Class 12 Chemistry Notes Chapter 1 (ठोस अवस्था) – Rasayan Vigyan Bhag-I Book

Rasayan Vigyan Bhag-I
प्रिय विद्यार्थियों,

आज हम रसायन विज्ञान के प्रथम अध्याय 'ठोस अवस्था' का विस्तृत अध्ययन करेंगे, जो आपकी आगामी सरकारी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस अध्याय में हम ठोसों के विभिन्न प्रकार, उनकी संरचना, क्रिस्टल जालक, दोष और उनके गुणों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।


अध्याय 1: ठोस अवस्था (The Solid State)

ठोस पदार्थ, द्रव्य की वह अवस्था है जिसमें कण (परमाणु, अणु या आयन) एक निश्चित स्थान पर स्थिर होते हैं और केवल अपनी माध्य स्थिति के चारों ओर दोलन कर सकते हैं।

1. ठोसों के सामान्य अभिलक्षण (General Characteristics of Solids):

  • निश्चित द्रव्यमान, आयतन और आकार: ठोसों का द्रव्यमान, आयतन और आकार निश्चित होता है।
  • अन्तर-आण्विक दूरियाँ कम: इनके अवयवी कणों के बीच की दूरियाँ बहुत कम होती हैं।
  • अन्तर-आण्विक बल प्रबल: अवयवी कणों के बीच प्रबल अन्तर-आण्विक बल कार्य करते हैं।
  • अवयवी कणों की स्थिति निश्चित: कणों की स्थिति निश्चित होती है और वे केवल अपनी माध्य स्थिति के चारों ओर दोलन करते हैं।
  • असंपीड्य और कठोर: ठोस अत्यधिक असंपीड्य और कठोर होते हैं।

2. ठोसों का वर्गीकरण (Classification of Solids):

ठोसों को मुख्य रूप से दो प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है:

A. क्रिस्टलीय ठोस (Crystalline Solids):
वे ठोस जिनमें अवयवी कणों (परमाणु, अणु या आयन) की दीर्घ परासी नियमित व्यवस्था होती है।

  • निश्चित ज्यामितीय आकार: इनका एक निश्चित और अभिलाक्षणिक ज्यामितीय आकार होता है।
  • तीक्ष्ण गलनांक: ये एक निश्चित और तीक्ष्ण ताप पर पिघलते हैं।
  • विषमदैशिक प्रकृति (Anisotropic): इनके कुछ भौतिक गुण (जैसे विद्युत चालकता, अपवर्तनांक) विभिन्न दिशाओं में भिन्न होते हैं।
  • वास्तविक ठोस: इन्हें वास्तविक ठोस माना जाता है।
  • निश्चित गलन ऊष्मा: इनकी गलन ऊष्मा निश्चित होती है।
  • उदाहरण: NaCl, क्वार्ट्ज, चीनी, हीरा।

B. अक्रिस्टलीय ठोस (Amorphous Solids):
वे ठोस जिनमें अवयवी कणों की लघु परासी अनियमित व्यवस्था होती है।

  • अनियमित आकार: इनका कोई निश्चित ज्यामितीय आकार नहीं होता है।
  • गलनांक का परास: ये ताप के एक परास पर धीरे-धीरे नरम होते हैं और अंततः पिघलते हैं।
  • समदैशिक प्रकृति (Isotropic): इनके भौतिक गुण सभी दिशाओं में समान होते हैं।
  • आभासी ठोस या अतिशीतित द्रव: इन्हें आभासी ठोस या अतिशीतित द्रव भी कहते हैं।
  • अनिश्चित गलन ऊष्मा: इनकी गलन ऊष्मा निश्चित नहीं होती है।
  • उदाहरण: काँच, रबर, प्लास्टिक, टार।

क्रिस्टलीय और अक्रिस्टलीय ठोसों में अंतर:

गुणधर्म क्रिस्टलीय ठोस अक्रिस्टलीय ठोस
आकार निश्चित ज्यामितीय आकार अनियमित आकार
व्यवस्था दीर्घ परासी व्यवस्था लघु परासी व्यवस्था
गलनांक तीक्ष्ण और निश्चित ताप के एक परास पर धीरे-धीरे नरम होते हैं
विदलन गुण तीक्ष्ण धार वाले औजार से काटने पर चिकनी सतहें अनियमित सतहों में कटते हैं
प्रकृति विषमदैशिक समदैशिक
वास्तविकता वास्तविक ठोस आभासी ठोस या अतिशीतित द्रव
गलन ऊष्मा निश्चित अनिश्चित

3. क्रिस्टलीय ठोसों का वर्गीकरण (Classification of Crystalline Solids):

क्रिस्टलीय ठोसों को उनके अवयवी कणों की प्रकृति और उनके बीच कार्यरत अन्तर-आण्विक बलों के आधार पर चार मुख्य प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है:

A. आण्विक ठोस (Molecular Solids):

  • अवयवी कण: अणु।
  • आबंध बल: दुर्बल वान्डर वाल्स बल (लंदन बल, द्विध्रुव-द्विध्रुव बल) या हाइड्रोजन आबंध।
  • विशेषताएँ: नरम, विद्युत के अचालक, निम्न गलनांक।
  • प्रकार:
    • अध्रुवीय आण्विक ठोस: (उदा: H₂, Cl₂, I₂, CH₄, CO₂)। दुर्बल लंदन बल।
    • ध्रुवीय आण्विक ठोस: (उदा: HCl, SO₂)। द्विध्रुव-द्विध्रुव बल।
    • हाइड्रोजन आबंधित आण्विक ठोस: (उदा: H₂O (बर्फ))। हाइड्रोजन आबंध।

B. आयनिक ठोस (Ionic Solids):

  • अवयवी कण: आयन (धनायन और ऋणायन)।
  • आबंध बल: प्रबल स्थिरवैद्युत बल (कूलॉम बल)।
  • विशेषताएँ: कठोर, भंगुर, उच्च गलनांक। ठोस अवस्था में विद्युत के अचालक, परंतु गलित अवस्था या जलीय विलयन में चालक।
  • उदाहरण: NaCl, MgO, ZnS, CaF₂।

C. धात्विक ठोस (Metallic Solids):

  • अवयवी कण: धनायनों का व्यवस्थित समूह (कर्नेल) और विस्थानीकृत इलेक्ट्रॉनों का समुद्र।
  • आबंध बल: धात्विक आबंध।
  • विशेषताएँ: कठोर (पारे को छोड़कर), आघातवर्धनीय, तन्य, विद्युत और ऊष्मा के सुचालक (ठोस और गलित दोनों अवस्थाओं में), चमकीले।
  • उदाहरण: Fe, Cu, Ag, Mg।

D. सहसंयोजक या नेटवर्क ठोस (Covalent or Network Solids):

  • अवयवी कण: परमाणु।
  • आबंध बल: प्रबल सहसंयोजक आबंध जो पूरे क्रिस्टल में एक नेटवर्क बनाते हैं।
  • विशेषताएँ: अत्यधिक कठोर, भंगुर, अचालक (ग्रेफाइट को छोड़कर), अत्यधिक उच्च गलनांक।
  • उदाहरण: हीरा, सिलिकॉन कार्बाइड (SiC), क्वार्ट्ज (SiO₂)।
    • अपवाद: ग्रेफाइट एक सहसंयोजक ठोस है जो विद्युत का सुचालक होता है क्योंकि इसकी परतदार संरचना में मुक्त इलेक्ट्रॉन होते हैं।

4. क्रिस्टल जालक और एकक कोष्ठिका (Crystal Lattice and Unit Cell):

