Class 12 Business Studies Notes Chapter 6 (नियुक्तिकरण) – Vyavsai Adhyayan-I Book

प्रिय विद्यार्थियों,
सरकारी परीक्षाओं की तैयारी के लिए व्यावसायिक अध्ययन के अंतर्गत आज हम 'नियुक्तिकरण' नामक अध्याय का विस्तृत एवं गहन अध्ययन करेंगे। यह अध्याय प्रबंधन के एक महत्वपूर्ण कार्य को उजागर करता है और आपकी समझ को मजबूत करने के साथ-साथ परीक्षा में उच्च अंक प्राप्त करने में भी सहायक होगा।
अध्याय 6: नियुक्तिकरण (Staffing)
नियुक्तिकरण, प्रबंधन का वह कार्य है जो संगठन में सही व्यक्तियों को सही पदों पर नियुक्त करने से संबंधित है। यह सुनिश्चित करता है कि संगठन के पास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए आवश्यक योग्यता और कौशल वाले लोग उपलब्ध हों।
1. नियुक्तिकरण का अर्थ (Meaning of Staffing)
नियुक्तिकरण को 'सही व्यक्ति को सही कार्य पर' लगाने के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। इसमें मानव शक्ति की आवश्यकताओं का अनुमान लगाने से लेकर भर्ती, चयन, पदस्थापन, प्रशिक्षण, विकास, पदोन्नति, निष्पादन मूल्यांकन और पारिश्रमिक जैसे कार्य शामिल होते हैं। यह एक सतत प्रक्रिया है क्योंकि संगठन में लोग आते-जाते रहते हैं और नई आवश्यकताएं उत्पन्न होती रहती हैं।
2. नियुक्तिकरण की विशेषताएँ (Characteristics of Staffing)
- मानव तत्व से संबंधित: यह केवल मानव संसाधनों से संबंधित है, न कि भौतिक या वित्तीय संसाधनों से।
- प्रबंधन का एक महत्वपूर्ण कार्य: यह नियोजन, संगठन, निर्देशन और नियंत्रण के समान ही प्रबंधन का एक अभिन्न कार्य है।
- सर्वव्यापी कार्य: यह सभी स्तरों के प्रबंधन (उच्च, मध्य, निम्न) और सभी प्रकार के संगठनों में आवश्यक है।
- सतत प्रक्रिया: कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति, स्थानांतरण, पदोन्नति, त्यागपत्र या नई आवश्यकताओं के कारण यह प्रक्रिया लगातार चलती रहती है।
- योग्य व्यक्तियों की नियुक्ति: इसका उद्देश्य संगठन में सही योग्यता और कौशल वाले व्यक्तियों को नियुक्त करना है।
- विकासोन्मुखी: यह केवल कर्मचारियों की नियुक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके प्रशिक्षण और विकास पर भी ध्यान केंद्रित करता है।
3. नियुक्तिकरण का महत्व (Importance of Staffing)
नियुक्तिकरण संगठन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह:
- योग्य कर्मचारियों की खोज: योग्य एवं सक्षम कर्मचारियों को खोजने और प्राप्त करने में मदद करता है।
- उच्च निष्पादन: सही व्यक्ति को सही कार्य पर लगाने से कर्मचारियों का निष्पादन बेहतर होता है, जिससे संगठन के लक्ष्यों की प्राप्ति आसान होती है।
- निरंतर विकास: कर्मचारियों के प्रशिक्षण और विकास के माध्यम से उनकी क्षमताओं को बढ़ाता है, जिससे वे भविष्य की चुनौतियों का सामना कर सकें।
- संसाधनों का इष्टतम उपयोग: मानव संसाधनों का प्रभावी ढंग से उपयोग सुनिश्चित करता है, जिससे बर्बादी कम होती है और उत्पादकता बढ़ती है।
- उच्च मनोबल: उचित चयन, पदस्थापन, प्रशिक्षण और निष्पक्ष मूल्यांकन कर्मचारियों के मनोबल और संतुष्टि को बढ़ाता है।
- दीर्घकालिक सफलता: संगठन को प्रतिस्पर्धात्मक लाभ प्रदान करता है और उसकी दीर्घकालिक सफलता सुनिश्चित करता है।
4. नियुक्तिकरण प्रक्रिया (Staffing Process)
नियुक्तिकरण एक व्यवस्थित प्रक्रिया है जिसमें निम्नलिखित चरण शामिल हैं:
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मानव शक्ति आवश्यकताओं का अनुमान (Estimating Manpower Requirements):
- इसमें संगठन की वर्तमान और भविष्य की मानव शक्ति की आवश्यकता का आकलन किया जाता है।
- कार्यभार विश्लेषण (Workload Analysis): यह निर्धारित करता है कि विभिन्न कार्यों को पूरा करने के लिए कितने व्यक्तियों की आवश्यकता है।
