Class 12 Biology Notes Chapter 9 (खाद्य उत्पादन में वृद्धि की कार्यनीति) – Jeev Vigyan Book

प्रिय विद्यार्थियों,
आज हम कक्षा 12 जीव विज्ञान के अध्याय 9 'खाद्य उत्पादन में वृद्धि की कार्यनीति' का विस्तृत अध्ययन करेंगे, जो आपकी सरकारी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस अध्याय में हम उन विभिन्न रणनीतियों पर चर्चा करेंगे जिनके माध्यम से खाद्य उत्पादन को बढ़ाया जा सकता है, ताकि बढ़ती जनसंख्या की आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।
अध्याय 9: खाद्य उत्पादन में वृद्धि की कार्यनीति (Strategies for Enhancement in Food Production)
परिचय:
मानव जनसंख्या में तीव्र वृद्धि के कारण खाद्य उत्पादन में वृद्धि एक बड़ी चुनौती है। इस अध्याय में हम पशुपालन और पादप प्रजनन जैसी रणनीतियों पर ध्यान केंद्रित करेंगे, जिनका उद्देश्य खाद्य उत्पादन को बढ़ाना, उसकी गुणवत्ता में सुधार करना और रोगों के प्रति प्रतिरोधकता विकसित करना है।
I. पशुपालन (Animal Husbandry)
पशुपालन कृषि विज्ञान की वह शाखा है जो पशुधन के प्रजनन, पालन-पोषण और प्रबंधन से संबंधित है। इसका उद्देश्य मानव के लिए उपयोगी पशु उत्पादों जैसे दूध, अंडे, मांस, ऊन आदि का उत्पादन करना है। भारत में 70% से अधिक ग्रामीण आबादी पशुधन पर निर्भर है।
A. पशु प्रजनन (Animal Breeding)
पशु प्रजनन का उद्देश्य पशुओं की उपज में सुधार करना और वांछित गुणों वाले पशुओं का उत्पादन करना है।
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अंतःप्रजनन (Inbreeding):
- परिभाषा: एक ही नस्ल के अधिक निकट संबंधी पशुओं के बीच 4-6 पीढ़ियों तक संगम कराना।
- विधि: श्रेष्ठ नर और श्रेष्ठ मादा की पहचान कर उनका संगम कराया जाता है। संतति का मूल्यांकन किया जाता है और श्रेष्ठ नर व मादा का पुनः संगम कराया जाता है।
- लाभ:
- समयुग्मजता (Homozygosity) बढ़ती है, जिससे अवांछित गुणों को हटाया जा सकता है।
- वांछित गुणों का शुद्ध वंशक्रम (Pure line) विकसित होता है।
- उत्पादकता बढ़ती है।
- हानियाँ:
- लगातार अंतःप्रजनन से उर्वरता (fertility) और उत्पादकता (productivity) घट जाती है, जिसे अंतःप्रजनन अवसादन (Inbreeding Depression) कहते हैं।
- इस समस्या से बचने के लिए, अंतःप्रजनित पशुओं का संगम असंबद्ध श्रेष्ठ पशुओं से कराया जाता है, जिससे उर्वरता और उत्पादकता पुनः स्थापित हो जाती है।
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बहिःप्रजनन (Outbreeding):
- परिभाषा: असंबद्ध पशुओं के बीच संगम कराना।
- प्रकार:
- बहिःसंकरण (Out-crossing): एक ही नस्ल के असंबद्ध पशुओं के बीच संगम, जिनमें 4-6 पीढ़ियों तक कोई सामान्य पूर्वज न हो। यह अंतःप्रजनन अवसादन को दूर करने का सबसे अच्छा तरीका है।
- संकरण (Cross-breeding): दो भिन्न नस्लों के श्रेष्ठ नर और मादा के बीच संगम। इससे दोनों नस्लों के वांछित गुण संतति में आ जाते हैं।
- उदाहरण: हिसारडेल (Hissardale) भेड़ की नई नस्ल, जो बीकानेरी भेड़ी और मेरीनो रेम (भेड़) के संकरण से विकसित की गई है।
- अंतराजातीय संकरण (Inter-specific Hybridisation): दो भिन्न जातियों के नर और मादा पशुओं के बीच संगम।
- उदाहरण: खच्चर (Mule), जो नर गधे और मादा घोड़े के संकरण से उत्पन्न होता है। यह बंध्य (sterile) होता है।
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नियंत्रित प्रजनन विधियाँ (Controlled Breeding Methods):
