Class 12 Chemistry Notes Chapter 1 (Chapter 1) – Examplar Problems (Hindi) Book

प्रिय विद्यार्थियों,
आज हम रसायन विज्ञान के अध्याय 1 'ठोस अवस्था' का विस्तृत अध्ययन करेंगे, जो आपकी सरकारी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस अध्याय में हम ठोसों के विभिन्न गुणों, उनके वर्गीकरण, क्रिस्टल संरचनाओं और उनमें पाए जाने वाले दोषों के बारे में जानेंगे।
अध्याय 1: ठोस अवस्था (The Solid State)
1. परिचय (Introduction)
पदार्थ की तीन मुख्य अवस्थाएँ होती हैं - ठोस, द्रव और गैस। ठोस अवस्था पदार्थ की वह अवस्था है जिसमें कण (परमाणु, अणु या आयन) एक निश्चित और स्थिर स्थिति में होते हैं, और केवल अपनी माध्य स्थिति के चारों ओर कंपन कर सकते हैं।
2. ठोसों के सामान्य अभिलक्षण (General Characteristics of Solids)
- निश्चित आकार, आयतन और द्रव्यमान: ठोसों का आकार, आयतन और द्रव्यमान निश्चित होता है।
- अंतरा-आण्विक दूरियाँ: अवयवी कणों के बीच अंतरा-आण्विक दूरियाँ बहुत कम होती हैं।
- अंतरा-आण्विक बल: अवयवी कणों के बीच अंतरा-आण्विक बल बहुत प्रबल होते हैं।
- कणों की स्थिति: अवयवी कणों की स्थिति निश्चित होती है और वे केवल अपनी माध्य स्थिति के चारों ओर कंपन कर सकते हैं।
- असंपीड्य और कठोर: ठोस अत्यधिक असंपीड्य और कठोर होते हैं।
- निम्न विसरण दर: ठोसों की विसरण दर बहुत कम होती है।
3. ठोसों का वर्गीकरण (Classification of Solids)
ठोसों को उनके अवयवी कणों की व्यवस्था के आधार पर मुख्य रूप से दो प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है:
A. क्रिस्टलीय ठोस (Crystalline Solids)
- निश्चित ज्यामितीय आकार: इनकी एक निश्चित और अभिलक्षणिक ज्यामितीय आकृति होती है।
- दीर्घ परासी व्यवस्था (Long-range order): अवयवी कणों की व्यवस्था पूरे क्रिस्टल में नियमित और पुनरावर्ती होती है।
- निश्चित गलनांक: ये एक निश्चित और तीव्र तापमान पर पिघलते हैं।
- विषमदैशिक (Anisotropic): इनके कुछ भौतिक गुण (जैसे अपवर्तनांक, विद्युत चालकता) विभिन्न दिशाओं में भिन्न होते हैं।
- वास्तविक ठोस (True Solids): इन्हें वास्तविक ठोस माना जाता है।
- विदलन गुण (Cleavage Property): इन्हें तेज धार वाले उपकरण से काटने पर दो चिकनी सतहों में विभाजित हो जाते हैं।
- उदाहरण: सोडियम क्लोराइड (NaCl), क्वार्ट्ज, बर्फ, धातुएँ।
B. अक्रिस्टलीय ठोस (Amorphous Solids)
- अनियमित आकार: इनकी कोई निश्चित ज्यामितीय आकृति नहीं होती है।
- लघु परासी व्यवस्था (Short-range order): अवयवी कणों की व्यवस्था केवल लघु दूरी तक ही नियमित होती है।
- गलनांक की परास (Melt over a range of temperature): ये तापमान की एक परास पर धीरे-धीरे नरम होते हैं और पिघलते हैं।
- समदैशिक (Isotropic): इनके भौतिक गुण सभी दिशाओं में समान होते हैं।
- आभासी ठोस या अतिशीतित द्रव (Pseudo Solids or Supercooled Liquids): इन्हें आभासी ठोस या अतिशीतित द्रव भी कहते हैं क्योंकि इनमें द्रवों के समान बहने का गुण होता है, यद्यपि बहुत धीमा।