- कार्यशक्ति विश्लेषण (Workforce Analysis): यह संगठन में वर्तमान में उपलब्ध मानव शक्ति की संख्या और प्रकार का आकलन करता है।
- दोनों के बीच के अंतर से अतिरिक्त या कम कर्मचारियों की आवश्यकता का पता चलता है।
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भर्ती (Recruitment):
- यह संभावित कर्मचारियों को संगठन में नौकरी के लिए आवेदन करने हेतु आकर्षित करने की प्रक्रिया है।
- इसका उद्देश्य अधिक से अधिक योग्य उम्मीदवारों को आवेदन करने के लिए प्रोत्साहित करना है।
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चयन (Selection):
- यह उपलब्ध उम्मीदवारों में से सबसे योग्य और उपयुक्त उम्मीदवार को चुनने की प्रक्रिया है।
- यह एक नकारात्मक प्रक्रिया है क्योंकि इसमें अयोग्य उम्मीदवारों को बाहर किया जाता है।
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पदस्थापन एवं अभिविन्यास (Placement and Orientation):
- पदस्थापन (Placement): चयनित उम्मीदवार को उसके कौशल और योग्यता के अनुसार कार्य सौंपना।
- अभिविन्यास (Orientation): नए कर्मचारी को संगठन के नियमों, नीतियों, प्रक्रियाओं, सहकर्मियों और वरिष्ठों से परिचित कराना। इसे 'प्रेरण' भी कहते हैं।
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प्रशिक्षण एवं विकास (Training and Development):
- प्रशिक्षण (Training): कर्मचारियों के विशिष्ट कार्य-संबंधी कौशल और ज्ञान में सुधार करना।
- विकास (Development): कर्मचारियों के समग्र व्यक्तित्व और क्षमताओं को बढ़ाना ताकि वे भविष्य में उच्च जिम्मेदारियों को संभाल सकें।
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निष्पादन मूल्यांकन (Performance Appraisal):
- कर्मचारियों के वास्तविक कार्य निष्पादन की तुलना निर्धारित मानकों से करना और उन्हें प्रतिक्रिया (feedback) देना।
- यह पदोन्नति, स्थानांतरण, वेतन वृद्धि आदि के निर्णय का आधार बनता है।
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पदोन्नति एवं करियर नियोजन (Promotion and Career Planning):
- पदोन्नति (Promotion): कर्मचारी को उच्च पद, जिम्मेदारी, प्रतिष्ठा और वेतन पर स्थानांतरित करना।
- करियर नियोजन (Career Planning): कर्मचारियों के लिए भविष्य में विकास के अवसर प्रदान करना और उन्हें उच्च पदों के लिए तैयार करना।
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पारिश्रमिक (Remuneration):
- यह कर्मचारियों को उनके द्वारा किए गए कार्य के बदले में दिया जाने वाला भुगतान है।
- इसमें वेतन, मजदूरी, भत्ते, प्रोत्साहन और अन्य लाभ शामिल होते हैं। यह कर्मचारियों को प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
5. भर्ती (Recruitment)
भर्ती संभावित कर्मचारियों को नौकरी के लिए आवेदन करने हेतु आकर्षित करने की प्रक्रिया है।
भर्ती के स्रोत (Sources of Recruitment):
अ. आंतरिक स्रोत (Internal Sources):
संगठन के भीतर से ही रिक्त पदों को भरना।
- पदोन्नति (Promotion): कर्मचारियों को वर्तमान पद से उच्च पद पर स्थानांतरित करना, जिसमें जिम्मेदारी, प्रतिष्ठा और वेतन में वृद्धि होती है।
- स्थानांतरण (Transfer): कर्मचारियों को समान स्तर पर एक विभाग से दूसरे विभाग या एक शाखा से दूसरी शाखा में स्थानांतरित करना, जिसमें जिम्मेदारी, प्रतिष्ठा और वेतन में कोई बदलाव नहीं होता।
आंतरिक स्रोतों के लाभ (Advantages of Internal Sources):
- कर्मचारियों का मनोबल बढ़ता है।
- कर्मचारी प्रेरित होते हैं।
- चयन प्रक्रिया सरल और कम खर्चीली होती है।
- कर्मचारी संगठन से पहले से परिचित होते हैं।
- प्रशिक्षण की आवश्यकता कम होती है।
आंतरिक स्रोतों की हानियाँ (Disadvantages of Internal Sources):