- कृत्रिम गर्भाधान (Artificial Insemination - AI):
- श्रेष्ठ नर के वीर्य को एकत्र कर उसे कृत्रिम रूप से मादा के जनन मार्ग में प्रविष्ट कराया जाता है।
- वीर्य को हिमीकृत (frozen) करके लंबे समय तक भंडारित किया जा सकता है और लंबी दूरी तक ले जाया जा सकता है।
- इससे एक श्रेष्ठ नर का उपयोग हजारों मादाओं को गर्भाधान कराने के लिए किया जा सकता है।
- बहुअंडोत्सर्ग भ्रूण स्थानांतरण (Multiple Ovulation Embryo Transfer - MOET) प्रौद्योगिकी:
- उच्च दूध देने वाली नस्लों की मादाओं और उच्च गुणवत्ता वाले मांस देने वाले सांडों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए उपयोग की जाती है।
- प्रक्रिया:
- मादा को FSH (कूप उत्तेजक हॉर्मोन) जैसा हॉर्मोन दिया जाता है, जिससे उसमें एक चक्र में 6-8 अंडे उत्पन्न होते हैं (सामान्यतः एक अंडा)। इसे बहुअंडोत्सर्ग कहते हैं।
- मादा का या तो श्रेष्ठ सांड से संगम कराया जाता है या कृत्रिम गर्भाधान कराया जाता है।
- 8-32 कोशिकीय अवस्था में भ्रूण को शल्यक्रिया रहित (non-surgically) तरीके से मादा से निकालकर सरोगेट (किराए की) मादाओं में स्थानांतरित कर दिया जाता है।
- आनुवंशिक माता फिर से बहुअंडोत्सर्ग के लिए तैयार हो जाती है।
- लाभ: कम समय में उच्च आनुवंशिक गुणवत्ता वाले पशुओं की संख्या में वृद्धि की जा सकती है।
- कृत्रिम गर्भाधान (Artificial Insemination - AI):
B. मधुमक्खी पालन (Apiculture)
शहद और मोम के उत्पादन के लिए मधुमक्खियों का पालन।
- सबसे सामान्य प्रजाति: एपिस इंडिका (Apis indica)।
- उत्पाद:
- शहद: उच्च पोषक मान वाला भोजन और औषधीय उपयोग।
- मोम: सौंदर्य प्रसाधन और पॉलिश उद्योग में उपयोग।
- महत्व: मधुमक्खियाँ कई फसलों जैसे सूर्यमुखी, सरसों, सेब, नाशपाती आदि के लिए परागणक (pollinators) भी होती हैं, जिससे फसल उत्पादन बढ़ता है।
C. मत्स्य पालन (Pisciculture/Fisheries)
मछली, झींगा, केकड़े आदि को पकड़ना, उनका प्रसंस्करण और विपणन।
- मीठे पानी की मछलियाँ: रोहू (Rohu), कतला (Catla), मृगल (Mrigal)।
- खारे पानी की मछलियाँ: हिल्सा (Hilsa), सार्डिन (Sardine), मैकरेल (Mackerel), पॉम्फ्रेट (Pomfret)।
- जलीय कृषि (Aquaculture): जलीय पौधों और पशुओं का पालन।
- नीली क्रांति (Blue Revolution): मत्स्य उत्पादन में वृद्धि के लिए चलाए गए कार्यक्रम।
D. कुक्कुट फार्म प्रबंधन (Poultry Farm Management)
घरेलू पक्षियों (जैसे मुर्गी, बत्तख, टर्की, गीज़) का पालन-पोषण।
- उद्देश्य: मांस और अंडों का उत्पादन।
- महत्वपूर्ण पहलू:
- रोग मुक्त और उपयुक्त नस्लों का चयन।
- उचित और सुरक्षित फार्म की स्थिति।
- उचित भोजन और पानी।
- स्वच्छता और स्वास्थ्य देखभाल।
- रोगों और कीटों से बचाव।
II. पादप प्रजनन (Plant Breeding)
पादप प्रजनन विज्ञान की वह शाखा है जो पौधों की नस्लों में सुधार करके उन्हें मानव के लिए अधिक उपयोगी बनाती है। इसका उद्देश्य वांछित गुणों वाले पौधों की नई किस्में विकसित करना है।
A. पादप प्रजनन के मुख्य उद्देश्य:
- उच्च उपज: प्रति इकाई क्षेत्र में अधिक उत्पादन।
- रोग प्रतिरोधकता: कवक, जीवाणु और विषाणु रोगों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता।
- कीट प्रतिरोधकता: कीटों और पीड़कों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता।
- बेहतर गुणवत्ता: प्रोटीन, तेल, विटामिन, खनिज आदि की मात्रा में वृद्धि।
- शीघ्र परिपक्वता: कम समय में फसल तैयार होना।