  • क्रिस्टल जालक (Crystal Lattice): त्रिविम में अवयवी कणों (परमाणु, अणु या आयन) की नियमित और पुनरावृत्त व्यवस्था को क्रिस्टल जालक कहते हैं।
  • एकक कोष्ठिका (Unit Cell): क्रिस्टल जालक की सबसे छोटी पुनरावृत्त इकाई जो पूरे क्रिस्टल को बनाने के लिए त्रिविम में बार-बार दोहराई जाती है, उसे एकक कोष्ठिका कहते हैं।
  • एकक कोष्ठिका के पैरामीटर: एक एकक कोष्ठिका को छह पैरामीटरों द्वारा वर्णित किया जाता है:
    • अक्षीय दूरियाँ/किनारे की लम्बाइयाँ: a, b, c (तीन किनारों की लम्बाइयाँ)।
    • अक्षीय कोण: α (b और c के बीच), β (a और c के बीच), γ (a और b के बीच)।

5. एकक कोष्ठिकाओं के प्रकार (Types of Unit Cells):

मुख्यतः चार प्रकार की एकक कोष्ठिकाएँ होती हैं:

A. आद्य या सरल एकक कोष्ठिका (Primitive or Simple Cubic Unit Cell, SC):

  • अवयवी कण केवल कोनों पर उपस्थित होते हैं।
  • प्रति एकक कोष्ठिका कणों की संख्या (Z) = 8 (कोने) × (1/8) = 1।

B. अंतःकेंद्रित एकक कोष्ठिका (Body-Centred Cubic, BCC):

  • अवयवी कण कोनों पर और एक कण एकक कोष्ठिका के केंद्र में उपस्थित होता है।
  • Z = 8 (कोने) × (1/8) + 1 (केंद्र) = 1 + 1 = 2।

C. फलक-केंद्रित एकक कोष्ठिका (Face-Centred Cubic, FCC):

  • अवयवी कण कोनों पर और प्रत्येक फलक के केंद्र में एक कण उपस्थित होता है।
  • Z = 8 (कोने) × (1/8) + 6 (फलक) × (1/2) = 1 + 3 = 4।

D. अंत्य-केंद्रित एकक कोष्ठिका (End-Centred Cubic):

  • अवयवी कण कोनों पर और किन्हीं दो विपरीत फलकों के केंद्र में एक कण उपस्थित होता है।
  • Z = 8 (कोने) × (1/8) + 2 (विपरीत फलक) × (1/2) = 1 + 1 = 2।

6. क्रिस्टल तंत्र (Crystal Systems):

एकक कोष्ठिका के अक्षीय दूरियों और कोणों के आधार पर 7 मूल क्रिस्टल तंत्र होते हैं। इन 7 क्रिस्टल तंत्रों से कुल 14 ब्रेवे जालक प्राप्त होते हैं।
(याद रखने का सूत्र: Cute Teacher Often Makes Her Really Tired = Cubic, Tetragonal, Orthorhombic, Monoclinic, Hexagonal, Rhombohedral, Triclinic)

क्रिस्टल तंत्र अक्षीय दूरियाँ अक्षीय कोण उदाहरण
घनीय (Cubic) a=b=c α=β=γ=90° NaCl, ZnS, Cu
चतुष्कोणीय a=b≠c α=β=γ=90° TiO₂, SnO₂
विषमलम्बाक्ष a≠b≠c α=β=γ=90° BaSO₄, KNO₃
षट्कोणीय a=b≠c α=β=90°, γ=120° ग्रेफाइट, ZnO, CdS
त्रिसमनताक्ष a=b=c α=β=γ≠90° CaCO₃, HgS
एकनताक्ष a≠b≠c α=γ=90°, β≠90° Na₂SO₄·10H₂O, मोनोक्लिनिक सल्फर
त्रिनताक्ष a≠b≠c α≠β≠γ≠90° K₂Cr₂O₇, H₃BO₃, CuSO₄·5H₂O

