Class 12 Biology Notes Chapter 8 (मानव स्वास्थ्य तथा रोग) – Jeev Vigyan Book

Jeev Vigyan
प्रिय विद्यार्थियों,

आज हम कक्षा 12 जीव विज्ञान के अध्याय 8 'मानव स्वास्थ्य तथा रोग' का विस्तृत अध्ययन करेंगे, जो आपकी सरकारी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस अध्याय में हम मानव स्वास्थ्य, विभिन्न प्रकार के रोगों, उनकी रोकथाम, प्रतिरक्षा तंत्र और मादक पदार्थों के दुरुपयोग जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।


अध्याय 8: मानव स्वास्थ्य तथा रोग (Human Health and Disease)

I. स्वास्थ्य (Health)

स्वास्थ्य केवल रोग या दुर्बलता का अभाव नहीं है, बल्कि यह शारीरिक, मानसिक और सामाजिक कल्याण की स्थिति है। एक स्वस्थ व्यक्ति अधिक कार्यकुशल होता है और जीवन का बेहतर आनंद लेता है।

  • स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले कारक:
    • आनुवंशिक विकार: माता-पिता से विरासत में मिले दोष।
    • संक्रमण: विभिन्न रोगजनकों द्वारा होने वाले रोग।
    • जीवन शैली: भोजन, पानी, आराम, व्यायाम और आदतें।
  • अच्छे स्वास्थ्य के लिए आवश्यकताएँ:
    • संतुलित आहार
    • व्यक्तिगत स्वच्छता
    • नियमित व्यायाम
    • रोगों और उनके संचरण के बारे में जागरूकता
    • टीकाकरण
    • अपशिष्ट निपटान का उचित प्रबंधन
    • रोगवाहकों का नियंत्रण
    • स्वच्छ भोजन और पानी

II. रोग (Diseases)

जब शरीर के एक या अधिक अंगों या प्रणालियों के सामान्य कार्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, तो उसे रोग कहते हैं।

  • रोगों के प्रकार:
    1. संक्रामक रोग (Infectious Diseases): वे रोग जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में आसानी से फैलते हैं।
      • उदाहरण: एड्स, सामान्य जुकाम, मलेरिया, टाइफाइड, निमोनिया।
    2. असंक्रामक रोग (Non-infectious Diseases): वे रोग जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलते।
      • उदाहरण: कैंसर, मधुमेह, एलर्जी, उच्च रक्तचाप।

III. सामान्य मानव रोग (Common Human Diseases)

A. जीवाणु जनित रोग (Bacterial Diseases):

  1. टाइफाइड (Typhoid):
    • कारक: जीवाणु Salmonella typhi
    • संचरण: दूषित भोजन और पानी के माध्यम से।
    • लक्षण: लगातार उच्च बुखार (39°C से 40°C), कमजोरी, पेट दर्द, कब्ज, सिरदर्द, भूख न लगना। गंभीर मामलों में आंतों में छिद्र और मृत्यु भी हो सकती है।
    • पुष्टि: विडाल परीक्षण (Widal test)।
  2. निमोनिया (Pneumonia):
    • कारक: जीवाणु Streptococcus pneumoniae और Haemophilus influenzae
    • प्रभावित अंग: फेफड़ों के वायुकोष्ठ (एल्वियोली) संक्रमित होते हैं, जिससे वे द्रव से भर जाते हैं और श्वसन में गंभीर समस्याएँ आती हैं।
    • संचरण: संक्रमित व्यक्ति द्वारा खांसने या छींकने से निकलने वाली बूंदों/एरोसोल का साँस लेना।
    • लक्षण: बुखार, ठंड लगना, खांसी, सिरदर्द। गंभीर मामलों में होंठ और उंगलियों के नाखून नीले पड़ सकते हैं।

