Class 12 Business Studies Notes Chapter 7 (निर्देशन) – Vyavsai Adhyayan-I Book

प्रिय विद्यार्थियों,
आज हम व्यावसायिक अध्ययन के एक अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय 'निर्देशन' का विस्तृत अध्ययन करेंगे, जो न केवल आपकी बोर्ड परीक्षाओं के लिए बल्कि विभिन्न सरकारी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा। यह अध्याय प्रबंधन के उस महत्वपूर्ण कार्य पर प्रकाश डालता है, जो संगठन में मानवीय प्रयासों को सही दिशा देकर लक्ष्यों की प्राप्ति सुनिश्चित करता है।
अध्याय 7: निर्देशन (Directing)
1. निर्देशन का अर्थ (Meaning of Directing)
निर्देशन प्रबंधन का वह कार्य है जो लोगों को संगठन के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए कुशलतापूर्वक और प्रभावी ढंग से काम करने के लिए प्रेरित, मार्गदर्शन, पर्यवेक्षण और संवाद करता है। यह प्रबंधन का कार्यकारी कार्य है, जो नियोजन, संगठन और नियुक्तिकरण के बाद आता है। यह वह प्रक्रिया है जो कर्मचारियों को यह बताती है कि क्या करना है, कैसे करना है और यह सुनिश्चित करती है कि वे इसे सर्वोत्तम संभव तरीके से करें।
2. निर्देशन की विशेषताएँ (Characteristics/Features of Directing)
- गति शुरू करता है (Initiates Action): निर्देशन वह कार्य है जो संगठन में काम शुरू करता है। नियोजन, संगठन और नियुक्तिकरण केवल तैयारी के कार्य हैं; वास्तविक कार्य निर्देशन के माध्यम से शुरू होता है।
- प्रबंधन के प्रत्येक स्तर पर होता है (Takes place at every level of Management): निर्देशन केवल शीर्ष स्तर पर नहीं होता, बल्कि सभी प्रबंधकीय स्तरों पर होता है। एक प्रबंधक अपने अधीनस्थों को निर्देश देता है, और वह स्वयं अपने वरिष्ठों से निर्देश प्राप्त करता है।
- सतत प्रक्रिया (Continuous Process): निर्देशन एक सतत प्रक्रिया है, यह संगठन के पूरे जीवनकाल तक चलती रहती है। जब तक संगठन मौजूद है, तब तक निर्देशन की आवश्यकता होगी।
- ऊपर से नीचे की ओर प्रवाह (Flows from Top to Bottom): निर्देशन एक पदानुक्रमित प्रक्रिया है जो शीर्ष स्तर से शुरू होकर नीचे की ओर प्रवाहित होती है। एक वरिष्ठ अपने अधीनस्थों को निर्देश देता है।
- मानव तत्व (Human Element): निर्देशन सीधे कर्मचारियों के मानवीय व्यवहार से संबंधित है। यह कर्मचारियों के प्रदर्शन को प्रभावित करने और उन्हें वांछित दिशा में ले जाने पर केंद्रित है।
3. निर्देशन का महत्व (Importance of Directing)
- कार्यवाही शुरू करता है (Initiates Action): निर्देशन ही वह कार्य है जो संगठन में वास्तविक कार्य को गति प्रदान करता है।
- प्रयासों को एकीकृत करता है (Integrates Efforts): यह विभिन्न व्यक्तियों और विभागों के प्रयासों को एक साथ लाता है और उन्हें एक सामान्य लक्ष्य की ओर निर्देशित करता है।
- प्रेरणा का साधन (Means of Motivation): निर्देशन के माध्यम से कर्मचारियों को उनके प्रदर्शन में सुधार के लिए प्रेरित किया जाता है।
- संतुलन स्थापित करता है (Provides Stability): यह संगठन में स्थिरता और संतुलन बनाए रखने में मदद करता है, क्योंकि यह परिवर्तनों को समायोजित करने और कर्मचारियों को उनके अनुकूल बनाने में सहायता करता है।