7. संकुलन दक्षता (Packing Efficiency):

क्रिस्टल जालक में अवयवी कणों द्वारा घेरा गया कुल आयतन संकुलन दक्षता कहलाता है।

  • सरल घनीय (SC): 52.4%
  • अंतःकेंद्रित घनीय (BCC): 68%
  • फलक-केंद्रित घनीय (FCC) या hcp (षट्कोणीय निबिड़ संकुलन): 74%

रिक्तियाँ (Voids):
ठोसों में अवयवी कणों के बीच खाली स्थान को रिक्ति कहते हैं।

  • चतुष्फलकीय रिक्ति (Tetrahedral void): समन्वय संख्या 4।
  • अष्टफलकीय रिक्ति (Octahedral void): समन्वय संख्या 6।
  • FCC/HCP संरचनाओं में, यदि कणों की संख्या N है, तो अष्टफलकीय रिक्तियों की संख्या N और चतुष्फलकीय रिक्तियों की संख्या 2N होती है।

8. एकक कोष्ठिका के घनत्व की गणना (Calculation of Density of Unit Cell):

एकक कोष्ठिका का घनत्व (ρ) = (Z × M) / (a³ × Nₐ)
जहाँ:

  • Z = प्रति एकक कोष्ठिका कणों की संख्या
  • M = पदार्थ का मोलर द्रव्यमान
  • a = एकक कोष्ठिका के किनारे की लंबाई
  • Nₐ = आवोगाद्रो संख्या (6.022 × 10²³ mol⁻¹)

9. क्रिस्टलों में अपूर्णताएँ या दोष (Imperfections or Defects in Crystals):

क्रिस्टल जालक में अवयवी कणों की आदर्श, नियमित व्यवस्था से कोई भी विचलन क्रिस्टल दोष कहलाता है।

A. बिंदु दोष (Point Defects):
ये जालक बिंदुओं के चारों ओर एक परमाणु या आयन की अनियमितताओं के कारण होते हैं।

  • स्टॉइकियोमीट्री दोष (Stoichiometric Defects): यौगिक की स्टॉइकियोमीट्री अपरिवर्तित रहती है।

    • रिक्ति दोष (Vacancy Defect): जब कुछ जालक स्थल खाली होते हैं। घनत्व घटता है।
    • अंतराकाशी दोष (Interstitial Defect): जब कुछ अवयवी कण अंतराकाशी स्थलों पर आ जाते हैं। घनत्व बढ़ता है।
    • शॉट्की दोष (Schottky Defect): आयनिक ठोसों में समान संख्या में धनायन और ऋणायन अपने जालक स्थलों से गायब हो जाते हैं। घनत्व घटता है। (उदा: NaCl, KCl, CsCl, AgBr)।
    • फ्रेन्केल दोष (Frenkel Defect): आयनिक ठोसों में छोटा आयन (आमतौर पर धनायन) अपने जालक स्थल से विस्थापित होकर अंतराकाशी स्थल में चला जाता है। घनत्व अपरिवर्तित रहता है। (उदा: AgCl, AgBr, AgI, ZnS)। (AgBr शॉट्की और फ्रेन्केल दोनों दोष दर्शाता है)।
  • नॉन-स्टॉइकियोमीट्री दोष (Non-Stoichiometric Defects): यौगिक की स्टॉइकियोमीट्री परिवर्तित होती है।

    • धातु आधिक्य दोष (Metal Excess Defect):
      • ऋणायन रिक्तियों के कारण: F-केन्द्र (F-centres) बनते हैं, जो रंग के लिए जिम्मेदार होते हैं। (उदा: NaCl पीला, KCl बैंगनी)।
      • अतिरिक्त धनायनों के अंतराकाशी स्थलों पर उपस्थित होने के कारण: (उदा: ZnO गर्म करने पर पीला हो जाता है)।
    • धातु न्यूनता दोष (Metal Deficiency Defect): धनायनों की कमी के कारण। (उदा: FeO, FeS)।
  • अशुद्धि दोष (Impurity Defects): जब किसी ठोस में अशुद्धि के आयन डाले जाते हैं। (उदा: NaCl में SrCl₂ की अशुद्धि से धनायन रिक्तियाँ उत्पन्न होती हैं)।