B. विषाणु जनित रोग (Viral Diseases):

  1. सामान्य जुकाम (Common Cold):
    • कारक: राइनोवायरस (Rhinoviruses)।
    • प्रभावित अंग: नाक और श्वसन पथ (लेकिन फेफड़ों को नहीं)।
    • संचरण: संक्रमित व्यक्ति द्वारा खांसने या छींकने से निकलने वाली बूंदों/एरोसोल का साँस लेना, या दूषित वस्तुओं (दरवाजे के हैंडल, किताबों) को छूना।
    • लक्षण: नाक बंद होना, गले में खराश, खांसी, सिरदर्द, थकान, जो आमतौर पर 3-7 दिनों तक रहते हैं।

C. प्रोटोजोआ जनित रोग (Protozoan Diseases):

  1. मलेरिया (Malaria):
    • कारक: प्रोटोजोआ Plasmodium (P. vivax, P. malariae, P. falciparum, P. ovale)। P. falciparum सबसे गंभीर और घातक मलेरिया का कारण बनता है।
    • वाहक: मादा Anopheles मच्छर।
    • जीवन चक्र:
      • संक्रमित मादा Anopheles मच्छर के काटने पर, स्पोरोजोइट (संक्रामक रूप) मानव शरीर में प्रवेश करते हैं।
      • स्पोरोजोइट यकृत कोशिकाओं में जाते हैं, अलैंगिक रूप से गुणा करते हैं।
      • यकृत कोशिकाओं से निकलकर लाल रक्त कोशिकाओं (RBCs) पर हमला करते हैं।
      • RBCs में अलैंगिक रूप से गुणा करते हैं, जिससे RBCs फट जाती हैं। RBCs के फटने से एक विषैला पदार्थ हीमोजोइन निकलता है, जो ठंड लगने और तेज बुखार के आवर्ती चक्र (हर 3-4 दिन में) का कारण बनता है।
      • कुछ परजीवी RBCs में युग्मककोशिका (gametocytes) में विकसित होते हैं।
      • जब एक मच्छर संक्रमित व्यक्ति को काटता है, तो युग्मककोशिका मच्छर के शरीर में प्रवेश करते हैं।
      • मच्छर की आंत में निषेचन और विकास होता है।
      • स्पोरोजोइट मच्छर की लार ग्रंथियों में जमा होते हैं, और चक्र दोहराया जाता है।
  2. अमीबता / अमीबी अतिसार (Amoebiasis / Amoebic Dysentery):
    • कारक: प्रोटोजोआ Entamoeba histolytica
    • संचरण: दूषित भोजन और पानी (मल-मौखिक मार्ग)। घरेलू मक्खियाँ इस रोग की वाहक होती हैं।
    • लक्षण: कब्ज, पेट दर्द और ऐंठन, मल में अत्यधिक श्लेष्मा और रक्त के थक्के।

D. कृमि जनित रोग (Helminthic Diseases):

  1. एस्केरियासिस (Ascariasis):
    • कारक: गोलकृमि Ascaris lumbricoides
    • संचरण: दूषित पानी, सब्जियाँ, फल (कृमि के अंडे) के माध्यम से।
    • लक्षण: आंतरिक रक्तस्राव, पेशीय दर्द, बुखार, एनीमिया, आंतों के मार्ग में रुकावट।
  2. फाइलेरिया / हाथीपाँव (Filariasis / Elephantiasis):
    • कारक: फाइलेरियल कृमि Wuchereria bancrofti और W. malayi
    • वाहक: मादा Culex मच्छर।
    • प्रभावित अंग: लसीका वाहिकाएँ (विशेषकर निचले अंगों की)।
    • लक्षण: कई वर्षों तक अंगों (विशेषकर पैरों) और जननांगों में पुरानी सूजन, जिससे विकृति आती है।

E. कवक जनित रोग (Fungal Diseases):

  1. दाद (Ringworm):
    • कारक: कवक Microsporum, Trichophyton, Epidermophyton
    • लक्षण: त्वचा, नाखून और सिर पर शुष्क, शल्कीय घाव, तीव्र खुजली।
    • संचरण: संक्रमित मिट्टी से या संक्रमित व्यक्ति/कपड़ों/कंघी से।
    • विकास के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ: गर्मी और नमी।