- परिवर्तन को सुगम बनाता है (Facilitates Change): प्रभावी निर्देशन कर्मचारियों को संगठनात्मक परिवर्तनों को स्वीकार करने और उनके अनुकूल होने में मदद करता है, जिससे प्रतिरोध कम होता है।
- संसाधनों का कुशल उपयोग (Efficient Use of Resources): सही मार्गदर्शन और पर्यवेक्षण से संसाधनों का अपव्यय कम होता है और उनका अधिकतम उपयोग सुनिश्चित होता है।
4. निर्देशन के तत्व (Elements of Directing)
निर्देशन के चार मुख्य तत्व हैं:
- पर्यवेक्षण (Supervision)
- अभिप्रेरण (Motivation)
- नेतृत्व (Leadership)
- संदेशवहन (Communication)
4.1. पर्यवेक्षण (Supervision)
- अर्थ (Meaning): पर्यवेक्षण का अर्थ है अधीनस्थों के काम की निगरानी करना और यह सुनिश्चित करना कि वे आवंटित कार्यों को योजना और निर्देशों के अनुसार कर रहे हैं। यह 'सुपर' (अतिरिक्त/ऊपर) और 'विजन' (देखना) से बना है, जिसका अर्थ है 'अधिनस्थों के काम को देखना और उन्हें निर्देशित करना'।
- महत्व (Importance):
- प्रत्यक्ष संपर्क (Direct Contact): पर्यवेक्षक और कर्मचारी के बीच सीधा संपर्क होता है।
- अनुशासन बनाए रखना (Maintaining Discipline): पर्यवेक्षक कार्यस्थल पर अनुशासन बनाए रखने में मदद करता है।
- प्रतिक्रिया प्रदान करना (Providing Feedback): यह कर्मचारियों को उनके प्रदर्शन पर तत्काल प्रतिक्रिया देता है।
- प्रशिक्षण और मार्गदर्शन (Training and Guidance): पर्यवेक्षक अधीनस्थों को कार्य पर प्रशिक्षण और मार्गदर्शन प्रदान करता है।
- उत्पादन में वृद्धि (Increased Production): प्रभावी पर्यवेक्षण से उत्पादकता बढ़ती है।
4.2. अभिप्रेरण (Motivation)
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अर्थ (Meaning): अभिप्रेरण वह प्रक्रिया है जो लोगों को संगठनात्मक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सर्वोत्तम क्षमता से कार्य करने के लिए उत्तेजित करती है, प्रोत्साहित करती है और प्रेरित करती है। यह एक आंतरिक मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया है।
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विशेषताएँ (Characteristics):
- एक आंतरिक भावना (An Internal Feeling): यह व्यक्तियों की आंतरिक इच्छाओं और आवश्यकताओं से उत्पन्न होती है।
- लक्ष्य-उन्मुख व्यवहार (Goal-Oriented Behavior): यह लोगों को विशिष्ट लक्ष्यों की ओर निर्देशित करता है।
- सकारात्मक या नकारात्मक हो सकती है (Can be Positive or Negative): प्रोत्साहन (पुरस्कार) सकारात्मक अभिप्रेरण है, जबकि दंड (भय) नकारात्मक अभिप्रेरण है।
- जटिल प्रक्रिया (Complex Process): हर व्यक्ति की आवश्यकताएँ अलग-अलग होती हैं, इसलिए सभी को एक ही तरीके से प्रेरित करना मुश्किल होता है।
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अभिप्रेरण प्रक्रिया (Motivation Process):
- अपूर्ण आवश्यकता (Unsatisfied Need): व्यक्ति को किसी आवश्यकता की कमी महसूस होती है।
- तनाव (Tension): यह कमी व्यक्ति में तनाव पैदा करती है।
- प्रेरणा (Drives): तनाव व्यक्ति को कुछ करने के लिए प्रेरित करता है।
- खोज व्यवहार (Search Behavior): व्यक्ति आवश्यकता को पूरा करने के तरीके खोजता है।
