Class 12 Business Studies Notes Chapter 5 (संगठन) – Vyavsai Adhyayan-I Book

Vyavsai Adhyayan-I
प्रिय विद्यार्थियों,

आज हम व्यावसायिक अध्ययन के अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय 'संगठन' पर विस्तार से चर्चा करेंगे। यह अध्याय न केवल आपकी बोर्ड परीक्षाओं के लिए, बल्कि विभिन्न सरकारी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। आइए, इस अध्याय के हर पहलू को गहराई से समझते हैं।


अध्याय 5: संगठन (Organising)

1. संगठन का अर्थ (Meaning of Organising)

संगठन प्रबंध का दूसरा महत्वपूर्ण कार्य है। यह संसाधनों को एकत्रित करने, गतिविधियों को वर्गीकृत करने और एक प्रभावी संरचना स्थापित करने की प्रक्रिया है ताकि संगठन के उद्देश्यों को कुशलतापूर्वक प्राप्त किया जा सके। सरल शब्दों में, यह योजनाबद्ध लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए भौतिक, वित्तीय और मानवीय संसाधनों के बीच समन्वय स्थापित करने का कार्य है।

परिभाषा: "संगठन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें समान उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए व्यक्तियों के कार्यों को परिभाषित एवं समूहित किया जाता है तथा उनके बीच अधिकार संबंधों को स्थापित किया जाता है।"

2. संगठन की प्रक्रिया (Process of Organising)

संगठन की प्रक्रिया में निम्नलिखित चार चरण शामिल हैं:

  • क. कार्य की पहचान एवं विभाजन (Identification and Division of Work):

    • संगठन के कुल कार्य को छोटे-छोटे प्रबंधकीय एवं परिचालन संबंधी कार्यों में विभाजित किया जाता है।
    • यह सुनिश्चित करता है कि कार्य का दोहराव न हो और कार्यभार सभी कर्मचारियों पर समान रूप से वितरित हो।
    • यह विशिष्टीकरण (Specialisation) को बढ़ावा देता है।
  • ख. विभागीयकरण (Departmentalisation):

    • समान प्रकृति के कार्यों को एक साथ समूहित करके विभाग बनाए जाते हैं।
    • यह कार्य को सुव्यवस्थित करता है और समन्वय में सुविधा प्रदान करता है।
    • विभागीयकरण मुख्यतः दो आधारों पर होता है:
      • कार्यात्मक आधार (Functional Basis): जैसे उत्पादन, विपणन, वित्त, मानव संसाधन विभाग।
      • उत्पाद/प्रभागीय आधार (Product/Divisional Basis): जैसे वस्त्र, सौंदर्य प्रसाधन, खाद्य उत्पाद विभाग।
  • ग. कर्तव्यों का निर्धारण (Assignment of Duties):

    • प्रत्येक विभाग में प्रत्येक पद पर बैठे व्यक्ति को उसके कौशल, योग्यता और अनुभव के आधार पर कार्य सौंपा जाता है।
    • प्रत्येक व्यक्ति को यह स्पष्ट रूप से बता दिया जाता है कि उसे क्या करना है, कब करना है और कैसे करना है।
  • घ. रिपोर्टिंग संबंध स्थापित करना (Establishing Reporting Relationships):

    • प्रत्येक व्यक्ति को यह स्पष्ट रूप से बताया जाता है कि वह किसका अधीनस्थ है और कौन उसका वरिष्ठ है।
    • यह स्पष्ट अधिकार श्रृंखला (Chain of Command) स्थापित करता है, जिससे संचार और नियंत्रण में आसानी होती है।
    • यह प्रबंधकीय पदानुक्रम (Managerial Hierarchy) को परिभाषित करता है।

3. संगठन का महत्व (Importance of Organising)

एक सुदृढ़ संगठनात्मक ढाँचा संगठन के लिए कई लाभ प्रदान करता है:

  • क. विशिष्टीकरण के लाभ (Benefits of Specialisation): कार्य के विभाजन से कर्मचारी एक ही कार्य को बार-बार करते हैं, जिससे वे उसमें विशेषज्ञ बन जाते हैं और कार्यकुशलता बढ़ती है।
  • ख. कार्य संबंधों में स्पष्टता (Clarity in Working Relationships): यह स्पष्ट करता है कि कौन किसका अधीनस्थ है और कौन किसका वरिष्ठ है, जिससे भ्रम की स्थिति समाप्त होती है।
  • ग. संसाधनों का इष्टतम उपयोग (Optimum Utilisation of Resources): कार्य के दोहराव से बचकर और संसाधनों का उचित आवंटन करके, संगठन अपव्यय को कम करता है और संसाधनों का अधिकतम उपयोग करता है।
  • घ. प्रभावी प्रशासन (Effective Administration): स्पष्ट रूप से परिभाषित कार्य, कर्तव्य और अधिकार संबंधों के कारण प्रशासन अधिक कुशल और प्रभावी होता है।
  • ङ. कर्मचारियों का विकास (Development of Personnel): अधिकार अंतरण और विकेंद्रीकरण के माध्यम से अधीनस्थों को नई जिम्मेदारियाँ मिलती हैं, जिससे उनकी क्षमताओं का विकास होता है।
  • च. विस्तार एवं विकास (Expansion and Growth): एक अच्छी तरह से संरचित संगठन नए उत्पादों, बाजारों और प्रौद्योगिकियों को आसानी से अपना सकता है, जिससे संगठन का विस्तार और विकास होता है।
  • छ. परिवर्तनों का सामना करना (Coping with Changes): एक लचीला संगठनात्मक ढाँचा बाहरी वातावरण में होने वाले परिवर्तनों को अधिक प्रभावी ढंग से अनुकूलित करने में मदद करता है।

4. संगठनात्मक ढाँचा (Organisational Structure)

संगठनात्मक ढाँचा वह रूपरेखा है जिसके भीतर प्रबंधकीय और परिचालन संबंधी कार्य किए जाते हैं। यह विभिन्न पदों, विभागों और उनके बीच के संबंधों को दर्शाता है।

क. कार्यात्मक ढाँचा (Functional Structure):

  • अर्थ: यह ढाँचा समान या संबंधित कार्यों को एक साथ समूहित करके विभाग बनाता है। उदाहरण के लिए, उत्पादन, विपणन, वित्त और मानव संसाधन विभाग।
  • उपयुक्तता: यह बड़े संगठनों के लिए उपयुक्त है जो एक ही प्रकार के उत्पाद का उत्पादन करते हैं और जिनमें उच्च स्तर के कार्यात्मक विशिष्टीकरण की आवश्यकता होती है।
  • लाभ:
    • विशिष्टीकरण को बढ़ावा देता है।
    • कार्यकुशलता बढ़ाता है।
    • नियंत्रण एवं समन्वय में आसानी होती है (एक ही कार्य क्षेत्र में)।
    • प्रबंधकीय प्रशिक्षण में सुविधा।
  • हानियाँ:
    • विभागीय प्रमुखों के बीच समन्वय में कठिनाई।
    • विभागीय उद्देश्यों पर अधिक ध्यान, समग्र संगठनात्मक उद्देश्यों की उपेक्षा।
    • संघर्ष की संभावना।
    • उत्पाद के समग्र विकास की जिम्मेदारी किसी एक व्यक्ति पर नहीं होती।

ख. प्रभागीय ढाँचा (Divisional Structure):

  • अर्थ: यह ढाँचा संगठन को विभिन्न उत्पादों या भौगोलिक क्षेत्रों के आधार पर विभागों में विभाजित करता है। प्रत्येक विभाग अपने उत्पाद से संबंधित सभी कार्यात्मक क्षेत्रों (उत्पादन, विपणन, वित्त) के लिए जिम्मेदार होता है।
  • उपयुक्तता: यह उन बड़े संगठनों के लिए उपयुक्त है जो कई प्रकार के उत्पादों का उत्पादन करते हैं या विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में काम करते हैं।
  • लाभ:
    • उत्पाद विशिष्टीकरण को बढ़ावा देता है।
    • प्रत्येक विभाग अपने उत्पादों के लिए स्वतंत्र रूप से जिम्मेदार होता है, जिससे जवाबदेही सुनिश्चित होती है।
    • निर्णय लेने में तेजी आती है।
    • विस्तार एवं विकास में सुविधा।
    • प्रबंधकीय कौशल का विकास (सभी कार्यों का अनुभव)।
  • हानियाँ:
    • संसाधनों का दोहराव (प्रत्येक विभाग के अपने कार्य क्षेत्र)।
    • विभिन्न विभागों के बीच संघर्ष की संभावना।
    • प्रत्येक विभाग को पूर्ण स्वायत्तता देने पर नियंत्रण में कठिनाई।

5. अधिकार अंतरण (Delegation of Authority)

अधिकार अंतरण का अर्थ है कि एक उच्च अधिकारी अपने कुछ अधिकार और संबंधित उत्तरदायित्व अपने अधीनस्थ को सौंपता है। हालाँकि, अंतिम जवाबदेही उच्च अधिकारी की ही रहती है। यह प्रबंधकीय पदानुक्रम को बनाए रखने और अधीनस्थों को सशक्त बनाने का एक तरीका है।

