Class 12 Business Studies Notes Chapter 3 (Chapter 3) – Vyavsai Adhyayan-II Book

प्रिय विद्यार्थियों,
आज हम व्यावसायिक अध्ययन के अध्याय 3 'नियोजन' का विस्तार से अध्ययन करेंगे, जो आपकी सरकारी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह अध्याय प्रबंधन के आधारभूत कार्यों में से एक है और इसकी गहरी समझ आपके लिए बहुत लाभदायक सिद्ध होगी।
अध्याय 3: नियोजन (Planning)
1. परिचय (Introduction)
नियोजन प्रबंधन का पहला और सबसे महत्वपूर्ण कार्य है। यह भविष्य के बारे में सोचने की प्रक्रिया है कि 'क्या करना है?', 'कैसे करना है?', 'कब करना है?' और 'कौन करेगा?'। यह वर्तमान और भविष्य के बीच एक सेतु का काम करता है, जिससे संगठन अपने लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से प्राप्त कर सके।
2. अर्थ (Meaning)
नियोजन का अर्थ है उद्देश्यों को निर्धारित करना और उन उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए कार्यवाही के सर्वोत्तम तरीके का चयन करना। यह एक बौद्धिक प्रक्रिया है जिसमें निर्णय लेना शामिल होता है कि भविष्य में क्या करना है और कैसे करना है। सरल शब्दों में, यह 'आगे की सोच' है।
3. नियोजन की विशेषताएँ (Features/Characteristics of Planning)
- उद्देश्य प्राप्ति पर ध्यान केंद्रित (Focus on achieving objectives): नियोजन का प्राथमिक उद्देश्य संगठन के पूर्व-निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करना है।
- प्रबंधन का प्राथमिक कार्य (Primary function of management): नियोजन अन्य सभी प्रबंधकीय कार्यों (जैसे संगठन, नियुक्तिकरण, निर्देशन और नियंत्रण) का आधार है। कोई भी अन्य कार्य नियोजन के बिना शुरू नहीं हो सकता।
- सर्वव्यापी (Pervasive): नियोजन केवल शीर्ष स्तर के प्रबंधन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह संगठन के सभी स्तरों पर आवश्यक है। हालाँकि, विभिन्न स्तरों पर इसकी प्रकृति और दायरा भिन्न हो सकता है।
- भविष्यवादी (Futuristic): नियोजन भविष्य के लिए किया जाता है। इसमें भविष्य की घटनाओं का अनुमान लगाना और उनके लिए तैयारी करना शामिल है।
- सतत प्रक्रिया (Continuous process): नियोजन एक बार का कार्य नहीं है, बल्कि यह एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। योजनाएँ लगातार समीक्षा की जाती हैं और बदलती परिस्थितियों के अनुसार संशोधित की जाती हैं।
- निर्णय लेने में शामिल (Involves decision making): नियोजन में विभिन्न वैकल्पिक कार्यवाहियों में से सर्वोत्तम का चयन करना शामिल है, और यह निर्णय लेने की प्रक्रिया का एक अभिन्न अंग है।
- मानसिक अभ्यास (Mental exercise): नियोजन एक बौद्धिक प्रक्रिया है जिसमें दूरदर्शिता, कल्पना और विवेकपूर्ण निर्णय की आवश्यकता होती है। यह अनुमानों, तर्क और व्यवस्थित सोच पर आधारित है।
4. नियोजन का महत्व (Importance of Planning)
- उद्देश्यों को स्पष्ट करता है (Clarifies objectives): नियोजन संगठन के उद्देश्यों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करता है, जिससे सभी कर्मचारी एक ही दिशा में काम कर सकें।
- अनिश्चितता को कम करता है (Reduces uncertainty): भविष्य अनिश्चित होता है, लेकिन नियोजन भविष्य की घटनाओं का अनुमान लगाकर और उनके लिए आकस्मिक योजनाएँ बनाकर अनिश्चितता के प्रभाव को कम करने में मदद करता है।
- अपव्यय गतिविधियों को कम करता है (Reduces wasteful activities): नियोजन संसाधनों के कुशल उपयोग को सुनिश्चित करता है और अनावश्यक या अतिव्यापी गतिविधियों को कम करता है।