- विपरीत पर्यावरणीय परिस्थितियों के प्रति सहनशीलता: सूखा, लवणता, अत्यधिक तापमान आदि।
B. पादप प्रजनन के चरण (Steps of Plant Breeding):
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विभिन्नता का संग्रह (Collection of Variability):
- किसी भी प्रजनन कार्यक्रम का मूल सभी जीनों का संग्रह होता है।
- किसी फसल में पाए जाने वाले सभी एलीलों (जीन के विभिन्न रूप) के संग्रह को जननद्रव्य संग्रह (Germplasm Collection) कहते हैं।
- यह जंगली प्रजातियों और कृषिगत किस्मों से किया जाता है।
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जनकों का मूल्यांकन और चयन (Evaluation and Selection of Parents):
- संग्रहित जननद्रव्य का मूल्यांकन किया जाता है ताकि वांछित गुणों वाले पौधों की पहचान की जा सके।
- चयनित पौधों को बहुगुणित (multiply) किया जाता है और प्रजनन कार्यक्रम में उपयोग किया जाता है।
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चयनित जनकों के बीच संकरण (Cross Hybridisation among the Selected Parents):
- दो भिन्न जनकों के वांछित गुणों को एक साथ लाने के लिए उनका संकरण कराया जाता है।
- इसमें परागकणों को एक जनक से दूसरे जनक के वर्तिकाग्र पर स्थानांतरित किया जाता है।
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श्रेष्ठ पुनर्योगजों का चयन और परीक्षण (Selection and Testing of Superior Recombinants):
- संकरण से उत्पन्न संतति (संकर) में से उन पौधों का चयन किया जाता है जिनमें वांछित गुणों का संयोजन होता है।
- इन चयनित पौधों को कई पीढ़ियों तक स्व-परागण द्वारा समरूप (homozygous) बनाया जाता है।
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नए किस्मों का परीक्षण, निर्मुक्ति और व्यवसायीकरण (Testing, Release and Commercialisation of New Cultivars):
- चयनित नई किस्मों का परीक्षण किसानों के खेतों में तीन पीढ़ियों तक किया जाता है, ताकि उनकी उपज, रोग प्रतिरोधकता और अन्य वांछित गुणों का मूल्यांकन किया जा सके।
- परीक्षण सफल होने पर, किस्म को निर्मुक्त किया जाता है और बीज का उत्पादन कर किसानों को उपलब्ध कराया जाता है।
C. भारत में कुछ महत्वपूर्ण फसल किस्में (Important Crop Varieties in India):
- हरित क्रांति (Green Revolution): 1960 के दशक में उच्च उपज वाली किस्मों के विकास और बेहतर कृषि प्रबंधन तकनीकों के कारण खाद्यान्न उत्पादन में हुई तीव्र वृद्धि।
- नॉर्मन ई. बोरलॉग (Norman E. Borlaug): "हरित क्रांति के जनक" (विश्व में)।
- एम.एस. स्वामीनाथन (M.S. Swaminathan): "भारत में हरित क्रांति के जनक"।
- गेहूँ (Wheat):
- 1963 में उच्च उपज और रोग प्रतिरोधी किस्में कल्याण सोना (Kalyan Sona) और सोनालिका (Sonalika) विकसित की गईं।
- चावल (Rice):
- IR-8 (फिलीपींस) और ताइचुंग नेटिव-1 (ताइवान) जैसी बौनी किस्मों से जया (Jaya) और रत्ना (Ratna) जैसी किस्में भारत में विकसित की गईं।
- गन्ना (Sugarcane):
- उत्तरी भारत में उगाई जाने वाली सैकरम बारबेरी (Saccharum barberi) की चीनी सामग्री कम और उपज कम थी।
- दक्षिणी भारत में उगाई जाने वाली सैकरम ऑफिसिनेरम (Saccharum officinarum) की चीनी सामग्री अधिक और उपज अधिक थी।
- दोनों का संकरण करके ऐसी किस्में विकसित की गईं जिनमें उच्च उपज, मोटी पत्ती और उच्च शर्करा सामग्री थी, और जो उत्तरी भारत में भी उग सकती थीं।
- बाजरा (Millet):
