथियोनिन) को कोड करता है। कुछ अपवाद माइटोकॉन्ड्रियल कोडॉन और कुछ प्रोटोजोआ में पाए जाते हैं।
    7. प्रारंभिक कोडॉन (Initiator codon): AUG, जो मेथियोनिन को कोड करता है और प्रोटीन संश्लेषण की शुरुआत करता है।
    8. समापन कोडॉन (Stop codons / Non-sense codons): UAA, UAG, UGA। ये किसी भी अमीनो अम्ल को कोड नहीं करते हैं और प्रोटीन संश्लेषण को समाप्त करते हैं।

7. स्थानांतरण (Translation)

  • mRNA पर उपस्थित आनुवंशिक जानकारी का प्रोटीन में अनुवाद स्थानांतरण कहलाता है।

  • यह प्रक्रिया राइबोसोम पर होती है।

  • tRNA (ट्रांसफर RNA):

    • इसे एडाप्टर अणु (adaptor molecule) भी कहते हैं।
    • यह अमीनो अम्ल को राइबोसोम तक ले जाता है।
    • इसमें एक एंटीकोडॉन लूप (anticodon loop) होता है, जिसमें तीन क्षार होते हैं जो mRNA के कोडॉन के पूरक होते हैं।
    • इसमें एक अमीनो अम्ल ग्राही सिरा (amino acid acceptor end) होता है, जहां विशिष्ट अमीनो अम्ल जुड़ता है।
    • इसकी संरचना क्लोवर लीफ (clover leaf) जैसी होती है (2D में), लेकिन 3D में यह उल्टे L के आकार का होता है।
  • प्रोटीन संश्लेषण के चरण:

    1. अमीनोएसिलेशन (चार्जिंग ऑफ tRNA) (Aminoacylation of tRNA):
      • विशिष्ट अमीनो अम्ल ATP की ऊर्जा का उपयोग करके अपने विशिष्ट tRNA से जुड़ते हैं।
      • यह प्रक्रिया अमीनोएसिल-tRNA सिंथेटेज (aminoacyl-tRNA synthetase) एंजाइम द्वारा उत्प्रेरित होती है।
      • परिणामस्वरूप, एक चार्ज्ड tRNA या अमीनोएसिल-tRNA बनता है।
    2. प्रारंभन (Initiation):
      • राइबोसोम की छोटी उपइकाई mRNA से जुड़ती है।
      • प्रारंभिक tRNA (जो मेथियोनिन वहन करता है) mRNA के प्रारंभिक कोडॉन (AUG) से जुड़ता है।
      • राइबोसोम की बड़ी उपइकाई छोटी उपइकाई से जुड़कर एक पूर्ण राइबोसोम बनाती है।
    3. दीर्घीकरण (Elongation):
      • राइबोसोम mRNA पर एक कोडॉन से दूसरे कोडॉन तक चलता है।
      • प्रत्येक नए कोडॉन के लिए एक नया चार्ज्ड tRNA आता है।
      • राइबोसोम में पेप्टिडाइल ट्रांसफरेज (peptidyl transferase) नामक एक एंजाइमेटिक rRNA (23S rRNA) होता है, जो अमीनो अम्ल के बीच पेप्टाइड बंध (peptide bond) बनाता है।
      • अमीनो अम्ल की एक श्रृंखला (पॉलीपेप्टाइड) बनने लगती है।
    4. समापन (Termination):
      • जब राइबोसोम एक समापन कोडॉन (UAA, UAG, UGA) पर पहुंचता है, तो कोई tRNA इससे जुड़ता नहीं है।
      • रिलीज कारक (release factors) इन समापन कोडॉन से जुड़ते हैं।
      • यह पॉलीपेप्टाइड श्रृंखला को राइबोसोम से मुक्त करता है।
      • राइबोसोम की उपइकाइयाँ अलग हो जाती हैं और mRNA से मुक्त हो जाती हैं।

8. जीन अभिव्यक्ति का नियमन (Regulation of Gene Expression)

  • जीन अभिव्यक्ति का नियमन वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा एक कोशिका में जीन को चालू या बंद किया जाता है।

  • यूकेरियोट्स में, जीन अभिव्यक्ति को कई स्तरों पर विनियमित किया जा सकता है:

    • अनुलेखन स्तर पर (प्राथमिक अनुलेख के निर्माण पर)।
    • प्रसंस्करण स्तर पर (स्प्लिसिंग, कैपिंग, टेलिंग)।
    • स्थानांतरण स्तर पर।
    • प्रोटीन के संशोधन के स्तर पर।
  • लैक ओपेरॉन (Lac Operon) - (जैकब और मोनोड द्वारा प्रस्तावित):

    • यह प्रोकैरियोट्स (ई. कोलाई) में जीन अभिव्यक्ति के नियमन का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

    • ओपेरॉन एक जीन समूह है जिसका अनुलेखन एक साथ होता है और एक सामान्य प्रमोटर और ऑपरेटर द्वारा नियंत्रित होता है।

    • लैक ओपेरॉन लैक्टोज के उपापचय में शामिल एंजाइमों के संश्लेषण को नियंत्रित करता है।

    • घटक:

      1. नियामक जीन (i gene): यह दमनकारी प्रोटीन (repressor protein) को कोड करता है।
      2. प्रमोटर (p): RNA पॉलीमरेज़ के जुड़ने का स्थल।
      3. ऑपरेटर (o): दमनकारी प्रोटीन के जुड़ने का स्थल।
      4. संरचनात्मक जीन (Structural genes):
        • z जीन: β-गैलेक्टोसिडेज़ (β-galactosidase) को कोड करता है, जो लैक्टोज को ग्लूकोज और गैलेक्टोज में तोड़ता है।
        • y जीन: परमीएज़ (permease) को कोड करता है, जो लैक्टोज को कोशिका में प्रवेश करने देता है।
        • a जीन: ट्रांसएसिटाइलेज़ (transacetylase) को कोड करता है।
    • लैक ओपेरॉन की कार्यप्रणाली:

      • लैक्टोज की अनुपस्थिति में (दमनकारी अवस्था):
        • नियामक जीन (i) दमनकारी प्रोटीन का संश्लेषण करता है।
        • दमनकारी प्रोटीन ऑपरेटर क्षेत्र से जुड़ता है।
        • यह RNA पॉलीमरेज़ को प्रमोटर से संरचनात्मक जीन तक जाने से रोकता है।
        • इस प्रकार, संरचनात्मक जीन का अनुलेखन नहीं होता है, और एंजाइमों का संश्लेषण नहीं होता है।
      • लैक्टोज की उपस्थिति में (प्रेरित अवस्था):
        • लैक्टोज (या इसका व्युत्पन्न एलोलैक्टोज) एक प्रेरक (inducer) के रूप में कार्य करता है।
        • प्रेरक दमनकारी प्रोटीन से जुड़ता है और उसके आकार को बदल देता है, जिससे वह ऑपरेटर से नहीं जुड़ पाता।
        • RNA पॉलीमरेज़ प्रमोटर से जुड़ता है और संरचनात्मक जीन (z, y, a) का अनुलेखन करता है।
        • β-गैलेक्टोसिडेज़, परमीएज़ और ट्रांसएसिटाइलेज़ का संश्लेषण होता है, जिससे लैक्टोज का उपापचय होता है।

9. मानव जीनोम परियोजना (Human Genome Project - HGP)