- नवाचार विचारों को बढ़ावा देता है (Promotes innovative ideas): नियोजन प्रबंधकों को नए विचारों और रचनात्मक समाधानों की तलाश करने के लिए प्रोत्साहित करता है, जिससे संगठन में नवाचार को बढ़ावा मिलता है।
- निर्णय लेने की सुविधा देता है (Facilitates decision making): नियोजन प्रबंधकों को विभिन्न विकल्पों का मूल्यांकन करने और सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन करने में मदद करता है, जिससे निर्णय लेने की प्रक्रिया आसान हो जाती है।
- नियंत्रण के मानक स्थापित करता है (Establishes standards for controlling): नियोजन प्रदर्शन के लिए मानक निर्धारित करता है, जिसके आधार पर वास्तविक प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जा सकता है और सुधारात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
- अतिव्यापी और व्यर्थ गतिविधियों को कम करता है (Reduces overlapping and wasteful activities): स्पष्ट योजनाएँ कार्यों के दोहराव को रोकती हैं और संसाधनों के अपव्यय को कम करती हैं।
- परिवर्तन का सामना करने में मदद करता है (Helps in coping with change): नियोजन संगठन को बाहरी वातावरण में होने वाले परिवर्तनों के अनुकूल होने और उनका प्रभावी ढंग से सामना करने के लिए तैयार करता है।
5. नियोजन की सीमाएँ (Limitations of Planning)
- कठोरता पैदा करता है (Leads to rigidity): एक बार योजनाएँ बन जाने के बाद, उन्हें बदलना मुश्किल हो सकता है, जिससे संगठन में कठोरता आ सकती है और लचीलेपन की कमी हो सकती है।
- बदलते परिवेश में काम नहीं करता (May not work in dynamic environment): तेजी से बदलते व्यावसायिक वातावरण में, योजनाएँ जल्दी अप्रचलित हो सकती हैं, जिससे वे अप्रभावी हो जाती हैं।
- रचनात्मकता को कम करता है (Reduces creativity): जब कर्मचारी पूर्व-निर्धारित योजनाओं का पालन करते हैं, तो उनकी रचनात्मकता और पहल कम हो सकती है।
- भारी लागत (Involves huge costs): नियोजन एक महंगी प्रक्रिया हो सकती है, जिसमें विशेषज्ञ सलाह, सर्वेक्षण और बैठकों पर काफी समय और पैसा खर्च होता है।
- समय लेने वाली प्रक्रिया (Time consuming process): विस्तृत योजना बनाने में काफी समय लगता है, खासकर बड़े संगठनों में, जिससे त्वरित निर्णय लेने में बाधा आ सकती है।
- सफलता की गारंटी नहीं (Does not guarantee success): केवल नियोजन ही सफलता की गारंटी नहीं देता। बाहरी कारक और अप्रत्याशित घटनाएँ योजनाओं को विफल कर सकती हैं।
6. नियोजन प्रक्रिया (Planning Process)
नियोजन एक व्यवस्थित प्रक्रिया है जिसके कई चरण होते हैं:
- उद्देश्यों का निर्धारण (Setting Objectives): यह नियोजन का पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम है। संगठन के समग्र और विभागीय उद्देश्यों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया जाना चाहिए। उद्देश्य विशिष्ट, मापने योग्य, प्राप्त करने योग्य, प्रासंगिक और समय-बद्ध (SMART) होने चाहिए।
- आधारभूत मान्यताओं का विकास (Developing Planning Premises): इसमें भविष्य के बारे में कुछ धारणाएँ या पूर्वानुमान लगाना शामिल है, जैसे कि आर्थिक स्थिति, सरकारी नीतियाँ, तकनीकी परिवर्तन और प्रतिस्पर्धी गतिविधियाँ। ये धारणाएँ नियोजन का आधार बनती हैं।
- कार्यवाही के वैकल्पिक तरीकों की पहचान (Identifying Alternative Courses of Action): उद्देश्यों को प्राप्त करने के कई तरीके हो सकते हैं। इस चरण में सभी संभावित और व्यवहार्य विकल्पों की पहचान की जाती है।