- संकर बाजरा किस्में विकसित की गईं जो उच्च उपज वाली थीं और जल तनाव के प्रति प्रतिरोधी थीं।
D. रोग प्रतिरोधकता के लिए पादप प्रजनन (Plant Breeding for Disease Resistance):
कई फसलें कवक, जीवाणु और विषाणु जनित रोगों से प्रभावित होती हैं।
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कवक रोग: भूरा किट्ट (Brown rust) (गेहूँ), लाल गलन (Red rot) (गन्ना), पश्च अंगमारी (Late blight) (आलू)।
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जीवाणु रोग: कृष्ण विगलन (Black rot) (क्रुसिफर)।
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विषाणु रोग: तंबाकू मोजेक (Tobacco mosaic), शलजम मोजेक (Turnip mosaic)।
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कुछ रोग प्रतिरोधी किस्में:
- गेहूँ: हिमगिरी (Himadri) - पत्ती और धारी किट्ट, पहाड़ी बंट।
- सरसों: पूसा स्वर्णिम (Pusa Swarnim) (करन राई) - श्वेत किट्ट।
- फूलगोभी: पूसा शुभ्रा (Pusa Shubhra), पूसा स्नोबॉल K-1 - कृष्ण विगलन, कुंचित अंगमारी कृष्ण विगलन।
- लोबिया: पूसा कोमल (Pusa Komal) - जीवाणु अंगमारी।
- मिर्च: पूसा सदाबहार (Pusa Sadabahar) - मिर्च मोजेक विषाणु, तंबाकू मोजेक विषाणु, पर्ण कुंचन।
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उत्परिवर्तन प्रजनन (Mutation Breeding):
- उत्परिवर्तन (Mutation) वह प्रक्रिया है जिससे डीएनए अनुक्रम में परिवर्तन होता है, जिसके परिणामस्वरूप किसी जीव के जीनोटाइप और फेनोटाइप में परिवर्तन होता है।
- उत्परिवर्तन को कृत्रिम रूप से रसायनों (म्यूटैजेन) या गामा किरणों (विकिरण) द्वारा प्रेरित किया जा सकता है।
- उदाहरण: मूँगफली में पीत मोजेक विषाणु और भिंडी में पीत शिरा मोजेक के प्रति प्रतिरोधकता उत्परिवर्तन प्रजनन द्वारा विकसित की गई है।
E. कीट प्रतिरोधकता के लिए पादप प्रजनन (Plant Breeding for Insect Pest Resistance):
कीटों से फसल को होने वाले नुकसान को कम करने के लिए प्रतिरोधक किस्में विकसित की जाती हैं।
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प्रतिरोधकता के आधार:
- आकारिकीय (Morphological): जैसे कपास में चिकनी पत्तियाँ और मक्के में पत्ती के बालों की संख्या।
- जैवरासायनिक (Biochemical): जैसे मक्के में उच्च एस्पार्टिक अम्ल, कम नाइट्रोजन और शर्करा तना छेदक के प्रति प्रतिरोधकता प्रदान करता है।
- कार्यिकीय (Physiological): जैसे कपास में नेक्टरलेस (nectarless) किस्में बॉलवर्म को आकर्षित नहीं करतीं।
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कुछ कीट प्रतिरोधी किस्में:
- सरसों: पूसा गौरव (Pusa Gaurav) - एफिड।
- कपास: पूसा सेम 2 और पूसा सेम 3 - जैसिड और एफिड।
- भिंडी (ओकरा): पूसा सवानी (Pusa Sawani) और पूसा A-4 - प्ररोह और फल छेदक।
F. उन्नत खाद्य गुणवत्ता के लिए पादप प्रजनन (Plant Breeding for Improved Food Quality):
विश्व में लगभग 840 मिलियन लोग पर्याप्त भोजन नहीं पाते हैं और 3 बिलियन लोग सूक्ष्म पोषक तत्वों, प्रोटीन और विटामिन की कमी से पीड़ित हैं।
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जैव प्रबलीकरण (Biofortification): फसलों में विटामिन, खनिज, प्रोटीन और स्वस्थ वसा की मात्रा बढ़ाने के लिए प्रजनन।
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उद्देश्य:
- प्रोटीन सामग्री और गुणवत्ता में सुधार।
- तेल सामग्री और गुणवत्ता में सुधार।