- संतुष्ट आवश्यकता (Satisfied Need): आवश्यकता पूरी हो जाती है।
- तनाव में कमी (Reduction of Tension): आवश्यकता पूरी होने पर तनाव कम हो जाता है।
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मैस्लो का आवश्यकता पदानुक्रम सिद्धांत (Maslow's Need Hierarchy Theory):
अब्राहम मैस्लो ने प्रस्तावित किया कि लोगों की आवश्यकताएँ एक पदानुक्रम में व्यवस्थित होती हैं और जब एक स्तर की आवश्यकता पूरी हो जाती है, तो व्यक्ति अगले स्तर की आवश्यकता को पूरा करने की ओर बढ़ता है।- शारीरिक आवश्यकताएँ (Physiological Needs): ये बुनियादी आवश्यकताएँ हैं जैसे भोजन, पानी, आश्रय, नींद, वस्त्र। संगठन में ये वेतन, काम के घंटे, काम करने की स्थिति से संबंधित हैं।
- सुरक्षा आवश्यकताएँ (Safety Needs): शारीरिक सुरक्षा और भावनात्मक सुरक्षा की आवश्यकता। संगठन में ये नौकरी की सुरक्षा, पेंशन योजनाएँ, भविष्य निधि, बीमा आदि से संबंधित हैं।
- सामाजिक आवश्यकताएँ (Social Needs): संबद्धता, दोस्ती, प्यार और अपनेपन की भावना की आवश्यकता। संगठन में ये टीम वर्क, मैत्रीपूर्ण संबंध, सामाजिक समारोहों से संबंधित हैं।
- सम्मान आवश्यकताएँ (Esteem Needs): आत्म-सम्मान, मान्यता, स्थिति, प्रशंसा और सम्मान की आवश्यकता। संगठन में ये पदोन्नति, पुरस्कार, उच्च पद, जिम्मेदारी से संबंधित हैं।
- आत्म-वास्तविकीकरण आवश्यकताएँ (Self-Actualization Needs): अपनी पूरी क्षमता का एहसास करने, बढ़ने और आत्म-पूर्ति की आवश्यकता। संगठन में ये चुनौतीपूर्ण कार्य, रचनात्मकता, निर्णय लेने की स्वतंत्रता से संबंधित हैं।
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वित्तीय और गैर-वित्तीय प्रोत्साहन (Financial and Non-Financial Incentives):
- वित्तीय प्रोत्साहन (Financial Incentives): ये मौद्रिक लाभ या ऐसे प्रोत्साहन हैं जिन्हें मौद्रिक शर्तों में मापा जा सकता है।
- वेतन और भत्ते (Pay and Allowances): मूल वेतन, महंगाई भत्ता, मकान किराया भत्ता आदि।
- उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (Productivity Linked Wage Incentives): अधिक उत्पादन करने पर अधिक मजदूरी।
- बोनस (Bonus): अतिरिक्त भुगतान जो प्रदर्शन या मुनाफे से जुड़ा होता है।
- लाभ सहभागिता (Profit Sharing): कर्मचारियों को कंपनी के मुनाफे का एक हिस्सा देना।
- सह-भागीदारी (Co-partnership/Stock Option): कर्मचारियों को कंपनी के शेयर रियायती दर पर खरीदने का विकल्प देना।
- सेवानिवृत्ति लाभ (Retirement Benefits): पेंशन, ग्रेच्युटी, भविष्य निधि आदि।
- सुझाव प्रणाली (Suggesting System): अच्छे सुझावों के लिए नकद पुरस्कार।
- गैर-वित्तीय प्रोत्साहन (Non-Financial Incentives): ये मनोवैज्ञानिक, भावनात्मक और सामाजिक संतुष्टि प्रदान करते हैं और मौद्रिक शब्दों में मापा नहीं जा सकता है।
- पद/स्थिति (Status): पद, अधिकार, जिम्मेदारी और मान्यता।
- संगठनात्मक वातावरण (Organizational Climate): कार्यस्थल का वातावरण जो व्यक्तिगत विकास और मान्यता को बढ़ावा देता है।
- कैरियर में उन्नति के अवसर (Career Advancement Opportunities): पदोन्नति और विकास के अवसर।