- नए विचारों और प्रतिभाओं का अभाव।
- कर्मचारियों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है।
- संगठन में नई प्रतिभा का प्रवेश सीमित हो जाता है।
- सभी प्रकार के संगठनों के लिए उपयुक्त नहीं।
ब. बाह्य स्रोत (External Sources):
संगठन के बाहर से रिक्त पदों को भरना।
- प्रत्यक्ष भर्ती (Direct Recruitment): कारखाने के गेट पर या नोटिस बोर्ड पर नौकरी की रिक्तियों की घोषणा करना। आमतौर पर अकुशल या अर्द्ध-कुशल श्रमिकों के लिए।
- आकस्मिक आवेदक (Casual Callers): जो लोग बिना किसी विज्ञापन के सीधे संगठन में आवेदन जमा करते हैं।
- विज्ञापन (Advertisement): समाचार पत्रों, पत्रिकाओं या इंटरनेट पर रिक्तियों का विज्ञापन देना। यह व्यापक पहुंच वाला स्रोत है।
- रोजगार कार्यालय (Employment Exchange): सरकारी या निजी रोजगार कार्यालयों के माध्यम से योग्य उम्मीदवारों की सूची प्राप्त करना।
- कैंपस भर्ती (Campus Recruitment): शैक्षणिक संस्थानों (कॉलेज, विश्वविद्यालय) से सीधे छात्रों को भर्ती करना।
- प्रबंधन परामर्शदाता एवं प्लेसमेंट एजेंसियां (Management Consultants and Placement Agencies): ये एजेंसियां विभिन्न संगठनों के लिए मध्यस्थ के रूप में कार्य करती हैं और योग्य उम्मीदवारों की तलाश करती हैं।
- श्रम ठेकेदार (Labour Contractors): ठेकेदार श्रमिकों के समूहों की आपूर्ति करते हैं, विशेषकर निर्माण और कृषि क्षेत्रों में।
- वेब प्रकाशन (Web Publishing): इंटरनेट पर विभिन्न जॉब पोर्टलों (जैसे Naukri.com, Monster.com) के माध्यम से रिक्तियों का विज्ञापन देना।
- सिफारिशें (Recommendations): वर्तमान कर्मचारियों या विश्वसनीय स्रोतों द्वारा सुझाए गए उम्मीदवारों पर विचार करना।
बाह्य स्रोतों के लाभ (Advantages of External Sources):
- योग्य और प्रतिभाशाली व्यक्तियों का व्यापक पूल उपलब्ध होता है।
- नए विचार और दृष्टिकोण संगठन में आते हैं।
- कर्मचारियों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ती है।
- संगठन को नवीनतम ज्ञान और कौशल वाले लोग मिलते हैं।
बाह्य स्रोतों की हानियाँ (Disadvantages of External Sources):
- यह एक महंगी और समय लेने वाली प्रक्रिया है।
- वर्तमान कर्मचारियों का मनोबल गिर सकता है।
- नए कर्मचारियों को संगठन के वातावरण के अनुकूल होने में समय लगता है।
- विभिन्न स्रोतों से बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हो सकते हैं, जिससे चयन प्रक्रिया जटिल हो जाती है।
6. चयन (Selection)
चयन भर्ती किए गए संभावित उम्मीदवारों के पूल में से सबसे उपयुक्त उम्मीदवार को चुनने की प्रक्रिया है। यह एक नकारात्मक प्रक्रिया है क्योंकि इसमें अयोग्य उम्मीदवारों को अस्वीकार किया जाता है।
चयन प्रक्रिया (Selection Process):
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प्रारंभिक जाँच (Preliminary Screening):
- यह अयोग्य या अनुपयुक्त आवेदकों को जल्दी से बाहर करने के लिए किया जाता है।
- इसमें आवेदन पत्रों की जांच और प्रारंभिक साक्षात्कार शामिल हो सकते हैं।
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चयन परीक्षाएँ (Selection Tests):
- उम्मीदवारों की क्षमताओं, कौशल, अभिरुचि और व्यक्तित्व को मापने के लिए विभिन्न प्रकार की परीक्षाएं आयोजित की जाती हैं।
- बुद्धि परीक्षा (Intelligence Test): व्यक्ति की बुद्धि के स्तर (IQ) को मापती है।
- अभिरुचि परीक्षा (Aptitude Test): व्यक्ति की नई चीजें सीखने की क्षमता को मापती है।
- व्यक्तित्व परीक्षा (Personality Test): व्यक्ति के भावनात्मक संतुलन, परिपक्वता और मूल्य प्रणाली को उजागर करती है।
- व्यापार परीक्षा (Trade Test): व्यक्ति के मौजूदा कौशल के स्तर को मापती है।