अधिकार अंतरण के तत्व (Elements of Delegation of Authority):

  • क. उत्तरदायित्व (Responsibility):

    • यह किसी पद पर बैठे व्यक्ति को सौंपे गए कार्य को पूरा करने का दायित्व है।
    • उत्तरदायित्व को नीचे की ओर (अधीनस्थों को) अंतरित किया जा सकता है।
    • यह कार्य के निष्पादन से संबंधित है।
  • ख. अधिकार (Authority):

    • यह निर्णय लेने और आदेश देने का अधिकार है।
    • यह किसी कार्य को करने के लिए आवश्यक संसाधनों का उपयोग करने और निर्देश देने का अधिकार देता है।
    • अधिकार को भी नीचे की ओर (अधीनस्थों को) अंतरित किया जा सकता है।
    • यह पद के साथ आता है।
  • ग. जवाबदेही/उत्तरदेयता (Accountability):

    • यह सौंपे गए कार्य के परिणाम के लिए जवाबदेह होने का दायित्व है।
    • जवाबदेही को अंतरित नहीं किया जा सकता है। एक बार जब अधिकार और उत्तरदायित्व सौंप दिए जाते हैं, तो सौंपने वाला व्यक्ति अभी भी अंतिम परिणाम के लिए जवाबदेह रहता है।
    • यह ऊपर की ओर (वरिष्ठ को) होती है।

अधिकार अंतरण का महत्व (Importance of Delegation of Authority):

  • क. प्रभावी प्रबंध (Effective Management): उच्च प्रबंधकों पर कार्यभार कम होता है, जिससे वे अधिक महत्वपूर्ण कार्यों पर ध्यान केंद्रित कर पाते हैं।
  • ख. कर्मचारियों का विकास (Employee Development): अधीनस्थों को नई जिम्मेदारियाँ मिलती हैं, जिससे उनके कौशल और क्षमताओं का विकास होता है।
  • ग. पहल क्षमता का विकास (Initiative Development): अधीनस्थ निर्णय लेने में सक्षम होते हैं, जिससे उनमें पहल करने की भावना विकसित होती है।
  • घ. प्रबंधकीय पदानुक्रम का आधार (Basis of Managerial Hierarchy): यह वरिष्ठ और अधीनस्थ के बीच संबंध स्थापित करता है।
  • ङ. समन्वय में सुविधा (Facilitates Coordination): स्पष्ट अधिकार और उत्तरदायित्व संबंधों से विभिन्न विभागों और व्यक्तियों के बीच समन्वय स्थापित करना आसान हो जाता है।

6. विकेंद्रीकरण (Decentralisation)

विकेंद्रीकरण का अर्थ है संगठन के प्रत्येक स्तर पर, विशेषकर निचले स्तरों पर, निर्णय लेने के अधिकार का व्यवस्थित फैलाव। यह केवल अधिकार अंतरण नहीं है, बल्कि एक नीतिगत निर्णय है जो संगठन के दर्शन को दर्शाता है।

अधिकार अंतरण और विकेंद्रीकरण में अंतर (Difference between Delegation and Decentralisation):

आधार अधिकार अंतरण (Delegation) विकेंद्रीकरण (Decentralisation)
अर्थ एक व्यक्ति द्वारा अपने कुछ अधिकार अधीनस्थ को सौंपना। निर्णय लेने के अधिकार का व्यवस्थित रूप से निचले स्तरों तक फैलाव।
प्रकृति यह एक व्यक्तिगत कार्य है, जो किसी भी प्रबंधक द्वारा किया जा सकता है। यह एक नीतिगत निर्णय है, जो पूरे संगठन को प्रभावित करता है।
दायरा संकीर्ण, केवल दो व्यक्तियों (वरिष्ठ और अधीनस्थ) के बीच। व्यापक, पूरे संगठन में लागू होता है।
उद्देश्य प्रबंधक के कार्यभार को कम करना। अधीनस्थों के महत्व को बढ़ाना और उनकी पहल क्षमता को विकसित करना।
स्वतंत्रता अधीनस्थ को कम स्वतंत्रता मिलती है। अधीनस्थ को अधिक स्वतंत्रता मिलती है।
वापसी अधिकार अंतरण को वापस लिया जा सकता है। विकेंद्रीकरण को वापस लेना कठिन होता है।

विकेंद्रीकरण का महत्व (Importance of Decentralisation):