- विकल्पों का मूल्यांकन (Evaluating Alternative Courses): पहचाने गए प्रत्येक विकल्प का उसके फायदे और नुकसान के आधार पर मूल्यांकन किया जाता है। इसमें लागत, जोखिम, लाभ और संसाधनों की आवश्यकता जैसे कारकों पर विचार किया जाता है।
- सर्वोत्तम विकल्प का चयन (Selecting an Alternative): मूल्यांकन के बाद, सबसे उपयुक्त और व्यवहार्य विकल्प का चयन किया जाता है। यह विकल्प संगठन के उद्देश्यों को सबसे प्रभावी ढंग से प्राप्त करने वाला होना चाहिए।
- योजना को लागू करना (Implementing the Plan): चयनित योजना को वास्तविक कार्रवाई में बदलना इस चरण में होता है। इसमें आवश्यक संसाधनों को जुटाना और कर्मचारियों को उनके कार्यों के बारे में सूचित करना शामिल है।
- अनुवर्ती कार्यवाही (Follow-up Action): योजना को लागू करने के बाद, उसकी प्रगति की लगातार निगरानी करना और आवश्यकतानुसार समायोजन करना महत्वपूर्ण है। यह सुनिश्चित करता है कि योजना सही रास्ते पर है और उद्देश्यों को प्राप्त किया जा रहा है।
7. नियोजन के प्रकार (Types of Plans)
संगठन विभिन्न प्रकार की योजनाएँ विकसित करते हैं जो उनके उद्देश्यों और आवश्यकताओं के अनुरूप होती हैं। इन्हें मोटे तौर पर 'एकल-उपयोग योजनाएँ' (Single-use plans) और 'स्थायी योजनाएँ' (Standing plans) में वर्गीकृत किया जा सकता है।
- उद्देश्य (Objectives): ये वे अंतिम बिंदु हैं जिन्हें संगठन प्राप्त करना चाहता है। ये नियोजन के शुरुआती बिंदु होते हैं। उदाहरण: बिक्री में 10% की वृद्धि करना।
- व्यूह-रचना (Strategy): यह एक व्यापक योजना है जो संगठन के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए तैयार की जाती है। इसमें दीर्घकालिक उद्देश्यों का निर्धारण, कार्यवाही के पाठ्यक्रम को अपनाना और संसाधनों का आवंटन शामिल है। उदाहरण: बाजार में नए उत्पाद लॉन्च करने की रणनीति।
- नीतियाँ (Policies): ये निर्णय लेने के लिए सामान्य दिशानिर्देश हैं। ये प्रबंधकों को विशिष्ट स्थितियों में निर्णय लेने की सीमाएँ निर्धारित करती हैं। उदाहरण: ग्राहक शिकायतें कैसे संभाली जाएँ, क्रेडिट बिक्री की नीति।
- कार्यविधियाँ (Procedures): ये एक विशेष कार्य को क्रमबद्ध तरीके से करने के लिए चरण-दर-चरण निर्देश हैं। ये नीतियों को लागू करने में मदद करती हैं। उदाहरण: ग्राहक शिकायत दर्ज करने की कार्यविधि, आदेश देने की कार्यविधि।
- नियम (Rules): ये विशिष्ट और कठोर कथन हैं कि क्या करना है और क्या नहीं करना है। इनमें कोई लचीलापन नहीं होता और इनका उल्लंघन करने पर दंड का प्रावधान हो सकता है। उदाहरण: 'धूम्रपान वर्जित है', 'देर से आने पर जुर्माना'।
- कार्यक्रम (Programmes): ये उद्देश्यों, नीतियों, कार्यविधियों, नियमों, बजटों और अन्य तत्वों का एक विस्तृत विवरण होते हैं, जो एक विशिष्ट परियोजना या कार्य को पूरा करने के लिए तैयार किए जाते हैं। उदाहरण: एक नया संयंत्र स्थापित करने का कार्यक्रम।
- बजट (Budget): यह भविष्य के तथ्यों और आंकड़ों का एक मात्रात्मक विवरण है। यह एक निश्चित अवधि के लिए अपेक्षित परिणामों को संख्यात्मक रूप में व्यक्त करता है। उदाहरण: बिक्री बजट, उत्पादन बजट, नकद बजट।
- विधि (Method): यह किसी कार्य को करने का एक मानकीकृत या निर्धारित तरीका है। यह कार्यविधि का एक छोटा हिस्सा हो सकता है। उदाहरण: असेंबली लाइन पर एक विशिष्ट भाग को जोड़ने की विधि।
बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions - MCQs)
-
प्रबंधन का कौन सा कार्य उद्देश्यों को निर्धारित करने और उन उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए कार्यवाही के सर्वोत्तम तरीके का चयन करने से संबंधित है?