- विटामिन सामग्री में सुधार।
- सूक्ष्म पोषक तत्व और खनिज सामग्री में सुधार।
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उदाहरण:
- मक्का: हाइब्रिड मक्का की किस्में जिनमें लाइसिन और ट्रिप्टोफैन (आवश्यक अमीनो अम्ल) की मात्रा सामान्य मक्का से दोगुनी होती है।
- गेहूँ: एटलस 66 (Atlas 66) नामक प्रोटीन-समृद्ध किस्म विकसित की गई है।
- सब्जियाँ: विटामिन A समृद्ध गाजर, पालक, कद्दू; विटामिन C समृद्ध करेला, बथुआ, सरसों, टमाटर; लौह और कैल्शियम समृद्ध पालक, बथुआ।
- दालें: प्रोटीन समृद्ध सेम (Beans) जैसे ब्रॉड, लैब और फ्रेंच सेम।
III. एकल कोशिका प्रोटीन (Single Cell Protein - SCP)
- परिभाषा: सूक्ष्मजीवों (जैसे शैवाल, कवक, जीवाणु) को भोजन के स्रोत के रूप में उपयोग करना, जिनमें प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है।
- महत्व:
- पर्यावरणीय प्रदूषण को कम करता है क्योंकि यह अपशिष्ट जल, पशु खाद आदि जैसे सस्ते सब्सट्रेट पर उग सकता है।
- पशु और मानव पोषण के लिए प्रोटीन का एक समृद्ध स्रोत है।
- पारंपरिक कृषि की तुलना में कम भूमि और पानी की आवश्यकता होती है।
- उदाहरण:
- स्पाइरुलीना (Spirulina): इसे आलू प्रसंस्करण संयंत्रों के अपशिष्ट जल, पुआल, गुड़, पशु खाद आदि पर आसानी से उगाया जा सकता है। यह प्रोटीन, खनिज, वसा, कार्बोहाइड्रेट और विटामिन से भरपूर होता है।
- मिथाइलोफिलस मिथाइलोट्रोफस (Methylophilus methylotrophus): यह एक जीवाणु है जो बड़ी मात्रा में प्रोटीन का उत्पादन कर सकता है।
IV. ऊतक संवर्धन (Tissue Culture)
- परिभाषा: किसी पौधे के किसी भी भाग (एक्सप्लांट) को लेकर उसे नियंत्रित, रोगाणु-मुक्त परिस्थितियों में एक विशेष पोषक माध्यम पर उगाकर पूरा पौधा विकसित करने की तकनीक।
- पूर्णशक्तता (Totipotency): पौधे की प्रत्येक कोशिका में एक पूर्ण पौधे को पुनर्जीवित करने की क्षमता होती है।
- एक्सप्लांट (Explant): पौधे का वह भाग जिसे संवर्धन के लिए उपयोग किया जाता है।
A. सूक्ष्म प्रवर्धन (Micropropagation):
- परिभाषा: ऊतक संवर्धन तकनीक का उपयोग करके कम समय में हजारों पौधों का उत्पादन।
- सोमाक्लोन (Somaclones): इस विधि से उत्पन्न सभी पौधे आनुवंशिक रूप से मूल पौधे के समान होते हैं।
- लाभ:
- रोग मुक्त पौधों का उत्पादन (विशेषकर विषाणु मुक्त)।
- कम समय में बड़ी संख्या में पौधों का उत्पादन।
- दुर्लभ और लुप्तप्राय पौधों का संरक्षण।
- बीज रहित पौधों का प्रवर्धन।
B. कायिक संकरण (Somatic Hybridisation):
- परिभाषा: दो भिन्न किस्मों या जातियों के प्रोटोप्लास्ट (कोशिका भित्ति रहित कोशिकाएँ) को संलयित करके एक संकर प्रोटोप्लास्ट बनाना, जिससे एक नया कायिक संकर (somatic hybrid) पौधा विकसित होता है।
- प्रक्रिया:
- पहले पादप कोशिकाओं से कोशिका भित्ति को हटाकर प्रोटोप्लास्ट प्राप्त किया जाता है।
- इन प्रोटोप्लास्ट को संलयित किया जाता है।
- संलयित प्रोटोप्लास्ट को पोषक माध्यम पर उगाकर नया पौधा विकसित किया जाता है।
- उदाहरण:
- पोमेटो (Pomato): आलू (Potato) और टमाटर (Tomato) के प्रोटोप्लास्ट के संलयन से बनाया गया संकर। हालांकि, यह व्यावसायिक रूप से सफल नहीं रहा।
10 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs):
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निम्नलिखित में से कौन-सा कथन अंतःप्रजनन अवसादन (Inbreeding Depression) के बारे में सही है?