IV. रोगों की रोकथाम और नियंत्रण (Prevention and Control of Diseases)

  • व्यक्तिगत स्वच्छता: शरीर को साफ रखना, स्वच्छ भोजन और पानी का सेवन।
  • सार्वजनिक स्वच्छता: अपशिष्ट निपटान, जल स्रोतों की सफाई, मल-मूत्र का उचित निपटान।
  • रोगवाहकों का नियंत्रण: मच्छरों के प्रजनन स्थलों को नष्ट करना (पानी जमा न होने देना, कीटनाशकों का उपयोग, जैविक नियंत्रण जैसे गैंबूसिया मछली)।
  • टीकाकरण (Vaccination): विशिष्ट रोगों के प्रति प्रतिरक्षा प्रदान करना।
  • एंटीबायोटिक्स और अन्य दवाएं।

V. प्रतिरक्षा (Immunity)

प्रतिरक्षा शरीर की रोगजनक जीवों से लड़ने की क्षमता है।

  • प्रतिरक्षा के प्रकार:
    1. सहज प्रतिरक्षा (Innate Immunity):
      • यह जन्म से मौजूद होती है और गैर-विशिष्ट होती है (किसी भी रोगजनक के खिलाफ समान रूप से कार्य करती है)।
      • इसमें चार प्रकार के अवरोध शामिल हैं:
        • शारीरिक अवरोध (Physical barriers): त्वचा, श्लेष्मा झिल्ली (श्वसन, जठरांत्र और मूत्र-जननांग पथ में)।
        • कायिकीय अवरोध (Physiological barriers): आमाशय में अम्ल, लार, आँसू।
        • कोशिकीय अवरोध (Cellular barriers): PMNLs (पॉलीमॉर्फोन्यूक्लियर ल्यूकोसाइट्स - न्यूट्रोफिल), मैक्रोफेज, प्राकृतिक मारक (NK) कोशिकाएँ।
        • साइटोकाइन अवरोध (Cytokine barriers): विषाणु संक्रमित कोशिकाएँ इंटरफेरॉन नामक प्रोटीन स्रावित करती हैं, जो अन्य स्वस्थ कोशिकाओं को आगे के विषाणु संक्रमण से बचाती हैं।
    2. उपार्जित प्रतिरक्षा (Acquired Immunity):
      • यह जीवनकाल में विकसित होती है और रोगजनक-विशिष्ट होती है।
      • यह स्मृति पर आधारित होती है (पिछली मुठभेड़ों को याद रखती है)।
      • प्राथमिक अनुक्रिया (Primary response): पहली बार रोगजनक के संपर्क में आने पर, कम तीव्रता वाली।
      • द्वितीयक अनुक्रिया (Secondary response): बाद में उसी रोगजनक के संपर्क में आने पर, उच्च तीव्रता वाली और तेजी से होती है।
      • लिम्फोसाइट्स (Lymphocytes):
        • B-लिम्फोसाइट्स (B-कोशिकाएँ): एंटीबॉडी (प्रतिरक्षी) नामक प्रोटीन उत्पन्न करते हैं, जो रक्त में रोगजनकों से लड़ते हैं।
        • T-लिम्फोसाइट्स (T-कोशिकाएँ): B-कोशिकाओं को एंटीबॉडी बनाने में मदद करते हैं और स्वयं रोगजनकों को नहीं मारते।
      • एंटीबॉडी (Antibodies):
        • Y-आकार के प्रोटीन अणु।
        • प्रत्येक एंटीबॉडी अणु में चार पॉलीपेप्टाइड श्रृंखलाएँ होती हैं: 2 हल्की (L) और 2 भारी (H)।
        • विभिन्न प्रकार: IgA, IgM, IgE, IgG, IgD।
        • IgG: सबसे प्रचुर एंटीबॉडी, प्लेसेंटा को पार कर भ्रूण को प्रतिरक्षा प्रदान करती है।
        • IgA: कोलोस्ट्रम (माँ के दूध) में पाई जाती है, नवजात शिशु को प्रतिरक्षा प्रदान करती है।
        • IgE: एलर्जी प्रतिक्रियाओं में शामिल।
      • कोशिका-मध्यस्थ प्रतिरक्षा (Cell-mediated Immunity - CMI): T-लिम्फोसाइट्स द्वारा प्रदान की जाती है। अंग प्रत्यारोपण अस्वीकृति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
      • सक्रिय और निष्क्रिय प्रतिरक्षा (Active and Passive Immunity):
        • सक्रिय प्रतिरक्षा: शरीर अपनी एंटीबॉडी बनाता है (संक्रमण या टीकाकरण के बाद)। धीमी लेकिन लंबे समय तक चलने वाली।
        • निष्क्रिय प्रतिरक्षा: तैयार एंटीबॉडी सीधे शरीर में डाले जाते हैं (जैसे कोलोस्ट्रम, एंटी-टिटनेस सीरम)। तेज लेकिन कम समय तक चलने वाली।