10. ठोसों के विद्युत गुण (Electrical Properties of Solids):

ठोसों को उनकी विद्युत चालकता के आधार पर तीन श्रेणियों में बांटा जाता है:

  • चालक (Conductors): 10⁴ से 10⁷ ओम⁻¹ मीटर⁻¹। (धातुएँ)
  • अर्धचालक (Semiconductors): 10⁻⁶ से 10⁴ ओम⁻¹ मीटर⁻¹। (Si, Ge)
  • विद्युतरोधी (Insulators): 10⁻²⁰ से 10⁻¹⁰ ओम⁻¹ मीटर⁻¹। (काँच, प्लास्टिक)

बैंड सिद्धांत (Band Theory):

  • संयोजकता बैंड (Valence Band): इलेक्ट्रॉनों से भरा हुआ बैंड।
  • चालकता बैंड (Conduction Band): खाली या आंशिक रूप से भरा हुआ बैंड।
  • ऊर्जा अंतराल (Energy Gap): संयोजकता बैंड और चालकता बैंड के बीच का अंतराल।
    • चालकों में: संयोजकता बैंड और चालकता बैंड अतिव्यापित होते हैं या उनके बीच बहुत कम ऊर्जा अंतराल होता है।
    • विद्युतरोधियों में: ऊर्जा अंतराल बहुत बड़ा होता है।
    • अर्धचालकों में: ऊर्जा अंतराल छोटा होता है।

अर्धचालकों के प्रकार (Types of Semiconductors):

  • नैज अर्धचालक (Intrinsic Semiconductors): शुद्ध अर्धचालक (Si, Ge)।
  • बाह्य अर्धचालक (Extrinsic Semiconductors): डोपिंग (अशुद्धि मिलाने) द्वारा बनाए जाते हैं।
    • n-प्रकार अर्धचालक (n-type Semiconductors): समूह 14 के तत्व में समूह 15 (P, As) की अशुद्धि मिलाने पर। अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन चालकता के लिए जिम्मेदार होते हैं (इलेक्ट्रॉन बहुसंख्यक वाहक)।
    • p-प्रकार अर्धचालक (p-type Semiconductors): समूह 14 के तत्व में समूह 13 (B, Al) की अशुद्धि मिलाने पर। इलेक्ट्रॉन की कमी (होल) चालकता के लिए जिम्मेदार होती है (होल बहुसंख्यक वाहक)।
  • अनुप्रयोग: डायोड, ट्रांजिस्टर, सौर सेल।

11. ठोसों के चुंबकीय गुण (Magnetic Properties of Solids):

पदार्थों को उनके चुंबकीय व्यवहार के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है:

  • प्रतिचुंबकीय (Diamagnetic): अयुग्मित इलेक्ट्रॉन नहीं होते। बाह्य चुंबकीय क्षेत्र द्वारा दुर्बल रूप से प्रतिकर्षित होते हैं। (उदा: H₂O, NaCl, C₆H₆)।
  • अनुचुंबकीय (Paramagnetic): अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं। बाह्य चुंबकीय क्षेत्र द्वारा दुर्बल रूप से आकर्षित होते हैं। चुंबकीय क्षेत्र हटाने पर चुंबकत्व समाप्त हो जाता है। (उदा: O₂, Cu²⁺, Fe³⁺)।
  • लौहचुंबकीय (Ferromagnetic): प्रबल रूप से आकर्षित होते हैं और स्थायी चुंबकत्व प्रदर्शित करते हैं। डोमेन सिद्धांत द्वारा समझाया जाता है। (उदा: Fe, Co, Ni, Gd, CrO₂)। क्यूरी ताप के ऊपर ये अनुचुंबकीय हो जाते हैं।
  • प्रतिलौहचुंबकीय (Antiferromagnetic): डोमेन एक-दूसरे के विपरीत दिशाओं में संरेखित होते हैं, जिससे शुद्ध चुंबकीय आघूर्ण शून्य हो जाता है। (उदा: MnO)।
  • फेरीचुंबकीय (Ferrimagnetic): डोमेन असमान संख्या में समानांतर और प्रति-समानांतर संरेखित होते हैं, जिससे शुद्ध चुंबकीय आघूर्ण शून्य नहीं होता है। (उदा: Fe₃O₄, MgFe₂O₄, ZnFe₂O₄)।