- कार्य संवर्धन (Job Enrichment): कार्य को अधिक चुनौतीपूर्ण और संतोषजनक बनाना।
- कर्मचारी मान्यता कार्यक्रम (Employee Recognition Programmes): कर्मचारियों के अच्छे प्रदर्शन को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करना।
- कार्य सुरक्षा (Job Security): नौकरी खोने के डर से मुक्ति।
- कर्मचारी सहभागिता (Employee Participation): निर्णय लेने में कर्मचारियों को शामिल करना।
- कर्मचारी सशक्तिकरण (Employee Empowerment): कर्मचारियों को अधिक स्वायत्तता और अधिकार देना।
- वित्तीय प्रोत्साहन (Financial Incentives): ये मौद्रिक लाभ या ऐसे प्रोत्साहन हैं जिन्हें मौद्रिक शर्तों में मापा जा सकता है।
4.3. नेतृत्व (Leadership)
- अर्थ (Meaning): नेतृत्व वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा एक व्यक्ति दूसरों को एक सामान्य लक्ष्य की दिशा में काम करने के लिए प्रभावित करता है। यह अधीनस्थों के व्यवहार को प्रभावित करने की क्षमता है।
- विशेषताएँ (Characteristics):
- दूसरों को प्रभावित करने की क्षमता (Ability to Influence Others): नेता में दूसरों के व्यवहार को प्रभावित करने की क्षमता होती है।
- व्यवहार में परिवर्तन (Change in Behavior): नेतृत्व का उद्देश्य अधीनस्थों के व्यवहार में वांछित परिवर्तन लाना है।
- सामान्य हित (Common Interest): नेतृत्व हमेशा सामान्य संगठनात्मक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए होता है।
- निरंतर प्रक्रिया (Continuous Process): नेतृत्व एक सतत प्रक्रिया है।
- अंतर-व्यक्तिगत संबंध (Interpersonal Relations): नेता और अनुयायियों के बीच संबंध होते हैं।
- महत्व (Importance):
- व्यवहार को प्रभावित करता है (Influences Behavior): नेता अधीनस्थों के व्यवहार को सकारात्मक रूप से प्रभावित करता है।
- परिवर्तन को सुगम बनाता है (Facilitates Change): नेता परिवर्तनों को स्वीकार करने में कर्मचारियों की मदद करता है।
- संघर्षों को हल करता है (Resolves Conflicts): नेता समूह के भीतर संघर्षों को सुलझाने में मदद करता है।
- प्रशिक्षण और मार्गदर्शन (Training and Guidance): नेता अधीनस्थों को प्रशिक्षित और मार्गदर्शन करता है।
- प्रेरणा प्रदान करता है (Provides Motivation): नेता अपने उदाहरण और प्रेरणा से कर्मचारियों को प्रेरित करता है।
- नेतृत्व की शैलियाँ (Leadership Styles):
- सत्तावादी या निरंकुश नेतृत्व (Autocratic or Authoritarian Leadership):
- नेता सभी निर्णय स्वयं लेता है और अधीनस्थों से परामर्श नहीं करता।
- अधीनस्थों से अपेक्षा की जाती है कि वे निर्देशों का पालन करें।
- संचार एकतरफा (ऊपर से नीचे) होता है।
- लाभ: त्वरित निर्णय, मजबूत नियंत्रण।
- हानि: प्रेरणा कम, असंतोष, रचनात्मकता का अभाव।
- लोकतांत्रिक या सहभागी नेतृत्व (Democratic or Participative Leadership):
- नेता निर्णय लेने में अधीनस्थों से परामर्श करता है और उनके विचारों को महत्व देता है।
- अधिकारों का विकेंद्रीकरण होता है।
- संचार द्वि-दिशात्मक होता है।
- लाभ: उच्च मनोबल, बेहतर निर्णय, रचनात्मकता को बढ़ावा।
- हानि: निर्णय लेने में देरी, गोपनीयता की समस्या।