VI. एलर्जी (Allergy)

यह पर्यावरण में मौजूद कुछ प्रतिजनों (एलर्जन) के प्रति प्रतिरक्षा प्रणाली की अतिरंजित अनुक्रिया है।

  • एलर्जन: परागकण, धूल के कण, पशुओं की रूसी, कुछ खाद्य पदार्थ।
  • एंटीबॉडी: IgE एंटीबॉडी।
  • लक्षण: छींकना, आँखों से पानी आना, साँस लेने में कठिनाई, त्वचा पर चकत्ते।
  • कारण: मास्ट कोशिकाओं द्वारा हिस्टामाइन और सेरोटोनिन जैसे रसायनों का स्राव।
  • उपचार: एंटीहिस्टामाइन, एड्रेनालाईन, स्टेरॉयड।

VII. स्वप्रतिरक्षा (Autoimmunity)

यह एक ऐसी स्थिति है जहाँ प्रतिरक्षा प्रणाली अपनी ही कोशिकाओं और ऊतकों को विदेशी मानकर उन पर हमला करती है।

  • कारण: अभी पूरी तरह से ज्ञात नहीं।
  • उदाहरण: रूमेटाइड आर्थराइटिस।

VIII. प्रतिरक्षा तंत्र के विकार (Disorders of the Immune System)

A. एड्स (AIDS - Acquired ImmunoDeficiency Syndrome):

  • कारक: HIV (Human Immunodeficiency Virus) - एक रेट्रोवायरस।
  • संचरण:
    • संक्रमित व्यक्ति के साथ यौन संपर्क।
    • दूषित रक्त और रक्त उत्पादों का आधान।
    • संक्रमित सुइयों और सिरिंजों का साझा उपयोग (विशेषकर नशीले पदार्थों के सेवन में)।
    • संक्रमित माँ से बच्चे में (प्लेसेंटा के माध्यम से)।
  • HIV लक्ष्य कोशिकाएँ: सहायक T-लिम्फोसाइट्स (Helper T-cells) और मैक्रोफेज।
  • कार्यप्रणाली:
    • विषाणु मैक्रोफेज में प्रवेश करता है, जहाँ इसका RNA जीनोम रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेज एंजाइम द्वारा DNA में प्रतिकृत होता है। यह वायरल DNA मेजबान कोशिका DNA में एकीकृत हो जाता है। मैक्रोफेज इस प्रकार HIV फैक्ट्री के रूप में कार्य करते हैं।
    • विषाणु सहायक T-कोशिकाओं में प्रवेश करते हैं, गुणा करते हैं, और उन्हें नष्ट कर देते हैं।
    • सहायक T-कोशिकाओं की संख्या में लगातार कमी से प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो जाती है, जिससे व्यक्ति विभिन्न संक्रमणों (जैसे माइकोबैक्टीरियम, टोक्सोप्लाज्मा, आदि) के प्रति अतिसंवेदनशील हो जाता है।
  • लक्षण: बुखार, दस्त, वजन घटना। प्रतिरक्षा कमजोर होने से अवसरवादी संक्रमण होते हैं।
  • निदान: ELISA (Enzyme-Linked Immunosorbent Assay) परीक्षण।
  • उपचार: एंटी-रेट्रोवायरल दवाएं (पूरी तरह से ठीक नहीं करतीं, लेकिन जीवनकाल बढ़ाती हैं)।
  • रोकथाम: सुरक्षित यौन संबंध, सुइयों का साझा उपयोग न करना, रक्त परीक्षण।