- विदलन गुण नहीं: इन्हें काटने पर अनियमित सतहें प्राप्त होती हैं।
- उदाहरण: काँच, रबर, प्लास्टिक, टार।
4. क्रिस्टलीय ठोसों का वर्गीकरण (Classification of Crystalline Solids)
अवयवी कणों के बीच लगने वाले अंतरा-आण्विक बलों के आधार पर क्रिस्टलीय ठोसों को चार प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है:
a. आण्विक ठोस (Molecular Solids)
- अवयवी कण: अणु।
- आबंध बल: दुर्बल अंतरा-आण्विक बल (वंडर वाल्स बल, द्विध्रुव-द्विध्रुव अन्योन्यक्रिया, हाइड्रोजन बंध)।
- गुण: निम्न गलनांक, विद्युत के कुचालक, मुलायम।
- प्रकार:
- अध्रुवीय आण्विक ठोस: (जैसे H₂, Cl₂, I₂, CH₄, CO₂) - लंदन बल।
- ध्रुवीय आण्विक ठोस: (जैसे HCl, SO₂) - द्विध्रुव-द्विध्रुव अन्योन्यक्रिया।
- हाइड्रोजन आबंधित आण्विक ठोस: (जैसे H₂O (बर्फ), ठोस NH₃) - हाइड्रोजन बंध।
b. आयनिक ठोस (Ionic Solids)
- अवयवी कण: आयन (धनायन और ऋणायन)।
- आबंध बल: प्रबल स्थिरवैद्युत आकर्षण बल।
- गुण: उच्च गलनांक, भंगुर, ठोस अवस्था में विद्युत के कुचालक, गलित अवस्था या जलीय विलयन में सुचालक।
- उदाहरण: NaCl, MgO, ZnS, CaF₂।
c. धात्विक ठोस (Metallic Solids)
- अवयवी कण: धनायन (धातु आयन) का "इलेक्ट्रॉन के समुद्र" में व्यवस्थित होना।
- आबंध बल: धात्विक बंध।
- गुण: कठोर (अपवाद: Na, K), आघातवर्धनीय, तन्य, विद्युत और ऊष्मा के सुचालक, विशिष्ट धात्विक चमक।
- उदाहरण: Fe, Cu, Ag, Mg, सभी धातुएँ और मिश्र धातुएँ।
d. सहसंयोजक या नेटवर्क ठोस (Covalent or Network Solids)
- अवयवी कण: परमाणु।
- आबंध बल: सहसंयोजक बंधों का विशाल नेटवर्क।
- गुण: अत्यंत कठोर (अपवाद: ग्रेफाइट), उच्च गलनांक, विद्युत के कुचालक (ग्रेफाइट अपवाद)।
- उदाहरण: हीरा, ग्रेफाइट, SiO₂ (क्वार्ट्ज), SiC (सिलिकॉन कार्बाइड)।
5. क्रिस्टल जालक और एकक कोष्ठिका (Crystal Lattice and Unit Cell)
- क्रिस्टल जालक (Crystal Lattice): त्रिविमीय आकाश में अवयवी कणों (परमाणु, अणु या आयन) की नियमित और पुनरावर्ती व्यवस्था को क्रिस्टल जालक कहते हैं। जालक में प्रत्येक बिंदु को जालक बिंदु (lattice point) कहते हैं।
- एकक कोष्ठिका (Unit Cell): क्रिस्टल जालक की सबसे छोटी पुनरावर्ती इकाई, जिसे बार-बार दोहराने से पूर्ण क्रिस्टल जालक बनता है।
- एकक कोष्ठिका को उसके अक्षीय दूरियों (a, b, c) और अक्षीय कोणों (α, β, γ) द्वारा अभिलक्षित किया जाता है।
एकक कोष्ठिकाओं के प्रकार (Types of Unit Cells):
- आद्य या सरल एकक कोष्ठिका (Primitive or Simple Unit Cell - P): अवयवी कण केवल कोनों पर उपस्थित होते हैं।
- प्रति एकक कोष्ठिका कणों की संख्या = 8 (कोने) × (1/8) = 1 कण।
- केंद्रित एकक कोष्ठिकाएँ (Centred Unit Cells): कोनों के अतिरिक्त अन्य स्थानों पर भी कण उपस्थित होते हैं।
- फलक-केंद्रित एकक कोष्ठिका (Face-Centred Unit Cell - FCC/F): कोनों पर + प्रत्येक फलक के केंद्र पर कण।