- रुचि परीक्षा (Interest Test): व्यक्ति की रुचि के पैटर्न को मापती है।
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रोजगार साक्षात्कार (Employment Interview):
- उम्मीदवारों के साथ आमने-सामने बातचीत करके उनके ज्ञान, कौशल, अनुभव और व्यक्तित्व का आकलन करना।
- यह उम्मीदवार को संगठन के बारे में जानकारी प्राप्त करने का अवसर भी प्रदान करता है।
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संदर्भ एवं पृष्ठभूमि जाँच (Reference and Background Checks):
- उम्मीदवार द्वारा दिए गए संदर्भों (जैसे पूर्व नियोक्ता, शिक्षक) से संपर्क करके उनकी विश्वसनीयता, चरित्र और पूर्व कार्य निष्पादन के बारे में जानकारी प्राप्त करना।
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चयन निर्णय (Selection Decision):
- सभी चरणों से प्राप्त जानकारी के आधार पर, प्रबंधन द्वारा सबसे उपयुक्त उम्मीदवार का चयन किया जाता है।
- आमतौर पर, साक्षात्कार पैनल या मानव संसाधन विभाग यह निर्णय लेता है।
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डॉक्टरी जाँच (Medical Examination):
- यह सुनिश्चित करने के लिए कि चयनित उम्मीदवार शारीरिक रूप से कार्य के लिए फिट है।
- कुछ विशेष कार्यों के लिए यह अनिवार्य होता है।
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कार्य प्रस्ताव (Job Offer):
- चयनित उम्मीदवार को कार्य प्रस्ताव पत्र जारी करना, जिसमें पद, वेतन, कार्यभार और शामिल होने की तिथि जैसी जानकारी होती है।
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रोजगार अनुबंध (Contract of Employment):
- जब उम्मीदवार कार्य प्रस्ताव स्वीकार कर लेता है, तो एक औपचारिक रोजगार अनुबंध पर हस्ताक्षर किए जाते हैं।
- इसमें नियम और शर्तें, जिम्मेदारियां, पारिश्रमिक, कार्य के घंटे, अवकाश, शिकायत निवारण प्रक्रिया आदि शामिल होते हैं।
7. प्रशिक्षण एवं विकास (Training and Development)
प्रशिक्षण और विकास कर्मचारियों की क्षमताओं को बढ़ाने और उन्हें संगठन के लक्ष्यों को प्राप्त करने में अधिक प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक हैं।
प्रशिक्षण एवं विकास का महत्व (Importance of Training and Development):
अ. संगठन के लिए (For the Organisation):
- उत्पादकता में वृद्धि: कर्मचारियों के कौशल में सुधार से उत्पादकता और गुणवत्ता बढ़ती है।
- भविष्य के प्रबंधकों का विकास: भविष्य के लिए योग्य प्रबंधकों का एक पूल तैयार करता है।
- कम पर्यवेक्षण की आवश्यकता: प्रशिक्षित कर्मचारी अधिक आत्मनिर्भर होते हैं, जिससे पर्यवेक्षण की आवश्यकता कम होती है।
- दुर्घटनाओं में कमी: प्रशिक्षित कर्मचारी सुरक्षा प्रक्रियाओं से अवगत होते हैं, जिससे दुर्घटनाएं कम होती हैं।
- श्रम आवर्तन में कमी: संतुष्ट और विकसित कर्मचारी संगठन में बने रहते हैं, जिससे श्रम आवर्तन (labour turnover) कम होता है।
- तेजी से बदलते परिवेश से निपटना: कर्मचारियों को नई तकनीकों और कार्यप्रणालियों से अवगत कराता है।
ब. कर्मचारियों के लिए (For the Employees):
- बेहतर करियर के अवसर: कौशल और ज्ञान में वृद्धि से पदोन्नति और बेहतर करियर के अवसर मिलते हैं।
- आय में वृद्धि: बेहतर प्रदर्शन और कौशल से उच्च वेतन और प्रोत्साहन प्राप्त होते हैं।
- आत्मविश्वास में वृद्धि: प्रशिक्षण से कर्मचारियों का आत्मविश्वास बढ़ता है।
- दुर्घटनाओं का जोखिम कम: सुरक्षा प्रशिक्षण से कार्यस्थल पर दुर्घटनाओं का जोखिम कम होता है।
- बाजार मूल्य में वृद्धि: प्रशिक्षित और कुशल कर्मचारियों का बाजार मूल्य अधिक होता है।
प्रशिक्षण की विधियाँ (Methods of Training):
अ. कार्य पर प्रशिक्षण (On-the-Job Training):
यह वह प्रशिक्षण है जो कर्मचारी को कार्य करते समय ही दिया जाता है। यह लागत प्रभावी होता है।