B. कैंसर (Cancer):

  • परिभाषा: कोशिकाओं का अनियंत्रित और असामान्य विभाजन, जिससे ट्यूमर (गाँठ) बनता है।
  • सामान्य कोशिकाओं का गुण: संपर्क संदमन (Contact inhibition) - एक-दूसरे के संपर्क में आने पर विभाजन रुक जाता है। कैंसर कोशिकाओं में यह गुण नहीं होता, जिससे वे अनियंत्रित रूप से बढ़ती रहती हैं।
  • ट्यूमर के प्रकार:
    1. सुदम्य ट्यूमर (Benign Tumors): अपने मूल स्थान तक सीमित रहते हैं, अन्य भागों में नहीं फैलते, आमतौर पर कम हानिकारक होते हैं।
    2. दुर्दम्य ट्यूमर (Malignant Tumors): तेजी से बढ़ते हैं, आसपास के सामान्य ऊतकों पर हमला करते हैं। कैंसर कोशिकाएं टूटकर रक्त के माध्यम से दूर के स्थानों पर पहुँचती हैं और नए ट्यूमर बनाती हैं। इस गुण को मेटास्टेसिस (Metastasis) कहते हैं, जो कैंसर का सबसे खतरनाक गुण है।
  • कैंसर के कारण (कार्सिनोजन - Carcinogens):
    • भौतिक कारक: आयनीकृत विकिरण (X-किरणें, गामा किरणें), गैर-आयनीकृत विकिरण (UV किरणें) - ये DNA को क्षति पहुँचाते हैं।
    • रासायनिक कारक: तंबाकू का धुआँ (फेफड़ों का कैंसर)।
    • जैविक कारक: ऑन्कोजेनिक विषाणु (Oncogenic viruses) - इनमें वायरल ऑन्कोजीन होते हैं।
    • कोशिकीय ऑन्कोजीन (Cellular oncogenes / प्रोटो-ऑन्कोजीन): सामान्य कोशिकाओं में होते हैं, कुछ परिस्थितियों में सक्रिय होकर कैंसर का कारण बनते हैं।
  • कैंसर का पता लगाना:
    • बायोप्सी (Biopsy) और हिस्टोपैथोलॉजिकल अध्ययन।
    • रक्त और अस्थि मज्जा परीक्षण (ल्यूकेमिया के लिए)।
    • विकिरण इमेजिंग (रेडियोग्राफी, CT स्कैन, MRI)।
    • कैंसर-विशिष्ट प्रतिरक्षी (एंटीबॉडी) का उपयोग।
  • उपचार:
    • सर्जरी (Surgery)
    • विकिरण चिकित्सा (Radiotherapy): कैंसर कोशिकाओं को मारने के लिए।
    • कीमोथेरेपी (Chemotherapy): कीमोथेरेपी दवाएं, कुछ के दुष्प्रभाव (बालों का झड़ना, एनीमिया)।
    • प्रतिरक्षा चिकित्सा (Immunotherapy): जैविक अनुक्रिया संशोधक (जैसे अल्फा-इंटरफेरॉन) का उपयोग, प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय करना।

IX. ड्रग और अल्कोहल का दुरुपयोग (Drug and Alcohol Abuse)

  • ड्रग्स (Drugs):