- प्रति एकक कोष्ठिका कणों की संख्या = 8 × (1/8) + 6 (फलक) × (1/2) = 1 + 3 = 4 कण।
- अंतः-केंद्रित एकक कोष्ठिका (Body-Centred Unit Cell - BCC/I): कोनों पर + एक कण केंद्र में।
- प्रति एकक कोष्ठिका कणों की संख्या = 8 × (1/8) + 1 (केंद्र) × 1 = 1 + 1 = 2 कण।
- अंत्य-केंद्रित एकक कोष्ठिका (End-Centred Unit Cell - ECC/C): कोनों पर + किन्हीं दो विपरीत फलकों के केंद्र पर कण।
- प्रति एकक कोष्ठिका कणों की संख्या = 8 × (1/8) + 2 (विपरीत फलक) × (1/2) = 1 + 1 = 2 कण।
- फलक-केंद्रित एकक कोष्ठिका (Face-Centred Unit Cell - FCC/F): कोनों पर + प्रत्येक फलक के केंद्र पर कण।
6. ब्रेवे जालक (Bravais Lattices) और क्रिस्टल तंत्र (Crystal Systems)
कुल 7 क्रिस्टल तंत्र होते हैं, जो अक्षीय दूरियों और अक्षीय कोणों के आधार पर वर्गीकृत होते हैं। इन 7 क्रिस्टल तंत्रों में कुल 14 प्रकार के ब्रेवे जालक संभव हैं।
- घनीय तंत्र (Cubic System):
- अक्षीय दूरियाँ: a = b = c
- अक्षीय कोण: α = β = γ = 90°
- संभावित एकक कोष्ठिकाएँ: आद्य (P), अंतः-केंद्रित (I), फलक-केंद्रित (F)।
- उदाहरण: NaCl, ZnS, Cu।
7. संकुलन दक्षता (Packing Efficiency)
यह क्रिस्टल में अवयवी कणों द्वारा घेरा गया कुल आयतन का प्रतिशत है।
संकुलन दक्षता = (एकक कोष्ठिका में कणों द्वारा घेरा गया आयतन / एकक कोष्ठिका का कुल आयतन) × 100
- सरल घनीय (Simple Cubic - SC): 52.4%
- अंतः-केंद्रित घनीय (Body-Centred Cubic - BCC): 68%
- फलक-केंद्रित घनीय (Face-Centred Cubic - FCC) / घनीय निबिड़ संकुलन (CCP) / षट्कोणीय निबिड़ संकुलन (HCP): 74%
8. रिक्तियाँ (Voids)
क्रिस्टल जालक में अवयवी कणों के बीच खाली स्थानों को रिक्तियाँ कहते हैं।
- चतुष्फलकीय रिक्ति (Tetrahedral Void):
- 4 कणों द्वारा घिरी होती है।
- संख्या = 2N (जहाँ N = निबिड़ संकुलित कणों की संख्या)।
- त्रिज्या अनुपात (r_रिक्ति / r_कण) = 0.225
- अष्टफलकीय रिक्ति (Octahedral Void):
- 6 कणों द्वारा घिरी होती है।
- संख्या = N।
- त्रिज्या अनुपात (r_रिक्ति / r_कण) = 0.414
9. ठोसों में अपूर्णताएँ या दोष (Imperfections or Defects in Solids)
आदर्श क्रिस्टल में अवयवी कणों की नियमित व्यवस्था से विचलन को दोष कहते हैं।
A. बिंदु दोष (Point Defects): एक जालक बिंदु के चारों ओर की आदर्श व्यवस्था में अनियमितता।
* i. स्टॉइकियोमीट्री दोष (Stoichiometric Defects): ठोस की स्टॉइकियोमीट्री (धनायन और ऋणायन का अनुपात) अपरिवर्तित रहती है।
* रिक्ति दोष (Vacancy Defect): कुछ जालक स्थल रिक्त होते हैं। घनत्व घटता है।
* अंतराकाशी दोष (Interstitial Defect): अवयवी कण अंतराकाशी स्थल पर आ जाते हैं। घनत्व बढ़ता है।
* शॉट्की दोष (Schottky Defect): आयनिक ठोसों में, समान संख्या में धनायन और ऋणायन अपने जालक स्थलों से गायब होते हैं। विद्युत उदासीनता बनी रहती है। घनत्व घटता है। (उदाहरण: NaCl, KCl, CsCl, AgBr)।