- स्वच्छंद या मुक्त-छूट नेतृत्व (Laissez-faire or Free-rein Leadership):
- नेता अधीनस्थों को लगभग पूरी स्वतंत्रता देता है कि वे अपने लक्ष्य कैसे प्राप्त करें।
- नेता केवल संसाधन उपलब्ध कराता है और न्यूनतम हस्तक्षेप करता है।
- अधीनस्थों को स्वयं निर्णय लेने की पूरी छूट होती है।
- लाभ: उच्च मनोबल, रचनात्मकता, आत्मनिर्भरता।
- हानि: समन्वय की कमी, दिशाहीनता, जिम्मेदारी से बचना।
- सत्तावादी या निरंकुश नेतृत्व (Autocratic or Authoritarian Leadership):
4.4. संदेशवहन (Communication)
- अर्थ (Meaning): संदेशवहन वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा विचारों, तथ्यों, भावनाओं आदि का दो या दो से अधिक व्यक्तियों के बीच आदान-प्रदान किया जाता है ताकि एक सामान्य समझ स्थापित हो सके।
- संदेशवहन प्रक्रिया के तत्व (Elements of Communication Process):
- प्रेषक (Sender): वह व्यक्ति जो संदेश भेजता है।
- कूटबद्धता (Encoding): संदेश को प्रतीकों, शब्दों, चित्रों आदि में बदलना।
- संदेश (Message): प्रेषक द्वारा भेजा जाने वाला विचार, तथ्य, जानकारी।
- माध्यम (Media): वह चैनल जिसके माध्यम से संदेश भेजा जाता है (जैसे मौखिक, लिखित, ईमेल, फोन)।
- कूट-वाचन (Decoding): प्राप्तकर्ता द्वारा संदेश को समझना।
- प्राप्तकर्ता (Receiver): वह व्यक्ति जिसे संदेश भेजा जाता है।
- प्रतिपुष्टि (Feedback): प्राप्तकर्ता की प्रतिक्रिया, जो यह दर्शाती है कि संदेश को समझा गया है या नहीं।
- शोर (Noise): संदेशवहन प्रक्रिया में कोई भी बाधा जो संदेश के अर्थ को विकृत कर सकती है (जैसे खराब कनेक्शन, गलत कूट-वाचन, ध्यान भंग)।
- संदेशवहन का महत्व (Importance of Communication):
- सूचना का आधार (Basis of Information): निर्णय लेने के लिए आवश्यक जानकारी प्रदान करता है।
- सहयोग और समन्वय (Cooperation and Coordination): विभिन्न विभागों और व्यक्तियों के बीच समन्वय स्थापित करता है।
- प्रभावी नेतृत्व (Effective Leadership): नेता अपने विचारों को अधीनस्थों तक पहुँचाने के लिए संदेशवहन का उपयोग करते हैं।
- प्रेरणा का स्रोत (Source of Motivation): प्रभावी संदेशवहन कर्मचारियों को प्रेरित करता है।
- औद्योगिक शांति (Industrial Peace): प्रबंधन और कर्मचारियों के बीच गलतफहमी को कम करके औद्योगिक शांति बनाए रखता है।
- औपचारिक संदेशवहन (Formal Communication):
- यह संगठनात्मक संरचना में निर्धारित आधिकारिक चैनलों के माध्यम से होता है।
- यह आमतौर पर लिखित होता है और एक विशिष्ट पदानुक्रम का पालन करता है।
- प्रकार (Types):
- नीचेगामी संदेशवहन (Downward Communication): उच्च स्तर से निम्न स्तर तक (जैसे आदेश, निर्देश, नीतियां)।
- ऊपरगामी संदेशवहन (Upward Communication): निम्न स्तर से उच्च स्तर तक (जैसे शिकायतें, सुझाव, रिपोर्ट)।
- क्षैतिज संदेशवहन (Horizontal Communication): समान स्तर के व्यक्तियों या विभागों के बीच (जैसे विभिन्न विभागों के प्रबंधकों के बीच)।
- विकर्णीय संदेशवहन (Diagonal Communication): विभिन्न स्तरों और विभागों के व्यक्तियों के बीच (जैसे उत्पादन प्रबंधक का बिक्री प्रतिनिधि से सीधे बात करना)।
- औपचारिक संदेशवहन की श्रृंखलाएँ (Formal Communication Networks):