  • यह एक मेगा-परियोजना थी जिसे 1990 में शुरू किया गया था और 2003 में पूरा किया गया।
  • लक्ष्य:
    • मानव DNA में सभी ~30,000 जीनों की पहचान करना।
    • मानव DNA बनाने वाले 3 बिलियन क्षार युग्मों के अनुक्रम को निर्धारित करना।
    • जानकारी को डेटाबेस में संग्रहीत करना।
    • डेटा विश्लेषण के लिए उपकरण विकसित करना।
    • परियोजना से उत्पन्न होने वाले नैतिक, कानूनी और सामाजिक मुद्दों (ELSI) को संबोधित करना।
  • कार्यप्रणाली:
    • अभिव्यक्त अनुक्रम टैग (Expressed Sequence Tags - ESTs): सभी जीनों की पहचान करना जो RNA के रूप में व्यक्त होते हैं।
    • अनुक्रमण एनोटेशन (Sequence Annotation): पूरे जीनोम का अनुक्रमण करना और फिर विभिन्न क्षेत्रों के कार्यों को निर्धारित करना।
  • विशेषताएं (Salient Features of Human Genome):
    • मानव जीनोम में 3164.7 मिलियन क्षार युग्म होते हैं।
    • औसत जीन में 3000 क्षार होते हैं, लेकिन सबसे बड़ा ज्ञात मानव जीन डिस्ट्रोफिन (Dystrophin) है जिसमें 2.4 मिलियन क्षार होते हैं।
    • कुल जीनों का लगभग 99.9% क्षार अनुक्रम सभी मनुष्यों में समान होता है।
    • लगभग 50% से अधिक जीन का कार्य अज्ञात है।
    • मानव जीनोम का 2% से भी कम प्रोटीन को कोड करता है।
    • जीनोम का एक बड़ा हिस्सा दोहराए जाने वाले अनुक्रमों (repetitive sequences) से बना होता है, जिनका कोई प्रत्यक्ष कोडिंग कार्य नहीं होता है।
    • क्रोमोसोम 1 में सबसे अधिक जीन (2968) होते हैं, और Y क्रोमोसोम में सबसे कम (231) होते हैं।
    • एकल न्यूक्लियोटाइड बहुरूपता (Single Nucleotide Polymorphisms - SNPs) नामक लगभग 1.4 मिलियन स्थान हैं, जो व्यक्तियों के बीच DNA अनुक्रम में एकल क्षार अंतर का प्रतिनिधित्व करते हैं।

10. DNA फिंगरप्रिंटिंग (DNA Fingerprinting)

  • यह एलेक जेफ्रीज़ (Alec Jeffreys) द्वारा विकसित एक तकनीक है।

  • सिद्धांत: यह इस विचार पर आधारित है कि किसी भी दो व्यक्तियों (जुड़वां को छोड़कर) के DNA अनुक्रम समान नहीं होते हैं। विशेष रूप से, DNA में कुछ विशिष्ट अनुक्रम होते हैं जिन्हें पुनरावृत्ति DNA (repetitive DNA) कहते हैं।

    • ये पुनरावृत्ति अनुक्रम छोटे DNA खंड होते हैं जो जीनोम में कई बार दोहराए जाते हैं।
    • इन पुनरावृत्ति अनुक्रमों में, VNTRs (Variable Number of Tandem Repeats) नामक एक विशिष्ट प्रकार होता है। ये छोटे DNA खंड होते हैं जो व्यक्ति-दर-व्यक्ति भिन्न होते हैं और अत्यधिक बहुरूपी (polymorphic) होते हैं।
    • VNTRs की संख्या और व्यवस्था प्रत्येक व्यक्ति के लिए अद्वितीय होती है, जिससे यह एक "फिंगरप्रिंट" के रूप में कार्य करता है।
  • प्रक्रिया (Steps):

    1. DNA का पृथक्करण (Isolation of DNA): किसी भी कोशिका (रक्त, बाल, त्वचा, शुक्राणु) से DNA को अलग करना।
    2. प्रतिबंध एंडोन्यूक्लिएज़ द्वारा पाचन (Digestion by Restriction Endonucleases): DNA को प्रतिबंध एंजाइमों का उपयोग करके छोटे-छोटे खंडों में काटा जाता है।
    3. जेल इलेक्ट्रोफोरेसिस (Gel Electrophoresis): DNA खंडों को उनके आकार के अनुसार अलग किया जाता है। छोटे खंड तेजी से आगे बढ़ते हैं।
    4. सदर्न ब्लॉटिंग (Southern Blotting): जेल से अलग किए गए DNA खंडों को नायलॉन या नाइट्रोसेल्युलोज झिल्ली पर स्थानांतरित किया जाता है।
    5. संकरण (Hybridisation): झिल्ली को एक रेडियोधर्मी DNA प्रोब (जो VNTR अनुक्रमों के पूरक होते हैं) के साथ संकरित किया जाता है।
    6. ऑटोरेडियोग्राफी (Autoradiography): प्रोब से जुड़े DNA खंडों का पता लगाने के लिए एक्स-रे फिल्म का उपयोग किया जाता है। यह फिल्म पर एक विशिष्ट पैटर्न (बैंड) उत्पन्न करता है, जो DNA फिंगरप्रिंट होता है।
  • अनुप्रयोग (Applications):