- कार्य पर अनुदेश (Apprenticeship Programs): प्रशिक्षु को एक अनुभवी गुरु (master worker) के मार्गदर्शन में कार्य सिखाया जाता है। इसमें सैद्धांतिक और व्यावहारिक ज्ञान दोनों शामिल होते हैं।
- प्रशिक्षुता कार्यक्रम (Coaching): एक वरिष्ठ प्रबंधक या गुरु (coach) प्रशिक्षु को व्यक्तिगत रूप से मार्गदर्शन और प्रतिक्रिया प्रदान करता है।
- इंटर्नशिप (Internship Training): व्यावसायिक संस्थानों के छात्रों को वास्तविक कार्य वातावरण में व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने का अवसर मिलता है। इसमें संगठन और शैक्षणिक संस्थान दोनों मिलकर काम करते हैं।
- कार्य अनुदेश विधि (Job Instruction Training): कर्मचारी को चरण-दर-चरण कार्य सिखाया जाता है, जिसमें प्रत्येक चरण का प्रदर्शन और अभ्यास शामिल होता है।
ब. कार्य से परे प्रशिक्षण (Off-the-Job Training):
यह प्रशिक्षण कार्यस्थल से दूर एक विशेष प्रशिक्षण केंद्र या कक्षा में दिया जाता है।
- व्याख्यान/सम्मेलन (Lectures/Conferences): बड़ी संख्या में कर्मचारियों को सैद्धांतिक जानकारी देने के लिए।
- फिल्म (Films): जटिल प्रक्रियाओं को आसानी से समझाने के लिए दृश्य-श्रव्य माध्यम का उपयोग।
- केस स्टडी (Case Study): कर्मचारियों को वास्तविक व्यावसायिक समस्याओं का विश्लेषण करने और समाधान खोजने के लिए प्रोत्साहित करना।
- कंप्यूटर मॉडलिंग (Computer Modelling): कंप्यूटर सिमुलेशन का उपयोग करके वास्तविक कार्य स्थितियों का अनुकरण करना।
- वेस्टिब्यूल प्रशिक्षण (Vestibule Training): वास्तविक कार्यस्थल के समान एक कृत्रिम कार्यस्थल (vestibule) में प्रशिक्षण देना। यह विशेष रूप से जटिल और महंगी मशीनों के संचालन के लिए उपयोगी है।
- कार्यक्रमबद्ध अनुदेश (Programmed Instruction): जानकारी को छोटे-छोटे चरणों में विभाजित करके प्रस्तुत करना, जिसमें कर्मचारी अपनी गति से सीखते हैं और तत्काल प्रतिक्रिया प्राप्त करते हैं।
8. मानव संसाधन प्रबंधन (Human Resource Management - HRM)
नियुक्तिकरण का क्षेत्र समय के साथ विकसित हुआ है। पहले इसे केवल 'कार्मिक कार्य' (Personnel Function) के रूप में देखा जाता था, जिसमें भर्ती, चयन, वेतन आदि शामिल थे। लेकिन आधुनिक समय में, यह एक व्यापक अवधारणा बन गई है जिसे 'मानव संसाधन प्रबंधन' (HRM) कहा जाता है।
मानव संसाधन प्रबंधन का अर्थ (Meaning of HRM):
मानव संसाधन प्रबंधन, प्रबंधन का वह क्षेत्र है जो संगठन में मानव संसाधनों के प्रभावी उपयोग के लिए नीतियों, प्रणालियों और कार्यक्रमों के नियोजन, संगठन, निर्देशन और नियंत्रण से संबंधित है। यह कर्मचारियों को एक संपत्ति के रूप में देखता है और उनके विकास पर ध्यान केंद्रित करता है।
मानव संसाधन प्रबंधन की भूमिका (Role of HRM):
- भर्ती, चयन, प्रशिक्षण, विकास, निष्पादन मूल्यांकन, पदोन्नति और पारिश्रमिक का प्रबंधन।
- कर्मचारियों के कल्याण और सुरक्षा का ध्यान रखना।
- औद्योगिक संबंधों का प्रबंधन।
- कर्मचारी रिकॉर्ड बनाए रखना।
- संगठनात्मक विकास में योगदान देना।
नियुक्तिकरण का HRM से संबंध (Relationship of Staffing with HRM):
नियुक्तिकरण, मानव संसाधन प्रबंधन का एक महत्वपूर्ण और अभिन्न अंग है। HRM का दायरा नियुक्तिकरण से कहीं अधिक व्यापक है। नियुक्तिकरण मुख्य रूप से सही व्यक्ति को सही स्थान पर लाने और बनाए रखने पर केंद्रित है, जबकि HRM कर्मचारियों को संगठन की सबसे मूल्यवान संपत्ति के रूप में देखता है और उनके समग्र विकास, कल्याण और प्रभावी उपयोग पर ध्यान केंद्रित करता है ताकि वे संगठन के लक्ष्यों में अधिकतम योगदान दे सकें।
बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions - MCQs)
-
नियुक्तिकरण प्रक्रिया का पहला चरण क्या है?