a) यह उत्पादकता और उर्वरता को बढ़ाता है।
b) यह लगातार अंतःप्रजनन के कारण होता है।
c) इसे बहिःसंकरण द्वारा दूर नहीं किया जा सकता।
d) यह केवल पौधों में होता है। -
'हिसारडेल' किसकी एक नई नस्ल है, जो संकरण द्वारा विकसित की गई है?
a) गाय
b) भेड़
c) मुर्गी
d) ऊँट -
बहुअंडोत्सर्ग भ्रूण स्थानांतरण (MOET) प्रौद्योगिकी में, मादा को किस हॉर्मोन का इंजेक्शन दिया जाता है ताकि बहुअंडोत्सर्ग प्रेरित हो सके?
a) LH
b) एस्ट्रोजन
c) FSH
d) प्रोजेस्टेरोन -
'जया' और 'रत्ना' किसकी उच्च उपज वाली किस्में हैं?
a) गेहूँ
b) मक्का
c) चावल
d) बाजरा -
जैव प्रबलीकरण (Biofortification) का मुख्य उद्देश्य क्या है?
a) फसल की उपज बढ़ाना
b) फसल को कीट प्रतिरोधी बनाना
c) फसल में पोषक तत्वों (विटामिन, खनिज) की मात्रा बढ़ाना
d) फसल को रोग प्रतिरोधी बनाना -
निम्नलिखित में से कौन-सा एकल कोशिका प्रोटीन (SCP) का एक स्रोत है?
a) स्पाइरुलीना
b) एगरिकस
c) पेनिसिलियम
d) राइजोबियम -
पादप कोशिका से कोशिका भित्ति को हटाने के बाद बची हुई कोशिका को क्या कहते हैं?
a) एक्सप्लांट
b) कैलस
c) प्रोटोप्लास्ट
d) सोमाक्लोन -
वह तकनीक जिसमें कम समय में हजारों पौधों का उत्पादन ऊतक संवर्धन द्वारा किया जाता है, कहलाती है:
a) कायिक संकरण
b) उत्परिवर्तन प्रजनन
c) सूक्ष्म प्रवर्धन
d) जननद्रव्य संग्रह -
भारत में हरित क्रांति के जनक के रूप में किसे जाना जाता है?
a) नॉर्मन ई. बोरलॉग
b) एम.एस. स्वामीनाथन
c) वर्गीस कुरियन
d) डॉ. हरगोविंद खुराना -
'पूसा स्वर्णिम' (करन राई) किसकी एक रोग प्रतिरोधी किस्म है, जो किस रोग के प्रति प्रतिरोधी है?
a) गेहूँ; भूरा किट्ट
b) सरसों; श्वेत किट्ट
c) चावल; लाल गलन
d) फूलगोभी; कृष्ण विगलन
उत्तरमाला (Answer Key):
- b
- b
- c
- c
- c
- a
- c
- c
- b
- b
मुझे आशा है कि यह विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपकी सरकारी परीक्षाओं की तैयारी में सहायक सिद्ध होंगे। अपनी पढ़ाई जारी रखें और सफलता प्राप्त करें!