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

  1. निम्नलिखित में से कौन-सा अक्रिस्टलीय ठोस का उदाहरण है?
    (a) NaCl
    (b) क्वार्ट्ज (SiO₂)
    (c) काँच
    (d) हीरा

  2. एक अंतःकेंद्रित घनीय (BCC) एकक कोष्ठिका में प्रति एकक कोष्ठिका परमाणुओं की संख्या कितनी होती है?
    (a) 1
    (b) 2
    (c) 3
    (d) 4

  3. शॉट्की दोष के कारण आयनिक ठोसों का घनत्व:
    (a) बढ़ता है
    (b) घटता है
    (c) अपरिवर्तित रहता है
    (d) कभी बढ़ता है, कभी घटता है

  4. F-केन्द्रों की उपस्थिति के कारण NaCl क्रिस्टल का रंग कैसा होता है?
    (a) नीला
    (b) पीला
    (c) हरा
    (d) बैंगनी

  5. फलक-केंद्रित घनीय (FCC) संरचना में संकुलन दक्षता कितनी होती है?
    (a) 52.4%
    (b) 68%
    (c) 74%
    (d) 78%

  6. निम्नलिखित में से कौन-सा ठोस विद्युत का सुचालक है लेकिन गलित अवस्था में नहीं?
    (a) NaCl
    (b) ग्रेफाइट
    (c) हीरा
    (d) धात्विक ठोस

  7. यदि एक क्रिस्टल में N परमाणु हैं, तो उसमें अष्टफलकीय रिक्तियों की संख्या कितनी होगी?
    (a) N
    (b) 2N
    (c) N/2
    (d) 4N

  8. सिलिकॉन में आर्सेनिक (समूह 15) की अशुद्धि मिलाने पर किस प्रकार का अर्धचालक प्राप्त होता है?
    (a) p-प्रकार
    (b) n-प्रकार
    (c) नैज अर्धचालक
    (d) विद्युतरोधी

  9. निम्नलिखित में से कौन-सा पदार्थ लौहचुंबकीय गुण प्रदर्शित करता है?
    (a) O₂
    (b) NaCl
    (c) Fe
    (d) MnO

  10. एक यौगिक घनीय संकुलन संरचना (ccp) बनाता है। यदि इसके एकक कोष्ठिका के किनारे की लंबाई 'a' है और मोलर द्रव्यमान 'M' है, तो इसका घनत्व क्या होगा? (Nₐ = आवोगाद्रो संख्या)
    (a) (M) / (a³ × Nₐ)
    (b) (2M) / (a³ × Nₐ)
    (c) (4M) / (a³ × Nₐ)
    (d) (8M) / (a³ × Nₐ)


उत्तर कुंजी:

  1. (c)
  2. (b)
  3. (b)
  4. (b)
  5. (c)
  6. (a)
  7. (a)
  8. (b)
  9. (c)
  10. (c) (ccp = FCC, जिसमें Z=4 होता है)

मुझे आशा है कि ये विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपको 'ठोस अवस्था' अध्याय की तैयारी में सहायक होंगे। शुभकामनाएँ!

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