- एकल श्रृंखला (Single Chain): प्रत्येक अधीनस्थ अपने तत्काल वरिष्ठ से संदेश प्राप्त करता है और उसे भेजता है।
- चक्र (Wheel): सभी अधीनस्थ एक केंद्रीय व्यक्ति (वरिष्ठ) से संदेश प्राप्त करते हैं और उसे भेजते हैं।
- वृत्त (Circle): प्रत्येक व्यक्ति अपने आस-पास के दो व्यक्तियों से संवाद कर सकता है।
- सभी चैनल (All Channel): कोई भी सदस्य किसी भी अन्य सदस्य से संवाद कर सकता है।
- अनौपचारिक संदेशवहन / अंगूरीलता (Informal Communication / Grapevine):
- यह संगठनात्मक संरचना के बाहर, सामाजिक संबंधों के कारण उत्पन्न होता है।
- यह तेजी से फैलता है और अक्सर गलत सूचना भी फैला सकता है।
- विशेषताएँ:
- तेज गति से फैलता है।
- दिशाहीन होता है (किसी भी दिशा में फैल सकता है)।
- प्रबंधन द्वारा नियंत्रित करना मुश्किल।
- अक्सर अफवाहों और गपशप का स्रोत।
- प्रकार (Types of Grapevine Networks):
- एकल श्रृंखला (Single Strand): एक व्यक्ति दूसरे को, दूसरा तीसरे को बताता है।
- गपशप श्रृंखला (Gossip Chain): एक व्यक्ति सभी को बताता है।
- संभाव्यता श्रृंखला (Probability Chain): एक व्यक्ति यादृच्छिक रूप से किसी को बताता है, और वह व्यक्ति भी यादृच्छिक रूप से किसी और को बताता है।
- गुच्छा श्रृंखला (Cluster Chain): एक व्यक्ति उन लोगों को बताता है जिन पर वह भरोसा करता है, और वे भी अपने भरोसेमंद लोगों को बताते हैं।
- संदेशवहन की बाधाएँ (Barriers to Communication):
- शब्दार्थ बाधाएँ (Semantic Barriers):
- संदेशों का गलत अर्थ निकालना।
- खराब तरीके से कूटबद्ध संदेश।
- तकनीकी शब्दावली का उपयोग।
- शरीर की भाषा और हावभाव में अंतर।
- मनोवैज्ञानिक बाधाएँ (Psychological Barriers):
- समय से पहले मूल्यांकन (Pre-mature evaluation)।
- ध्यान की कमी (Lack of attention)।
- विश्वास की कमी (Lack of trust)।
- भावनाएँ (Emotions)।
- जानकारी का प्रतिधारण (Filtering of information)।
- सांगठनिक बाधाएँ (Organizational Barriers):
- संगठनात्मक नीति (Organizational policy)।
- नियम और विनियम (Rules and regulations)।
- स्थिति (Status) या पदानुक्रम।
- जटिल संगठनात्मक संरचना।
- व्यक्तिगत बाधाएँ (Personal Barriers):
- वरिष्ठों में अधीनस्थों पर विश्वास की कमी।
- अधिकार के लिए भय।
- सूचना को बनाए रखने की अनिच्छा।
- संचार के लिए अपर्याप्त समय।
- शब्दार्थ बाधाएँ (Semantic Barriers):
- प्रभावी संदेशवहन में सुधार के उपाय (Measures to Improve Effective Communication):
- संदेश को स्पष्ट करें।
- प्राप्तकर्ता की आवश्यकताओं के अनुसार संदेश तैयार करें।
- परामर्श का उपयोग करें।
- भाषा, स्वर और सामग्री के प्रति सचेत रहें।
- उचित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करें।
- वर्तमान के साथ-साथ भविष्य के लिए भी संचार करें।
- एक अच्छे श्रोता बनें।
बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions - MCQs)
-
प्रबंधन का कौन सा कार्य लोगों को संगठन के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए कुशलतापूर्वक और प्रभावी ढंग से काम करने के लिए प्रेरित, मार्गदर्शन, पर्यवेक्षण और संवाद करता है?