अ) भर्ती
ब) चयन
स) मानव शक्ति आवश्यकताओं का अनुमान
द) प्रशिक्षण
उत्तर: स) -
निम्न में से कौन-सा भर्ती का आंतरिक स्रोत नहीं है?
अ) पदोन्नति
ब) स्थानांतरण
स) कैंपस भर्ती
द) आकस्मिक आवेदक
उत्तर: स) -
कर्मचारी को समान स्तर पर एक विभाग से दूसरे विभाग में स्थानांतरित करना क्या कहलाता है?
अ) पदोन्नति
ब) स्थानांतरण
स) पदावनति
द) भर्ती
उत्तर: ब) -
चयन प्रक्रिया में प्रारंभिक जाँच के बाद अगला चरण क्या है?
अ) रोजगार साक्षात्कार
ब) डॉक्टरी जाँच
स) चयन परीक्षाएँ
द) कार्य प्रस्ताव
उत्तर: स) -
निम्न में से कौन-सी परीक्षा व्यक्ति की नई चीजें सीखने की क्षमता को मापती है?
अ) बुद्धि परीक्षा
ब) अभिरुचि परीक्षा
स) व्यक्तित्व परीक्षा
द) व्यापार परीक्षा
उत्तर: ब) -
प्रशिक्षण का वह तरीका जिसमें कर्मचारी को वास्तविक कार्यस्थल के समान एक कृत्रिम कार्यस्थल में प्रशिक्षित किया जाता है, कहलाता है:
अ) इंटर्नशिप
ब) वेस्टिब्यूल प्रशिक्षण
स) प्रशिक्षुता कार्यक्रम
द) कार्य पर अनुदेश
उत्तर: ब) -
मानव संसाधन प्रबंधन (HRM) का मुख्य उद्देश्य क्या है?
अ) केवल भर्ती और चयन करना
ब) मानव संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना
स) केवल कर्मचारियों को वेतन देना
द) केवल कर्मचारियों को अनुशासित करना
उत्तर: ब) -
निम्न में से कौन-सा प्रशिक्षण का 'कार्य पर' तरीका है?
अ) केस स्टडी
ब) व्याख्यान
स) इंटर्नशिप
द) कंप्यूटर मॉडलिंग
उत्तर: स) -
निष्पादन मूल्यांकन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
अ) कर्मचारियों को दंडित करना
ब) कर्मचारियों के वास्तविक कार्य निष्पादन की तुलना निर्धारित मानकों से करना
स) केवल वेतन वृद्धि का निर्णय लेना
द) कर्मचारियों को नौकरी से निकालना
उत्तर: ब) -
बाह्य भर्ती स्रोतों का एक प्रमुख लाभ क्या है?
अ) कम लागत
ब) कर्मचारियों का उच्च मनोबल
स) व्यापक प्रतिभा पूल तक पहुंच
द) कम समय लेने वाली प्रक्रिया
उत्तर: स)
मुझे आशा है कि ये विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपकी 'नियुक्तिकरण' अध्याय की तैयारी में अत्यंत सहायक सिद्ध होंगे। अपनी पढ़ाई जारी रखें और सफलता अवश्य प्राप्त करें।