* फ्रेंकेल दोष (Frenkel Defect): आयनिक ठोसों में, एक आयन (आमतौर पर छोटा धनायन) अपना जालक स्थल छोड़कर अंतराकाशी स्थल में चला जाता है। विद्युत उदासीनता बनी रहती है। घनत्व अपरिवर्तित रहता है। (उदाहरण: AgCl, AgBr, AgI, ZnS)।
* ii. नॉन-स्टॉइकियोमीट्री दोष (Non-Stoichiometric Defects): ठोस की स्टॉइकियोमीट्री बदल जाती है।
* धातु आधिक्य दोष (Metal Excess Defect):
* ऋणायन रिक्तियों के कारण: ऋणायन जालक स्थल से गायब हो जाता है, और उसकी जगह इलेक्ट्रॉन ले लेता है (F-केंद्र)। क्रिस्टल रंगीन हो जाते हैं। (जैसे NaCl पीला, KCl बैंगनी)।
* अंतराकाशी स्थल में अतिरिक्त धनायन के कारण: अतिरिक्त धनायन अंतराकाशी स्थल में, और इलेक्ट्रॉन पास के अंतराकाशी स्थल में। (जैसे ZnO गर्म करने पर पीला)।
* धातु न्यूनता दोष (Metal Deficiency Defect): धनायन रिक्तियों के कारण। कुछ धनायन जालक स्थल से गायब होते हैं, और पास के धनायन उच्च ऑक्सीकरण अवस्था में होते हैं। (जैसे FeO, FeS)।
* iii. अशुद्धि दोष (Impurity Defects): जब अशुद्धि के आयन मेजबान जालक में प्रवेश करते हैं। (जैसे NaCl में SrCl₂ मिलाने पर, Na⁺ के स्थान पर Sr²⁺ आता है, जिससे धनायन रिक्तियाँ उत्पन्न होती हैं)।
10. ठोसों के विद्युत गुण (Electrical Properties of Solids)
ठोसों को उनकी चालकता के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है:
- चालक (Conductors): चालकता परास 10⁴ से 10⁷ ओम⁻¹ मीटर⁻¹। (धातुएँ)
- अचालक (Insulators): चालकता परास 10⁻²⁰ से 10⁻¹⁰ ओम⁻¹ मीटर⁻¹। (काँच, प्लास्टिक)
- अर्धचालक (Semiconductors): चालकता परास 10⁻⁶ से 10⁴ ओम⁻¹ मीटर⁻¹। (सिलिकॉन, जर्मेनियम)
बैंड सिद्धांत (Band Theory):
- चालक: संयोजकता बैंड और चालन बैंड अतिव्यापित होते हैं या उनके बीच ऊर्जा अंतराल बहुत कम होता है।
- अचालक: संयोजकता बैंड और चालन बैंड के बीच ऊर्जा अंतराल बहुत अधिक होता है।
- अर्धचालक: संयोजकता बैंड और चालन बैंड के बीच ऊर्जा अंतराल कम होता है।
अर्धचालकों के प्रकार:
- नैज अर्धचालक (Intrinsic Semiconductors): शुद्ध अर्धचालक (Si, Ge)।
- बाह्य अर्धचालक (Extrinsic Semiconductors): अशुद्धि (डोपिंग) मिलाने पर।
- n-प्रकार अर्धचालक (n-type Semiconductors): समूह 14 में समूह 15 (P, As) की अशुद्धि। अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन बहुसंख्यक वाहक होते हैं।
- p-प्रकार अर्धचालक (p-type Semiconductors): समूह 14 में समूह 13 (B, Al, Ga) की अशुद्धि। इलेक्ट्रॉन रिक्तियाँ या 'होल' बहुसंख्यक वाहक होते हैं।
- अनुप्रयोग: डायोड, ट्रांजिस्टर, सौर सेल।
11. ठोसों के चुंबकीय गुण (Magnetic Properties of Solids)
ठोसों को उनके चुंबकीय व्यवहार के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है:
- प्रतिचुंबकीय (Diamagnetic): सभी इलेक्ट्रॉन युग्मित होते हैं। बाह्य चुंबकीय क्षेत्र द्वारा दुर्बल रूप से प्रतिकर्षित होते हैं। (उदाहरण: H₂O, NaCl, C₆H₆)।