    1. ओपिओइड्स (Opioids):
      • स्रोत: अफीम पोस्त (Papaver somniferum) के लेटेक्स से प्राप्त।
      • उदाहरण: मॉर्फिन, हेरोइन (स्मैक), कोडीन।
      • हेरोइन: मॉर्फिन का डायएसिटाइलेशन। सफेद, गंधहीन, कड़वा क्रिस्टलीय यौगिक।
      • सेवन: सूँघना, इंजेक्शन।
      • प्रभाव: केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (CNS) और जठरांत्र संबंधी मार्ग में ओपिओइड रिसेप्टर्स से बंधते हैं। ये अवसादक (depressant) होते हैं, शरीर के कार्यों को धीमा करते हैं।
    2. कैनाबिनोइड्स (Cannabinoids):
      • स्रोत: भांग का पौधा (Cannabis sativa) के पुष्पक्रम से।
      • उदाहरण: गांजा, चरस, हशीश, मारिजुआना।
      • सेवन: साँस लेना, मौखिक रूप से।
      • प्रभाव: मस्तिष्क में कैनाबिनोइड रिसेप्टर्स से बंधते हैं। मुख्य रूप से हृदय प्रणाली पर प्रभाव डालते हैं।
    3. कोका एल्कलॉइड (Cocaine/Crack):
      • स्रोत: कोका पौधा (Erythroxylum coca)।
      • सेवन: सूँघना।
      • प्रभाव: डोपामाइन नामक न्यूरोट्रांसमीटर के परिवहन में बाधा डालता है। CNS उत्तेजक, यूफोरिया (अत्यधिक खुशी) और बढ़ी हुई ऊर्जा का एहसास कराता है। अत्यधिक खुराक से मतिभ्रम (hallucinations) हो सकता है।
    4. अन्य ड्रग्स:
      • बार्बिट्यूरेट्स, एम्फेटामाइन, बेंजोडायजेपाइन - ये अवसाद और अनिद्रा के इलाज के लिए उपयोग किए जाते हैं, लेकिन इनका दुरुपयोग भी होता है।
      • LSD (लाइजरिक एसिड डाइएथिलामाइड) - एक शक्तिशाली मतिभ्रम पैदा करने वाला।
      • धतूरा और एट्रोपा बेलाडोना जैसे पौधे भी मतिभ्रम गुण वाले होते हैं।
      • एनाबॉलिक स्टेरॉयड: एथलीटों द्वारा मांसपेशियों की ताकत बढ़ाने और प्रदर्शन सुधारने के लिए दुरुपयोग किया जाता है।
        • दुष्प्रभाव: मुँहासे, मूड स्विंग, अवसाद, महिलाओं में मर्दाना लक्षण (पुरुषों जैसी आवाज, चेहरे पर बाल), पुरुषों में शुक्राणु उत्पादन में कमी, गुर्दे और यकृत की शिथिलता।
  • धूम्रपान (Smoking):

    • स्रोत: तंबाकू (Nicotiana tabacum)।
    • घटक: निकोटीन (एक एल्कलॉइड)।
    • प्रभाव: एड्रेनालाईन और नॉर-एड्रेनालाईन का स्राव बढ़ाता है, जिससे रक्तचाप और हृदय गति बढ़ जाती है।
    • हानिकारक प्रभाव: फेफड़ों का कैंसर, मूत्र मूत्राशय और गले का कैंसर, ब्रोंकाइटिस, वातस्फीति, कोरोनरी हृदय रोग, गैस्ट्रिक अल्सर। रक्त में CO की मात्रा बढ़ाता है, जिससे ऑक्सीजन की कमी होती है।
  • मादक पदार्थों का दुरुपयोग (Drug Abuse):

    • किशोरावस्था में अधिक आम।
    • कारण: जिज्ञासा, रोमांच, साथियों का दबाव, शिक्षा में तनाव, अवसाद।
    • नशीली दवाओं पर निर्भरता (Dependence): शरीर की मनोवैज्ञानिक और शारीरिक लत।
    • विड्रॉल सिंड्रोम (Withdrawal Syndrome): जब ड्रग लेना बंद कर दिया जाता है, तो अप्रिय लक्षण (चिंता, कंपकंपी, मतली, पसीना) उत्पन्न होते हैं।
    • दुष्प्रभाव:
      • लापरवाही, आक्रामकता, सामाजिक समायोजन में कमी।
      • शैक्षणिक प्रदर्शन में गिरावट।
      • परिवार और दोस्तों से अलगाव।
      • वजन घटना, भूख न लगना।
      • हेपेटाइटिस B, एड्स (IV ड्रग्स के साझा उपयोग से)।
      • महिलाओं में मासिक धर्म चक्र में अनियमितता।
  • रोकथाम और नियंत्रण:

    • माता-पिता और साथियों का सहयोग।
    • शिक्षा और परामर्श।
    • खतरों के प्रति जागरूकता।
    • पेशेवर और चिकित्सा सहायता।

बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions - MCQs)

निम्नलिखित 10 बहुविकल्पीय प्रश्न इस अध्याय की आपकी समझ का मूल्यांकन करने में सहायक होंगे:

  1. टाइफाइड रोग की पुष्टि के लिए आमतौर पर कौन सा परीक्षण किया जाता है?
    a) ELISA परीक्षण
    b) विडाल परीक्षण
    c) PCR परीक्षण
    d) वेस्टर्न ब्लॉट परीक्षण

  2. मलेरिया परजीवी (Plasmodium) का वह संक्रामक रूप जो मानव शरीर में प्रवेश करता है, क्या कहलाता है?
    a) युग्मककोशिका (Gametocytes)
    b) स्पोरोजोइट (Sporozoites)
    c) मीरोजोइट (Merozoites)
    d) ट्रोफोजोइट (Trophozoites)

  3. मलेरिया में ठंड लगने और तेज बुखार के आवर्ती चक्र का कारण कौन सा विषैला पदार्थ है?
    a) हीमोग्लोबिन
    b) हीमोजोइन
    c) क्लोरोक्विन
    d) इंटरफेरॉन

  4. HIV मुख्य रूप से किस प्रकार की कोशिकाओं पर हमला करता है, जिससे मानव शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो जाती है?
    a) B-लिम्फोसाइट्स
    b) सहायक T-लिम्फोसाइट्स
    c) प्राकृतिक मारक (NK) कोशिकाएँ
    d) मैक्रोफेज

  5. कैंसर कोशिकाओं का वह गुण क्या कहलाता है जिसके कारण वे अपने मूल स्थान से टूटकर शरीर के अन्य भागों में फैल जाती हैं और नए ट्यूमर बनाती हैं?
    a) संपर्क संदमन (Contact inhibition)
    b) मेटास्टेसिस (Metastasis)
    c) एंजीओजेनेसिस (Angiogenesis)
    d) एपोप्टोसिस (Apoptosis)

  6. हेरोइन नामक ओपिओइड ड्रग किस पौधे से प्राप्त होता है?
    a) Cannabis sativa
    b) Erythroxylum coca
    c) Papaver somniferum
    d) Atropa belladonna

  7. कैनाबिनोइड्स के रिसेप्टर्स मानव शरीर में मुख्य रूप से कहाँ पाए जाते हैं?
    a) हृदय प्रणाली में
    b) केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (मस्तिष्क) में
    c) जठरांत्र संबंधी मार्ग में
    d) फेफड़ों में

  8. निम्न में से कौन सा सहज प्रतिरक्षा (Innate Immunity) का एक शारीरिक अवरोध है?
    a) आमाशय में अम्ल
    b) लार
    c) त्वचा
    d) इंटरफेरॉन

  9. एलर्जी प्रतिक्रियाओं में कौन सी एंटीबॉडी शामिल होती है?
    a) IgG
    b) IgM
    c) IgA
    d) IgE

  10. एनाबॉलिक स्टेरॉयड के दुरुपयोग से पुरुषों में होने वाला एक संभावित दुष्प्रभाव क्या है?
    a) मासिक धर्म चक्र में अनियमितता
    b) मुँहासे
    c) शुक्राणु उत्पादन में कमी
    d) मर्दाना लक्षणों का विकास (जैसे चेहरे पर बाल)


उत्तर कुंजी:

  1. b
  2. b
  3. b
  4. b
  5. b
  6. c
  7. b
  8. c
  9. d
  10. c

मुझे आशा है कि ये विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपको 'मानव स्वास्थ्य तथा रोग' अध्याय को गहराई से समझने और आपकी परीक्षाओं की तैयारी में सहायता करेंगे। शुभकामनाएँ!

Read more