  • क. अधीनस्थों में पहल क्षमता का विकास (Develops Initiative among Subordinates): अधीनस्थ स्वतंत्र रूप से निर्णय लेते हैं, जिससे उनमें आत्मविश्वास और पहल करने की भावना बढ़ती है।
  • ख. उच्च प्रबंध पर कार्यभार में कमी (Reduces Burden on Top Management): निचले स्तरों पर निर्णय लेने से उच्च प्रबंधकों का कार्यभार कम होता है, जिससे वे रणनीतिक और महत्वपूर्ण कार्यों पर ध्यान केंद्रित कर पाते हैं।
  • ग. निर्णय लेने में सुविधा (Facilitates Decision Making): निर्णय उस स्तर पर लिए जाते हैं जहाँ कार्रवाई होनी है, जिससे निर्णय लेने में तेजी आती है और वे अधिक प्रासंगिक होते हैं।
  • घ. विकास में सुविधा (Facilitates Growth): यह संगठन को विस्तार और विकास के लिए अधिक लचीला और अनुकूलनीय बनाता है।
  • ङ. बेहतर नियंत्रण (Better Control): विकेंद्रीकरण के साथ-साथ प्रदर्शन के मूल्यांकन के लिए प्रभावी नियंत्रण प्रणालियाँ भी विकसित की जाती हैं, जिससे बेहतर नियंत्रण संभव होता है।

यह था अध्याय 'संगठन' का विस्तृत विवरण। मुझे आशा है कि यह आपको सरकारी परीक्षाओं की तैयारी में सहायक होगा।


बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions - MCQs)

निम्नलिखित प्रश्नों के सही उत्तर का चयन करें:

  1. संगठन प्रक्रिया का पहला कदम क्या है?
    क) विभागीयकरण
    ख) कार्य की पहचान एवं विभाजन
    ग) कर्तव्यों का निर्धारण
    घ) रिपोर्टिंग संबंध स्थापित करना

  2. समान प्रकृति के कार्यों को एक साथ समूहित करके विभाग बनाने की प्रक्रिया को क्या कहते हैं?
    क) अधिकार अंतरण
    ख) विकेंद्रीकरण
    ग) विभागीयकरण
    घ) विशिष्टीकरण

  3. एक संगठन जो कई प्रकार के उत्पादों का उत्पादन करता है, उसके लिए कौन सा संगठनात्मक ढाँचा सबसे उपयुक्त है?
    क) कार्यात्मक ढाँचा
    ख) प्रभागीय ढाँचा
    ग) मैट्रिक्स ढाँचा
    घ) नेटवर्क ढाँचा

  4. अधिकार अंतरण के कितने तत्व होते हैं?
    क) दो
    ख) तीन
    ग) चार
    घ) पाँच

  5. निम्न में से अधिकार अंतरण का कौन सा तत्व अंतरित नहीं किया जा सकता है?
    क) अधिकार
    ख) उत्तरदायित्व
    ग) जवाबदेही
    घ) इनमें से कोई नहीं

  6. "निर्णय लेने के अधिकार का व्यवस्थित रूप से निचले स्तरों तक फैलाव" को क्या कहा जाता है?
    क) अधिकार अंतरण
    ख) विकेंद्रीकरण
    ग) विशिष्टीकरण
    घ) विभागीयकरण

  7. किस संगठनात्मक ढाँचे में कार्यात्मक विशिष्टीकरण के लाभ प्राप्त होते हैं?
    क) प्रभागीय ढाँचा
    ख) कार्यात्मक ढाँचा
    ग) मैट्रिक्स ढाँचा
    घ) परियोजना ढाँचा

  8. विकेंद्रीकरण का मुख्य उद्देश्य क्या है?
    क) उच्च प्रबंध पर कार्यभार बढ़ाना
    ख) अधीनस्थों में पहल क्षमता का विकास करना
    ग) निर्णय लेने की प्रक्रिया को धीमा करना
    घ) केवल शीर्ष स्तर पर निर्णय लेना

  9. संगठन प्रबंध का कौन सा कार्य है?
    क) पहला
    ख) दूसरा
    ग) तीसरा
    घ) चौथा

  10. प्रभागीय ढाँचे का एक प्रमुख दोष क्या है?
    क) विशिष्टीकरण की कमी
    ख) संसाधनों का दोहराव
    ग) प्रबंधकों के विकास में बाधा
    घ) निर्णय लेने में देरी


MCQs के उत्तर:

  1. ख) कार्य की पहचान एवं विभाजन
  2. ग) विभागीयकरण
  3. ख) प्रभागीय ढाँचा
  4. ख) तीन
  5. ग) जवाबदेही
  6. ख) विकेंद्रीकरण
  7. ख) कार्यात्मक ढाँचा
  8. ख) अधीनस्थों में पहल क्षमता का विकास करना
  9. ख) दूसरा
  10. ख) संसाधनों का दोहराव

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