- अनुचुंबकीय (Paramagnetic): अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं। बाह्य चुंबकीय क्षेत्र द्वारा दुर्बल रूप से आकर्षित होते हैं। क्षेत्र हटाने पर चुंबकत्व समाप्त हो जाता है। (उदाहरण: O₂, Cu²⁺, Fe³⁺)।
- लौहचुंबकीय (Ferromagnetic): प्रबल रूप से आकर्षित होते हैं और स्थायी चुंबकत्व प्रदर्शित करते हैं। डोमेन सिद्धांत। क्यूरी ताप के ऊपर अनुचुंबकीय हो जाते हैं। (उदाहरण: Fe, Co, Ni, Gd, CrO₂)।
- प्रतिलौहचुंबकीय (Antiferromagnetic): डोमेन संरेखण विपरीत दिशाओं में समान संख्या में होता है, जिससे नेट चुंबकीय आघूर्ण शून्य होता है। (उदाहरण: MnO, Mn₂O₃)।
- लघु लौहचुंबकीय (Ferrimagnetic): डोमेन संरेखण समानांतर और प्रति-समानांतर दिशाओं में असमान संख्या में होता है, जिससे दुर्बल चुंबकीय आघूर्ण होता है। (उदाहरण: Fe₃O₄ (मैग्नेटाइट), फेराइट्स)।
बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions - MCQs)
-
निम्नलिखित में से कौन-सा अक्रिस्टलीय ठोस का उदाहरण है?
a) सोडियम क्लोराइड
b) क्वार्ट्ज
c) काँच
d) बर्फ -
एक फलक-केंद्रित घनीय (FCC) एकक कोष्ठिका में प्रति एकक कोष्ठिका परमाणुओं की संख्या कितनी होती है?
a) 1
b) 2
c) 4
d) 6 -
शॉट्की दोष में, क्रिस्टल का घनत्व:
a) बढ़ता है
b) घटता है
c) अपरिवर्तित रहता है
d) पहले बढ़ता है फिर घटता है -
धातुओं में विद्युत चालकता का कारण क्या है?
a) मुक्त आयन
b) मुक्त इलेक्ट्रॉन
c) इलेक्ट्रॉन रिक्तियाँ (होल्स)
d) धनायन -
निम्नलिखित में से कौन-सा ठोस विद्युत का सुचालक, आघातवर्धनीय और तन्य होता है?
a) आयनिक ठोस
b) आण्विक ठोस
c) धात्विक ठोस
d) सहसंयोजक ठोस -
एक क्रिस्टल में चतुष्फलकीय रिक्तियों की संख्या, अष्टफलकीय रिक्तियों की संख्या की तुलना में कितनी होती है?
a) आधी
b) दोगुनी
c) समान
d) तिगुनी -
फ्रेंकेल दोष आमतौर पर उन आयनिक ठोसों में पाया जाता है जिनमें:
a) धनायन और ऋणायन का आकार समान होता है।
b) धनायन और ऋणायन के आकार में बड़ा अंतर होता है।
c) उच्च समन्वय संख्या होती है।
d) कम गलनांक होता है। -
n-प्रकार के अर्धचालक बनाने के लिए सिलिकॉन (समूह 14) में किस समूह के तत्व की अशुद्धि मिलाई जाती है?
a) समूह 13
b) समूह 15
c) समूह 1
d) समूह 17 -
लौहचुंबकीय पदार्थ क्यूरी ताप के ऊपर किस प्रकार का व्यवहार प्रदर्शित करते हैं?
a) प्रतिचुंबकीय
b) अनुचुंबकीय
c) प्रतिलौहचुंबकीय
d) लघु लौहचुंबकीय -
घनीय निबिड़ संकुलन (CCP) संरचना में संकुलन दक्षता कितनी होती है?
a) 52.4%
b) 68%
c) 74%
d) 80%
उत्तर कुंजी (Answer Key):
- c) काँच
- c) 4
- b) घटता है
- b) मुक्त इलेक्ट्रॉन
- c) धात्विक ठोस
- b) दोगुनी
- b) धनायन और ऋणायन के आकार में बड़ा अंतर होता है।
- b) समूह 15
- b) अनुचुंबकीय
- c) 74%
मुझे आशा है कि ये विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपको 'ठोस अवस्था' अध्याय की गहन समझ प्रदान करेंगे और आपकी सरकारी परीक्षाओं की तैयारी में सहायक होंगे। शुभकामनाएँ!