    • फोरेंसिक विज्ञान (Forensic science): अपराध स्थल से प्राप्त नमूनों (रक्त, वीर्य) से संदिग्धों की पहचान करना।
    • पितृत्व विवाद (Paternity disputes): जैविक माता-पिता की पहचान करना।
    • आनुवंशिक रोगों का निदान (Diagnosis of genetic diseases): कुछ आनुवंशिक विकारों से जुड़े बहुरूपताओं की पहचान करना।
    • जैव विविधता का अध्ययन और विकासवादी संबंध (Biodiversity studies and evolutionary relationships)।

बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions - MCQs)

  1. फ्रेडरिक ग्रिफिथ ने अपने रूपांतरण प्रयोगों में किस जीवाणु का उपयोग किया था?
    a) एस्केरिचिया कोलाई (Escherichia coli)
    b) स्ट्रेप्टोकोकस न्यूमोनी (Streptococcus pneumoniae)
    c) लैक्टोबैसिलस (Lactobacillus)
    d) साल्मोनेला टाइफी (Salmonella typhi)

  2. डीऑक्सीराइबोन्यूक्लियोटाइड के तीन घटक कौन से हैं?
    a) नाइट्रोजनी क्षार, राइबोज शर्करा, फॉस्फेट समूह
    b) नाइट्रोजनी क्षार, डीऑक्सीराइबोज शर्करा, फॉस्फेट समूह
    c) नाइट्रोजनी क्षार, अमीनो अम्ल, फॉस्फेट समूह
    d) नाइट्रोजनी क्षार, राइबोज शर्करा, सल्फेट समूह

  3. DNA के डबल हेलिक्स मॉडल में, एडेनिन (A) हमेशा किसके साथ युग्मित होता है?
    a) गुआनिन (G)
    b) साइटोसिन (C)
    c) थाइमिन (T)
    d) यूरेसिल (U)

  4. मेसेल्सन और स्टाहल के प्रयोग ने DNA प्रतिकृति के किस मॉडल की पुष्टि की?
    a) संरक्षी (Conservative)
    b) अर्ध-संरक्षी (Semi-conservative)
    c) विसरणीय (Dispersive)
    d) गैर-संरक्षी (Non-conservative)

  5. मानव कोशिका में DNA पैकेजिंग में कौन से प्रोटीन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं?
    a) एंजाइम
    b) हिस्टोन
    c) एक्टिन
    d) मायोसिन

  6. अनुलेखन के दौरान, DNA के किस स्ट्रैंड का उपयोग RNA संश्लेषण के लिए टेम्पलेट के रूप में किया जाता है?
    a) कोडिंग स्ट्रैंड (5'→3')
    b) टेम्पलेट स्ट्रैंड (3'→5')
    c) दोनों स्ट्रैंड
    d) कोई भी स्ट्रैंड नहीं

  7. निम्नलिखित में से कौन सा कोडॉन प्रोटीन संश्लेषण को समाप्त करने वाला स्टॉप कोडॉन नहीं है?
    a) UAA
    b) UAG
    c) UGA
    d) AUG

  8. लैक ओपेरॉन में, नियामक जीन (i जीन) किसका संश्लेषण करता है?
    a) प्रेरक (Inducer)
    b) दमनकारी प्रोटीन (Repressor protein)
    c) β-गैलेक्टोसिडेज़
    d) परमीएज़

  9. मानव जीनोम परियोजना का एक मुख्य लक्ष्य क्या था?
    a) मानव में सभी प्रोटीन की संरचना का निर्धारण करना।
    b) मानव DNA में सभी जीनों की पहचान करना और उनके अनुक्रम को निर्धारित करना।
    c) सभी मानव रोगों का इलाज खोजना।
    d) नए मानव क्लोन बनाना।

  10. DNA फिंगरप्रिंटिंग में, VNTRs का पूर्ण रूप क्या है?
    a) वेरीफाइड न्यूक्लियोटाइड टैंडम रिपीट
    b) वेरिएबल नंबर ऑफ टैंडम रिपीट
    c) वायबल न्यूक्लियोटाइड ट्रांसक्रिप्शन रीजन
    d) वाइटल न्यूक्लियोटाइड टैंडम रीजन


उत्तरमाला (Answer Key):

  1. b
  2. b
  3. c
  4. b
  5. b
  6. b
  7. d
  8. b
  9. b
  10. b

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