a) नियोजन
b) संगठन
c) नियुक्तिकरण
d) निर्देशन -
मैस्लो के आवश्यकता पदानुक्रम सिद्धांत के अनुसार, नौकरी की सुरक्षा और पेंशन योजनाएँ किस प्रकार की आवश्यकताओं को पूरा करती हैं?
a) शारीरिक आवश्यकताएँ
b) सुरक्षा आवश्यकताएँ
c) सामाजिक आवश्यकताएँ
d) सम्मान आवश्यकताएँ -
निम्नलिखित में से कौन सा गैर-वित्तीय प्रोत्साहन का एक उदाहरण है?
a) बोनस
b) लाभ सहभागिता
c) कार्य संवर्धन
d) सह-भागीदारी -
नेतृत्व की किस शैली में नेता सभी निर्णय स्वयं लेता है और अधीनस्थों से परामर्श नहीं करता?
a) लोकतांत्रिक नेतृत्व
b) स्वच्छंद नेतृत्व
c) सत्तावादी नेतृत्व
d) सहभागी नेतृत्व -
संदेशवहन प्रक्रिया में, प्रेषक द्वारा संदेश को प्रतीकों, शब्दों या चित्रों में बदलने की प्रक्रिया को क्या कहते हैं?
a) कूट-वाचन (Decoding)
b) कूटबद्धता (Encoding)
c) प्रतिपुष्टि (Feedback)
d) माध्यम (Media) -
वह अनौपचारिक संदेशवहन श्रृंखला जिसमें एक व्यक्ति उन लोगों को बताता है जिन पर वह भरोसा करता है, और वे भी अपने भरोसेमंद लोगों को बताते हैं, क्या कहलाती है?
a) एकल श्रृंखला
b) गपशप श्रृंखला
c) संभाव्यता श्रृंखला
d) गुच्छा श्रृंखला -
निम्नलिखित में से कौन सा पर्यवेक्षण का एक महत्व नहीं है?
a) प्रत्यक्ष संपर्क बनाए रखना
b) अनुशासन बनाए रखना
c) कर्मचारियों को प्रेरित करना
d) संसाधनों का अपव्यय बढ़ाना -
जब एक प्रबंधक अपने अधीनस्थों को निर्देश देता है, और वह स्वयं अपने वरिष्ठों से निर्देश प्राप्त करता है, तो यह निर्देशन की किस विशेषता को दर्शाता है?
a) गति शुरू करता है
b) सतत प्रक्रिया
c) प्रबंधन के प्रत्येक स्तर पर होता है
d) मानव तत्व -
संदेशवहन की कौन सी बाधा खराब तरीके से कूटबद्ध संदेशों या तकनीकी शब्दावली के उपयोग से संबंधित है?
a) मनोवैज्ञानिक बाधाएँ
b) सांगठनिक बाधाएँ
c) व्यक्तिगत बाधाएँ
d) शब्दार्थ बाधाएँ -
निम्नलिखित में से कौन सा निर्देशन का तत्व नहीं है?
a) पर्यवेक्षण
b) अभिप्रेरण
c) नियोजन
d) नेतृत्व
MCQs के उत्तर:
- d) निर्देशन
- b) सुरक्षा आवश्यकताएँ
- c) कार्य संवर्धन
- c) सत्तावादी नेतृत्व
- b) कूटबद्धता (Encoding)
- d) गुच्छा श्रृंखला
- d) संसाधनों का अपव्यय बढ़ाना
- c) प्रबंधन के प्रत्येक स्तर पर होता है
- d) शब्दार्थ बाधाएँ
- c) नियोजन
मुझे उम्मीद है कि ये विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपको 'निर्देशन' अध्याय को गहराई से समझने और सरकारी परीक्षाओं की तैयारी में मदद करेंगे। अपनी पढ़ाई जारी रखें और कोई भी संदेह होने पर पूछने में संकोच न करें। शुभकामनाएँ!