a) संगठन
b) नियुक्तिकरण
c) नियोजन
d) नियंत्रण
उत्तर: c) नियोजन -
नियोजन की कौन सी विशेषता इसे 'भविष्यवादी' बनाती है?
a) यह एक सतत प्रक्रिया है।
b) यह भविष्य की घटनाओं का अनुमान लगाता है।
c) यह सभी स्तरों पर आवश्यक है।
d) यह निर्णय लेने में शामिल है।
उत्तर: b) यह भविष्य की घटनाओं का अनुमान लगाता है। -
नियोजन का कौन सा महत्व 'नियंत्रण के मानक स्थापित करता है'?
a) यह अनिश्चितता को कम करता है।
b) यह नवाचार विचारों को बढ़ावा देता है।
c) यह वास्तविक प्रदर्शन के मूल्यांकन के लिए आधार प्रदान करता है।
d) यह अपव्यय गतिविधियों को कम करता है।
उत्तर: c) यह वास्तविक प्रदर्शन के मूल्यांकन के लिए आधार प्रदान करता है। -
नियोजन की कौन सी सीमा संगठन में 'कठोरता' पैदा कर सकती है?
a) भारी लागत
b) समय लेने वाली प्रक्रिया
c) बदलते परिवेश में काम नहीं करता
d) एक बार योजनाएँ बन जाने के बाद, उन्हें बदलना मुश्किल हो सकता है।
उत्तर: d) एक बार योजनाएँ बन जाने के बाद, उन्हें बदलना मुश्किल हो सकता है। -
नियोजन प्रक्रिया का पहला कदम क्या है?
a) आधारभूत मान्यताओं का विकास
b) उद्देश्यों का निर्धारण
c) कार्यवाही के वैकल्पिक तरीकों की पहचान
d) सर्वोत्तम विकल्प का चयन
उत्तर: b) उद्देश्यों का निर्धारण -
नियोजन प्रक्रिया में 'भविष्य के बारे में कुछ धारणाएँ या पूर्वानुमान लगाना' किस चरण में आता है?
a) उद्देश्यों का निर्धारण
b) आधारभूत मान्यताओं का विकास
c) विकल्पों का मूल्यांकन
d) अनुवर्ती कार्यवाही
उत्तर: b) आधारभूत मान्यताओं का विकास -
निर्णय लेने के लिए सामान्य दिशानिर्देश क्या कहलाते हैं?
a) नियम
b) कार्यविधियाँ
c) नीतियाँ
d) बजट
उत्तर: c) नीतियाँ -
'धूम्रपान वर्जित है' किस प्रकार की योजना का उदाहरण है?
a) नीति
b) कार्यविधि
c) नियम
d) कार्यक्रम
उत्तर: c) नियम -
भविष्य के तथ्यों और आंकड़ों का एक मात्रात्मक विवरण क्या है?
a) व्यूह-रचना
b) कार्यक्रम
c) बजट
d) विधि
उत्तर: c) बजट -
नियोजन की कौन सी विशेषता इसे 'प्रबंधन का प्राथमिक कार्य' बनाती है?
a) यह सर्वव्यापी है।
b) यह अन्य सभी प्रबंधकीय कार्यों का आधार है।
c) यह एक मानसिक अभ्यास है।
d) यह सफलता की गारंटी नहीं देता।
उत्तर: b) यह अन्य सभी प्रबंधकीय कार्यों का आधार है।
मुझे आशा है कि ये विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपको अध्याय 3 'नियोजन' को गहराई से समझने और आपकी सरकारी परीक्षा की तैयारी में सहायता करेंगे। शुभकामनाएँ!